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                <title>कृषि - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>कृषि RSS Feed</description>
                
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                <title>धरती माता बचाओ अभियान के तहत तरल उर्वरक उपयोग हेतु कार्यशाला आयोजित </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकर नगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को कृषि भवन, अम्बेडकरनगर (अकबरपुर) के किसान सभागार में 'धरती माता बचाओ अभियान के तहत नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग पर जनपद स्तरीय कार्यशाला हुआ, जिसमें कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियो, सहायक विकास अधिकारी (कृषि), उर्वरक डीलर, ड्रोन दीदी सहित कृषि विभाग व इफको के अधिकारी उपस्थित रहे। जिसमे कृषि विभाग के अधिकारियों ने संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर दिया। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक देवी प्रसाद ने रासायनिक उर्वरको के प्रयोग कम कर</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169489/workshop-on-use-of-liquid-fertilizer-organized-under-save-mother"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260213-wa1032.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकर नगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को कृषि भवन, अम्बेडकरनगर (अकबरपुर) के किसान सभागार में 'धरती माता बचाओ अभियान के तहत नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग पर जनपद स्तरीय कार्यशाला हुआ, जिसमें कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियो, सहायक विकास अधिकारी (कृषि), उर्वरक डीलर, ड्रोन दीदी सहित कृषि विभाग व इफको के अधिकारी उपस्थित रहे। जिसमे कृषि विभाग के अधिकारियों ने संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर दिया। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक देवी प्रसाद ने रासायनिक उर्वरको के प्रयोग कम कर नैनो उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।</p>
<p style="text-align:justify;">उप महाप्रबन्धक डा०आर०के० नायक ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, सागरिका, नैनो कॉपर और नैनो जिंक के प्रयोग की विधि एवं उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। जिला कृषि अधिकारी अरविन्द कुमार चौधरी ने रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करने, समुचित प्रबंधन तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आई०एन०एम०) पर प्रकाश डाला और बताया कि विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से किसानों को जागरूक कर उनके खेतों पर नैनो उर्वरकों के प्रदर्शन कराए जाएं, ताकि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक डा० अश्विनी कुमार सिंह ने पीजीआर एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व को बताते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा किसानो से नैनो उर्वरक के प्रयोग करने का आह्वान किया हैं। यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं। अंत में अपर जिला कृषि अधिकारी रोहित कुमार साहू ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।</p>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 17:51:56 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>किसानक्राफ्ट ने सूखे सीधे बीज वाले धान पर किया एक तकनीकी प्रदर्शन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">          किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत किसानक्राफ्ट ने जनपद के रैमलपुर गांव में “सूखे सीधे बीज वाले धान (ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस - DSR)” पर एक तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को डीएसआर तकनीक के लाभों से परिचित कराना और धान की खेती में पानी की बचत, लागत में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/img20251014122341_copy_1077x605.jpg" alt="IMG20251014122341_copy_1077x605" width="1077" height="605" /></p>
<p style="text-align:justify;">          कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) प्रमुख डॉ. रामजीत ने कहा कि “धान की खेती भारत की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन घटता जलस्तर और</p>
<p style="text-align:justify;">      </p>
<p style="text-align:justify;">      </p>
<p style="text-align:justify;">       </p>
<p style="text-align:justify;">       </p>
<p style="text-align:justify;">         </p>]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157280/kisancraft-did-a-technical-demonstration-on-dry-direct-seeded-paddy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img20251014122341_copy_1077x605.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">     किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत किसानक्राफ्ट ने जनपद के रैमलपुर गांव में “सूखे सीधे बीज वाले धान (ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस - DSR)” पर एक तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को डीएसआर तकनीक के लाभों से परिचित कराना और धान की खेती में पानी की बचत, लागत में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/img20251014122341_copy_1077x605.jpg" alt="IMG20251014122341_copy_1077x605" width="1077" height="605"></img></p>
<p style="text-align:justify;">     कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) प्रमुख डॉ. रामजीत ने कहा कि “धान की खेती भारत की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन घटता जलस्तर और बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। डीएसआर तकनीक अपनाने से किसान समान उत्पादन के साथ लगभग 50 प्रतिशत तक पानी की बचत कर सकते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">      किसानक्राफ्ट के असिस्टेंट मैनेजर (डेवलपमेंट) आलोक जैन ने बताया कि सूखे सीधे बीज वाले धान की तकनीक से किसान मिट्टी की उर्वरता के अनुसार बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं। यह पद्धति पारंपरिक धान की तुलना में कम खर्चीली है और इससे उत्पादित धान के स्वाद में कोई अंतर नहीं आता।</p>
<p style="text-align:justify;">      वहीं आर एंड डी हेड डॉ. सुमंत होल्ला ने कहा कि “डीएसआर तकनीक से नर्सरी, पोखरिंग, समतलीकरण और रोपाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे श्रम लागत में भारी कमी आती है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि मीथेन गैस के उत्सर्जन को भी कम करती है।”</p>
<p style="text-align:justify;">       कृषि विशेषज्ञ डॉ. मार्श मणि पांडेय ने कहा कि प्रदेश में लो-मीथेन धान को बढ़ावा देने के तहत डीएसआर तकनीक को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा दोनों में सहयोग मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">       कार्यक्रम का आयोजन एफपीओ डायरेक्टर चंद्रप्रकाश वर्मा के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर किसानक्राफ्ट के सेल्स मैनेजर रत्नेश विश्वकर्मा ने बताया कि कंपनी एक आईएसओ-प्रमाणित निर्माता, थोक आयातक और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उपकरणों की वितरक है। देशभर में 5000 से अधिक डीलरों, एक विनिर्माण इकाई और 14 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से किसानक्राफ्ट सीमांत किसानों की पैदावार बढ़ाने और उनकी आजीविका सुधारने में कार्यरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">         कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और उन्होंने डीएसआर तकनीक के व्यावहारिक लाभों का प्रत्यक्ष अनुभव किया। इस दौरान किसान वेद प्रकाश श्रीवास्तव, जयप्रकाश वर्मा, ओम प्रकाश सिंह, अनिल कुमार सिंह, रामजन्म तिवारी, मनोज कुमार तिवारी, ओमप्रकाश वर्मा, रामकृष्ण वर्मा, रामकुमार वर्मा, नीरज वर्मा, श्याम सिंह समेत अनेक किसानों ने भागीदारी की।</p>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 22:00:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेजस्वी किसान मार्ट ने आयोजित किया वर्चुअल प्रशिक्षण</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  तेजस्वी किसान मार्ट के तत्वावधान में प्राकृतिक खेती एवं जैविक कृषि विषय पर एक वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गूगल मीट मंच के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश भर से किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता ई. प्रकाश पाण्डेय, संस्थापक एवं अध्यक्ष, तेजस्वी किसान मार्ट ने की। उन्होंने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि तेजस्वी किसान मार्ट किसानों को सतत, सुरक्षित एवं लाभकारी कृषि की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156609/stunning-farmer-mart-conducted-virtual-training"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img_20251005_185629.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> तेजस्वी किसान मार्ट के तत्वावधान में प्राकृतिक खेती एवं जैविक कृषि विषय पर एक वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गूगल मीट मंच के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश भर से किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता ई. प्रकाश पाण्डेय, संस्थापक एवं अध्यक्ष, तेजस्वी किसान मार्ट ने की। उन्होंने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि तेजस्वी किसान मार्ट किसानों को सतत, सुरक्षित एवं लाभकारी कृषि की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने यह भी बताया कि तेजस्वी किसान मार्ट के स्टोर पर प्राकृतिक खाद, जैविक कीटनाशक एवं अन्य कृषि उत्पाद उपलब्ध हैं, तथा पंजीकृत किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।जिसके क्रम में</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. टी. डी. मिश्रा (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय नैनी) ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर बल देते हुए कहा कि देसी बीजों का संरक्षण, हरी खाद एवं वर्मी कंपोस्ट का उपयोग, नीम आधारित उपचार और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य सुरक्षा को कृषि की प्राथमिकता बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी क्रम में चंद्रसेन सिंह (संस्थान प्रमुख, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जौनपुर) ने जैविक खाद जैसे जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्नेयास्त्र, खट्टी छाछ और दशपर्णी जैसे जैविक कीटनाशकों के नियमित प्रयोग की सलाह दी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है।</p>
<p style="text-align:justify;"> एस. के. सिंह (पूर्व उप महाप्रबंधक, भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड एवं बिज़नेस हेड, एर्डे एग्रो ईकोसिस्टम प्रा. लि.) ने जैविक खेती और प्राकृतिक उर्वरकों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को आईपीएम (समेकित कीट प्रबंधन) अपनाने और बाजार समर्थन, मूल्य निर्धारण तथा ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लाभों के प्रति जागरूक किया।</p>
<p style="text-align:justify;"> हिमांशु चतुर्वेदी (संचालन, तेजस्वी किसान मार्ट) ने प्राकृतिक खेती और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों को पूर्वनिर्धारित मूल्य और बाजार की गारंटी प्राप्त होती है, जिससे स्थिर आय और उत्पादन सुनिश्चित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना समय की आवश्यकता।रासायनिक उर्वरकों का नियंत्रित उपयोग और जैविक उपायों का नियमित प्रयोग।आईपीएम तकनीक से कीट प्रबंधन को प्रभावी बनाना।भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड एवं एर्डे एग्रो ईकोसिस्टम प्रा. लि. के मार्गदर्शन का लाभ उठाना।तेजस्वी किसान मार्ट के स्टोर से उपलब्ध जैविक उत्पादों का उपयोग करना।एफपीओ के माध्यम से सामूहिक ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देना।पंजीकृत किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रमाणपत्र एवं ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सहायता प्रदान की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महंत मृत्युंजय दास, भोलेनाथ महतो, रेणु चौरसिया, चंद्रसेन सिंह, दीवान किसान उत्पादक संगठन, हिमांशु चतुर्वेदी, लक्ष्मण सिंह जादौन, मानभूम किसान उत्पादक कंपनी, मुकेश सिंह, प्रकाश प्रसाद, राजन कुमार, रमेश सिंह, रामसेवक कुशवाह, रुपवारा मारवान किसान उत्पादक संगठन, साकिर खान एवं शैलेश कुमार सिंह सहित अनेक प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के प्रति उत्साह प्रकट किया और प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष ई. प्रकाश पाण्डेय ने सभी वक्ताओं, एफपीओ प्रतिनिधियों एवं किसानों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उन्हें तेजस्वी किसान मार्ट की आगामी योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।</p>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Oct 2025 19:12:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[राजेश तिवारी]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>जिला कृषि कार्यालय में आज भी बदली जाएगी उर्वरक वितरकों की पॉश मशीन </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">जनपद के ऐसे क्रियाशील फुटकर उर्वरक विक्रेता जिनके द्वारा अभी भी एल-0 पी०ओ०एस० मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे फुटकर उर्वरक विक्रेताओ को प्रत्येक दशा में आज तक एल०- 0 पी०ओ०एस० मशीन को एल-1 पी०ओ०एस० मशीन से जनपद के लिए नामित कम्पनी मैटिक्स, आई०पी०एल०, कृभको एवं इफको से रिप्लेस (बदल) कर लें अन्यथा 01 सितम्बर, 2025 से एल-1 पी०ओ०एस० मशीनो के बिना उर्वरकों का कय-विक्रय नहीं किया जा सकेगा तथा सम्बन्धित उर्वरक विक्रेता द्वारा पी०ओ०एस० मशीन नहीं बदलने पर उक्त विक्रेता की रिटेलर आई०डी० बन्द हो जायेगी और वह उर्वरक वितरण का कार्य नहीं कर पायेंगें।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154244/fertilizer-distributors-posh-machines-will-still-be-changed-in-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img_20250831_090248_copy_1351x1349.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">जनपद के ऐसे क्रियाशील फुटकर उर्वरक विक्रेता जिनके द्वारा अभी भी एल-0 पी०ओ०एस० मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे फुटकर उर्वरक विक्रेताओ को प्रत्येक दशा में आज तक एल०- 0 पी०ओ०एस० मशीन को एल-1 पी०ओ०एस० मशीन से जनपद के लिए नामित कम्पनी मैटिक्स, आई०पी०एल०, कृभको एवं इफको से रिप्लेस (बदल) कर लें अन्यथा 01 सितम्बर, 2025 से एल-1 पी०ओ०एस० मशीनो के बिना उर्वरकों का कय-विक्रय नहीं किया जा सकेगा तथा सम्बन्धित उर्वरक विक्रेता द्वारा पी०ओ०एस० मशीन नहीं बदलने पर उक्त विक्रेता की रिटेलर आई०डी० बन्द हो जायेगी और वह उर्वरक वितरण का कार्य नहीं कर पायेंगें।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार को जिले एल - 1 की 164 पॉश मशीन तथा पूर्व में 742 पॉश मशीन कृषि विभाग द्वारा जनपद के उर्वरक व्यवसाईयों में एल -0 के स्थान पर बदल कर वितरित कराई जा चुकी है। एल- 0 पॉश मशीन को एल- 1 पॉश मशीन से अपग्रेड करने के लिए अभी भी 171 उर्वरक व्यवसाई शेष हैं जिन्हें आज रविवार को भी जिला कृषि कार्यालय में उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जनपद में यूरिया एवं अन्य उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। जिन किसानों को उर्वरक की आवश्यकता है वे अपने नजदीकी उर्वरक बिकी केन्द्र से पी०ओ०एस० के माध्यम से प्राप्त कर सकते है। यूरिया के अन्य वैकल्पिक स्रोत में कृषक अपने धान की फसल में द्वितीय टॉप ड्रेसिंग के स्थान पर नैनो यूरिया का स्प्रे कर सकते है। उर्वरक से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के समस्या के लिये जनपद में कार्यालय जिला कृषि अधिकारी, अम्बेडकरनगर में उर्वरक कंट्रोल रूम स्थापित है जिसका नम्बर 9455485475 है। जनपद के कृषक उर्वरकों के सम्बन्ध में उक्त हेल्प लाइन नम्बर पर सम्पर्क कर उर्वरकों के सम्बन्ध में अपनी शिकायत दर्ज कराकर समाधान प्राप्त कर सकते है।</p>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Aug 2025 09:08:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]>
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            <item>
                <title>कृषि विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किसानों को वितरित की जायेगी निःशुल्क राई/सरसों बीज मिनीकिट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर</strong>।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर उपनिदेशक कृषि ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा संचालित राज्य सहायतित निःशुल्क राई/सरसों बीज मिनीकिट वितरण, प्रदर्शन एवं प्रसार कार्यक्रम के अन्तर्गत राई/सरसों फसल का 02 किलोग्राम मात्रा की बीज मिनीकिट निःशुल्क प्राप्त करने हेतु कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत कृषकों के द्वारा ऑनलाइन आवेदन दिनांक 01 सितम्बर से 25 सितम्बर तक बुकिंग प्रकिया प्रारम्भ की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑनलाइन आवेदन करने वाले कृषकों को बीज मिनीकिट आवेदन अवधि के प्राप्त सभी पात्र आवेदकों के मध्य लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने की दशा में ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154168/agriculture-department-will-distribute-free-cervical-seed-minicit-through-online"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250828-wa1214.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर</strong>।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर उपनिदेशक कृषि ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा संचालित राज्य सहायतित निःशुल्क राई/सरसों बीज मिनीकिट वितरण, प्रदर्शन एवं प्रसार कार्यक्रम के अन्तर्गत राई/सरसों फसल का 02 किलोग्राम मात्रा की बीज मिनीकिट निःशुल्क प्राप्त करने हेतु कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत कृषकों के द्वारा ऑनलाइन आवेदन दिनांक 01 सितम्बर से 25 सितम्बर तक बुकिंग प्रकिया प्रारम्भ की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑनलाइन आवेदन करने वाले कृषकों को बीज मिनीकिट आवेदन अवधि के प्राप्त सभी पात्र आवेदकों के मध्य लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने की दशा में ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जायेगा। एक कृषक को केवल एक बीज 'मिनीकिट प्राप्त हो सकेगा। चयनित कृषकों को पॉश मशीन के माध्यम से राजकीय कृषि बीज भण्डारो से बीज मिनीकिट वितरण कराया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जनपद के सभी विकास खण्डों के इच्छुक कृषक बीज प्राप्त करने हेतु विभाग के पोर्टल पर <strong>https://agridarshan.up.gov.in</strong> ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। उपरोक्त जानकारी जिला सूचना के माध्यम से उप कृषि निदेशक, अम्बेडकरनगर द्वारा प्रदान कराई गई।</p>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Aug 2025 07:59:05 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Ambedkarnagar Swatantra Prabhat]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विनाशकारी खरपतवार को समय रहते नियंत्रण में किया जाना चाहिए</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</strong></div>
<div><strong>उन्नाव</strong></div>
<div>  </div>
<div>जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया है कि गाजर घास या ‘चटक चांदनी’ एक घास है जो बडे़ आक्रामक तरीके से फैलती है। यह एक वर्षीय शाकीय पौधा है जो हर तरह के वातावरण में तेजी से उगकर फसलों के साथ-साथ मनुष्य और पशुओं के लिए भी गंभीर समस्या बन जाता है। इस विनाशकारी खरपतवार को समय रहते नियंत्रण में किया जाना चाहिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस घास को ‘चिड़िया बाड़ी’ के नाम से भी पुकारते है।</div>
<div>  </div>
<div>इस खरपतवार की बीस प्रजातियां पूरे विश्व में पायी जाती है। भारत में इसका प्रवेश तीन दशक पूर्व</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134043/destructive-weeds-should-be-controlled-in-time"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/12,_-(2).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</strong></div>
<div><strong>उन्नाव</strong></div>
<div> </div>
<div>जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया है कि गाजर घास या ‘चटक चांदनी’ एक घास है जो बडे़ आक्रामक तरीके से फैलती है। यह एक वर्षीय शाकीय पौधा है जो हर तरह के वातावरण में तेजी से उगकर फसलों के साथ-साथ मनुष्य और पशुओं के लिए भी गंभीर समस्या बन जाता है। इस विनाशकारी खरपतवार को समय रहते नियंत्रण में किया जाना चाहिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस घास को ‘चिड़िया बाड़ी’ के नाम से भी पुकारते है।</div>
<div> </div>
<div>इस खरपतवार की बीस प्रजातियां पूरे विश्व में पायी जाती है। भारत में इसका प्रवेश तीन दशक पूर्व अमेरिका या कनाडा से आयात किये गये गेहूं के साथ हुआ है। अल्पकाल में ही लगभग पांच मिलियन हेकटेयर क्षेत्र में इसका भीषण प्रकोप हो गया है। एक से डेढ़ मीटर तक लम्बी गाजर घास का तना रोयेदार अत्यधिक शाखायुक्त होता है। इसकी पत्तियां असामान्य रूप से गाजर की पत्ती की तरह होती है।</div>
<div> </div>
<div>प्रत्येक पौधा 1000 से 50000 अत्यंत सूक्ष्म बीज पैदा करता है, जो शीघ्र ही जमीन पर गिरने के बाद प्रकाश और अंधकार में नमी पाकर अंकुरित हो जाते है। यह पौधा 3-4 माह में ही अपना जीवन चक्र पूरा कर लेता है और वर्ष भर उगता और फलता फूलता है। इसका प्रकोप खाद्यान फसलों जैसे धान, ज्वार, मक्का, सोयाबीन, मटर, तिल, अरंडी, गन्ना, बाजरा, मूंगफली, सब्जियों एवं उद्यान फसलों में भी देखा गया है।</div>
<div> </div>
<div>गाजर घास मनुष्य और पशुओं के लिए भी एक गंभीर समस्या है। इससे खाद्यान फसल की पैदावार में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आंकी गई है। उन्होंने बताया है कि इसके दुष्प्रभाव से निपटने के लिए कृषि विभाग द्वारा 16 अगस्त से 22 अगस्त तक गाजर घास नियंत्रण जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम चलाया गया है।</div>
<div> </div>
<div>गाजर घास के नियंत्रण के लिए गाजर घास में फूल आने से पहले जड़ से उखाड़ कर कम्पोस्ट बनाना चाहिए। शीघ्र बढने वाली फसलों जैसे- ढैंचा, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि फसलों में एट्रीजिन 1-1.5 किग्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर बुवाई के तुरंत बाद प्रयोग किया जाना चाहिए। घर के आस-पास बगीचे, उद्यान एवं संरक्षित क्षेत्रो में गेंदे के पौधो को उगा कर गाजर घास के फैलाव एवं वृद्धि को रोका जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div>इस खरपतवार के लगातार सम्पर्क में आने से मनुष्यों में डरमेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा आदि की बीमारियां हो जाती है। पशुओं के लिए भी यह खतरनाक है। इससे उनमें कई प्रकार के रोग हो जाते है एवं दुधारू पशुओं के दुध में कड़वाहट आने लगती है। पशुओं द्वारा अधिक मात्रा में इसे चर लेने से उनकी मृत्यु भी हो सकती है।</div>
<div> </div>
<div>इसकी रोकथाम के लिए वैधानिक, यांत्रिक, रासायनिक एवं जैविक विधियों का उपयोग किया जाता है। गैर कृषि क्षेत्रों में इसके नियंत्रण के लिए शाकनाशी रासायन एट्राजिन का प्रयोग फूल आने से पूर्व 1.5 किग्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर पर उपयोग किया जाना चाहिए। ग्लाइफोसेट 2 किग्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर और मैट्रिब्यूजिन 2 किग्रा, तत्व प्रति हेक्टेयर का प्रयोग फूल आने से पूर्व किया जाना चाहिए।</div>]]>
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                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/134043/destructive-weeds-should-be-controlled-in-time</link>
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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 17:25:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईसेक्ट विश्वविद्यालय में कृषि विभाग की ओर से किया गया विदाई समारोह का आयोजन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<h3>आईसेक्ट विश्वविद्यालय में कृषि विभाग की ओर से किया गया विदाई समारोह का आयोजन</h3>
<h4>2019-23 बैच के विद्यार्थियों को दी गई विदाई </h4>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात : हजारीबाग  : कृष्णा कुमार </strong></p>
<p><br />आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के तरबा-खरबा स्थित विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस सभागार में कृषि विभाग के सभी सेमेस्टर के विद्यार्थियों की ओर से 2019-23 बैच के लिए विद्यार्थियों के विदाई समारोह का आयोजन किया गया।  विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक, कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, डीन एडमिन डॉ एसआर रथ, कृषि विभाग डीन डॉ अरविंद कुमार, एचओडी प्रभात किरण सहित अन्य के हाथों से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133126/farewell-function-organized-by-department-of-agriculture-at-aisect-university"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/आईसेक्ट-विश्वविद्यालय-में-कृषि-विभाग-की-ओर-से-किया-गया-विदाई-समारोह-का-आयोजन.jpg" alt=""></a><br /><h3>आईसेक्ट विश्वविद्यालय में कृषि विभाग की ओर से किया गया विदाई समारोह का आयोजन</h3>
<h4>2019-23 बैच के विद्यार्थियों को दी गई विदाई </h4>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात : हजारीबाग  : कृष्णा कुमार </strong></p>
<p><br />आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के तरबा-खरबा स्थित विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस सभागार में कृषि विभाग के सभी सेमेस्टर के विद्यार्थियों की ओर से 2019-23 बैच के लिए विद्यार्थियों के विदाई समारोह का आयोजन किया गया।  विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक, कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, डीन एडमिन डॉ एसआर रथ, कृषि विभाग डीन डॉ अरविंद कुमार, एचओडी प्रभात किरण सहित अन्य के हाथों से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मौके पर कुलपति डॉ पीके नायक ने कहा कि आईसेक्ट विश्वविद्यालय आज जिन बुलंदियों को हासिल किया है, उसमें विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे जो कृषि की पढ़ाई कर यहां से जा रहे हैं, भविष्य उनका उज्जवल हो, यह कामना करता हूं। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की कामना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अपने शुरुआती दिनों से ही विद्यार्थियों के समावेशी विकास को आधार बनाकर चला है, जिससे यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में यह कहा ही जा सकता है कि भविष्य में विद्यार्थी जहां भी रहेंगे, वह हमेशा आईसेक्ट विश्वविद्यालय का, अपने क्षेत्र का और देश का नाम रोशन करेंगें। उन्होंने मौजूद विद्यार्थियों से मुखातिब होते हुए कहा कि सभी विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ साथ खेल-कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व अन्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा जरूर लेनी चाहिए। इससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास को बल मिलता है। कृषि विभाग डीन डॉ अरविंद कुमार ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि जो विद्यार्थी पढ़ाई पूरी कर विश्वविद्यालय से विदा ले रहें हैं, वह सुनहरे भविष्य के ख्वाब को हकीकत में जरूर तब्दील करेंगे। इस बीच कई मनमोहक नृत्य भी पेश किए गए, जिसमें स्वीटी, रिया, साक्षी, सृष्टि के नृत्य पर लोगों के भी पांव थिरकने लगे। वहीं विशाल टोप्पो के गीत ने भी खूब वाहवाही बटोरी। इस मौके पर विद्यार्थियों के साथ साथ कृषि विभाग एचओडी प्रभात किरण, सह प्राध्यापक डॉ एसपी विश्वकर्मा, सह प्राध्यापिका प्रिया कुमारी व फरहीन सिद्दीक के अलावा कई आंखें नम दिखी। संचालन सुधि श्रीवास्तव व नीरज कुमार ने किया।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/133126/farewell-function-organized-by-department-of-agriculture-at-aisect-university</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/133126/farewell-function-organized-by-department-of-agriculture-at-aisect-university</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 18:00:26 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jharkhand Swatantra Prabhat]]>
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                <title>कृषि मंत्री से मिले विधायक मनीष जायसवाल, किसानों की बकाया राशि के भुगतान के साथ-साथ लंबित आवेदनों की सत्यापन कराने की मांग की</title>
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                        <![CDATA[<h3>कृषि मंत्री से मिले विधायक मनीष जायसवाल, किसानों की बकाया राशि के भुगतान के साथ-साथ लंबित आवेदनों की सत्यापन कराने की मांग की</h3>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात : रांची : हंसराज  चौरसिया </strong></p>
<p>झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मंत्री बादल पत्रलेख से विधानसभा परिसर में मिले और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विधायक मनीष जायसवाल ने लिखा है कि जहां राज्य एक और पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी सुखाड़ की चपेट में आ रही है और राज्य की लगभग 75% आबादी कृषि पर</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133085/mla-manish-jaiswal-met-agriculture-minister-demanded-payment-of-dues"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/कृषि-मंत्री-से-मिले-विधायक-मनीष-जायसवाल,-किसानों-की-बकाया-राशि-के-भुगतान-के.jpg" alt=""></a><br /><h3>कृषि मंत्री से मिले विधायक मनीष जायसवाल, किसानों की बकाया राशि के भुगतान के साथ-साथ लंबित आवेदनों की सत्यापन कराने की मांग की</h3>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात : रांची : हंसराज  चौरसिया </strong></p>
<p>झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मंत्री बादल पत्रलेख से विधानसभा परिसर में मिले और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विधायक मनीष जायसवाल ने लिखा है कि जहां राज्य एक और पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी सुखाड़ की चपेट में आ रही है और राज्य की लगभग 75% आबादी कृषि पर निर्भर है वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2022- 23 की खरीफ फसलों का राज्य के लगभग 85% किसानों को उसके फसलों का आधी से अधिक राशि अब तक नहीं दी गई है जिसके कारण राज्य के किसानों के समक्ष आत्महत्या की स्थिति उत्पन्न हो गई है तथा उक्त किसानों को पूर्ववर्ती सरकार द्वारा निर्धारित की गई बोनस राशि भी कम कर दी गई है साथ ही राज्य में करीब 8. 66 लाख किसानों को सरकार की लापरवाही के कारण केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 14वीं किस्त से वंचित रह जाएंगे क्योंकि इन किसानों का ई- केवाईसी, डीबीटी तथा भूमि का सत्यापन अब तक नहीं हो पाई है। राज्य में अब तक सबसे अधिक भूमि सत्यापन से संबंधित मामले रांची और हजारीबाग में देखी जा सकती है जिसमें सिर्फ हजारीबाग में लगभग 1,10,200 किसानों का आवेदन अबतक लंबित है। ऐसे में राज्य के किसानों को सरकार उक्त योजना का लाभ कैसे देगी यह चिंता की बात है। इस गंभीर विषय पर कृषि मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए विधायक मनीष जायसवाल ने उनसे आग्रह करते हुए लिखा है कि हजारीबाग सहित राज्य के किसानों की फसलों का वर्षों से लंबित बकाया राशि का यथाशीघ्र भुगतान करते हुए किसानों के लंबित आवेदनों का सत्यापन भी अतिशीघ्र कराने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक  निर्देश देने की कृपा करें।</p>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 17:43:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jharkhand Swatantra Prabhat]]>
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                <title>एनेक्सी भवन गोरखपुर के सभागार में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी तरल पर आधारित जनपद स्तरीय सहकारी कार्यशाला  का आयोजन</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>ब्यूरो चीफ /शत्रुघ्न मणि त्रिपाठी</strong>    <br />  गोरखपुर। 28जुलाई, 2023 को इफ़को द्वारा नैनों यूरिया एवं नैनों डी ए पी तरल आधारित जनपद स्तरीय सहकारी कार्यशाला  आयोजित किया गया । कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि  माननीय सहकारिता मंत्री जे पी एस राठौर ने अपने मुख्य अतिथि<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/img-20230728-wa0179.jpg" alt="IMG-20230728-WA0179" /> सम्बोधन  मे बोलते हुए कहा है किसानो को इस बात की जानकारी  दिए जाने की आवश्यक्ता है कि इन उर्वरकों के प्रयोग से देश उर्वरक के मामले मे आत्मनिर्भर हो सकता है । किसान इन उर्वरकों का सही मात्रा मे , सही समय पर , सही तरह से उपयोग करें । नैनों यूरिया का प्रयोग 4 मिली</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132935/organization-of-district-level-cooperative-workshop-based-on-nano-urea"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/img-20230728-wa0161.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो चीफ /शत्रुघ्न मणि त्रिपाठी</strong>  <br /> गोरखपुर। 28जुलाई, 2023 को इफ़को द्वारा नैनों यूरिया एवं नैनों डी ए पी तरल आधारित जनपद स्तरीय सहकारी कार्यशाला  आयोजित किया गया । कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि  माननीय सहकारिता मंत्री जे पी एस राठौर ने अपने मुख्य अतिथि<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/img-20230728-wa0179.jpg" alt="IMG-20230728-WA0179"></img> सम्बोधन  मे बोलते हुए कहा है किसानो को इस बात की जानकारी  दिए जाने की आवश्यक्ता है कि इन उर्वरकों के प्रयोग से देश उर्वरक के मामले मे आत्मनिर्भर हो सकता है । किसान इन उर्वरकों का सही मात्रा मे , सही समय पर , सही तरह से उपयोग करें । नैनों यूरिया का प्रयोग 4 मिली प्रति लीटर पानी मे घोल बना कर बोवाई के 30-35 दिन बाद कल्ले व शाखाए निकलने पर किया जाय जब फ़सल से खेत की  जमीन ढक जाय । </p><p>नैनो डी ए पी का प्रयोग बीज शोधन , रोपाई की स्थिति मे जड शोधन तथा खडी  फ़सल पर  एक स्प्रे के रूप में किया जाने के बारे में बताने के साथ ही अगले माह में इफको द्वारा ब्लॉक स्तरीय मीटिंग के  आयोजन आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी दिया l समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी आगे बोलते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ग्राम विकास बैंक पहली बार 100 करोड़ से अधिक लाभ की स्थिति में है l समितियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए इनको 32 प्रकार के व्यवसाय दिए जा रहे है l</p><p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/img-20230728-wa0173.jpg" alt="एनेक्सी भवन गोरखपुर के सभागार में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी तरल पर आधारित जनपद स्तरीय सहकारी कार्यशाला  का आयोजन"></img><br /> </p><p>इसके पूर्व लखनऊ से आए इफको के राज्य विपणन प्रबंधक उत्तर प्रदेश श्री अभिमन्यु  ने नैनो उर्वरकों के बारे में पावर प्वाइंट के माध्यम से सचिवों को जानकारी दी उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया नैनो डीएपी के प्रयोग से उर्वरक पर दी जाने वाली अनुदान को समाप्त किया जा सकता है और उर्वरक के मामले में देश को आत्मनिभार बनाया जा सकता है उन्होंने बताया कि अब नैनो यूरिया के साथ किसानों को नैनो डीएपी भी दिया जा रहा है जिससी की उनके कृषि में लागत कम हो और आय बढ़े नैनो डीएपी की एक बोतल की कीमत 600 रूपए जो की एक बोर डीएपी के बराबर है इसका प्रयोग किसान बीज सोधन के साथ साथ खड़ी फसल को कर सकेत हैं I </p><p>कार्यक्रम में गोरखपुर के ग्रामीण विधायक ने इफको द्वारा की जाने वाली कार्यों की सराहना की साथ ही साथ सहकारिता विभाग की कार्यों की प्रशंसा की  इफको रहे हैं व्यवसाय में सहकारी समितियों को अधिक से अधिक लाभ कैसे प्राप्त हो इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई और अपेक्षा की गई कि नैनो यूरिया व नैनो डीएपी को किसान तक सही उपयोग विधि बता कर दिया जाए जिससे आने वाले समय में सहकारी समितियां एक नया क्रांतिकारी उत्पादों को बिक्री करने में गर्व महसूस करें  इफको नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी से हमारी मिट्टी जल एवं पर्यावरण की रक्षा तो होगी ही साथ ही देश पर पड़ने वाले अनुदान का बोझ भी कम होगाI</p><p><br />श्री संतराज यादव उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड लखनऊ के सभापति ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी से होने वाले फायदे से सचिवों को अवगत कराया तथा इसके प्रयोग की सलाह दी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य श्री धर्मेंद्र सिंह ने इको के कार्यों की सराहना की तथा नैनो से होने वाले अनुदान के बचत के बारे में सचिवों को विस्तार से बताएं। सहकारी विकास बैंक लिमिटेड ने सहकारिता विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया साथ ही साथ नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी से होने वाले लाभों के बारे में सचिवों को जानकारी दी।<br />कार्यक्रम में सहकारिता उप निबधक सहकारिता गोरखपुर मण्डल ने सचिवों से नैनो यूरिया नैनो डीएपी के प्रचार प्रसार की अपील की।</p><p><br />सहायक निबंधक श्री नीरज कुमार ने सचिवों को किसानों के सेवा करने की अपील की। <br />हरि प्रसाद मल्ल उप महाप्रबंधक इफको गोरखपुर ने संतुलित उर्वरक प्रयोग में इफको अन्य उत्पादों के महत्व व उत्पादकता वृद्धि में योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दिया।b<br />कार्यक्रम का संचालन कौशिक कुमार पांडेय किया ।कार्यक्रम में कुल 500 लोगो ने भाग लिया।<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/132935/organization-of-district-level-cooperative-workshop-based-on-nano-urea</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2023 21:12:17 +0530</pubDate>
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