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                <title>Educational Development - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Educational Development RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण,  भव्य आयोजन आज</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182237/all-preparations-for-tenth-convocation-ceremony-completed-grand-event-today"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782655142971.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार तथा बापू महाविद्यालय, पीपीगंज, गोरखपुर की प्राचार्य डॉ. मंजू मिश्रा भी समारोह में सम्मिलित होंगी। दीक्षांत समारोह में 19 कार्य परिषद सदस्य एवं 51 विद्या परिषद सदस्य सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल करेंगी। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यावरणविद् डॉ. मधुलिका अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री  रजनी तिवारी उपस्थित रहेंगी। रविवार सायंकाल  राज्यपाल का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय आगमन प्रस्तावित है तथा उनके सम्मान में विश्वविद्यालय के कला संकाय सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ प्रातः 10:00 बजे वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से होगा तथा समापन राष्ट्रगान एवं विद्वत पारियात्रा के प्रत्यावर्तन के साथ किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा कुल 37 स्वर्ण पदक, जिनमें 13 डोनर स्वर्ण पदक शामिल हैं, प्रदान किए जाएंगे। विशेष रूप से 13 ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें दो या दो से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित आठ पुस्तकों का लोकार्पण, दीक्षा उत्सव कार्यक्रम की झलकियां पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन, नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ एवं दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोद लिए गए गांवों के बच्चों द्वारा पर्यावरण एवं जल संरक्षण विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरण का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि, दशम दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों, समाज के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय के साथ निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। यह दीक्षांत समारोह हमारे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समस्त विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों का गौरवपूर्ण प्रतीक बनेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>37 टॉपर्स को राज्यपाल के हाथों आज मिलेगा गोल्ड मेडल</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>  स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में जब सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, तब इसके पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पिछड़े और सीमांत क्षेत्रों के युवाओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था। एक दशक बाद विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह उस उद्देश्य की सफलता की गवाही देता नजर आ रहा है। इस बार दिए जाने वाले 37 स्वर्ण पदकों में 28 पदक छात्राओं के नाम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना 17 जून 2015 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के कपिलवस्तु में</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182235/37-toppers-will-get-gold-medal-today-from-the-hands"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782656585168.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong> स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में जब सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, तब इसके पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पिछड़े और सीमांत क्षेत्रों के युवाओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था। एक दशक बाद विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह उस उद्देश्य की सफलता की गवाही देता नजर आ रहा है। इस बार दिए जाने वाले 37 स्वर्ण पदकों में 28 पदक छात्राओं के नाम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना 17 जून 2015 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के कपिलवस्तु में एक राज्य विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में विश्वविद्यालय से छह जिलों (सिद्धार्थनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, श्रावस्ती और बलरामपुर) के संबद्ध 289 महाविद्यालयों के माध्यम से लगभग दो लाख विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।  शिक्षाविदों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का आंकड़ा नहीं है बल्कि उस सामाजिक बदलाव का भी संकेत है, जिसकी उम्मीद विश्वविद्यालय की स्थापना के समय की गई थी। जिन क्षेत्रों में कभी उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित थी, वहां की बेटियां आज विश्वविद्यालय की मेधा सूची में सबसे आगे खड़ी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> तराई और सीमावर्ती जिलों में लंबे समय तक उच्च शिक्षा के अवसर सीमित रहे। आर्थिक स्थिति, दूरी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती थीं। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध महाविद्यालयों के विस्तार ने इस स्थिति में बदलाव लाने का काम किया। अब छात्राओं को घर के नजदीक ही स्नातक, परास्नातक और शोध स्तर तक पढ़ाई का अवसर मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षकों का कहना है कि पिछले वर्षों में छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। इसका परिणाम अब स्वर्ण पदकों और शैक्षणिक उपलब्धियों के रूप में सामने आ रहा है। 37 में 28 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिलना इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:39:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश की शिक्षा प्रणाली एक्सटोर्शन मशीन, बच्चों को दबाती-कुचलती है, इसे बदलना होगा: राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181544/the-countrys-education-system-is-an-extortion-machine-that-oppresses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि आगे से किसी भी बच्चे को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मघाती</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कदम न उठाना पड़े।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि उनकी छात्रों और युवाओं के साथ इस संवाद का मकसद राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। इसमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी कि इसमें क्या कमियां हैं और क्या सुधार करने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह बैठक आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह शाम आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन चुनौतियों के बारे में जिनका आप हर दिन सामना कर रहे हैं।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे पांच छात्रों को मंच पर बुलाया और उनसे बात की। उन्होंने एक छात्रा और उसके अभिभावकों से भी मंच पर बात की। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हम अभी आज राजनीतिक बात नहीं कर रहे हैं। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपके भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमें इस (शिक्षा) प्रणाली को बदलना होगा और इस प्रणाली को ठीक करना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का मौका दे और उसे पूरा करे। सबसे बड़ी बात आपका यह सपना न्यूनतम लागत पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना आपकी जेब से लाखों करोड़ रुपये छीने करना चाहिए। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">देश की शिक्षा प्रणाली हिंदुस्तान के सबसे गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से एक परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितना शिक्षा का बजट है और पांच बड़ी परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितने पांच बड़े मंत्रालयों को बजट मिलता है। ये शर्मनाक है। हमें इसे बदलना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की शिक्षा प्रणाली शोषण (एक्सटोर्शन) मशीन है। ये आपसे पैसे लेने का ‘सिस्टम’ है। ये सिर्फ शिक्षा देने का ‘सिस्टम’ नहीं है। ये परीक्षा के आधार पर आपसे लाखों करोड़ रुपये छीनने का ‘सिस्टम’ है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्यक्रम इस आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से इससे जुड़ने और अपने सुझाव देने की अपील की कि हम इस प्रणाली को कैसे बदलें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177302/one-day-seminar-organized-on-strait-of-hormuz-gateway-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की रूपरेखा डाॅ. तरूण पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत की गई। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश शीर्षक पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये। आज की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने भू-राजनीति एवं जलमार्गो के वर्चस्व पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भू-राजनीति में जल मार्गो का विशेष महत्व है क्योंकि यही जलमार्ग किसी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बनते है। वर्तमान में ईरान एवं अमेरिका के मध्य चल रहे युद्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस समय पर फारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी के मध्य स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसा जल मार्ग है जहां से होकर विभिन्न देशो के लिए कच्चा तेल एवं गैस से लदे मालवाहक जहाज निकलते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में चल रहे विवाद के कारण यहां से निकलने वाले मालवाहक जहाजो को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जो कि आयात-निर्यात में बाधा उत्पन्न कर रहें है। जिससे विभिन्न देशो की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है।  शैक्षिक उन्नयन समिति के चेयरमैन ने अपने अविभाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य के अतिरिक्त विश्व के अन्य महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर प्रकाश डाला। निदेशक महोदय ने ईरान आयातित तेल एवं गैस के बढ़ते हुए मूल्यों पर चिंता व्यक्त की।इस कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगोष्ठी के अन्त में प्रबन्ध समिति ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान भूगोल विभाग के दोनों प्रवक्ताओं को भी उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से छात्र-छात्राओं के चहुंमुखी विकास में सार्थक सिद्ध होती है। मंच संचालन भूगोल विभाग के प्रवक्ता राकेश कुमार ने किया । संगोष्ठी को सफल बनाने में डाॅ. आरती बंसल, प्रीती यादव, डाॅ. बृजेश नंदिनी, गोविन्द सिंह, रामलखन, संगीता चैहान का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी में डाॅ. के.के.अग्रवाल, डाॅ. के.के. मेहरोत्रा, डाॅ. रेशु जौहरी, मंयक षर्मा, शोभित अग्रवाल, अजीत सिंह, डाॅ. सुमित अग्रवाल, डाॅ. निशा परवीन, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. राजपाल वर्मा, प्रथमेश कुमार, प्रफुल्ल पाठक सहित तमाम स्टाफ मौजूद रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:09:00 +0530</pubDate>
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