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                <title>Maritime Security - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Maritime Security RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज : सुरक्षा पहले, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183610/hormuz-security-first-but-challenges-are-no-less"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय के दूरगामी आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। भारत भी अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आयात करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण होर्मुज क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाज हमलों का शिकार हुए हैं। कुछ घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए और एक भारतीय सीफेरर की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद समुद्री प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भारतीय नाविकों की नई तैनाती रोकने की सलाह जारी की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि परिस्थितियों के सामान्य होने तक एहतियाती कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया में सबसे अधिक समुद्री कर्मी उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। लाखों भारतीय विभिन्न विदेशी जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर तैनाती रुकने से अनेक नाविकों की नई नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। जहाजरानी कंपनियों को वैकल्पिक क्रू की व्यवस्था करनी पड़ेगी। कुछ भारतीय नाविकों की आय प्रभावित हो सकती है। समुद्री रोजगार बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल यह आदेश केवल भारतीय नाविकों की तैनाती से जुड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह बाधित होता है तो भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। इससे महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। भारत पिछले कुछ वर्षों से तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे कदम भविष्य के संकटों से निपटने में मदद कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह फैसला उचित है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय दृष्टि से देखें तो यह निर्णय उचित प्रतीत होता है। किसी भी आर्थिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण नागरिकों का जीवन है। जब किसी क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति हो और व्यापारिक जहाज लगातार निशाने पर हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सरकार का पहला दायित्व अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। हालांकि दूसरी ओर यह भी सच है कि लंबे समय तक प्रतिबंध रहने पर भारतीय समुद्री उद्योग और नाविकों के रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार को सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित नाविकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे की राह- भारत को केवल अस्थायी प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं— समुद्री सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना। संकटग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नाविकों के लिए बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना। प्रभावित नाविकों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता देना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा आयात के स्रोतों में और विविधता लाना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री जोखिमों की निगरानी के लिए आधुनिक तंत्र विकसित करना। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से एक सतर्क और जिम्मेदार कदम है। यह बताता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। हालांकि इसके आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि क्षेत्रीय तनाव जल्द कम होता है तो यह प्रतिबंध अस्थायी साबित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो भारत को समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों के रोजगार के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:56:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम्मान नहीं, रणनीतिक विश्वास की मुहर है 'बिंतांग आदिपूर्णा'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीति की असली ताकत हाथ मिलाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औपचारिक स्वागत या साझा तस्वीरों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस विश्वास में दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कोई राष्ट्र अपने सर्वोच्च सम्मान के जरिए सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से सम्मानित किया जाना ऐसा ही ऐतिहासिक क्षण था। फाइटर जेट्स की सलामी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के आत्मीय स्वागत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल साझा सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182975/6a4e60873e464"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीति की असली ताकत हाथ मिलाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औपचारिक स्वागत या साझा तस्वीरों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस विश्वास में दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कोई राष्ट्र अपने सर्वोच्च सम्मान के जरिए सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से सम्मानित किया जाना ऐसा ही ऐतिहासिक क्षण था। फाइटर जेट्स की सलामी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के आत्मीय स्वागत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल साझा सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साझा भविष्य और क्षेत्रीय जिम्मेदारियों की नई साझेदारी का प्रतीक है। सदियों पुरानी मित्रता अब रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे नए आधारों पर कहीं अधिक सशक्त होकर उभर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वीकार करते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों के नाम कर दिया। यही उस सम्मान का सबसे बड़ा अर्थ भी था। स्वतंत्र भारत में जवाहरलाल नेहरू (</span>1995 <span lang="hi" xml:lang="hi">में मरणोपरांत</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद वे दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। वर्ष </span>1959 <span lang="hi" xml:lang="hi">में स्थापित यह अलंकरण उन व्यक्तित्वों को दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इंडोनेशिया की एकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता और समृद्धि में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। किसी विदेशी नेता का इससे सम्मानित होना भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वसनीय नेतृत्व और दोनों देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक विश्वास का प्रमाण है। गणतंत्र दिवस </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के बाद हुआ यह जवाबी दौरा भी स्पष्ट करता है कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल औपचारिक कूटनीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिणाम देने वाली रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा सहयोग रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक ऊंचाई दी। दोनों देशों के बीच हुए </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौतों में रक्षा क्षेत्र सबसे अहम रहा। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियों की खरीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े समझौते और संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं ने साबित कर दिया कि भारत अब केवल हथियार आयातक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वसनीय रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदार बन चुका है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में एस्ट्रा मिसाइल के युद्ध-प्रमाणित प्रदर्शन ने इंडोनेशिया का भरोसा और मजबूत किया। फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया का ब्रह्मोस से जुड़ना भारत के रक्षा निर्यात के लिए एक और बड़ी उपलब्धि होगी। ये समझौते केवल हथियारों के सौदे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंद-प्रशांत की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक संतुलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और मजबूत बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक दृष्टि से साबांग पोर्ट का संयुक्त विकास इस यात्रा की सबसे दूरगामी उपलब्धियों में है। मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार का अहम केंद्र है और ग्रेट निकोबार परियोजना से इसकी निकटता भारत के लिए इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इससे समुद्री सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपदा प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नौवहन और व्यापारिक लॉजिस्टिक्स में दोनों देशों की क्षमता मजबूत होगी। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश पर सहमति भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक कदम है। दुनिया के सबसे बड़े निकल उत्पादक इंडोनेशिया और ईवी व नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते भारत की यह साझेदारी चीन-निर्भर आपूर्ति श्रृंखला का प्रभावी विकल्प बन सकती है। यही सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की मजबूत बुनियाद भी रखेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल सहयोग ने इस यात्रा को भविष्य की शासन व्यवस्था से जोड़ दिया। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता इस दौरे में भी साफ दिखाई दी। यूपीआई के विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडोनेशिया के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और आईआईएम बेंगलुरु के साथ प्रबंधन व प्रशासनिक क्षमता निर्माण पर हुए समझौते आधुनिक सुशासन की नई दिशा दिखाते हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसरो-बीआरआईएन के बीच अंतरिक्ष सहयोग तथा कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े समझौते बताते हैं कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान और मानव संसाधन विकास पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका लाभ आने वाले वर्षों में दोनों देशों को मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हिंद-प्रशांत आज रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रमुख केंद्र है। ऐसे दौर में स्वतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत के प्रति भारत और इंडोनेशिया का साझा संकल्प पूरे क्षेत्र को स्थिरता का सकारात्मक संदेश देता है। रक्षा सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े समझौते इस दृष्टि को ठोस आधार देते हैं। लगभग </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित और व्यापक बनाने की दिशा में भी यह यात्रा महत्वपूर्ण साबित होगी। आर्थिक सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने वाले समझौते दोनों देशों के लिए नए अवसरों के साथ एशिया में संतुलित और टिकाऊ विकास की संभावनाओं को भी सुदृढ़ करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह यात्रा केवल एक सफल राजनयिक दौरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्ट ईस्ट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">महासागर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">दृष्टि को नई दिशा देने वाला निर्णायक पड़ाव है। रामायण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रंबनन मंदिर और साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक रिश्ते अब रक्षा प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अवसंरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग और आर्थिक लचीलेपन की आधुनिक साझेदारी में बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने साबित किया कि दूरदर्शी कूटनीति केवल वर्तमान की चुनौतियों का समाधान नहीं करती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य की संभावनाओं की भी मजबूत नींव रखती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">महज़ एक सम्मान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस अटूट विश्वास का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले दशकों की नई साझेदारी गढ़ रहे हैं। यह रिश्ता अब केवल भावनात्मक निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साझा हितों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक भरोसे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त क्षमताओं और क्षेत्रीय उत्तरदायित्व पर आधारित है। यही साझेदारी दोनों देशों को एशिया ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक मंच पर भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:17:56 +0530</pubDate>
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                <title>सेशेल्स यात्रा से मजबूत हुआ भारत का समुद्री सामरिक सहयोग और वैश्विक विश्वास का नया अध्याय</title>
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<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका मजबूत कूटनीति और वैश्विक विश्वास का प्रभावशाली उदाहरण है । इस यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ विश्वास सम्मान और साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है ।सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश के साथ भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों  के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी उतना</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182370/seychelles-visit-strengthens-indias-maritime-strategic-cooperation-and-new-chapter"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas27.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका मजबूत कूटनीति और वैश्विक विश्वास का प्रभावशाली उदाहरण है । इस यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ विश्वास सम्मान और साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है ।सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश के साथ भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों  के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी उतना ही गहरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया जो किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के प्रति सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई जिसमें समुद्री सुरक्षा रक्षा सहयोग तटीय निगरानी क्षमता बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में कई समझौतों पर भी विचार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता रहा है सेशेल्स इस दृष्टि से भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है क्योंकि यह देश उन समुद्री मार्गों के निकट स्थित है जिनसे दुनिया का बड़ा व्यापार संचालित होता है ऐसे में समुद्री डकैती अवैध मछली पकड़ने मानव तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर नियंत्रण के लिए भारत और सेशेल्स का सहयोग पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल लेस्पवार सेशेल्स को सौंपा जिससे वहां की कोस्ट गार्ड की क्षमता और अधिक मजबूत होगी यह केवल एक रक्षा सहयोग नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी क्षमता और मित्र देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है ।भारत पहले भी सेशेल्स को समुद्री निगरानी विमान और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा चुका है। जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस यात्रा की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति विश्व समुदाय के सम्मान को भी दर्शाती है। किसी दूसरे देश की संसद को संबोधित करना दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास और परस्पर सम्मान का प्रमाण माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों का इतिहास लगभग ढाई सौ वर्षों से भी अधिक पुराना है। जब वर्ष सत्रह सौ सत्तर में यहां पहली स्थायी बस्ती बसाई गई, तब वहां पहुंचने वाले पहले लोगों में पांच भारतीय भी शामिल थे। बाद के वर्षों में बिहार तमिलनाडु और गुजरात से बड़ी संख्या में भारतीय यहां जाकर बसे और उन्होंने व्यापार कृषि निर्माण तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी सेशेल्स की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है। जिसने दोनों देशों के संबंधों को पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन के पूर्वज भी भारत के बिहार राज्य से जुड़े रहे हैं। यह तथ्य दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है। भारतीय मूल के लोग वहां केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने शिक्षा स्वास्थ्य व्यापार और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भी दौरा किया जहां उन्होंने राष्ट्रपति के साथ पौधारोपण किया और प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं को पत्तियां खिलाईं। यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण जैव विविधता और प्रकृति के प्रति साझा जिम्मेदारी का संदेश देता है ।सेशेल्स अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता दुर्लभ समुद्री जीवों और विश्व प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स का भौगोलिक क्षेत्रफल भले ही बहुत छोटा हो लेकिन इसका समुद्री आर्थिक क्षेत्र अत्यंत विशाल है ।यही कारण है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां इस क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं। भारत हमेशा इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और साझेदारी की नीति पर विश्वास करता आया है यही सोच भारत को अन्य देशों से अलग पहचान दिलाती है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल एक वर्षगांठ नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास मित्रता और साझा विकास की सफल यात्रा का उत्सव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति सुरक्षा और समृद्धि के साझा लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब पूरी दुनिया बदलते वैश्विक समीकरणों और नई चुनौतियों का सामना कर रही है तब भारत की विदेश नीति विश्व बंधुत्व आपसी सम्मान और समान विकास के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही है। भारत छोटे और विकासशील देशों को बराबरी का सम्मान देता है और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग प्रदान करता है। यही कारण है कि भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेशेल्स यात्रा ने यह भी सिद्ध कर दिया कि भारत केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने के लिए अपने मित्र देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है आने वाले समय में यह साझेदारी समुद्री सुरक्षा व्यापार पर्यटन पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत और सेशेल्स की यह मित्रता केवल सरकारों के बीच संबंध नहीं बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास अपनत्व और साझा भविष्य की मजबूत नींव है। यही कारण है कि यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत की सफल कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>        *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:59:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज पर ईरान की हुकूमत: दुनिया की नब्ज पर हाथ</title>
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">  पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi">  तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  में ईरान ने इस गलियारे को</span>700</p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182049/irans-rule-on-hormuz-has-its-hand-on-the-pulse"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas21.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="m_7345850882644653164WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से </span>35<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत पास हुए जिसमें </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल और </span>30% LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरती है। मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ईरान ने इस गलियारे को बंद कर दिया। </span>700<span lang="hi" xml:lang="hi"> टैंकर फंस गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पार कर गया। ये सिर्फ युद्ध की घोषणा नहीं थी। ये ईरान का ये कहना था कि "दुनिया की ऊर्जा की नब्ज मेरे हाथ में है"। होर्मुज क्या है और ईरान इसे क्यों चाहता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब</span>, UAE, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुवैत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इराक का पूरा तेल इसी रास्ते से जाता है। ईरान का दक्षिणी तट इस जलडमरूमध्य के उत्तर में है। भूगोल ने ईरान को स्ट्रेटेजिक लीवरेज दिया है। फरवरी </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के जरिए - पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी बना दी। अब नियम ये है: होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> सवालों का घोषणा पत्र जमा करना होगा। माल क्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मालिक कौन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रू की नेशनलिटी क्या है। जो नहीं मानेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस पर मिसाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन हमला या कब्जे का खतरा है। मार्च </span>2026: <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने नल बंद कर दिया- </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज बंद करने का ऐलान कर दिया। बंद होते ही</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य तेल यातायात में </span>86%<span lang="hi" xml:lang="hi"> गिरावट आई</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक मार्च को </span>19.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल/दिन की जगह सिर्फ </span>2.8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन बैरल गुजरे। </span>706<span lang="hi" xml:lang="hi"> गैर-ईरानी टैंकर कतार में फंस गए। ब्रेंट क्रूड </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> उछलकर </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> डॉलर पर पहुंच गया। ईरान ने कहा कि ये बंद सिर्फ अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजरायल और यूरोपीय जहाजों के लिए है। चीन के झंडे वाले जहाजों को छूट दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ईरान कानूनी तौर पर ऐसा कर सकता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका छोटा सा जवाब है नहीं। </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि की धारा </span>37-44<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी देशों को "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। न ईरान और न ओमान एकतरफा तरीके से इसे बंद कर सकते हैं। समुद्री कानून विशेषज्ञ रेड्जा जकारिया कहते हैं कि ईरान आत्मरक्षा का हवाला दे सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर वो नेविगेशन रोकता है तो ये </span>UNCLOS <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लंघन होगा। लेकिन असलियत में ईरान सैन्य शक्ति और भौगोलिक स्थिति से यातायात को प्रभावित कर रहा है। ये कानूनी संप्रभुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन "डिफैक्टो कंट्रोल" है। ईरान ने अब "टोल-पास" सिस्टम शुरू कर दिया है। जहाजों को </span>PGSA <span lang="hi" xml:lang="hi">से पास लेना होगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर तक मांगे जा रहे हैं। ईरान ने इनकार किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अमेरिका ने जहाजों को चेतावनी दी है कि टोल न दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे </span>IRGC <span lang="hi" xml:lang="hi">को फंड मिलेगा। दुनिया पर असर-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल और गैस: भारत अपनी जरूरत का </span>90%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेल आयात करता है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>160<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का तेल आयात हुआ था। होर्मुज बंद होने से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यूरोप: कतर ने </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पादन रोका तो यूरोपीय गैस कीमतें </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बढ़ गईं। </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर का किराया </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख डॉलर/दिन से ऊपर चला गया। अफ्रीका- </span>UN <span lang="hi" xml:lang="hi">महासचिव गुटेरेश ने चेताया कि अफ्रीका के तेल और उर्वरक आयात का </span>13%<span lang="hi" xml:lang="hi"> होर्मुज से आता है। बंद रहा तो महंगाई और खाद्य संकट बढ़ेगा। लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के लिए होर्मुज खोल दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ये सिर्फ सीजफायर की अवधि के लिए है। भारत के लिए क्या मायने हैं- भारत के लिए होर्मुज "लाइफलाइन" है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">विकल्प सीमित हैं: केप ऑफ गुड होप से रास्ता </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन लंबा और </span>20% <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगा पड़ता है। रणनीति: चाबहार पोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के साथ डिप्लोमेसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाना। लेकिन ये सब शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन हैं। अगर होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल स्थायी हो गया तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा हर </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में दांव पर लगेगी। होर्मुज पर ईरान की हुकूमत कानून से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूगोल और मिसाइल से चलती है। वो जानता है कि दुनिया तेल के बिना </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन नहीं चल सकती। इसलिए वो कभी पूरी तरह बंद नहीं करेगा। वो सिर्फ "नल" को धीमा-तेज करेगा ताकि अमेरिका झुके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल महंगा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसकी बात मानी जाए। ये </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी की नाकेबंदी है। बंदूक की जगह टोल-पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की जगह </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">सवालों का फॉर्म। और दांव पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था।</span></p>
</div>
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:08:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान पीस डील पर हस्ताक्षर, यूएस झुका- पैसे भी देगा, होर्मुज़ खुलेगा</title>
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते</span></p></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181546/america-iran-peace-deal-signed-us-bowed-%E2%80%93-will-also-give"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते के सफल होने से न केवल तेल की वैश्विक कीमतें स्थिर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने का एक नया रास्ता खुलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह साइन हो चुका है। मैंने अभी-अभी इस पर हस्ताक्षर किए हैं।" दूसरी तरफ ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और अन्य अधिकारियों ने भी इसे डिजिटल रूप से साइन किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी इस पर बयान जारी कर कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पहले कदम के रूप में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान तुरंत हॉर्मुज जलडमरूमध्य </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को खोल देगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्हाइट हाउस और ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए समझौते के मुख्य प्वाइंट इस प्रकार हैं:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तत्काल युद्धविराम: अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तत्काल और स्थायी रूप से सैन्य अभियानों को समाप्त करने की घोषणा करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी या हमला नहीं करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों की समयसीमा: दोनों पक्ष अधिकतम </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते (</span>Final Deal) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर बातचीत पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सेना की वापसी: अंतिम समझौते के </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेनाएं हटा लेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: ईरान शुरुआती </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के लिए फारस की खाड़ी से ओमान के समुद्र तक वाणिज्यिक जहाजों (</span>Commercial Vessels) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन की व्यवस्था करेगा। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर नौसैनिक और तकनीकी बाधाओं (जैसे बारूदी सुरंगें हटाना) को दूर किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य का प्रशासन: ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान और अन्य तटीय देशों के साथ बातचीत करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (</span>USD $300 Billion) <span lang="hi" xml:lang="hi">की योजना विकसित करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबंधों की समाप्ति: एक तय समय सारणी के तहत अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के खिलाफ सभी एकतरफा (प्राइमरी और सेकेंडरी) प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (</span>UNSC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम संवर्धन का निपटारा: ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार का निपटारा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (</span>IAEA) <span lang="hi" xml:lang="hi">की देखरेख में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑन-साइट डाउन-ब्लेंडिंग</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम की क्षमता कम करना) के जरिए किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यथास्थिति (</span>Status Quo) <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाए रखना: अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्तर पर ही रोके रखेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल निर्यात को छूट और फंड की बहाली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल छूट (</span>Waivers) <span lang="hi" xml:lang="hi">जारी करेगा। साथ ही विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की संपत्तियों को वापस इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निगरानी तंत्र की स्थापना: समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा। इस अंतिम समझौते को </span>UNSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के एक बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस समझौते पर अंग्रेजी और फारसी (</span>Farsi) <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अनुवाद को लेकर भविष्य में कोई मतभेद या कोई और व्याख्या न हो। ईरान ने अपनी केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर जब्त संपत्तियों को वापस पाने के तकनीकी तौर-तरीकों को भी अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177302/one-day-seminar-organized-on-strait-of-hormuz-gateway-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की रूपरेखा डाॅ. तरूण पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत की गई। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश शीर्षक पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये। आज की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने भू-राजनीति एवं जलमार्गो के वर्चस्व पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भू-राजनीति में जल मार्गो का विशेष महत्व है क्योंकि यही जलमार्ग किसी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बनते है। वर्तमान में ईरान एवं अमेरिका के मध्य चल रहे युद्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस समय पर फारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी के मध्य स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसा जल मार्ग है जहां से होकर विभिन्न देशो के लिए कच्चा तेल एवं गैस से लदे मालवाहक जहाज निकलते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में चल रहे विवाद के कारण यहां से निकलने वाले मालवाहक जहाजो को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जो कि आयात-निर्यात में बाधा उत्पन्न कर रहें है। जिससे विभिन्न देशो की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है।  शैक्षिक उन्नयन समिति के चेयरमैन ने अपने अविभाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य के अतिरिक्त विश्व के अन्य महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर प्रकाश डाला। निदेशक महोदय ने ईरान आयातित तेल एवं गैस के बढ़ते हुए मूल्यों पर चिंता व्यक्त की।इस कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगोष्ठी के अन्त में प्रबन्ध समिति ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान भूगोल विभाग के दोनों प्रवक्ताओं को भी उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से छात्र-छात्राओं के चहुंमुखी विकास में सार्थक सिद्ध होती है। मंच संचालन भूगोल विभाग के प्रवक्ता राकेश कुमार ने किया । संगोष्ठी को सफल बनाने में डाॅ. आरती बंसल, प्रीती यादव, डाॅ. बृजेश नंदिनी, गोविन्द सिंह, रामलखन, संगीता चैहान का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी में डाॅ. के.के.अग्रवाल, डाॅ. के.के. मेहरोत्रा, डाॅ. रेशु जौहरी, मंयक षर्मा, शोभित अग्रवाल, अजीत सिंह, डाॅ. सुमित अग्रवाल, डाॅ. निशा परवीन, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. राजपाल वर्मा, प्रथमेश कुमार, प्रफुल्ल पाठक सहित तमाम स्टाफ मौजूद रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177302/one-day-seminar-organized-on-strait-of-hormuz-gateway-to</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:09:00 +0530</pubDate>
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