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                <title>शांति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शांति RSS Feed</description>
                
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                <title>शांति की बातें, युद्ध की तैयारी: सभ्यता का दोहरा चेहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आसमान अभी भी धुंध और धुएँ से भरा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमारी आँखें टीवी स्क्रीन पर चमकते लाल ब्लॉकों में फँस गईं। एक पल पहले तक यह सिर्फ़ खबरें थीं—और अगले ही पल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी ज़िन्दगी बन गई। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया। </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को की। इस खबर ने दुनिया को झकझोर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमारे भीतर का झटका और भी गहरा था। यह कोई दूर की लड़ाई</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172185/talks-of-peace-preparation-for-war-the-double-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आसमान अभी भी धुंध और धुएँ से भरा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमारी आँखें टीवी स्क्रीन पर चमकते लाल ब्लॉकों में फँस गईं। एक पल पहले तक यह सिर्फ़ खबरें थीं—और अगले ही पल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी ज़िन्दगी बन गई। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया। </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को की। इस खबर ने दुनिया को झकझोर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमारे भीतर का झटका और भी गहरा था। यह कोई दूर की लड़ाई नहीं थी—यह हमारी किताबों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी दीवारों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सांसों में उतर गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल की किताबें अब कागज़ नहीं रह गई थीं। वे बम के टुकड़ों में बदल गई थीं। हर पन्ना खून से सना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर अध्याय मौत की कहानी कहता था। बच्चे अब पढ़ेंगे कि छिपना और बचना ही उनका पाठ बन गया। हमारी पीढ़ी ने उन्हें विरासत दी है—एक ऐसी विरासत जिसमें ज्ञान और भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों सिखाए जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने शांति की बातें कीं। “डिप्लोमेसी चलेगी</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा। लेकिन </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फ़रवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को ऑपरेशन शुरू हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी आँखें फिर अंधेरी हो गईं। टीवी बंद हुआ। सोशल मीडिया को स्क्रॉल करते हुए सोचा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी दुनिया से दूर है।” लेकिन यह सच नहीं था। ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इज़राइल पर मिसाइलें गिरीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्बुल्लाह सक्रिय हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और गल्फ़ में तेल सुविधाओं और जहाजों पर हमले हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आग और विस्फोट की खबरें आईं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और हम</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हम खून से सनी किताबें तैयार कर रहे हैं। किताबें जो नई पीढ़ी को पढ़ाएंगी कि उनका भविष्य किस तरह जलता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उनकी आवाज़ कहाँ गुम हो गई। यह हमारी सच्चाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी चुप्पी—सबसे बड़ा अपराध।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह युद्ध नया नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमने इसे अपनी विरासत बना लिया है। </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब इज़राइल ने ईरान पर हमला किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने इसे सिर्फ़ “सीमित संघर्ष” कहकर नजरअंदाज किया। जब ट्रंप ने घोषणा की कि “ईरान को न्यूक्लियर हथियार नहीं मिलेंगे</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने उसकी चेतावनी को हँसी में उड़ा दिया। लेकिन अब</span>, 2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ख़ामेनेई की मौत के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेहरान में नागरिक क्षेत्र प्रभावित हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों और स्कूलों पर असर की खबरें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामने आ रही हैं। हमारी पीढ़ी ने चुन लिया है – बच्चों को खून भरी किताबें थमाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हथियार बेचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तेल के लिए आंखें मूंद लेना। और वही बच्चे अब पढ़ेंगे – हर अध्याय में मौत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर पन्ने पर खून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जिन किताबों में जीवन का कोई पाठ नहीं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक बच्चा अपनी माँ से पूछेगा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">माँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह किताब क्यों लाल है</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">और जवाब नहीं मिलेगा। क्योंकि यह लाल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह खून से सनी थी। हमारी पीढ़ी ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">हम लड़ रहे हैं ताकि तुम सुरक्षित रहो</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लड़ाई किससे थी – खुद से</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने घृणा बोई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नफ़रत उगाई। “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” की छाया में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार का बोझ बच्चों पर पड़ा। युद्ध की छाया में रेडिएशन का खतरा मंडरा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर और बीमारियाँ पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती हैं। हमने उन्हें क्या विरासत दी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी किताबें जिनमें हर जन्म मौत की सज़ा पढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जिनमें जीवन का कोई पाठ नहीं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ़ मिडिल ईस्ट की समस्या नहीं है। वर्ल्ड वॉर थ्री की आहट अब हर दिशा में गूँज रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर ख़बर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर रेडियो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर स्क्रीन पर इसकी गूंज सुनाई देती है। पोल्स चीख रहे हैं – अमेरिका में </span>46%, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटेन में </span>43%, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस में उच्च प्रतिशत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जर्मनी में कम लोग अगले पाँच साल में ग्लोबल वॉर को संभावित मानते हैं। लेकिन हम सुन नहीं रहे। हम अपनी आँखें बंद करके नई पीढ़ी के लिए खून से सनी किताबें तैयार कर रहे हैं। बच्चे पढ़ेंगे – ऐसी किताबें जो न्यूक्लियर विंटर की कहानियाँ कहेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ सूरज छिपा रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ फसलें उगना भूल जाएँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भूख ही मृत्यु का दूसरा नाम बन जाएगी। यह हमारी विरासत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके साए में बढ़ती हर पीढ़ी अपनी पहली और आखिरी पाठशाला में मौत और विनाश ही देखेगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने जलवायु परिवर्तन को अनदेखा किया। हमने युद्ध को सामान्य मान लिया। अब इसकी कीमत चुकाने वाली नई पीढ़ी होगी। उनकी पहली किताब विस्फोट की होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी आखिरी राख की। उनका डीएनए बदल चुका होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका बचपन डर और सायरन की चीखों में बीतेगा। उनके खेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि खतरे की घंटियों की गूँज उनके कानों में गूँजेगी। हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा अपराध यही है – युद्ध को अपनी विरासत बनाना। हमने किताबें लिखीं – खून से। लेकिन अब वही किताबें उनकी पहली और आखिरी पढ़ाई बन चुकी हैं। नई पीढ़ी पढ़ेगी और समझेगी कि हमने क्या किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यह समझ उन्हें हमारे फैसलों की कीमत बतलाएगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जागने का वक्त है – इससे पहले कि खून से सनी किताबें बच्चों की पहली और आखिरी पढ़ाई बन जाएँ। जागो। बदलो। लड़ो। क्योंकि अगर हमने अभी नहीं बदला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नई पीढ़ी सिर्फ़ खून के पन्ने पलटेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हर सवाल के जवाब के लिए हमारी चुप्पी ही रह जाएगी। बच्चे पूछेंगे</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">तुमने हमें क्यों मारा</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा। अब मौका है – युद्ध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शांति की विरासत देने का। हमारी जिम्मेदारी अब तक़दीर बदलने की है। नई पीढ़ी के लिए खून नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा छोड़ो। यही हमारी अंतिम लड़ाई है – आखिरी मौका सुधार का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आखिरी मौका यह दिखाने का कि हम अभी भी अपने कर्मों के प्रभारी हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी विरासत है। हमने बच्चों को किताबें सौंप दी हैं – खून से सनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आँसुओं से भरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पीढ़ियों तक उठती चोटों की गूँज समेटे। यह हमारी चुप्पी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी लालच का सजीव प्रमाण है। अब समय है कि हम बदलें। हमें नई पीढ़ी को देने वाली किताबों से खून हटाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें केवल शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति और आशा की विरासत देनी होगी। यही हमारी अंतिम मौका है – अगर हमने अब कदम नहीं उठाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल का सूरज कभी नई पीढ़ी के लिए पूरी तरह चमकेगा ही नहीं। यह हमारी जिम्मेदारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी चेतावनी भी – बदलाव अब अनिवार्य है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरही प्रखंड में शांति व सौहार्द के साथ संपन्न हुआ त्याग और बलिदान का पर्व मुहर्रम </title>
                                    <description><![CDATA[<h3>बरही प्रखंड में शांति व सौहार्द के साथ संपन्न हुआ त्याग और बलिदान का पर्व </h3>
<p><strong>संवाददाता : बरही</strong></p>
<p>मुहर्रम पर्व बरही में शांति व सौहार्द के साथ सम्पन्न हुआ। आज के दिन ही हजरत हुसैन शहीद हुए थे। उनके शहीद  की याद में मुहर्रम पर्व मनाया जाता है। हजरत हुसैन शहीद होकर यजीद के नपाक इरादे को बर्बाद कर दिया था और इंसानियत के परचम को ऊँचा रखा था। हजरत हुसैन की शहादत को गमगीन याद में लोगो ने आंसू भरे विदाई दिया। साथ ही उनके कष्ट भरे जीवन को अपने मूलरूप में अनुभव करते हुए और इमाम के घोड़े</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132977/muharram-the-festival-of-sacrifice-and-sacrifice-concluded-with-peace"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/27.jpg" alt=""></a><br /><h3>बरही प्रखंड में शांति व सौहार्द के साथ संपन्न हुआ त्याग और बलिदान का पर्व </h3>
<p><strong>संवाददाता : बरही</strong></p>
<p>मुहर्रम पर्व बरही में शांति व सौहार्द के साथ सम्पन्न हुआ। आज के दिन ही हजरत हुसैन शहीद हुए थे। उनके शहीद  की याद में मुहर्रम पर्व मनाया जाता है। हजरत हुसैन शहीद होकर यजीद के नपाक इरादे को बर्बाद कर दिया था और इंसानियत के परचम को ऊँचा रखा था। हजरत हुसैन की शहादत को गमगीन याद में लोगो ने आंसू भरे विदाई दिया। साथ ही उनके कष्ट भरे जीवन को अपने मूलरूप में अनुभव करते हुए और इमाम के घोड़े के रूप में पैकवाहा बनकर सारे नगर में बने इमाम के चौके में झूमते नजर आयें। हजरत इमाम हुसैन की शहादत के अवसर बरही प्रखंड के विभिन्न पंचायतो के लगभग दर्जनों अखाड़े और उनके खिलाड़ी अपना खेल का प्रदर्शन किये। प्रदर्शनकारी क्लबों ने अनेको किस्म की मिसाइल बनाकर प्रदर्शन किया। इसे देखने के लिए काफी संख्या में हर क्षेत्र के लोग भारी तादात में पहुंचकर खेल व झांकी का आनंद उठाया। इस अवसर पर इमाम हुसैन, या अली के नारे की धूम रही। दसवीं के दिन क्लब के सारे झाकियां व ताजिया रोड चौराहे के चारो तरफ घूमकर आकर्षक प्रदर्शन किया। इस पर्व को मुस्लिम हिन्दू मिलकर बड़ी सौहार्द के साथ मनाये। जिसको देखकर लोंगो को लगा कि बरही में हिन्दू व मुस्लिम के बीच एकता एक मिसाल है। समाजसेवियों द्वारा पब्लिक सेवा के लिए कई स्थानों पर स्टॉल की व्यवस्था की गई थी। बरही प्रशासन द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था। बरही चौक स्थित प्रशासनिक स्तर के पदाधिकारी बैठक कर स्वयं निगरानी कर रहे थे।</p>
<p>मौके पर बरही एसडीओ पूनम कुजुर, एसडीपीओ नाजिर अख्तर, सीओ अरविंद देवाशीष टोप्पो, बरही पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी रोहित कुमार सिंह मौजूद थे। कांग्रेस प्रखण्ड अध्यक्ष अब्दुल मनान वारसी, 20 सूत्री अध्यक्ष इकबाल रजा, सामाजिक कार्यकर्ता भगवान केशरी, रसोइया धमना मो तस्लीम, मो तौकीर रजा, मो वारिस अंसारी, मो ताजुद्दीन, मो तैयब, मो सागिर, रिजवान अली, मो कलीम, मो तबरेज अंसारी, आजाद हुसैन, मो कमाल, जियाउद्दीन सहित अन्य लोग शामिल थे। बताते चलें कि गांगुली निषाद, गणेश निषाद, संदीप निषाद, दीपू निषाद, शिवा निषाद, हरि निषाद भी मल्लाहटोली में तजियां उठाकर सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। वें लोग लगभग कई वर्षों से तजियां उठा रहे हैं। वे लोगों का मानना हैं कि मल्लाह टोली में हिन्दू-मुस्लिम भाई आपस में मिलकर गंगा-जमुना के तहजीब को प्रस्तुत करते हैं। न केवल मुसलमान, बल्कि बड़ी तादात में हिंदू भी इमाम के रोजे की ताजिया बनाते हैं। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर बरही के इलाकों में कई हिंदू घरों में ताजिया बनाने का काम होता है। इधर दुलमहा में हिन्दू कल्याण समिति ट्रस्ट के द्वारा मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों का स्वागत करते हुए पानी एवं अल्पाहार की व्यवस्था की गई। जिसमें मुखिया नारायण यादव, पूर्व पंसस सह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जीतेन्द्र गिरी, हिन्दू कल्याण समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल शंकर पंडित, सचिव दिनेश राणा, सागर कुमार, प्रभु यादव, अनिल साव, मोहम्मद बेलाल, मोहम्मद इस्लाम, मोहम्मद मिनहाज, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद इरफान, रंजीत पंडित, सुरेंद्र यादव, सुनील भुइयां, कृष्णा भुईयां, उमेश पंडित, अंकित पंडित सहित दोनों समुदाय के अन्य लोग उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 19:21:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jharkhand Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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