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                <title>ऑनलाइन ठगी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ऑनलाइन ठगी RSS Feed</description>
                
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184876/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/rajeev.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:31:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस ने साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान  के तहत निबियाहवा गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने निबियाहवा गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182070/police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782312123825.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान  के तहत निबियाहवा गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने निबियाहवा गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182070/police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 20:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर ठगी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181429/organized-gang-of-cyber-fraud-busted-five-accused-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालने का काम कर रहे थे। इस संबंध में थाना सरिता विहार में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है जांच में इस गिरोह के तार मुंबई में दर्ज एक बड़े साइबर ठगी मामले से जुड़े पाए गए हैं। मुंबई के एक निजी कंपनी के साथ कथित सीईओ/व्हाट्सएप प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) धोखाधड़ी के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। यह रकम 3 जून से 15 जून 2026 के बीच 63 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से निकाली गई थी। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रकरण के तहत की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूरे वित्तीय नेटवर्क में संदिग्ध लेनदेन की राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास 22 वंश 2 फैयाज आलम 22 अमित 28 और बलवीर कुमार 23 के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई को थाना सरिता विहार के प्रभारी निरीक्षक युधवीर सिंह, उपनिरीक्षक वैभव सिंह, उपनिरीक्षक सतीश भाटी, बीसी नितेश, कांस्टेबल ओम प्रकाश और मनीष की टीम ने अंजाम दिया। अभियान का पर्यवेक्षण एसीपी अनिल शर्मा ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय जसबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 21:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181198/interstate-cyber-gang-committing-fraud-in-the-name-of-digital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002002752.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह पिछले लगभग 03 वर्षों से सक्रिय था तथा देशभर में लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है। ठगी की धनराशि के लेनदेन हेतु 450 से अधिक फर्जी एवं किराए के बैंक खातों का उपयोग किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियुक्तों के कब्जे से 05 मोबाइल फोन, 01 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 02 चेकबुक एवं 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। गिरोह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार अभियुक्त: अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार एवं कमल हैं। अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 308(2), 318(4) एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क कोइरौना ने लौटाए 13 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260521-wa0021.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक साल बाद पीड़ित को वापस मिले 7500 रुपये, पुलिस की सक्रियता से मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178038/after-one-year-the-victim-got-back-rs-7500-relief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001516489.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व में साईबर सेल में तैनात कास्टेबल विश्वनाथ प्रताप ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित खातों और लेन देन की पड़ताल की तथा लगातार प्रयास जारी रखा। पुलिस की सक्रियता और सतत प्रयासों के चलते अंत : सफलता हाथ लगी।इस संबंध में थानाध्यक्ष ने बताया कि साइबर अपराधों के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध का बदलता चेहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो रहा है। इस तेज बदलाव के बीच अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। पहले जहां चोरी और धोखाधड़ी के लिए भौतिक उपस्थिति जरूरी होती थी, वहीं अब एक मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति किसी को भी ठग सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल ठगी के मामलों में तेजी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176799/changing-face-of-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो रहा है। इस तेज बदलाव के बीच अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। पहले जहां चोरी और धोखाधड़ी के लिए भौतिक उपस्थिति जरूरी होती थी, वहीं अब एक मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति किसी को भी ठग सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है और चिंता की बात यह है कि इनका शिकार केवल अनपढ़ या ग्रामीण लोग ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षित और समझदार लोग भी हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल ठगी के नए तरीकों में सबसे खतरनाक रूप से उभर कर सामने आया है तथाकथित डिजिटल अरेस्ट। यह एक ऐसा छल है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी का कर्मचारी या किसी सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को डराता है। उसे बताया जाता है कि उसके नाम पर कोई गंभीर अपराध दर्ज है जैसे धन शोधन, अवैध लेनदेन या किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता। इसके बाद वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल के माध्यम से व्यक्ति को कई घंटों तक अपने नियंत्रण में रखा जाता है। उसे यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह जांच के दायरे में है और उसे कहीं जाने या किसी से बात करने की अनुमति नहीं है। इस दौरान उसे मानसिक दबाव में रखा जाता है और अंततः पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में साइबर अपराध के लगभग 15 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 20 लाख के आसपास पहुंच गई। इनमें से एक बड़ा हिस्सा वित्तीय ठगी से जुड़ा है। औसतन हर दिन हजारों लोग इस तरह के अपराधों का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति से 50000 से लेकर 5000000 रुपये तक की ठगी की गई है। यह आंकड़े केवल दर्ज मामलों के हैं, वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि बहुत से लोग शर्म या डर के कारण शिकायत ही नहीं करते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल अरेस्ट जैसे घोटाले इतने प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि वे मानव मनोविज्ञान पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जब किसी व्यक्ति को अचानक यह बताया जाता है कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस गया है, तो उसका पहला भाव डर और घबराहट का होता है। अपराधी इसी डर का फायदा उठाते हैं। वे अपनी भाषा, पहनावा और संवाद शैली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति उन्हें वास्तविक अधिकारी समझने लगता है। कई बार वे नकली पहचान पत्र, कार्यालय का बैकग्राउंड और वर्दी का भी उपयोग करते हैं ताकि उनकी बात और अधिक विश्वसनीय लगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की ठगी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें समय का दबाव बनाया जाता है। पीड़ित को सोचने या सलाह लेने का अवसर नहीं दिया जाता। उसे कहा जाता है कि यदि उसने तुरंत सहयोग नहीं किया तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा या उसके परिवार के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस मानसिक दबाव में व्यक्ति बिना सत्यापन किए ही पैसे भेज देता है। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक सजगता और धैर्य भी उतना ही आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा 1930 हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध है जहां तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है। विभिन्न राज्यों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं और डिजिटल जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद अपराधों की संख्या में कमी नहीं आ रही है, जिसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी और तकनीक का तेजी से बदलता स्वरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ठगी को रोकने के लिए केवल कानून और तकनीक पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक करना आवश्यक है। परिवारों में इस विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, खासकर बुजुर्गों और युवाओं को इसके बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी शुरुआत से ही सतर्क रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्तिगत स्तर पर कुछ सरल सावधानियां अपनाकर इस प्रकार की ठगी से बचा जा सकता है। सबसे पहले किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करता है तो उसकी पहचान की पुष्टि करें। किसी भी स्थिति में अपने बैंक खाते, पासवर्ड, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। यदि कोई आपसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है तो पहले अपने परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सलाह लें। याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से पैसे नहीं मांगती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल ठगी का बढ़ता हुआ खतरा केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विश्वास को भी कमजोर करता है। जब लोग बार बार ऐसे अपराधों का शिकार होते हैं तो उनका विश्वास संस्थाओं और तकनीक दोनों से उठने लगता है। यह स्थिति विकास की गति को भी प्रभावित कर सकती है क्योंकि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में लोग हिचकिचाने लगते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस समस्या का समाधान केवल तकनीकी उपायों में नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी में निहित है। सरकार, संस्थाएं और आम नागरिक सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। जागरूकता, सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ही इस लड़ाई के सबसे प्रभावी हथियार हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो डिजिटल ठगी का यह जाल और अधिक व्यापक और खतरनाक हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह समझना जरूरी है कि डिजिटल युग में सुरक्षा केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। जितना हम तकनीक का उपयोग करते हैं, उतना ही हमें उसके जोखिमों को समझना भी आवश्यक है। सावधानी और समझदारी के साथ ही हम इस अदृश्य खतरे से स्वयं को और अपने समाज को सुरक्षित रख सकते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176799/changing-face-of-cyber-crime</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 17:54:45 +0530</pubDate>
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