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                <title>पर्यावरण संरक्षण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पर्यावरण संरक्षण RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पेट्रोलियम बचत एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी की अनूठी पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -</strong> प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा ऊर्जा संरक्षण, पेट्रोलियम बचत एवं पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में किए जा रहे राष्ट्रव्यापी आह्वान के क्रम में जनपद सोनभद्र में भी प्रशासन द्वारा सकारात्मक पहल प्रारम्भ की गई है। इसी क्रम में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपद के समस्त विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की है कि पेट्रोलियम उत्पादों की बचत हेतु आपसी समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से क्षेत्र भ्रमण, बैठक, सम्पूर्ण समाधान दिवस, थाना दिवस, किसान दिवस एवं मासिक समीक्षा बैठकों में प्रतिभाग करें, जिससे अनावश्यक ईंधन खपत को कम किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ऊर्जा संरक्षण के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179671/district-magistrates-unique-initiative-regarding-petroleum-saving-and-environmental-protection"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001624147.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -</strong> प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा ऊर्जा संरक्षण, पेट्रोलियम बचत एवं पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में किए जा रहे राष्ट्रव्यापी आह्वान के क्रम में जनपद सोनभद्र में भी प्रशासन द्वारा सकारात्मक पहल प्रारम्भ की गई है। इसी क्रम में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपद के समस्त विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की है कि पेट्रोलियम उत्पादों की बचत हेतु आपसी समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से क्षेत्र भ्रमण, बैठक, सम्पूर्ण समाधान दिवस, थाना दिवस, किसान दिवस एवं मासिक समीक्षा बैठकों में प्रतिभाग करें, जिससे अनावश्यक ईंधन खपत को कम किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए आज जिलाधिकारी चर्चित गौड़ अपने आवास से कलेक्ट्रेट कार्यालय पैदल पहुंचे। जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रहित में किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं तथा ईंधन बचत प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा की कि सप्ताह में कम से कम दो दिवस ऐसे निर्धारित किए जाएं, जब फील्ड भ्रमण न हो, उस दिन कार्यालय आने-जाने हेतु बस, ई-रिक्शा एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग किया जाए। साथ ही विभागीय बैठकों को अधिकाधिक ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किए जाने पर भी बल दिया जाये, ताकि समय, संसाधन एवं पेट्रोलियम की बचत सुनिश्चित की जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने अधिकारियों व कर्मचारियों से भी अपील करते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पाद सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं। अतः छोटी दूरी तय करने के लिए पैदल चलने, साइकिल एवं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण एवं आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ा हुआ विषय है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:31:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएवी का है संदेश, स्वच्छ सुन्दर हो भारत देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बीजपुर / सोनभद्र -</strong> डीएवी पब्लिक स्कूल एनटीपीसी रिहंदनगर में स्वच्छता जागरूकता रैली महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के विचार को सशक्त करते हुए स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत आज 18 मई को भव्य स्वच्छता रैली निकली गई । सामाजिक विज्ञान के शिक्षक अनन्त मोहन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दो अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय जन आंदोलन बन गया है। 'ना गन्दगी करेंगे, ना गंदगी करने देंगे' का मंत्र लोगों ने अपनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह अभियान भारतीयों के व्यवहार में बदलाव लाने और स्वच्छता को एक जीवन शैली बनाने का एक बड़ा</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179468/people-missing-doctors-in-phc-kachnarwa-staged-a-strong-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001619785.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बीजपुर / सोनभद्र -</strong> डीएवी पब्लिक स्कूल एनटीपीसी रिहंदनगर में स्वच्छता जागरूकता रैली महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के विचार को सशक्त करते हुए स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत आज 18 मई को भव्य स्वच्छता रैली निकली गई । सामाजिक विज्ञान के शिक्षक अनन्त मोहन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दो अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय जन आंदोलन बन गया है। 'ना गन्दगी करेंगे, ना गंदगी करने देंगे' का मंत्र लोगों ने अपनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह अभियान भारतीयों के व्यवहार में बदलाव लाने और स्वच्छता को एक जीवन शैली बनाने का एक बड़ा प्रयास है। यह विशाल रैली स्वच्छता के प्रति जनचेतना को आगे बढ़ाने हेतु विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित किया गया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों एवं छात्रों के बीच स्वच्छता, साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अलख जगाना था। रैली में आठवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों ने हाथों में बैनर लिए 'स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत', 'गंदगी हटाओ- देश बचाओ', 'डीएवी का है संदेश- स्वच्छ सुंदर हो भारत देश', 'भारत को विकसित करना है तो, स्वच्छता को अपनाना होगा' , 'एनटीपीसी का कहना है,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वच्छता हमारा गहना है'' आदि गगन भेदी नारे लगा रहे थे । एनसीसी कैडेट्स ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने में विशेष भूमिका का निर्वहन किया। प्राचार्य श्री राजकुमार ने अपने संबोधन में कहा, यह केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है; बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली आदत है। उन्होंने कहा स्वच्छता को हमें अपनाना होगा, तभी भारत विकसित हो सकेगा। हमें बीमारियों से बचना है तो स्वच्छता उसका मूलाधार है। उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन को धन्यवाद दिया; जिसके सहयोग एवं प्रेरणा से यह अभियान टाउनशिप के अंदर चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों ने विशेष रूप से भाग लिया। डॉ०आर के झा, विजय कुमार तिवारी, डॉ० राजेश कुमार श्रीवास्तव, जय सिंह, एसपी तिवारी, डीसी शुक्ला, सौरभ कुमार, रंजना सिंह, अरूण कुमार सिंह, शगुफ्ता शबनम, श्रद्धा ठाकरे, नम्रता चौधरी आदि के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:38:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. इस की मिसाल है पहल 'दाना-पानी'।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से आसमान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179343/humanity-is-not-limited-to-humans-only-pahal-dana-paani-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260513-wa0066.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से आसमान की तरफ देखती है, यह मंज़र ही काफी है दिल को भीतर तक हिला देने के लिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> ये वही पल होते हैं, जब इंसानियत की असली परीक्षा होती है और कुछ लोग इस परीक्षा में खरे उतरते हैं। शहर की तेजी से उभरती संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल इस भावना को लगभग चार वर्षों से सर्वोपरि रखे हुए है। संस्था इस भावना को अपने कार्यों में उतारते हुए हर साल गर्मियों में 'दाना-पानी' अभियान संचालित करती है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वो बोल नहीं सकते.. इसलिए उनकी प्यास सुनाई नहीं देती। वो माँग नहीं सकते.. इसलिए उनकी तकलीफ दिखाई नहीं देती। लेकिन, उनका दर्द उतना ही सच्चा है, जितना कि हमारा। "बेजुबान हैं तो क्या हुआ, प्यास उन्हें भी लगती है.." थीम पर यही एहसास, पिछले कई वर्षों से एक खूबसूरत पहल को जिंदा रखे हुए है। यह पहल कोई एक बार का प्रयास नहीं, बल्कि लगातार कई वर्षों से हर गर्मी में दोहराई जा रही एक जिम्मेदारी है, जो बेज़ुबानों के लिए जीवन का सहारा बनती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष भी संस्था ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 200 से अधिक मिट्टी के सकोरे और दाने वितरित किए हैं, ताकि पक्षियों और जानवरों को इस भीषण गर्मी में थोड़ी राहत मिल सके। ये सकोरे सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं हैं.. ये उम्मीद हैं, राहत हैं, और कई जिंदगियों के लिए जीवन की डोर हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल का मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने घर के बाहर, छत पर या आसपास सिर्फ एक सकोरा रख दे और हर दिन उसमें पानी भरने की जिम्मेदारी ले ले, तो न जाने कितने ही मासूम जीवन बचाए जा सकते हैं। यह छोटा-सा प्रयास किसी के लिए पूरी दुनिया बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था इस पहल को सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक एक विचार के रूप में आगे बढ़ा रही है, एक ऐसा संवेदनशील विचार, जो हमें यह एहसास कराता है कि इस दुनिया में सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव का समान हक है। जब एक चिड़िया प्यास से तड़पती है, तो वह सिर्फ एक पक्षी नहीं होती, वह हमारे भीतर की इंसानियत का आईना होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीइंग रेस्पॉन्सिबल द्वारा की जा रही यह अद्भुत पहल सालों से बिना किसी शोर के चल रही है, जिसमें न तो कोई दिखावा और न ही किसी प्रकार की अपेक्षा.. यह सिर्फ और सिर्फ एक सच्चा प्रयास है, जो हर गर्मी में किसी बेज़ुबान पंछी की प्यास के लिए राहत बन जाता है। धीरे-धीरे यह भावना लोगों के दिलों तक पहुँच रही है। अब कई लोग खुद आगे आकर अपने घरों और आसपास पानी रखने लगे हैं, इस पहल को अपनाने लगे हैं। क्योंकि सच्चाई यही है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. वह हर उस जीवन में होती है, जो इसे महसूस करता है, भले ही बोल नहीं पाता। और शायद, यही वह पल होता है, जब हम सिर्फ जीते नहीं, बल्कि किसी और को भी जीने देने का कारण बन जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी के एक छोटे-से सकोरे में पानी भरकर रखना भले ही हमें साधारण लगे.. लेकिन हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि शहरों में ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी करने की होड़ में पेड़ों और जलस्त्रोतों को खत्म करके हम इन नन्हें जीवों से उनके हक के आशियाने और पीने के संसाधन धीरे-धीरे करके छीनते चले जा रहे हैं। ऐसे में ये सकोरे किसी डूबते को तिनके के सहारे के समान हैं।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179343/humanity-is-not-limited-to-humans-only-pahal-dana-paani-is</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:09:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मलिहाबाद में बेखौफ लकड़ी तस्कर: वन विभाग की नाक के नीचे उजड़ रही ग्रीन बेल्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में वन विभाग की कथित मिलीभगत से ग्रीन बेल्ट की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षेत्र में प्रतिबंधित आम की लकड़ी का अवैध कटान धड़ल्ले से जारी है, जबकि प्रशासनिक सख्ती के दावे हवा साबित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मलिहाबाद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ से आम के बागों को अवैध तरीके से उजाड़ा जा रहा है। बीती रात पंचायत बिराहिमपुर में फलदार व छायादार हरे-भरे दूधाधारी पेड़ों पर मशीनें चला दी गईं और पूरी बाग को रातों-रात काटकर साफ कर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260514-wa0016-(1).jpg" alt="मलिहाबाद में बेखौफ लकड़ी तस्कर: वन विभाग की नाक के नीचे उजड़ रही ग्रीन बेल्ट" width="1200" height="800" /></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179277/fearless-wood-smugglers-in-malihabad-are-destroying-the-green-belt"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260514-wa0011-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में वन विभाग की कथित मिलीभगत से ग्रीन बेल्ट की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षेत्र में प्रतिबंधित आम की लकड़ी का अवैध कटान धड़ल्ले से जारी है, जबकि प्रशासनिक सख्ती के दावे हवा साबित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मलिहाबाद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ से आम के बागों को अवैध तरीके से उजाड़ा जा रहा है। बीती रात पंचायत बिराहिमपुर में फलदार व छायादार हरे-भरे दूधाधारी पेड़ों पर मशीनें चला दी गईं और पूरी बाग को रातों-रात काटकर साफ कर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260514-wa0016-(1).jpg" alt="मलिहाबाद में बेखौफ लकड़ी तस्कर: वन विभाग की नाक के नीचे उजड़ रही ग्रीन बेल्ट" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से उठा ले जाया गया, वहीं पेड़ों के ठूंठों को जेसीबी से खोदकर खेत को जोत दिया गया ताकि अवैध कटान के निशान तक मिटाए जा सकें। गौरतलब है कि मलिहाबाद अपनी विश्व प्रसिद्ध आम की उपज के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है, ऐसे में लगातार हो रहे बागों के विनाश से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 22:33:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मरहा-करचौलिया में सागौन के पेड़ों की हुई थी अवैध कटान, 10 दिन बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती सदर वन रेंज बस्ती सदर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मरहा-करचौलिया के बीच 10 दिन पहले भारी संख्या में सागौन के पेड़ों की कटान हुई थी लेकिन हल्का वन दरोगा और चौकी प्रभारी फुटहिया की मिलीभगत से कार्रवाई पूरी तरह ठप्प है। मरहा-करचौलिया में बिना परमिट की सागौन के पेड़ों की भारी कटान हुई थी । वन विभाग बस्ती सदर को अवैध पेड़ों के कटान की सूचना दी गई थी । वन रेंज बस्ती सदर के हल्का वन दरोगा अभिलाष ने जांच-कार्रवाई के नाम पर बड़ा खेल दिया हैं ।सूत्रों के अनुसार मरहा - फुटहिया में अवैध हो रहे</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178858/there-was-illegal-felling-of-teak-trees-in-marha-karchaulia-no"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0040.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती सदर वन रेंज बस्ती सदर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मरहा-करचौलिया के बीच 10 दिन पहले भारी संख्या में सागौन के पेड़ों की कटान हुई थी लेकिन हल्का वन दरोगा और चौकी प्रभारी फुटहिया की मिलीभगत से कार्रवाई पूरी तरह ठप्प है। मरहा-करचौलिया में बिना परमिट की सागौन के पेड़ों की भारी कटान हुई थी । वन विभाग बस्ती सदर को अवैध पेड़ों के कटान की सूचना दी गई थी । वन रेंज बस्ती सदर के हल्का वन दरोगा अभिलाष ने जांच-कार्रवाई के नाम पर बड़ा खेल दिया हैं ।सूत्रों के अनुसार मरहा - फुटहिया में अवैध हो रहे कटान के समय चौकी प्रभारी फुटहिया मौके पर पहुंचे थे लेकिन लकड़ी ठेकेदार से लेन-देन कर चौकी प्रभारी ने मामले को रफा-दफा कर दिया था । अर्थात् 10 दिन बीतने के बाद भी न तो वन विभाग ने कार्रवाई की, न ही नगर पुलिस ने कार्यवाही की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हल्का वन दरोगा अभिलाष पहले भी हरे पेड़ों की कटान मामले में जांच के नाम पर लीपापोती कर चुके हैं ठीक उसी तरीके से मरहा करचौलिया गांव में उल्टा सीधा रिपोर्ट लगाकर मामले को खत्म करने का प्रयास जारी हैं । बड़ा सवाल यह है कि जब वन विभाग और पुलिस दोनों की मिलीभगत होगी तो हरे पेड़ों की कटान कैसे रुकेगी?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      सागौन प्रतिबंधित प्रजाति का पेड़ है। बिना परमिट कटान पर प्रति पेड़ ₹10 हजार जुर्माना और जेल का प्रावधान है। भारी संख्या में कटान मतलब लाखों का नुकसान सरकारी खजाने को हुआ है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब देखना यह है कि मरहा करचौलिया में बड़े पैमाने पर कटे हरे सागौन के पेड़ मामले में लापरवाही बरतने वाले हल्का वन दरोगा अभिलाष के खिलाफ तेज तर्रार डीएफओ द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:25:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जा और पेड़ काटने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत महरी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और हरे पेड़ों की कटान का मामला गरमाता जा रहा है। शुक्रवार को महरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी नौतनवां नवीन कुमार को एक शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पड़ोस के गांव लुठहवा निवासी एक व्यक्ति ने ग्राम सभा महरी की गाटा संख्या 11 की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। शिकायती पत्र में आरोप है कि उक्त भूमि पर सरकारी बगीचा स्थित है जहां से अवैध कब्जाधारी धड़ल्ले से हरा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178757/allegations-of-illegal-occupation-of-gram-sabha-land-and-cutting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/पहला,,-.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत महरी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और हरे पेड़ों की कटान का मामला गरमाता जा रहा है। शुक्रवार को महरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी नौतनवां नवीन कुमार को एक शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पड़ोस के गांव लुठहवा निवासी एक व्यक्ति ने ग्राम सभा महरी की गाटा संख्या 11 की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। शिकायती पत्र में आरोप है कि उक्त भूमि पर सरकारी बगीचा स्थित है जहां से अवैध कब्जाधारी धड़ल्ले से हरा पेड़ कटवा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कब्जाधारी पेड़ काटकर ग्राम सभा की संपत्ति को भारी क्षति पहुंचा रहा है और निजी लाभ कमा रहा है। शिकायत करने वालों में मुख्य रूप से अशोक यादव, मोहरत, अमन, रामप्रीत, प्रिंस, कृष्ण मुरारी, कैलाश, दीप, रामचंद्र, धर्मेंद्र और राजेंद्र सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने एसडीएम से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों को उचित जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 19:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रकृति की मूक चीख: एक पौधा हमें बचा सकता है, हम उसे बचा नहीं पा रहे</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति की गोद में रची-बसी भारतीय धरती आज भी जैव-विविधता के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आधुनिक वैज्ञानिक खोजें लगातार यह साबित कर रही हैं कि यह खजाना अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। हाल ही में खोजी गई पौध प्रजाति</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारे पारिस्थितिक तंत्र में अभी भी अनेक अनदेखे रहस्य मौजूद हैं। यह खोज केवल एक नई वनस्पति की पहचान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह संकेत है कि भारत के वन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्वतीय क्षेत्र और सूक्ष्म आवास विज्ञान के लिए निरंतर नए द्वार खोल रहे हैं।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178730/silent-scream-of-nature-a-plant-can-save-us-we"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/81iuxtgi+vl._ac_uf1000,1000_ql80_.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति की गोद में रची-बसी भारतीय धरती आज भी जैव-विविधता के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आधुनिक वैज्ञानिक खोजें लगातार यह साबित कर रही हैं कि यह खजाना अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। हाल ही में खोजी गई पौध प्रजाति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारे पारिस्थितिक तंत्र में अभी भी अनेक अनदेखे रहस्य मौजूद हैं। यह खोज केवल एक नई वनस्पति की पहचान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह संकेत है कि भारत के वन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्वतीय क्षेत्र और सूक्ष्म आवास विज्ञान के लिए निरंतर नए द्वार खोल रहे हैं। राष्ट्रीय जैव-विविधता रिपोर्ट में ऐसी खोजों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि पर्यावरणीय अनुसंधान अब अधिक गहराई और विस्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मरुस्थल जैसी कठोर परिस्थितियों में भी जीवन की सूक्ष्म संभावनाएँ कितनी समृद्ध हो सकती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की खोज स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह दुर्लभ पौधा आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के निगिडी वन क्षेत्र में ग्रेनाइट चट्टानों के बीच लगभग </span>450 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>550 <span lang="hi" xml:lang="hi">मीटर की ऊँचाई पर पाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ अत्यंत कठिन जलवायु परिस्थितियाँ मौजूद हैं। फिर भी यह प्रजाति अपनी विशिष्ट जैविक संरचना के बल पर जीवित है और पर्यावरण के साथ अद्भुत संतुलन स्थापित करती है। इसकी पत्तियों और तनों की बनावट जल संरक्षण की अत्यंत उन्नत क्षमता प्रदान करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह शुष्क क्षेत्रों में भी टिकाऊ बनी रहती है। इसी असाधारण अनुकूलन क्षमता के कारण यह पौधा वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण और गहन अध्ययन का विषय बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक अनुसंधानों की बढ़ती गति ने भारत की जैव-विविधता को नए आयामों में उजागर करना प्रारंभ कर दिया है। राष्ट्रीय जैव-विविधता रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में सैकड़ों नई पौध प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह स्पष्ट करती हैं कि भारत केवल सांस्कृतिक रूप से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जैविक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध देश है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय जैव-विविधता रिपोर्ट और बॉटेनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले एक दशक में भारत में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई पौध प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। केवल वर्ष </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में ही </span>410 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक नई प्रजातियाँ दर्ज की गईं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> इनमें अनेक प्रजातियाँ औषधीय गुणों से युक्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में चिकित्सा विज्ञान के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं। ये निरंतर हो रही खोजें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके संतुलित उपयोग की आवश्यकता को और अधिक अनिवार्य बना देती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन दुर्लभ पौधों का अध्ययन अब केवल जैव-विज्ञान तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को समझने का आधार बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी प्रजातियाँ दर्शाती हैं कि छोटे-से-छोटे आवासों में भी जीवन के सूक्ष्म और जटिल चक्र सक्रिय रहते हैं। यदि इन संवेदनशील क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अब तक अनदेखी जैव-विविधता गंभीर रूप से प्रभावित या विलुप्त हो सकती है। इसलिए वैज्ञानिक ऐसे क्षेत्रों की सतत निगरानी और संरक्षण पर विशेष जोर दे रहे हैं। यह प्रजाति अत्यंत दुर्लभ है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग </span>2.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में केवल करीब </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधे ही पाए गए हैं। ग्रेनाइट खनन और जंगल की आग इसके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विस्तृत जैव-भौगोलिक परिदृश्य में फैले पश्चिमी घाट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वोत्तर भारत और दक्कन पठार आज नई प्रजातियों की खोज के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। हर वर्ष यहाँ होने वाली नई पहचानें यह स्पष्ट करती हैं कि वनस्पति और जीव-जगत का एक बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञान की वर्तमान समझ से बाहर है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की खोज भी इसी निरंतर श्रृंखला का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाती है कि सूक्ष्म स्तर पर भी प्रकृति अत्यंत जटिल और विविध संरचनाओं से बनी हुई है। ऐसी खोजें न केवल वैज्ञानिक अध्ययन को दिशा देती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीति निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन वैज्ञानिक खोजों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ये स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव से गहराई से जुड़ी होती हैं। आदिवासी और ग्रामीण समाज अक्सर ऐसे पौधों की पहचान पहले ही कर लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका औपचारिक वैज्ञानिक वर्गीकरण बाद में किया जाता है। यह सहभागिता जैव-विविधता अनुसंधान को अधिक सशक्त और विश्वसनीय बनाती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे पौधों के अध्ययन में भी स्थानीय ज्ञान की अहम भूमिका रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह स्पष्ट करता है कि विज्ञान और परंपरा का संगम प्रकृति को समझने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखें तो ये खोजें केवल उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी हैं। जलवायु परिवर्तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनों की कटाई और तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण कई प्रजातियों को उनके दर्ज होने से पहले ही विलुप्ति की ओर धकेल रहे हैं। राष्ट्रीय जैव-विविधता रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि संरक्षण उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले वर्षों में जैव-विविधता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। इसी संदर्भ में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी खोजें केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रकृति के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता का स्पष्ट संकेत भी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की जैव-विविधता एक ऐसी जीवित पुस्तक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके नए अध्याय हर वर्ष खुलते जा रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूफोरबिया अनन्थापुरामेन्सिस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी प्रजातियाँ यह प्रमाण देती हैं कि प्रकृति अभी भी अपने रहस्यों को हमारे सामने धीरे-धीरे उजागर कर रही है। आवश्यकता है कि इस ज्ञान को केवल संग्रहित न किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संरक्षण और सतत विकास में प्रभावी रूप से अपनाया जाए। यदि इन अनमोल प्राकृतिक खजानों की रक्षा समय रहते नहीं की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें केवल पुस्तकों और संग्रहालयों तक सीमित पाएंगी। हमारी जैव-विविधता जितनी समृद्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही नाजुक भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसका संरक्षण हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178730/silent-scream-of-nature-a-plant-can-save-us-we</link>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिवक्ताओं ने पशु-पक्षियों के लिए मिट्टी के प्यालों का किया वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>जनहित कारिणी समिति द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए जिला न्यायालय कचहरी परिसर स्थित अधिवक्ता लोकेश सिंह के कार्यालय में पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी हेतु मिट्टी के प्यालों का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भीषण गर्मी में जीव-जंतुओं को राहत पहुंचाना और समाज में संवेदनशीलता का संदेश देना रहा।इस अवसर पर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश केसरवानी, प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सुशील जैन सहित अधिवक्ता अवधेश यादव, गिरधर, संदीप कुमार, प्रेम शंकर यादव, सुनील चौधरी, धीरज वर्मा, आस्तित्य चौधरी, राम लखन, संदीप विश्वकर्मा और संदीप पटेल समेत कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में उपस्थित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178379/advocates-distributed-clay-cups-for-animals-and-birds"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260506-wa0120.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>जनहित कारिणी समिति द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए जिला न्यायालय कचहरी परिसर स्थित अधिवक्ता लोकेश सिंह के कार्यालय में पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी हेतु मिट्टी के प्यालों का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भीषण गर्मी में जीव-जंतुओं को राहत पहुंचाना और समाज में संवेदनशीलता का संदेश देना रहा।इस अवसर पर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश केसरवानी, प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सुशील जैन सहित अधिवक्ता अवधेश यादव, गिरधर, संदीप कुमार, प्रेम शंकर यादव, सुनील चौधरी, धीरज वर्मा, आस्तित्य चौधरी, राम लखन, संदीप विश्वकर्मा और संदीप पटेल समेत कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पशु-पक्षियों के प्रति दया और संरक्षण का संदेश देते हुए आमजन से भी इस तरह के कार्यों में सहभागिता करने की अपील की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:57:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामगंगा-सरयू नदी संगम क्षेत्र में खनन कार्यों के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रशासन को सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित खनन क्षेत्रों में किसी भी पट्टाधारक द्वारा भारी मशीनों का उपयोग न किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पिथौरागढ़ निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन पट्टाधारक नियमों के विपरीत पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177972/strictness-on-mining-in-ramganga-sarayu-confluence-area"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/671179-750x450orissa-illegal-mining.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामगंगा-सरयू नदी संगम क्षेत्र में खनन कार्यों के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रशासन को सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित खनन क्षेत्रों में किसी भी पट्टाधारक द्वारा भारी मशीनों का उपयोग न किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पिथौरागढ़ निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन पट्टाधारक नियमों के विपरीत पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि खनन कार्यों में भारी मशीनों के उपयोग की अनुमति नहीं है और केवल सीमित परिस्थितियों, जैसे ड्रेजिंग, में निर्धारित शर्तों के अधीन इसकी इजाजत दी जा सकती है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि कोई भी खनन पट्टाधारक खनन उद्देश्य से भारी मशीनों का इस्तेमाल न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी स्वयं अथवा तहसीलदार से कम रैंक के न होने वाले अधिकारी के माध्यम से नियमित रूप से औचक निरीक्षण कराएं ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। इन निर्देशों के साथ अदालत ने याचिका का निस्तारण किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177972/strictness-on-mining-in-ramganga-sarayu-confluence-area</link>
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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:39:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177842/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4416221.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा । इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है। यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177786/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/172239-gmcaiglfpm-1648543361.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है। यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/441622.jpg" alt="जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव" width="401" height="267"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था। इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं। जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई। शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट बन चुका है। यदि युद्ध, प्रदूषण और अनियंत्रित विकास की प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले 7–10 वर्षों में गर्मी मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि निर्णायक कार्यवाही का है अन्यथा, वह दिन दूर नहीं जब बढ़ता तापमान मानव अस्तित्व को चुनौती देगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:10:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूखी नहरे सूखे तालाब पानी की तलाश में भटक रहे बेजुबान जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर आ रहे हैं पानी के लिए तड़प रहे बेजुबान सूखी नहर तालाब जिम्मेदार बेपरवाह जिले के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पशु पक्षियों की हालत गंभीर जंगली जानवर गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान होने की आशंका है नहर तालाब और पोखरे पूरी तरह सूख चुके  जिससे पानी के अभाव में जानवर दर-दर भटकने को मजबूर ग्रामीण क्षेत्रों में इनका आवागमन हो गया है पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे जानवर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र में जलस्रोतों की हालत बद से बदतर हो चुकी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित. धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कागजों में लाखों रुपए का जलाशय भराव के लिए पैसा खर्च हो जा रहा है लेकिन स्थित सुखी तालाब नहरे बयां कर रही है कि भ्रष्टाचार करके जल स्रोतों का भंडारण नहीं हो पा रहा है नदिया सुख रही है नदियों की सफाई नहीं की जा रही जिसके कारण पानी नहीं रख रहा हैजमीनी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं पानी की तलाश में पशु-पक्षी गांव और सड़कों की ओर भटक रहे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी की व्यवस्था कराने और सूखे जलस्रोतों को भरवाने की मांग की व्यवस्था करनी चाहिए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति भयावह हो सकती है बड़ी संख्या में बेजुबान जानवरों की जान जा सकती हैसवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन बेजुबानों को कब जल का व्यवस्था कराएगी सरकार केवल कागजों में तालाबों में पानी भरा जा रहा है नहरे में पानी सप्लाई हो रही है लेकिन सब सुखी नजर आ रही है कहीं पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है जिला प्रशासन आदेश देकर के अपने एक ऑफिस में बैठे रहते हैं जंगली जानवर और बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:45:02 +0530</pubDate>
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