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                <title>taxpayer money misuse - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>taxpayer money misuse RSS Feed</description>
                
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                <title>पहली बारिश में बह गया विकास</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर-खीरी, फूलबेहड़।</strong> सांच को आंच नहीं"और "समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता" ये कहावतें उस समय चरितार्थ होती दिखीं, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ग्राम लौकिहा से इब्राहिमपुर संपर्क मार्ग पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गया। जिस सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बताया गया था, वही अब खतरे का रास्ता बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई। सड़क की डामर परत उखड़ गई, किनारे धंस गए और नीचे की मिट्टी खुलकर बाहर आ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तस्वीरें इस बात की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183977/development-washed-away-in-the-first-rain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/photo-01.........jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर-खीरी, फूलबेहड़।</strong> सांच को आंच नहीं"और "समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता" ये कहावतें उस समय चरितार्थ होती दिखीं, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ग्राम लौकिहा से इब्राहिमपुर संपर्क मार्ग पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गया। जिस सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बताया गया था, वही अब खतरे का रास्ता बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई। सड़क की डामर परत उखड़ गई, किनारे धंस गए और नीचे की मिट्टी खुलकर बाहर आ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।चोर की दाढ़ी में तिनका","ऊँची दुकान, फीका पकवान", और हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और" जैसी कहावतें ग्रामीणों की जुबान पर हैं। उनका कहना है कि कागजों में सड़क मजबूत दिखाई गई, लेकिन हकीकत पहली बारिश में ही सामने आ गई।  स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन किसान, छात्र, एंबुलेंस, स्कूल वाहन और भारी वाहन गुजरते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क धंसने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सड़क का पुनर्निर्माण मानकों के अनुरूप कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कहावत है_ झूठ के पांव नहीं होते, और सच्चाई देर से सही लेकिन सामने जरूर आती है।" पहली ही बरसात ने सड़क निर्माण की असलियत उजागर कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता के टैक्स के लाखों रुपये की जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जनता की निगाहें अब लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 22:47:47 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम की 'अजब' नीति: ठीक-ठाक नाली का नवनिर्माण, जर्जर को भगवान भरोसे छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> स्मार्ट सिटी की राह पर चल रहे कानपुर में नगर निगम के कारनामे विकास की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। गोविन्द नगर क्षेत्र में नगर निगम ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी का एक ऐसा नमूना पेश किया है, जिसे देख क्षेत्रीय जनता दंग है। जहाँ एक ओर जर्जर नाली के कारण लोग चोटिल हो रहे हैं और घरों की नींव खतरे में है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए एक 'भली-चंगी' नाली को तोड़कर दोबारा बनवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​क्या है पूरा मामला?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गोविन्द नगर दक्षिण के नंदलाल चौराहा से चावला मार्केट चौराहा तक जाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177049/strange-policy-of-municipal-corporation-new-construction-of-fine-drain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/0.0047.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> स्मार्ट सिटी की राह पर चल रहे कानपुर में नगर निगम के कारनामे विकास की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। गोविन्द नगर क्षेत्र में नगर निगम ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी का एक ऐसा नमूना पेश किया है, जिसे देख क्षेत्रीय जनता दंग है। जहाँ एक ओर जर्जर नाली के कारण लोग चोटिल हो रहे हैं और घरों की नींव खतरे में है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए एक 'भली-चंगी' नाली को तोड़कर दोबारा बनवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​क्या है पूरा मामला?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गोविन्द नगर दक्षिण के नंदलाल चौराहा से चावला मार्केट चौराहा तक जाने वाली ब्लाक-8 पट्टी की नाली पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर है। नाली धंसने के कारण न केवल जलभराव होता है, बल्कि ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं। क्षेत्रीय व्यापारियों और निवासियों ने इसकी दर्जनों बार शिकायत की। हद तो तब हो गई जब क्षेत्रीय विधायक महेश त्रिवेदी के अनुशंसा पत्र को भी अधिकारियों ने कूड़े के ढेर में डाल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">​अधिकारियों ने दी 'आश्वासन की घुट्टी'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रीय निवासी प्रकाश वीर आर्य द्वारा IGRS पर की गई शिकायत के जवाब में नगर निगम के अधिशासी अभियंता और अवर अभियंता ने लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि विद्यार्थी मार्केट पट्टी (जो पहले से ठीक थी) का काम खत्म होते ही ब्लाक-8 वाली जर्जर पट्टी का निर्माण शुरू होगा। लेकिन विडंबना देखिए, विद्यार्थी मार्केट का काम खत्म हुए तीन महीने बीत गए, मगर जर्जर नाली की तरफ विभाग ने मुड़कर भी नहीं देखा।</div>
<div style="text-align:justify;">​भ्रष्टाचार की बू या लापरवाही?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यापारियों का सीधा आरोप है कि नगर निगम ने कमीशनखोरी के चक्कर में उस पट्टी की नाली बनवा दी जिसे मरम्मत की जरूरत ही नहीं थी। "बनी-बनाई नाली को दोबारा बनाना सरकारी पैसे की खुली डकैती है," यह कहना है क्षेत्रीय व्यापारियों का। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने जानबूझकर मुश्किल काम (जर्जर नाली) को छोड़ दिया और आसान काम (मजबूत नाली) दिखाकर बजट ठिकाने लगा दिया। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर ब्लाक-8 पट्टी की नाली का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे नगर निगम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल और एंटी-करप्शन ब्यूरो में करेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:32:43 +0530</pubDate>
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