<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/78897/higher-education-crisis" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Higher Education Crisis - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/78897/rss</link>
                <description>Higher Education Crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तिरस्कार से तख्त तक: ‘कीड़ों’ ने सत्ता नहीं, सोच को चुनौती दी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर युग अपने प्रतीक स्वयं गढ़ता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी कोई शब्द अपमान का पर्याय होता है और कभी वही शब्द परिवर्तन का ध्वज बन जाता है। हाल के दिनों में भारतीय लोकतंत्र ने यही देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की एक टिप्पणी में प्रयुक्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच’</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द को युवाओं ने अपमान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान बना लिया। देखते ही देखते वही</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रतीक बन गया। जंतर-मंतर से उठी यह आवाज़ न किसी राजनीतिक दल की रैली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न पारंपरिक छात्र आंदोलन</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उस पीढ़ी का सामूहिक प्रतिरोध था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184132/from-contempt-to-throne-%E2%80%98insects%E2%80%99-challenged-thinking-not-power"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hq720.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर युग अपने प्रतीक स्वयं गढ़ता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी कोई शब्द अपमान का पर्याय होता है और कभी वही शब्द परिवर्तन का ध्वज बन जाता है। हाल के दिनों में भारतीय लोकतंत्र ने यही देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की एक टिप्पणी में प्रयुक्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच’</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द को युवाओं ने अपमान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान बना लिया। देखते ही देखते वही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रतीक बन गया। जंतर-मंतर से उठी यह आवाज़ न किसी राजनीतिक दल की रैली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न पारंपरिक छात्र आंदोलन</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उस पीढ़ी का सामूहिक प्रतिरोध था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने वर्षों तक परीक्षाएँ दीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पहली बार परीक्षा लेने वाली व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए केवल पदत्याग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस शिक्षा तंत्र के विरुद्ध पहला सार्वजनिक अभियोग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी जवाबदेही लंबे समय से टलती रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विचार जब व्यंग्य का वस्त्र पहन ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता सबसे अधिक असहज होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय छात्र आंदोलनों का इतिहास नारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धरनों और टकरावों से भरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने प्रतिरोध की नई व्याकरण रची। जिस शब्द को अपमान माना गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं ने उसे अपनी पहचान बना लिया। यह भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनोवैज्ञानिक विजय थी। महात्मा गांधी ने जैसे नमक को साम्राज्यवादी कानून के विरुद्ध नैतिक हथियार बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही इन युवाओं ने उपहास को अपनी ताकत बना लिया। पहली बार किसी व्यंग्यात्मक नाम ने राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बन यह साबित किया कि डिजिटल युग में प्रतीक बंदूक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुद्धिमत्ता गढ़ती है और सम्मान दूसरों की भाषा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास से मिलता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हँसी कभी-कभी आँसुओं से अधिक क्रांतिकारी होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की सबसे बड़ी ताकत उसका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ह्यूमर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">था। जहाँ पारंपरिक आंदोलनों में गुस्सा भीड़ जुटाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं मीम्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रील्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यंग्यपूर्ण पोस्टरों और ‘कीड़े’ की थीम ने लाखों युवाओं को जोड़ दिया। पुलिस कार्रवाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाठीचार्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ते तनाव और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बावजूद आंदोलन ने अपनी मुस्कान नहीं छोड़ी। यही उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता थी। सूचना युग में इन युवाओं ने साबित किया कि विचार केवल भाषणों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रचनात्मक अभिव्यक्ति से भी फैलते हैं। यहाँ ह्यूमर मनोरंजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिरोध की रणनीति था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने आक्रोश को अराजकता बनने से रोका और आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन दिलाया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की भूख सबसे बड़ी राजनीतिक ऊर्जा होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की दूसरी ताकत उसका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हंगर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">था—सत्ता परिवर्तन से अधिक भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था की भूख। नीट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार परीक्षाओं का रद्द होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणामों में देरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग माफिया का बढ़ता प्रभाव और विद्यार्थियों की आत्महत्याएँ अलग-अलग घटनाएँ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस टूटते विश्वास के प्रमाण थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी उम्मीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बचत और संघर्ष से वर्षों से सँजोए हुए थे। सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने इसी मौन पीड़ा को संगठित किया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस भूख की महत्वपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन असली सवाल अब भी यही है—क्या केवल चेहरा बदलेगा या व्यवस्था का चरित्र भी</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीति की सबसे कठिन परीक्षा वही होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रश्न जनता पूछती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीट की अवधारणा गलत नहीं थी। पूरे देश के लिए एक समान परीक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरिट आधारित चयन और पारदर्शिता उसका उद्देश्य था। लेकिन श्रेष्ठ विचार भी क्रियान्वयन पर लगातार उठते संदेहों से अविश्वसनीय हो जाते हैं। पेपर लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा रद्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी अव्यवस्था और विलंब ने इस सुधार को संकट में बदल दिया। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का संकेत हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय शिक्षा की बीमारी कहीं अधिक गहरी है। सीबीआई जाँच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोषियों की गिरफ्तारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा रद्द करना और सीबीटी (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) आवश्यक कदम हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर वे लक्षणों का उपचार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग का नहीं। असली बीमारी उस संरचना में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य एक केंद्रीकृत परीक्षा पर टिका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब शिक्षा नियंत्रण का औजार बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिभा सबसे पहले घायल होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी व्यवस्था आज भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कंट्रोल एंड कमांड मॉडल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर चल रही है। छात्र की जिज्ञासा से अधिक रैंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और विद्यालयों की गुणवत्ता से अधिक प्रवेश परीक्षा की तैयारी को महत्व मिलता है। कोचिंग उद्योग शिक्षा का पूरक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानांतर सत्ता बन चुका है। सफलता का अर्थ सीखना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चयनित होना रह गया है। ऐसे में प्रश्न है—क्या हमारी शिक्षा छात्र-केंद्रित है या परीक्षा-केंद्रित</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या हम ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान और सृजनशीलता विकसित कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या लाखों युवाओं को एक विशाल फ़िल्टर से गुजार रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि शिक्षा का उद्देश्य केवल छँटनी रह जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रतिभा का विस्तार संभव नहीं होगा। सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने यही मूल प्रश्न राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रख दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साहस सबसे अधिक तब चमकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसके पीछे कोई सिंहासन न हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंतर-मंतर पर डटे युवाओं ने लाठीचार्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुकदमे और डिजिटल ट्रोलिंग झेली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी उद्देश्य से नहीं डिगे। इस आंदोलन के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा नहीं था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अभिजीत दिपके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे युवा चेहरे उभरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नेतृत्व सामूहिक रहा। यही नई पीढ़ी का संदेश है—वह किसी मसीहा की प्रतीक्षा नहीं करती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वयं मंच बनाती है। हर जनआंदोलन का खतरा यही है कि उसके शांत होते ही पुरानी व्यवस्था लौट आती है। सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने केवल इस्तीफा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि क्षतिपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज मामलों की वापसी और व्यापक सुधारों की भी मांग की। यदि इन्हें केवल तत्कालिक शांति का उपाय माना गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विफलता लौटेगी। इसलिए परीक्षा सुरक्षा में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लॉकचेन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी पारदर्शी तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग उद्योग पर प्रभावी नियमन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यालयों-महाविद्यालयों की गुणवत्ता और वैकल्पिक करियर पाथवे जैसे दीर्घकालिक सुधार अब अनिवार्य हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी आंदोलन की असली जीत सत्ता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोच बदलने में होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीजेपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारतीय लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था को आईना दिखाया। उसने साबित किया कि जिन्हें कभी ‘कीड़ा’ कहकर तुच्छ समझा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही बदलाव की उड़ान बन सकते हैं। यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य की राजनीति का प्रोटोटाइप है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारी-भरकम संगठनों की जगह मुद्दा-आधारित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रचनात्मक नागरिक आंदोलन सत्ता से जवाब मांगेंगे। भारतीय शिक्षा की सबसे बड़ी फेलियर रिपोर्ट प्रश्नपत्र लीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वह सोच है जिसने युवाओं को प्रतियोगिता का बंदी बना दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सृजन का स्वामी नहीं। अब परीक्षा नीट की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति की है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब पूरे तंत्र को देना है। यदि व्यवस्था यह संदेश समझ ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ‘कॉकरोच’ केवल प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ह्यूमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हंगर और हिम्मत से बदलाव की पहचान बन जाएंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184132/from-contempt-to-throne-%E2%80%98insects%E2%80%99-challenged-thinking-not-power</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184132/from-contempt-to-throne-%E2%80%98insects%E2%80%99-challenged-thinking-not-power</guid>
                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:15:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/hq720.jpg"                         length="149182"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्यों सुसाइड कर रहे हैं एनआइटी के होनहार? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में द्वितीय वर्ष की एक छात्रा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई, जिससे पिछले दो महीनों में परिसर में संदिग्ध छात्र मृत्यु का यह चौथा मामला सामने आया है।एनआईटी कुरुक्षेत्र में एक और छात्रा की आत्महत्या! यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का संकेत है।एनआइटी में प्रवेश पाने के लिए छात्र छात्राओं द्वारा कठोर परिश्रम कर पढ़ाई कर प्रवेश परीक्षा पास कर तकनीकी शिक्षा लेने का सपना पूरा करने का मौका बिरले छात्रों को मिल पाता है लेकिन जब ऐसे होनहार छात्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176926/why-are-nit-aspirants-committing-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/sad_1_10-09-2020.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में द्वितीय वर्ष की एक छात्रा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई, जिससे पिछले दो महीनों में परिसर में संदिग्ध छात्र मृत्यु का यह चौथा मामला सामने आया है।एनआईटी कुरुक्षेत्र में एक और छात्रा की आत्महत्या! यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का संकेत है।एनआइटी में प्रवेश पाने के लिए छात्र छात्राओं द्वारा कठोर परिश्रम कर पढ़ाई कर प्रवेश परीक्षा पास कर तकनीकी शिक्षा लेने का सपना पूरा करने का मौका बिरले छात्रों को मिल पाता है लेकिन जब ऐसे होनहार छात्र छात्राओं द्वारा मौत को गले लगाने का सिलसिला चलता है तो इस संस्थान के माहौल पर भी सवालिया निशान लगता है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि छात्रों का मानसिक दबाव, संस्थागत संवेदनहीनता और सपोर्ट सिस्टम की कमी अब खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है।सरकार और प्रशासन इन मौतों का मूक दर्शक बने हैं आखिर कब जागेंगे ?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुरुवार 16 अप्रैल, 2026 को जब दीक्षा दुबे ने अपने दोस्तों के फोन का जवाब नहीं दिया, तो वे उसके कमरे में पहुँचे और कमरा अंदर से बंद पाया। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीमें दोपहर करीब 3 बजे मौके पर पहुँचीं और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो वह मृत पाई गईं। शव को पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी सिविल अस्पताल भेज दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">घटना के पीछे का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। आगे की कार्यवाही जांच के निष्कर्षों और परिवार के बयानों पर निर्भर करेगी। फरवरी से अब तक एनआईटी कुरुक्षेत्र में यह चौथा मामला दर्ज किया गया है। आपको बता दें 16 फरवरी को तेलंगाना निवासी अंगोद शिव (19) अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। प्रथम सेमेस्टर के छात्र अंगोद शिव संस्थान में कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (सीएसई) की डिग्री हासिल कर रहे थे। नूह के एक अन्य छात्र ने 31 मार्च को एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तीसरी संदिग्ध मौत की सूचना 8 अप्रैल को मिली, जब हरियाणा के सिरसा निवासी प्रियांशु शर्मा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। वह सिविल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के तीसरे वर्ष के छात्र थे। हाल ही में 16 अप्रेल बिहार की रहने वाली 19 वर्षीय बीटेक छात्रा दीक्षा दुबे ने बृहस्पतिवार को कथित तौर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद यह समिति गठित की गई है। छात्रा की मृत्यु के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। दीक्षा दुबे की मृत्यु पिछले दो महीनों में परिसर में हुई इस तरह की चौथी घटना थी।इतना ही नहीं 18 अप्रैल शनिवार देर रात करीब 12 बजे कल्पना छात्रावास में एक छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन मौके पर मौजूद अन्य छात्रों ने समय रहते उसे बचा लिया.  इस घटना के बाद कैंपस में तनाव और बढ़ गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन संदिग्ध मौतों के चलते कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र देर रात मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रावास के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं था और उन्होंने स्थिति से निपटने के तरीके पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने घटना के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया में लगने वाले समय पर भी सवाल उठाया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र ने परिसर में हाल में छात्रों के आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही छात्रों की समस्याओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां भी बनाई हैं। जांच समिति इस मुद्दे पर छात्रों, प्रोफेसर, वार्डन और अन्य कर्मचारियों के साथ बातचीत करेगी। एनआईटी के जनसंपर्क अधिकारी प्रोफेसर ज्ञान भूषण ने रविवार को कहा कि परिसर में हाल में हुई आत्महत्या की घटनाओं की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की अध्यक्षता छात्र कल्याण विभाग की डीन प्रोफेसर लिली दीवान कर रही हैं और इसमें प्रोफेसर जे.के. कपूर, प्रोफेसर प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा शामिल हैं।पुलिस ने बताया था कि दुबे की कथित आत्महत्या के बाद शुक्रवार रात को बीटेक प्रथम वर्ष की एक अन्य छात्रा ने भी कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्थान में मौजूदा स्थिति को देखते हुए और सभी छात्रों के सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों के लिए अगले आदेश तक अवकाश रहेगा। एनआईटी प्रशासन की ओर से जारी एक नोटिस के अनुसार, उन्हें 19 अप्रैल तक अपने छात्रावास खाली करने होंगे। छात्रावासों में रह रहे लगभग 5,300 छात्रों में से 2,500 से अधिक छात्रों ने संस्थान के नोटिस के बाद शनिवार तक अपने कमरे खाली कर दिए। दूरदराज के राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन ने कहा कि प्रायोगिक परीक्षाओं समेत संशोधित परीक्षा कार्यक्रम की सूचना उचित समय पर दी जाएगी। छात्रों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले सूचित कर दिया जाएगा। हालांकि छात्रों का आरोप है कि पहले बनी जांच कमेटी ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया. कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें मानसिक दबाव और परेशान किया जा रहा है. इधर, बढ़ते विवाद के बीच एनआइटी प्रशासन ने 17 अप्रैल से 4 मई तक छुट्टियां घोषित कर दी हैं. छात्रों को हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया है. इस पर भी छात्रों ने नाराजगी जताई है और कहा है कि उन्हें जबरदस्ती घर भेजकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल उठता है कि एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान में ऐसी क्या गड़बड़ी है कि भविष्य संवारने के लिए आए होनहार छात्र छात्राओं को सुसाइड करने की मजबूरी आन पड़ी है? इस के पीछे क्या संस्थान के शिक्षक प्रबंधन प्रशासन की कोई गड़बड़ी जिम्मेदार है या छात्रों के बीच में ही शेरों की खाल में कोई सियार छिपे हुए हैं और छात्र छात्राओं के साथ कोई अनैतिकता या अमानवीयता कर उन्हें सुसाइड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है? की बार नशे के सौदागर और साइबर ठगी या निवेश के जाल मे फंसा कर ब्लेक मेल करने वाले गिरोह भी ऐसे वारदातों के पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। क्या वजह है कि सरकार ने एक के बाद एक हो रही सुसाइड की वारदातों को गंभीरता से नहीं लिया आखिर कब तक हमारे उच्च शिक्षा संस्थान होनहार बच्चों के सपनों को रौंद कर उनके जीवन से खिलवाड़ करते रहेंगे। जो भी हो इन सुसाइड मामलों की गंभीरता से जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176926/why-are-nit-aspirants-committing-suicide</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/176926/why-are-nit-aspirants-committing-suicide</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:06:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/sad_1_10-09-2020.webp"                         length="55974"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        