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                <title>Climate Action India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Climate Action India RSS Feed</description>
                
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                <title>आज का मॉनसून, कल का इतिहास नहीं — भविष्य का फैसला है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183626/todays-monsoon-is-not-yesterdays-history-%E2%80%93-it-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर जुलाई ने अचानक करवट बदली। मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रत्नागिरी सहित कई क्षेत्रों में कुछ दिनों की मूसलाधार बारिश ने साबित कर दिया कि अब खतरा बारिश के कम या अधिक होने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके बेकाबू और असंतुलित स्वरूप में है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इस सच्चाई की गवाही बन गया कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम का मिज़ाज बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह बदलाव आकस्मिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान की वर्षों पुरानी चेतावनी का साकार रूप है। वैज्ञानिकों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्म होती पृथ्वी का वातावरण पहले से अधिक नमी समेट रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का बढ़ता तापमान इसे ऊर्जा दे रहा है। नतीजा यह है कि बादल अब ठहरकर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटकर बरसते हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुलाई के शुरुआती दिनों में मुंबई (सांताक्रुज स्टेशन) में </span>600–900 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जुलाई के पूरे महीने के औसत का बड़ा हिस्सा थी। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दो दिनों की मूसलाधार बारिश ने टनल निर्माण स्थल पर मिट्टी का पहाड़ ढहा दिया। इस हादसे में कई मजदूरों की जान गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लापता रहे। यह महज़ हादसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलते जलवायु दौर की भयावह तस्वीर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ कम वर्षा वाला मौसम भी विनाश की इबारत लिख सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने केवल शहरों को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी विकास-दृष्टि को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। कंक्रीट के फैलते जंगलों ने पानी के प्राकृतिक रास्ते निगल लिए। नतीजा था—मुंबई के मानखुर्द में चॉल ढह गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालघर में बाढ़ दस से अधिक जिंदगियां बहा ले गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ उखड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीवारें गिरीं और शहर दिनों तक थम गए। यह तबाही सिर्फ आसमान से बरसे पानी की नहीं थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जर्जर ड्रेनेज व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्लेम्ड भूमि पर अनियोजित निर्माण और प्रकृति की कीमत पर खड़ा विकास भी इसके भागीदार थे। जलवायु विशेषज्ञ वर्षों से चेताते रहे हैं कि मध्य भारत में </span>1950 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगभग तीन गुना बढ़ चुकी हैं। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने उस चेतावनी को आंकड़ों से उठाकर सड़कों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस्तियों और ज़िंदगियों पर लिख दिया। अब बारिश मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ घंटों में पूरे महीने का संतुलन और शहरों की व्यवस्था बहा ले जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक भ्रम तोड़ दिया—सूखा और बाढ़ अब विरोधी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ही जलवायु संकट के दो रूप हैं। एल नीनो ने पहले बारिश रोकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर गर्म वातावरण ने संचित नमी उलीच दी। सूखी धरती पानी सोख न सकी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वही जल मैदानों में बाढ़ और पहाड़ों में भूस्खलन बन गया। बदलता मौसम चेतावनी है कि अब खतरा वर्षा की मात्रा से अधिक उसकी तीव्रता और असंतुलन में है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक तापमान </span>1.5-2 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कई क्षेत्रों में आर्द्र गर्मी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर संकट बन सकती है। यानी आने वाले समय में चुनौती केवल सूखे और बाढ़ की नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बारिश के बाद की दमघोंटू उमस जनस्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रम क्षमता और अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक नया शब्द सिखाया है—</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वैरिएबिलिटी</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। अब बारिश का आकलन उसकी कुल मात्रा से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवधि और तीव्रता से होगा। कई दिनों का सूखा और फिर एक-दो दिनों में पूरे महीने जितनी वर्षा—यही नया पैटर्न खेती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और शहरों की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों को कम अवधि वाली फसलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-अनुकूल बीज और सटीक मौसम पूर्वानुमान अपनाने होंगे। शहरों को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्पॉन्ज सिटी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल विकसित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वर्षा जल सड़कों पर बहने के बजाय जमीन में समा सके। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां वैज्ञानिक आकलन और कठोर मानकों से संचालित हों</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बदलते मौसम में यही विकास की सबसे विश्वसनीय बुनियाद है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी भूल यह होगी कि जलवायु संकट का समाधान केवल राष्ट्रीय योजनाओं में खोजा जाए। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून बताता है कि पिछले दो वर्षों की अच्छी वर्षा से अधिकांश जलाशय भरे होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर भारी तबाही हुई। साफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े बांध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषणाएं और राहत पैकेज तब तक पर्याप्त नहीं होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक हर शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव और पहाड़ी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार न हो। वेटलैंड्स का संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियों और प्राकृतिक जलमार्गों का पुनर्जीवन तथा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सस्टेनेबल डेवलपमेंट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को विकास की आधारशिला बनाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन भविष्य की आशंका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान का यथार्थ है—और इसकी सबसे बड़ी कीमत आने वाली पीढ़ियां नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज का समाज चुका रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर आपदा केवल नुकसान नहीं छोड़ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह हमारी प्राथमिकताओं का भी परीक्षण करती है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इसी कसौटी पर हमें परख गया। उसने स्पष्ट कर दिया कि प्रकृति की सीमाओं की अनदेखी कर किया गया विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। अब समय राहत और मुआवजे की घोषणाओं से आगे बढ़कर विकास की दिशा बदलने का है। इंफ्रास्ट्रक्चर को जलवायु-अनुकूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप और विकास को पर्यावरण का प्रतिद्वंद्वी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका सहभागी बनाना होगा। चेतावनी स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय हमारे हाथ में है। यदि इस संकेत को भी अनसुना किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले मॉनसून केवल नई आपदाएं नहीं लाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी विकास-यात्रा की नींव को भी कठघरे में खड़ा कर देंगे। यही </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून की सबसे बड़ी सीख है और यही हमारे समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय रेलवे ने 2025-26 में 81 लाख 59 हजार पेड़ लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177017/indian-railways-planted-81-lakh-59-thousand-trees-in-2025-26"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-railway_650_022515010444.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>रेलवे की ज़मीन पर 109 तालाब, जलाशय और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार 909 मेगावाट सौर ऊर्जा और 103 मेगावाट  अतिरिक्त 3,300 मेगावाट परियोजनाओं के लिए समझौता किया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे पटरियों के किनारे वृक्षारोपण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम होता है और भूस्खलन को रोका जा सकता है, खासकर पहाड़ी और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। वनस्पति आवरण सतही अपवाह को नियंत्रित करता है और जल अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे पटरियों के अस्थिर होने का खतरा कम होता है। प्रकृति-आधारित ये उपाय न केवल रेलवे संपत्तियों की रक्षा करते हैं बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय यात्राएं भी सुनिश्चित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जल: संचयन, पुनर्चक्रण, लेखापरीक्षा, पुनर्स्थापन</strong></div>
<div style="text-align:justify;">जल संकट हमारी सदी के सबसे बड़े संकटों में से एक है। भारतीय रेलवे, जो सैकड़ों धुलाई लाइनें, रखरखाव डिपो, खानपान सुविधाएं और यात्री सुविधाएं संचालित करता है और प्रतिदिन लाखों लीटर जल की खपत करता है, ने अपने सभी क्षेत्रों में जल उपयोग को कम करने के लिए सुनियोजित और ठोस कदम उठाए हैं। यह दृष्टिकोण व्यापक है: अपवाह में बह जाने से पहले वर्षा जल का संचयन करना, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण करके उसे गैर-पेय उपयोग में लाना, जल खपत की लेखापरीक्षा करके अपशिष्ट की पहचान करना और रेलवे भूमि के भीतर दूषित जल निकायों का पुनर्स्थापन करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच): जहां बारिश हो रही है, वहीं उसे इकट्ठा करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">2016-17 से भारतीय रेलवे ने सभी रेलवे जोन में कुल 8,313 छतों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) संरचनाएं स्थापित की हैं। अकेले पिछले दो वर्षों में 2,915 नई संरचनाएं चालू की गईं, जिनमें 2024-25 में जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत स्थापित 1,215 इकाइयां शामिल हैं, जो राष्ट्रीय जल संरक्षण मिशनों के साथ सक्रिय समन्वय को रेखांकित करती हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 3,128 आरडब्ल्यूएच संरचनाएं स्थापित करके इस पहल में सबसे आगे है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे का वर्षा जल संचयन अवसंरचना दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करता है, जो विशेष रूप से भीषण मौसम की घटनाओं के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। स्टेशनों और यार्डों पर स्थापित छत पर लगे जल संचयन तंत्र मानसूनी जल को एकत्रित और प्रवाहित करते हैं, जिससे एक ओर प्लेटफार्मों और आस-पास की पटरियों पर जलभराव को रोका जा सकता है, वहीं दूसरी ओर भूमिगत जलभंडारों का पुनर्भरण होता है। राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों या दक्कन के वर्षा-छाया क्षेत्रों में, ये प्रणालियाँ परिचालन के लिए जीवन रेखा हैं। एकत्रित जल स्टेशनों की सुविधाओं जैसे शौचालयों, सफाई और बागवानी में उपयोग किया जाता है, जिससे टैंकर आपूर्ति और नगरपालिका जल कनेक्शनों पर निर्भरता कम हो जाती है, जो अक्सर दूरस्थ स्टेशनों पर अनुपलब्ध या अविश्वसनीय होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जल पुनर्चक्रण संयंत्र</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सभी ज़ोन में, भारतीय रेलवे ने कुल 185 जल पुनर्चक्रण संयंत्र (डब्ल्यूआरपी) चालू किए हैं। 2015-16 से पहले मौजूद 21 संयंत्रों के आधार से, चालू करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रही है, और पिछला वित्तीय वर्ष अब तक का सबसे मजबूत वर्ष रहा है जिसमें 26 नए संयंत्र चालू किए गए हैं। उत्तरी रेलवे 27 संयंत्रों के साथ सभी ज़ोन में सबसे आगे है, उसके बाद मध्य रेलवे (21) और दक्षिणी रेलवे (20) का स्थान है। ये संयंत्र कोच धोने और यार्ड संचालन से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार करके उसे गैर-पेय उपयोगों जैसे स्टेशन सफाई, बागवानी और औद्योगिक प्रक्रियाओं में पुन: उपयोग के लिए तैयार करते हैं, जिससे दुर्लभ जलभंडारों और नगरपालिका प्रणालियों से ताजे पानी की निकासी कम होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2025-26 में अब तक 310 लेखापरीक्षाएँ दर्ज की जा चुकी हैं, जो किसी एक वर्ष में सबसे अधिक हैं। दक्षिण मध्य रेलवे 442 लेखापरीक्षाओं के साथ सबसे आगे है, उसके बाद उत्तरी रेलवे (323) और पश्चिमी रेलवे (216) का स्थान आता है। इन लेखापरीक्षाओं के माध्यम से जल खपत के प्रमुख क्षेत्रों, पाइप रिसावों और प्रणाली की कमियों की पहचान की जाती है, जिससे जागरूकता को लक्षित बचत में परिवर्तित किया जा सके। मापन का अनुशासन सार्थक संरक्षण की नींव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2024-25 में 2016-17 की तुलना में 178 करोड़ लीटर डीजल की बचत की, जो 62% की बचत है, जिससे कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम हो गई है। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को सीधे तौर पर कम करता है। डीजल से घरेलू स्तर पर उत्पादित बिजली की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हुए, जो नवीकरणीय स्रोतों से अधिकाधिक प्राप्त की जा रही है, रेलवे ने वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से अपने संचालन को प्रभावी ढंग से अलग कर लिया है। विद्युत कर्षण (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन) को बायोडीजल जैसे विकल्पों की तुलना में कहीं अधिक लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल पाया गया है, जिससे यह न केवल एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, बल्कि आर्थिक रूप से भी जिम्मेदार विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बायो-टॉयलेट: रेल पर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने 2014 से यात्री डिब्बों में 3.66 लाख से अधिक बायो-टॉयलेट लगाकर पर्यावरण स्थिरता और यात्री स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पहल ने रेलवे ट्रैक पर मानव मल के सीधे निर्वहन को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है, जिससे स्वच्छ स्टेशन, बेहतर स्वच्छता और लाखों यात्रियों के लिए अधिक स्वच्छ यात्रा अनुभव सुनिश्चित हुआ है। बायो-टॉयलेट प्रणाली सूक्ष्मजीव क्रिया पर आधारित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके मानव मल को पानी और गैसों में विघटित करती है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण और दुर्गंध में काफी कमी आती है और पूरे नेटवर्क में स्वच्छता बनी रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पहल मिट्टी और ट्रैक के संदूषण को रोककर, रेलवे संपत्तियों के क्षरण को कम करके और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्यक्ष उत्सर्जन को शून्य करके और टिकाऊ स्वच्छता प्रथाओं का समर्थन करके, भारतीय रेलवे यात्रियों के आराम को बेहतर बनाते हुए स्वच्छ पारिस्थितिकी तंत्र और हरित भविष्य में योगदान दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नवीकरणीय ऊर्जा: सूर्य और पवन से भविष्य को शक्ति प्रदान करना</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक परिचालन रणनीति का आधार बनाया है। दिसंबर 2025 तक, पूरे नेटवर्क में लगभग 909 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र और 103 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र चालू हो चुके हैं। पहले से चालू संयंत्रों के अलावा, रेलवे ने राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के डेवलपर्स के साथ सौर, पवन और हाइब्रिड चौबीसों घंटे (आरटीसी) व्यवस्थाओं सहित 3,300 मेगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय क्षमता के लिए समझौते किए हैं, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। यह दीर्घकालिक, स्थिर मूल्य वाली हरित खरीद की ओर एक सुनियोजित बदलाव को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>एलईडी प्रकाश व्यवस्था: एक कुशल रूप से प्रकाशित नेटवर्क</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय रेलवे ने अपने कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों और आवासीय कॉलोनियों में 100% एलईडी प्रकाश व्यवस्था स्थापित कर ली है। यह एक व्यापक परिवर्तन है जो दूरस्थ स्टेशनों से लेकर देश के सबसे बड़े जंक्शनों तक हजारों स्थानों तक फैला हुआ है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस के अवसर  विभिन्न कार्यक्रम का किया गया आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>  उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के आदेशानुसार  जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  सत्य प्रकाश त्रिपाठी के निर्देशानुसार द्वारका प्रसाद गर्ल्र्स इण्टर कालेज, प्रयागराज में पृथ्वी दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन प्रदीप्ति सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में द्वारका प्रसाद गल्र्स इण्टर कालेज, प्रयागराज की प्रधानाचार्य, डा0 रंजना पाण्डेय द्वारा साक्षरता शिविर में उपस्थित समस्त छात्राओं को पृथ्वी दिवस के अवसर पर, पृथ्वी की उपयोगिता एवं उसकी विविधता के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदीप्ति सिंह, सचिव, ने भी छात्राओं को बताया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177003/various-programs-organized-on-the-occasion-of-earth-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0310.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के आदेशानुसार  जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  सत्य प्रकाश त्रिपाठी के निर्देशानुसार द्वारका प्रसाद गर्ल्र्स इण्टर कालेज, प्रयागराज में पृथ्वी दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन प्रदीप्ति सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में द्वारका प्रसाद गल्र्स इण्टर कालेज, प्रयागराज की प्रधानाचार्य, डा0 रंजना पाण्डेय द्वारा साक्षरता शिविर में उपस्थित समस्त छात्राओं को पृथ्वी दिवस के अवसर पर, पृथ्वी की उपयोगिता एवं उसकी विविधता के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदीप्ति सिंह, सचिव, ने भी छात्राओं को बताया गया कि पृथ्वी दिवस 1970 से मनाया जाता है, हर साल पृथ्वी दिवस की एक खास थीम होती है। 2026 की थीम पर्यावरण संरक्षण,क्लाइमेट, क्लाइमेट एक्शन, सस्टेनेबल  लाइफस्टाइल को बढावा देना है।  हमारी शक्ति,हमारा ग्रह"। श्री देवेश शुक्ला, मध्यस्थ  द्वारा समस्त छात्राओं को विधिक जानकारी प्रदान की गयी। सुश्री अंजली यादव व  आशीष कुमार पराविधिक स्वयं सेवको द्वारा उपस्थित छात्राओं को पृथ्वी दिवस के अवसर पर व्याख्यान देते हुए जागरूक किया गया। इस अवसर पर रेनू सिंह, मध्यस्थ व अन्य अध्यापिकायें भी उपस्थित थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पृथ्वी दिवस के अवसर पर राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (बालिका) में बालिकाओं के मध्य चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें समस्त बालिकाओं द्वारा प्रतिभाग किया गया। समस्त बालिकाओं द्वारा पृथ्वी दिवस पर अच्छी पेण्टिंग बनायी गयी। प्रदीप्ति सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज द्वारा अधीक्षिका,  राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (बालिका) व अध्यापिका के सहयोग से चित्रकला प्रतियोगिता में समस्त प्रविष्टियों में से  प्रथम स्थान चयनित किया गया। प्रथम स्थान पर आने वाली बालिका व प्रतियोगिता में भाग लेने वाली समस्त बालिकाओं को प्रदीप्ति सिंह, सचिव,ने पुरस्कृत किया गय।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला कारागार, नैनी, प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम मे उपस्थित समस्त जेल पराविधिक स्वयं सेंवकों व अन्य निरूद्व बन्दियों को विधिक जानकारी प्रदान करते हुए, पृथ्वी दिवस की उपयोगिता के बारे मे अवगत कराया गया। इस अवसर पर कारागार सुपरिटेन्डेन्ट, डिप्टी जेलर, जिला कारागार व अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:43:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>”विश्व पृथ्वी दिवस पर भरवारा एसटीपी में पौधरोपण: हरियाली बढ़ाने को सुएज का संकल्प”</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर भरवारा स्थित 345 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ पहल के अंतर्गत कार्य कर रही संस्था सुएज ने आइवा के साथ मिलकर पौधरोपण किया। इस दौरान परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। विश्व पृथ्वी दिवस हर वर्ष 22 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह दिन लोगों को यह संदेश देता है कि प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पृथ्वी को सुरक्षित बनाएं।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176987/%E2%80%9Csuez-resolves-to-increase-greenery-by-planting-trees-in-bharwara"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/423585-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर भरवारा स्थित 345 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ पहल के अंतर्गत कार्य कर रही संस्था सुएज ने आइवा के साथ मिलकर पौधरोपण किया। इस दौरान परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। विश्व पृथ्वी दिवस हर वर्ष 22 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दिन लोगों को यह संदेश देता है कि प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पृथ्वी को सुरक्षित बनाएं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सुएज द्वारा यह पहल की गई। सुएज लखनऊ में सस्टेनेबिलिटी को लेकर अत्यंत सजग है और भरवारा एसटीपी परिसर को हरा-भरा बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। कंपनी द्वारा समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाता है। इस अवसर पर परियोजना निदेशक राजेश मठपाल ने कहा, “पृथ्वी दिवस हमें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुएज सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। पौधरोपण जैसे छोटे प्रयास भी आने वाले समय में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल संचालन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करना भी है।”कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:22:47 +0530</pubDate>
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