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                <title>Free food distribution India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>श्री लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) में बड़ा मंगल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">लखनऊ में ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार का दिन प्राणी मात्र के मंगल से जुड़ा हुआ दिन होता है। अपने मंगल के साथ- साथ सृष्टि के जड़, चेतन, स्त्री - पुरुष, पशु- पक्षी, कीट- पतंग एवं सम्पूर्ण जगत के मंगल की कामना की जाती है यही हिन्दुत्व की विशेषता है। यही हमारी भारतीय संस्कृति है जो सबके साथ समान व्यवहार की बात करती है। इन मंगलवार के दिनों में यहां संपूर्ण नगर के कोने -कोने में आम जनमानस द्वारा भंडारों का आयोजन किया जाता है। इन भंडारों की परम्परा लखनऊ में लगभग ४०० वर्ष पुरानी है। यहां मंगल, जिसे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177223/bada-mangal-in-shri-laxmanpuri-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">लखनऊ में ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार का दिन प्राणी मात्र के मंगल से जुड़ा हुआ दिन होता है। अपने मंगल के साथ- साथ सृष्टि के जड़, चेतन, स्त्री - पुरुष, पशु- पक्षी, कीट- पतंग एवं सम्पूर्ण जगत के मंगल की कामना की जाती है यही हिन्दुत्व की विशेषता है। यही हमारी भारतीय संस्कृति है जो सबके साथ समान व्यवहार की बात करती है। इन मंगलवार के दिनों में यहां संपूर्ण नगर के कोने -कोने में आम जनमानस द्वारा भंडारों का आयोजन किया जाता है। इन भंडारों की परम्परा लखनऊ में लगभग ४०० वर्ष पुरानी है। यहां मंगल, जिसे बड़ा मंगल भी कहा जाता है, भगवान हनुमान को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जिसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह त्योहार लखनऊ की एक अनूठी परंपरा है और नगर की सामाजिक , सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जो हिंदू धर्म के सभी मत - जैन, बौद्ध, सिक्ख और मुस्लिम संस्कृतियों के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण को दर्शाता है। लखनऊ अलीगंज में स्थित श्री हनुमान मंदिर से यह परंपरा प्रारम्भ हुई मानी जाती है। हिंदू माह ज्येष्ठ के प्रत्येक मंगलवार (आमतौर पर मई या जून में) को मनाया जाने वाला बड़ा मंगल, भगवान राम और हनुमान जी के मिलन की याद में मनाया जाता है। बड़ा मंगल मनाने की परंपरा अवध के नवाब सआदत अली खान (१७९८-१८१४) के शासनकाल से चली आ रही है। जनश्रुति कथाओं के अनुसार, नवाब के पुत्र मोहम्मद अली शाह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और तमाम प्रयत्नों के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> किसी ने उन्हें लखनऊ के अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान जी से आशीर्वाद लेने का सुझाव दिया । आशीर्वाद लेने के बाद पुत्र चमत्कारिक रूप से ठीक हो गए। कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, नवाब की पत्नी बेगम आलिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार (पुनर्निर्माण) कराने का वादा किया। ज्येष्ठ माह में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और तब से बड़ा मंगल मनाया जाता है। लखनऊ से प्रारम्भ हुई इस बड़े मंगल की परम्परा आज वैश्विक पहचान को स्थापित कर रही है। बड़े मंगल के भंडारे अब उत्तर भारत के लगभग प्रत्येक जनपदों में लगाए जाते हैं। यह भंडारे आध्यात्मिक, धार्मिक भावना के साथ -साथ सांझी विरासत को भी अपनाए हुए हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लखनऊ के मोहल्लों में आयोजित होने वाले यह सभी भंडारे सभी भेदों से दूर बंधुत्व भाव, सामाजिक, सांस्कृतिक सौहार्द के पर्याय हैं। यहां कोई भी जाति, पंथ, संप्रदाय, मजहब का भेद नहीं है। सभी साथ मिलकर भंडारों का आयोजन करते हैं। यहां पर प्रसाद पाने वाले अमीर से लेकर गरीब तक, बड़ी- बड़ी कार मालिक से लेकर पैदल तक, बाल, युवा, प्रौढ़, वृद्ध से लेकर पशु - पक्षियों तक, मजदूर से लेकर प्रतिष्ठित उद्योगी तक, आश्रयहीन से लेकर बहुखंडी इमारतों तक और इस चेतन जगत में सभी को समान रूप से भंडारों में प्रसाद ग्रहण करने की स्वतंत्रता हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सभी के लिए यहां के भक्त श्री हनुमानजी की प्रेरणा से सुचारू रूप से व्यवस्था संपादित करते हैं। इन भंडारों को आयोजित करने वालों से लेकर पंक्ति की कतार में खड़े प्रसाद लेने वाले भक्तों में कभी किसी के प्रति कोई भेद नहीं दिखता, कोई किसी की जाति नहीं पूछता सभी प्रेम से भक्ति से आनंद के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। लखनऊ में सामाजिक समरसता की यह बड़े मंगल का अनूठा उदाहरण बनकर देश को समरसता का संदेश दे रहा है। इन भंडारों में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ज्येष्ठ माह के इन मंगलवारों में लगने वाले भंडारे केवल लोगों की भूख ही शांत नहीं करते बल्कि बदलते जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां अनेकों स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के भी उपक्रम चलाए जाते हैं। पूरे नगर में एक दिन में हज़ारों की संख्या में भंडारे संचालित होते हैं जिनकी पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को ध्यान में रखकर व्यवस्था करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं प्लास्टिक मुक्त भंडारा, हरित भंडारा, जैसे विभिन्न प्रकार के अभियान चलाकर लकड़ी के चम्मच का प्रयोग, पारम्परिक पत्तल और कटोरियों का प्रयोग, जल के लिए मिट्टी के कुल्हड़ का प्रयोग किए जाने का जगह -जगह पर उपक्रम होते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस भी सामान्यतः ज्येष्ठ माह में ही आता है उस दिनांक को हरित भंडारा के स्लोगन के साथ , भारी संख्या में लोगों से वृक्षारोपण का निवेदन किया जाता है तथा कई स्थानों पर पौधों का निःशुल्क वितरण भी होता है। इन भंडारों में भक्तों, आयोजकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आस पास का वातारण, कार्यक्रम स्थल स्वच्छ एवं भक्तिमय रहे इस लिए कई प्रकार के अन्य स्वच्छता के उपक्रम किए जाते हैं, जहां प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल का अपव्यय रोकना, गीला और सूखा कचरा रखने के लिए अलग- अलग कूड़ेदान का प्रयोग एवं आए श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने के लिए विनम्र निवेदन किया जाता है। इस प्रकार यह ज्येष्ठ माह के सभी मंगल ही नहीं बल्कि पूरा ज्येष्ठ माह ही श्री हनुमानजी की भक्ति में डूबा रहता है। कहते हैं कि यह आयोजन इतने बड़े स्तर पर होता है कि पूरे नगर में कोई भूखा न रहे यही सबका पुण्य होता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>बाल भास्कर मिश्र </strong></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:30:56 +0530</pubDate>
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