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                <title>court order - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>court order RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महिलाओ ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर लगाई न्याय की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के नगर थानाक्षेत्र के कोठवा भरथापुर कि रहने वाली उर्मिला पाण्डेय ने अपने परिवार के साथ पुलिसअधीक्षक से मिलकर लगाई न्याय की गुहार।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बता दें नगर थानाक्षेत्र के कोठवा भरथापुर की रहने वाली उर्मिला पाण्डेय, संगीता पाण्डेय,सावित्री पाण्डेय ने पुलिसअधीक्षक यशवीर सिंह से मुलाकात कर बताया की हम लोगो का गांव के रहने वाले अनिल पाण्डेय पुत्र शिव प्रसाद से जमीन के बंटवारे को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा था जिसमे कोर्ट द्वारा हम लोगो के पक्ष में आदेश हुआ है लेकिन अनिल पाण्डेय व उनके पिता हम लोगो की जमीन 20 जून की रात 2</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184081/women-met-the-superintendent-of-police-and-pleaded-for-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0150.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के नगर थानाक्षेत्र के कोठवा भरथापुर कि रहने वाली उर्मिला पाण्डेय ने अपने परिवार के साथ पुलिसअधीक्षक से मिलकर लगाई न्याय की गुहार।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बता दें नगर थानाक्षेत्र के कोठवा भरथापुर की रहने वाली उर्मिला पाण्डेय, संगीता पाण्डेय,सावित्री पाण्डेय ने पुलिसअधीक्षक यशवीर सिंह से मुलाकात कर बताया की हम लोगो का गांव के रहने वाले अनिल पाण्डेय पुत्र शिव प्रसाद से जमीन के बंटवारे को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा था जिसमे कोर्ट द्वारा हम लोगो के पक्ष में आदेश हुआ है लेकिन अनिल पाण्डेय व उनके पिता हम लोगो की जमीन 20 जून की रात 2 बजे 40,50 लोगो के साथ हम लोगो की जमीन कब्जा कर रहे थे जिसकी सूचना स्थानीय थाना पर दिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष नगर अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच कर कुछ लोगो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिए थे और अवैध निर्माण कार्य को रोकना दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी बात को लेकर आयें दिन अनिल पाण्डेय हम लोगों को किसी  फर्जी मुकदमें में फंसाने कि धमकी देते हुए भद्दी भद्दी गाली देते है व जान से मारने कि धमकी देते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वही पुलिसअधीक्षक ने बताया कि जांच कर कार्रवाई की जायेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>14 साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में वांछित गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong>  थाना बहरिया पुलिस ने वर्ष 2012 से न्यायालय में विचाराधीन एक पुराने मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-21, प्रयागराज द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार बुधवार को थाना बहरिया पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना एवं न्यायालय के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मु0नं0-517/12, धारा 306 भारतीय दंड संहिता (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) से संबंधित वांछित अभियुक्त ललित कुमार सरोज पुत्र दुखीराम, निवासी ग्राम सरायसुल्तान, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज, उम्र लगभग 50 वर्ष,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182994/wanted-arrested-for-abetting-suicide-of-14-year-old"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0152.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना बहरिया पुलिस ने वर्ष 2012 से न्यायालय में विचाराधीन एक पुराने मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-21, प्रयागराज द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार बुधवार को थाना बहरिया पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना एवं न्यायालय के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मु0नं0-517/12, धारा 306 भारतीय दंड संहिता (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) से संबंधित वांछित अभियुक्त ललित कुमार सरोज पुत्र दुखीराम, निवासी ग्राम सरायसुल्तान, थाना बहरिया, कमिश्नरेट प्रयागराज, उम्र लगभग 50 वर्ष, को उसके घर के पास से गिरफ्तार कर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उक्त मुकदमा पिछले लगभग 14 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है। अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी अधिपत्र (वारंट) जारी किया गया था, जिसके अनुपालन में थाना बहरिया पुलिस ने योजनाबद्ध ढंग से कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक चन्दन कुमार यादव एवं आरक्षी नीरज सिंह, थाना बहरिया शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182994/wanted-arrested-for-abetting-suicide-of-14-year-old</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मदरसों की ATS जांच पर रोक से इनकार, टीचर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182665/big-decision-of-allahabad-high-court-refusal-to-ban-ats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/ald.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका को ही खारिज कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>अदालत के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में मदरसों को लेकर ATS की ओर से चल रही जांच पर फिलहाल कोई न्यायिक रोक नहीं रहेगी और जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रख सकेगी।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:41:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : बहुचर्चित संदीप हत्याकांड: फरार तीन आरोपियों के घर पुलिस ने चस्पा किया नोटिस, ढोल बजाकर कराई मुनादी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>लोटन कोतवाली क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में लगभग एक माह पहले हुए चर्चित संदीप यादव हत्याकांड में पुलिस ने फरार चल रहे तीन आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। न्यायालय के आदेश पर शनिवार को लोटन कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के घरों पर धारा 84 बीएनएसएस (BNSS) के तहत नोटिस चस्पा किया और गांव में डुग्गी-मुनादी कराकर उन्हें जल्द हाजिर होने की चेतावनी दी।</div>
<div>  </div>
<h3><strong>दबंगों ने की थी संदीप की बेरहमी से हत्या</strong></h3>
<div>  </div>
<div>कोल्हुआ गांव के रहने वाले संदीप यादव (पुत्र शिवमूरत) की दबंगों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182227/siddharthnagar-famous-sandeep-murder-case-police-pasted-notice-at-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782660070553.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>लोटन कोतवाली क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में लगभग एक माह पहले हुए चर्चित संदीप यादव हत्याकांड में पुलिस ने फरार चल रहे तीन आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। न्यायालय के आदेश पर शनिवार को लोटन कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के घरों पर धारा 84 बीएनएसएस (BNSS) के तहत नोटिस चस्पा किया और गांव में डुग्गी-मुनादी कराकर उन्हें जल्द हाजिर होने की चेतावनी दी।</div>
<div> </div>
<h3><strong>दबंगों ने की थी संदीप की बेरहमी से हत्या</strong></h3>
<div> </div>
<div>कोल्हुआ गांव के रहने वाले संदीप यादव (पुत्र शिवमूरत) की दबंगों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और लगातार फरार चल रहे हैं।</div>
<div> </div>
<h4><strong>सीजेएम कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई</strong></h4>
<div> </div>
<div>लोटन कोतवाली प्रभारी हरिओम कुशवाहा ने बताया कि इस मामले में मुख्य रूप से तीन आरोपी फरार हैं, जिनके राम अवध पुत्र सुखलाल निवासी गदहमरवा, रामजीत पुत्र काशी निवासी कोल्हुआ ,भरत पुत्र प्रहलाद  निवासी कोल्हुआ छोटकाडीह इन तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 127(2), 115(2), 352, 351(3) और 105 के तहत मामला दर्ज है।</div>
<div> </div>
<div>आरोपियों के लगातार फरार रहने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने उन्हें अदालत में हाजिर करने का कड़ा निर्देश दिया था। जब कोई आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए जानबूझकर छिपा रहता है, तो अदालत उसके खिलाफ उद्घोषणा  जारी करती है। इसके तहत आरोपी के घर और गांव के सार्वजनिक स्थान पर नोटिस चिपकाकर एक निश्चित समय के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया जाता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: ।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने से पहले सरकार की मंजूरी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले 24 वर्षीय पंकज वैष्णव को 19 दिसंबर 2015 को स्कूटर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए इंदौर के एमआईजी थाने लाया गया। उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद </span>CrPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 176 के तहत स्वतंत्र जांच कराई गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह मामला आपराधिक मानव वध का प्रतीत होता है।इसके बाद दो आरक्षकों और एक थाना प्रभारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध निरुद्ध करने और झूठे साक्ष्य देने सहित विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दायर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 197 के संरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आरोपित कृत्य और सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के बीच स्पष्ट और उचित संबंध हो। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पुलिसकर्मी किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और बल प्रयोग करते हुए अपनी सीमा से आगे बढ़ गए हों। यहां आरोपित बल प्रयोग उस समय किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मृतक पुलिस हिरासत में था और थाने के नियंत्रण में था। ऐसी स्थिति में बल प्रयोग या शारीरिक हमला करने का कोई औचित्य नहीं था।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हिंसक भीड़ को तितर-बितर करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कहा गया कि हिरासत में हिंसा और मौत सभ्य समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से हैं तथा यह व्यक्ति के मूल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आरक्षकों की पुनरीक्षण याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा जैसे मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस ने साइबर ठगी के शिकार युवक को दिलाए 65 हजार रुपये वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
<div>  </div>
<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181507/maharajganj-terai-police-returned-65-thousand-rupees-to-a-youth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0621.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
<div> </div>
<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर हेल्पडेस्क थाना महराजगंज तराई सक्रिय हो गई। उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव और आरक्षी धीरज तिवारी ने त्वरित तकनीकी जांच करते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया। पुलिस की पहल पर ठगी गई धनराशि को आरोपी के खाते में तत्काल होल्ड कराया गया।</div>
<div>इसके बाद न्यायालय से रिलीजिंग आदेश प्राप्त कर बैंक के नोडल अधिकारी को भेजा गया। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 65 हजार रुपये की पूरी धनराशि सफलतापूर्वक पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।</div>
<div>धनराशि वापस मिलने पर फिरोज खान ने खुशी जताते हुए थाना महराजगंज तराई पुलिस का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण उन्हें उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकी।</div>
<div>इस सराहनीय कार्रवाई में उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव, आरक्षी धीरज तिवारी, आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा तथा महिला आरक्षी पूजा सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मधु किश्वर ने पीएम पर भ्रामक वीडियो किया था साझा, हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करने के मामले में फंसी प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अमन चौधरी की अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और जांच के हित में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता से इन्कार नहीं किया जा सकता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> मधु किश्वर ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। उनके खिलाफ चंडीगढ़</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180383/madhu-kishwar-had-shared-a-misleading-video-on-pm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/5660-1780059936803_m.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करने के मामले में फंसी प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अमन चौधरी की अदालत ने माना कि मामले की परिस्थितियां अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और जांच के हित में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता से इन्कार नहीं किया जा सकता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> मधु किश्वर ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। उनके खिलाफ चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाना में मामला दर्ज है। याचिका में मधु किश्वर की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने केवल 14 सेकंड का एक वीडियो री-ट्वीट किया था। उनका कहना था कि इसमें कोई दुर्भावना नहीं थी और जालसाजी अथवा वीडियो तैयार करने से उनका कोई संबंध नहीं है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि यह केवल साधारण री-ट्वीट का मामला नहीं है। जांच में सामने आया कि संबंधित वीडियो पहले अन्य सोशल मीडिया मंचों पर डाला गया था लेकिन मधु किश्वर ने उसे डाउनलोड कर अपने एक्स अकाउंट से दोबारा पोस्ट किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रशासन ने अदालत को बताया कि उनके लाखों फॉलोअर्स होने के कारण वीडियो को व्यापक प्रसार मिला और उसे करीब 1.74 लाख व्यूज प्राप्त हुए। इससे भ्रामक सूचना फैलाने और एक सांविधानिक पद की छवि को नुकसान पहुंचाने में मदद मिली। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ है कि जांच एजेंसी की ओर से भेजे गए नोटिसों के बावजूद याचिकाकर्ता जांच में शामिल नहीं हुईं जबकि अन्य सह-आरोपी जांच में शामिल हो चुके हैं। कोर्ट ने इसे उनके आचरण का महत्वपूर्ण पहलू माना।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि रचनात्मक आलोचना और सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति अथवा सांविधानिक पद के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी के बीच स्पष्ट अंतर है। अदालत के अनुसार, बड़े सोशल मीडिया प्रभाव वाले व्यक्तियों की पोस्ट का व्यापक असर पड़ सकता है और ऐसी सामग्री सामाजिक सौहार्द तथा सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इन सभी तथ्यों, जांच की आवश्यकता और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में तय सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मधु किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।l</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:00:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल एक गाय की हत्या शामिल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके कारण न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई खलल पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त चर्चा के आलोक में यह अकाट्य निष्कर्ष निकलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश न तो कानून की दृष्टि से और न ही तथ्यों के आधार पर कायम रखा जा सकता है। अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश इस न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने योग्य है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत जारी करने वाले प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शामली) ने मूल रूप से एनएसए की धारा 3(2) के तहत विवादित हिरासत आदेश जारी किया। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1955</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 3</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5</span>A <span lang="hi" xml:lang="hi">और 8 के तहत दर्ज </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर जारी किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत के कारणों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को 23 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोहत्या कर रहे हैं। घर के भीतर तलाशी लेने पर पुलिस को एक कटा हुआ सिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाल और मांस बरामद हुआ। पशु चिकित्सक द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद मांस की पहचान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बीफ</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">गोमांस) के रूप में हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शेष सामग्री की पहचान गाय की संतान (बछड़े/बछिया) के अवशेषों के रूप में की गई। जहां आरोपी हासिम को अगले ही दिन (24 अप्रैल) गिरफ्तार कर लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आरोपी समीर को 27 जून को ही गिरफ्तार किया जा सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे भेजी गई रिपोर्ट मिलने पर ज़िला मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को हिरासत के आदेश जारी किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को 12 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए। राज्य सरकार ने आखिरकार 19 अगस्त को इस आदेश की पुष्टि की। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम बघेल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का कथित कृत्य उनके घर की सीमाओं के बाहर नहीं हुआ। इसलिए यह निजी तौर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों की नज़र से दूर किया गया। यह भी कहा गया कि प्रतिवादियों द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में ऐसा कोई दावा नहीं था कि याचिकाकर्ता के कृत्य के कारण कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त के परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई बाधा आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द में कोई खलल पड़ा।" इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि हिरासत का आदेश न तो कानून की नज़र में और न ही तथ्यों के आधार पर सही ठहराया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने हिरासत के आदेश को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पुष्टि आदेश को भी रद्द कर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की असंवेदनशील काउंसलिंग के लिए मेडिकल बोर्ड को फटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173554/allahabad-high-court-reprimands-the-medical-board-for-insensitive-counseling"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा, 'आपका ख्याल रखा जाएगा'। इसके अलावा कुछ नहीं कहा; और अब उपर्युक्त रिपोर्ट जमा कर दी गई, जो मेडिकल बोर्ड की असंवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने पहले सीएमओ, हाथरस को 'युद्ध स्तर' पर एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। इस बोर्ड को याचिकाकर्ता को गर्भपात की स्थिति में उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणामों के बारे में परामर्श देना था। साथ ही यह भी समझाना था कि यदि वह बच्चे को जन्म देने का विकल्प चुनती है तो उस पर न तो चिकित्सा खर्च की कोई ज़िम्मेदारी होगी और न ही बच्चे की, जिसे गोद दे दिया जाएगा; और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी राज्य की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने गौर किया कि विशिष्ट निर्देशों के बावजूद, "मेडिकल बोर्ड की जो रिपोर्ट हमारे सामने रखी गई, उसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, HIV, HBs, Ag, और HCV से संबंधित जांचों के अलावा; और भ्रूण की गर्भावस्था की अवधि से संबंधित जांचों के अलावा, कहीं भी यह संकेत नहीं मिलता कि याचिकाकर्ता ने गर्भपात करवाने या गर्भावस्था जारी रखने की अपनी इच्छा के बारे में क्या कहा था।"</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि पहले याचिकाकर्ता के वकील ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि हाईकोर्ट द्वारा कोई सदस्य नामित नहीं किया जाता है तो पैनल असंवेदनशील हो सकता है, कोर्ट ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने वास्तव में असंवेदनशील तरीके से काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने जे एन  कॉलेज अस्पताल, अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय , अलीगढ़ के प्रिंसिपल को एक आवश्यक पक्ष के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। इसने DALSA, हाथरस के सचिव को तत्काल एक बैठक आयोजित करने और पहले से गठित मेडिकल बोर्ड में J.N. कॉलेज, अलीगढ़ के प्रिंसिपल के परामर्श से मनोवैज्ञानिक को शामिल करने का निर्देश दिया</p>
<p style="text-align:justify;">जहाँ गर्भपात से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाना हो। या (ii) क्या लीगल सर्विसेज़ कमेटी के किसी पैनल वकील को नियुक्त करना संभव है, जो उपर्युक्त कमेटी के कार्यों का समन्वय करे और उसकी अध्यक्षता करे। साथ ही सीधे संबंधित अदालत को रिपोर्ट करे? यह उन मामलों में किया जा सकता है, जहां गर्भपात के लिए याचिकाएं विचाराधीन हों और मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगने का निर्देश जारी किया गया हो।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 21:09:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी-एसटी एक्ट का झूठा मुकदमा कराने वाली महिला को तीन साल की कैद</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />किसान यूनियन की आपसी गुटबाजी में विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ममता को एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि कानून का भय और सम्मान दोनों बने रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने अपने निर्णय में कहा कि भारतीय किसान यूनियन जैसे गैर-राजनीतिक संगठनों में अब कई गुट बन चुके हैं। इन गुटों के बीच की प्रतिस्पर्धा और रंजिश के कारण ग्रामीण समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है। लोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158612/three-years-imprisonment-to-woman-who-filed-false-case-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/sc-st-case.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />किसान यूनियन की आपसी गुटबाजी में विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ममता को एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि कानून का भय और सम्मान दोनों बने रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने अपने निर्णय में कहा कि भारतीय किसान यूनियन जैसे गैर-राजनीतिक संगठनों में अब कई गुट बन चुके हैं। इन गुटों के बीच की प्रतिस्पर्धा और रंजिश के कारण ग्रामीण समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है। लोग एक-दूसरे से दुश्मनी निभाने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज करा रहे हैं, जिससे न केवल निर्दोष लोगों को परेशानी होती है बल्कि असली पीड़ितों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>2019 में दर्ज हुआ था मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पत्रावली के अनुसार, 3 अगस्त 2019 को ममता ने लखनऊ के माल थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि जब वह अपने मौसा से मिलने के बाद घर लौट रही थी, तभी रास्ते में विनोद, केशन और अर्जुन नाम के व्यक्तियों ने उसके साथ छेड़खानी की और उसे जबरन बाग की ओर खींचने का प्रयास किया। ममता ने यह भी कहा था कि आरोपियों ने उसके गले की चेन छीन ली और तभी वहां एक गाड़ी आने की आवाज सुनकर तीनों आरोपी फरार हो गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी मलिहाबाद ने की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय न तो ममता और न ही आरोपी उस स्थान पर मौजूद थे। पुलिस ने पाया कि ममता ने किसान यूनियन की आंतरिक रंजिश के चलते विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में कहा गया कि ममता का उद्देश्य सामाजिक और कानूनी रूप से विरोधी गुट को बदनाम करना था। रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत से कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट की सख्त टिप्पणी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">निर्णय सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट का उद्देश्य समाज के वंचित और कमजोर तबके को सुरक्षा और न्याय प्रदान करना था। यह एक्ट अत्याचारों से पीड़ित लोगों को राहत और पुनर्वास देने के लिए बनाया गया है। लेकिन इसका झूठे मुकदमों में इस्तेमाल न केवल कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया को भी कमजोर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायाधीश ने कहा कि <em>“अदालत मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। जब कानून का दुरुपयोग होने लगे, तो उसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी बन जाती है।”</em></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कानून के दुरुपयोग पर चिंता</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में एससी-एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट और दहेज उत्पीड़न जैसे कानूनों के झूठे मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इस प्रवृत्ति से न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर ही यह संदेश दिया जा सकता है कि कोई भी व्यक्ति कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>अंततः तीन साल की सजा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सभी तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने ममता को दोषी करार दिया और उसे <strong>तीन साल की सश्रम कारावास की सजा</strong> सुनाई। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में विवेचना अधिकारी को और अधिक सतर्क रहना चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में न फंसाया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158612/three-years-imprisonment-to-woman-who-filed-false-case-under</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 17:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायालय के आदेश की अवहेलना, पुलिस की मिलीभगत से दबंगों ने किया भूमि पर अवैध कब्जा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर- </strong>मड़ियाहूं, न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें दबंगों को स्थानीय पुलिस का खुला संरक्षण मिलने के आरोप लगे हैं। मामला मड़ियाहूं तहसील के दिलवरपुर गांव का है, जहां न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश होने के बावजूद दबंग न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी कर जबरन कब्जा कर रहे हैं।</div>
<div>  </div>
<div><strong>न्यायालय का आदेश दरकिनार, दबंगों की मनमानी जारी</strong></div>
<div>प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि को लेकर न्यायालय ने आदेश दिया था कि राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष अपने-अपने हिस्से पर काबिज होंगे। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष न्यायालय के आदेशों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149918/the-court-order-disregarded-the-police-in-connivance-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/unnamed-(7)3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर- </strong>मड़ियाहूं, न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें दबंगों को स्थानीय पुलिस का खुला संरक्षण मिलने के आरोप लगे हैं। मामला मड़ियाहूं तहसील के दिलवरपुर गांव का है, जहां न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश होने के बावजूद दबंग न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी कर जबरन कब्जा कर रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>न्यायालय का आदेश दरकिनार, दबंगों की मनमानी जारी</strong></div>
<div>प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि को लेकर न्यायालय ने आदेश दिया था कि राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष अपने-अपने हिस्से पर काबिज होंगे। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए भूमि पर जबरन कब्जा करने में जुटा हुआ है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पुलिस पर मिलीभगत का आरोप, कोतवाल ने दिया विवादित बयान</strong></div>
<div>पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार मड़ियाहूं कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित जब न्याय की गुहार लगाने कोतवाली पहुंचे, तो वहां मौजूद थाना प्रभारी ने दबंगों को खुली छूट देते हुए कहा, "जाओ, अपना काम करवाओ", जिससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस भी इस अवैध कब्जे में विपक्षी पक्ष के साथ मिली हुई है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर</strong></div>
<div>पीड़ित परिवार लगातार पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। प्रशासन की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत के चलते पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार</strong></div>
<div>पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक (SP) एवं उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि न्यायालय के आदेशों का पालन हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो पीड़ित पक्ष मुख्यमंत्री पोर्टल, मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त से शिकायत करने की तैयारी में है।</div>
<div> </div>
<div><strong>थाना प्रभारी का बयान</strong></div>
<div>इस सम्बन्ध मे थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह का कहना है की लगाए गए आरोप झूठे है 14 साल से मुकदमा चल रहा है पीड़ित पक्ष चाहे तो आज ही नापी करवा ले मै पुलिस बल देने को तैयार हूँ</div>
<div> </div>
<div><strong>क्या प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?</strong></div>
<div>इस पूरे प्रकरण से यह सवाल उठता है कि क्या न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर पुलिस और दबंगों की मिलीभगत यूं ही चलती रहेगी, या फिर जिला प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई कर पीड़ित को न्याय दिलाएगा? अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर पीड़ित परिवार को न्याय के लिए संघर्ष जारी रखना पड़ेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149918/the-court-order-disregarded-the-police-in-connivance-with-the</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 12:16:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>कोर्ट के आदेश को नहीं मानता दबंग श्री कृष्ण समोसे वाला </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>करोड़ों रुपए की तालाब के नाम दर्ज जमीन पर दबंगों ने कब्जा करके उसे पर अपना मकान व दुकान खड़ी कर दी जिसके चलते तालाब का वजूद ही खत्म होता जा रहा है जबकि तालाब से कस्बा के बड़े हिस्से का पानी इसी तालाब में सुरक्षित होता आ रहा है इसके एक भाग के पट जाने के चलते तालाब का आकार स्वरूप दोनों ही काफी संकुचित हो गए हैं उक्त मामले की शासन प्रशासन से शिकायतों के बाद अवैध कब्जे धारक के विरुद्ध 67 (1) की कार्रवाई की गई और उक्त बाद में राजकुमार और श्री कृष्ण पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149237/dabangg-shri-krishna-does-not-accept-the-order-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/photo-02.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>करोड़ों रुपए की तालाब के नाम दर्ज जमीन पर दबंगों ने कब्जा करके उसे पर अपना मकान व दुकान खड़ी कर दी जिसके चलते तालाब का वजूद ही खत्म होता जा रहा है जबकि तालाब से कस्बा के बड़े हिस्से का पानी इसी तालाब में सुरक्षित होता आ रहा है इसके एक भाग के पट जाने के चलते तालाब का आकार स्वरूप दोनों ही काफी संकुचित हो गए हैं उक्त मामले की शासन प्रशासन से शिकायतों के बाद अवैध कब्जे धारक के विरुद्ध 67 (1) की कार्रवाई की गई और उक्त बाद में राजकुमार और श्री कृष्ण पर अर्थ दंड लगाते हुए बेदखली का आदेश भी पारित किया गया। </div>
<div> </div>
<div>जिसके विरुद्ध अवैध कब्जाधारको ने डीएम खीरी के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई जो भी खारिज हो गई उक्त मामले की जानकारी सभी सक्षम अफसर के होने के बाद भी जिम्मेदार कोई रुचि नहीं ले रहे हैं और ना ही कब्जा हटवाया ही जा रहा है हर बार मामला न्यायालय में विचाराधीन बताकर अवैध कब्जेधाराको बचाने की मंशा से लिखकर रिपोर्ट लगाई जा रही है मामला न्यायालय में विचाराधीन है न्यायालय जब कोई आदेश पारित करें तब पिछला आदेश प्रभावी होता है और तब तक पूर्व का आदेश ही प्रभावित रहता है। </div>
<div> </div>
<div>मामला चूंकि नगर पंचायत से जुड़ा है और नगर पंचायत के साथ अवैध कब्जा धारक अपना निजी संबंध बताते हैं ऐसे में कैसे कार्यवाही हो तालाबों के मामले सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि तालाब के अवैध कब्जा से मुक्त कराकर उसकी उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए लेकिन जिम्मेदार कुछ भी करने को तैयार नहीं है।</div>
<div> </div>
<div><strong>फर्जी और भ्रामक आख्या लगा शासन को किया जाता रहा गुमराह</strong></div>
<div>तालाब गाटा संख्या 562/2.2580 पर अवैध कब्ज़ा हटाए जाने को लेकर अब तक दी गई दर्जनों आईजीआरएस एवं पोर्टल पर शिकायततो में विभागीय जिम्मेदारों ने फर्जी झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण करके शासन को गुमराह किया जाता रहा शिकायत संख्या 800 15319000 522 यह दिनांक 28/ 5/19 हुआ दिनांक 23/ 5 /19 पर लगाई गई फर्जी भ्रामक आख्या शिकायत संख्या 9211 530004731 में भी फर्जी आख्या  लगाई गई तहसील प्रशासन द्वारा आज तक कब्जा नहीं हटवाया गया।</div>
<div> </div>
<div>शिकायत संख्या 60000170012653 शिकायत संख्या 92215300064976 के निस्तारण में पूरी तरह से भ्रामक जांच आख्या  लगाई गई है लगाई गई आख्या में उल्लेख किया जाता है कि मामले की जांच  तहसीलदार द्वारा कराई गई जिसमें ग्राम ढखवा के तालाब की गाटा संख्य 562/ 2.2580 बतौर तालाब दर्ज कागजात है उक्त तालाब के जुज भाग पर पक्का निर्माण पाए जाने बेदखली की कार्यवाही की गई जिसे न्यायालय तहसीलदार द्वारा दिनांक 15/7/ 2021 को बेदखली का आदेश पारित किया गया। </div>
<div> </div>
<div>जिसके परिपेक्ष में 29/ 12/ 2022 को विपक्षीगणो का कब्जा विवादित भूमि से हटवा दिया गया एसडीएम सदर का उक्त कथन की कब्जा हटवा दिया गया है सरासर गलत एवं झूठ है उक्त भूभाग पर आज भी मकान और दुकान बनी खड़ी है जो एसडीएम सदर की रिपोर्ट को फर्जी भ्रामक एवं झूठा साबित करने को काफी है इस तरह से भ्रामक एवं फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत कर शासन को गुमराह किया जा रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 13:27:13 +0530</pubDate>
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