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                <title>court order - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>court order RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल एक गाय की हत्या शामिल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके कारण न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई खलल पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त चर्चा के आलोक में यह अकाट्य निष्कर्ष निकलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश न तो कानून की दृष्टि से और न ही तथ्यों के आधार पर कायम रखा जा सकता है। अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश इस न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने योग्य है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत जारी करने वाले प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शामली) ने मूल रूप से एनएसए की धारा 3(2) के तहत विवादित हिरासत आदेश जारी किया। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1955</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 3</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5</span>A <span lang="hi" xml:lang="hi">और 8 के तहत दर्ज </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर जारी किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत के कारणों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को 23 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोहत्या कर रहे हैं। घर के भीतर तलाशी लेने पर पुलिस को एक कटा हुआ सिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाल और मांस बरामद हुआ। पशु चिकित्सक द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद मांस की पहचान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बीफ</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">गोमांस) के रूप में हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शेष सामग्री की पहचान गाय की संतान (बछड़े/बछिया) के अवशेषों के रूप में की गई। जहां आरोपी हासिम को अगले ही दिन (24 अप्रैल) गिरफ्तार कर लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आरोपी समीर को 27 जून को ही गिरफ्तार किया जा सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे भेजी गई रिपोर्ट मिलने पर ज़िला मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को हिरासत के आदेश जारी किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को 12 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए। राज्य सरकार ने आखिरकार 19 अगस्त को इस आदेश की पुष्टि की। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम बघेल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का कथित कृत्य उनके घर की सीमाओं के बाहर नहीं हुआ। इसलिए यह निजी तौर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों की नज़र से दूर किया गया। यह भी कहा गया कि प्रतिवादियों द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में ऐसा कोई दावा नहीं था कि याचिकाकर्ता के कृत्य के कारण कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त के परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई बाधा आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द में कोई खलल पड़ा।" इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि हिरासत का आदेश न तो कानून की नज़र में और न ही तथ्यों के आधार पर सही ठहराया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने हिरासत के आदेश को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पुष्टि आदेश को भी रद्द कर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की असंवेदनशील काउंसलिंग के लिए मेडिकल बोर्ड को फटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173554/allahabad-high-court-reprimands-the-medical-board-for-insensitive-counseling"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा, 'आपका ख्याल रखा जाएगा'। इसके अलावा कुछ नहीं कहा; और अब उपर्युक्त रिपोर्ट जमा कर दी गई, जो मेडिकल बोर्ड की असंवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने पहले सीएमओ, हाथरस को 'युद्ध स्तर' पर एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। इस बोर्ड को याचिकाकर्ता को गर्भपात की स्थिति में उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणामों के बारे में परामर्श देना था। साथ ही यह भी समझाना था कि यदि वह बच्चे को जन्म देने का विकल्प चुनती है तो उस पर न तो चिकित्सा खर्च की कोई ज़िम्मेदारी होगी और न ही बच्चे की, जिसे गोद दे दिया जाएगा; और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी राज्य की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने गौर किया कि विशिष्ट निर्देशों के बावजूद, "मेडिकल बोर्ड की जो रिपोर्ट हमारे सामने रखी गई, उसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, HIV, HBs, Ag, और HCV से संबंधित जांचों के अलावा; और भ्रूण की गर्भावस्था की अवधि से संबंधित जांचों के अलावा, कहीं भी यह संकेत नहीं मिलता कि याचिकाकर्ता ने गर्भपात करवाने या गर्भावस्था जारी रखने की अपनी इच्छा के बारे में क्या कहा था।"</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि पहले याचिकाकर्ता के वकील ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि हाईकोर्ट द्वारा कोई सदस्य नामित नहीं किया जाता है तो पैनल असंवेदनशील हो सकता है, कोर्ट ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने वास्तव में असंवेदनशील तरीके से काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने जे एन  कॉलेज अस्पताल, अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय , अलीगढ़ के प्रिंसिपल को एक आवश्यक पक्ष के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। इसने DALSA, हाथरस के सचिव को तत्काल एक बैठक आयोजित करने और पहले से गठित मेडिकल बोर्ड में J.N. कॉलेज, अलीगढ़ के प्रिंसिपल के परामर्श से मनोवैज्ञानिक को शामिल करने का निर्देश दिया</p>
<p style="text-align:justify;">जहाँ गर्भपात से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाना हो। या (ii) क्या लीगल सर्विसेज़ कमेटी के किसी पैनल वकील को नियुक्त करना संभव है, जो उपर्युक्त कमेटी के कार्यों का समन्वय करे और उसकी अध्यक्षता करे। साथ ही सीधे संबंधित अदालत को रिपोर्ट करे? यह उन मामलों में किया जा सकता है, जहां गर्भपात के लिए याचिकाएं विचाराधीन हों और मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगने का निर्देश जारी किया गया हो।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 21:09:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी-एसटी एक्ट का झूठा मुकदमा कराने वाली महिला को तीन साल की कैद</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />किसान यूनियन की आपसी गुटबाजी में विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ममता को एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि कानून का भय और सम्मान दोनों बने रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने अपने निर्णय में कहा कि भारतीय किसान यूनियन जैसे गैर-राजनीतिक संगठनों में अब कई गुट बन चुके हैं। इन गुटों के बीच की प्रतिस्पर्धा और रंजिश के कारण ग्रामीण समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है। लोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158612/three-years-imprisonment-to-woman-who-filed-false-case-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/sc-st-case.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />किसान यूनियन की आपसी गुटबाजी में विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ममता को एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि कानून का भय और सम्मान दोनों बने रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने अपने निर्णय में कहा कि भारतीय किसान यूनियन जैसे गैर-राजनीतिक संगठनों में अब कई गुट बन चुके हैं। इन गुटों के बीच की प्रतिस्पर्धा और रंजिश के कारण ग्रामीण समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है। लोग एक-दूसरे से दुश्मनी निभाने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज करा रहे हैं, जिससे न केवल निर्दोष लोगों को परेशानी होती है बल्कि असली पीड़ितों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>2019 में दर्ज हुआ था मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पत्रावली के अनुसार, 3 अगस्त 2019 को ममता ने लखनऊ के माल थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि जब वह अपने मौसा से मिलने के बाद घर लौट रही थी, तभी रास्ते में विनोद, केशन और अर्जुन नाम के व्यक्तियों ने उसके साथ छेड़खानी की और उसे जबरन बाग की ओर खींचने का प्रयास किया। ममता ने यह भी कहा था कि आरोपियों ने उसके गले की चेन छीन ली और तभी वहां एक गाड़ी आने की आवाज सुनकर तीनों आरोपी फरार हो गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी मलिहाबाद ने की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय न तो ममता और न ही आरोपी उस स्थान पर मौजूद थे। पुलिस ने पाया कि ममता ने किसान यूनियन की आंतरिक रंजिश के चलते विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में कहा गया कि ममता का उद्देश्य सामाजिक और कानूनी रूप से विरोधी गुट को बदनाम करना था। रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत से कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट की सख्त टिप्पणी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">निर्णय सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट का उद्देश्य समाज के वंचित और कमजोर तबके को सुरक्षा और न्याय प्रदान करना था। यह एक्ट अत्याचारों से पीड़ित लोगों को राहत और पुनर्वास देने के लिए बनाया गया है। लेकिन इसका झूठे मुकदमों में इस्तेमाल न केवल कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया को भी कमजोर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायाधीश ने कहा कि <em>“अदालत मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। जब कानून का दुरुपयोग होने लगे, तो उसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी बन जाती है।”</em></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कानून के दुरुपयोग पर चिंता</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में एससी-एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट और दहेज उत्पीड़न जैसे कानूनों के झूठे मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इस प्रवृत्ति से न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर ही यह संदेश दिया जा सकता है कि कोई भी व्यक्ति कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>अंततः तीन साल की सजा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सभी तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने ममता को दोषी करार दिया और उसे <strong>तीन साल की सश्रम कारावास की सजा</strong> सुनाई। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में विवेचना अधिकारी को और अधिक सतर्क रहना चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में न फंसाया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 17:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायालय के आदेश की अवहेलना, पुलिस की मिलीभगत से दबंगों ने किया भूमि पर अवैध कब्जा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर- </strong>मड़ियाहूं, न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें दबंगों को स्थानीय पुलिस का खुला संरक्षण मिलने के आरोप लगे हैं। मामला मड़ियाहूं तहसील के दिलवरपुर गांव का है, जहां न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश होने के बावजूद दबंग न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी कर जबरन कब्जा कर रहे हैं।</div>
<div>  </div>
<div><strong>न्यायालय का आदेश दरकिनार, दबंगों की मनमानी जारी</strong></div>
<div>प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि को लेकर न्यायालय ने आदेश दिया था कि राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष अपने-अपने हिस्से पर काबिज होंगे। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष न्यायालय के आदेशों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149918/the-court-order-disregarded-the-police-in-connivance-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/unnamed-(7)3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर- </strong>मड़ियाहूं, न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें दबंगों को स्थानीय पुलिस का खुला संरक्षण मिलने के आरोप लगे हैं। मामला मड़ियाहूं तहसील के दिलवरपुर गांव का है, जहां न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश होने के बावजूद दबंग न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी कर जबरन कब्जा कर रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>न्यायालय का आदेश दरकिनार, दबंगों की मनमानी जारी</strong></div>
<div>प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि को लेकर न्यायालय ने आदेश दिया था कि राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष अपने-अपने हिस्से पर काबिज होंगे। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए भूमि पर जबरन कब्जा करने में जुटा हुआ है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पुलिस पर मिलीभगत का आरोप, कोतवाल ने दिया विवादित बयान</strong></div>
<div>पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार मड़ियाहूं कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित जब न्याय की गुहार लगाने कोतवाली पहुंचे, तो वहां मौजूद थाना प्रभारी ने दबंगों को खुली छूट देते हुए कहा, "जाओ, अपना काम करवाओ", जिससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस भी इस अवैध कब्जे में विपक्षी पक्ष के साथ मिली हुई है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर</strong></div>
<div>पीड़ित परिवार लगातार पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। प्रशासन की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत के चलते पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार</strong></div>
<div>पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक (SP) एवं उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि न्यायालय के आदेशों का पालन हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो पीड़ित पक्ष मुख्यमंत्री पोर्टल, मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त से शिकायत करने की तैयारी में है।</div>
<div> </div>
<div><strong>थाना प्रभारी का बयान</strong></div>
<div>इस सम्बन्ध मे थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह का कहना है की लगाए गए आरोप झूठे है 14 साल से मुकदमा चल रहा है पीड़ित पक्ष चाहे तो आज ही नापी करवा ले मै पुलिस बल देने को तैयार हूँ</div>
<div> </div>
<div><strong>क्या प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?</strong></div>
<div>इस पूरे प्रकरण से यह सवाल उठता है कि क्या न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर पुलिस और दबंगों की मिलीभगत यूं ही चलती रहेगी, या फिर जिला प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई कर पीड़ित को न्याय दिलाएगा? अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर पीड़ित परिवार को न्याय के लिए संघर्ष जारी रखना पड़ेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 12:16:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के आदेश को नहीं मानता दबंग श्री कृष्ण समोसे वाला </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>करोड़ों रुपए की तालाब के नाम दर्ज जमीन पर दबंगों ने कब्जा करके उसे पर अपना मकान व दुकान खड़ी कर दी जिसके चलते तालाब का वजूद ही खत्म होता जा रहा है जबकि तालाब से कस्बा के बड़े हिस्से का पानी इसी तालाब में सुरक्षित होता आ रहा है इसके एक भाग के पट जाने के चलते तालाब का आकार स्वरूप दोनों ही काफी संकुचित हो गए हैं उक्त मामले की शासन प्रशासन से शिकायतों के बाद अवैध कब्जे धारक के विरुद्ध 67 (1) की कार्रवाई की गई और उक्त बाद में राजकुमार और श्री कृष्ण पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149237/dabangg-shri-krishna-does-not-accept-the-order-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/photo-02.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखीमपुर खीरी- </strong>करोड़ों रुपए की तालाब के नाम दर्ज जमीन पर दबंगों ने कब्जा करके उसे पर अपना मकान व दुकान खड़ी कर दी जिसके चलते तालाब का वजूद ही खत्म होता जा रहा है जबकि तालाब से कस्बा के बड़े हिस्से का पानी इसी तालाब में सुरक्षित होता आ रहा है इसके एक भाग के पट जाने के चलते तालाब का आकार स्वरूप दोनों ही काफी संकुचित हो गए हैं उक्त मामले की शासन प्रशासन से शिकायतों के बाद अवैध कब्जे धारक के विरुद्ध 67 (1) की कार्रवाई की गई और उक्त बाद में राजकुमार और श्री कृष्ण पर अर्थ दंड लगाते हुए बेदखली का आदेश भी पारित किया गया। </div>
<div> </div>
<div>जिसके विरुद्ध अवैध कब्जाधारको ने डीएम खीरी के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई जो भी खारिज हो गई उक्त मामले की जानकारी सभी सक्षम अफसर के होने के बाद भी जिम्मेदार कोई रुचि नहीं ले रहे हैं और ना ही कब्जा हटवाया ही जा रहा है हर बार मामला न्यायालय में विचाराधीन बताकर अवैध कब्जेधाराको बचाने की मंशा से लिखकर रिपोर्ट लगाई जा रही है मामला न्यायालय में विचाराधीन है न्यायालय जब कोई आदेश पारित करें तब पिछला आदेश प्रभावी होता है और तब तक पूर्व का आदेश ही प्रभावित रहता है। </div>
<div> </div>
<div>मामला चूंकि नगर पंचायत से जुड़ा है और नगर पंचायत के साथ अवैध कब्जा धारक अपना निजी संबंध बताते हैं ऐसे में कैसे कार्यवाही हो तालाबों के मामले सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि तालाब के अवैध कब्जा से मुक्त कराकर उसकी उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए लेकिन जिम्मेदार कुछ भी करने को तैयार नहीं है।</div>
<div> </div>
<div><strong>फर्जी और भ्रामक आख्या लगा शासन को किया जाता रहा गुमराह</strong></div>
<div>तालाब गाटा संख्या 562/2.2580 पर अवैध कब्ज़ा हटाए जाने को लेकर अब तक दी गई दर्जनों आईजीआरएस एवं पोर्टल पर शिकायततो में विभागीय जिम्मेदारों ने फर्जी झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण करके शासन को गुमराह किया जाता रहा शिकायत संख्या 800 15319000 522 यह दिनांक 28/ 5/19 हुआ दिनांक 23/ 5 /19 पर लगाई गई फर्जी भ्रामक आख्या शिकायत संख्या 9211 530004731 में भी फर्जी आख्या  लगाई गई तहसील प्रशासन द्वारा आज तक कब्जा नहीं हटवाया गया।</div>
<div> </div>
<div>शिकायत संख्या 60000170012653 शिकायत संख्या 92215300064976 के निस्तारण में पूरी तरह से भ्रामक जांच आख्या  लगाई गई है लगाई गई आख्या में उल्लेख किया जाता है कि मामले की जांच  तहसीलदार द्वारा कराई गई जिसमें ग्राम ढखवा के तालाब की गाटा संख्य 562/ 2.2580 बतौर तालाब दर्ज कागजात है उक्त तालाब के जुज भाग पर पक्का निर्माण पाए जाने बेदखली की कार्यवाही की गई जिसे न्यायालय तहसीलदार द्वारा दिनांक 15/7/ 2021 को बेदखली का आदेश पारित किया गया। </div>
<div> </div>
<div>जिसके परिपेक्ष में 29/ 12/ 2022 को विपक्षीगणो का कब्जा विवादित भूमि से हटवा दिया गया एसडीएम सदर का उक्त कथन की कब्जा हटवा दिया गया है सरासर गलत एवं झूठ है उक्त भूभाग पर आज भी मकान और दुकान बनी खड़ी है जो एसडीएम सदर की रिपोर्ट को फर्जी भ्रामक एवं झूठा साबित करने को काफी है इस तरह से भ्रामक एवं फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत कर शासन को गुमराह किया जा रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149237/dabangg-shri-krishna-does-not-accept-the-order-of-the</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 13:27:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के आदेश के बाद चल रही जांच के बीच शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>शाहजहांपुर/</strong>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह द्वारा गठित जांच टीम के द्वारा जैतीपुर ब्लॉक के गढ़िया रंगीन में चल रही भ्रष्टाचार  के आरोपी की जांच के मामले में अब नया मोड़ आ गया है इस ग्राम पंचायत में 16 बिंदुओं पर जांच होनी थी जिसमें करीब छः बिंदुओं पर जांच हो चुकी है जिसमें ग्राम पंचायत के कई तालाबों पर अवैध रूप से कब्जा पाया गया है शिकायतकर्ता का आरोप था कि ग्राम प्रधान द्वारा तालाब की जमीनों को बिक्री कर उन पर कब्जा कराया गया है अभी तमाम बिंदुओं पर ग्राम पंचायत में जांच</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146354/threat-to-kill-the-complainant-amid-ongoing-investigation-after-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/news--3-कोर्ट-के-आदेश-के-बाद-चल-रही-जांच-के-बीच-शिकायतकर्ता-को-जान-से-मारने-की-धमकी .jpg" alt=""></a><br /><div><strong>शाहजहांपुर/</strong>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह द्वारा गठित जांच टीम के द्वारा जैतीपुर ब्लॉक के गढ़िया रंगीन में चल रही भ्रष्टाचार  के आरोपी की जांच के मामले में अब नया मोड़ आ गया है इस ग्राम पंचायत में 16 बिंदुओं पर जांच होनी थी जिसमें करीब छः बिंदुओं पर जांच हो चुकी है जिसमें ग्राम पंचायत के कई तालाबों पर अवैध रूप से कब्जा पाया गया है शिकायतकर्ता का आरोप था कि ग्राम प्रधान द्वारा तालाब की जमीनों को बिक्री कर उन पर कब्जा कराया गया है अभी तमाम बिंदुओं पर ग्राम पंचायत में जांच होनी है इसी बीच शिकायतकर्ता और ग्राम प्रधान के बीच झगड़े की आशंका प्रबल हो गई है इस संबंध में शिकायतकर्ता भगवान शरण शर्मा दो बार थाना गढ़िया रंगीन पर शिकायती पत्र भी दे चुके हैं। </div>
<div> </div>
<div>उन्होंने फिर एक बार 16 नवंबर को प्रार्थना पत्र देते हुए बताया है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने  शिकायतकर्ता को यह कहकर फोन पर बुलाया की अधिकारी जांच करने हैं आए हैं आप यहां आइए मैं मौके पर गया तो वहां ग्राम प्रधान के परिवार वालों ने गाली गलौज करने के साथ लाठी डंडों से हमला बोल दिया शिकायतकर्ता ने बताया कि इससे पहले भी ग्राम प्रधान और उसके परिवार वाले कई बार उसके साथ गाली गलौज और मारपीट का प्रयास कर चुके हैं शिकायतकर्ता ने बताया कि लेखपाल के पास जब मैं पहुंचा तो सुरक्षा के नाम पर वहां दो होमगार्ड मौजूद थे। </div>
<div> </div>
<div>लेकिन ग्राम प्रधान के परिवार वालों ने उसे लाठी डंडों से उसे काफी दूर तक भगाया और वह अपनी जान बचाकर भाग गया शिकायतकर्ता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए थाने पर प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है , उपरोक्त घटना की जानकारी लेने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल जलीस अहमद से फोन संपर्क करना चाहा गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया , इस संबंध में थाना अध्यक्ष गढ़िया रंगीन ने बताया कि हल्का इंचार्ज को प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/146354/threat-to-kill-the-complainant-amid-ongoing-investigation-after-court</link>
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                <pubDate>Sun, 17 Nov 2024 20:11:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुष्कर्म पीड़ित छात्रा का हुआ मेडिकल, अब कोर्ट में होगा बयान!</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div><strong>इलाहाबाद</strong>। विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर अजय कुमार सागर पर दुष्कर्म व धमकी देने का आरोप लगाने वाली छात्रा का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है। मेडिकल की सभी औपचारिकताएं शनिवार को पूरी हो गईं। अब सोमवार को न्यायालय के समक्ष उसका बयान दर्ज कराया जाएगा। पुलिस इसके बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कह रही है।</div>
<div>  </div>
<div>चार फरवरी को छात्रा की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी प्रोफेसर इविवि के प्राचीन इतिहास विभाग में तैनात हैं। उसने आरोप लगाया है कि द्वितीय वर्ष में पढ़ने के दौरान आरोपी शिक्षक ने उसे</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138721/rape-victim-girls-medical-done-now-statement-will-be-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/6.jpeg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div><strong>इलाहाबाद</strong>। विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर अजय कुमार सागर पर दुष्कर्म व धमकी देने का आरोप लगाने वाली छात्रा का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है। मेडिकल की सभी औपचारिकताएं शनिवार को पूरी हो गईं। अब सोमवार को न्यायालय के समक्ष उसका बयान दर्ज कराया जाएगा। पुलिस इसके बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कह रही है।</div>
<div> </div>
<div>चार फरवरी को छात्रा की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी प्रोफेसर इविवि के प्राचीन इतिहास विभाग में तैनात हैं। उसने आरोप लगाया है कि द्वितीय वर्ष में पढ़ने के दौरान आरोपी शिक्षक ने उसे प्रेम प्रस्ताव दिया, उसने इन्कार कर दिया था। इसके बाद भी वह फोन व मैसेज भेजते रहे। ब्लॉक करने पर अन्य नंबरों से परेशान किया। एक दिन बहाने से कमरे पर ले जाकर दुष्कर्म किया और किसी से शिकायत न करने को धमकाया। तहरीर के मुताबिक, घटना 15 जनवरी को हुई।</div>
<div> </div>
<div>शिकायत के बाद पुलिस ने अगले ही दिन छात्रा का बयान दर्ज किया। साथ ही मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू करा दी थी। सूत्रों के मुताबिक, अब सोमवार को छात्रा का न्यायालय में बयान दर्ज कराने की तैयारी है। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि आरोपी प्रोफेसर का अब तक पता नहीं चल सका है। कर्नलगंज इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर अजय कुमार सागर का मोबाइल नंबर बंद है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उधर शनिवार को भी उनका नंबर बंद मिला</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Feb 2024 15:51:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग को दबोचा था 'मनचला' अब अदालत ने सुनाई ऐसी सजा जिससे उतर जाएगा 'भूत</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखीमपुर-खीरी। </strong>लाख जागरुकता फैलाने के बावजूद हमारे देश में हर दिन बालिकाओं व महिलाओं को परेशान किए जाने के मामले सामने आते रहते हैं। घर से स्कूल, कॉलेज और जॉब के लिए निकली लड़कियां, रिश्तेदारी व गांव रास्ते में 'मनचले' व आवारा युवकों के द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत भी करती है और सोशल मीडिया पर अपना दर्द भी साझा करती है।</div>
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<div>मामले में देर से ही सही लेकिन एक उम्मीद जगाने वाला फैसला किया गया लखीमपुर खीरी की विशेष अदालत ने एक नाबालिग को बुरी नियत से दबोचने मामले में मनचले युवक को चार साल के सश्रम कारावास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136598/the-minor-was-caught-by-a-miscreant-now-the-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/cc7.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखीमपुर-खीरी। </strong>लाख जागरुकता फैलाने के बावजूद हमारे देश में हर दिन बालिकाओं व महिलाओं को परेशान किए जाने के मामले सामने आते रहते हैं। घर से स्कूल, कॉलेज और जॉब के लिए निकली लड़कियां, रिश्तेदारी व गांव रास्ते में 'मनचले' व आवारा युवकों के द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत भी करती है और सोशल मीडिया पर अपना दर्द भी साझा करती है।</div>
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<div>मामले में देर से ही सही लेकिन एक उम्मीद जगाने वाला फैसला किया गया लखीमपुर खीरी की विशेष अदालत ने एक नाबालिग को बुरी नियत से दबोचने मामले में मनचले युवक को चार साल के सश्रम कारावास सजा व दस हजार जुर्माना ठोका है।</div>
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<div>गौरतलब हो कि किशोरी को बुरी नीयत से दबोचने वाले मनचले युवक को साढ़े दस साल बाद उसके गुनाहों की सजा मिली है। एडीजे राहुल सिंह ने दोषी को चार साल कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।</div>
<div>               </div>
<div>अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी बृजेश पांडेय ने बताया कि भीरा थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले दंपती के यहां 23 अप्रैल 2013 को बच्चे का मुंडन कार्यक्रम था। इसमें शामिल होने के लिए वादी मुकदमा की साली आई थी शाम को छ: बजे गोपाल सिंह ने उसे बुरी नीयत से दबोच लिया था।</div>
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<div>अदालत ने अपने फैसले में गोपाल सिंह को नाबालिग से छेड़खानी के मामले में चार साल की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि वसूल की गई जुर्माने की रकम में से पांच हजार रुपये की धनराशि बतौर मुआवजा पीड़िता को अदा की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अल्जीरिया में दर्दनाक हादशा भीड़ द्वारा पीट-पीट कर चित्रकार की हत्या, अदालत ने दी 49 लोगों को मृत्युदंड की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>अल्जीयर्स की एक अदालत ने एक चित्रकार की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में 49 दोषियों को बृहस्पतिवार को मौत की सजा सुनाई। बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक, मृतक पर जंगल में भीषण आग लगाने का संदेह था जबकि वास्तव में वह आग बुझाने के प्रयासों में मदद के लिए आगे आया था। पूर्वोत्तर अल्जीरिया के कबीलाई क्षेत्र में पिछले साल हुए इस हत्याकांड ने देश को झकझोर कर रख दिया था।<br />    <br />यह घटना ऐसे समय में हुई थी, जब पहाड़ी क्षेत्र वाले बरबर प्रांत के जंगल में लगी भीषणआग के कारण 90 लोगों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125684/637f052363249"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-11/ordar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>अल्जीयर्स की एक अदालत ने एक चित्रकार की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में 49 दोषियों को बृहस्पतिवार को मौत की सजा सुनाई। बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक, मृतक पर जंगल में भीषण आग लगाने का संदेह था जबकि वास्तव में वह आग बुझाने के प्रयासों में मदद के लिए आगे आया था। पूर्वोत्तर अल्जीरिया के कबीलाई क्षेत्र में पिछले साल हुए इस हत्याकांड ने देश को झकझोर कर रख दिया था।<br />  <br />यह घटना ऐसे समय में हुई थी, जब पहाड़ी क्षेत्र वाले बरबर प्रांत के जंगल में लगी भीषणआग के कारण 90 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में वे सैनिक भी शामिल थे जो आग बुझाने के अभियान में जुटे थे। चित्रकार जमील बेन इस्माइल की हत्या में 100 से अधिक संदिग्ध शामिल थे, जिनमें से अधिकतर को उनकी हत्या में भूमिका का दोषी पाया गया।बचाव पक्ष के वकील हकीम साहेब ने बताया कि अदालत ने 38 अन्य दोषियों को 2-12 साल की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि दोषियों के मौत की सजा के बजाय आजीवन कारावास की सजा काटने की संभावना है क्योंकि अल्जीरिया में दशकों से मृत्युदंड पर रोक है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Nov 2022 13:14:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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