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                <title>municipal corporation negligence - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>municipal corporation negligence RSS Feed</description>
                
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                <title>10 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी प्रयागराज की सड़कें बनीं तालाब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> शहर में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या एक बार फिर नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावों के बावजूद कई प्रमुख सड़कें और चौराहे बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो गए। लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दोपहिया और चारपहिया वाहन जलभराव में फंस रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नगर निगम द्वारा मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद शहर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184301/even-after-spending-rs-10-crore-the-roads-of-prayagraj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260729-wa0177.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> शहर में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या एक बार फिर नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावों के बावजूद कई प्रमुख सड़कें और चौराहे बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो गए। लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दोपहिया और चारपहिया वाहन जलभराव में फंस रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर निगम द्वारा मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में बारिश के कुछ ही घंटों बाद सड़कें पानी से लबालब भर गईं। इससे नगर निगम की तैयारियों और कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलभराव की बढ़ती शिकायतों और आमजन की नाराजगी को देखते हुए नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं के साथ विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा तत्काल जलनिकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने कहा कि जहां भी लापरवाही या कार्य में अनियमितता पाई जाएगी, वहां संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में लोगों को घंटों तक जलभराव की समस्या झेलनी पड़ी। व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ, जबकि स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नगर निगम की 'अजब' नीति: ठीक-ठाक नाली का नवनिर्माण, जर्जर को भगवान भरोसे छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> स्मार्ट सिटी की राह पर चल रहे कानपुर में नगर निगम के कारनामे विकास की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। गोविन्द नगर क्षेत्र में नगर निगम ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी का एक ऐसा नमूना पेश किया है, जिसे देख क्षेत्रीय जनता दंग है। जहाँ एक ओर जर्जर नाली के कारण लोग चोटिल हो रहे हैं और घरों की नींव खतरे में है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए एक 'भली-चंगी' नाली को तोड़कर दोबारा बनवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​क्या है पूरा मामला?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गोविन्द नगर दक्षिण के नंदलाल चौराहा से चावला मार्केट चौराहा तक जाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177049/strange-policy-of-municipal-corporation-new-construction-of-fine-drain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/0.0047.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> स्मार्ट सिटी की राह पर चल रहे कानपुर में नगर निगम के कारनामे विकास की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। गोविन्द नगर क्षेत्र में नगर निगम ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी का एक ऐसा नमूना पेश किया है, जिसे देख क्षेत्रीय जनता दंग है। जहाँ एक ओर जर्जर नाली के कारण लोग चोटिल हो रहे हैं और घरों की नींव खतरे में है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए एक 'भली-चंगी' नाली को तोड़कर दोबारा बनवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​क्या है पूरा मामला?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गोविन्द नगर दक्षिण के नंदलाल चौराहा से चावला मार्केट चौराहा तक जाने वाली ब्लाक-8 पट्टी की नाली पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर है। नाली धंसने के कारण न केवल जलभराव होता है, बल्कि ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं। क्षेत्रीय व्यापारियों और निवासियों ने इसकी दर्जनों बार शिकायत की। हद तो तब हो गई जब क्षेत्रीय विधायक महेश त्रिवेदी के अनुशंसा पत्र को भी अधिकारियों ने कूड़े के ढेर में डाल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">​अधिकारियों ने दी 'आश्वासन की घुट्टी'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रीय निवासी प्रकाश वीर आर्य द्वारा IGRS पर की गई शिकायत के जवाब में नगर निगम के अधिशासी अभियंता और अवर अभियंता ने लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि विद्यार्थी मार्केट पट्टी (जो पहले से ठीक थी) का काम खत्म होते ही ब्लाक-8 वाली जर्जर पट्टी का निर्माण शुरू होगा। लेकिन विडंबना देखिए, विद्यार्थी मार्केट का काम खत्म हुए तीन महीने बीत गए, मगर जर्जर नाली की तरफ विभाग ने मुड़कर भी नहीं देखा।</div>
<div style="text-align:justify;">​भ्रष्टाचार की बू या लापरवाही?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यापारियों का सीधा आरोप है कि नगर निगम ने कमीशनखोरी के चक्कर में उस पट्टी की नाली बनवा दी जिसे मरम्मत की जरूरत ही नहीं थी। "बनी-बनाई नाली को दोबारा बनाना सरकारी पैसे की खुली डकैती है," यह कहना है क्षेत्रीय व्यापारियों का। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने जानबूझकर मुश्किल काम (जर्जर नाली) को छोड़ दिया और आसान काम (मजबूत नाली) दिखाकर बजट ठिकाने लगा दिया। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर ब्लाक-8 पट्टी की नाली का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे नगर निगम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल और एंटी-करप्शन ब्यूरो में करेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:32:43 +0530</pubDate>
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