<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/79428/railway-infrastructure" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Railway Infrastructure - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/79428/rss</link>
                <description>Railway Infrastructure RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रीभूमि सोनबील क्षेत्र के फाकुआ स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के दो मिनट ठहराव की मांग तेज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>                  अनुसूचित जाति बहुल सोनबील क्षेत्र के फाकुआ गांव के विकास और क्षेत्रवासियों की यातायात सुविधा को ध्यान में रखते हुए गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के फाकुआ रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो मिनट के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। गुवाहाटी से दुल्लभछड़ा तक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू होने से असम के विभिन्न क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा मिल रही है। स्थानीय लोगों ने इसके</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186663/demand-for-two-minute-stoppage-of-express-train-at-fakua-station"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001746318.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात:</strong>         अनुसूचित जाति बहुल सोनबील क्षेत्र के फाकुआ गांव के विकास और क्षेत्रवासियों की यातायात सुविधा को ध्यान में रखते हुए गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के फाकुआ रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो मिनट के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। गुवाहाटी से दुल्लभछड़ा तक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू होने से असम के विभिन्न क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा मिल रही है। स्थानीय लोगों ने इसके लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए फाकुआ में भी ट्रेन के ठहराव की मांग उठाई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों के अनुसार, फाकुआ रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर वर्ष 2024 से ही मालीगांव स्थित रेलवे के संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं होने से लोगों में निराशा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि फाकुआ रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सोनबील क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोनबील की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए विभिन्न स्थानों से विद्यार्थी, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि तथा सरकारी विभागों के अधिकारी भी पहुंचते हैं। ऐसे में फाकुआ स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव होने से पर्यटकों और अन्य यात्रियों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों के अनुसार, सोनबील क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग मछली पालन, कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के अनेक मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। फाकुआ में ट्रेन का ठहराव होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को आवागमन में काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होने तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। इसी मांग को लेकर करीमगंज सांसद कृपानाथ मालाह तथा जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त एडीसी नीलमणि दास ने मालीगांव स्थित रेलवे के जीएम और डीआरएम से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर फाकुआ में ट्रेन के ठहराव की आवश्यकता से अवगत कराया था। उल्लेखनीय है कि गत 17 मार्च 2026 को लोकसभा में सांसद कृपानाथ मल्लाह ने दुल्लभछड़ा-गुवाहाटी एक्सप्रेस के फाकुआ सहित अरजीपुर और बिदारा स्टेशनों पर ठहराव की मांग भी उठाई थी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं होने के कारण नीलमणि दास ने गत 26 अगस्त को एक बार फिर श्रीभूमि जिले के प्रभारी जिला आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान मालीगांव स्थित रेलवे के जीएम को संबोधित एक अनुस्मारक पत्र भी सौंपा गया। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की संयुक्त पहल से फाकुआ रेलवे स्टेशन पर गुवाहाटी-दुल्लभछड़ा एक्सप्रेस ट्रेन को जल्द ही कम से कम दो मिनट का ठहराव मिलेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ट्रेन का महज दो मिनट का ठहराव भी फाकुआ और आसपास के पिछड़े क्षेत्रों के लिए शिक्षा, पर्यटन, रोजगार, व्यापार और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब लोगों की नजर रेलवे के निर्णय पर टिकी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186663/demand-for-two-minute-stoppage-of-express-train-at-fakua-station</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186663/demand-for-two-minute-stoppage-of-express-train-at-fakua-station</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:32:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1001746318.jpg"                         length="97006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> राजकुमार वानखेड़े ने ग्रहण किया  उत्तर मध्य रेलवे के अपर महाप्रबंधक का पदभार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  राजकुमार वानखेड़े 1990 बैच के आई. आर. एस. ई. अधिकारी हैं। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, औरंगाबाद से बीई (सिविल) और आईआईटी-मुंबई से एम टेक किया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए कई डिवीज़न और ज़ोनल रेलवे में काम किया है, जिनमें पश्चिमी रेलवे के रतलाम और वड़ोदरा डिवीज़न, दक्षिण मध्य रेलवे का नांदेड़ डिवीज़न, पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के निर्माण संगठन, RITES, नागपुर मेट्रो आदि शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डिवीज़न में काम करते हुए उनका संरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है। उन्होंने सुरंगों और गहरी कटिंग (deep cuttings) के लिए</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184474/rajkumar-wankhede-assumed-the-charge-of-additional-general-manager-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260801-wa0102.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> राजकुमार वानखेड़े 1990 बैच के आई. आर. एस. ई. अधिकारी हैं। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, औरंगाबाद से बीई (सिविल) और आईआईटी-मुंबई से एम टेक किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए कई डिवीज़न और ज़ोनल रेलवे में काम किया है, जिनमें पश्चिमी रेलवे के रतलाम और वड़ोदरा डिवीज़न, दक्षिण मध्य रेलवे का नांदेड़ डिवीज़न, पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के निर्माण संगठन, RITES, नागपुर मेट्रो आदि शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिवीज़न में काम करते हुए उनका संरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है। उन्होंने सुरंगों और गहरी कटिंग (deep cuttings) के लिए कई नए और बेहतर सुरक्षा/मजबूतीकरण के काम किए, राजधानी रूट पर गति बढ़ाने के उपाय किए, और लंबे समय की सुरक्षा और नीतिगत पहलों (जैसे अतिक्रमण हटाना) के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्हें पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के निर्माण क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। पश्चिम रेलवे के निर्माण क्षेत्र में काम करते हुए, उन्होंने EPC कॉन्ट्रैक्ट, कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने और स्थापित करने तथा तेज़ी से ज़मीन अधिग्रहण करने में अहम भूमिका निभाई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्माण संगठन में, उन्होंने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में नई लाइन/दोहरीकरण/मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स के तहत सुरंगों और कई महत्वपूर्ण/बड़े पुलों का निर्माण किया। उन्हें ट्रैक, पुलों और सुरंगों के एसेट मैनेजमेंट का अच्छा अनुभव है, साथ ही नागपुर मेट्रो के प्रोजेक्ट हेड के तौर पर मेट्रो निर्माण का भी गहरा अनुभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे में बड़ी आपदाओं के बावजूद, एसेट मैनेजमेंट, क्षमता निर्माण और सुधार, तथा आपदाओं के समय तेज़ी से प्रतिक्रिया देने और उन्हें कम करने में उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वे एक कुशल पेशेवर हैं जिनकी समझ बहुत अच्छी है और उन्हें आईआईटी-मुंबई से एम टेक (स्ट्रक्चर) की योग्यता हासिल है। 36 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने रेलवे, निर्माण, मेट्रो और भारतीय रेलवे में अन्य प्रशासनिक पदों पर काम करते हुए विभिन्न क्षेत्रों और विभागों में अपनी कुशलता साबित की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184474/rajkumar-wankhede-assumed-the-charge-of-additional-general-manager-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184474/rajkumar-wankhede-assumed-the-charge-of-additional-general-manager-of</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:06:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/img-20260801-wa0102.jpg"                         length="134340"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन की मांग तेज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगातार तेज होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने केंद्र सरकार एवं भारतीय रेलवे से इस रूट पर आधुनिक और नियमित रेल सेवा शुरू करने की जोरदार अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि दुल्लभछड़ा से शिलचर के बीच यदि इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन सेवा शुरू की जाती है, तो यात्रियों को अत्यधिक सुविधा मिलेगी। इससे दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का लाभ प्राप्त</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182777/demand-for-electric-memu-train-intensifies-on-dullabhchhada-shilchar-route-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001597832.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगातार तेज होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने केंद्र सरकार एवं भारतीय रेलवे से इस रूट पर आधुनिक और नियमित रेल सेवा शुरू करने की जोरदार अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि दुल्लभछड़ा से शिलचर के बीच यदि इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन सेवा शुरू की जाती है, तो यात्रियों को अत्यधिक सुविधा मिलेगी। इससे दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का लाभ प्राप्त होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार, इस रेल सेवा के शुरू होने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। लोगों का यह भी मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक रेल सेवा को बढ़ावा मिलने से बराक घाटी के परिवहन ढांचे में भी सकारात्मक परिवर्तन आने की संभावना है। साथ ही रेलवे के यात्री राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद भी व्यक्त की जा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं संबंधित रेलवे अधिकारियों से अपील की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग पर शीघ्र MEMU ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोगों का विश्वास है कि यदि यह लंबे समय से लंबित मांग पूरी होती है, तो हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा प्राप्त होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182777/demand-for-electric-memu-train-intensifies-on-dullabhchhada-shilchar-route-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182777/demand-for-electric-memu-train-intensifies-on-dullabhchhada-shilchar-route-of</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:31:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/1001597832.png"                         length="167988"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनार-चोपन रेल खंड के समपार फाटक संख्या-19 के स्थान पर रोड ओवर ब्रिज के लिए लगाए गए गर्डर।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मण्डल रेल प्रबंधक/प्रयागराज रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में रेल एवं सड़क यातायात को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। चुनार–चोपन रेल खंड पर लूसा के निकट स्थित समपार फाटक संख्या-19 के यतायात सुगम बनाने के लिए  निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज के रेलवे भाग पर स्टील गर्डरों के सफल लांचिंग/स्थापना का कार्य संपन्न किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निर्माणाधीन आरओबी की कुल लंबाई 585 मीटर है, जबकि रेलवे हिस्से की लंबाई 36 मीटर तथा चौड़ाई 7.5 मीटर है। यह परियोजना चुनार नगर को राज्य राजमार्ग-35 (मिर्जापुर–सोनभद्र मार्ग) से बेहतर एवं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181670/girder-installed-for-road-over-bridge-in-place-of-level"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मण्डल रेल प्रबंधक/प्रयागराज रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में रेल एवं सड़क यातायात को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। चुनार–चोपन रेल खंड पर लूसा के निकट स्थित समपार फाटक संख्या-19 के यतायात सुगम बनाने के लिए  निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज के रेलवे भाग पर स्टील गर्डरों के सफल लांचिंग/स्थापना का कार्य संपन्न किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निर्माणाधीन आरओबी की कुल लंबाई 585 मीटर है, जबकि रेलवे हिस्से की लंबाई 36 मीटर तथा चौड़ाई 7.5 मीटर है। यह परियोजना चुनार नगर को राज्य राजमार्ग-35 (मिर्जापुर–सोनभद्र मार्ग) से बेहतर एवं निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी। रोड ओवर ब्रिज के निर्माण के बाद समपार फाटक पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी तथा सड़क एवं रेल दोनों यातायात की सुरक्षा और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निर्माण कार्य के दौरान आधुनिक तकनीकों एवं सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन किया गया। विशाल क्रेनों की सहायता से स्टील गर्डरों को निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया। यह कार्य रेलवे एवं निर्माण एजेंसियों के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">रोड ओवर ब्रिज के पूर्ण होने के उपरांत क्षेत्र के निवासियों, व्यापारिक गतिविधियों तथा यात्रियों को आवागमन में बड़ी सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही यह परियोजना क्षेत्रीय विकास एवं बेहतर यातायात अवसंरचना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देगी</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181670/girder-installed-for-road-over-bridge-in-place-of-level</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181670/girder-installed-for-road-over-bridge-in-place-of-level</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 21:54:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260619-wa0133.jpg"                         length="124033"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>21 जून को कानपुर सेंट्रल पर थम जाएंगे ट्रेनों के पहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर करीब छह साल बाद एक बार फिर ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जब स्टेशन से 24 घंटे तक एक भी ट्रेन नहीं चलेगी। आगामी 21 जून 2026 को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। इसकी वजह लॉकडाउन नहीं, बल्कि रेलवे द्वारा किया जाने वाला इंटरलॉकिंग कार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, 21 जून को सुबह से अगले 24 घंटे तक कानपुर सेंट्रल से कोई भी ट्रेन संचालित नहीं होगी। इस दौरान स्टेशन पर इंटरलॉकिंग का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा। इसके चलते कानपुर सेंट्रल से गुजरने वाली ट्रेनों को गोविंदपुरी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180358/wheels-of-trains-will-stop-at-kanpur-central-on-june"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001957339.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर करीब छह साल बाद एक बार फिर ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जब स्टेशन से 24 घंटे तक एक भी ट्रेन नहीं चलेगी। आगामी 21 जून 2026 को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। इसकी वजह लॉकडाउन नहीं, बल्कि रेलवे द्वारा किया जाने वाला इंटरलॉकिंग कार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, 21 जून को सुबह से अगले 24 घंटे तक कानपुर सेंट्रल से कोई भी ट्रेन संचालित नहीं होगी। इस दौरान स्टेशन पर इंटरलॉकिंग का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा। इसके चलते कानपुर सेंट्रल से गुजरने वाली ट्रेनों को गोविंदपुरी और चंदारी स्टेशन से डायवर्ट कर संचालित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इंटरलॉकिंग से पहले 11 जून से 20 जून तक प्री और नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्य भी किया जाएगा। इसके लिए रेलवे बोर्ड से अनुमति मांगी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे का कहना है कि यह कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन की सिग्नल व्यवस्था पूरी तरह कंप्यूटर आधारित हो जाएगी, जिससे भविष्य में सिग्नल फेल जैसी समस्याओं में काफी कमी आएगी और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि कानपुर सेंट्रल देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन करीब 300 ट्रेनें गुजरती हैं और एक से डेढ़ लाख यात्री रोजाना सफर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह के अनुसार, रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद दिल्ली-हावड़ा रूट की ट्रेनों को गोविंदपुरी-चंदारी के रास्ते संचालित किया जाएगा, जबकि दिल्ली से लखनऊ जाने वाली ट्रेनों को गाजियाबाद-मुरादाबाद रूट से भेजे जाने की तैयारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचने की अपील की है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180358/wheels-of-trains-will-stop-at-kanpur-central-on-june</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180358/wheels-of-trains-will-stop-at-kanpur-central-on-june</guid>
                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1001957339.jpg"                         length="102935"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रेलवे ने 2025-26 में 81 लाख 59 हजार पेड़ लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177017/indian-railways-planted-81-lakh-59-thousand-trees-in-2025-26"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-railway_650_022515010444.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम होता है। प्रकृति-आधारित ये उपाय न केवल रेलवे संपत्तियों की रक्षा करते हैं बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय यात्राएं भी सुनिश्चित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जल: संचयन, पुनर्चक्रण, लेखापरीक्षा, पुनर्स्थापन</strong></div>
<div style="text-align:justify;">जल संकट हमारी सदी के सबसे बड़े संकटों में से एक है। भारतीय रेलवे, जो सैकड़ों धुलाई लाइनें, रखरखाव डिपो, खानपान सुविधाएं और यात्री सुविधाएं संचालित करता है और प्रतिदिन लाखों लीटर जल की खपत करता है, ने अपने सभी क्षेत्रों में जल उपयोग को कम करने के लिए सुनियोजित और ठोस कदम उठाए हैं। यह दृष्टिकोण व्यापक है: अपवाह में बह जाने से पहले वर्षा जल का संचयन करना, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण करके उसे गैर-पेय उपयोग में लाना, जल खपत की लेखापरीक्षा करके अपशिष्ट की पहचान करना और रेलवे भूमि के भीतर दूषित जल निकायों का पुनर्स्थापन करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच): जहां बारिश हो रही है, वहीं उसे इकट्ठा करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">2016-17 से भारतीय रेलवे ने सभी रेलवे जोन में कुल 8,313 छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) संरचनाएं स्थापित की हैं। अकेले पिछले दो वर्षों में 2,915 नई संरचनाएं चालू की गईं, जिनमें 2024-25 में जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत स्थापित 1,215 इकाइयां शामिल हैं, जो राष्ट्रीय जल संरक्षण मिशनों के साथ सक्रिय समन्वय को रेखांकित करती हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 3,128 आरडब्ल्यूएच संरचनाएं स्थापित करके इस पहल में सबसे आगे है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे का वर्षा जल संचयन अवसंरचना दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करता है, जो विशेष रूप से भीषण मौसम की घटनाओं के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। स्टेशनों और यार्डों पर स्थापित छत पर लगे जल संचयन तंत्र मानसूनी जल को एकत्रित और प्रवाहित करते हैं, जिससे एक ओर प्लेटफार्मों और आस-पास की पटरियों पर जलभराव को रोका जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भूमिगत जलभंडारों का पुनर्भरण होता है। राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों या दक्कन के वर्षा-छाया क्षेत्रों में, ये प्रणालियाँ परिचालन के लिए जीवन रेखा हैं। एकत्रित जल स्टेशनों की सुविधाओं जैसे शौचालयों, सफाई और बागवानी में उपयोग किया जाता है, जिससे टैंकर आपूर्ति और नगरपालिका जल कनेक्शनों पर निर्भरता कम हो जाती है, जो अक्सर दूरस्थ स्टेशनों पर अनुपलब्ध या अविश्वसनीय होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जल पुनर्चक्रण संयंत्र</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सभी ज़ोन में, भारतीय रेलवे ने कुल 185 जल पुनर्चक्रण संयंत्र (डब्ल्यूआरपी) चालू किए हैं। 2015-16 से पहले मौजूद 21 संयंत्रों के आधार से, चालू करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रही है, और पिछला वित्तीय वर्ष अब तक का सबसे मजबूत वर्ष रहा है जिसमें 26 नए संयंत्र चालू किए गए हैं। उत्तरी रेलवे 27 संयंत्रों के साथ सभी ज़ोन में सबसे आगे है, उसके बाद मध्य रेलवे (21) और दक्षिणी रेलवे (20) का स्थान है। ये संयंत्र कोच धोने और यार्ड संचालन से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार करके उसे गैर-पेय उपयोगों जैसे स्टेशन सफाई, बागवानी और औद्योगिक प्रक्रियाओं में पुन: उपयोग के लिए तैयार करते हैं, जिससे दुर्लभ जलभंडारों और नगरपालिका प्रणालियों से ताजे पानी की निकासी कम होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2025-26 में अब तक 310 लेखापरीक्षाएँ दर्ज की जा चुकी हैं, जो किसी एक वर्ष में सबसे अधिक हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 442 लेखापरीक्षाओं के साथ सबसे आगे है, उसके बाद उत्तरी रेलवे (323) और पश्चिमी रेलवे (216) का स्थान आता है। इन लेखापरीक्षाओं के माध्यम से जल खपत के प्रमुख क्षेत्रों, पाइप रिसावों और प्रणाली की कमियों की पहचान की जाती है, जिससे जागरूकता को लक्षित बचत में परिवर्तित किया जा सके। मापन का अनुशासन सार्थक संरक्षण की नींव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2024-25 में 2016-17 की तुलना में 178 करोड़ लीटर डीजल की बचत की, जो 62% की बचत है, जिससे कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम हो गई है। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को सीधे तौर पर कम करता है। डीजल से घरेलू स्तर पर उत्पादित बिजली की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हुए, जो नवीकरणीय स्रोतों से अधिकाधिक प्राप्त की जा रही है, रेलवे ने वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से अपने संचालन को प्रभावी ढंग से अलग कर लिया है। विद्युत कर्षण (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन) को बायोडीजल जैसे विकल्पों की तुलना में कहीं अधिक लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल पाया गया है, जिससे यह न केवल एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, बल्कि आर्थिक रूप से भी जिम्मेदार विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बायो-टॉयलेट: रेल पर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2014 से यात्री डिब्बों में 3.66 लाख से अधिक बायो-टॉयलेट लगाकर पर्यावरण स्थिरता और यात्री स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पहल ने रेलवे ट्रैक पर मानव मल के सीधे निर्वहन को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है, जिससे स्वच्छ स्टेशन, बेहतर स्वच्छता और लाखों यात्रियों के लिए अधिक स्वच्छ यात्रा अनुभव सुनिश्चित हुआ है। बायो-टॉयलेट प्रणाली सूक्ष्मजीव क्रिया पर आधारित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके मानव मल को पानी और गैसों में विघटित करती है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण और दुर्गंध में काफी कमी आती है और पूरे नेटवर्क में स्वच्छता बनी रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पहल मिट्टी और ट्रैक के संदूषण को रोककर, रेलवे संपत्तियों के क्षरण को कम करके और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्यक्ष उत्सर्जन को शून्य करके और टिकाऊ स्वच्छता प्रथाओं का समर्थन करके, भारतीय रेलवे यात्रियों के आराम को बेहतर बनाते हुए स्वच्छ पारिस्थितिकी तंत्र और हरित भविष्य में योगदान दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नवीकरणीय ऊर्जा: सूर्य और पवन से भविष्य को शक्ति प्रदान करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक परिचालन रणनीति का आधार बनाया है। दिसंबर 2025 तक, पूरे नेटवर्क में लगभग 909 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र और 103 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र चालू हो चुके हैं। पहले से चालू संयंत्रों के अलावा, रेलवे ने राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के डेवलपर्स के साथ सौर, पवन और हाइब्रिड चौबीसों घंटे (आरटीसी) व्यवस्थाओं सहित 3,300 मेगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय क्षमता के लिए समझौते किए हैं, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। यह दीर्घकालिक, स्थिर मूल्य वाली हरित खरीद की ओर एक सुनियोजित बदलाव को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>एलईडी प्रकाश व्यवस्था: एक कुशल रूप से प्रकाशित नेटवर्क</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने अपने कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों और आवासीय कॉलोनियों में 100% एलईडी प्रकाश व्यवस्था स्थापित कर ली है। यह एक व्यापक परिवर्तन है जो दूरस्थ स्टेशनों से लेकर देश के सबसे बड़े जंक्शनों तक हजारों स्थानों तक फैला हुआ है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177017/indian-railways-planted-81-lakh-59-thousand-trees-in-2025-26</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177017/indian-railways-planted-81-lakh-59-thousand-trees-in-2025-26</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:04:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/indian-railway_650_022515010444.webp"                         length="97958"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        