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                <title>Canada - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Canada RSS Feed</description>
                
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                <title>  घर छोड़ के मत जाओ कही घर न मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>अपने व अपने परिवार के लिये जीविकोपार्जन की तलाश में बाहर निकलना अथवा अप्रवासी बनना प्रकृति का बनाया एक ऐसा चक्र है जिससे पृथ्वी का शायद कोई भी प्राणी अछूता नहीं। रोज़ी रोटी की तलाश में सभी प्राणियों को अपने अपने घरों से निकलकर बाहर जाना ही होता है। चूँकि प्रकृति ने मानव को अतिरिक्त सोच बुद्धि व योग्यता से नवाज़ा है इसलिये वह अपने अप्रवासन का रास्ता अपनी आर्थिक हैसियत,अपनी भविष्य की मनोकमनायें,कमाई का स्तर सुविधाजनक राज्य, देश व ठिकाने आदि बहुत कुछ देखकर तय करता है।</div>
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<div>गत पांच दशकों से अमेरिका,कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के अप्रवासियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148364/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/indian-imagrants.jpg" alt=""></a><br /><div>अपने व अपने परिवार के लिये जीविकोपार्जन की तलाश में बाहर निकलना अथवा अप्रवासी बनना प्रकृति का बनाया एक ऐसा चक्र है जिससे पृथ्वी का शायद कोई भी प्राणी अछूता नहीं। रोज़ी रोटी की तलाश में सभी प्राणियों को अपने अपने घरों से निकलकर बाहर जाना ही होता है। चूँकि प्रकृति ने मानव को अतिरिक्त सोच बुद्धि व योग्यता से नवाज़ा है इसलिये वह अपने अप्रवासन का रास्ता अपनी आर्थिक हैसियत,अपनी भविष्य की मनोकमनायें,कमाई का स्तर सुविधाजनक राज्य, देश व ठिकाने आदि बहुत कुछ देखकर तय करता है।</div>
<div> </div>
<div>गत पांच दशकों से अमेरिका,कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के अप्रवासियों के लिये आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रोज़गार के अतिरिक्त भारतीय मुद्रा के मुक़ाबले डॉलर्स की कीमतों में भारी अंतर,सुरक्षित,साफ़ सुथरा,वातावरण,शुद्धता,ईमानदारी,भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण,सामाजिक सुरक्षा,बच्चों की शिक्षा व बुज़ुर्गों की सुरक्षा जैसी अनेक बातें भारतीयों को इन देशों में आने के लिये आकर्षित करती हैं। </div>
<div> </div>
<div> अप्रवासन करने वालों में एक वर्ग जो उच्च शिक्षा प्राप्त वैज्ञानिक,शोधार्थी,इंजीनियर्स,डॉक्टर्स,स्पेस वैज्ञानिक आदि जैसे क्षेत्रों से जुड़ा होता है। ऐसे प्रतिभाशाली लोगों के लिये तो लगभग पूरी दुनिया के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं। दूसरा वर्ग शिक्षा हासिल करने की ग़रज़ से या शिक्षा हासिल करने के बहाने इन देशों में जाता है और वहीँ का होकर रह जाता है। और तीसरा वर्ग पैसों के बल पर इन देशों में जाना चाहता है।</div>
<div> </div>
<div>और यही वर्ग आसानी से विदेश भेजने वाले एजेंटों के जाल में फंसकर कबूतरबाज़ी या डंकी रुट का शिकार हो जाता है। ऐसे कई लोग जहाँ संपन्न परिवारों के होते हैं वहीं अनेक ऐसे भी होते हैं जिन्होंने अपने घर का सोना,ज़मीन आदि बेचकर या गिरवी रखकर एजेंटों को मुंह मांगी रक़म दी होती है।</div>
<div> </div>
<div> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/indians-in-us-army-plane.jpg" alt="indians in us army plane" width="768" height="511"></img>यहां उस वर्ग का उल्लेख करना भी बेहद ज़रूरी है जो सत्ता में या तो शीर्ष पदों पर है या जिसके ऊँचे रसूख़ हैं या फिर उच्चाधिकारी वर्ग यहाँ तक कि वह वर्ग भी जोकि देश के युवाओं को "मेक इन इण्डिया " और रोज़गार मांगो मत बल्कि रोज़गार दो,यहाँ तक कि शिक्षित लोगों के पकोड़ा बेचने को भी रोज़गार मानता है ऐसे अनेक लोगों के बच्चे या तो विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं या फिर वहां बड़े व्यवसाय कर रहे हैं। कई 'राष्ट्रभक्त महामनवों ' की संतानें तो विदेशी नागरिकता तक लिये बैठी हैं।                </div>
<div> </div>
<div>बहरहाल, अतिवाद की ओर तेज़ी से बढ़ते विश्व में अमेरिका ने एक बार फिर अतिविवादित व्यक्ति डोनाल्ड ट्रंप को अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। उनके आलोचक ट्रम्प को एक नस्लवादी, कट्टरपंथी तथा एक स्त्री-द्वेषी और एक विदूषक के रूप में देखते हैं। सच पूछिये तो ऐसे व्यक्ति का पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनने का विचार ही शांतिप्रिय दुनिया के लिये चिंता पैदा करने तथा दुनिया की नींद हराम करने के लिए पर्याप्त है। ट्रंप जहाँ कई देशों को अपनी 'गिद्ध दृष्टि' से देख रहे हैं वहीं ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्राज़ील, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडुरास के लोगों को भी  'अवैध ' बताकर अमेरिकी सैन्य विमान से ही उनके देश वापस भेजा गया है।</div>
<div> </div>
<div>भारत भी उन्हीं दुर्भाग्यशाली देशों में एक है जिसके 'अवैध' बताये जा रहे 104 अमेरिकी प्रवासी अमेरिकी मालवाहक सैन्य विमान में भरकर बड़ी ही अपमानजनक स्थिति में वापस भारत लाये जा चुके हैं। ख़बर यह भी है कि इसी तरह के 487 भारतीयों की एक और खेप अमेरिका किसी भी समय भारत वापस भेज सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस समय अमेरिका में लगभग 7. 25 लाख लोग ऐसे रह रहे हैं जिनको 'अवैध प्रवासी' के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। इस तरह के लगभग 1700 'अवैध प्रवासी' भारतीयों को अमेरिका में हिरासत में लेकर उन्हें डिटेंशन सेंटर में भी डाला जा चुका है। </div>
<div> </div>
<div>वीज़ा,इमिग्रेशन,नागरिकता आदि देने या इनसे सम्बंधित क़ानून बनाने का हर देश का अपना अधिकार है। परन्तु ट्रंप की वापसी के बाद जिस अपमानजनक तरीक़े से भारतीय युवाओं को निकला जा रहा है और सरकार द्वारा उसपर लीपा पोती की जा रही है और भारतीय युवाओं के अपमान को लेकर कोई शिकायत अमेरिका के समक्ष दर्ज नहीं कराई जा रही है उसे लेकर भारतीय युवाओं में निराशा ज़रूर है। ख़ासतौर से इस बात के मद्दे नज़र कि प्रधान मंत्री मोदी अपने को ट्रंप का दोस्त बताते हैं।</div>
<div> </div>
<div>यहाँ तक कि उनके पिछले चुनाव में अमेरिका जाकर 'अबकी बार ट्रंप सरकार ' का नारा भी लगवाते हैं ? ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि आख़िर ट्रंप ने भी उस दोस्ती की लाज क्यों नहीं रखी? क्यों हमारे युवाओं के हाथों में हथकड़ी  पैरों में बेड़ियाँ व ज़ंजीरें मुंह पर मास्क आदि लगाकर सैन्य विमान में बिठाकर बड़ी ही कष्टदायक स्थिति में उन्हें भारत भेजा गया ? क्या वजह थी कि जिस तरह रूस-यूक्रेन जंग के कारण यूक्रेन से वापस आने वाले युवाओं के लिये ऑपरेशन गंगा चलाया गया था और मंत्रियों द्वारा विमान में घुसकर उनका स्वागत किया गया था उसी तरह भारत अपने विमान भेजकर उन तथाकथित 'अवैध अप्रवासियों' को वापस क्यों नहीं बुलाता ?</div>
<div> </div>
<div>ख़ासकर यह सवाल इसलिये और भी पूछा जा रहा है कि जब कोलंबिया के कथित अवैध प्रवासियों को अमेरिकी सैन्य विमान द्वारा कोलंबिया वापस भेजने की घोषणा की गई तो कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेड्रो द्वारा इसका सख़्त विरोध किया गया। उसी समय राष्ट्रपति पेड्रो ने कहा कि वो अपने नागरिकों की 'गरिमा' को बरक़रार रखना चाहते हैं। इसके फ़ौरन कोलंबिया वायु सेना के दो विमान अमेरिका गए और वो अपने नागरिकों को ससम्मान लेकर राजधानी बोगोटा वापस पहुंचे। क्या भारत अपने नागरिकों के सम्मान के लिये ऐसा नहीं कर सकता था ?</div>
<div> </div>
<div>आज जब अमेरिकी डॉलर का मूल्य 87.79 ,कनाडा डॉलर का मूल्य 61.31 एवं ऑस्ट्रेलिया डॉलर का 54.97 रुपये है ऐसे में इन देशों में काम की तलाश में कौन जाना नहीं चाहेगा ? वैसे भी जब भारत सरकार स्वयं यह कह कर अपनी पीठ थपथपाये  कि हम भारत के 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन दे रहे हैं इसी से साफ़ हो जाता है कि इस सरकार ने आम लोगों को किस स्थिति में पहुंचा दिया है। यहाँ तक कि 'रेवड़ी आवंटन ' तो अब भारत के मुख्य चुनावी एजेंडे में शामिल हो चुका है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे में प्रतिभाओं का पालयन तो हो ही रहा है साथ ही आम आदमी भी चाहे अपनी ज़मीन,सोना,मकान आदि गिरवी रखकर या बेचकर इन देशों में जाना चाहते हैं। उन्हें विश्वास होता है कि उनका व उनके परिवार का भविष्य भारत में सुरक्षित नहीं। देश में आर्थिक अनिश्चितता का जो वातावरण है उससे वे वाक़िफ़ हैं तभी विदेशी एजेंटों के झांसे में आकर विदेश यात्रा हेतु कई ग़लत व ग़ैर क़ानूनी क़दम उठा लेते हैं। इनमें कई लोगों को तो अवैध तरीक़े से सीमा पार करने हेतु जंगलों व ख़तरनाक समुद्री रास्तों से गुज़रना होता है।</div>
<div> </div>
<div>कई युवा तो अपनी जान भी गँवा बैठते हैं। लिहाज़ा जहाँ भारत को विश्व की महाशक्ति बनने का सपना दिखाने वालों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपने देश में ही अधिक से अधिक ऐसे अवसर उपलब्ध करायें ताकि पलायन पर नियंत्रण किया जा सके और इसतरह के अपमान से युवाओं को बचाया जा सके। दूसरी तरफ़ युवाओं को भी भारत में ही रहकर हर सरकारों पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध करने का दबाव बनाना चाहिये। साथ ही संतोष व मान सम्मान का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिये। डॉ बशीर बद्र साहब ने ठीक ही कहा है कि-<em>'भीगी हुई आँखों का ये मनज़र न मिलेगा'। घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा।।</em></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 16:59:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अवैध प्रवासन: वैश्विक संकट पर राजनीति, राष्ट्रहित के विरुद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन केवल किसी एक राष्ट्र की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समूचे विश्व की गंभीर और बहुआयामी समस्या बन चुकी है। जब कोई व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए किसी अन्य देश में प्रवेश करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उस देश की संप्रभुता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक असंतुलन बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधनों का अनुचित दोहन होता है और सामाजिक स्थिरता प्रभावित होती है। अधिकांश देश इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसे रोकने हेतु कठोर नीतियाँ लागू कर रहे हैं। अमेरिका और भारत इस दिशा में विशेष सक्रियता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148282/illegal-migration-against-the-national-interest-on-the-global-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(16).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन केवल किसी एक राष्ट्र की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समूचे विश्व की गंभीर और बहुआयामी समस्या बन चुकी है। जब कोई व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए किसी अन्य देश में प्रवेश करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उस देश की संप्रभुता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक असंतुलन बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधनों का अनुचित दोहन होता है और सामाजिक स्थिरता प्रभावित होती है। अधिकांश देश इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसे रोकने हेतु कठोर नीतियाँ लागू कर रहे हैं। अमेरिका और भारत इस दिशा में विशेष सक्रियता दिखा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका ने लंबे समय से अवैध प्रवासन के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रशासन ने अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया को गति दी है। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका ने </span>104 <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय नागरिकों को अवैध प्रवास का दोषी मानते हुए स्वदेश लौटाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि वह अपने आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू कर रहा है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">आई.सी.ई.</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में लगभग </span>19,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें शीघ्र ही निष्कासित किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू ‘लैकेन रिले एक्ट’ के अंतर्गत अवैध प्रवासियों की शीघ्र पहचान व निष्कासन की प्रक्रिया तेज की गई थी। इस कानून के तहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराधों में संलिप्त पाए गए प्रवासियों को तत्काल हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाला जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत भी अवैध प्रवासन पर कठोर रुख अपना रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राष्ट्र को अपने अवैध प्रवासियों की वापसी सुनिश्चित करने में सहयोग देना चाहिए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह संदेश दृढ़ता से दिया है कि अवैध प्रवासन किसी भी देश के हित में नहीं है। अमेरिका से भारतीय नागरिकों का प्रत्यर्पण कोई नई घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। वर्ष </span>2012 <span lang="hi" xml:lang="hi">से प्रभावी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत डिपोर्ट किए गए व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ विमान में रेस्ट्रेंट्स (बांधकर) भेजा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन के दुष्परिणाम व्यापक और गहरे हैं। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक संसाधनों पर अनावश्यक भार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराध वृद्धि और स्थानीय नागरिकों के रोजगार में कटौती जैसे गंभीर प्रभाव छोड़ता है। बिना पंजीकरण और सत्यापन के प्रवासियों का प्रवेश किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। कई बार ये प्रवासी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ता है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये प्रवासी निम्न वेतन पर कार्य करने को तैयार रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्थानीय श्रमिकों के रोजगार अवसर प्रभावित होते हैं और श्रम बाजार असंतुलित हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन मानव तस्करी और शोषण को भी बढ़ावा देता है। बेहतर जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा या रोजगार की तलाश में लोग मानव तस्करों के जाल में फंस जाते हैं और अवैध मार्गों से दूसरे देशों में प्रवेश करते हैं। वहां वे अमानवीय परिस्थितियों में जीवन यापन के लिए विवश हो जाते हैं। इन प्रवासियों को श्रम शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असुरक्षित कार्य वातावरण और बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं और बच्चों की तस्करी भी अवैध प्रवासन से जुड़ी एक गंभीर समस्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ स्वार्थी राजनीतिक दल और छद्म मानवाधिकार संगठन अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए इस गंभीर विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का दुस्साहस कर रहे हैं। वे सरकार पर निराधार आरोप लगाते हैं कि ट्रंप और मोदी की प्रगाढ़ मित्रता के बावजूद ट्रंप प्रशासन की कठोर आव्रजन नीति अमानवीय है। जबकि सच्चाई यह है कि प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र का परम कर्तव्य अपने नागरिकों के अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। इस विषय को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और राजनीतिक समीकरणों के चश्मे से देखना अथवा भ्रामक नैरेटिव गढ़ना केवल कुत्सित प्रचार का साधन है। जब अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कनाडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश अवैध प्रवासन पर कठोर नीतियाँ लागू कर अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत को भी किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतनी चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून होता है—अवैध सदैव अवैध ही रहेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसे किसी तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावनात्मक आडंबर या राजनीतिक विचारधारा के आवरण में वैध नहीं ठहराया जा सकता। जो कार्य संविधान और विधि-विधान के प्रतिकूल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इसलिए प्रत्येक राष्ट्र को अपने कानूनों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अवैध प्रवासन को पूर्णतः हतोत्साहित करने के लिए सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी और निर्णायक कदम उठाने होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कठोर नीतियों की अनिवार्यता है। प्रत्येक देश को अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुदृढ़ कर कड़े आव्रजन नियम लागू करने होंगे। सरकारों को रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और अन्य सामाजिक कारकों पर ध्यान देना होगा ताकि लोग अवैध प्रवासन के लिए विवश न हों। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनी प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाकर वैध प्रवासन को प्रोत्साहित करना भी एक प्रभावी समाधान हो सकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सभी देश इस समस्या से दृढ़ संकल्प और निष्पक्ष नीति के साथ निपटें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अवैध प्रवासन पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना और वैध प्रवासन को बढ़ावा देना ही इसका दीर्घकालिक व स्थायी समाधान है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 16:24:07 +0530</pubDate>
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                <title>खालिस्तानियों ने फिर लगाए भारत विरोधी नारे </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कनाडा-भारत संबंधों में आई खटास का फायदा उठाते हुए कनाडा में खालिस्तानी तत्व फिर से सक्रिय हो गए हैं। खालिस्तानी समर्थक और घोषित आतंकवादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के समर्थकों ने सोमवार (23 अक्टूबर) को वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p>उन्होंने कथित तौर पर भारत विरोधी नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरे और वीडियो वायरल हुए हैं, उनमें दिखाया गया है कि एसएफजे समर्थक और खालिस्तान समर्थक वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर झंडे लेकर इकट्ठा हुए और भारत के खिलाफ नारे लगाए।</p>
<p>इस साल जून में कनाडाई नागरिक और सिख अलगवावादी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136145/khalistanis-again-raised-anti-india-slogans"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/65362f95102c0.jpg" alt=""></a><br /><p>कनाडा-भारत संबंधों में आई खटास का फायदा उठाते हुए कनाडा में खालिस्तानी तत्व फिर से सक्रिय हो गए हैं। खालिस्तानी समर्थक और घोषित आतंकवादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के समर्थकों ने सोमवार (23 अक्टूबर) को वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p>उन्होंने कथित तौर पर भारत विरोधी नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरे और वीडियो वायरल हुए हैं, उनमें दिखाया गया है कि एसएफजे समर्थक और खालिस्तान समर्थक वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर झंडे लेकर इकट्ठा हुए और भारत के खिलाफ नारे लगाए।</p>
<p>इस साल जून में कनाडाई नागरिक और सिख अलगवावादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई। हत्या के काफी दिनों बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाया कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ है। भारत सरकार को जांच में मदद करना चाहिए। इसके बाद कनाडा ने भारतीय दूत को निष्कासित कर दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसका जबरदस्त खंडन किया।</p>
<p>भारत ने भी कनाडाई दूत को निष्कासित कर दिया। इतना ही नहीं भारत ने कनाडा में वीजा जारी करना बंद कर दिया। भारत के दबाव पर कनाडा को अपने 41 दूत भारत से वापस बुलाने पड़े। इस सारे मामले में अमेरिका और ब्रिटेन ने कनाडा का साथ दिया है।</p>
<p>भारत ने रविवार (22 अक्टूबर) को कहा था कि उसने अपने घरेलू मामलों में "लगातार हस्तक्षेप" के कारण भारत में मौजूद कनाडाई राजनयिकों के लिए कुछ नियम लागू किए हैं। इसमें एक मुद्दा तो यह है कि एक देश में कितने राजनयिक हैं बनाम दूसरे देश में कितने राजनयिक हैं। वियना कन्वेंशन द्वारा समानता प्रदान की गई है, जो इस पर प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय नियम है। </p>
<blockquote class="format1"><span style="color:rgb(224,62,45);">विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा था- "भारत ने समानता का आह्वान इसलिए किया क्योंकि हमें कनाडाई कर्मियों द्वारा हमारे मामलों में लगातार हस्तक्षेप के बारे में चिंता थी। हमने इस बारे में ज्यादा कुछ सार्वजनिक नहीं किया है। समय के साथ, और चीजें भी सामने आएंगी और लोग समझेंगे कि हमने उनमें से कई लोगों के साथ उस तरह की असुविधा क्यों की थी।"</span></blockquote>
<p>कनाडा में वीज़ा सेवाओं के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा, "अभी रिश्ते कठिन दौर से गुजर रहे हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हमारी जो समस्याएं हैं, वे कनाडाई राजनीति के एक निश्चित वर्ग और उससे उत्पन्न होने वाली नीतियों के साथ हैं। अभी लोगों की सबसे बड़ी चिंता वीज़ा को लेकर है।"</p>
<p>भारतीय विदेश मंत्री ने कहा- "कुछ हफ़्ते पहले, हमने कनाडा में वीज़ा जारी करना बंद कर दिया था क्योंकि हमारे राजनयिकों के लिए वीज़ा जारी करने के लिए काम पर जाना अब सुरक्षित नहीं था। इसलिए उनकी सुरक्षा ही प्राथमिक कारण था जिससे हमें वीज़ा जारी करना अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। हम बहुत करीब से नज़र रख रहे हैं।"</p>
<p>विदेश मंत्री  जयशंकर ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि स्थिति इस मायने में बेहतर होगी कि हमारे लोगों को राजनयिक के रूप में अपने मूल कर्तव्य को पूरा करने में सारा अधिकार होगा। राजनयिकों की सुरक्षा वियना कन्वेंशन का सबसे खास बुनियादी पहलू है।" बता दें कि दोनों ही देश वियना कन्वेंशन की दुहाई दे रहे हैं। दोनों एक दूसरे पर वियना कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 14:54:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या यूएस और ब्रिटेन है भारत के खिलाफ: कनाडा विवाद </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Bharat: </strong>अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत से आग्रह किया कि वो कनाडा पर भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने पर जोर न दे। दोनों देशों ने सिख अलगाववादी की हत्या पर विवाद के बीच कनाडा द्वारा 41 राजनयिकों को बाहर निकालने पर चिंता जताई। जून में कनाडा के वैंकूवर में कनाडाई नागरिक और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगा था। भारत ने आरोप से इनकार किया है। हालांकि भारत ने निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और उस पर इनाम भी था। इधर कई खालिस्तानी नेताओं की मौत विदेश में हुई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136018/is-canada-dispute-against-india-against-us-and-uk"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/65333b2006512.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Bharat: </strong>अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत से आग्रह किया कि वो कनाडा पर भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने पर जोर न दे। दोनों देशों ने सिख अलगाववादी की हत्या पर विवाद के बीच कनाडा द्वारा 41 राजनयिकों को बाहर निकालने पर चिंता जताई। जून में कनाडा के वैंकूवर में कनाडाई नागरिक और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगा था। भारत ने आरोप से इनकार किया है। हालांकि भारत ने निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और उस पर इनाम भी था। इधर कई खालिस्तानी नेताओं की मौत विदेश में हुई है।</p>
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format1">अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने शुक्रवार को कहा, "भारत में कनाडा के राजनयिकों के भारत से जाने से चिंतित हैं।" मिलर ने अपने बयान में कहा- "मतभेदों को सुलझाने के लिए जमीनी स्तर पर राजनयिकों की जरूरत होती है। हमने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह कनाडा की राजनयिक उपस्थिति में कमी पर जोर न दे और कनाडाई जांच में सहयोग करे। हम उम्मीद करते हैं कि भारत राजनयिक संबंधों पर 1961 वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों को बनाए रखेगा। साथ ही कनाडा के राजनयिक मिशन के मान्यता प्राप्त सदस्यों को प्राप्त विशेषाधिकारों का भी सम्मान करेगा।''</blockquote>
</blockquote>
</blockquote>
<p>वाशिंगटन ने कहा है कि उसने कनाडा के आरोपों को गंभीरता से लिया है। अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन ने भी भारत से हत्या की जांच में कनाडा के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। आमतौर पर पश्चिमी देश भारत की खुले तौर पर निंदा करने में अनिच्छुक रहे हैं। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन अब भारत पर सीधे दबाव बना रहे हैं।</p>
<p>ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने भी साफ शब्दों में कहा, "हम भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं हैं, जिसके नतीजे में कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा।" ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने भी वियना कन्वेंशन का हवाला दिया। बयान में कहा गया, "राजनयिकों की सुरक्षा प्रदान करने वाले विशेषाधिकारों और छूट को एकतरफा हटाना वियना कन्वेंशन के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।"</p>
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format2">
<p>कनाडा के बाद अमेरिका और ब्रिटेन की भारत पर दबाव बनाने की खास वजह ये भी है कि इन तीनों देशों में सिखों की बहुत लॉबी है। वे तीनों देशों के चुनाव तक प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। जिसमें कनाडा में तो सिख ऐसे रच-बस गए हैं कि वे अब उसे दूसरा पंजाब मानते हैं। इसलिए सिखों के मुद्दे पर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन के बयानों से साफ हो गया है कि वो सिखों के मुद्दे पर कनाडा के साथ खड़े हैं।</p>
</blockquote>
</blockquote>
<p>निज्जर की हत्या पर कनाडा के आरोपों के बाद भारत ने पिछले महीने कनाडा को अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने के लिए कहा था। इसके बाद, जिसके बाद कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया। कनाडा ने शुक्रवार को कहा कि वह कई भारतीय शहरों में वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत संचालन को अस्थायी रूप से निलंबित कर रहा है और वीजा प्रोसेस में देरी की चेतावनी दी है।</p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि राजनयिकों की राजनयिक छूट रद्द करके, भारत ने कूटनीति के एक बहुत ही बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन किया है। शुक्रवार को भारत के खिलाफ अपना हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने वियना कन्वेंशन के नियमों का उल्लंघन किया है और दुनिया के सभी देशों को इस कदम से चिंतित होना चाहिए। उन्होंने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का विषय भी उठाया।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली भारत और कनाडा में लाखों लोगों के लिए जीवन को सामान्य रूप से जारी रखने को अविश्वसनीय रूप से कठिन बना रही है। यानी ट्रूडो ने यह कहना चाहा है कि कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए भारत सरकार मुश्किल पैदा कर रही है। यह एक तरह की धमकी है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कनाडा के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उसकी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 15:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा का वीजा देकर सिख युवाओं के ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p>खालिस्तान समर्थक तत्व भोले-भाले सिख युवाओं को वहां बुलाने के लिए वीजा प्रायोजित करने का प्रलोभन दे रहे हैं। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य कनाडाई धरती पर उनके (खालिस्तान के) एजेंडे को आगे बढ़ाना है। सूत्रों ने कहा कि हरदीप सिंह निज्जर और मोनिंदर सिंह बुआल, परमिंदर पंगली, भगत सिंह बरार जैसे खालिस्तानी अलगाववादी कनाडा की धरती से अपने खालिस्तानी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिये ऐसे सिख युवाओं का इस्तेमाल करते रहे हैं।</p>
<p>निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। प्रवासी भारतीयों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135247/playing-with-the-lives-of-sikh-youth-by-giving-them"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/2023_9image_15_10_065622919khalistan.jpg" alt=""></a><br /><p>खालिस्तान समर्थक तत्व भोले-भाले सिख युवाओं को वहां बुलाने के लिए वीजा प्रायोजित करने का प्रलोभन दे रहे हैं। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य कनाडाई धरती पर उनके (खालिस्तान के) एजेंडे को आगे बढ़ाना है। सूत्रों ने कहा कि हरदीप सिंह निज्जर और मोनिंदर सिंह बुआल, परमिंदर पंगली, भगत सिंह बरार जैसे खालिस्तानी अलगाववादी कनाडा की धरती से अपने खालिस्तानी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिये ऐसे सिख युवाओं का इस्तेमाल करते रहे हैं।</p>
<p>निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। प्रवासी भारतीयों के समर्थन नहीं देने के कारण अलगाववादियों को हालांकि जमीनी स्तर पर समर्थक नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि ‘‘मांग और आपूर्ति के इस तानेबाने'' का इस्तेमाल कनाडा में खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों ने पंजाब के सिख युवाओं को प्रलोभन देने के लिये किया। इस साजिश को आगे बढ़ाने के लिये सिख युवाओं को नलसाज (प्लंबर), ट्रक चालक जैसी नौकरियों और अलगाववादियों द्वारा नियंत्रित गुरुद्वारों में सेवादार, रागी और पाठियों जैसे धार्मिक कार्यों के लिए प्रायोजित करने का एक नया विचार दिया गया।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि खालिस्तान समर्थक चरमपंथी ऐसे पंजाबी युवकों का वीजा प्रायोजित करते हैं और उन्हें कनाडा बुलाकर भारत विरोधी प्रदर्शनों और कार्यक्रमों, कट्टरपंथी-धार्मिक सभाओं में शामिल करवाकर उनका शोषण करते हैं। सूत्रों के अनुसार, इतना ही नहीं अलगाववादी कनाडा में ऐसे भारतीय युवाओं और छात्रों की पहचान करते हैं जिन्हें अपना खर्चा उठाने में मुश्किल आती है और उन्हें विविध नौकरियों और आश्रय के संबंध में मदद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा में अवैध प्रवासियों और ऐसे छात्रों के चरमपंथियों के जाल में फंसने की सबसे अधिक आशंका होती है जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है लेकिन उपयुक्त नौकरी नहीं मिल पायी है। उन्होंने कहा कि खालिस्तान समर्थक चरमपंथी उन्हें गुरुद्वारे के संसाधनों का उपयोग करके आश्रय और आजीविका के लिए निम्न स्तर की नौकरियों की पेशकश करते हैं।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि इसके बाद ये "ऋणी" युवा स्वेच्छा से या अनिच्छा से "कनाडा में खालिस्तान ब्रिगेड" में शामिल हो जाते हैं। सूत्र कहा कि जब आईएसआई समर्थित खालिस्तानी समूह 'सिख फॉर जस्टिस' को अपने भारत विरोधी अभियान "पंजाब इंडिपेंडेंस रेफरेंडम" के लिए समर्थन हासिल करने में मुश्किल हो रही थी, तो निज्जर और उसके दोस्तों ने ऐसे युवाओं का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि उनका अभियान सफल है। सूत्रों ने बताया कि खालिस्तान समर्थक इन चरमपंथियों के लिए अब ऐसे अधिक से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाना आसान हो गया है क्योंकि वे सरे, ब्रैम्पटन, एडमॉन्टन आदि में 30 से अधिक गुरुद्वारों पर नियंत्रण रखते हैं।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि निज्जर, बुआल और बरार ने पंजाब में दविंदर बंबीहा गिरोह, अर्श दल्ला गिरोह, लखबीर लांडा गिरोह जैसे गैंगस्टर के साथ एक "नापाक गठजोड़" भी बनाया और पंजाब में आतंकवादी हमलों के लिए उनके गुर्गों का उपयोग करने के बदले में इन वांछित गैंगस्टर को कनाडा ले गए। उन्होंने कहा कि भारत में कुछ खालिस्तान समर्थक राजनीतिक दल युवाओं को "पत्र" देने के लिए एक से दो लाख रुपये लेती हैं, जो इसका इस्तेमाल यह झूठा दावा करते हुए कनाडा में राजनीतिक शरण लेने के लिए करते हैं कि वे पार्टी कैडर हैं और धार्मिक आधार पर भारत में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि ऐसे युवा कनाडा पहुंचते ही खालिस्तान समर्थक तत्वों में शामिल हो जाते हैं।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि कनाडा जाने वाला कोई भी व्यक्ति जानता है कि कनाडाई वीजा प्राप्त करना बेहद कठिन है और इसमें काफी समय लगता है। सूत्रों ने कहा कि खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों द्वारा चलाया जाने वाला यह "मानव तस्करी" कार्य कनाडाई एजेंसियों की नाक के नीचे निर्बाध जारी है, भले ही यह उत्तरी अमेरिकी देश मानव तस्करी के प्रति बहुत संवेदनशील हो। नयी दिल्ली और ओटावा के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गत जून में निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट की "संभावित" संलिप्तता का आरोप गत 18 सितंबर को लगाया। भारत ने आरोपों को "बेतुका" और "प्रेरित" कहकर दृढ़ता से खारिज कर दिया और इस मामले को लेकर ओटावा से एक भारतीय अधिकारी के निष्कासन के बदले में एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को निष्कासित कर दिया।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 17:16:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पियरे की तरह बोलने वाला कोई है इस देश में ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><strong>  भारत और कनाडा </strong>के रिश्तों में आयी कड़वाहट के बीच 'कनाडा में विपक्ष के नेता पियरे पोइलिवरे के एक बयान ने कनाडा में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को जिस तरह से आश्वस्त किया है क्या वैसा ही आश्वासन  भारत की सत्ता और विपक्ष के नेता संसद में भाजपा संसद रमेश बिधूड़ी द्वारा बसपा संसद दानिश अली के साथ किये गएव्यवहार के बाद देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों को दे सकते हैं ? क्या देश में कोई ऐसा नेता है जो असंख्य मुसलमानों की अस्मिता को आहत करने के बाद अपने हाथों में मरहम लेकर खड़ा नजर आये ?</p>
<p>आपको याद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135083/is-there-anyone-in-this-country-who-speaks-like-pierre"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/piyre.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><strong> भारत और कनाडा </strong>के रिश्तों में आयी कड़वाहट के बीच 'कनाडा में विपक्ष के नेता पियरे पोइलिवरे के एक बयान ने कनाडा में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को जिस तरह से आश्वस्त किया है क्या वैसा ही आश्वासन  भारत की सत्ता और विपक्ष के नेता संसद में भाजपा संसद रमेश बिधूड़ी द्वारा बसपा संसद दानिश अली के साथ किये गएव्यवहार के बाद देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों को दे सकते हैं ? क्या देश में कोई ऐसा नेता है जो असंख्य मुसलमानों की अस्मिता को आहत करने के बाद अपने हाथों में मरहम लेकर खड़ा नजर आये ?</p>
<p>आपको याद ही होगा कि इन दिनों कनाडा में खलिस्तान मुद्दा चरम पर है. लगातार हो रही बयानबाजी के बीच ' सिख फॉर जस्टिस '  के चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडा के हिंदुओं को देश छोड़ने की धमकी दी थी ।  इसी धमकी के बीच 'कनाडा में विपक्ष के नेता पियरे पोइलिवरे के एक बयान ने कनाडा में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को जिस तरह से आश्वस्त किया है वो सराहनीय है। ।  पियरे ने  अपने संदेश में लोगों, खासतौर पर हिंदुओं के लिए कहा कि, 'हरेक कनाडाई बिना  बिना किसी डर के जीने का हकदार है।  हाल के दिनों में, हमने कनाडा में हिंदुओं को निशाना बनाते हुए घृणित टिप्पणियां देखी हैं।  रूढ़िवादी हमारे हिंदू पड़ोसियों और दोस्तों के खिलाफ इन टिप्पणियों की निंदा करते हैं।  हिंदुओं ने हमारे देश के हर हिस्से में अमूल्य योगदान दिया है और उनका यहां हमेशा स्वागत किया जायेगा।</p>
<p>कनाडा में हिन्दुस्तानी प्रवासी हैं लेकिन हिन्दुस्तान में रहने वाले मुसलमान प्रवासी नहीं इस देश के मूल निवासी है। उन्हें दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह न धमकाया जा सकता है और न अपमानित किया जा सकता है। हिन्दुस्तान का संविधान यहां रहने वाले सभी लोगों को एक जैसे अधिकार देता है। संविधान में अल्पसंख्यकों को अलग से संरक्षण भी दिया है। लेकिन दुर्भाग्य ये है कि  अब सत्तारूढ़ दल और उसके रमेश बिधूड़ी जैसे सांसद अल्पसंख्यकों को सीधे देख लेने की धमकियां देते दिखाई दे रहे हैं। दुर्भाग्य ये भी है कि  ऐसे सांसद के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के बजाय उसे संरक्षण देने की अक्षम्य कोशिशें की जा रहीं हैं।</p>
<p>सवाल ये है कि  क्या हम इस देश में रहने वाले लोग कनाडा या अमेरिका के लोगों की तरह शांति से नहीं रह सकते? हमारे देश के बहुसंख्यक हिन्दू और उनके कथित नेता और राजनितिक दल कब तक अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानोंको हिन्दुस्तानी नहीं मानेंगे ? क्या हिन्दुओं की ठेकेदारी करने वाले लोग और दल इसी मुद्दे पर 1947  में हम भारतीयों द्वारा दी गयी कीमत से मुतमईन नहीं हैं ?</p>
<p>1947  में भारत जिन परिस्थितयों में एक संप्रभु राष्ट्र बना था उसे झुठलाया नहीं जा सकता ,किन्तु उस समय जो अल्पसंख्यक  आबादी पाकिस्तान नहीं गयी उसे हिन्दुस्तानी न मानने की भूल करना देश के संविधान  और समरसता का अपमान  करना है। दुर्भाग्य से जो बार-बार किया जा रहा है ।  संसद से सड़कों तक ये अपमान होता दिखाई दे रहा है ।  हिन्दुओं की ठेकेदारी करने वाले सत्तारूढ़ दल ने तो अपनी पार्टी में नाम मात्र के लिए दिखाई देने वाले अल्पसंख्यक नेताओं को भी अस्तित्वविहीन कर दिया है ।  ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ।</p>
<p>सवाल एक बिधूड़ी का नहीं है बल्कि बिधूड़ी जैसे लोगों को पैदा करने वाले समूचे राजनीतिक दलों  और सोच का है। भाजपा का नाम इस विष वमन में बार- बार आता है।  बिधूड़ी से पहले उनके पास अनेक बिधुड़ियाँ भी थीं। जो सरे आम आग उगलतीं थीं। मुसलमानों का नाम लेकर आग उगलतीं थीं ,लेकिन दुर्भाग्य हिन्दुस्तान का ,एक भी सनातनी  क़ानून एक भी विष वमनकर्ता को सबक नहीं सीखा पाया। इसी का नतीजा है कि  आज हमारी संसद ने वो सब नजारा देखा जो पिछले 75  साल में कभी नहीं देखा गया था। ये विषबेल अब तेजी से फैलती दिखाई जा रही है। इसका उपचार अब जरूरी हो गया है।<br />हमारे देश की मौजूदा सत्ता के मुंह में राम और बगल में छुरी नहीं बल्कि बारूद ही बारूद भरी है ।</p>
<p> हमारे भाग्यविधाताओं की हर मुद्रा अल्पसंख्यकों को लेकर बारूदी नजर आती है। ऊपर वाले ने यदि ऐसे भाग्यविधाताओं को जरा और ताकतवर बनाया होता तो ये भारत के मुसलमानों के लिए अब तक एक अलग मुल्क बना चुके होते और इसके लिए किसी दुश्मन मुल्क को कोशिश नहीं करना पड़ती। हम खुद इसके लिए काफी होते। खुदा न खास्ता यदि देश में मौजूदा सत्तारूढ़ दल को 2047  तक सत्ता में रहने का मौक़ा मिल गया [ जो असम्भव है ] तो तय है है कि  ये अल्पसंख्यकों को देश के बाहर खदेड़ने या दूसरे दर्जे का नागरिक बनने पर मजबूर कर देंगे ।  हमारी सरकारी पार्टी का विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम का नारा अपनी ही जमीन पर दम तोड़ देगा।</p>
<p>कनाडा से हमारे रिश्त क्यों बिगड़े इस पर बहस से पहले हमें इस बात पर बहस करना होगी कि  हम अपने ही देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों से अपने रिश्ते क्यों बिगाड़ने पर आमादा हैं ? क्या इसके बिना देश की सत्ता में नहीं रहा जा सकता ? भारत को जबरन हिन्दू राष्ट्र बनाने की संकल्पना ही भयावह  है। धर्म के आधार पर बने देशों की दुर्दशा दुनिया देख रही है फिर भी हम सबक नहीं लेना चाहते। कभी-कभी मुझे लगता है कि  ये संकीर्णता कहीं हमें ले न डूबे ! राम चरित मानस में कहा गया है कि  -बाँझ प्रसव की पीड़ा नहीं समझ सकती। मुझे लगता है कि  ये बात किसी हद तक सही है।  जिन लोगों ने आजादी के पहले से और आजादी के बाद मिलजुलकर रहना न सीखा हो ,मेलजोल की दीक्षा न ली हो वे समरसता का महत्व कैसे समझ सकते हैं ?</p>
<p>ताजा माहौल में गड़े मुर्दे आखिर उखाड़े किसने ? क्या जरूरत थी संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पंत प्रधान को स्वर्णमंदिर पर अतीत में आतंकियों के खिलाफ की गयी सैन्य कार्रवाई की निदा करने की ? खालिस्तान का भूत तो कब का बोतल में बंद हो गया था। उसे बोतल के बाहर निकाला किसने ? अब स्थिति ये आ गयी है कि  ये मुद्दा अब हमारी विदेशनीति पर भारी पड़ रहा है। मजे की बात ये है कि  इस मुद्दे पर हम अपनी नीति की समीक्षा  करने के बजाय हैडमास्टर बनने पर आमादा है।  एक ऐसे देश के पंत प्रधान को सबक सिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो लम्बे समय से भारतीयों को अपने देश में समान अवसर देता आरहा है।</p>
<p>कनाडा के पंत प्रधान का आचरण बचकाना और गैर जिम्मेदारान हो सकता है लेकिन हमें तो गाम्भीर्य का परिचय देना चाहिए। हम क्यों अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों को चिंता में डाल रहे हैं ? वे तो मुसलमान नहीं है।  उनकी पूरी कौम तो आतंकवादी नहीं है ? वैसे तो कोई भी कौम किस एक -दो सिरफिरे लोगों की करतूतों की वजह से लांछित नहीं की जा सकती किन्तु हम जान- बूझकर ऐसा कर रहे हैं। हम मुसलमानों के प्रति शंकालु है।  हम सिखों के प्रति शंकालु है।  हमें ईसाइयों पर भी यकीन नहीं है।हमारी नजर में मुसलमान और सिख   आतंकवादी हैं और ईसाई हिन्दू धर्म के दुश्मन। ऐसे में आखिर देश का भावी स्वरूप क्या होगा ? क्या कोई देश घरेलू अविश्वास और आशंकाओं के माहौल में तरक्की  कर सकता है ? विश्व गुरु बन सकता है ? उसे विश्व मित्र कहे जाने का हक है ?</p>
<p>ये तमाम सवाल खड़े करते हुए मैं न भाजपाई हूँ और न कांग्रेसी।  मैं किसी अल्पसंख्यक  दल का भी सदस्य नहीं हूँ ।  मै ये तमाम सवाल एक निष्ठवान हिंदुस्तानी होने के नाते कर रहा हू।  एक हिन्दू होने के नाते कर रहा हूँ।  हमें हमारे पूर्वजों ने अल्पसंख्यकों के प्रति नफरत के जहर  से कभी नहीं सींचा। हमारे यहां राम और रहीम के साथ खड़े होने,बैठने और रहने की संस्कृति रही है ।  हमने अपने कार्य व्यवहार में वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जिया है। हम इस मूलमंत्र की भावना को राजनीतिक दलों के एजेंडे से ज्यादा अच्छी तरह समझते हैं।</p>
<p>हमारे पूर्वज कहते थे कि  जहर तो हर सांप में होता है किन्तु कुछ में कम होता है कुछ में ज्यादा ,इसलिए हर सांप को जहरीला समझकर मार देना अक्लमंदी नहीं है। ये बात वे किस संदर्भ में कहते थे ये मुझे आज समझ में आ रहा हैं ।  आप भी अपने विवेक से आपने आसपास विचरण करने वाले सर्पों को पहचानें। साँपों में कोई अल्प संख्यक या बहु संख्यक नहीं होता। सांप सिर्फ सांप होता है। उसका जहर जानलेवा होता है। संयोग से अब हमारे पास सर्पदंश से उपचार की तमाम वैज्ञानिक विधियां मौजूद है।  हमें यानि हम हिन्दुस्तानीयों को हर तरह के जहर का उपचार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जब भी मौक़ा मिले इन विषैले साँपों में अपने मताधिकार का विषरोधी इंजेक्शन अवश्य लगाइये।  मत देखिये की सांप किस प्रजाति का है ? आप सिर्फ जहर पर ध्यान दीजिये।<br />@ राकेश अचल    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2023 17:35:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्वे का सच: ट्रूडो के लिए मुसीबत, पीएम मुकाबले में पीछे </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कनाडा:  </strong>भारत-कनाडा के तनावपूर्ण हुए रिश्तों के बीच एक नया सर्वेक्षण सामने आया है। जिसमें कनाडा की  विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलिवरे प्रधानमंत्री के रूप में 40 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों की पसंदीदा पसंद हैं वहीं मौजूदा जस्टिन ट्रूडो उनसे पीछे हैं। कनाडा ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अगले चुनाव में कंजर्वेटिवों को सरकार बनाने के लिए बड़ा बहुमत मिल सकता है। दऱअसल,  कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलिएवरे की मतदान गति लगातार बढ़ रही है।</p>
<p><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(241,196,15);"><strong>पीएम बनने के लिए अच्छे दावेदार है: पियरे पोलिएवरे</strong></span><br />40 प्रतिशत कनाडाई लोगों का कहना है कि वह पीएम बनने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134956/the-truth-of-the-survey-is-trouble-for-trudeau-he"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/2023_9image_12_40_457822574justine-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कनाडा:  </strong>भारत-कनाडा के तनावपूर्ण हुए रिश्तों के बीच एक नया सर्वेक्षण सामने आया है। जिसमें कनाडा की  विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलिवरे प्रधानमंत्री के रूप में 40 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों की पसंदीदा पसंद हैं वहीं मौजूदा जस्टिन ट्रूडो उनसे पीछे हैं। कनाडा ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अगले चुनाव में कंजर्वेटिवों को सरकार बनाने के लिए बड़ा बहुमत मिल सकता है। दऱअसल,  कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलिएवरे की मतदान गति लगातार बढ़ रही है।</p>
<p><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(241,196,15);"><strong>पीएम बनने के लिए अच्छे दावेदार है: पियरे पोलिएवरे</strong></span><br />40 प्रतिशत कनाडाई लोगों का कहना है कि वह पीएम बनने के लिए सबसे अच्छी पसंद हैं।  दूसरी ओर, पीएम जस्टिन ट्रूडो को सबसे अच्छा विकल्प मानने वाले उत्तरदाताओं की संख्या साल-दर-साल 31 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। उधर, एनडीपी नेता जगमीत सिंह, जो खालिस्तान समर्थक और पीएम ट्रूडो के गठबंधन सहयोगी हैं, सितंबर 2022 से चार अंक पिछड़ गए हैं हालांकि 22 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि वह सरकार का नेतृत्व करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं। </p>
<p>सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य देखभाल और आवास से संबंधित कनाडा के मुख्य मुद्दों पर पाया गया कि अधिकांश कनाडाई सोचते हैं कि पोइलिव्रे के पास तीनों क्षेत्रों में सबसे अच्छी योजनाएं हैं। खास तौर पर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के कारण भारत और कनाडा के बीच चल रहे राजनयिक गतिरोध पर, पोइलिवरे ने कहा था कि कनाडाई पीएम को "सभी तथ्यों के साथ सफाई देनी चाहिए"।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 19:08:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आतंकवादियों को नहीं मिलेगा किसी भी प्रकार का मंच: केंद्र सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कनाडा-भारत के बीच चल रहे राजनयिक संकट के बीच केंद्र सरकार ने निजी टेलीविजन चैनलों को एक परामर्श जारी करते हुए कहा कि वे ऐसे व्यक्तियों का साक्षात्कार लेने से बचें जिनके खिलाफ गंभीर अपराध या आतंकवाद के आरोप हैं.</p>
<p><br />केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है, ‘इस मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि विदेश वाले एक व्यक्ति, जिसके खिलाफ आतंकवाद सहित अपराध के गंभीर मामले हैं, जो एक ऐसे संगठन से संबंधित है जिसे भारत में कानून द्वारा प्रतिबंधित किया गया है, को एक टीवी चैनल पर चर्चा के लिए बुलाया गया था.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134944/central-government-will-not-give-any-kind-of-platform-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p>कनाडा-भारत के बीच चल रहे राजनयिक संकट के बीच केंद्र सरकार ने निजी टेलीविजन चैनलों को एक परामर्श जारी करते हुए कहा कि वे ऐसे व्यक्तियों का साक्षात्कार लेने से बचें जिनके खिलाफ गंभीर अपराध या आतंकवाद के आरोप हैं.</p>
<p><br />केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है, ‘इस मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि विदेश वाले एक व्यक्ति, जिसके खिलाफ आतंकवाद सहित अपराध के गंभीर मामले हैं, जो एक ऐसे संगठन से संबंधित है जिसे भारत में कानून द्वारा प्रतिबंधित किया गया है, को एक टीवी चैनल पर चर्चा के लिए बुलाया गया था.</p>
<p> उक्त व्यक्ति ने कई टिप्पणियां कीं जो देश की संप्रभुता/अखंडता, भारत की सुरक्षा, एक विदेशी राष्ट्र के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए हानिकारक थीं और इनमें देश में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की भी संभावना थी. सरकार मीडिया की स्वतंत्रता को बरकरार रखती है और संविधान के तहत उसके अधिकारों का सम्मान करती है, लेकिन टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित सामग्री धारा 20 की उपधारा (2) सहित सीटीएन अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अनुपालन में होनी चाहिए.’</p>
<p>‘इसके मद्देनजर टेलीविजन चैनलों को सलाह दी जाती है कि वे संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत निर्धारित और सीटीएन अधिनियम की धारा 20 की उप-धारा (2) के तहत उल्लिखित उचित प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए ऐसी पृष्ठभूमि के व्यक्तियों,</p>
<p>जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके खिलाफ गंभीर अपराध/आतंकवाद के आरोप हैं और जो ऐसे संगठनों से संबंधित हैं जिन्हें कानूनन प्रतिबंधित किया गया है, के बारे में रिपोर्ट/रेफेरेंस और विचारों/एजेंडा को कोई मंच देने से बचें.’ हालांकि, एडवाइजरी में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि यह किस चैनल या व्यक्ति के बारे में है.</p>
<p>एक न्यूज़ चैनल ने वांछित आतंकवादी (अमेरिका में रह रहे गुरपतवंत सिंह पन्नू) को मंच दिया था, जिसके बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों को ऐसी पृष्ठभूमि के व्यक्तियों को लेकर परामर्श जारी किया है. गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में रहने वाले सिख चरमपंथी हैं जो सिख फॉर जस्टिस ग्रुप के प्रमुख हैं. खालिस्तान समर्थक इस समूह को साल 2019 में भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था. पन्नू को भारत में आतंकवादी के तौर पर नामजद किया गया था.</p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के आरोप के बाद सिख फॉर जस्टिस ने भारतीय मूल के हिंदुओं को धमकी दी थी. संगठन ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा था कि भारतीय मूल के हिंदू कनाडा छोड़कर चले जाएं. </p>
<p>वे अपने भारतीय होने का जश्न मनाते हैं और उन्होंने खालिस्तानी ‘नेता’ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर जश्न मनाकर हिंसा को बढ़ावा दिया है. गुरुवार को इस वीडियो को यूट्यूब ने  हटा दिया.</p>
<p>कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बीते 18 सितंबर को कनाडाई संसद में एक सनसनीखेज बयान में दावा किया था कि उनके देश की सुरक्षा एजेंसियों के पास ‘विश्वसनीय’ खुफिया जानकारी है कि जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ था. </p>
<p>कनाडा ने एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को भी निष्कासित कर दिया, जिनकी पहचान उन्होंने भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कनाडा प्रमुख के रूप में की. भारत ने भी एक कनाडाई राजनयिक के खिलाफ समान कार्रवाई करते हुए इन आरोपों को ‘हास्यास्पद और प्रायोजित’ करार दिया था.</p>
<p>गुरुवार को सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए भारत ने कनाडा में वीजा सेवाएं निलंबित कर दीं. कनाडा को आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बताते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कनाडा से भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति घटाने को कहा है.निज्जर की इस साल 19 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 17:58:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के साथ एफटीए जारी वार्ता पर कनाडा ने लगाई रोक  </title>
                                    <description><![CDATA[<h1 class="heading1 my-3">  </h1>
<p>  भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए जारी वार्ता पर कनाडा ने रोक लगा दी है। दोनों देश अब भविष्य में आपसी सहमति से इसे बहाल करने पर निर्णय लेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने पीटीआई-से कहा, “कनाडाई पक्ष ने बताया कि वे भारत-कनाडा के बीच प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौते पर वार्ता को रोक रहे हैं। इससे दोनों पक्ष (वार्ता की) प्रगति और अगले कदमों की समीक्षा कर सकेंगे। हम आपसी सहमति से तय करेंगे कि बातचीत कब दोबारा शुरू होगी।” व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच अब तक आधा दर्जन से</p>
<p>भारत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134331/canada-stalls-ongoing-fta-talks-with-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><h1 class="heading1 my-3"> </h1>
<p> भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए जारी वार्ता पर कनाडा ने रोक लगा दी है। दोनों देश अब भविष्य में आपसी सहमति से इसे बहाल करने पर निर्णय लेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने पीटीआई-से कहा, “कनाडाई पक्ष ने बताया कि वे भारत-कनाडा के बीच प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौते पर वार्ता को रोक रहे हैं। इससे दोनों पक्ष (वार्ता की) प्रगति और अगले कदमों की समीक्षा कर सकेंगे। हम आपसी सहमति से तय करेंगे कि बातचीत कब दोबारा शुरू होगी।” व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच अब तक आधा दर्जन से अधिक दौर की बातचीत हो चुकी है।</p>
<p>भारत उद्योग पेशेवरों की आवाजाही के लिए आसान वीजा मानदंडों के अलावा कपड़ा और चमड़े जैसे उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त पहुंच चाह रहा था। कनाडा की रुचि डेयरी और कृषि उत्पाद, जैसे क्षेत्रों में है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर 8.16 अरब डॉलर हो गया है, जो वित्त वर्ष 2021-22 में सात अरब डॉलर था।</p>
<p>दोनों देशों ने पिछले साल मार्च में एक अंतरिम समझौते के लिए बातचीत बहाल की, जिसे आधिकारिक तौर पर प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौता (ईपीटीए) कहा गया। ऐसे समझौतों में, दोनों देश अपने बीच व्यापार वाली अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क को काफी कम या समाप्त कर देते हैं। वे सेवाओं में व्यापार को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए मानदंडों को लचीला बनाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 15:43:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Google News और Google Discover से Disconect होंगी कनाडा से जुड़ी सभी खबरों के लिंक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>  Swatantra Prabhat-</strong><br /><br /></p>
<p>‘‘सर्च इंजन'' गूगल ने कहा है कि वह कनाडा में अपने मंच से देश से जुड़ी खबरों के लिंक हटाएगा। गूगल कनाडा में लागू होने वाले एक नये कानून के मद्देनजर यह कदम उठाएगा। इस कानून के कार्यान्वयन से कनाडा में डिजिटल कंपनियों के लिए अपने मंच पर साझा की जाने वाली या बदलाव के साथ पेश की जाने वाली सभी सामग्री के बदले संबंधित मीडिया संगठनों को भुगतान करना अनिवार्य हो जाएगा। गूगल ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह गूगल न्यूज और गूगल डिस्कवर से कनाडा से जुड़ी सभी खबरों के लिंक हटाएगा। ये दोनों ही मंच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131662/all-news-related-to-canada-will-be-disconnected-from-google"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/shutterstock_552493561-1536x1024.webp" alt=""></a><br /><p><strong> Swatantra Prabhat-</strong><br /><br /></p>
<p>‘‘सर्च इंजन'' गूगल ने कहा है कि वह कनाडा में अपने मंच से देश से जुड़ी खबरों के लिंक हटाएगा। गूगल कनाडा में लागू होने वाले एक नये कानून के मद्देनजर यह कदम उठाएगा। इस कानून के कार्यान्वयन से कनाडा में डिजिटल कंपनियों के लिए अपने मंच पर साझा की जाने वाली या बदलाव के साथ पेश की जाने वाली सभी सामग्री के बदले संबंधित मीडिया संगठनों को भुगतान करना अनिवार्य हो जाएगा। गूगल ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह गूगल न्यूज और गूगल डिस्कवर से कनाडा से जुड़ी सभी खबरों के लिंक हटाएगा। ये दोनों ही मंच लोगों को अपनी पसंद के हिसाब से स्थानीय खबरें व अन्य ऑनलाइन सामग्री हासिल करने की सुविधा प्रदान करते हैं।</p>
<p>उसने कहा कि साल के अंत में उक्त कानून के प्रभाव में आने से पहले ऐसा कर दिया जाएगा। यह कानून पिछले हफ्ते पारित हुआ था। गूगल ने स्पष्ट किया कि उसके मंचों पर सिर्फ कनाडा से जुड़ी खबरें ब्लॉक की जाएंगी, जिसका मतलब है कि कनाडाई उपयोगकर्ता फॉक्स न्यूज और बीबीसी सहित अन्य वैश्विक मीडिया संगठनों द्वारा जारी सामग्री को देखने-पढ़ने में सक्षम होंगे। गूगल से पहले मेटा कंपनी ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि इस कानून के लागू होने से पहले फेसबुक और इंस्टाग्राम से कनाडा से जुड़ी खबरों के लिंक हटा दिए जाएंगे। कंपनी स्थानीय प्रकाशकों के साथ किए गए करार भी समाप्त करने जा रही है। मेटा अपने पांच फीसदी कनाडाई उपयोगकर्ताओं के लिए देश से संबंधित खबरों को ब्लॉक करने के वास्ते पहले से परीक्षण कर रही है। गूगल ने भी पिछले साल ऐसा ही एक परीक्षण किया था। गूगल और उसकी मूल कंपनी अल्फाबेट के वैश्विक मामलों के अध्यक्ष केंट वॉकर ने कहा कि यह कानून ‘अव्यवहारिक' है।</p>
<p>गूगल की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को प्रकाशित ब्लॉग में वॉकर ने कहा कि यह कानून लिंक की कीमत तय करता है, जिसका नतीजा “कनाडाई लोगों तक कनाडाई प्रकाशकों की खबरें पहुंचाने मात्र के लिए” असीमित वित्तीय दायित्व सामने आता है। उन्होंने कहा, “हम इस फैसले और इसके प्रभाव को हल्के में नहीं ले रहे हैं। हमारा मानना है कि कनाडाई प्रकाशकों और हमारे उपयोगकर्ताओं के साथ जल्द से जल्द स्पष्ट एवं पारदर्शी होना महत्वपूर्ण है।” कनाडा में पारित ऑनलाइन न्यूज अधिनियम के तहत गूगल और मेटा के लिए समाचार प्रकाशकों के साथ करार करना अनिवार्य है। इस करार के तहत दोनों कंपनियां अपनी-अपनी वेबसाइट पर दिखाई जाने वाली उन खबरों के लिए समाचार प्रकाशकों को भुगतान करेंगी, जिनसे उन्हें कमाई करने में मदद मिली है। </p>
<p><br />कनाडा के विरासत मंत्री पाब्लो रॉड्रिग्ज ने गूगल पर कनाडा के लोगों को ठगने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि “तकनीक जगत की यह दिग्गज कंपनी कनाडा से बड़ी नहीं है।” रॉड्रिग्ज ने ट्वीट किया, “यह दिग्गज कंपनी कनाडा से जुड़ी खबरों को ब्लॉक करने के लिए अपने मंचों में बदलाव लाने के वास्ते पैसे खर्च कर सकती है, लेकिन विज्ञापनों से बड़े पैमाने पर होने वाली कमाई का छोटा-सा हिस्सा (मीडिया संगठनों को) नहीं चुका सकती।” गूगल ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी की सरकार को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि वह अपने मंचों से कनाडा से जुड़ी खबरों के लिंक हटाना कब शुरू करेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 15:02:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा में इन्दिरा गांधी के मौत का जश्‍न</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया</strong> पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को दर्शाती एक झांकी दिखाई दे रही है। फ्लोट कनाडा के ब्रैम्पटन में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा निकाली गई 5 किलोमीटर लंबी परेड का हिस्सा था। माना जाता है कि कथित वीडियो 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 39वीं बरसी से कुछ दिन पहले 4 जून को खालिस्तान समर्थकों द्वारा ब्रैम्पटन में निकाली गई परेड का है। वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने खालिस्तान समर्थकों द्वारा निकाली गई परेड की निंदा की।</p>
<p><br />  भारत ने भी इस घटना को</p>
<p><strong>ऑपरेशन</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130334/indira-gandhis-death-celebrated-in-canada"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/download-(5).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>INTERNATIONAL NEWS:</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया</strong> पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को दर्शाती एक झांकी दिखाई दे रही है। फ्लोट कनाडा के ब्रैम्पटन में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा निकाली गई 5 किलोमीटर लंबी परेड का हिस्सा था। माना जाता है कि कथित वीडियो 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 39वीं बरसी से कुछ दिन पहले 4 जून को खालिस्तान समर्थकों द्वारा ब्रैम्पटन में निकाली गई परेड का है। वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने खालिस्तान समर्थकों द्वारा निकाली गई परेड की निंदा की।</p>
<p><br /> भारत ने भी इस घटना को लेकर बुधवार को औपचारिक रूप से कनाडा सरकार के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है। ओटावा में भारत के उच्चायोग ने इस घटना को "स्वीकार्य नहीं" बताते हुए ग्लोबल अफेयर्स कनाडा (जीएसी) को एक औपचारिक नोट भेजा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आप इस तरह से अभिव्यक्ति की आजादी का अतिक्रमण नहीं कर सकते, एक लोकतांत्रिक देश के नेता की हत्या का महिमामंडन कर रहे हैं।</p>
<p><strong>ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या</strong></p>
<p>ऑपरेशन ब्लू स्टार पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के अंदर छुपे आतंकवादियों पर भारतीय सेना के हमले को संदर्भित करता है। जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में सैकड़ों सिख उग्रवादियों को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से सेना ने 3 से 6 जून, 1984 के बीच स्वर्ण मंदिर परिसर की घेराबंदी की थी। सैन्य हमले को बहुत अधिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा और इसके बाद 31 अक्टूबर, 1984 को प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/130334/indira-gandhis-death-celebrated-in-canada</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 15:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका के बाद कनाडा ने भी दिया चीन को बड़ा झटका, टिकटॉक पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने संघीय एजेंसियों को सभी सरकारी उपकरणों से ‘टिकटॉक' को पूरी तरह हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया है। वहीं कनाडा ने सरकार के सभी मोबाइल उपकरणों में ‘टिकटॉक' पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। चीन की इस वीडियो ऐप को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच ये फैसले किए गए हैं। अमेरिका में प्रबंधन एवं बजट कार्यालय ने सोमवार को जारी किए गए दिशानिर्देशों को ‘‘संवेदनशील सरकारी डेटा के लिए ऐप द्वारा पेश किए जा रहे जोखिमों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम'' बताया है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127658/after-america-canada-also-gave-a-big-blow-to-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/1549.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने संघीय एजेंसियों को सभी सरकारी उपकरणों से ‘टिकटॉक' को पूरी तरह हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया है। वहीं कनाडा ने सरकार के सभी मोबाइल उपकरणों में ‘टिकटॉक' पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। चीन की इस वीडियो ऐप को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच ये फैसले किए गए हैं। अमेरिका में प्रबंधन एवं बजट कार्यालय ने सोमवार को जारी किए गए दिशानिर्देशों को ‘‘संवेदनशील सरकारी डेटा के लिए ऐप द्वारा पेश किए जा रहे जोखिमों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम'' बताया है।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सहित कुछ एजेंसियां पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। दिशा-निर्देशों में संघीय सरकार की बाकी एंजेसियों को 30 दिन के भीतर इसे पूरी तरह हटाने को कहा गया है। व्हाइट हाउस पहले से ही अपने उपकरणों पर ‘टिकटॉक' के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता है। चीन की इंटरनेट प्रौद्योगिकी कंपनी ‘बाइटडांस लिमिटेड' की ऐप ‘टिकटॉक' बेहद लोकप्रिय है और अमेरिका में करीब दो-तिहाई किशोरों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p>वहीं, कनाड के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सरकार द्वारा जारी सभी मोबाइल उपकरणों पर टिकटॉक के प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई महज शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जिस तरह से सरकार ने सभी संघीय कर्मचारियों को यह बताने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है कि वे अब अपने काम के फोन पर टिकटॉक का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, ऐसे कई अन्य कनाडाई अपने स्वयं के डेटा की सुरक्षा पर विचार करेंगे और शायद यही (टिकटॉक इस्तेमाल न करने का) विकल्प चुनें।'' ऐप को मंगलवार को कनाडा सरकार के फोन से हटा दिया जाएगा। इससे पहले यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा ने पिछले सप्ताह कहा था कि उसने साइबर सुरक्षा उपाय के रूप में कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन में टिकटॉक पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/127658/after-america-canada-also-gave-a-big-blow-to-china</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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