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                <title>Harbhajan Singh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Harbhajan Singh RSS Feed</description>
                
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                <title>बस्ती में स्थापित हुआ उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा खंडा साहिब, सिख समाज में उत्सव जैसा माहौल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जनपद में शनिवार का दिन सिख समुदाय के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब गुरु गोविंद सिंह स्मृति चौक पर उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े खंडा साहिब की विधिवत स्थापना की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">पंजाब से विशेष रूप से तैयार कर लाया गया विशाल खंडा साहिब शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे बस्ती की सीमा में पहुंचा, जहां सिख समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं तथा जयकारों के साथ उसका भव्य स्वागत किया। इसके</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181120/uttar-pradeshs-largest-khanda-sahib-established-in-basti-festive-atmosphere"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0086.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जनपद में शनिवार का दिन सिख समुदाय के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब गुरु गोविंद सिंह स्मृति चौक पर उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े खंडा साहिब की विधिवत स्थापना की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">पंजाब से विशेष रूप से तैयार कर लाया गया विशाल खंडा साहिब शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे बस्ती की सीमा में पहुंचा, जहां सिख समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं तथा जयकारों के साथ उसका भव्य स्वागत किया। इसके बाद शोभायात्रा के रूप में उसे गुरु गोविंद सिंह स्मृति चौक तक लाया गया, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अरदास और पूजा-अर्चना के बाद इसकी स्थापना की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार स्थापित खंडा साहिब की ऊंचाई 15 फीट और चौड़ाई 9 फीट है। उनका दावा है कि यह उत्तर प्रदेश में स्थापित अपने प्रकार का सबसे बड़ा खंडा साहिब है। इसकी स्थापना को सिख धर्म की गौरवशाली परंपराओं और गुरु साहिबानों की शिक्षाओं के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोकार्पण समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा को स्मरण करते हुए समाज में भाईचारे, सेवा, सद्भाव और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। अरदास के उपरांत लोगों ने खंडा साहिब के दर्शन कर मत्था टेका तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;">सिख समाज के लोगों ने इस स्थापना को जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि यह स्थल आने वाले समय में श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस आयोजन को सफल बनाने में मुख्य राजस्व अधिकारी कीर्ति प्रकाश भारती तथा विकास राजगढ़ के अधिशासी अभियंता हरिओम गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में हरिभजन सिंह, जोगेंद्र सिंह, ज्ञानी प्रदीप सिंह, हरि सिंह बब्लू, कुलदीप सिंह, ओम प्रकाश अरोरा, जय प्रकाश अरोरा, हिमांशु सेन, इंद्रपाल सिंह सैंटी, प्रभुजोत सिंह, दिलप्रीत सिंह करन, राजेंद्र सिंह काका, तरनजीत सिंह, जितेंद्र यादव, अखिलेश शुक्ला मंटू, राजेंद्र चित्रगुप्ता, शैलेंद्र दुबे, सनम सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:48:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आप में सियासी भूचाल दलबदल कानून के घेरे में 7 राज्यसभा सांसदों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस पूरे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177385/political-turmoil-in-aap-future-of-7-rajya-sabha-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-politics-defection-crisis-jaychand-mirjafar-analysis.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के केंद्र में हैं राघव चड्ढा जिनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का दावा किया है। इनके साथ संदीप पाठक अशोक मित्तल विक्रम साहनी हरभजन सिंह स्वाति मालीवाल और नरेंद्र गुप्ता जैसे नामों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा का रुख किया है। इस दावे ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर इन सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची का स्पष्ट उल्लंघन किया है जो दलबदल को रोकने के लिए बनाई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में दलबदल विरोधी कानून जिसे दसवीं अनुसूची के नाम से जाना जाता है वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक दलों में स्थिरता बनाए रखना और निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को रोकना था। इस कानून के तहत यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है जो पार्टी व्हिप से जुड़ा हुआ है। यदि कोई सांसद सदन में अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है तो भी उसे अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी अनुशासन बना रहे और सरकार या विपक्ष की रणनीति प्रभावित न हो।</div>
<div style="text-align:justify;">निर्दलीय सदस्यों के लिए भी इस कानून में स्पष्ट नियम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता जिस स्वतंत्र उम्मीदवार को चुनते हैं वह बाद में किसी दल का हिस्सा बनकर उनकी अपेक्षाओं के साथ समझौता न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस कानून में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है जिसे विलय का प्रावधान कहा जाता है। इसके अनुसार यदि किसी दल के दो तिहाई या उससे अधिक सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में शामिल हो जाते हैं तो इसे दलबदल नहीं बल्कि वैध विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों को अयोग्यता से छूट मिल जाती है। यही वह बिंदु है जिस पर इस पूरे मामले का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी के इन सांसदों की संख्या दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचती है या नहीं। यदि यह संख्या पूरी होती है तो ये सांसद अपनी सदस्यता बचा सकते हैं अन्यथा इन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं और राजनीतिक गणित तेजी से बदल रहा है।इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति के पास है जो इस मामले की सुनवाई करेंगे और तथ्यों के आधार पर फैसला देंगे। उनका निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वही तय करेगा कि संबंधित सांसद संसद में बने रहेंगे या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सभापति का निर्णय अंतिम होने के बावजूद न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि दलबदल से जुड़े मामलों में सभापति के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसका मतलब है कि यदि किसी पक्ष को निर्णय से असंतोष होता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। यदि बड़ी संख्या में सांसद दलबदल कर बिना अयोग्यता के बच जाते हैं तो यह अन्य दलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि कड़ी कार्रवाई होती है तो यह संदेश जाएगा कि दलबदल कानून अभी भी प्रभावी है और उसका उल्लंघन करने पर सख्त परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दलबदल विरोधी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा कर पा रहा है या इसमें सुधार की आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उपयोग कई बार राजनीतिक हथियार के रूप में भी किया जाता है जिससे विधायकों और सांसदों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि यदि यह कानून न हो तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और सरकारें गिरने का खतरा बना रह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ जनता और संवैधानिक संस्थाओं के सामने अपनी बात रखेंगे। इस पूरे मामले पर देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह केवल सात सांसदों का मुद्दा नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ प्रश्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि दलबदल कानून भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इसका उपयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो ताकि लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। आने वाले समय में सभापति का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देगा और यह तय करेगा कि राजनीति में दल बदल की प्रवृत्ति पर कितना नियंत्रण संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:18:42 +0530</pubDate>
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