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                <title>पर्यावरण संरक्षण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पर्यावरण संरक्षण RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महायुद्ध में प्रयुक्त गोला बारूद के विकरण से पर्यावरण में होंगे जहरीले परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने बार-बार चेतावनी दी है कि यदि युद्धों में प्रयुक्त हथियारों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ग्लोबल वार्मिंग की समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। युद्ध के गोला बारूद के विकरण से पर्यावरण तथा ग्लोबल वार्मिंग में जहरीले परिणाम होने की आशंका बलवती हो चुकी है और इसके दूरगामी परिणाम की भी संभावना भी होगी, और प्रभावित क्षेत्र में निवासियों की आने वाली पीढ़ी भी इनके भयानक नतीजों से वंचित नहीं रह पाएंगी। युद्ध केवल सीमाओं का सीमित संघर्ष नहीं होता, यह धरती, आकाश और जीवन की समूची संरचना पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174548/radiation-of-ammunition-used-in-the-great-war-will-have"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(2)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने बार-बार चेतावनी दी है कि यदि युद्धों में प्रयुक्त हथियारों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ग्लोबल वार्मिंग की समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। युद्ध के गोला बारूद के विकरण से पर्यावरण तथा ग्लोबल वार्मिंग में जहरीले परिणाम होने की आशंका बलवती हो चुकी है और इसके दूरगामी परिणाम की भी संभावना भी होगी, और प्रभावित क्षेत्र में निवासियों की आने वाली पीढ़ी भी इनके भयानक नतीजों से वंचित नहीं रह पाएंगी। युद्ध केवल सीमाओं का सीमित संघर्ष नहीं होता, यह धरती, आकाश और जीवन की समूची संरचना पर गहरा प्रभाव व प्रहार करता है। </p>
<div style="text-align:justify;">आधुनिक युद्धों में इस्तेमाल होने वाला बारूद, मिसाइलें, बम और रासायनिक तत्व केवल तत्काल विनाश तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके प्रभाव दूरगामी और अदृश्य रूप से पर्यावरण तथा वैश्विक जलवायु को प्रभावित करते हैं। जब किसी युद्ध क्षेत्र में विस्फोट होते हैं तो भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सूक्ष्म कण (पार्टिकुलेट मैटर) वायुमंडल में फैल जाते हैं, जो सीधे-सीधे ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाते हैं। ईरान, अमेरिका, इजरायल, फिलिस्तीन और रूस-यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में लगातार हो रहे हमलों ने न केवल मानव जीवन को संकट में डाला है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी बुरी तरह झकझोर दिया है। युद्ध के दौरान जलते हुए तेल के कुएं, ध्वस्त होती औद्योगिक इकाइयाँ और धुएँ से भरे आसमान एक ऐसे विषाक्त वातावरण का निर्माण करते हैं, जिसमें सांस लेना भी खतरनाक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह जहरीली हवा केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वायुमंडलीय धाराओं के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँच जाती है, जिससे वैश्विक स्तर पर प्रदूषण बढ़ता है और जलवायु परिवर्तन की गति तेज होती है। बारूद में प्रयुक्त रसायन मिट्टी और जल स्रोतों में मिलकर उन्हें भी विषाक्त बना देते हैं, जिससे कृषि भूमि की उर्वरता घटती है और खाद्य सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है। युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और आगजनी भी होती है, जिससे कार्बन अवशोषण की प्राकृतिक क्षमता कम हो जाती है और वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर बढ़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह स्थिति ग्लोबल वार्मिंग को और अधिक गंभीर बना देती है, जिसके परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि, असामान्य वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ने लगती हैं। युद्ध में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक हथियारों में यूरेनियम और अन्य रेडियोधर्मी तत्व भी शामिल होते हैं, जिनका प्रभाव पीढ़ियों तक बना रहता है और पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायी क्षति पहुँचाता है। इन तत्वों के कारण मिट्टी और पानी लंबे समय तक प्रदूषित रहते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है, जैसे कैंसर और जन्मजात विकृतियाँ। युद्ध के दौरान होने वाले विस्फोटों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण भी वन्यजीवों के जीवन को प्रभावित करता है, जिससे उनकी प्राकृतिक प्रवृत्तियाँ बदल जाती हैं और कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है, जिससे शरणार्थी संकट उत्पन्न होता है और नए क्षेत्रों पर पर्यावरणीय दबाव बढ़ता है, क्योंकि अचानक बढ़ी जनसंख्या के कारण संसाधनों का अत्यधिक दोहन होने लगता है। वैश्विक स्तर पर यदि इन युद्धों का सिलसिला इसी प्रकार चलता रहा, तो यह केवल राजनीतिक या आर्थिक संकट नहीं रहेगा, बल्कि एक गहरा पर्यावरणीय संकट बन जाएगा, जिसका प्रभाव पूरी मानवता को भुगतना पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि विश्व के राष्ट्र केवल शक्ति प्रदर्शन और वर्चस्व की राजनीति से ऊपर उठकर पर्यावरण संरक्षण और शांति की दिशा में ठोस कदम उठाएं, क्योंकि एक प्रदूषित और असंतुलित पृथ्वी पर किसी भी राष्ट्र की विजय का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। अंततः यह समझना होगा कि युद्ध की जीत अस्थायी हो सकती है, लेकिन उससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान स्थायी होता है, और यदि हमने समय रहते इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसी पृथ्वी विरासत में मिलेगी, जहाँ जीवन की गुणवत्ता अत्यंत निम्न होगी और प्राकृतिक संसाधन समाप्ति के कगार पर होंगे, इसलिए शांति ही वह एकमात्र मार्ग है, जो पर्यावरण को सुरक्षित रख सकती है और मानवता को एक स्थायी भविष्य प्रदान कर सकती है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़कें अब शुद्धिकरण का केंद्र: प्रदूषण को हराने वाला बायो-टावर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब दिल्ली घुटती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब देती है—और यह जवाब किसी मशीन ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवित प्रकृति ने दिया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरसों से जहरीली हवा का बोझ ढोती राजधानी आज एक नई उम्मीद के साथ खड़ी है—माइक्रोएल्गी आधारित प्योरएयर टावर के रूप में। एयरोसिटी के पास एनएच</span>-48 <span lang="hi" xml:lang="hi">के व्यस्त कॉरिडोर पर स्थापित यह संरचना महज तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संगम की जीवंत मिसाल है। सड़क के बीचों-बीच खड़ा यह “जीवित एयर प्यूरीफायर” न केवल प्रदूषण को थाम रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऑक्सीजन में बदलकर शहर को नई सांस दे रहा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173468/roads-are-now-the-center-of-purification-bio-tower-that-defeats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब दिल्ली घुटती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब देती है—और यह जवाब किसी मशीन ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवित प्रकृति ने दिया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरसों से जहरीली हवा का बोझ ढोती राजधानी आज एक नई उम्मीद के साथ खड़ी है—माइक्रोएल्गी आधारित प्योरएयर टावर के रूप में। एयरोसिटी के पास एनएच</span>-48 <span lang="hi" xml:lang="hi">के व्यस्त कॉरिडोर पर स्थापित यह संरचना महज तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संगम की जीवंत मिसाल है। सड़क के बीचों-बीच खड़ा यह “जीवित एयर प्यूरीफायर” न केवल प्रदूषण को थाम रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऑक्सीजन में बदलकर शहर को नई सांस दे रहा है। यह पहल साफ संकेत देती है कि आने वाला शहरी भविष्य कंक्रीट से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैविक समाधान पर आधारित होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सारे पारंपरिक उपाय बेअसर होकर ठहर गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह टावर एक शांत लेकिन प्रभावशाली क्रांति के रूप में उभरकर सामने आया। दिल्ली में पहले लगाए गए स्मॉग टावर बड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा-खपत वाले और सीमित प्रभाव वाले साबित हुए थे। इसके विपरीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोएल्गी प्योरएयर टावर सीधे उसी सड़क स्तर पर सक्रिय होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्रदूषण अपनी चरम सघनता पर होता है। यह न शोर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न जटिल मशीनों पर निर्भर रहता है। इसके बजाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सूक्ष्म शैवालों की प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रदूषकों को अपने पोषण के रूप में ग्रहण करते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रणाली केवल प्रदूषण को रोकती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करती है— यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सूक्ष्मता ही असली ताकत बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब माइक्रोएल्गी का विज्ञान अपने प्रभाव से चौंकाता है—छोटा आकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर व्यापक और ठोस असर। ये सूक्ष्म जीव पानी में रहते हुए पेड़ों की तरह प्रकाश संश्लेषण करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कहीं अधिक तेज़ और दक्षता के साथ। सूर्य प्रकाश और एलईडी की सहायता से ये कार्बन डाइऑक्साइड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाइट्रोजन ऑक्साइड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सल्फर ऑक्साइड तथा पीएम</span>2.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">व पीएम</span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कणों को अवशोषित करते हैं। शोध बताते हैं कि कुछ प्रजातियां पेड़ों की तुलना में </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">गुना अधिक कार्बन सोखने में सक्षम हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न हानिकारक अपशिष्ट बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अतिरिक्त ऊर्जा लगती है—यह एक स्वाभाविक और सतत समाधान है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब एक छोटा-सा ढांचा ही “हरे फेफड़े” की ताकत समेट ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब इस टावर की असली क्षमता सामने आती है। एक अकेला टावर सालाना लगभग </span>340 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर सकता है और करीब </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करता है। इसका प्रभाव लगभग </span>15–20 <span lang="hi" xml:lang="hi">परिपक्व पेड़ों के बराबर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि यह केवल कुछ वर्ग मीटर जगह घेरता है। शहरी इलाकों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जमीन सीमित है और पेड़ों को बढ़ने में वर्षों लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह टावर तुरंत सक्रिय होकर परिणाम देने लगता है। यह केवल हवा को शुद्ध नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उत्पन्न बायोमास को खाद या बायोचार में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी का भी सशक्त हिस्सा बनता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब समाधान सिर्फ रोकने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूपांतरित करने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी असली बदलाव जन्म लेता है—और यही नई सोच इस तकनीक में झलकती है। जहां पारंपरिक एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम प्रदूषण को फिल्टर में कैद कर आगे कचरे की नई समस्या खड़ी करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं यह टावर उसी प्रदूषण को उपयोगी संसाधन में बदल देता है। यह एक बायोमिमेटिक फोटोबायोरिएक्टर है—यानी प्रकृति की कार्यप्रणाली से प्रेरित प्रणाली। इसकी ऊर्जा खपत न्यूनतम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रखरखाव सरल और कार्यप्रणाली सतत है। इस दृष्टि से यह समाधान केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक रूप से भी कहीं अधिक टिकाऊ और व्यावहारिक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब दूरदृष्टि और शोध की मजबूती मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी ऐसा नवाचार आकार लेता है जो वास्तव में असरदार हो। इस टावर के पीछे केवल तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ठोस वैज्ञानिक सोच है। भारतीय वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स ने इसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया है। माइक्रोएल्गी की ऐसी प्रजातियां चुनी गई हैं जो दिल्ली की गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूल और उच्च प्रदूषण में भी टिक सकें। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वायु गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवशोषित कार्बन और उत्पन्न ऑक्सीजन की जानकारी देता है। यह डेटा-आधारित दृष्टिकोण भविष्य के शहरी नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब हवा ही ज़हर बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसे शुद्ध करने वाला हर समाधान जीवनदाता बन जाता है—यही इस तकनीक की असली ताकत है। इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु प्रदूषण हर साल लाखों समयपूर्व मौतों का कारण बनता है। दिल्ली जैसे शहर में यह संकट और गहरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां सांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सड़क स्तर पर प्रदूषण घटाने वाला यह टावर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और रोजाना सफर करने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। यह केवल हवा साफ नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाधान बनने लगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी भविष्य की असली दिशा स्पष्ट होती है—जहां विकास और पर्यावरण साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहरों के हाईवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्लाईओवर और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र प्रभावी “बायो-डिवाइडर” में बदल सकते हैं। यह न केवल प्रदूषण को नियंत्रित करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शहरी हरियाली को एक नई पहचान और विस्तार देगा। सरकार और निजी क्षेत्र के मजबूत सहयोग से यह मॉडल देशभर में व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत अपने नेट-जीरो लक्ष्यों की ओर और भी तेज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस और सतत कदम बढ़ा सकेगा।।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब बदलाव की शुरुआत छोटे कदमों से होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी बड़े भविष्य की नींव रखी जाती है—और यही इस पहल का सार है। यह संदेश स्पष्ट है कि समाधान कहीं दूर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे आसपास ही मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस उन्हें समझने और अपनाने की जरूरत है। माइक्रोएल्गी प्योरएयर टावर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि प्रकृति के साथ तालमेल ही सबसे प्रभावी रास्ता है। दिल्ली की सड़कों पर खड़ा यह छोटा-सा टावर आने वाले समय में एक बड़े परिवर्तन का आधार बन सकता है। यह केवल तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई सोच का उद्घोष है—जहां विकास और पर्यावरण साथ-साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन के साथ आगे बढ़ते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोरमा की सफाई के लिएप्रशासन व समाजसेवियों की संयुक्त बैठक सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चंद्रमणि पांडे द्वारा मनोरमा नदी की सफाई को लेकर चल रहे जनजागरण अभियान के क्रम में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी के निर्देश पर डीसी मनरेगा संजय शर्मा की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी व भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय “सुदामा” तथा उनके सहयोगियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में डीसी मनरेगा ने श्री पाण्डेय को बताया कि आपके द्वारा भेजे गए पत्र के क्रम में पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के प्रयासों से एक सप्ताह पूर्व दो दिनों के लिए आयी केन्द्रीय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173049/joint-meeting-of-administration-and-social-workers-held-for-cleaning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0067.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चंद्रमणि पांडे द्वारा मनोरमा नदी की सफाई को लेकर चल रहे जनजागरण अभियान के क्रम में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी के निर्देश पर डीसी मनरेगा संजय शर्मा की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी व भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय “सुदामा” तथा उनके सहयोगियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में डीसी मनरेगा ने श्री पाण्डेय को बताया कि आपके द्वारा भेजे गए पत्र के क्रम में पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के प्रयासों से एक सप्ताह पूर्व दो दिनों के लिए आयी केन्द्रीय जल आयोग/गंगा समिति की टीम द्वारा मनोरमा नदी का सर्वेक्षण कराया गया है। आयोग द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार नदी की दीर्घकालिक समस्या के समाधान की दिशा में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय “सुदामा” ने स्पष्ट रूप से कहा कि  मनोरमा नदी केवल जलधारा नहीं बल्कि जनपद की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसके संरक्षण और स्वच्छता के लिए समाज और प्रशासन दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।यह बैठक केवल केंद्र सरकार या गंगा समिति की कार्यवाही जानने के लिए नहीं है, बल्कि 5 फरवरी को दिए गए मांगपत्र के क्रम में जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले ठोस कदमों पर चर्चा के लिए है। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई सुनिश्चित करना, प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करना और अतिक्रमण हटाना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में रोटरी क्लब के पूर्व जिलाध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने आगामी रामनवमी मेले को देखते हुए मेला प्रशासन की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की। वहीं भाजपा नेता जगतबली सिंह ने नदी में मलवे के कारण हुई दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। जिला पंचायत सदस्य विनोद चौधरी और डॉ. प्रेम त्रिपाठी ने नदी किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण पर रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">करीब दो घंटे चली गहन चर्चा के दौरान श्री पाण्डेय ने कहा कि यदि बैठक में ठोस निर्णय नहीं निकलता तो प्रशासन को अगली बैठक बुलाकर स्पष्ट कार्ययोजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नदी की सीमा से अतिक्रमण हटाना, गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई करना, पौराणिक स्थलों के पास घाटों की सफाई कराना तथा मूर्ति विसर्जन को नदी की मुख्य धारा से अलग सुरक्षित स्थान पर सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि चैत्र रामनवमी से पूर्व मखौड़ा धाम, शिवाला घाट, तपसीधाम, झुंगीनाथ, पंडूल घाट सहित नदी तट पर स्थित लगभग एक दर्जन प्रमुख घाटों और करीब 10–12 किलोमीटर नदी क्षेत्र की सफाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही मूर्ति विसर्जन के लिए नदी किनारे सुरक्षित स्थान तैयार किया जाएगा। नदी में मल-मूत्र, कूड़ा-कचरा या अपशिष्ट डालने वालों तथा मांस-मछली की दुकानों की निगरानी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, घाघरा नदी को मनोरमा से जोड़ने तथा पूरी नदी की व्यापक सफाई के लिए जिलाधिकारी के निर्देश व गंगा समिति के प्रस्ताव के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ खंड के अधिकारियों के साथ-साथ महेंद्र प्रताप सिंह, राहुल शर्मा, रामधीरज चौधरी,गिरजा शंकर द्विवेदी, देवशरण शुक्ल, विशाल मिश्र सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता व क्षेत्रीय प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:25:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झांसी छावनी क्षेत्र में खुले में कचरा डंपिंग का मामला, MRF सेंटर को लेकर नगर निगम–छावनी परिषद आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>झांसी  </strong></p><p style="text-align:justify;">झांसी छावनी क्षेत्र में रिसाला चुंगी से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर तक जाने वाली मुख्य सड़क पर खुले में कचरा डंपिंग का गंभीर मामला सामने आया है। सड़क किनारे प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य ठोस कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे होने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता <strong>नरेंद्र कुशवाहा</strong> ने 1 मार्च 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि रिसाला चुंगी से MRF सेंटर तक का मार्ग कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। उन्होंने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173047/case-of-open-garbage-dumping-in-jhansi-cantonment-area-municipal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-09-at-22.08.58.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>झांसी  </strong></p><p style="text-align:justify;">झांसी छावनी क्षेत्र में रिसाला चुंगी से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर तक जाने वाली मुख्य सड़क पर खुले में कचरा डंपिंग का गंभीर मामला सामने आया है। सड़क किनारे प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य ठोस कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे होने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता <strong>नरेंद्र कुशवाहा</strong> ने 1 मार्च 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि रिसाला चुंगी से MRF सेंटर तक का मार्ग कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। उन्होंने कहा कि यहां पड़े प्लास्टिक और जहरीले कचरे को खाकर गाय व अन्य पशु बीमार हो रहे हैं, जो <strong>पशु क्रूरता निवारण अधिनियम</strong> और <strong>ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016</strong> का उल्लंघन है। शिकायत में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी।</p><p style="text-align:justify;">शिकायत पर संज्ञान लेते हुए <strong>झांसी छावनी परिषद</strong> के मुख्य अधिशासी अधिकारी <strong>अभिषेक आजाद</strong> ने 7 मार्च को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि रिसाला चुंगी के पास रखा गया <strong>MRF कंटेनर छावनी परिषद का नहीं बल्कि नगर निगम का है</strong>। परिषद ने इस मामले में नगर निगम को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/whatsapp-image-2026-03-09-at-22.08.58.jpeg" alt="शिकायतकर्ता नरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा पर्यावरण और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है।" width="890" height="1187"></img></p><p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सेना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कच्चे रास्तों की सफाई के लिए परिषद द्वारा <strong>15 दिनों के भीतर सफाई कार्य पूरा कराने का आश्वासन</strong> दिया गया है। साथ ही ट्रेंचिंग ग्राउंड का गेट खुला रहने के कारण पशुओं के अंदर प्रवेश करने की बात स्वीकार करते हुए भविष्य में इसे रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।</p><p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता <strong>नरेंद्र कुशवाहा</strong> का कहना है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा पर्यावरण और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को <strong>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT)</strong> में ले जाया जाएगा।</p><p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सड़क किनारे कचरे के ढेर से बदबू और गंदगी फैल रही है, जिससे आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि नगर निगम और छावनी परिषद इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:19:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी  वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस वर्ष एक नई पहल की है। पहली बार होलिका दहन में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों के उपयोग की तैयारी की गई है। इस अभियान के तहत एक लाख गोबर के उपले तैयार किए गए हैं। उपलों के वितरण की शुरुआत महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी द्वारा की जा रही है ।नगर निगम की योजना के अनुसार, नैनी क्षेत्र सहित नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी जोनों के वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वार्ड में निर्धारित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171413/cow-dung-cakes-will-be-made-available-in-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260225-wa0180.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इस वर्ष एक नई पहल की है। पहली बार होलिका दहन में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों के उपयोग की तैयारी की गई है। इस अभियान के तहत एक लाख गोबर के उपले तैयार किए गए हैं। उपलों के वितरण की शुरुआत महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी द्वारा की जा रही है ।नगर निगम की योजना के अनुसार, नैनी क्षेत्र सहित नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी जोनों के वार्डों में गोबर के उपले उपलब्ध कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वार्ड में निर्धारित स्थानों पर उपले रखे जाएंगे, ताकि लोग होलिका दहन के दौरान उनका उपयोग कर सकें।हालांकि, इस पहल को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, हर वार्ड में केवल एक स्थान पर ही उपलों का वितरण किया जाएगा, जबकि अधिकांश वार्डों में चार से पांच स्थानों पर होलिका दहन की परंपरा रही है। ऐसे में अन्य स्थानों पर होने वाले होलिका दहन के लिए उपलों की व्यवस्था कैसे होगी, यह स्पष्ट नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंपरागत रूप से वार्ड के मुख्य चौराहे पर होलिका दहन किया जाता है, लेकिन कई मोहल्लों में अलग-अलग स्थानों पर भी होलिका सजाई जाती है। ऐसे में नागरिकों का मानना है कि यदि सभी स्थानों पर उपलों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए तो यह पहल अधिक प्रभावी और सफल साबित हो सकती है।नगर निगम की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि वितरण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पर्यावरण–अनुकूल प्रयास से जुड़ सकें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 21:26:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओबरा महाविद्यालय में भव्य पौधारोपण , पर्यावरण संरक्षण का दिया  संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य अतिथि  नगर पंचायत अध्यक्षा ने पौधारोपण कर प्रर्यायवरण संरक्षण पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152920/message-of-environmental-protection-in-grand-plantation-in-obra-college"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/img-20250703-wa0407.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा/ सोनभद्र-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में एक प्रभावशाली पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ओबरा नगर पंचायत अध्यक्षा चांदनी देवी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-07/img-20250703-wa0406.jpg" alt="IMG-20250703-WA0406" width="1140" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस पुनीत कार्य में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद , पर्यावरण प्रभारी और प्रवक्ता उपेंद्र , प्रवक्ता सैनी , अन्य सभी प्रवक्तागण, लिपिक स्टाफ और सभासद विकास सिंह की गरिमामय उपस्थिति रही। इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने स्वयं पौधे रोपित कर इस पहल में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।कार्यक्रम का सबसे प्रेरक पहलू छात्र-छात्राओं की अभूतपूर्व भागीदारी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ी संख्या में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ पौधारोपण में हिस्सा लिया। उनकी यह सक्रियता न केवल पर्यावरण के प्रति उनकी बढ़ती जागरूकता को दिखाती है, बल्कि भविष्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी की भावना को भी उजागर करती है। छात्र-छात्राओं के इस योगदान ने कार्यक्रम को वास्तव में सफल और प्रेरणादायक बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पौधारोपण अभियान सिर्फ कुछ पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह सभी उपस्थित लोगों के लिए पर्यावरण संरक्षण के एक सशक्त संदेश के रूप में सामने आया। महाविद्यालय परिसर में लगाए गए ये नए पौधे न केवल हरियाली को बढ़ाएंगे, बल्कि आने वाले समय में एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस तरह की पहल निश्चित रूप से समाज के अन्य वर्गों और संस्थाओं को भी पर्यावरण-हितैषी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आयोजन दर्शाता है कि कैसे शिक्षण संस्थान और स्थानीय प्रशासन मिलकर पर्यावरण की बेहतरी के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jul 2025 17:49:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेती-बारी की परम्परा को आगे बढ़ा रहे अवैद्यनाथ </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रूद्रपुर, देवरिया। </strong>क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित निर्माणाधीन रिसोर्ट में 1000 फलदार पौधे लगवा रहे अवैद्यनाथ पाण्डेय के कार्यों की चर्चा खूब हो रही है। वे रूद्रपुर - गौरी बाजार मार्ग से सटे अपनी भूमि पर नेताओं, अधिकारियों व समाजसेवियों से पौधे लगवा रहे हैं और उनका नाम भी लिखवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जिस तरीके से वनों का क्षेत्रफल कम हो रहा है। उसी का परिणाम है कि लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है और मौसम गड़बड़ा रहा है। ना तो समय से बरसात हो रही है और ना ही समय से मौसम में बदलाव देखा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132850/avaidyanath-is-carrying-forward-the-tradition-of-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/img-20230726-wa0002_1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रूद्रपुर, देवरिया। </strong>क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित निर्माणाधीन रिसोर्ट में 1000 फलदार पौधे लगवा रहे अवैद्यनाथ पाण्डेय के कार्यों की चर्चा खूब हो रही है। वे रूद्रपुर - गौरी बाजार मार्ग से सटे अपनी भूमि पर नेताओं, अधिकारियों व समाजसेवियों से पौधे लगवा रहे हैं और उनका नाम भी लिखवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जिस तरीके से वनों का क्षेत्रफल कम हो रहा है। उसी का परिणाम है कि लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है और मौसम गड़बड़ा रहा है। ना तो समय से बरसात हो रही है और ना ही समय से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। पौधे मानव और पशु दोनों के लिए लाभदायक हैं। हमें अपने आसपास अधिकाधिक पौधे लगाने चाहिए जिससे पर्यावरण सुरक्षित हो और मानव जीवन सुचारू हो। एसडीएम विपिन द्विवेदी, बरहज के विधायक दीपक दीपक मिश्र, एमएलसी रतनपाल सिंह, पूर्व विधायक सुरेश तिवारी, पूर्व चेयरमैन डॉक्टर रामभरोसा त्रिपाठी, चेयरमैन सुधा निगम आदि ने पौधारोपण किया।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 26 Jul 2023 18:05:32 +0530</pubDate>
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