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                <title>Internet Security - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Internet Security RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां : डर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/3vmjtsfo_jaipur-bomb-threat_625x300_09_december_25.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज में बढ़ती असुरक्षा और डिजिटल अपराधों की गंभीर चेतावनी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा प्रभावित जयपुर रहा, जहां स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी परिसरों को उड़ाने की धमकियां दी गईं। कई बार पूरी इमारतों को खाली करवाना पड़ा, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई, यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और सुरक्षा एजेंसियों को घंटों जांच करनी पड़ी। बाद में अधिकांश धमकियां फर्जी साबित हुईं, लेकिन हर सूचना को गंभीरता से लेना प्रशासन की मजबूरी होती है क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराधियों को भी नई ताकत दी है। पहले अपराधी फोन या पत्र के जरिए धमकी देते थे, लेकिन अब ई-मेल, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, वीपीएन और विदेशी सर्वर का उपयोग कर पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। कई बार अपराधी केवल अफवाह फैलाने या मजाक करने के उद्देश्य से भी ऐसे संदेश भेज देते हैं, लेकिन उनका यह मजाक हजारों लोगों को परेशानी में डाल देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूलों को मिलने वाली धमकियां सबसे अधिक चिंताजनक हैं। जब किसी स्कूल में बम होने की सूचना मिलती है तो तुरंत बच्चों को बाहर निकाला जाता है, अभिभावकों में डर फैल जाता है और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन जाता है। छोटे बच्चों के मन पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है। कई बार बच्चे लंबे समय तक भय महसूस करते हैं। इसी तरह एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन को धमकी मिलने पर सुरक्षा जांच इतनी सख्त करनी पड़ती है कि यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और उड़ानें प्रभावित हो जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि असली और फर्जी धमकी में अंतर कैसे किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदेश को हल्के में नहीं ले सकतीं। यदि सूचना को नजरअंदाज किया गया और घटना सच निकली तो भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए हर ई-मेल, कॉल या सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जाती है। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और साइबर विशेषज्ञ तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान सरकार द्वारा विशेष मॉनिटरिंग यूनिट का गठन किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से ऐसे संदेशों की निगरानी की जा रही है। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अन्य शहरों में बम निरोधक दस्ते सक्रिय रखे गए हैं। इसके अलावा ई-मेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखने के लिए तकनीकी टीमों को मजबूत किया जा रहा है। फिर भी चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि अपराधी भी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे संदेश भेजने वाले पकड़े क्यों नहीं जाते। इसका मुख्य कारण डिजिटल दुनिया की जटिलता है। कई अपराधी फर्जी नाम से ई-मेल बनाते हैं, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस छिपाने के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं या विदेशी सर्वर के जरिए संदेश भेजते हैं। कई बार वे साइबर कैफे, सार्वजनिक वाई-फाई या चोरी किए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना कठिन हो जाता है। हालांकि यह असंभव नहीं है। साइबर विशेषज्ञ डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करके अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब कोई धमकी भरा ई-मेल आता है तो साइबर टीम सबसे पहले उसका आईपी एड्रेस और सर्वर जानकारी निकालने का प्रयास करती है। ई-मेल हेडर से कई तकनीकी जानकारियां मिलती हैं। सोशल मीडिया संदेशों के मामले में संबंधित प्लेटफॉर्म से डेटा मांगा जाता है। मोबाइल नंबर, लोकेशन, लॉगिन समय और डिवाइस की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ती है। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट उपयोग रिकॉर्ड और बैंकिंग जानकारी भी मददगार साबित होती है। यदि अपराधी ने कहीं गलती की हो तो पुलिस उसके करीब पहुंच जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई बार अपराधी किशोर या युवा भी होते हैं जो मजाक या ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा करते हैं। उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उनकी हरकत कितनी गंभीर है। एक फर्जी धमकी के कारण हजारों लोग डर जाते हैं, सरकारी संसाधन बर्बाद होते हैं और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में साइबर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। युवाओं को यह समझाना होगा कि ऑनलाइन अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना वास्तविक दुनिया का अपराध।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि किसी को संदिग्ध ई-मेल, संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट मिले तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए। बिना पुष्टि के अफवाह फैलाना गलत है। कई बार लोग डर के कारण सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे दहशत और बढ़ जाती है। किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर आधुनिक स्कैनर और निगरानी कैमरे लगाए जाने चाहिए। साइबर सेल को अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध कराने होंगे। सोशल मीडिया कंपनियों और ई-मेल सेवा प्रदाताओं को भी जांच एजेंसियों के साथ तेजी से सहयोग करना चाहिए ताकि अपराधियों की पहचान जल्दी हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी स्तर पर भी सख्ती आवश्यक है। फर्जी धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और त्वरित सजा से दूसरों को भी संदेश जाएगा कि ऐसी हरकतें मजाक नहीं बल्कि गंभीर अपराध हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कानून और आपराधिक कानूनों के तहत ऐसे मामलों में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह डिजिटल युग की नई चुनौती का संकेत हैं। तकनीक का गलत उपयोग समाज में भय और अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार, पुलिस, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि जागरूकता, तकनीकी क्षमता और कानूनी सख्ती को साथ लेकर चला जाए तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>1800 करोड़ की ठगी के साये में बढ़ता साइबर खतरा और 100 करोड़ के प्लान से उम्मीद की नई शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177282/cyber-threat-is-increasing-in-the-shadow-of-fraud-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/cyber-fraud-2026-01-a69ca79d079be1821cfbba3b0c62ead0-3x2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर क्राइम के मामलों में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 4 लाख 49 हजार 182 शिकायतें दर्ज हुईं। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं बल्कि उस सामाजिक और आर्थिक संकट का संकेत है जो धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इन मामलों में करीब 1800 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है जो आम लोगों की मेहनत की कमाई पर सीधा हमला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर शिकायतों के निपटान की स्थिति पर नजर डालें तो 2 लाख 25 हजार 387 शिकायतों का निपटान किया गया है जबकि 2 लाख 23 हजार 795 मामलों में कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद 2 लाख 16 हजार 355 शिकायतें अभी भी प्रक्रिया में हैं और 4288 केस ऐसे हैं जो अब भी लंबित हैं। यह स्थिति बताती है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल दर साल बढ़ते मामलों की तस्वीर और भी स्पष्ट संकेत देती है। वर्ष 2021 और 2022 में जहां शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी वहीं 2023 में यह तेजी से बढ़कर 63 हजार 765 तक पहुंच गई। 2024 में यह संख्या 94 हजार 409 हो गई और 2025 में 1 लाख 15 हजार 2 शिकायतें दर्ज हुईं। यह लगातार बढ़ता ग्राफ बताता है कि साइबर अपराधियों के तरीके अधिक संगठित और खतरनाक होते जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ शिकायतों की संख्या ही नहीं बल्कि ठगी की रकम भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 में 158.67 करोड़ रुपए की ठगी हुई जिसमें से केवल 11 करोड़ रुपए ही वापस हासिल किए जा सके। 2023 में ठगी की राशि बढ़कर 354.55 करोड़ हो गई और रिकवरी 39.33 करोड़ तक पहुंची। 2024 में यह आंकड़ा और भयावह हो गया जब 795.9 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई और 104.5 करोड़ रुपए की ही रिकवरी हो पाई। इससे यह स्पष्ट होता है कि ठगी की रकम बढ़ने के मुकाबले रिकवरी की दर अभी भी बहुत कम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन आंकड़ों के बीच राहत की एक उम्मीद भी दिखाई देती है जब 2025 में 76.87 करोड़ रुपए की राशि रिकवर की गई। हालांकि यह पूरी ठगी के मुकाबले कम है लेकिन यह संकेत देता है कि यदि प्रयासों को मजबूत किया जाए तो स्थिति में सुधार संभव है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए 100 करोड़ रुपए का एक बड़ा प्लान तैयार किया है। यह योजना केवल कागजी नहीं बल्कि एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके तहत एक रीजनल साइबर क्राइम सेंटर स्थापित किया जाएगा जो आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ के साथ काम करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सेंटर के लिए 52 पद स्वीकृत किए गए हैं जिनमें पुलिस उपाधीक्षक से लेकर कांस्टेबल तक के पद शामिल हैं। इसके अलावा लेखाधिकारी और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी। हालांकि प्रस्तावित पदों की संख्या 275 बताई गई है लेकिन वर्तमान में स्वीकृत संख्या काफी कम है जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में स्टाफ की और जरूरत पड़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस योजना के तहत साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी जिन पर लगभग 30 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इन विशेषज्ञों की भूमिका बेहद अहम होगी क्योंकि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि विश्लेषणात्मक चुनौती भी बन चुका है। डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे आधुनिक टूल्स के जरिए अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।100 करोड़ रुपए के इस प्लान में से लगभग 50 करोड़ रुपए संसाधनों और स्टाफ पर खर्च किए जाएंगे जबकि करीब 60 करोड़ रुपए भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगाए जाएंगे। यह निवेश इस बात का संकेत है कि सरकार अब साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पारंपरिक पुलिसिंग के तरीके अब साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। डिजिटल अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस भी तकनीकी रूप से सशक्त बने और आधुनिक उपकरणों का उपयोग करे। साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण लोगों में जागरूकता की कमी भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई लोग फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए ठगी का शिकार हो जाते हैं। बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी शेयरिंग, फेक कस्टमर केयर और सोशल मीडिया स्कैम जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि आमजन सतर्क रहें और बुनियादी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें तो इन अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाने की जरूरत है। एनसीआरपी जैसे प्लेटफॉर्म पर शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं लेकिन उनके निपटान में समय लग रहा है। यदि जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए और तकनीकी सहायता बढ़ाई जाए तो पीड़ितों को जल्द राहत मिल सकती है।यह भी जरूरी है कि साइबर अपराधों के मामलों में राज्यों के बीच समन्वय बढ़े क्योंकि कई मामलों में अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में एक मजबूत नेटवर्क और सूचना साझा करने की व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में शुरू किया जा रहा यह 100 करोड़ का प्लान यदि सही तरीके से लागू होता है तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। इससे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और आमजन का डिजिटल सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा। अंततः यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराध केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और तकनीकी चुनौती भी है। इससे निपटने के लिए सरकार, पुलिस और आम नागरिक तीनों को मिलकर काम करना होगा। जहां एक ओर सरकार को मजबूत ढांचा तैयार करना होगा वहीं नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। तभी 1800 करोड़ की ठगी जैसे आंकड़ों को भविष्य में कम किया जा सकेगा और डिजिटल भारत को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:45:54 +0530</pubDate>
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