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                <title>Green India Mission - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम पर होगा वृहद वृक्षारोपण अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> नवीन पुलिस लाइन गौरीगंज के सभागार में जिलाधिकारी संजय चौहान एवं पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. ने संयुक्त रूप से जिला वृक्षारोपण समिति की बैठक कर आगामी वृहद वृक्षारोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सभी विभागों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पौधारोपण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि पौधारोपण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पूर्व से ही पूर्ण कर ली जाएं तथा अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182897/a-massive-tree-plantation-campaign-will-be-held-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> नवीन पुलिस लाइन गौरीगंज के सभागार में जिलाधिकारी संजय चौहान एवं पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. ने संयुक्त रूप से जिला वृक्षारोपण समिति की बैठक कर आगामी वृहद वृक्षारोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सभी विभागों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पौधारोपण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि पौधारोपण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पूर्व से ही पूर्ण कर ली जाएं तथा अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम पर 12 जुलाई 2026 को वृहद वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया जाएगा। शासन द्वारा जनपद अमेठी को वर्षाकाल 2026 के दौरान 53 लाख 66 हजार 100 पौधे रोपित करने का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसमें वन विभाग को 26 लाख 93 हजार पौधे तथा अन्य विभागों को 26 लाख 73 हजार 100 पौधे रोपित करने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस (05 जून 2026) के अवसर पर जनपद में 5 लाख 39 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शेष 48 लाख 27 हजार 100 पौधों का रोपण वन महोत्सव सप्ताह (01 से 07 जुलाई), 12 जुलाई के वृहद वृक्षारोपण अभियान तथा अन्य कार्यक्रमों के दौरान किया जाएगा। डीएफओ ने विभागवार लक्ष्य की जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम्य विकास विभाग को 14,29,300, कृषि विभाग को 3,26,000, पर्यावरण विभाग को 3,05,000, उद्यान विभाग को 2,05,000, पंचायती राज विभाग को 1,48,000, राजस्व विभाग को 82,500, उच्च शिक्षा विभाग को 17,300, स्वास्थ्य विभाग को 14,000, बेसिक शिक्षा विभाग को 12,000, माध्यमिक शिक्षा विभाग को 11,500, लोक निर्माण विभाग को 11,900, पशुपालन विभाग को 9,900, सिंचाई विभाग को 8,900, उद्योग विभाग को 7,000, विद्युत विभाग को 6,500, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को 6,000, सहकारिता विभाग को 5,600, पुलिस विभाग को 5,040 सहित अन्य विभागों को भी लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि सभी विभागों द्वारा पौधारोपण स्थलों का चयन कर गड्ढा खुदाई का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। वर्तमान में संबंधित विभागों द्वारा पौधशालाओं से पौधों का उठान कराया जा रहा है, ताकि निर्धारित तिथि तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण की जा सकें। प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि जनपद के सभी विकासखंडों में वन विभाग द्वारा संचालित 29 पौधशालाओं में विभिन्न प्रजातियों के 81.90 लाख पौधे उपलब्ध हैं। इनमें इमारती एवं औद्योगिक प्रजातियों के 48.87 लाख, फलदार प्रजातियों के 18.70 लाख, शोभाकार प्रजातियों के 7.55 लाख, औषधीय एवं सुगंधित प्रजातियों के 3.97 लाख, चारा पत्ती प्रजातियों के 2.25 लाख तथा पर्यावरणीय प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रमुख प्रजातियों में सागौन, शीशम, नीम, पीपल, पाकड़, बरगद, आम, अमरूद, आंवला, जामुन, महुआ, सहजन, कदंब, अर्जुन, खैर सहित अन्य पौधे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जनपद में उद्यान विभाग की एक तथा 17 निजी पौधशालाएं भी संचालित हैं। उन्होंने बताया कि 12 जुलाई को आयोजित होने वाले अभियान के लिए वन विभाग द्वारा 221 स्थलों पर 26.93 लाख गड्ढों तथा अन्य विभागों द्वारा 3,790 स्थलों पर 26.73 लाख गड्ढों की खुदाई का कार्य पूरा किया जा चुका है। वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे आवंटित लक्ष्य के अनुरूप पौधों के ढुलान का कार्य शीघ्र पूर्ण करें तथा अभियान को व्यापक जनसहभागिता से जोड़ें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, किसान समूहों एवं अन्य हितधारकों को अभियान से जोड़कर अधिकाधिक पौधारोपण कराया जाए। साथ ही पिछले वर्षों में लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि वृक्षारोपण का उद्देश्य पूर्ण रूप से सफल हो सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ज्योति सिंह, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 22:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व पर्यावरण दिवस पर नवाबगंज विधायक ने किया वृक्षारोपण </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>नवाबगंज विधायक डॉक्टर एमपी आर्य ने आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अनेकों स्थानों पर वृक्षारोपणकर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया किसी क्रम में उन्होंने आज विकासखंड भदपुरा पहुंचकर यहां के खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता के साथ ब्लॉक प्रांगण में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  वृक्षारोपण करने के बाद विधायक आर्य ने लोगों को विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी को एक-एक पेड़ लगाने का अनुरोध किया गया यहीं पर उपस्थित खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता ने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने की बात कहते</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180687/nawabganj-mla-planted-trees-on-world-environment-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1.---------------------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>नवाबगंज विधायक डॉक्टर एमपी आर्य ने आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अनेकों स्थानों पर वृक्षारोपणकर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया किसी क्रम में उन्होंने आज विकासखंड भदपुरा पहुंचकर यहां के खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता के साथ ब्लॉक प्रांगण में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> वृक्षारोपण करने के बाद विधायक आर्य ने लोगों को विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी को एक-एक पेड़ लगाने का अनुरोध किया गया यहीं पर उपस्थित खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता ने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने की बात कहते हुए उन्होंने जागरूक करने का कार्य किया और कहा एक पेड़ मां के नाम लगाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस अभियान को सफल बनाने के लिए अहम भूमिका निभाई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस कार्यक्रम को समझना और अपने ही हित की आवश्यकता है संसार में मां का ही दर्जा सबसे ऊपर है वह चाहे जन्मदिन वाली मां हो या फिर धरती मां हो इन दोनों के नाम वृक्ष लगाकर प्रधानमंत्री के इस सपने को साकार करना चाहिए जिसके तहत हम जिस धरती मां के ऊपर रह रहे हैं जन्म लेने से लेकर मृत्यु के समय तक धरती मां की गोद में ही हम सबको समा जाना है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए एक वृक्ष मां के नाम लगाकर मां का सम्मान बढ़ाया जाना चाहिए इस कार्यक्रम के तहत ग्राम प्रधानों ने भी ग्राम पंचायत में एक वृक्ष मां के नाम लगाकर विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का कार्य किया गया जिसके तहत ढकिया बर्कली क्यों लड़ियां के प्रधान रविंद्र कुमार गंगवार ने भी इस योजना में बढ़-चढ़कर भाग लिया और वृक्षारोपण किया गया इस कार्यक्रम के तहत विधायक ने नवाबगंज एवं भदपुरा के दर्जनों स्थानों पर वृक्षारोपण कर लोगों को वृक्ष लगाने का संदेश दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां पर उपस्थित विधायक डॉक्टर एमपी आर्य खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता क्यों लड़िया के प्रधान रविंद्र कुमार गंगवार टी आर गंगवार भाजपा मंडल अध्यक्ष ठाकुर जयदीप सिंह राजा बाबू समेत तकनीकी सहायक इतेंद्र पाल सिंह एपीओ सुमित कुमार समेत अनेकों लोग उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:17:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रस्मअदायगी नहीं, जिम्मेदारी: भीषण गर्मी में पौधारोपण क्यों बन जाता है औपचारिकता?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180684/why-does-tree-planting-become-a-formality-in-the-scorching"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001974815.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल के अधिकांश पौधों का जीवित रहना बेहद कठिन है। केवल फोटो खिंचवाने या औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगाना पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि पौधों के साथ अन्याय है। यदि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल नहीं की जाती, तो वह कुछ ही दिनों में सूख जाता है और पूरा प्रयास निरर्थक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी जमीनी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए "द कानपुर रिपोर्टर" की टीम ने निर्णय लिया है कि हम दिखावटी पौधारोपण से दूर रहेंगे और मानसून का इंतजार करेंगे। वर्षा ऋतु की पहली फुहार के साथ हमारी टीम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 50 छायादार एवं फलदार पौधे लगाएगी। इतना ही नहीं, हम इन पौधों के बड़े होने तक उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज समाज में अधिकांश लोग अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा, बैंक बैलेंस और संपत्ति जुटाने में पूरा जीवन लगा देते हैं। लेकिन शायद ही कोई उनके लिए स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध हवा की व्यवस्था करने के बारे में गंभीरता से सोचता है। यदि आने वाली पीढ़ी को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा ही उपलब्ध नहीं होगी, तो धन-संपत्ति का महत्व भी सीमित रह जाएगा। एक पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित भविष्य भी प्रदान करता है। इसलिए इस मानसून केवल पौधा लगाने का संकल्प न लें, बल्कि उसे वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात कानपुर टीम की अपील</strong></div>
<div style="text-align:justify;">इस मानसून दिखावे से दूर रहें। अपने घर, मोहल्ले, विद्यालय, कार्यालय या आसपास उपलब्ध स्थानों पर ऐसे पौधे लगाएं जो भविष्य में घने छायादार और फलदार वृक्ष बन सकें। आने वाली पीढ़ी को विरासत में केवल कंक्रीट के मकान नहीं, बल्कि एक हरा-भरा और स्वस्थ भविष्य भी दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:12:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>उद्योगपतियों का बोल बाला हरियाली पर चल रही आरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संपादक/लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में हरियाली संरक्षण की बातें सरकारी योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधारोपण अभियानों और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में खूब होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। देश के कई हिस्सों में उद्योगपतियों और लकड़ी माफिया के बोल बाले में आरा मशीनें (बैंड सॉ मिल या सॉइंग मशीनें) बेखौफ हरियाली पर आरी चला रही हैं। हरे-भरे पेड़—नीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीशम या अन्य प्रजातियां—रातोंरात कटकर लकड़ी के ढेर में बदल जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि प्रशासन या तो आंखें मूंदे बैठा है या जांच की औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडा कर देता है। यह न केवल पर्यावरणीय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177911/industrialists-say-the-saw-is-running-on-greenery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/istockphoto-1306526998-612x612-1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संपादक/लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में हरियाली संरक्षण की बातें सरकारी योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधारोपण अभियानों और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में खूब होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। देश के कई हिस्सों में उद्योगपतियों और लकड़ी माफिया के बोल बाले में आरा मशीनें (बैंड सॉ मिल या सॉइंग मशीनें) बेखौफ हरियाली पर आरी चला रही हैं। हरे-भरे पेड़—नीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीशम या अन्य प्रजातियां—रातोंरात कटकर लकड़ी के ढेर में बदल जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि प्रशासन या तो आंखें मूंदे बैठा है या जांच की औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडा कर देता है। यह न केवल पर्यावरणीय आपदा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास के नाम पर हो रही व्यवस्थित लूट का प्रतीक भी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न राज्यों से लगातार खबरें आ रही हैं कि औद्योगिक कॉलोनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों के किनारे या जंगलों के आसपास अवैध आरा मशीनें  संचालित हो रही हैं। मध्य प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे क्षेत्रों में इन मशीनों पर सैकड़ों क्विंटल हरी लकड़ी रोजाना चीरी जा रही है। कई मामलों में बिना लाइसेंस या एनओसी के आरा मशीनें चल रही हैं और हरे पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ी जा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सबूत मिट जाएं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वन विभाग  की भूमिका अक्सर संदिग्ध नजर आती है। लकड़ी का स्रोत जांचे बिना आरा संचालकों को छूट मिल रही है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कभी-कभी बुलडोजर कार्रवाई होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये प्रयास छिटपुट और अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। लकड़ी उद्योग की मांग ईंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्नीचर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैकेजिंग और निर्माण के लिए लगातार बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका फायदा अक्सर शक्तिशाली उद्योगपतियों और उनके नेटवर्क को पहुंचता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संदर्भ में ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना एक चिंताजनक उदाहरण है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में प्रस्तावित इस </span>₹81,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की मेगा परियोजना में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्यूल-यूज एयरपोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पावर प्लांट और टाउनशिप का निर्माण शामिल है। परियोजना के तहत लगभग </span>130-166<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्राथमिक वर्षावन (</span>rainforest) <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी मात्रा शामिल है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुमान है कि इससे करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक पेड़ कट सकते हैं। परियोजना को रणनीतिक महत्व (भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत करने) का हवाला देकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (</span>NGT) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हाल ही में पर्यावरणीय मंजूरी बरकरार रखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पर्यावरणविद् चेतावनी दे रहे हैं कि इससे जैव विविधता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेदरबैक कछुए के घोंसलों और शोम्पेन जनजाति के निवास पर अपूरणीय क्षति होगी। एक ओर हरियाली बचाने के दावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर ऐसे बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों का डायवर्शन विकास मॉडल की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आईएसआरओ के उपग्रह डेटा पर आधारित वन सर्वे ऑफ इंडिया (</span>FSI) <span lang="hi" xml:lang="hi">की भारत राज्य वन रिपोर्ट </span>2023 (ISFR 2023) <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की हरियाली की तस्वीर मिश्रित है। रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण </span>8,27,357<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का </span>25.17%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। इसमें वन आवरण </span>7,15,343<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर (</span>21.76%) <span lang="hi" xml:lang="hi">और वृक्ष आवरण </span>1,12,014<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर (</span>3.41%) <span lang="hi" xml:lang="hi">शामिल है। </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> की तुलना में कुल वन और वृक्ष आवरण में </span>1,445<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है (वन आवरण में +</span>156<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर और वृक्ष आवरण में +</span>1,289<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर)। रिपोर्ट </span>ISRO <span lang="hi" xml:lang="hi">के </span>Resourcesat-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैटेलाइट के </span>LISS-III <span lang="hi" xml:lang="hi">सेंसर (</span>23.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर रिजोल्यूशन) से प्राप्त मध्यम रिजोल्यूशन वाले उपग्रह डेटा पर आधारित है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से प्लांटेशनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एग्रोफॉरेस्ट्री और रिकॉर्डेड फॉरेस्ट क्षेत्रों के बाहर वृक्षों के विस्तार से आई है। घने प्राकृतिक वनों में गिरावट जारी है। पिछले दो दशकों में घने वनों की कुल हानि </span>24,651<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुकी है। उत्तर-पूर्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य भारत के आदिवासी क्षेत्र और पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील इलाकों में खनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अवैध कटाई से वन क्षरण हो रहा है। अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में मैंग्रोव आवरण हालांकि बढ़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बड़े विकास प्रोजेक्ट्स इससे खतरा पैदा कर रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेट निकोबार जैसी परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को और मजबूत तथा पारदर्शी बनाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि रणनीतिक विकास और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे। आईएसआरओ के उपग्रह डेटा जैसी वैज्ञानिक निगरानी को और प्रभावी बनाकर वास्तविक वन क्षरण पर अंकुश लगाया जा सकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली हमारी साझा विरासत है। यदि उद्योगपतियों का बोल बाला बिना रोक-टोक जारी रहा और बड़े प्रोजेक्ट्स में वन क्षेत्रों की बलि चढ़ती रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य की पीढ़ियां केवल आरा मशीनों की गूंज और सूखे खेतों की कहानियां सुनेंगी। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और नागरिक समाज को मिलकर इस लूट को रोकना होगा। विकास और पर्यावरण के बीच सच्चा संतुलन बनाना संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सख्ती अनिवार्य है। अन्यथा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली’ शब्द सिर्फ सरकारी फाइलों और भाषणों तक सीमित रह जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस पर “शहीदों के सपनों की धरती को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176997/on-earth-day-it-is-the-responsibility-of-all-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0314.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर शहीद झूरी सिंह जैसे वीरों ने देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया, और अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस आज़ाद देश की धरती को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित रखें। “देशभक्ति केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपने पर्यावरण की रक्षा में भी दिखाई देनी चाहिए,” </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग कम करें, जल स्रोतों की रक्षा करें और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं द्वारा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शपथ भी दिलाई गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:36:04 +0530</pubDate>
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