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                <title>Narendra Modi Government - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Narendra Modi Government RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>&quot;महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए बहुमत की तलाश में एनडीए की नई राजनीतिक चाल&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183677/ndas-new-political-move-in-search-of-majority-for-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/women-reservation-bil-final-1776339283956_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संसद के भीतर संख्या बल सबसे बड़ी ताकत बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराना चाहती है। इन दोनों विषयों पर संविधान संशोधन आवश्यक है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लगातार अपना संख्याबल बढ़ाने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत अब महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों को फिर से एक करने और उन्हें एनडीए में शामिल करने की कोशिशों की चर्चा तेज हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच समझौते का रास्ता निकालने का सुझाव दिया है। चर्चा यह भी है कि यदि दोनों गुट एक हो जाते हैं और एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो केंद्र सरकार में दो कैबिनेट पद देने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ा कारण संसद में दो तिहाई बहुमत का लक्ष्य है। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विशेष बहुमत चाहिए। पिछले विशेष सत्र में सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था जिसके बाद भाजपा ने अपने सहयोगियों का दायरा बढ़ाने और विपक्षी दलों में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की रणनीति तेज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार आज भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा कई बार बदली है। वे चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र में रक्षा मंत्री तथा कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाल चुके हैं। सहकारी क्षेत्र चीनी मिलों कृषि संस्थाओं और ग्रामीण राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी राजनीतिक उपयोगिता कम नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना शरद पवार ने 10 जून 1999 को पी ए संगमा और तारिक अनवर के साथ की थी। वर्ष 2023 में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई जब उनके भतीजे अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और बाद में भाजपा तथा शिवसेना शिंदे गुट की सरकार में शामिल हो गए। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने मूल एनसीपी का नाम और घड़ी चुनाव चिन्ह अजित पवार गुट को दे दिया। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी का नाम एनसीपी शरदचंद्र पवार रखा गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शरदचंद्र पवार राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा मानी जाती है। महाराष्ट्र में भी यह दल महा विकास अघाड़ी के साथ रहा है जिसमें कांग्रेस और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट शामिल हैं। हालांकि हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पार्टी के भीतर भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर अलग अलग राय है। कुछ नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं जबकि कुछ कांग्रेस के साथ और मजबूत संबंध चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में शरद पवार की पार्टी के पास फिलहाल 8 सांसद हैं जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में उसके लगभग 10 विधायक हैं। संख्या बहुत बड़ी नहीं है लेकिन संविधान संशोधन जैसे मामलों में हर वोट की अहमियत बढ़ जाती है। यदि शरद पवार का पूरा दल एनडीए के साथ आता है तो लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि भाजपा इस संभावना को गंभीरता से देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि दोनों एनसीपी गुट एक हो जाते हैं तो सत्ता और संगठन में उचित भागीदारी दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर शरद पवार गुट के भीतर भी अलग अलग मांगों की चर्चा है। सुप्रिया सुले को बड़ी भूमिका देने की बात हो रही है जबकि कुछ रिपोर्टों में केंद्रीय मंत्री पद और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर भी बातचीत का दावा किया गया है। हालांकि इन सभी बातों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी पक्ष ने नहीं की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम में अजित पवार गुट की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले से ही महाराष्ट्र की एनडीए सरकार का हिस्सा है। यदि दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता और संगठन में संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच पदों और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला आरक्षण कानून और परिसीमन दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा संबंध देश की भविष्य की राजनीतिक संरचना से है। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। वहीं परिसीमन के बाद जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या तथा सीमाओं में बदलाव हो सकता है। इन दोनों विषयों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत तो है लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या तक पहुंचने के लिए अभी भी अतिरिक्त समर्थन चाहिए। राज्यसभा में भी स्थिति लगभग यही है। ऐसे में छोटे और क्षेत्रीय दलों का महत्व अचानक बढ़ गया है। यही वजह है कि भाजपा केवल नए सहयोगी जोड़ने पर ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के प्रभावशाली नेताओं से भी संवाद बनाए हुए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शरद पवार की खासियत यह रही है कि उन्होंने हमेशा परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक फैसले लिए हैं। वे कई बार विरोधी दलों के साथ भी काम कर चुके हैं और अलग अलग विचारधाराओं के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे माने जाते हैं। इसी अनुभव और प्रभाव के कारण आज भी वे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि शरद पवार अपनी पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं। यदि वे विपक्षी गठबंधन में बने रहते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति का मौजूदा संतुलन कायम रह सकता है। लेकिन यदि वे किसी नए राजनीतिक समझौते की ओर बढ़ते हैं तो इसका असर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि संसद में भी सरकार के संख्याबल और राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों को पारित कराने की कोशिशों ने शरद पवार और उनकी पार्टी को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कहा कि मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश की प्रगति तथा विकास के हर क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक एवं सराहनीय कार्यों द्वारा आम जनमानस का जीवन स्तर ऊंचा उठाने हेतु सतत् प्रयास किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरन्तर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण हो चुके है। इसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181135/media-interaction-program-organized-by-minister-in-charge-surya-pratap-shahi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0097.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कहा कि मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश की प्रगति तथा विकास के हर क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक एवं सराहनीय कार्यों द्वारा आम जनमानस का जीवन स्तर ऊंचा उठाने हेतु सतत् प्रयास किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरन्तर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण हो चुके है। इसी के उपलक्ष्य में विश्वास, विकास के जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों को संतृप्त किया जा रहा है। मा0 मंत्री ने प्रेस-वार्ता के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री के इस स्वर्णिम कार्यकाल में अबतक किए गये जनहित कार्यो से भारत की तस्वीर व तकदीर दोनो बदली है। उन्होने कहा कि वर्ष 2014 में यह सरकार बनी है तब से सरकार ने सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास के आधार पर जनहितकारी कार्य किया है, बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है। सुशासन के लिए जनसुझावों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने 10 करोड़ करीब परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन देकर उनके जीवन में खुशहाली लाने का प्रयास किया है। मा0 मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं व शिशुओं की सुरक्षा, नियमित टीकाकरण, सुरक्षित प्रसव एवं समुचित चिकित्सा हेतु तत्परतापूर्वक कार्य किया है। पी.एम. कुशुम, पी.एम. सूर्यघर, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सड़को एवं सम्पर्क मार्गो का विस्तारीकरण, रेलवे, बिजली उत्पादन एवं आपूर्ति, एयरपोर्ट, रक्षा एवं अनुसंधान, एक्सप्रेस-वे, आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक एआई जैसे अभिनव प्रयोग कर आम जनमानस को सामाजिक, आर्थिक रूप से विकसित करने का सतत् कार्य किया गया है। देश में भ्रष्टाचार एवं आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अभियान चलाकर कार्य किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> मा0 मंत्री ने कहा कि जनपद में किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण व शहरी), प्रधानमंत्री मातृ वंदन, प्रधानमंत्री जनधन, पी.एम. स्वनिधि,, प्रधानमंत्री जन आरोगय, जलजीवन मिशन ग्रामीण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन, व्यक्तिगत व सामूहिक शौचलयों का निर्माण, वृद्धा, निराश्रित महिला व दिव्यांग पेंशन, कन्या सुमंगला योजनाओं सहित अन्य संचालित योजनाओं द्वारा पात्र लाभार्थियों को आच्छादित किया गया है।  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि विगत 12 वर्षों में देश को नई दिशा, नई ऊर्जा और नई पहचान मिली है। भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है तथा हम वैश्विक मंच पर मजबूत नेतृत्व के रूप में उभरे हैं। मा0 प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमेशा गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों तथा सभी वर्गों के लिए कार्य किया गया है। आज हम खाद्यान्न, रक्षा, चिकित्सा, आयुध उपकरणों के निर्माण में पहले से अधिक आत्मनिर्भर हैं, आज देश में शांति एवं कानून व्यवस्था का राज स्थापित है, हम सभी निडर होकर पहले से अधिक सम्मान से राष्ट्र के निर्माण में प्रगति कर रहे है।  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाध्यक्ष भाजपा विवेकानन्द मिश्रा, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, रवि सोनकर, चन्द्र प्रकाश शुक्ला, संजय प्रताप जायसवाल, अपना दल के विवेक चौधरी, गोपेश्वर त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एसडीएम सदर हिमांशु कुमार, डीएसटीओ मनोज कुमार श्रीवास्तव, डीपीओ राजेश कुमार, उप निदेशक कृषि, अशोक कुमार, उप निदेशक कृषि एवं रक्षा रामबचन राम तथा जिला कृषि अधिकारी डा. बी.आर. मौर्य सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रेस प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।</div>
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<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:07:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा सरकार में  जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी को मिल रहा है - विधायक श्यामधनी राही</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> उसका बाजार  कस्बा  में गुरुवार  को सदर विधायक श्यामधनी राही  ने  चेयरमैन प्रतिनिधि हेमन्त कुमार जायसवाल और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार की 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनसंपर्क अभियान शुरू किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान विधायक श्यामधनी राही ने कहा की   केंद्र की मोदी सरकार के 12 वर्ष और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के साढ़े नौ वर्ष की जनकल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार में सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के  सरकारी  योजनाओं लाभ मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान भाजपा  मंडल अध्यक्ष राकेश आर्य, मंडल उपाध्यक्ष सोमनाथ</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181031/everyone-is-getting-the-benefits-of-public-welfare-schemes-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781189741010.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> उसका बाजार  कस्बा  में गुरुवार  को सदर विधायक श्यामधनी राही  ने  चेयरमैन प्रतिनिधि हेमन्त कुमार जायसवाल और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार की 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनसंपर्क अभियान शुरू किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान विधायक श्यामधनी राही ने कहा की   केंद्र की मोदी सरकार के 12 वर्ष और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के साढ़े नौ वर्ष की जनकल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार में सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के  सरकारी  योजनाओं लाभ मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान भाजपा  मंडल अध्यक्ष राकेश आर्य, मंडल उपाध्यक्ष सोमनाथ मिश्र, अनूप छापड़िया, रामेश्वर पाण्डेय, पवन छापड़िया, सतीश तुलस्यान, अभिषेक दूबे, मंटू, वेद प्रकाश अग्रहरी,अशोक जायसवाल, मनीष अग्रहरी, शिव जायसवाल आदि  रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:48:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिसीमन बिल गिरने से  देश को तो  लाभ हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176917/the-country-benefited-from-the-falling-of-the-delimitation-bill"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1399507-womens-reservation-delimitation-opposition.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से बढ़ने वाली लोकसभा और विधान सभा  सीट के    सांसदों के वेतन और भत्तों का  खर्च बच गया। नए सांसदों और विधायकों  की पेंशन की राशि का बोझ अब देश को नही उठाना पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में वर्तमान सीटों की संख्या एकमुश्त बढ़ाकर  डेढ़ गुना करने का जो प्रस्ताव इस बिल में किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लाभ कुल मिलाकर </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का होता।  लोकसभा में वर्तमान </span>545 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों के हिसाब से की महिलाओं के </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षण के हिसाब से </span>205 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें बढ़तीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सभी </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में </span>2045 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का इजाफा होता। यानी </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ महिलाओं में से मात्र </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं चुनकर विधानमंडलों में पहुंचतीं।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें राज्यसभा और विधानपरिषदों की सीटें शामिल नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उनकी संख्या बाद में तय होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> तर्क दिया जा सकता है कि इस आरक्षण को महिलाओं की संख्या की बजाए उनके राजनीतिक-सामाजिक सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लैंगिक समता और राजनीतिक नैतिकता की पवित्र मंशा के आईने में देखा जाना चाहिए। सही है। लेकिन अगर बिल पास हो जाता। सासंदों और  विधायकों के क्षेत्र और सीट बढ़  जाती तो वढ़े सासदों , विधायकों के वेतन, भत्ते, सुविधाओं और पेंशन का बोझ तो देश पर ही पड़ता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">12 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के कार्यकाल में यह पहला अवसर था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मोदी सरकार  की संसद में विधायी हार हुई। संसदीय इतिहास में </span>1990 <span lang="hi" xml:lang="hi">में पंचायत सशक्तिकरण संशोधन बिल के राज्यसभा में गिरने के बाद यह पहला बिल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकसभा में ही ढ़ह  गया। वैसे मोदी सरकार चाहती तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण बिल अपने दूसरे कार्यकाल में ला सकती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब एनडीए के अपने </span>353 <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसद थे और कोई भी संशाधन बिल आसानी से पारित हो सकता था। लेकिन उसने तब ऐसा नहीं किया।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के आवंटन को लेकर एक व्यापक बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के नाम पर पुरानी पेंशन योजनाओं और सैन्य भर्ती की पारंपरिक प्रक्रियाओं में आमूलचूल परिवर्तन कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के विस्तार के नाम पर विधायी निकायों के आकार को बढ़ाने की योजनाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन निर्णयों का भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सरकार के इन कदमों के पीछे तर्क दिया जाता है कि आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग अनिवार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब बात सांसदों और जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं की आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जनता के बीच विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन के मुद्दे पर सरकारी कर्मचारियों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्तीय बोझ को कम करने के लिए लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के स्थान पर नई पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">को प्राथमिकता दी है। हालिया वर्षों में महंगाई भत्ते (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">और महंगाई राहत (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीआर</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">में वृद्धि तो की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इसे 60 प्रतिशत तक पहुँचाया गया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फिर भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह वृद्धि कर्मचारियों की उन मांगों को शांत करने में विफल रही है। वे तो  सेवानिवृत्ति के बाद एक सुनिश्चित आय की गारंटी चाहते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का तर्क है कि पेंशन पर होने वाला खर्च भविष्य में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध बजट को कम कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए निवेश-आधारित पेंशन प्रणाली अधिक व्यावहारिक है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कर्मचारी इसे अपनी सामाजिक सुरक्षा में कटौती के रूप में देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनके भविष्य की स्थिरता पर सवालिया निशान लग जाते हैं। अर्थशास्त्री दावा करते हैं कि यदि पुरानी पेंशन दी गई तो कुछ राज्य आर्थिक रूप से दिवालिया  हो जाएगें,किंतु सासदों और विधायकों की संख्या  उनके  वेतन भत्तों और पेंशन से देश के सामने आने  वाली आर्थिक चुनौतियों की और ध्यान नही दिया जाता। यह कहीं गणना  नही होती कि इससे देश पर कितना बोझ  पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सैनिकों की भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना इसी वित्तीय पुनर्गठन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है। अग्निवीर योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी सेवा में रखा जाता है। शेष 75 प्रतिशत युवाओं को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उन्हें आजीवन पेंशन या अन्य चिकित्सा सुविधाएं नहीं दी जातीं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का उद्देश्य रक्षा बजट के एक बड़े हिस्से को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वर्तमान में वेतन और पेंशन में चला जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक हथियारों और तकनीक की खरीद में लगाना है। लेकिन इस योजना ने सुरक्षा विशेषज्ञों और युवाओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। आलोचकों का कहना है कि पेंशन के अभाव में सैनिकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है और चार साल बाद बेरोजगार होने का डर युवाओं को इस गौरवशाली पेशे से दूर कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ जहां देश की सुरक्षा और प्रशासनिक सेवा में लगे लोगों के लाभों को सीमित किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर 131वें संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 815 से 850 तक करने का प्रस्ताव है।इसी के साथ नए परीसीमन से विधायकों की भी 2045 सीट बढ़ने की व्यवस्था है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वृद्धि परिसीमन की प्रक्रिया के तहत की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है। हालांकि यह कदम लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से तर्कसंगत लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर  इसके आर्थिक निहितार्थ अत्यधिक गंभीर हैं। सांसदों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ है उनके वेतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भत्तों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और कार्यालय खर्चों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम वर्तमान वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद का वेतन और विभिन्न भत्ते मिलाकर प्रतिमाह एक बड़ी राशि बनती है। वर्ष 2025-26 के संशोधित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सांसद का मूल वेतन लगभग 1.24 लाख रुपये है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (लगभग 70,000 रुपये)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय भत्ता (लगभग 60,000 रुपये) और संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन का दैनिक भत्ता (2,500 रुपये) मिलता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि इन सबको जोड़ दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद पर सीधे तौर पर प्रतिमाह लगभग 2.7 लाख से 3 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें उनके लिए उपलब्ध मुफ्त बिजली (50,000 यूनिट)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी (4,000 किलोलीटर)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">34 मुफ्त हवाई यात्राएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेल यात्राएं और दिल्ली में मिलने वाले महंगे बंगलों का रखरखाव शामिल नहीं है। यदि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल इन सीधे खर्चों के कारण देश पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।विधायकों की सीट बढ़ने से होने वाला  आर्थिक बोझ इसमें शामिल नही किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का अनुमान लगाने के लिए यदि हम 273 नए सांसदों (816 - 543) को आधार मानें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल उनके वेतन और नियमित भत्तों पर ही प्रतिमाह लगभग 7.5 करोड़ से 8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। वार्षिक आधार पर यह आंकड़ा 90 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। लेकिन यह तो केवल हिमशैल का सिरा है। प्रत्येक नए सांसद के लिए लुटियंस दिल्ली जैसे महंगे इलाकों में आवास की व्यवस्था करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके कार्यालयों का निर्माण और उनके साथ तैनात होने वाले सुरक्षा कर्मियों व सहायक कर्मचारियों का वेतन इस खर्च को कई गुना बढ़ा देगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसदों को मिलने वाली आजीवन पेंशन का खर्च भी भविष्य के बजटों पर एक स्थायी बोझ बन जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि जब देश के सैनिकों और आम कर्मचारियों के लिए </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राजकोषीय अनुशासन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन सुधार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की बात की जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही मापदंड जनप्रतिनिधियों पर लागू क्यों नहीं होते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर योजना के माध्यम से करोड़ों रुपये बचाने की कोशिश करने वाली सरकार जब सांसदों की फौज बढ़ाने की तैयारी करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आम नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ एक जवान है जो अपनी जवानी के चार साल देश को देता है और बिना पेंशन के घर लौट आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दूसरी तरफ एक सांसद है जो केवल पांच साल के कार्यकाल के बाद आजीवन पेंशन और सुविधाओं का हकदार बन जाता है। एक बात और जहां कर्मचारी को पेंशन का हकदार बनने के लिए 20 से 25 साल की सेवा अनिवार्य  है,  वहां सांसद या विधायक के लिए ऐसा नही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> एक दिन के लिए सांसद या विधायक  बनने  पर उन्हें पूरी पेंशन मिलती है। सांसद या विधायक जितनी बार चुना जाता है,  उसकी   उ पेंशन में बढ़े कार्यकाल के हिसाब से वृद्धि मिलती है।कोई व्यक्ति  यदि चार बार सांसद  और तीन बार विधायक  बने तो उसे सांसद काल की चार और विधायक काल की तीन वृद्धि पेंशन में जुड़कर  मिलती है। वर्तमान   पंजाब सरकार ने  एक आदेश करने विधायक के लिए सिर्फ  एक पेंशन की व्यवस्था रखी है। ऐसा पूरे देश में क्यों नही हो सकता। सांसद और विधायकों के साथ भी ऐसा ही किया जाना चाहिए।    </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसे विकासशील देश में जहां शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए संसाधनों की भारी कमी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विधायी विस्तार के खर्चों को बहुत सावधानी से तौलने की आवश्यकता है। लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसे इस तरह से लागू किया जाना चाहिए कि यह आम जनता के त्याग और सैनिकों के समर्पण के साथ न्याय करे। यदि सरकार को वास्तव में राजकोषीय घाटे की चिंता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे सांसदों के वेतन-भत्तों में भी कटौती करने और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक राष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक पेंशन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि देश का पैसा सांसदों की सुख-सुविधाओं के बजाय उन लोगों पर खर्च हो जो वास्तव में देश की नींव को मजबूत करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:37:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

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