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                <title>bhakti - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। </strong>बिस्कोहर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खरिकवा केरवानिया में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सातवें दिन रविवार रात्रि कथा व्यास पंडित काली प्रसाद मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का दिव्य मिलन सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और धर्म की विजय का प्रतीक है। विवाह प्रसंग का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। कथा के समापन पर महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान मंत्र राम यादव, गीता यादव, सौदागर, मुरली,</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182313/the-audience-became-emotional-after-hearing-the-story-of-shri"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782742629021.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। </strong>बिस्कोहर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खरिकवा केरवानिया में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सातवें दिन रविवार रात्रि कथा व्यास पंडित काली प्रसाद मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का दिव्य मिलन सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और धर्म की विजय का प्रतीक है। विवाह प्रसंग का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। कथा के समापन पर महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान मंत्र राम यादव, गीता यादव, सौदागर, मुरली, शिवदेव, जगराम, चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा, चंद्रिका प्रसाद मिश्रा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 21:56:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवाओं में प्रेरणा के पुरोधा है श्री प्रेमानंद जी महाराज </title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमानंद जी महाराज जन्मोत्सव 2026: वृंदावन में भक्ति की दिव्य लहरें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173669/shri-premanand-ji-maharaj-is-the-pioneer-of-inspiration-among"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(19).jpeg" alt=""></a><br /><h6><strong>राधे राधे! </strong>आज वृंदावन धाम में राधा-नाम की मधुर धुन गूंज रही है। लाखों भक्तों के हृदय में एक ही नाम है – श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज। 19 मार्च  को उनके पावन जन्मोत्सव का मुख्य दिन मनाया गया। श्री हित राधा केली कुंज (वराह घाट, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन) में 13 मार्च से 19 मार्च तक चला यह 7 दिवसीय भव्य उत्सव अब समाप्त हो चुका है, लेकिन भक्ति की लहरें अभी भी पूरे ब्रज में गूंज रही हैं।</h6>
<p>यह सिर्फ एक संत का जन्मदिन नहीं, बल्कि राधारानी के अनन्य भक्त और सरल भक्ति के प्रतीक का उत्सव है, जिसने लाखों लोगों के जीवन को राधा-नाम से जोड़ दिया है।</p>
<p><span style="background-color:rgb(241,196,15);"><strong>प्रेमानंद जी महाराज युवाओं के प्रेरणा पुरोधा</strong></span></p>
<p>पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज (जिन्हें प्रेमानंद महाराज या प्रेमानंद जी महाराज के नाम से जाना जाता है) का जन्म 30 मार्च 1969 को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वे अंग्रेजी तिथि के बजाय हिंदू पंचांग (विक्रम संवत) के अनुसार चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा/पंचमी के आसपास अपना जन्मोत्सव मनाते हैं, इसी कारण उत्सव मार्च के मध्य (13-19 मार्च) मनाया जाता है। बचपन से ही भक्ति की ज्वाला उनके मन में जल रही थी। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर त्याग दिया और वृंदावन धाम आकर राधा वल्लभ संप्रदाय की शरण में समर्पित हो गए। गुरु कृपा से वे प्रेमानंद गोविंद शरण बने और आज राधा केली कुंज के प्रमुख रसिक संत के रूप में पूरे देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। </p>
<p><strong>2026 जन्मोत्सव: भव्य आयोजन और उत्साह</strong></p>
<p>इस वर्ष जन्मोत्सव 13 मार्च से 19 मार्च 2026 तक धूमधाम से मनाया गया। राधा केली कुंज को फूलों, रंगोली और दिव्य सजावट से सजाया गया। रोजाना विशेष दर्शन, राधा-नाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रसादी वितरण का कार्यक्रम रहा। 19 मार्च को मुख्य उत्सव के दिन भक्तों ने महाराज जी को फूलों की मालाएं चढ़ाईं, आरती उतारी और राधे-राधे का जयघोष किया।</p>
<p><strong>महाराज जी की सरलता और संदेश क्यों इतने लोकप्रिय?</strong></p>
<p>प्रेमानंद जी महाराज की सबसे बड़ी खासियत उनकी सरलता है। कोई आडंबर नहीं, कोई दिखावा नहीं – बस राधा-कृष्ण के प्रेम में डूबे रहना।उनके प्रवचन जटिल शास्त्र नहीं, बल्कि माँ की लोरी जैसे सरल और हृदयस्पर्शी होते हैं। मुख्य संदेश: “राधा नाम ही सब कुछ है। भक्ति में सरलता रखो, प्रेम करो, नाम जपो – यही सच्चा मार्ग है।”वे खुद को राधारानी का दास मानते हैं। उनकी वाणी में वृंदावन की मिट्टी, यमुना की लहरें और रासलीला की मधुरता झलकती है।अमीर-गरीब, युवा-बुजुर्ग सभी के लिए समान प्रेम। उनके दर्शन से हजारों लोग भाव-विभोर होकर रो पड़ते हैं या नाम जपने लगते हैं।आज के युग में जब लोग तनाव और माया में फंसे हैं, महाराज जी की शिक्षाएं जीवन को सरल, सुखी और भक्ति-मय बनाने का मार्ग दिखाती हैं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/images-(20).jpeg" alt="Premanand Ji Maharaj Birthday 2026: वृंदावन में भक्ति महापर्व, 19 मार्च को मनाया गया जन्मोत्सव | Radha Keli Kunj" width="554" height="554"></img></p>
<p>महाराज जी सिखाते हैं कि असली जन्मदिन वह है जब हम अंदर की माया त्यागकर भक्ति में नया जन्म लें। आज के दिन हम सब प्रार्थना करें:“हे प्रेमानंद जी महाराज! आपकी कृपा से हमारा मन राधा नाम में लगे, जीवन प्रेम और शांति से भरा रहे। राधे राधे!”राधे राधे पूज्य महाराज जी को जन्मोत्सव की कोटि-कोटि शुभकामनाएं। आपकी कृपा सदैव बनी रहे। जय श्री हित राधा केली कुंज! जय प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज! </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:42:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांसुरी की धुन तो कहीं ढोल नगाड़ों की आवाज से गूंजी कन्हैया की नगरी</title>
                                    <description><![CDATA[- गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री, डीएम, सीईओ ने ढोल बजाकर लोक कलाकारों का बढ़ाया उत्साह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153964/the-tune-of-the-flute-and-somewhere-the-city-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/16-uphmathura-06d.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मथुरा।</strong> भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकाली गई सांस्कृतिक शोभायात्रा के साथ ही श्रीकृष्णोत्सव 2025 का श्री गणेश हो गया। इसका शुभारंभ गन्ना विकास एंव चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने ढोल बजाकर किया। जिलाधिकारी सीपी सिंह और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह, श्रीकृष्णजन्म स्थान सेवा संस्थान से गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने भी ढोल बजाकर शोभायात्रा में शामिल लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। शोभायात्रा में लोक कलाकारों की लोक लुभावनी प्रस्तुतियों ने समा बाँध दिया। श्रीकृष्ण जन्म स्थान के मुख्य द्वार से शुरु हुई शोभायात्रा में शामिल लोक कलाकारों का जगह जगह स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/16-uphmathura-06c.jpg" alt="बांसुरी की धुन तो कहीं ढोल नगाड़ों की आवाज से गूंजी कन्हैया की नगरी" width="853" height="1280"></img>शोभायात्रा में विभिन्न टोलियों में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जा रही लोक कला को देखकर जन्माष्टमी पर दर्शन को देश विदेश से मथुरा आए श्रद्धालुओं के कदम भी ठहर गए। कहीं मयूर नृत्य था तो कहीं ढोल नगाड़ो की आवाज गूंज रही थी। बांसुरी की धुन पर श्रद्धालुओं के कदम भी झूमने को आतुर हो रहे थे। कई टोली संकीर्तन करते हुए चल रही थी तो कहीं राजस्थानी गुजरियाँ का नृत्य लोगों को आकर्षित करता रहा। बहरूपिए भी अपनी प्रतिभा से लोगों को लुभाते रहे। बीन की आवाज भी लोगों के कानों में रस घोलती रही। जन्मस्थान से शुरु हुई शोभायात्रा  पोतरा कुंड, गोविंद नगर, डीग गेट होते हुए फिर जन्मस्थान पहुंची। शोभायात्रा में मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव अरविंद द्विवेदी, ओएसडी प्रसून द्विवेदी, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अपर सीईओ मदन चंद्र दुबे, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश शर्मा, आरपी यादव, चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, लक्ष्मीकांत वर्मा, विहिप से अमित जैन, एड मुकेश खंडेलवाल, संस्कार भारती से शिवकुमार गुप्ता, सुरेंद्र सक्सेना, मान मंदिर बरसाना से सुनील सिंह, नीरज वशिष्ठ, धर्मेश तिवारी आदि मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:50:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: भक्ति, संस्कृति और जीवन का उत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशेष है। यह केवल भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का पर्व ही नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का भी अवसर है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात के समय, मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के घर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना जाता है, क्योंकि इसी क्षण धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए विष्णु के आठवें अवतार का पृथ्वी पर आगमन हुआ।<br /><strong>ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि</strong><br />महाभारत, भागवत पुराण, विष्णु</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153962/sri-krishna-janmashtami-celebration-of-devotional-culture-and-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/shri-krishna.png" alt=""></a><br /><p>भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशेष है। यह केवल भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का पर्व ही नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का भी अवसर है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, आधी रात के समय, मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के घर श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना जाता है, क्योंकि इसी क्षण धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए विष्णु के आठवें अवतार का पृथ्वी पर आगमन हुआ।<br /><strong>ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि</strong><br />महाभारत, भागवत पुराण, विष्णु पुराण और हरिवंश पुराण जैसे ग्रंथों में श्रीकृष्ण की जन्मकथा विस्तार से वर्णित है। कथा के अनुसार, मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को बंदीगृह में डाल दिया, क्योंकि भविष्यवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। सात संतानों का अंत करने के बाद, आठवें पुत्र के जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं घटित हुईं—कारागार के द्वार स्वतः खुल गए, पहरेदार निद्रा में चले गए और यमुना नदी वसुदेव के मार्ग से हट गई। इस प्रकार बालक कृष्ण को गोकुल में यशोदा और नंद के घर पहुंचाया गया।<br />यह कथा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक भी है।<br /><strong>पूजा और व्रत की परंपराएं</strong><br />कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्तजन प्रातः स्नान कर, व्रत का संकल्प लेते हैं। पूरे दिन उपवास रखा जाता है और रात्रि में निशीथ काल (मध्य रात्रि) में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मंदिरों और घरों में झांकी सजाई जाती है, जिसमें बालक कृष्ण को पालने में विराजमान किया जाता है। माखन-मिश्री, पंचामृत, तुलसी पत्र, और विभिन्न प्रकार के फल भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं।<br /><strong>मुख्य धार्मिक अनुष्ठान</strong><br />झूलन सेवा – भगवान कृष्ण की प्रतिमा को पालने में झुलाया जाता है।<br />अभिषेक – दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।<br />भजन-कीर्तन – मंदिरों में अखंड भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।<br />भागवत कथा – श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का वाचन और श्रवण किया जाता है।<br />सांस्कृतिक उत्सव और ‘दही-हांडी’<br />कृष्ण जन्माष्टमी का एक अत्यंत लोकप्रिय सांस्कृतिक पहलू है दही-हांडी, जो विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह आयोजन श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की उस चंचलता को जीवंत करता है, जब वे अपने मित्रों संग माखन और दही चुराने की लीलाएं करते थे। ऊंचाई पर लटकाई गई मटकी को मानव पिरामिड बनाकर फोड़ना, टीम भावना, साहस और उत्साह का प्रतीक बन चुका है।<br /><strong>भक्ति और दर्शन</strong><br />श्रीकृष्ण का जीवन केवल चमत्कारों से भरा हुआ नहीं, बल्कि गहन दार्शनिक और व्यावहारिक शिक्षाओं से भी परिपूर्ण है। गीता का उपदेश, जो उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन को दिया, आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रासंगिक है—<br />कर्म का महत्व – "कर्मण्येवाधिकारस्ते"<br />असक्ति का भाव – फल की चिंता छोड़ कर कर्म करना।<br />धर्म की रक्षा – अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होना।<br />कृष्ण भक्ति का आधार प्रेम है—ऐसा प्रेम जो न तो जाति-धर्म से बंधा है, न लाभ-हानि से। गोपियों की निस्वार्थ भक्ति इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।<br /><strong>ग्रामीण और शहरी परिवेश में उत्सव</strong><br />ग्रामीण भारत में जन्माष्टमी पर मेलों का आयोजन होता है। गांव के चौपाल या मंदिर में रातभर भजन-कीर्तन, रास-लीला और लोकनृत्य होते हैं। महिलाएं घरों में रंगोली बनाती हैं, दीप जलाती हैं और छोटे-छोटे पदचिह्न सजाकर भगवान के आगमन का स्वागत करती हैं।<br />शहरी क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष सजावट, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी भजन, प्रवचन और लाइव दर्शन का प्रसार होता है, जिससे दूर-दराज के भक्त भी इस उत्सव में भाग ले पाते हैं।<br /><strong>संदेश और आधुनिक प्रासंगिकता</strong><br />आज के दौर में, जब समाज में भौतिकता, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत स्वार्थ बढ़ रहे हैं, कृष्ण जन्माष्टमी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन का सार प्रेम, करुणा और सत्य में है। श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह सिखाता है कि संकट के समय धैर्य रखना, परिस्थिति के अनुसार बुद्धिमानी से कार्य करना और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना ही सच्ची सफलता है।<br />उनका बालरूप मासूमियत का प्रतीक है, यौवन रचनात्मकता और साहस का, और गीता के उपदेश आध्यात्मिक परिपक्वता का।<br /><strong>निष्कर्ष-</strong> कृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सां</p>
<p>स्कृतिक महोत्सव है जो भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोता है। इसमें भक्ति की गहराई, संस्कृति की समृद्धि और जीवन मूल्यों की प्रेरणा एक साथ समाहित हैं। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि अन्याय के अंधकार में भी, यदि विश्वास और धर्म का दीप जलाया जाए, तो विजय निश्चित है।<br /><strong>भगवान कृष्ण की वाणी में —</strong> "जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूं।"<br />इस विश्वास के साथ, हर वर्ष जन्माष्टमी हमें अपने भीतर के कृष्ण को खोजने और जीवन को प्रेम, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा देती है।</p>
<p><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जग कल्याण के लिए होगी महा शिवपुराण कथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>1008 पार्थिव शिव लिंगों का सामूहिक रुद्राभिषेक</strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव।</strong> सिद्धपीठ गोकुल बाबा धाम परिसर में आगामी 16 अगस्त से शुरू होने वाले महा आयोजन की रूप रेखा बताई गयी। वकीलों वाली रामलीला के पास माँ अन्नपूर्णा महायज्ञ के मुख्य यजमान संतोष तिवारी के आवास पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता शैवाचार्य परमपूज्य संत प्रशांत प्रभुदास जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चतुर्थ महा आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन कल्याण और सनातन धर्म को सशक्त करना बताया गया। कथा के मुख्य यजमान देवी प्रसाद साहू व हरिप्रसाद साहू ने सभी का अभिनंदन करते हुए बताया कि कथा प्रतिदिन सायं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133569/lucknows-new-big-thug-%22pushpesh-jalan%22-kalank-katha-5"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/5_8.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>1008 पार्थिव शिव लिंगों का सामूहिक रुद्राभिषेक</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव।</strong> सिद्धपीठ गोकुल बाबा धाम परिसर में आगामी 16 अगस्त से शुरू होने वाले महा आयोजन की रूप रेखा बताई गयी। वकीलों वाली रामलीला के पास माँ अन्नपूर्णा महायज्ञ के मुख्य यजमान संतोष तिवारी के आवास पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता शैवाचार्य परमपूज्य संत प्रशांत प्रभुदास जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चतुर्थ महा आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन कल्याण और सनातन धर्म को सशक्त करना बताया गया। कथा के मुख्य यजमान देवी प्रसाद साहू व हरिप्रसाद साहू ने सभी का अभिनंदन करते हुए बताया कि कथा प्रतिदिन सायं 4 बजे से शुरू होगी। यज्ञ यजमान ललिता तिवारी ने बताया माँ अन्नपूर्णा महायज्ञ प्रतिदिन प्रातः सात बजे से होगा। कथा यजमान संतोष साहू ने बताया समापन दिवस पर एक हज़ार आठ पार्थिव शिव लिंगों का सामूहिक रुद्राभिषेक व महा भंडारा होगा। संयोजक डॉ मनीष सिंह सेंगर ने कहा कि श्री गोकुल बाबा समिति के सक्रिय सहयोग से श्री आदिगुरु वैदिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में ग्यारह दिवसीय महा अनुष्ठान के विश्राम दिवस पर महराजश्री द्वारा भगवान कुबेर के पूजन से भिसिंचित ख़ज़ाने का वितरण सभी को करने के साथ सहयोगियों व पत्रकार बंधुओं का सम्मान मंच से किया जएगा। अध्यक्षता कर रहे प्रशांत प्रभुदास महाराज ने मंत्रोच्चारण के साथ जन कल्याण की प्रार्थना करते हुए बताया कि भगवान शिव की डोला यात्रा प्रतिवर्ष निकालने का संकल्प लिया गया है। 15 अगस्त को सायं 4 बजे भव्य विशाल कलश यात्रा बड़े हनुमान मंदिर परिसर से गाजे बाजे, झांकियों और डमरू यात्रा के साथ निकलेगी। गोकुल बाबा समिति और दिवस यजमान कमल वर्मा, नीलम त्रिपाठी, डॉ सुषमा सिंह, ललित मिश्रा, नितिन सेंगर आदि ने जनपद वासियों से सभी अनुष्ठानों में सपरिवार ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल हो सहयोग करने की अपील की। कथा अध्यक्ष एडवोकेट राजेश त्रिपाठी, संरक्षक डॉ ए के निगम, संजय राठी, संजय शुक्ला, डॉ संजय मिश्रा, डॉ सूर्य प्रकाश दीक्षित, पप्पू अवस्थी, मुलायम सिंह यादव, जीतेन्द्र सिंह, अभिषेक शुक्ला, राहुल कश्यप, अखिल गुप्ता, लक्ष्य निगम आदि आयोजन समिति में होंगे।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 18:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिव पार्वती विवाह प्रसंग सुन भक्त हुए भाव विभोर</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>डलमऊ रायबरेली</strong></div>
<div>  </div>
<div>डलमऊ कस्बे के सहकारी संघ प्रांगण में चल रही नव दिवसीय राम कथा में शिव पार्वती विवाह प्रसंग की कथा सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे अयोध्या से आई कथावाचक शीतम प्रभा जी के द्वारा सुनाई जा रही रामकथा में प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है l</div>
<div>  </div>
<div>मंगलवार को कथावाचक शीतम प्रभा जी द्वारा शिव पार्वती प्रसंग की कथा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया l</div>
<div>  </div>
<div>इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130280/devotees-became-emotional-after-hearing-about-shiva-parvati-marriage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/img-20230607-wa0746.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>डलमऊ रायबरेली</strong></div>
<div> </div>
<div>डलमऊ कस्बे के सहकारी संघ प्रांगण में चल रही नव दिवसीय राम कथा में शिव पार्वती विवाह प्रसंग की कथा सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे अयोध्या से आई कथावाचक शीतम प्रभा जी के द्वारा सुनाई जा रही रामकथा में प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है l</div>
<div> </div>
<div>मंगलवार को कथावाचक शीतम प्रभा जी द्वारा शिव पार्वती प्रसंग की कथा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया l</div>
<div> </div>
<div>इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया l</div>
<div> </div>
<div>विवाह के लिए नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए, लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार किया शिव पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान कथावाचक मंडली द्वारा सुंदर भजन प्रस्तुत किए गए इस दौरान भक्त कथा सुनकर मंत्रमुग्ध हो गए और भजनों पर जमकर झूमे</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 20:43:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाबा गणिनाथ नगर में देवी–देवता मंदिर निर्माण हेतु धूमधाम से हुआ भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[देवी देवताओं के मंदिर निर्माण से बाबा गणिनाथ नगर में हैं खुशी का माहौल ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126139/bhoomi-poojan-done-with-great-pomp-for-the-construction-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/फोटो-43.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर।</strong>पड़रौना नगरपालिका के बाबा गणिनाथ नगर परसौनी कला में जनसहयोग से दुर्गाजी व हनुमान जी के मंदिर निर्माण को लेकर गुरुवार को भूमि पूजन किया गया। आचार्य सुरेश दुबे, दिनेश दुबे और सुनील मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कार्य संपन्न कराया। यजमान संतोष दुबे व ग्रामीणों ने पूजन कार्य में भाग लिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए . </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नपाध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष जायसवाल ने फीता काट कर व ईट रखकर मंदिर के शिलान्यास की प्रक्रिया शुरू करवाया मनीष बुलबुल जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि यज्ञ पूजन व हवन से वातावरण शुद्ध होता है। इस मंदिर के निर्माण में हर संभव मदद होगी। उन्होंने बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है। जिस तरह अयोध्या मथुरा काशी उज्जैन में मंदिरों के कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है उसी तरह पालिका पडरौना भी लगातार अपनी सीमा में स्थित सभी ब्रम्हस्थानों मंदिरों मठों का विकास करने में लगी हुई है।पूजन कार्य में मालती देवी दुलारी देवी शकुंतला देवी प्रियंका देवी रीता कुमारी सोनी कुमारी सज्जन गुप्ता वीरेंद्र दुबे ,जय प्रकाश दुबे, धर्मेंद्र दुबे ,रोहन, ऋषभ, शिवेंद्र , पप्पू मद्धेशिया नीतीश, सुरेश दुबे ,गिरधारी दुबे, चंदन दुबे, शैलेंद्र दुबे ,अखिल तिवारी ,वीरेंद्र दुबे आलोक विश्वकर्मा दीपक जायसवाल ब्रजेश शर्मा गौरव चौबे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/126139/bhoomi-poojan-done-with-great-pomp-for-the-construction-of</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 09:58:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पिंजरापोल गौशाला में पांच दिवसीय हरिकथामृत का मनीष जायसवाल ने किया शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा प्रस्तुति हरिकथा का श्रद्धालु ले रहे आनंद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125713/inauguration-of-five-day-harikthamrit-at-pinjrapole-gaushala-of-padrauna"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-11/img-20221127-wa0000.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर। </strong>दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री हरिकथामृत का भव्य शुभारंभ शनिवार को नगर के पिंजरापोल गौशाला प्रांगण में हुआ। पाँच दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन नगरपालिका अध्यक्ष विनय जायसवाल के निर्देशन में उनके प्रतिनिधि मनीष जायसवाल ने प्रकाश व्यवस्था के अलावा टेंट, माइक, जलपान के अलावा अन्य व्यवस्था सुनिश्चित की। बता दें कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्था है जो समाज को सशक्त बनाने एवं मानव व्यक्तित्व के विकास हेतु कार्यरत है तथा भारतीय वैदिक संस्कृति व परम्परा के क्षेत्र में लगातार प्रयासरत है।संस्थान की आधारभूत शिला ब्रम्हज्ञान है।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2022-11/img-20221127-wa0001.jpg" alt="IMG-20221127-WA0001"></img></div>
<div style="text-align:justify;">गुरुदेव श्री आशुतोष जी महाराज के महान उद्देश्य विश्वशांति की पूर्ति हेतु संस्थान में हजारों की संख्या में शिष्य शिष्याएं कर्मठता व स्वेच्छापूर्वक समाज कल्याण हेतु निरन्तर संलग्न है। कार्यक्रम के प्रथम दिन के माध्यम से लोगों को अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास किया गया ताकि लोग ईश्वर की शास्वत भक्ति से जुड़कर अपने जीवन का कल्याण कर पाएं। बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पधारे नपाध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष जायसवाल ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज मे एकजुटता के अलावा मनुष्य में भारतीय सनातन संस्कृति के जागरण का कार्य करते हैं। कार्यक्रम में स्वामी अर्जुनानंद जी, विश्वरूपानंद जी, साध्वी करुणा भारती जी , साध्वी सुबुद्धा भारती जी, श्रीमती सुनीता बंका जी सहित ब्रजेश शर्मा, आलोक विश्वकर्मा, पिंटू कुमार के अलावा सैंकड़ों की संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Nov 2022 06:55:43 +0530</pubDate>
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