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                <title>Child Health - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Child Health RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को 0 से 5 वर्ष के बालक-बालिकाओं को पिलाई गई 'दो बूंद' पोलियो ड्रॉप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>       पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182347/on-june-28-two-drops-of-polio-drop-were-administered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/10009258501.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-   </strong>    पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत उपायुक्त पाकुड़ मेघा भारद्वाज के निर्देशन में प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 28 जून को सभी पोलियो केंद्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को पोलियो की 'दो बूंद' दवा पिलाई गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो ड्रॉप से कोई भी बालक-बालिका वंचित न रहे, इसके लिए 29 व 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 139 पोलियो बूथ तथा पाकुड़िया अस्थायी बस स्टैंड, तालवा सिदो-कान्हू चौक और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट में कुल 3 ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी सेविकाओं और मेडिकल स्टाफ सहित कुल 329 कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। कार्यक्रम के सघन निरीक्षण के लिए 32 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जबकि 13 सब-डिपो भी बनाए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रभात दास ने बताया कि पाकुड़िया प्रखण्ड में कुल 18,065 बालक-बालिकाओं को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:11:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाल संरक्षण की आवश्यकता और वैश्विक प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180366/child-protection-needs-and-global-efforts"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/image.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं तो समाज का विकास भी प्रभावित होता है। इसी कारण बाल सुरक्षा केवल सामाजिक विषय नहीं बल्कि मानवीय और नैतिक दायित्व भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का इतिहास 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों से जुड़ा हुआ है। 1925 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में बच्चों के कल्याण पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर विशेष चर्चा हुई। बाद में 1949 में मास्को में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बच्चों के संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष दिवस मनाया जाना चाहिए। इसके बाद 1 जून 1950 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया गया। उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण लाखों बच्चे अनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विस्थापित और निर्धन हो चुके थे। युद्ध ने बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था और उनकी सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यही कारण था कि इस दिवस को मानवीय संवेदना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माना गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय के साथ इस दिवस का महत्व लगातार बढ़ता गया। संयुक्त राष्ट्र ने भी बच्चों के अधिकारों को वैश्विक स्तर पर महत्व दिया। 1954 में विश्व बाल दिवस की स्थापना की गई और 20 नवंबर 1959 को बाल अधिकारों की घोषणा स्वीकार की गई। इसके बाद 1989 में बाल अधिकारों पर सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया। इस सम्मेलन में बच्चों के शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिव्यक्ति और विकास के अधिकारों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई। आज विश्व के अधिकांश देश बाल अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी अनेक क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शिक्षा है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। एक शिक्षित बच्चा अपने अधिकारों को समझता है और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम बनता है। फिर भी आज विश्व में करोड़ों बच्चे विद्यालय से दूर हैं। गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक असमानता और बाल श्रम इसके प्रमुख कारण हैं। अनेक बच्चे आर्थिक मजबूरी के कारण छोटी आयु में काम करने लगते हैं जिससे उनका बचपन छिन जाता है। बाल श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शोषण के चक्र में फँसा देता है। इसलिए सरकारों और सामाजिक संगठनों का यह दायित्व है कि वे प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुँचाएँ और बाल श्रम को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाएँ।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल विवाह भी बाल अधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती है। अनेक समाजों में आज भी कम आयु में बच्चों विशेषकर बालिकाओं का विवाह कर दिया जाता है। इससे उनकी शिक्षा बाधित होती है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम आयु में मातृत्व अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। साथ ही बाल विवाह लड़कियों की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को भी सीमित कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए कानूनी प्रतिबंधों के साथ सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। जब तक समाज अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाएगा तब तक केवल कानून पर्याप्त सिद्ध नहीं होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में बच्चों के सामने नई चुनौतियाँ भी उभर रही हैं। तकनीकी विकास ने जहाँ ज्ञान और संचार के नए अवसर दिए हैं वहीं अनेक जोखिम भी उत्पन्न किए हैं। इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों के माध्यम से बच्चों का आभासी शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर धमकी और अनुपयुक्त सामग्री तक पहुँच बढ़ी है। अनेक बच्चे मानसिक तनाव और अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी भावनाओं को समझना और सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना आज की आवश्यकता है। केवल तकनीकी नियंत्रण पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाने की भी आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। प्रतियोगिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक दबाव और अकेलापन बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि किसी बच्चे को प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग और समझ नहीं मिलती तो वह अवसाद और भय का शिकार हो सकता है। स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बच्चों को ऐसा वातावरण चाहिए जहाँ वे अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। परिवार और विद्यालय को बच्चों के लिए केवल अनुशासन का केंद्र नहीं बल्कि विश्वास और सुरक्षा का स्थान बनना चाहिए। एक संवेदनशील समाज ही स्वस्थ और आत्मविश्वासी पीढ़ी का निर्माण कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक स्तर पर युद्ध और प्राकृतिक आपदाएँ बच्चों के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में लाखों बच्चे विद्यालयों से वंचित हो जाते हैं और अनेक बच्चों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। कुछ क्षेत्रों में बच्चों को सैनिक गतिविधियों में भी शामिल किया जाता है जो मानवता के लिए अत्यंत दुखद स्थिति है। प्राकृतिक आपदाएँ और महामारियाँ भी बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। ऐसे समय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता अत्यंत आवश्यक हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ राहत कार्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों की सहायता करने का प्रयास करती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज में बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक बच्चों को सही दिशा दे सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिभावक उन्हें प्रेम और सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं तथा सामाजिक संगठन जागरूकता फैलाकर सहायता पहुँचा सकते हैं। विद्यालयों में बाल अधिकारों पर चर्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निबंध प्रतियोगिताएँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं ताकि बच्चे अपने अधिकारों को समझ सकें। मीडिया भी बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस दिशा में सक्रिय हो जाए तो बच्चों के जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न माना जाए बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जाए। प्रत्येक बच्चे को भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे को हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोषण और उपेक्षा का सामना न करना पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सुनिश्चित करना पूरे समाज का दायित्व है। बच्चों के सपनों की रक्षा करना ही भविष्य की रक्षा करना है। यदि हम आज बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देंगे तो आने वाला समाज अधिक शांतिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण और मानवीय होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक दिन का विषय नहीं बल्कि निरंतर चलने वाला प्रयास है। यह दिवस हमें आत्मचिंतन करने और अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक बच्चे में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं और उन संभावनाओं को विकसित करने के लिए प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और सुरक्षा आवश्यक है। जब समाज बच्चों के अधिकारों का सम्मान करना सीख जाएगा तब वास्तविक प्रगति संभव होगी। यही इस दिवस की सबसे बड़ी सार्थकता है और यही वह संदेश है जिसे पूरी मानवता को अपनाना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:21:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएचसी का 30 प्रतिशत निरीक्षण रात्रि के समय किए जाने के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश  अमित कुमार घोष की अध्यक्षता एवं मण्डलायुक्त  सौम्या अग्रवाल की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग की मण्डलीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा करते हुए  मण्डलायुक्त के द्वारा वर्ष 2023-25 के मध्य हुई सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु एवं गम्भीर रूप से घायलों का विवरण दिया गया । सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कैसे कमी लायी जा सकती है तथा एम्बुलेंस की लोकेशन मैपिंग कराकर एम्बुलेंस की रिस्पांश टाइम किस प्रकार घटाया जा सकता है एवं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177398/instructions-given-to-conduct-30-percent-inspection-of-phc-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260424-wa0431.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश  अमित कुमार घोष की अध्यक्षता एवं मण्डलायुक्त  सौम्या अग्रवाल की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग की मण्डलीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा करते हुए  मण्डलायुक्त के द्वारा वर्ष 2023-25 के मध्य हुई सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु एवं गम्भीर रूप से घायलों का विवरण दिया गया । सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कैसे कमी लायी जा सकती है तथा एम्बुलेंस की लोकेशन मैपिंग कराकर एम्बुलेंस की रिस्पांश टाइम किस प्रकार घटाया जा सकता है एवं गोल्डेन ऑवर में घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके, के बारे में बनाये गये प्लान के बारे में विस्तार से बताया, ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव के द्वारा मण्डल के समस्त जनपदों में स्थित स्वास्थ्य इकाइयों का अन्य जनपदों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई विजिट के उपरांत  स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता, चिकित्सालयों में मूलभूत अवसरंचना, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, क्रिटिकल इक्यूपमेंट की उपलब्धता, स्टाफ की उपस्थिति, बायोमेडिकल डिस्पोजल, पेयजल, वेटिंग एरिया, टॉयलेट, इंटरनेट, साफ-सफाई, हाई रिस्क प्रेगनेंसी, टीकाकरण, मातृ एवं बाल मृत्यु दर, एफआरयू, विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों सहित अन्य बिंदुओं पर विस्तार से निर्देशित किया कि सभी जनपदों में संचालित सभी स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये तथा आमजन को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराया जाये।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मण्डल के सभी चारों मुख्य चिकित्साधिकारियों को चिकित्सालयों में मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किए जाने में लापरवाही बरतने आवश्यक, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाने में दिलचस्पी न लिए जाने पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश मण्डलायुक्त को दिए है। उन्होंने मेडिकल कालेज प्रतापगढ़ के प्राचार्य के बिना पूर्व सूचना के बैठक से अनुपस्थित रहने पर उनका स्पष्टीकरण प्राप्त करने   सुविधाओं की वृद्धि में अपेक्षित प्रगति न पाये जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। मुख्य चिकित्साधिकारियों को  बिना इंडेंट जनरेशन के कोई भी औषधि आपूर्ति होगी, तो सम्बंधित मुख्य चिकित्साधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक के विरूद्ध कार्यवाही की चेतावनी दी।। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में अपर मुख्य सचिव ने सभी चिकित्सा अधीक्षकों से चादरों के धुलाई की व्यवस्था  की जानकारी लेते हुए सभी चिकित्सालयों में चादरों की धुलाई में उच्च क्वॉलिटी सुनिश्चित करने के साथ ही बेड की संख्या के अनुरूप चादरों की उपलब्धता सुनिश्चित रखने के लिए कहा है। धुलाई केन्द्रों में चादरों की हो रही धुलाई कार्य का नियमित रूप से निरीक्षण करने के लिए भी कहा है। उन्होंने निष्प्रयोज्य योग्य एम्बुलेंस को निष्प्रयोज्य घोषित करने की कार्यवाही कराते हुए सभी की 03 माह के अंदर नीलामी कराये जाने तथा सभी चिकित्सालयों में किसी भी प्रकार का स्कै्रप डम्प नहीं पाया जाये, का निर्देश दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एएनसी रजिस्टेªशन के सापेक्ष शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए कहा है। उन्होंने हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की गहनता से मानीटरिंग करने के निर्देश दिए ह है तथा प्रसव के मामलों में 48 घण्टे तक चिकित्सालय में अवश्य भर्ती रखने के लिए कहा है। उन्होंने मातृ मृत्यु व शिशु मृत्यु की शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने  सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फूलपुर में बेड एक्यूपेंसी, मात्र 19.40 प्रतिशत पाये जाने तथा एसएनसीयू पीडब्लूडी कौशाम्बी में संस्थागत प्रसव में औसत स्टे ड्यूरेशन 2.3 ऑवर ही होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और सुधार लाए जाने के निर्देश दिए है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित कराये जाने।  जनपद फतेहपुर व कौशाम्बी की सीएचसी में थ्राम्बोलिसिस की संख्या शून्य होने तथा मेडिकल कालेज फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रयागराज में अत्यधिक कम संख्या में थ्राम्बोलिसिस होने एवं हार्ट अटैक के आंकड़ों की कम संख्या में रिपोर्टिंग होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव ने अपर निदेशक से 15 दिन में सभी मुख्य चिकित्साधिकारी के द्वारा सभी सीएचसी, पीएचसी का औचक निरीक्षण करने तथा किए जाने वाले निरीक्षणों में कम से कम 30 प्रतिशत निरीक्षण रात्रि के समय किए जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार लाये जाने हेतु अपना शत-प्रतिशत प्रयास करने के लिए कहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु निरंतर मानीटरिंग की जाये तथा जनता की शिकायतों का तुरंत निस्तारण किया जाये। इस अवसर पर महानिदेशक परिवार कल्याण, अपर निदेशक श्री डॉ0 राकेश शर्मा, मण्डल के सभी मुख्य चिकित्साधिकारी, सभी मेडिकल कालेजों के प्राचार्य, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सहित अन्य सम्बंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
  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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:40:41 +0530</pubDate>
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