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                <title>Eco Friendly Transport - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Eco Friendly Transport RSS Feed</description>
                
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                <title>यूज्ड ईवी: बदलती सोच, बदलता बाजार और बदलता भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बदलाव नई चीज़ों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच से जन्म लेता है। भारत में यूज्ड इलेक्ट्रिक वाहनों का तेज़ी से बढ़ता बाजार इसका प्रमाण है। यह केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की रफ्तार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास को उपभोग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगिता की कसौटी पर परखने का संकेत है। जिस वाहन को कल तक "सेकंड हैंड" कहकर नजरअंदाज किया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही आज स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किफायती परिवहन और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद वाहक बन गया है। यूज्ड ईवी </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की यह उड़ान महज़ आंकड़ों की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भारत की पहचान है</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183194/used-ev-changing-thinking-changing-market-and-changing-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/future-mobility.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बदलाव नई चीज़ों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच से जन्म लेता है। भारत में यूज्ड इलेक्ट्रिक वाहनों का तेज़ी से बढ़ता बाजार इसका प्रमाण है। यह केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की रफ्तार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास को उपभोग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगिता की कसौटी पर परखने का संकेत है। जिस वाहन को कल तक "सेकंड हैंड" कहकर नजरअंदाज किया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही आज स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किफायती परिवहन और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद वाहक बन गया है। यूज्ड ईवी </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की यह उड़ान महज़ आंकड़ों की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भारत की पहचान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीमित संसाधनों में भी भविष्य गढ़ना जानता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बदलाव की असली पहचान तब होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह आम आदमी की पहुँच में उतर आए। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ यही हो रहा है। नई ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कारों और दोपहिया वाहनों की ऊँची कीमत मध्यम वर्ग के लिए अब भी चुनौती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने यह बाधा तोड़ दी है। कम कीमत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्याप्त बची हुई बैटरी लाइफ और आसान फाइनेंसिंग ने लाखों लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन सुलभ कर दिए हैं। आर्थिक सीमाओं में बंधे लोग अब पर्यावरण-अनुकूल विकल्प चुन सकते हैं। पहली इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर अब केवल संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आम नागरिक की पहुँच में है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूँजी हमेशा वहीं जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भविष्य दिखाई देता है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने वित्तीय संस्थानों का यही भरोसा जीता है। फाइनेंस कंपनियाँ इसे केवल ऋण का नया क्षेत्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कम जोखिम और बेहतर प्रतिफल वाला निवेश मान रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता और निरंतर बढ़ती मांग ने इस बाजार को मजबूत आधार दिया है। जब निवेश विश्वास के साथ बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्पष्ट होता है कि बाजार क्षणिक उत्साह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी संभावनाओं पर टिका है। यही भरोसा आने वाले वर्षों में यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की रफ्तार को और तेज करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा लाभ बाजार का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसों का है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की असली उपलब्धि यही है कि हर इस्तेमाल किया गया इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता को थोड़ा और कम करता है। जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से जूझते भारतीय शहरों में यह बदलाव किसी शोरगुल वाले अभियान से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मौन हरित क्रांति के रूप में सामने आया है। इसकी ताकत नारों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार में है। हर पुरानी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को मिला नया जीवन वातावरण में प्रदूषण घटाने और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक ठोस कदम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास का भविष्य नए संसाधन जुटाने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने संसाधनों के बेहतर उपयोग में है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार इसी सोच का विस्तार है। किसी पुराने इलेक्ट्रिक वाहन का पुनः उपयोग केवल वाहन नहीं बचाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके निर्माण में लगी ऊर्जा और खनिज भी बचाता है। नई बैटरियों के उत्पादन में भारी संसाधन लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि मौजूदा बैटरी का उपयोग पर्यावरणीय दबाव घटाता है। यही परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) का आधार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ वस्तुएँ खत्म नहीं होतीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नया उपयोग पाती हैं। इसलिए यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार केवल सस्ता विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर उड़ान की परीक्षा उसकी ऊँचाई नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता होती है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार के सामने यही चुनौती है। बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद बैटरी की गुणवत्ता सबसे बड़ा प्रश्न बनी हुई है। हर खरीदार के मन में सवाल है कि बची हुई बैटरी कितने वर्षों तक भरोसेमंद रहेगी। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सीमित विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षित सर्विस सेंटरों की कमी और बैटरियों के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण (री-साइक्लिंग) का कमजोर ढाँचा इसकी रफ्तार रोक सकता है। इन कमियों का समाधान नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आज का उत्साह कल अविश्वास में बदल सकता है। तकनीकी बदलाव की सफलता केवल बिक्री नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत तंत्र से तय होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान बिखरे प्रयासों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साझा संकल्प में है। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन निर्माता और वित्तीय संस्थानों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। बैटरियों का स्पष्ट स्टैंडर्डाइजेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेकंड लाइफ बैटरियों के सुरक्षित उपयोग की नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए विशेष इंश्योरेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाणित बैटरी हेल्थ रिपोर्ट और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं। सरकार दूरदर्शी नीति बनाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन कंपनियाँ भरोसेमंद सेवाएँ दें और फाइनेंस कंपनियाँ आसान वित्त दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार केवल कारोबार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की हरित अर्थव्यवस्था का आधार बन सकता है। टिकाऊ विकास तभी संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और वित्त एक दिशा में बढ़ें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरित विकास तभी सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह आम आदमी की पहुँच में हो। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने यह संभव किया है। जो हरित तकनीक कभी सम्पन्न वर्ग तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब मध्यम वर्ग का विकल्प बन रही है। सीमित आय वाला परिवार कम कीमत में पहली इलेक्ट्रिक कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूटर या बाइक खरीदकर केवल ईंधन नहीं बचाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा में अपना योगदान देता है। यही लोकतांत्रिक हरित क्रांति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पर्यावरण संरक्षण विशेषाधिकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनभागीदारी बन जाता है। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने साबित किया है कि टिकाऊ विकास महँगा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझदारी का विकल्प हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य उन देशों का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो संसाधनों का मूल्य समझते हैं। यूज्ड ईवी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार ने दिखाया है कि विकास और पर्यावरण साथ चल सकते हैं। मजबूत नीतियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर आधारभूत ढाँचा और विश्वसनीय तकनीक मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत ग्रीन मोबिलिटी में विश्व नेतृत्व हासिल कर सकता है। तब दुनिया भारत को केवल बड़े वाहन बाजार के रूप में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग को विकास का आधार बनाने वाले देश के रूप में पहचानेगी। इस बदलाव का नायक कोई नया वाहन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वही पुराना वाहन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे समाज ने नया उद्देश्य दिया। कल की सेकंड हैंड कार आज पर्यावरण की प्रहरी है। यही सोच कल के भारत की पहचान बन सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन की मांग तेज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगातार तेज होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने केंद्र सरकार एवं भारतीय रेलवे से इस रूट पर आधुनिक और नियमित रेल सेवा शुरू करने की जोरदार अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि दुल्लभछड़ा से शिलचर के बीच यदि इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन सेवा शुरू की जाती है, तो यात्रियों को अत्यधिक सुविधा मिलेगी। इससे दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का लाभ प्राप्त</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182777/demand-for-electric-memu-train-intensifies-on-dullabhchhada-shilchar-route-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001597832.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">असम के बराक घाटी के दुल्लभछड़ा–शिलचर मार्ग पर मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगातार तेज होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने केंद्र सरकार एवं भारतीय रेलवे से इस रूट पर आधुनिक और नियमित रेल सेवा शुरू करने की जोरदार अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि दुल्लभछड़ा से शिलचर के बीच यदि इलेक्ट्रिक MEMU ट्रेन सेवा शुरू की जाती है, तो यात्रियों को अत्यधिक सुविधा मिलेगी। इससे दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का लाभ प्राप्त होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार, इस रेल सेवा के शुरू होने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। लोगों का यह भी मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक रेल सेवा को बढ़ावा मिलने से बराक घाटी के परिवहन ढांचे में भी सकारात्मक परिवर्तन आने की संभावना है। साथ ही रेलवे के यात्री राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद भी व्यक्त की जा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं संबंधित रेलवे अधिकारियों से अपील की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग पर शीघ्र MEMU ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोगों का विश्वास है कि यदि यह लंबे समय से लंबित मांग पूरी होती है, तो हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा प्राप्त होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:31:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रेलवे ने 2025-26 में 81 लाख 59 हजार पेड़ लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177017/indian-railways-planted-81-lakh-59-thousand-trees-in-2025-26"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-railway_650_022515010444.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम होता है। प्रकृति-आधारित ये उपाय न केवल रेलवे संपत्तियों की रक्षा करते हैं बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय यात्राएं भी सुनिश्चित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जल: संचयन, पुनर्चक्रण, लेखापरीक्षा, पुनर्स्थापन</strong></div>
<div style="text-align:justify;">जल संकट हमारी सदी के सबसे बड़े संकटों में से एक है। भारतीय रेलवे, जो सैकड़ों धुलाई लाइनें, रखरखाव डिपो, खानपान सुविधाएं और यात्री सुविधाएं संचालित करता है और प्रतिदिन लाखों लीटर जल की खपत करता है, ने अपने सभी क्षेत्रों में जल उपयोग को कम करने के लिए सुनियोजित और ठोस कदम उठाए हैं। यह दृष्टिकोण व्यापक है: अपवाह में बह जाने से पहले वर्षा जल का संचयन करना, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण करके उसे गैर-पेय उपयोग में लाना, जल खपत की लेखापरीक्षा करके अपशिष्ट की पहचान करना और रेलवे भूमि के भीतर दूषित जल निकायों का पुनर्स्थापन करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच): जहां बारिश हो रही है, वहीं उसे इकट्ठा करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">2016-17 से भारतीय रेलवे ने सभी रेलवे जोन में कुल 8,313 छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) संरचनाएं स्थापित की हैं। अकेले पिछले दो वर्षों में 2,915 नई संरचनाएं चालू की गईं, जिनमें 2024-25 में जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत स्थापित 1,215 इकाइयां शामिल हैं, जो राष्ट्रीय जल संरक्षण मिशनों के साथ सक्रिय समन्वय को रेखांकित करती हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 3,128 आरडब्ल्यूएच संरचनाएं स्थापित करके इस पहल में सबसे आगे है।</div>
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<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे का वर्षा जल संचयन अवसंरचना दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करता है, जो विशेष रूप से भीषण मौसम की घटनाओं के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। स्टेशनों और यार्डों पर स्थापित छत पर लगे जल संचयन तंत्र मानसूनी जल को एकत्रित और प्रवाहित करते हैं, जिससे एक ओर प्लेटफार्मों और आस-पास की पटरियों पर जलभराव को रोका जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भूमिगत जलभंडारों का पुनर्भरण होता है। राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों या दक्कन के वर्षा-छाया क्षेत्रों में, ये प्रणालियाँ परिचालन के लिए जीवन रेखा हैं। एकत्रित जल स्टेशनों की सुविधाओं जैसे शौचालयों, सफाई और बागवानी में उपयोग किया जाता है, जिससे टैंकर आपूर्ति और नगरपालिका जल कनेक्शनों पर निर्भरता कम हो जाती है, जो अक्सर दूरस्थ स्टेशनों पर अनुपलब्ध या अविश्वसनीय होते हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>जल पुनर्चक्रण संयंत्र</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सभी ज़ोन में, भारतीय रेलवे ने कुल 185 जल पुनर्चक्रण संयंत्र (डब्ल्यूआरपी) चालू किए हैं। 2015-16 से पहले मौजूद 21 संयंत्रों के आधार से, चालू करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रही है, और पिछला वित्तीय वर्ष अब तक का सबसे मजबूत वर्ष रहा है जिसमें 26 नए संयंत्र चालू किए गए हैं। उत्तरी रेलवे 27 संयंत्रों के साथ सभी ज़ोन में सबसे आगे है, उसके बाद मध्य रेलवे (21) और दक्षिणी रेलवे (20) का स्थान है। ये संयंत्र कोच धोने और यार्ड संचालन से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार करके उसे गैर-पेय उपयोगों जैसे स्टेशन सफाई, बागवानी और औद्योगिक प्रक्रियाओं में पुन: उपयोग के लिए तैयार करते हैं, जिससे दुर्लभ जलभंडारों और नगरपालिका प्रणालियों से ताजे पानी की निकासी कम होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2025-26 में अब तक 310 लेखापरीक्षाएँ दर्ज की जा चुकी हैं, जो किसी एक वर्ष में सबसे अधिक हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 442 लेखापरीक्षाओं के साथ सबसे आगे है, उसके बाद उत्तरी रेलवे (323) और पश्चिमी रेलवे (216) का स्थान आता है। इन लेखापरीक्षाओं के माध्यम से जल खपत के प्रमुख क्षेत्रों, पाइप रिसावों और प्रणाली की कमियों की पहचान की जाती है, जिससे जागरूकता को लक्षित बचत में परिवर्तित किया जा सके। मापन का अनुशासन सार्थक संरक्षण की नींव है।</div>
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<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2024-25 में 2016-17 की तुलना में 178 करोड़ लीटर डीजल की बचत की, जो 62% की बचत है, जिससे कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम हो गई है। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को सीधे तौर पर कम करता है। डीजल से घरेलू स्तर पर उत्पादित बिजली की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हुए, जो नवीकरणीय स्रोतों से अधिकाधिक प्राप्त की जा रही है, रेलवे ने वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से अपने संचालन को प्रभावी ढंग से अलग कर लिया है। विद्युत कर्षण (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन) को बायोडीजल जैसे विकल्पों की तुलना में कहीं अधिक लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल पाया गया है, जिससे यह न केवल एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, बल्कि आर्थिक रूप से भी जिम्मेदार विकल्प है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बायो-टॉयलेट: रेल पर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2014 से यात्री डिब्बों में 3.66 लाख से अधिक बायो-टॉयलेट लगाकर पर्यावरण स्थिरता और यात्री स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पहल ने रेलवे ट्रैक पर मानव मल के सीधे निर्वहन को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है, जिससे स्वच्छ स्टेशन, बेहतर स्वच्छता और लाखों यात्रियों के लिए अधिक स्वच्छ यात्रा अनुभव सुनिश्चित हुआ है। बायो-टॉयलेट प्रणाली सूक्ष्मजीव क्रिया पर आधारित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके मानव मल को पानी और गैसों में विघटित करती है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण और दुर्गंध में काफी कमी आती है और पूरे नेटवर्क में स्वच्छता बनी रहती है।</div>
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<div style="text-align:justify;">यह पहल मिट्टी और ट्रैक के संदूषण को रोककर, रेलवे संपत्तियों के क्षरण को कम करके और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्यक्ष उत्सर्जन को शून्य करके और टिकाऊ स्वच्छता प्रथाओं का समर्थन करके, भारतीय रेलवे यात्रियों के आराम को बेहतर बनाते हुए स्वच्छ पारिस्थितिकी तंत्र और हरित भविष्य में योगदान दे रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>नवीकरणीय ऊर्जा: सूर्य और पवन से भविष्य को शक्ति प्रदान करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक परिचालन रणनीति का आधार बनाया है। दिसंबर 2025 तक, पूरे नेटवर्क में लगभग 909 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र और 103 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र चालू हो चुके हैं। पहले से चालू संयंत्रों के अलावा, रेलवे ने राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के डेवलपर्स के साथ सौर, पवन और हाइब्रिड चौबीसों घंटे (आरटीसी) व्यवस्थाओं सहित 3,300 मेगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय क्षमता के लिए समझौते किए हैं, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। यह दीर्घकालिक, स्थिर मूल्य वाली हरित खरीद की ओर एक सुनियोजित बदलाव को दर्शाता है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>एलईडी प्रकाश व्यवस्था: एक कुशल रूप से प्रकाशित नेटवर्क</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने अपने कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों और आवासीय कॉलोनियों में 100% एलईडी प्रकाश व्यवस्था स्थापित कर ली है। यह एक व्यापक परिवर्तन है जो दूरस्थ स्टेशनों से लेकर देश के सबसे बड़े जंक्शनों तक हजारों स्थानों तक फैला हुआ है। </div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:04:23 +0530</pubDate>
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