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                <title>OBC - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>OBC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की 152वीं जयंती पर सामाजिक न्याय एवं पीडीए विषयक परिचर्चाf</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर द्वारा आज शुक्रवार को राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की 152वीं जयंती के अवसर पर महानगर कार्यालय, कानपुर में "सामाजिक न्याय एवं पीडीए" विषय पर परिचर्चा सम्मेलन का आयोजन महानगर अध्यक्ष हाजी फ़ज़ल महमूद की अध्यक्षता में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन महानगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन को संबोधित करते हुए हाजी फ़ज़ल महमूद ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 26 जून 1874 को कोल्हापुर में हुआ था। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता तथा शोषित, वंचित, पिछड़े एवं दलित समाज के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने तत्कालीन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182499/discussion-on-social-justice-and-pda-on-the-152nd-birth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002036885-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर द्वारा आज शुक्रवार को राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की 152वीं जयंती के अवसर पर महानगर कार्यालय, कानपुर में "सामाजिक न्याय एवं पीडीए" विषय पर परिचर्चा सम्मेलन का आयोजन महानगर अध्यक्ष हाजी फ़ज़ल महमूद की अध्यक्षता में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन महानगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन को संबोधित करते हुए हाजी फ़ज़ल महमूद ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 26 जून 1874 को कोल्हापुर में हुआ था। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता तथा शोषित, वंचित, पिछड़े एवं दलित समाज के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने तत्कालीन शासकों से आह्वान किया था कि समाज के पिछड़े एवं दलित वर्गों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उचित अवसर दिए जाएं, अन्यथा अन्याय के विरुद्ध जनआंदोलन परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आज भी संविधान की मजबूती और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए पीडीए की एकजुटता आवश्यक है। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार एवं सम्मान दिलाकर ही सामाजिक समरसता और बराबरी का संदेश स्थापित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाजी फ़ज़ल महमूद ने कहा कि राजर्षि शाहूजी महाराज बाल विवाह के प्रबल विरोधी थे तथा उन्होंने निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क चिकित्सा और सामाजिक समानता को शासन की प्राथमिकता बनाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी महापुरुषों के आदर्शों से भटक गई है, जिसके कारण गरीब, पिछड़े, दलित एवं वंचित वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। समाजवादी पार्टी राजर्षि शाहूजी महाराज के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी राजर्षि शाहूजी महाराज के जीवन, संघर्ष एवं सामाजिक न्याय के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद,प्रदेश सचिव के के शुक्ला,वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू,महासचिव संजय सिंह बंटी सेंगर,नंदलाल जयसवाल,सत्यनारायण गहरवार,महेन्द्र सिह,समीर सोनकर,परमवीर गंभीर,रजत मिश्रा,पुष्पेंद्र कटियार,गुड्डू यादव,जस्वेंद्र निषाद प्रमुख रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 21:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या बरेली लोकसभा सीट से खत्म हो जाएगा ओबीसी का अस्तित्व जनता में मची हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div><strong>बरेली/</strong>लोकसभा सीट पर 1989 से लेकर ओबीसी के संतोष कुमार गंगवार सांसद हैं जिसके चलते वह आठ बार सांसद रहे चार बार केंद्रीय राज्य मंत्री के पद पर रहकर जनता का नेतृत्व किया केंद्र में सरकार किसी की भी रही हो परंतु बरेली सीट की जनता ने अपने नेता को सदैव सीट पर बरकरार रखा एक बार जनता भटक गई तो कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन  सांसद बने मगर जनता को पुनः एहसास हुआ और 2014 में पुनः संतोष गंगवार को ताजपोसी कर सांसद चुना और आज तक वह सांसद हैं</div>
<div>  </div>
<div>केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139138/will-the-existence-of-obc-end-from-bareilly-lok-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/1.--pic.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div><strong>बरेली/</strong>लोकसभा सीट पर 1989 से लेकर ओबीसी के संतोष कुमार गंगवार सांसद हैं जिसके चलते वह आठ बार सांसद रहे चार बार केंद्रीय राज्य मंत्री के पद पर रहकर जनता का नेतृत्व किया केंद्र में सरकार किसी की भी रही हो परंतु बरेली सीट की जनता ने अपने नेता को सदैव सीट पर बरकरार रखा एक बार जनता भटक गई तो कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन  सांसद बने मगर जनता को पुनः एहसास हुआ और 2014 में पुनः संतोष गंगवार को ताजपोसी कर सांसद चुना और आज तक वह सांसद हैं</div>
<div> </div>
<div>केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहने के बाद भी सांसद गंगवार ने अपनी जनता के प्रति से अपना मुख नहीं फेरा उन्होंने सप्ताह में दो दिन जनता की सेवा को बरेली में रहकर दिया जो बड़ी उपलब्धि है इनके यहां पर किसी भी तरह का जातिवाद जैसा भेदभाव नहीं था बरेली में होने पर जनता से कभी भी मिलने से इनकार नहीं किया आठ बार सांसद बनने के बाद भी इस ओबीसी के चेहरे पर कभी भी अहम की भूमिका नजर नहीं आई जनता अब इस बार बरेली सीट की घोषणा पर नजर टिकाए बैठी है</div>
<div> </div>
<div>सत्ता रूड पार्टी का फैसला कहीं बदला तो जनता भी कहीं अपना फैसला न बदल ले इस के लिए तरह-तरह की चर्चाओं का माहौल गर्म होता जा रहा है भाजपा ने यदि बरेली सीट का चेहरा बदलना तो भारी भी पड़ सकता है आठ बार के सांसद ने जनता की सेवा करने में कभी उसका राजनीतिक पार्ट से जोड़कर उसकी मदद नहीं की वलिक उसकी पीड़ा देखकर जनता की सेवा की और ओबीसी का नेतृत्वकर उनका मान बढ़ाया इस वार घोषणा में देरी होने पर लोग तरह-तरह के प्रयास जुटना शुरू कर दिया है सबसे बड़ी बात तो यह है</div>
<div> </div>
<div>शुरू से आज तक एक ही पार्टी में रहकर आठ बार सांसद बने परंतु बंदे के विरुद्ध कहीं पर भी किसी भी आपराधिक मामला पंजीकृत नहीं है ऐसा नेतृत्व करने वाला बिरला कोई ही नेता होगा जिसके विरुद्ध अपराधिक मामले दर्ज न हुए हो रिकॉर्ड बरेली से आठ बार के सांसद चार बार के मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने प्रदर्शित किया है किसी के भी साथ कोई भेदभाव देखने को नहीं मिला कोरोना कल में भी गंगवार ने जनता से मिलना बन्द नहीं किया और उनके दर्द को सुनकर निदान कराया ऐसे कर्मठ को यहां की जनता पुनः नौमी वार संसद के रूप में देखना पसंद करती है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 17:20:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मप्र की 32 पिछड़ी जातियां जो केंद्र की सूची से बाहर है उनके सर्वे का फेश टू प्रारम्भ</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यकर्ताओं से अवश्य सम्पर्क करें ताकि उन्हें आगे कठिनाई का सामना ना करना पड़े। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132734/the-phase-two-of-the-survey-of-32-backward-castes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/save_20230723_183927.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात, जिला ब्यूरो। हेमेंद्र क्षीरसागर। मध्यप्रदेश। </p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बालाघाट। मध्यप्रदेश जनभियान परिषद जिला बालाघाट के द्वारा मप्र की 32 पिछड़ी जातियां जो केंद्र की सूची से बाहर है उनका ऑनलाइन सर्वेक्षण का कार्य परिषद के विकासखंड समन्वयक एवं परामर्शदाताओं के द्वारा किया जा रहा है। जिला बालाघाट मे निवासरत पिछड़ावर्ग की ऐसी जातियाँ जो राज्य की सूची मे तो है किन्तु केंद्र की सूची नहीं हो तो वो परिषद के विकासखंड समन्वयक व अन्य कार्यकर्ताओं से अवश्य सम्पर्क करें ताकि उन्हें आगे कठिनाई का सामना ना करना पड़े। </p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">परिषद के जिला समन्वयक सुशील बर्मन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम फेस का सर्वें विगत 6 माह पूर्व शुरू हुआ था किन्तु उक्त 32  जातियाँ सम्पर्क मे नहीं आने के कारण प्रथम फेस मे जानकारी निरक भेजनी पड़ी। फेश टू का ऑनलाइन सर्वे पुन: प्रारम्भ हो चुका है जिसमे कोहरी जाती का सर्वे किया जा रहा है।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/save_20230723_183927.jpg" alt="Balaghat"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/132734/the-phase-two-of-the-survey-of-32-backward-castes</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2023 20:22:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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