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                <title>Aap - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>लोकप्रियता से विवाद तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा का हालिया राजनीतिक निर्णय केवल संसदीय गलियारों या राजनीतिक दलों के बीच की एक साधारण घटना नहीं है बल्कि इसने अंतर्जाल की आभासी दुनिया में भी अत्यंत गहरा और अभूतपूर्व प्रभाव छोड़ा है। आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में उनका सम्मिलित होना एक सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम की तरह प्रतीत हो सकता था परंतु कुछ ही घंटों के भीतर इसने सामाजिक संवाद के माध्यमों पर एक बड़े वैचारिक और संख्यात्मक बदलाव को जन्म दे दिया। विशेष रूप से छायाचित्र साझा करने वाले प्रमुख वैश्विक मंच पर उनके अनुगामियों की संख्या में आई आकस्मिक गिरावट ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177274/journey-from-popularity-to-controversy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/raghav-chadha-1696929862.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा का हालिया राजनीतिक निर्णय केवल संसदीय गलियारों या राजनीतिक दलों के बीच की एक साधारण घटना नहीं है बल्कि इसने अंतर्जाल की आभासी दुनिया में भी अत्यंत गहरा और अभूतपूर्व प्रभाव छोड़ा है। आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में उनका सम्मिलित होना एक सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम की तरह प्रतीत हो सकता था परंतु कुछ ही घंटों के भीतर इसने सामाजिक संवाद के माध्यमों पर एक बड़े वैचारिक और संख्यात्मक बदलाव को जन्म दे दिया। विशेष रूप से छायाचित्र साझा करने वाले प्रमुख वैश्विक मंच पर उनके अनुगामियों की संख्या में आई आकस्मिक गिरावट ने इस तथ्य को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान समय में राजनीति केवल विचारधारा या चुनावी कूटनीति तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह सीधे तौर पर जनता की संवेदनाओं और उनकी तत्काल आभासी प्रतिक्रियाओं से जुड़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि जिस दिन उन्होंने अपने राजनीतिक दल के परिवर्तन की सार्वजनिक घोषणा की थी उस समय उनके व्यक्तिगत खाते पर लगभग 14.6 मिलियन अनुगामी उपस्थित थे। इस घोषणा के मात्र 24 घंटे के भीतर यह संख्या तीव्रता से घटकर लगभग 13.3 मिलियन से 13.5 मिलियन के मध्य पहुँच गई। इसका प्रत्यक्ष अर्थ यह है कि लगभग 10 लाख से 11 लाख लोगों ने अत्यंत अल्प समय में उन्हें अननुगामित कर दिया। आंकड़ों में आई यह भारी गिरावट केवल गणितीय अंकों का खेल नहीं है बल्कि यह उस तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया और रोष को दर्शाती है जो उनके समर्थकों के मध्य उत्पन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटना इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि राघव चड्ढा की छवि लंबे समय से एक ऐसे युवा राजनेता की रही है जो पारंपरिक और रूढ़िवादी राजनीति की परिधि से बाहर दिखाई देते थे। उनकी पहचान केवल एक सांसद के रूप में स्थापित नहीं थी बल्कि वे एक ऐसे सार्वजनिक चेहरे के रूप में उभरे थे जिसने निरंतर युवाओं के ज्वलंत मुद्दों को स्वर दिया। उन्होंने अस्थायी सेवा कर्मियों, वितरण कर्मचारियों, पितृत्व अवकाश और तीव्र वितरण सेवाओं जैसे समकालीन विषयों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने का सफल प्रयास किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही प्रमुख कारण था कि उनके अनुगामियों में बहुत बड़ी संख्या उस युवा वर्ग की थी जिसे प्रायः नई पीढ़ी या आधुनिक युग की संतति कहा जाता है। परंतु जैसे ही उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा और निष्ठा को बदलने का निर्णय लिया उसी वर्ग की प्रतिक्रिया सबसे अधिक प्रखर और तीखी दिखाई दी। सामाजिक संवाद के मंचों पर अचानक एक संगठित अननुगामी अभियान प्रारंभ हो गया जिसमें सहस्रों नहीं अपितु लाखों लोगों ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी दर्ज की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान ने वैश्विक स्तर पर यह सिद्ध कर दिया कि आभासी मंचों पर मिलने वाला जनसमर्थन अत्यंत अस्थिर हो सकता है और वह क्षण भर में विपरीत दिशा में मुड़ सकता है। जो लोग पूर्व में उनके समर्थन में सक्रिय थे वही लोग कुछ ही घंटों के भीतर उनके विरोध में खड़े दिखाई देने लगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संपूर्ण घटनाक्रम को गहराई से समझने हेतु यह देखना अनिवार्य है कि सामाजिक संवाद के ये आधुनिक माध्यम आज केवल मनोरंजन या सूचना के स्रोत नहीं रह गए हैं। ये अब एक प्रकार के तत्काल जनमत संग्रह के केंद्र बन चुके हैं जहाँ साधारण जन अपनी राय को तुरंत और प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं। पूर्व के समय में जहाँ किसी राजनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल चुनाव परिणामों, जनसभाओं की भीड़ या मतपेटियों से किया जाता था वहीं अब अनुगामियों की संख्या और उन पर प्राप्त होने वाली प्रतिक्रियाएं भी लोकप्रियता का एक अपरिहार्य मापदंड बन गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा के प्रकरण में यह विषय भी चर्चा का केंद्र बना कि उनके पुराने आभासी संदेशों और लेखों में कुछ संपादन या परिवर्तन किए गए। कुछ समाचार रिपोर्टों में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि उन्होंने अपने आधिकारिक खातों से पूर्व में किए गए आलोचनात्मक लेखों को या तो पूरी तरह हटा दिया या उनकी संख्या कम कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस गतिविधि से जनमानस में यह धारणा सुदृढ़ हुई कि उनकी आभासी छवि को नए राजनीतिक वातावरण और नई पार्टी की नीतियों के अनुरूप ढाला जा रहा है। इस प्रकार की गतिविधियों ने आलोचना की अग्नि में घी डालने का कार्य किया क्योंकि उनके राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों ने इसे एक शुद्ध अवसरवादी कदम के रूप में प्रस्तुत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि यह प्रतिक्रिया केवल सामान्य उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित नहीं रही बल्कि कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों और सार्वजनिक जीवन के प्रभावशाली लोगों ने भी उन्हें अननुगामित करने का निर्णय लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह आक्रोश केवल व्यक्तिगत या भावनात्मक स्तर पर नहीं था बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और बौद्धिक प्रतिक्रिया थी जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग सम्मिलित थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीति के विशेषज्ञों का यह तर्क है कि इस घटना के पीछे केवल एक दल बदलने का निर्णय नहीं है बल्कि उस निर्णय से जुड़ी जन-अपेक्षाएं और विश्वास का भंग होना सम्मिलित है। जब कोई राजनेता अपनी विशिष्ट पहचान एक विशेष विचारधारा या नैतिकता के आधार पर निर्मित करता है तो उसके समर्थक उसी वैचारिक धरातल पर उससे जुड़ते हैं। यदि वह राजनेता अचानक उस दिशा से पूर्णतः विपरीत कोई कदम उठाता है तो उन समर्थकों के लिए इस आकस्मिक बदलाव को स्वीकार करना और उसके साथ समन्वय बिठाना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह स्थिति विश्वास के संकट को जन्म देती है जिसका परिणाम हम आंकड़ों की गिरावट के रूप में देखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि आभासी समर्थन कभी भी स्थायी संपत्ति नहीं होता। यह निरंतर बदलती परिस्थितियों और राजनेता के व्यवहार के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। किसी नेता के पास लाखों की संख्या में अनुगामी होना उसकी चिरस्थायी लोकप्रियता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह केवल उस विशिष्ट समय की मनोदशा को प्रतिबिंबित करता है। जैसे ही परिस्थितियां बदलती हैं या नेता के आचरण में विरोधाभास दिखाई देता है वैसे ही यह समर्थन रेत के महल की भांति ढह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही यह गंभीर प्रश्न भी उपस्थित होता है कि क्या आभासी दुनिया में आई इस गिरावट का वास्तविक धरातल की राजनीति पर कोई निर्णायक प्रभाव पड़ेगा। राजनीतिक इतिहास के पन्ने यह बताते हैं कि सामाजिक मंचों की प्रतिक्रिया और वास्तविक चुनावी परिणाम सदैव एक समान नहीं होते। कई बार आभासी मंचों पर प्रचंड विरोध दिखाई देता है परंतु जमीनी स्तर पर उसका प्रभाव बहुत सीमित रहता है। इसलिए वर्तमान में यह कहना समय पूर्व होगा कि इस घटना से उनके दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य पर क्या और कितना प्रभाव पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तथापि यह स्वीकार करना भी अनिवार्य है कि इस संपूर्ण प्रकरण ने उनकी सार्वजनिक छवि को निश्चित रूप से प्रभावित किया है। किसी भी सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति विशेषकर एक राजनेता के लिए जनता का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी और वास्तविक पूंजी होती है। जब उस विश्वास की नींव पर ही प्रश्नचिह्न अंकित होने लगें तो उसे पुनः स्थापित करना कोई सरल कार्य नहीं होता। इसके लिए केवल सुंदर वक्तव्य या विज्ञापन के माध्यम से किया गया प्रचार पर्याप्त नहीं होता बल्कि इसके लिए निरंतर कार्य, नैतिक स्पष्टता और एक पारदर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में एक और रोचक पक्ष यह है कि अंतर्जाल की गति और उसके व्यापक प्रभाव ने राजनीति के व्याकरण को पूरी तरह परिवर्तित कर दिया है। पहले के युग में जहाँ किसी भी राजनीतिक निर्णय के प्रभाव को समझने और मापने में महीनों या वर्षों का समय लग जाता था वहीं अब मात्र कुछ ही घंटों में उस निर्णय की व्यापक प्रतिक्रिया जनता के सामने आ जाती है। यह परिवर्तन आधुनिक नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती भी है और एक अवसर भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि वे सही और ईमानदार तरीके से इन माध्यमों का उपयोग करें तो वे सीधे जनता से संवाद स्थापित कर सकते हैं और अपनी नीतियों को स्पष्ट कर सकते हैं। परंतु यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं या उनके कार्यों में कथनी और करनी का अंतर दिखता है तो यही माध्यम उनके विरुद्ध एक शक्तिशाली शस्त्र के रूप में भी कार्य कर सकता है। राघव चड्ढा के मामले में यह दूसरी स्थिति अधिक प्रबलता से दिखाई देती है जहाँ उनकी वर्षों में निर्मित आभासी छवि अचानक एक बड़ी चुनौती के घेरे में आ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह संपूर्ण घटना केवल एक व्यक्ति विशेष की कथा नहीं है बल्कि यह आधुनिक राजनीति के परिवर्तित होते हुए व्याकरण का एक सटीक उदाहरण है। यह इस तथ्य को रेखांकित करती है कि आज का मतदाता और नागरिक केवल मतदान दिवस पर ही सक्रिय नहीं होता बल्कि वह राजनेता के प्रत्येक निर्णय और गतिविधि पर सूक्ष्म दृष्टि रखता है और उस पर त्वरित प्रतिक्रिया देता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि राघव चड्ढा के अनुगामियों में आई यह भारी कमी एक प्रतीक के रूप में कार्य करती है जो हमें यह चेतावनी देती है कि इस तीव्र गति वाले युग में राजनीति कितनी चंचल और अनिश्चित हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटना राजनेताओं के लिए एक सबक भी है कि लोकप्रियता प्राप्त करना जितना कठिन है उससे कहीं अधिक कठिन उसे नैतिकता और निरंतरता के साथ बनाए रखना है। आने वाले समय में यह देखना अत्यंत रोचक होगा कि क्या वे इस भीषण चुनौती को पुनः एक अवसर में परिवर्तित कर पाने में सफल होते हैं या यह घटना उनकी राजनीतिक छवि पर एक स्थायी और अमिट प्रभाव छोड़ जाती है। राजनीति और अंतर्जाल का यह संगम आने वाले वर्षों में जनमत के निर्माण की प्रक्रिया को और भी अधिक जटिल और दिलचस्प बनाने वाला है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:26:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title> क्या आरोप लगाने से बाज़ आएगा विपक्ष ?</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली विधानसभा के चुनाव संपन्न हो गये, भारतीय जनता पार्टी ने वहां 27 साल के बाद सत्ता में वापसी की है। वहीं दस वर्षों तक सत्ता में काबिज रहने वाली आम आदमी पार्टी अब दिल्ली की सत्ता से दूर हो चुकी है। इस बार दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी 48 जबकि आप को 22 सीटें मिलीं। पिछली विधानसभा की बात करें तो आप के पास 62 सीट थीं जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 8 सीट थीं। यह निश्चित है कि इस चुनाव में आप सत्ता से बाहर हुई है लेकिन भाजपा को सफलता का वो प्रतिशत नहीं मिला जो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148489/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/34045113.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली विधानसभा के चुनाव संपन्न हो गये, भारतीय जनता पार्टी ने वहां 27 साल के बाद सत्ता में वापसी की है। वहीं दस वर्षों तक सत्ता में काबिज रहने वाली आम आदमी पार्टी अब दिल्ली की सत्ता से दूर हो चुकी है। इस बार दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी 48 जबकि आप को 22 सीटें मिलीं। पिछली विधानसभा की बात करें तो आप के पास 62 सीट थीं जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 8 सीट थीं। यह निश्चित है कि इस चुनाव में आप सत्ता से बाहर हुई है लेकिन भाजपा को सफलता का वो प्रतिशत नहीं मिला जो पिछली दो विधानसभा में आप के पास था। दिल्ली की हार के बाद विपक्ष में आपस में आरोप प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन क्या सिर्फ आरोप प्रत्यारोप के द्वारा हम अपनी गलतियों को छिपा सकते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को कटघरे में लिया है। और यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस के कारण आप की हार हुई है। यहां पर सोचने वाली बात यह है कि कांग्रेस को हटाकर ही आप दिल्ली की सत्ता में आई थी तो क्या आप को जिताने के लिए कांग्रेस को हट जाना चाहिए ? क्यों नहीं दिल्ली में गठबंधन करके चुनाव लड़ा गया। 
<div> </div>
<div>इस चुनाव में यह स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि आम आदमी पार्टी को इस बार सत्ता में वापसी करने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन फिर भी आप ने गठबंधन के लिए कांग्रेस से दो टूक मना कर दी थी। जब विपक्षी दल एक होकर चुनाव नहीं लड़ सकते तो उनको कोई अधिकार नहीं है कि वो किसी दूसरी पार्टी पर उंगली उठा सकें। और फिर कांग्रेस क्यों हटे क्या सारे विपक्ष को जिताने का ठेका कांग्रेस ने ही ले रखा है। अन्य विपक्षी दलों का कोई कर्तव्य नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>सच तो यह है चाहे वह उत्तर प्रदेश का मिल्कीपुर हो या दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम। विपक्ष इसमें हारा है। विपक्ष हारा ही नहीं उसकी रणनीति भी फेल हो रही है। आपसी खींचतान में न उलझकर एक रणनीति की आवश्यकता है जो कि कभी दिखाई नहीं दी। नितीश कुमार ने इंडिया गठबंधन को ऐसे ही नहीं छोड़ा है, यही सब कारण बनते हैं जब केवल निजी स्वार्थ की बात होती है।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली की सत्ता जाने के बाद अब आगे भी आम आदमी पार्टी को सत्ता में वापसी करना मुश्किल होगा। दिल्ली एक ऐसा राज्य है जहां की जनता ने आप को उस समय बंपर जीत दी जब पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी। लेकिन आपसी खींचतान की वजह से आप इसको बरकरार रखने में सफल नहीं हो सकी। ऐसा दिल्ली में ही नहीं है बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी ऐसा ही हुआ है। और यही कारण है कि मजबूत होते हुए भी विपक्ष कमजोर प्रदर्शन कर पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>जब भी विपक्षी एकता की बात होती है तो पहले विपक्षी दलों को आपना स्वार्थ साधते देखा जाता रहा है। सही मायने में तो देखा जाए तो विपक्षी दल स्वयं ही भारतीय जनता पार्टी को हटाना नहीं चाहते और आरोप एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने दिल्ली चुनाव के बाद तुरंत यह कहते देर नहीं लगाई कि दिल्ली में आप की हार की जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी है। जब कांग्रेस को सत्ता में रहते आप ने जीरो पर समेट दिया था तब जिम्मेदार कौन था। क्या दूसरे दलों के लिए कांग्रेस अपनी राजनीति खत्म करदे, क्या यही विपक्ष चाहता है।</div>
<div> </div>
<div>विपक्षी दलों का गठबंधन भी अजीब दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सभी गठबंधन करना चाहते हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर सभी के विचार, सिद्धांत बदल जाते हैं। लोकसभा का चुनाव साथ लड़ना चाहते हैं लेकिन विधानसभा चुनाव में जहां स्वयं मजबूत हैं वहां किसी अन्य को अधिक महत्व नहीं देना चाहते। भारतीय जनता पार्टी जानती है कि विपक्ष केवल अपनी ग़लत रणनीति के कारण हार रहा है और इसीलिए वह दम भर कर कहती है कि आने वाले 15-20 सालों तक देश की राजनीति से भाजपा को कोई हिला नहीं सकता।</div>
<div> </div>
<div>एक राज्य में आप एक होकर चुनाव लड़ते हैं वहीं दूसरे राज्य में एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोंकते नजर आते हैं। देश की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है और न ही जनता को आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है। केजरीवाल दिल्ली और पंजाब में मजबूत थे तब वहां किसी से गठबंधन नहीं करना चाहते थे जब कि अन्य राज्यों में उनके गठबंधन के विकल्प खुले रहते हैं। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यों ? देश की जनता यह जानना चाहती है।</div>
<div> </div>
<div>आम आदमी पार्टी की सरकार से पहले दिल्ली में लगातार तीन बार शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। लगातार तीन बार सरकार बनना इतना आसान नहीं है। जबकि दिल्ली के पड़ोसी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में राजनैतिक उथल-पुथल जारी रही। दिल्ली में केजरीवाल ने जब एक नई राजनीति की शुरुआत की तो लोगों को लगा कि शायद ये कुछ अलग करेंगे लेकिन राजनीति के नियम और सिद्धांत एक ही हैं।</div>
<div> </div>
<div>यदि राजनीति करनी है तो उन्हें अपनाना होगा और यही आम आदमी पार्टी के साथ हुआ। सभी को पता है कि लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन था लेकिन वहीं विधानसभा चुनाव में पंजाब और दिल्ली में आप ने स्पष्ट मना कर दिया कि वह इन विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। आम आदमी पार्टी समेत समूचे विपक्ष को एक बार बैठकर चिंतन करने की आवश्यकता है। </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 17:22:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पटेल नगर विधानसभा 2025 की ये जीत कोई आम जीत नहीं है इसमें कुछ विशेषताए ऐसी है जो सभी को जाननी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>दिल्ली-</strong>    पटेल नगर विधानसभा बेहद रोमांचक और संघर्ष पूर्ण और कठिन परिश्रम पश्चात इस जीत में आम आदमी पार्टी के विधायक प्रवेश रत्न  ने पूर्व में केंद्र सरकार में रही कैबिनेट मंत्री कृष्णा तीरथ को और पूर्व में दिल्ली सरकार में रहे मंत्री राजकुमार आनंद को हराकर दिल्ली की राजनीतिक इतिहास में नया कीर्तिमान हासिल किया है अरविंद केजरीवाल जी के कंधों को पटेल नगर विधानसभा में मजबूत करने का काम जो हमारे युवा विधायक भाई प्रवेश रत्न  ने किया है वो काबिले तारीफ़ है।</div>
<div>  </div>
<div>इस जीत में जनता का प्यार स्नेह और पूर्ण बहुमत अगामी चुनावों के लिए हम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148374/this-victory-of-patel-nagar-assembly-2025-is-not-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250209-wa0197.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>दिल्ली-</strong>  पटेल नगर विधानसभा बेहद रोमांचक और संघर्ष पूर्ण और कठिन परिश्रम पश्चात इस जीत में आम आदमी पार्टी के विधायक प्रवेश रत्न  ने पूर्व में केंद्र सरकार में रही कैबिनेट मंत्री कृष्णा तीरथ को और पूर्व में दिल्ली सरकार में रहे मंत्री राजकुमार आनंद को हराकर दिल्ली की राजनीतिक इतिहास में नया कीर्तिमान हासिल किया है अरविंद केजरीवाल जी के कंधों को पटेल नगर विधानसभा में मजबूत करने का काम जो हमारे युवा विधायक भाई प्रवेश रत्न  ने किया है वो काबिले तारीफ़ है।</div>
<div> </div>
<div>इस जीत में जनता का प्यार स्नेह और पूर्ण बहुमत अगामी चुनावों के लिए हम सभी के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा एक युवा नेतृत्व जो दो मंत्रियों को हराने का दम रखता है वो युवाओ को जुड़ने के लिए प्रेरित तो करेगा ही साथ ही आम आदमी पार्टी को मजबूत करने का भी काम करेगा। अजय सागर बौद्ध</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 17:29:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>छोटे अहंकार की  बड़े अहंकार  से मात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली जीतने के लिए भाजपा नेतृत्व को हार्दिक बधाई।  ब्धाई दे रहा हूँ क्योंकि ये बधाई बनती है।  मै  भाजपा की तरह न ' तंग-दिल ' हूँ और न 'संग-दिल 'इसलिए तमाम असहमतियों के रहते हुए मुझे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को बधाई देने में कोई संकोच नहीं है।  मोदी की भाजपा ने 27  साल की लम्बी तपस्या का फल हासिल कर लिया है। अब बड़ी दिल्ली और छोटी दिल्ली दोनों भाजपा के हाथ में हैं।  भाजपा ने बड़ी ही हिकमत  अमली से केजरीवाल से उनकी दिल्ली छीन ली है।</p>
<p>  दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर</p>
<p>दिल्ली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148363/beat-with-big-ego-of-small-ego"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली जीतने के लिए भाजपा नेतृत्व को हार्दिक बधाई।  ब्धाई दे रहा हूँ क्योंकि ये बधाई बनती है।  मै  भाजपा की तरह न ' तंग-दिल ' हूँ और न 'संग-दिल 'इसलिए तमाम असहमतियों के रहते हुए मुझे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी को बधाई देने में कोई संकोच नहीं है।  मोदी की भाजपा ने 27  साल की लम्बी तपस्या का फल हासिल कर लिया है। अब बड़ी दिल्ली और छोटी दिल्ली दोनों भाजपा के हाथ में हैं।  भाजपा ने बड़ी ही हिकमत  अमली से केजरीवाल से उनकी दिल्ली छीन ली है।</p>
<p> दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर आपने तमाम मीमांसाएँ,समीक्षाएं,विश्लेषण देखे और पढ़े होंगे ,लेकिन मैंने शरू से कहा था कि इस बार दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ठीक उसी तरह घेरे जा चुके हैं जैसे 2019  के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश   में अजेय सिंधिया ज्योतिरादित्य को घेरकर हराया गया था।  सिंधिया ने पराजय के बाद भाजपा में शामिल होकर दोबारा से जय हासिल कर ली किन्तु अरविंद केजरीवाल की किस्मत में ये भी मुमकिन नहीं है , क्योंकि वे देश केप्रधानमंत्री को ' चौथी पास राजा ' कह चुके हैं और उस विधानसभा में कह चुके हैं जिसके रिकार्ड को विलोपित करना भाजपा के लिए भी आसान नहीं है ,भले ही उसे 27  साल बाद दिल्ली में प्रचंड,अखंड या ' बम्पर ' बहुमत मिला है।</p>
<p>दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हार नहीं है ,ये नीतियों की भी हार नहीं है ,ये ईमानदारी और बेईमानी की भी हार नहीं है। ये हार दरअसल अहंकार की हार है। दुर्भाग्य ये कि दिल्ली का छोटा अहंकार देश  के बड़े अहंकार से हार गय। अर्थात दिल्ली को अभी भी अहंकार  से निजात नहीं मिली है। यदि दिल्ली में कुशासन हारा है तो दुशासन से हारा है। सुशासन   के लिए तो कहीं कोई जगह है ही नहीं आज की राजनीति में।  सुशासन कहीं दुबका हुआ बैठा होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की नाव वहां डूबी है जहां पानी कोई कोई कमी नहीं थी ,कमी थी तो विनम्रता की।  आम आदमी पार्टी ने अपने खिलाफ एक साथ दो शत्रु खड़े  कर लिए थे।</p>
<p>आप मानकर चलिए कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव जिस कड़वे माहौल में हुए हैं उसके फलस्वरूप दिल्ली की सियासत में कोई सुधा बरसने वाली नहीं है। आने वाले दिन आम आदमी पार्टी के आम कार्यकर्ता के साथ ख़ास नेताओं तक के लिए भरी पड़ने वाले हैं ,क्योंकि भाजपा है कमान आम आदमी पार्टी के आमो-खास को मुआफ करने वाली नहीं है ।  भाजपा की केंद्रीय और अब दिल्ली की सरकार चुन-चुनकर केजरीवाल ऐंड कम्पनी से बदला लेगी। केजरीवाल से लेकर मनीष सिसौदिया को एक बार फिर से जेल-यात्राएं   करना होंगी।  अदालतें भी शायद उनकी मदद न कर पाएं।</p>
<p>ये विधानसभा चुनाव क्षेत्रीय दलों के लिए अपशकुन हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए एक संकेत भी। कि वे अकेले किसी भी सूरत में भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकते । उन्हें कांग्रेस   के साथ चलना ही होगा। दिल्ली के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए भी एक नयी चुनौती हैं।  भाजपा का इतिहास रहा है कि उसने अपने तमाम समर्थकों और विरोधियों को निर्ममता के साथ समाप्त किया है।  भाजपा के नेतृत्व ने पार्टी के भीतर जब विरोधियों को नहीं बख्शा तो बाहर के विरोधियों को बख्शने का सवाल ही नहीं उठता।  </p>
<p>जैसा कि माननीय मोदी जी के विजयोत्स्व के भाषण से साफ़ है कि अब केवल बंगाल की तृण मूल कांग्रेस ही नहीं अपितु बिहार की उनकी अपनी सहयोगी जेडीयू भी भाजपा के निशाने पर है।  भाजपा अब टीडीपी को भी कोई उड़ान नहीं भरने देगी।  गोबर पट्टी में विजय पताकाएं   फहराते हुए आगे बढ़ रही भाजपा अब दक्षिण और पूरब की और रुख करेगी और 2028  से पहले अपने अखिल भारत विजय के अभियान को पूरा करना चाहेगी।<br />संदर्भ के लिए याद दिला दूँ कि भाजपा ने जब अपनी पुरानी सहयोगी उड़ीसा की बीजद  को नहीं छोड़ा तो आम आदमी पार्टी को वो कैसे छोड़ देती ?</p>
<p>भाजपा अपने तमाम  सहयोगी दलों की या तो बलि ले चुकी है या फिर उन्हें दो-फांक   कर अपने साथ खड़ा कर चुकी  है। अकाली हों या शिवसेना वाले कोई भाजपा की मार से बचे नही।  एक आंकड़ा बताता है कि भाजपा के मौजूदा नेतृव ने पिछले 10  साल में अपने 24  छोटे-बड़े सहयोगी दलों की निर्मम हत्या की है। आम आदमी  पार्टी के संस्थापक को जीतकर भाजपा ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को भी संकेत दे दिए हैं की वे किसी गफलत में न रहें। गफलत में देश को भी नहीं रहना चाहिए और कांग्रेस को भी। भाजपा की अक्षोहणी सेना  हर चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरती है।  भाजपा ने यदि झारखण्ड ,तेलंगाना और कर्नाटक नहीं जीत पाया तो ये नहीं समझा जाना चाहिए कि भाजपा की जीतने कोई भूख मर गयी है। भाजपा चौबीस   घंटे युद्धरत रहती है।</p>
<p>दिल्ली के विधानसभा चुनाव ये संकेत दे चुके हैं की क्षेत्रीय  दलों को निगलने के बाद उसका अगला और अंतिम निशाना कांग्रेस ही है। कांग्रेस चूंकि ' हप्पा ' नहीं है इसलिए उसे निगलने में भाजपा को वक्त लगेगा ,लेकिन भाजपा हार मानकर बैठने वाली नहीं है।  उसकी नफरत की आंधी और अदावत के तूफ़ान भारतीय राजनीति को हलकान किये रहेंगे। इसलिए मेरा मश्विरा है कि स्थितिप्रज्ञ होकर फ़िलहाल ' तेल देखिये और तेल की धार देखिये '</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 16:52:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में मोदी बनाम केजरीवाल बनाम राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली विधानसभा का चुनाव है तो मुंबई महापालिका से भी छोटा लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां आम आदमी पार्टी जैसे छोटे से दल से भिड़ गयीं है ।  इस चुनाव को अब दिल्ली वाले केजरीवाल बनाम मोदी बनाम राहुल होते देख रहे हैं।  सत्तारूढ़ होने की वजह से जहाँ भाजपा ये चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड और भेद का इस्तेमाल कर रही है ,वहीं कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर कुचलने में जुटी हुई है।</p>
<p>सबसे पहले सत्तारूढ़ दल की  बात करते है।  इस चुनाव में दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148066/modi-vs-kejriwal-vs-rahul-in-delhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/dilli1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली विधानसभा का चुनाव है तो मुंबई महापालिका से भी छोटा लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां आम आदमी पार्टी जैसे छोटे से दल से भिड़ गयीं है ।  इस चुनाव को अब दिल्ली वाले केजरीवाल बनाम मोदी बनाम राहुल होते देख रहे हैं।  सत्तारूढ़ होने की वजह से जहाँ भाजपा ये चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड और भेद का इस्तेमाल कर रही है ,वहीं कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर कुचलने में जुटी हुई है।</p>
<p>सबसे पहले सत्तारूढ़ दल की  बात करते है।  इस चुनाव में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के ऊपर  जितने भी हमले किये हैं उनका बचाव प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी और पार्टी  अध्यक्ष जेपी नड्ढा से लेकर पार्टी के हर छोटे बड़े नेता को करना पड़ रहा है। संख्याबल और अनुभव के हिसाब से देखें तो भाजपा के समाने आम आदमी पार्टी अभी भी शैशवकाल में है लेकिन उसका हौवा इतना है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक को मैदान में उतरना पड़ा है।</p>
<p> पूरे   देश में भाजपा और डबल इंजिन की जितनी भी राज्य सरकारें हैं उनके मुख्यमंत्री भी दिल्ली जितने के लिए अपने -अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे है।  एक यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जरूर महाकुम्भ हादसे की वजह से दिल्ली नहीं जा पाए।</p>
<p>भाजपा ने दिल्ली जीतने के लिए अपने सभी आजमाए हुए फार्मूले दिल्ली में भी अपनाये है।  भाजपा ने केंद्रीय चुनाव आयोग का खुलकर दुरुपोग किया है।  पुलिस का इस्तेमाल किया है।  आम आदमी पार्टी पर दबाब बनाने के लिए दिल्ली स्थित  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के घर छापा मरने की कोशिश की है। आम आदमी पार्टी के 7  पूर्व विधायकों के असंतोष का फायदा उठाते हुए उन्हें पार्टी छोड़कर बाहर आने पर मजबूर कर दिया  है। अब ये सब भाजपा के लिए काम करेंगे।</p>
<p>आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया से लेकर पुराने केजरीवाल मंत्रिमंडल के तीन मंत्रियों को जेल की हवा पहले ही खिलाई जा चुकी है ,यहां तक की आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सदस्य संजय  सिंह को भी जेल यात्रा करना पड़ी है।</p>
<p>अब कांग्रेस की बात करते है।  कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ इंडिया गठबंधन में तालमेल बनाये रखने की बहुत कोशिश की ,लेकिन आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का लिहाज न मप्र विधानसभा चुनाव में किया और न हरियाणा और महाराष्ट्र में। गुजरात में तो किया ही नहीं ,उलटे दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से अपने रिश्ते खराब और कर लिये ।</p>
<p> आम आदमी पार्टी ने भाजपा के भ्रष्ट नेताओं की सूची में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी जोड़ लिया।आम आदमी पार्टी की इस हरकत के बाद कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी को आस्तीन का सांप मानकर उसका फन कुचलना शुरू कर दिया है।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ही नहीं बल्कि उनकी बहन प्रियंका वाड्रा और पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी अब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर लगातार हमले कर रहे हैं। कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर केजरीवाल को महाभ्रष्ट बता रही है ।  मुख्यमंत्री आवास को शीशमहल बनाने और शराब घोटाले के आरोप लगा रही है । कांग्रेस  आम आदमी पार्टी को भाजपा की बी टीम बता रही है।  भाजपा ने जहाँ दिल्ली में हिन्दुओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है ठीक वैसे ही कांग्रेस ने अल्पसंखयकों को अपने साथ रखने  का प्रयास किया  है।</p>
<p>दिल्ली में पहली बार विधानसभा का चुनाव साफ़ तौर पर त्रिकोणीय बना है।  दिल्ली में इस बार आम आदमी पार्टी स्पष्ट बहुमत से बहुत दूर खड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में स्थितियां ऐसी बन सकतीं हैं कि  आम आदमी पार्टी को सत्ता में बने रहने के लिए या तो एक बार फिर कांग्रेस के समाने समर्पण करना होगा या सचमुच में भाजपा की बी टीम बनकर रहना होगा।  ये भी हो सकता है कि  यही समस्या भाजपा और कांग्रेस के सामने भी आये। कुल जमा पशोपेश दिल्ली के मतदाता की है।</p>
<p>उसे तय करना है कि  वो कौन से भ्र्ष्ट दल की सरकार बनाती है ,क्योंकि आम आदमी पार्टी भाजपा और कांग्रेस को महाभ्रष्ट बता चुकी है ,वहीं कांग्रेस और भाजपा ने आम आदमी पार्टी को समवेत स्वर में महाभ्रष्ट   कहा है।  अर्थात दिल्ली में दूध का धुला कोई दल नहीं है ।</p>
<p>आगामी 5  फरवरी को दिल्ली में मतदान है। उसी दिन प्रधानमंत्री दिल्ली जीत की कामना लेकर प्रयागराज में आयोजित   महाकुम्भ में डुबकियां    लगाने  जायेंगे। उन्हें यूपी के मुख्यमंत्री को पापमुक्त करने के लिए भी डुबकी लगना है। रहल गाँधी या उनके परिवार ने अपने आपको महाकुम्भ से मुक्त रखा है। शायद उन्हें न मोक्ष की कामना   है और न पापों से मुक्ति की। मुमकिन है कि  वे अपने आपको पापी समझते ही न हों। कांग्रेस की सहयोगी समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तो महाकुम्भ में डुबकी  लगा ली है। लेकिन पुण्य लाभ किसे मिलने वाला है इसका पता 8 फरवरी को ही चलेगा।  </p>
<p>आपको बता दें कि दिल्ली   भले ही पूर्ण राज्य नहीं है किन्तु यहां विधानसभा के चुनाव 1952  से ही हो रहे है।  यहाँ के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के चौधरी ब्रम्ह प्रकाश थे। फिर गुरुमुख निहाल सिंह  मुख्यमंत्री बने ।  दिल्ली में 1956  से 1993  तक विधानसभा के चुनाव नहीं हुए और जब 1993  में दोबारा विधानसभा के चुनाव हुए तो 1998  तक भाजपा ही सत्ता में रही ।  इस काल में भाजपा ने मदनलाल खुराना ,साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया।</p>
<p>1998  से 2013  तक दिल्ली पर कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का एकछत्र राज रहा। 2013  में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीनी ,और तब से आजतक आम आदमी पार्टी ही दिल्ली की सत्ता में है।  हालाँकि इस बीच दो बार मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में आरोपी बनने के बाद पद छोड़ना पड़ा ।  इस समय दिल्ली में आतिशी मलना खड़ाऊ राज कर रहीं हैं। अब देखना ये है कि  आम आदमी पार्टी लगातार सत्ता में बने रहने का कीर्तिमान  बना पाती है या नहीं ?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 16:30:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पटेल नगर विधान सभा में निर्णायक मतदाता पूर्वांचलियों की अनदेखा करते राजनीतिक दल पर पूर्वांचली पड़ सकते है भारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>दिल्ली-</strong> दिल्ली में चल रहे इस चुनावी माहौल ने जहां इस कड़कड़ाती ठंड में भी गर्मी का एहसास दिला रही है और हर राजनीतिक दल हर वर्ग के वोटरों को लुभाने में लगे है वही बात करें तो पूर्वांचली मतदाता इस विधानसभा के चुनाव में केंद्र बने हुए है। भाजपा, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस तीनों बड़े दल पूर्वांचली मतदाता को नए नए लुभावने वादों से बांधने में लगे है। दिल्ली में पहली बार इस विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय राजनीतिक दल पूर्वांचली मतदाता को लुभाने के लिए प्रदेश स्तर से भोजपुरी गीतों के माध्यम से चुनावी गीत लांच करते देखे</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147781/decisive-voters-in-patel-nagar-legislative-assembly-ignore-the-purvanchalis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250123-wa0002.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>दिल्ली-</strong> दिल्ली में चल रहे इस चुनावी माहौल ने जहां इस कड़कड़ाती ठंड में भी गर्मी का एहसास दिला रही है और हर राजनीतिक दल हर वर्ग के वोटरों को लुभाने में लगे है वही बात करें तो पूर्वांचली मतदाता इस विधानसभा के चुनाव में केंद्र बने हुए है। भाजपा, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस तीनों बड़े दल पूर्वांचली मतदाता को नए नए लुभावने वादों से बांधने में लगे है। दिल्ली में पहली बार इस विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय राजनीतिक दल पूर्वांचली मतदाता को लुभाने के लिए प्रदेश स्तर से भोजपुरी गीतों के माध्यम से चुनावी गीत लांच करते देखे जा रहे है।</div>
<div> </div>
<div>विधानसभा पटेल नगर में भी पूर्वांचली मतदाता लगभग 40 प्रतिशत है जो कि किसी भी दल की जीत ये स्वयं सुनिश्चित कर सकते है या ये पूर्वांचली स्वयं अपने पूर्वांचल के किसी भी व्यक्ति को अपना अगुआ बनाकर चुनाव लड़ा सकते है और उसको चुनाव जीतबा भी सकते है क्योंकि इनकी इतनी बड़ी संख्या है लेकिन उसके बावजूद भी पटेल नगर विधान सभा से किसी भी बड़े राजनीतिक दल (भाजपा, आप व कांग्रेस) ने अपना उम्मीदवार पूर्वांचल से नहीं दिया उसका एक बड़ा कारण इन पूर्वांचलियों में आपसी मतभेद माना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>पूर्वांचलियों का आपस में मतभेद रखना ही उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा हुआ है जबकि विधानसभा पटेल नगर में पूर्वांचल के अच्छे कद के नेता मौजूद है फिर भी ये पैसे वालों के आगे पीछे चुनाव के मद्दे नजर दौड़ते देखे जा रहे है विधानसभा पटेल नगर से बसपा ने अपना दांव इस बार एक पूर्वांचली पर लगाया है जिनका नाम राम अवतार भारती है जो बसपा की तरफ से उम्मीदवारी कर रहे है।</div>
<div> </div>
<div>अब देखना होगा कि क्या पूर्वांचल अपनी एक जुटता का परिचय देते हुए राजनीतिक दलों के बंधन से अपने आपको मुक्त करते हुए अपने पूर्वांचली भाई की मदद करता है या राजनीतिक दलों के बंधन में बंध कर अपनी मिट्टी की खुशबू को भूलता है। पूर्वांचलियों को जिस दिन स्वयं पर भरोसा हो जाएगा कि जीत हार के बीच में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है उस दिन वे सभी राजनीतिक दलों पर पटेल नगर ही नहीं बल्कि पूरी दिल्ली पर भारी पड़ेंगे।</div>
<div> </div>
<div>बीजेपी ने जिसे अपना उम्मीदवार बनाया है वे पिछली बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी के तरफ से विधायक चुने गए थे और उनके ऊपर ईडी सीबीआई की गत वर्ष रेड भी पड़ चुकी है जिसके बाद वे बीजेपी की सदस्यता लेकर इस बार बीजेपी की तरफ से उम्मीदवारी कर रहे है जबकि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार पिछले चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव हारने के बाद इस चुनाव में आम आदमी पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी कर रहे है।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/147781/decisive-voters-in-patel-nagar-legislative-assembly-ignore-the-purvanchalis</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 18:08:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस छोर  अँधेरा है , उस छोर दिवाली है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जब दीपावली के दुसरे दिन आपके घर अखबार न आये तब इस आलेख  को बार-बार पढ़िए । दीपावली पर आप सभीको हार्दिक शुभकामनायें देते हुए मै गदगद हूँ क्योंकि इस त्यौहार पर मुझे देश में चौतरफा इतनी जगमग दिखाई दे रही है कि दिल बाग़-बाग़ है ।  इस रौशनी में भूख-गरीबी,बेरोजगारी,हिंसा,के तमाम अंधेरे नजर ही नहीं आ रही ।  वे 85  करोड़ लोग भी नजर नहीं आ रहे हैं जो सरकार की अनुकम्पा से पांच किलो अनाज पाकर जिन्दा हैं और अपनी दीपावली मना रहे हैं।</p>
<p>दीपावली पर सरकार  अपने चारों तरफ का अंधकार तिरोहित करने के लिए कितने ठठकर्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145881/this-side-is-dark-and-that-side-is-diwali"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/dipotsaw.webp" alt=""></a><br /><p>जब दीपावली के दुसरे दिन आपके घर अखबार न आये तब इस आलेख  को बार-बार पढ़िए । दीपावली पर आप सभीको हार्दिक शुभकामनायें देते हुए मै गदगद हूँ क्योंकि इस त्यौहार पर मुझे देश में चौतरफा इतनी जगमग दिखाई दे रही है कि दिल बाग़-बाग़ है ।  इस रौशनी में भूख-गरीबी,बेरोजगारी,हिंसा,के तमाम अंधेरे नजर ही नहीं आ रही ।  वे 85  करोड़ लोग भी नजर नहीं आ रहे हैं जो सरकार की अनुकम्पा से पांच किलो अनाज पाकर जिन्दा हैं और अपनी दीपावली मना रहे हैं।</p>
<p>दीपावली पर सरकार  अपने चारों तरफ का अंधकार तिरोहित करने के लिए कितने ठठकर्म कर रही है ।  उस सरजू के तट पर उत्तरप्रदेश की उत्तरदायी  सरकार ने इतनी जगमग कर दिखाई जितनी राजाराम के 14 साल के वनवास से लवटने पार खड़ाऊ  राज चलाने  वाले महाराज भरत भी नहीं करा पाए होंगे ।  सरकार ने 28  लाख दीपक जलाकर एक बार फिर नया विश्व रिकार्ड कायम कर दिखाया। उत्तरप्रदेश में उन्हीं माननीय योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार है जो ' बांटोगे तो काटोगे ' का नारा देकर ' करो या मरो  ' की नकल कर रहे हैं। मुझे लगता है कि  आजादी से पहले यदि   महात्मा योगी होते तो वे  ' करो या मरो के बजाय ' काटो या मरो ' का नारा देते। लेकिन दुर्भाग्य ये कि  तब योगी नहीं थे और महात्मा गाँधी थे ।</p>
<p>पिछले दस साल में देश में यदि भिखमंगों की तादाद बढ़ी है, तो करोड़पतियों की तादाद भी बढ़ी है।  इसका प्रमाण ये हैकि  धनतेरस  पर देश में देश की जनता ने 20 हजार  करोड़ का सोना  और 2500 करोड़ की चांदी  खरीद  ली।   कारों  और मकानों  की खरीदारी  के आंकड़े  तो अभी  मिले  नहीं हैं किन्तु  जानकार कहते  हैं  की धनतेरस  पर देश में 60 हजार  करोड़  का व्यापार  हुआ। जाहिर है कि  देशवासियों के पास पैसा है और खूब पैसा है ,इसीलिए हम भारतीयों  को अब रोना-धोना छोड़ देना चाहिए  , ये काम विपक्ष को करने दीजिये। धनतेरस ने बता और जता दिया है की हम देश की 85  करोड़ क्या सौ करोड़ आबादी को 2028  तक क्या  बल्कि आने वाले 2047  तक पांच किलो अनाज देकर जिन्दा रख सकते हैं।</p>
<p>लोग जानलेवा प्र्दशन की वजह से भले ही दिल्ली छोडकर  भागने को विवश हों लेकिन मेरा मानना है कि  दिल्ली की लोकल सरकार को पटाखों यानि आतिशबाजी पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। ये राष्ट्रविरोधी और धर्म विरोधी निर्णय है ।  राष्ट्र और धर्म के समाने जन जीवन की क्या कीमत ? जनता तो पैदायसी कीड़े -मकोड़े हैं ।  उसे तो मरना ही है। चाहे भूख से मरे ,चाहे प्रदूषण से मरें ।  जिसके नसीब में मरना लिखा हो उसके लिए त्यौहारों का आनंद  तो बल नहीं चढ़ाया जा सकता।  काश ! दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी की सरकार के बजाय खास आदमी पार्टी के किसी योगी आदित्यनाथ की सरकार  होती ।  कम  से कम  फसूकर डालती  जमुना पर भी पचीस पचास लाख दीपक तो जलाये जाते।</p>
<p>दीपावली की खुशियों को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दस मोदी जी की कोशिशों ने दोगुना कर दिया है ।  भारत-चीन की सीमा  पर दोनों देशों के सैनिकों  के बीच मिठाइयों का आदान-प्रदान हो रहा है। मोदी जी विदेश नीति  पर ऐसे चल रहे हैं कि पांव फिसलने का कोई खतरा है ही नहीं।।  यदि कनाडा से हमारा बिगाड़ हुआ तो हमने चीन से रिश्ते सुधार लिए । जम्मू-कश्मीर में भले ही आतंकवाद ने नए सर से सर उठाया हो लेकिन हमने पाकिस्तान के साथ बातचीत का नया सिलसिला तो शुरू कर ही दिया।  दीपावली के मौके पर इससे ज्यादा आप किसी प्रधानमंत्री से और क्या अपेक्षा करते हैं।</p>
<p>माननीय प्रधानमंत्री की विदेश नीति  पर सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने इस बार महाराष्ट्र चुनाव में मोदी जी को ज्यादा इस्तेमाल न करने का फैसला किया  है।  फैसले के मुताबिक मोदी जी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए पीएम नरेंद्र मोदी - 8 ,अमित शाह - 20 ,नितिन गडकरी - 40 ,देवेंद्र फडणवीस - 50 ,चंद्रशेखर बवांकुले - 40  और माननीय योगी आदित्यनाथ - 15 जनसभाएं करेंगे। भाजपा ने मान लिया है की महारष्ट्र में मोदी बम फोड़ने की जरूरत नहीं है। सबसे ज्यादा देवा भाव की फुलझड़ियां चलेंगी । उनसके पीछे अपने  नितिन  गडकरी  के अनार  चलाये  जायेंगे।</p>
<p>बटोगे तो कटोगे का नारा देने वाले योगी जी को केवल 15  बार ये नारा लगाने की इजाजत दी गयी है। वैसे भी महाराष्ट्र में भाजपा और कांग्रेस को छोड़ सभी राजनितिक दल  पहले ही आपस में बंट -कट  चुके   हैं।  इण्डिया गंठबंधन भी बिखरा-बिखरा दिखाई दे रहा है। कुलजमा लब्बो-लुआब ये है कि  देश में चारों  तरफ अमन है -चैन है। डॉन  है ,डैन है। कोई मणिपुर नहीं है, कोई चुनौती नहीं है। सब तरफ सद्भाव है ।  रौशनी है ।  पटाखे हैं। कटोगे तो बाटोगे के भयावह नारे हैं। आप इन्हें कड़ाबीन समझ लीजिये। आप सभी को दीपावली की कोटि-कोटि शुभकामनाएं।<br /><strong> राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 16:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजरीवाल की जमानत से कौन खुश, कौन नाराज़ जाने अंदर की बात </title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर सभी राजनेताओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। जबकि कुछ ने इसे एक उचित जीत के रूप में सराहा, दूसरों ने इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा। किसने क्या कहा ये हम आपको बताते हैं।</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी की जमानत सत्य की एक और जीत है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ की शक्ति और एकजुटता भाजपा के दुख-दर्द देनेवाले राज से भारत की जनता को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141073/who-is-happy-and-who-is-angry-with-kejriwals-bail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/20240430084539_arvind-kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर सभी राजनेताओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। जबकि कुछ ने इसे एक उचित जीत के रूप में सराहा, दूसरों ने इसे एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा। किसने क्या कहा ये हम आपको बताते हैं।</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी की जमानत सत्य की एक और जीत है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ की शक्ति और एकजुटता भाजपा के दुख-दर्द देनेवाले राज से भारत की जनता को मुक्ति दिलवाने जा रही है। एकजुट होकर मतदान का संकल्प लें! </p>
<blockquote class="format2">
<p>आप नेता राघव चड्ढा ने कहा कि हर देशवासी की आँखें ख़ुशी से नम हैं, उनके भाई उनके बेटे अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आने वाले हैं। आज शाम जेल के ताले टूटेंगे, केजरीवाल छूटेंगे। लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का दिल की गहराइयों से आभार। इंक़लाब ज़िंदाबाद, अरविंद केजरीवाल ज़िंदाबाद !</p>
<p>उद्धव ठाकरे गुट के आदित्य ठाकरे ने कहा, “अरविंद केजरीवाल जी को देश में तानाशाही शासन के खिलाफ न्याय और राहत मिलना बदलाव की बयार का एक बड़ा संकेत है।”</p>
<p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर कहा, "मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई है।"</p>
<p>दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर एआईसीसी के दिल्ली और हरियाणा प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा कि अदालत का फैसला सही है। भाजपा ने उन्हें चुनाव प्रचार करने से रोकने का प्रयास किया था।</p>
<p>आप नेता आतिशी ने कहा कि यह सत्य की जीत है...मैं संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आने के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। अरविंद केजरीवाल आज शाम तिहाड़ जेल से बाहर आएंगे और मुझे यकीन है कि वह दिल्ली और देश के लोगों को संबोधित करेंगे।</p>
<p>सीपीआई(एम) नेता बृंदा करात ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। SC का फैसला ED और केंद्र सरकार के चेहरे पर करारा तमाचा है। केंद्र सरकार ने ईडी को विपक्षी दल के खिलाफ एक राजनीतिक एजेंसी के रूप में इस्तेमाल किया है...जब आप एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करते हैं तो यह किस तरह का समान अवसर है?</p>
<p>शिवसेना नेता संजय निपुरम ने कहा कि जेल या जमानत के बजाय पहले उन्हें सीएम पद से हटाया जाना चाहिए। कोई आरोपी जेल से सरकार कैसे चला सकता है?</p>
<p>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि हम अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं...हमें उम्मीद है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी उचित न्याय मिलेगा।</p>
</blockquote>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 16:14:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय सिंह की जान को खतरा, हत्या होने की आशंका: AAP का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>AAP:</strong> संजय सिंह की गिरफ्तारी और कोर्ट से उनकी 3 दिन की रिमांड और बढ़ाने को लेकर दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। आप नेता ने कहा कि कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने लिखा कि अनुमति के बगैर संजय सिंह को कहीं नहीं ले जा सकते, और मिलने के समय में कोई ऊंच नीच नहीं की जाएगी। ईडी बीजेपी की कोई रूल बुक को फॉलो कर रही है, नहीं तो कोर्ट को इतना स्पष्ट लिखित में क्यों देना पड़ता।</p>
<p>बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति का पर्दाफाश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135749/sanjay-singhs-life-in-danger-fear-of-murder-aap"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/aap_large_1205_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>AAP:</strong> संजय सिंह की गिरफ्तारी और कोर्ट से उनकी 3 दिन की रिमांड और बढ़ाने को लेकर दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। आप नेता ने कहा कि कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने लिखा कि अनुमति के बगैर संजय सिंह को कहीं नहीं ले जा सकते, और मिलने के समय में कोई ऊंच नीच नहीं की जाएगी। ईडी बीजेपी की कोई रूल बुक को फॉलो कर रही है, नहीं तो कोर्ट को इतना स्पष्ट लिखित में क्यों देना पड़ता।</p>
<p>बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति का पर्दाफाश हो गया। आप राज्यसभा सांसद संजय सिंह को ईडी द्वारा 2 बार अज्ञात जगह ले जाने की कोशिश की गई। जब संजय सिंह जी ने पूछा कि किससे पूछ कर लेकर जा रहे हो, क्या कोर्ट को बताया है? ईडी ने कहा कि ऊपर से आदेश है। आप नेता ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बीजेपी और ईडी संजय सिंह जी की हत्या की साज़िश रच रही है?</p>
<p>एक विशेष अदालत ने मंगलवार को संजय सिंह की ईडी हिरासत 13 अक्टूबर तक बढ़ा दी और कहा कि संघीय एजेंसी द्वारा हाल ही में की गई तलाशी में नए तथ्यों की खोज और ताजा डिजिटल सबूतों की बरामदगी के आधार पर रिमांड जरूरी है। हिरासत के विस्तार पर बहस के अंत में, सिंह ने न्यायाधीश के सामने दावा किया कि ईडी ने उन्हें "गुप्त उद्देश्य" से अपने कार्यालय से बाहर निकालने की कोशिश की। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2023 12:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AAP ने किया मोदी सरकार को चैलेंज, संजय सिंह के खिलाफ कोई भी प्रूफ हो तो उसे पब्लिक करें </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>AAP:</strong> आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को केंद्र पर उसके सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर उन्हें चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके पास सिंह के खिलाफ कोई भी सबूत हो तो उसे सार्वजनिक करें। संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया था।</p>
<p><strong>छापेमारी में नहीं मिला था कोई सबूत </strong><br />यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135525/aap-challenges-modi-government-if-there-is-any-proof-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/2023_10image_12_22_552303577atishi-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>AAP:</strong> आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को केंद्र पर उसके सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर उन्हें चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके पास सिंह के खिलाफ कोई भी सबूत हो तो उसे सार्वजनिक करें। संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया था।</p>
<p><strong>छापेमारी में नहीं मिला था कोई सबूत </strong><br />यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया कि ईडी और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के 500 से अधिक अधिकारियों ने पिछले 15 महीनों में आप नेताओं से जुड़े विभिन्न स्थानों पर छापे मारे, लेकिन उनके खिलाफ ‘‘एक भी सबूत नहीं मिला''। आप नेता ने कहा, ‘‘उन्होंने मनीष सिसोदिया के आवास, कार्यालयों और कई अन्य स्थानों पर छापे मारे लेकिन उन्हें एक पैसे के भी भ्रष्टाचार का सबूत नहीं मिला और अब संजय सिंह को निशाना बनाया गया है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ईडी अधिकारियों ने संजय सिंह के आवास के चप्पे-चप्पे पर छापेमारी की लेकिन कुछ नहीं मिला। उन्होंने सिंह को गिरफ्तार कर लिया क्योंकि वह लगातार केंद्र के भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते थे।</p>
<p>आतिशी ने कहा कि अगर उनके नेता के खिलाफ कोई सबूत है तो केंद्र को इसे सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देना चाहती हूं कि अगर उन्हें संजय सिंह के खिलाफ कोई सबूत मिला है, तो उन्हें इसे सार्वजनिक करना चाहिए या उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए। वे अपने अधिकारियों को ऐसी किसी भी जगह भेज सकते हैं जहां संजय सिंह गए थे और मैं गारंटी दे सकती हूं कि उन्हें उनके खिलाफ कुछ भी नहीं मिलेगा।''</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र संजय सिंह को गिरफ्तार करके उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रहा है। आतिशी ने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि जब भी कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसे चुप कराने की कोशिश की जाएगी। चूंकि वे उन्हें (सिंह को) चुप नहीं करा सके, इसलिए उन्होंने हमारे नेता को गिरफ्तार कर लिया। भाजपा को पता होना चाहिए कि आप उनकी गिरफ्तारी की धमकियों से डरने वाली नहीं है।''</p>
<p>आप के राज्यसभा सदस्य, पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसौदिया के बाद अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से संबंधित मामले में गिरफ्तार होने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के दूसरे ‘हाई प्रोफाइल' नेता बन गए हैं। सिंह (51) की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। दिल्ली के मंत्री सत्येन्द्र जैन को ईडी ने 30 मई, 2022 को धन शोधन के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Oct 2023 12:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आम आदमी पार्टी ने बुलडोजर आहुति यज्ञ का किया आयोजन </title>
                                    <description><![CDATA[तमकुहीराज के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राकेश तिवारी के आवास पर संपन्न हुआ कार्यक्रम ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127480/aam-aadmi-party-organized-the-program-of-bulldozer-ahuti-yagya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/img_20230220_081416.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ऑनलाइन न्यूज चैनल स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर।</strong>जिले की आम आदमी पार्टी द्वारा रविवार को बुलडोजर आहुति यज्ञ का कार्यक्रम पूर्व विधानसभा प्रत्यासी तमकुही राज के आवास पर दोपहर में संपन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुशीनगर के प्रभारी राकेश तिवारी ने कहा कि लगातार हो रहे गरीबों और मजदूरों के ऊपर मुख्य्मंत्री आदित्यनाथ योगी जी का बुलडोजर अत्याचार कर रहा है और अडानी के महा घोटाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है इसके खिलाफ आम आदमी पार्टी आवाज उठा रही है और इसीलिए आज आम आदमी पार्टी द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश में बुलडोजर आहुति यज्ञ का कार्यक्रम रखा गया है अप कानपुर में जो ब्राह्मण परिवार के साथ निंदनीय घटना घटित हुई है उसकी हम पूरी तरह निंदा करते हैं और प्रशासन से यह मांग भी करते हैं कि पीड़ित ब्राह्मण परिवार के साथ न्याय किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला अध्यक्ष ई o अजय कुमार यादव ने कानपुर में ब्राह्मण परिवार के साथ हुई घटना का निंदा करते हुए कहा कि जनपद में जहां कहीं भी अगर अलग तरीके से गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाएगा तो आम आदमी पार्टी इसका पूरी तरह विरोध करेगी और किसी भी हाल में गलत तरीके से गरीबों की जमीनों पर कब्जा या बुलडोजर चलाने नहीं दिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अल्प संख्यक प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष सेराज अंसारी ने कहा कि यह बहुत ही गलत बात है कि बुलडोजर सिर्फ गरीबों के घरों पर चलाया जा रहा है किसी उन भाजपा के नेता जो गलत कार्य कर रहे हैं उनके घरों पर बुलडोजर नहीं जाता है। पूर्व प्रत्यासी संजय राय ने कहा कि आज के बुलडोजर यज्ञ आहुति कार्यक्रम से हम यह संदेश दे रहे हैं कि गलत तरह से जो बुलडोजर चलाया जा रहा है उस पर रोक लगाई जाए। इस कार्यक्रम में कुशीनगर के प्रभारी राकेश तिवारी, जिला अध्यक्ष इंजीनियर अजय कुमार यादव जिला उपाध्यक्ष नन्दलाल जी रविशंकर सिंह ओमप्रकाश श्रीवास्तव वरिष्ठ नेता ताजमोहम्मद अंसारी अल्पशख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सेराज प्रांत प्रवक्ता नुरुल होडा तबरेज आलम इत्यादि लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 08:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुशीनगर : आम आदमी पार्टी ने किया कार्यकर्ता सम्मेलन</title>
                                    <description><![CDATA[आप जिलाध्यक्ष इंजीनियर अजय कुमार यादव की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125696/kushinagar-aam-aadmi-party-workers-conference"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-11/फोटो-24.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर।</strong>जिले हाटा नगरपालिका और नवसृजित नगर पंचायत सुकरौली में आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में कई सभासद और पार्षद को आवेदन पत्र वितरित किया गया और संगठन विस्तार पर महत्वपूर्ण रूप से चर्चा किया गया और होने वाले नगर पालिका चुनाव में हाटा में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संगठन विस्तार किया और सभी वार्डों में वार्ड प्रभारी नियुक्त किए गए बहुत जल्द ही आम आदमी पार्टी मोहल्ला प्रभारी के नामों की घोषणा करेगी और आने वाले चुनाव में मजबूती से चुनाव लड़ेगी, क्योंकि जनता इन झूठे वादों से त्रस्त हो चुकी है, नगर में चारों तरफ नालियों से बदबू आ रही है इससे त्रस्त है और आस भरी नजरों से आम आदमी पार्टी की तरफ देख रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यकर्ता सम्मेलन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष इंजीनियर अजय कुमार यादव ने किया साथ में महिला विंग की जिलाध्यक्ष श्रीमती चंदा गोंड और पार्षद पद के प्रत्याशी विनोद यादव हाटा नगर के प्रभारी और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अतुल पांडे पडरौना के पूर्व प्रत्याशी और जिले के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविशंकर सिंह कुशीनगर जिले के आम आदमी पार्टी के स्पीकर ताज मोहम्मद अंसारी सहित जिले के महासचिव मुकेश सुमन सुकरौली नगर पंचायत के भावी उम्मीदवार महेंद्र चौहान और सुजीत के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 05:54:14 +0530</pubDate>
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