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                <title>India Parliament Debate - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>सांसदों के 'अपमान' पर पीएम के ख़िलाफ़ प्रिविलेज नोटिस- ‘सत्ता का खुला दुरुपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस यानी विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विशेषाधिकार हनन का मतलब है कि संसद के सदस्य के अधिकारों का अपमान किया गया या गलत आरोप लगाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर उंगली उठाई और उनकी वोटिंग पर गलत मंशा बताई, जो संसद के नियमों का साफ़-साफ़ उल्लंघन है।</div>
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<div style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को यह नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का 18 अप्रैल को राष्ट्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177021/privilege-notice-against-pm-for-insulting-mps-blatant-abuse"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस यानी विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विशेषाधिकार हनन का मतलब है कि संसद के सदस्य के अधिकारों का अपमान किया गया या गलत आरोप लगाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर उंगली उठाई और उनकी वोटिंग पर गलत मंशा बताई, जो संसद के नियमों का साफ़-साफ़ उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को यह नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम 29 मिनट का संबोधन 'सत्ता का खुला दुरुपयोग' है और यह संसद की गरिमा को ठेस पहुँचाता है।लोकसभा में 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर वोटिंग हुई। यह विधेयक महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण जल्द लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने से जुड़ा था। लेकिन इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने से विधेयक पास नहीं हो सका। इसके अगले दिन यानी 18 अप्रैल की रात प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों की ‘भ्रूण हत्या’ कर दी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने संकीर्ण राजनीति के कारण महिलाओं के सपनों को कुचल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस प्रिविलेज नोटिस को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है, 'मेरे लोकसभा में वरिष्ठ सहयोगी के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपनी बुरी योजना के विफल होने के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। उन्हें इस हार की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। हार की वजह थी- पूरे विपक्ष का एकजुट होकर साथ खड़ा होना। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधन हमेशा सिर्फ देश की एकता और लोगों में विश्वास बढ़ाने के लिए ही दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खुलेआम पक्षपातपूर्ण और भड़काऊ भाषण दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर 59 बार अलग-अलग हमले किए। यह उनके प्रधानमंत्री काल पर एक और स्थायी दाग होगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">के.सी. वेणुगोपाल ने नोटिस में लिखा, 'प्रधानमंत्री ने विपक्षी सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सीधा टिप्पणी की और उनकी मंशा पर सवाल उठाया। सांसदों पर यह कहना कि उन्होंने संविधान की रक्षा नहीं की, बल्कि महिलाओं के साथ अन्याय किया– यह सांसदों की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर अस्पष्ट टिप्पणी है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा, 'संसद की पुरानी परंपरा और अनुच्छेद 105 के तहत किसी भी सदस्य के आचरण या वोटिंग पर बाहर से टिप्पणी नहीं की जा सकती है, खासकर प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद वाले व्यक्ति द्वारा। यह संसद की गरिमा और सांसदों के स्वतंत्र रूप से काम करने के अधिकार का उल्लंघन है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:11:46 +0530</pubDate>
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