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                <title>सामाजिक सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सामाजिक सुरक्षा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>*सिद्धार्थनगर में ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा दर्द, प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपा*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिला मुख्यालय पर सोमवार को ग्राम रोजगार सेवकों ने प्रभारी मंत्री अनिल राजभर को कलेक्ट्रेट परिसर में घेर लिया। केंद्र सरकार के '12 साल बेमिसाल' कार्यक्रम के समापन के बाद  जनपद प्रभारी मंत्री जैसे ही बाहर निकले, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया। मंत्री को कड़ी धूप में करीब 15 मिनट तक खड़े होकर उनकी मांगें सुननी पड़ीं। ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश मंत्री कुलदीप द्विवेदी के नेतृत्व में जिले भर से आए रोजगार सेवक अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी 10 सूत्रीय मांगों में नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानव संसाधन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181241/the-pain-of-village-employment-servants-in-siddharthnagar-memorandum-submitted"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781529541490.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिला मुख्यालय पर सोमवार को ग्राम रोजगार सेवकों ने प्रभारी मंत्री अनिल राजभर को कलेक्ट्रेट परिसर में घेर लिया। केंद्र सरकार के '12 साल बेमिसाल' कार्यक्रम के समापन के बाद  जनपद प्रभारी मंत्री जैसे ही बाहर निकले, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया। मंत्री को कड़ी धूप में करीब 15 मिनट तक खड़े होकर उनकी मांगें सुननी पड़ीं। ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश मंत्री कुलदीप द्विवेदी के नेतृत्व में जिले भर से आए रोजगार सेवक अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी 10 सूत्रीय मांगों में नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानव संसाधन नीति लागू करना, बकाया मानदेय भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> यह घटना कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित '12 साल बेमिसाल' कार्यक्रम के  बाद हुई। इस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री अनिल राजभर के साथ जिले के कई अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्त होने पर मंत्री जैसे ही सभागार से बाहर आए, रोजगार सेवक उनकी ओर बढ़े और नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मंत्री के चारों ओर जमा हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन सहित जिले के लगभग सभी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे। अचानक बनी इस स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाला, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और अधिकारियों की निगाहें मंत्री और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रही बातचीत पर टिकी रहीं। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री को बताया कि प्रदेश में लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवक पिछले कई वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे हैं। वे लंबे समय से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील कर रहे हैं। प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने ग्राम रोजगार सेवकों को आश्वासन दिया कि  मांगों पर विचार होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>*खन्ना में आंगनवाड़ी वर्कर्स और सखियों को ‘मावां-ध्यान सत्कार योजना’ के लिए दो दिन की ट्रेनिंग दी गई*</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>खन्ना, (लुधियाना),</strong> पंजाब सरकार की चलाई जा रही ‘मावां-ध्यान सत्कार योजना’ के तहत, सब-डिवीजन खन्ना की आंगनवाड़ी वर्कर्स और सखियों के लिए शनिवार और रविवार को किशोरी लाल जेठी (गर्ल्स) स्कूल ऑफ़ एमिनेंस, खन्ना में स्कीम के योग्य लाभार्थियों को रजिस्टर करने के लिए दो दिन की ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रेनिंग वर्कशॉप की अध्यक्षता सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट खन्ना श्रीमती स्वाति तिवाना ने की। उन्होंने कहा कि ‘माँ-बेटी सत्कार योजना’ का फ़ायदा हर योग्य माँ-बेटी तक पहुँचाने के लिए सही और समय पर रजिस्ट्रेशन बहुत ज़रूरी है। इस काम में आंगनवाड़ी वर्कर और सखियों की भूमिका सबसे अहम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सब</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181211/in-khanna-anganwadi-workers-and-sakhis-were-given-two-days"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000905517.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>खन्ना, (लुधियाना),</strong> पंजाब सरकार की चलाई जा रही ‘मावां-ध्यान सत्कार योजना’ के तहत, सब-डिवीजन खन्ना की आंगनवाड़ी वर्कर्स और सखियों के लिए शनिवार और रविवार को किशोरी लाल जेठी (गर्ल्स) स्कूल ऑफ़ एमिनेंस, खन्ना में स्कीम के योग्य लाभार्थियों को रजिस्टर करने के लिए दो दिन की ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रेनिंग वर्कशॉप की अध्यक्षता सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट खन्ना श्रीमती स्वाति तिवाना ने की। उन्होंने कहा कि ‘माँ-बेटी सत्कार योजना’ का फ़ायदा हर योग्य माँ-बेटी तक पहुँचाने के लिए सही और समय पर रजिस्ट्रेशन बहुत ज़रूरी है। इस काम में आंगनवाड़ी वर्कर और सखियों की भूमिका सबसे अहम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सब डिवीज़नल मजिस्ट्रेट खन्ना स्वाति टिवाना ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को मज़बूत करने के लिए चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री माँ-बेटी सत्कार योजना’ के तहत रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू किया जाना है। इस स्कीम का मुख्य मकसद राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत करना है। इस कैंपेन के तहत अलग-अलग गाँवों और शहरों में कैंप लगाकर योग्य महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बारे में और जानकारी देते हुए SDM स्वाति टिवाना ने कहा कि स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाया गया है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ इसका फ़ायदा उठा सकें। रजिस्ट्रेशन ट्रेनिंग वर्कशॉप में महिलाओं को स्कीम का फ़ायदा पहुँचाने के लिए उनसे ज़रूरी डॉक्यूमेंट लेने के बारे में भी जानकारी दी गई है। सरकार का मकसद यह पक्का करना है कि हर योग्य महिला को इस स्कीम का फ़ायदा मिले और कोई भी छूट न जाए। उन्होंने कहा कि इस स्कीम से जुड़ी महिलाओं में बहुत उत्साह है। सरकार की इस पहल की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ़ उनकी आर्थिक हालत सुधरेगी, बल्कि उन्हें अपने परिवार और समाज में ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ जीने का मौका भी मिलेगा। सरकार ने आने वाले समय में ऐसी जनहितैषी स्कीमें जारी रखने का भरोसा दिया है, जिससे महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को और मज़बूती मिलेगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:21:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कामगारों के शोषण के खिलाफ हैदराबाद में आई एल ओ की बैठक में होगी नियम कानून बनाने पर चर्चा : राकेशमणि पाण्डेय </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>हैदराबाद में आगामी 22 और 23 में को होने वाली आई एल ओ की बैठक में एनएफआईटीयू के प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय भी शामिल होंगे।  आई एल ओ की यह महत्वपूर्ण बैठक प्लेट फार्म वर्कर गिंग, डिलवरी बॉय के रूप, ट्रेवल्स वर्कर जैसे कार्यों को करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर अन्तर्राष्ट्रीय कानून व नियमावली बनाये जाने से संबंधित है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने बताया कि इन प्लेटफार्म वर्करों के लिए कार्य योजनाएं तैयार करने के लिए आईएलओ की पहल पर भारत सरकार के समस्त ट्रेड यूनियनों की सहभागिता से दिल्ली, हैदराबाद में पूर्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179577/rakeshmani-pandey-there-will-be-discussion-on-making-rules-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001926529.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>हैदराबाद में आगामी 22 और 23 में को होने वाली आई एल ओ की बैठक में एनएफआईटीयू के प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय भी शामिल होंगे।  आई एल ओ की यह महत्वपूर्ण बैठक प्लेट फार्म वर्कर गिंग, डिलवरी बॉय के रूप, ट्रेवल्स वर्कर जैसे कार्यों को करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर अन्तर्राष्ट्रीय कानून व नियमावली बनाये जाने से संबंधित है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने बताया कि इन प्लेटफार्म वर्करों के लिए कार्य योजनाएं तैयार करने के लिए आईएलओ की पहल पर भारत सरकार के समस्त ट्रेड यूनियनों की सहभागिता से दिल्ली, हैदराबाद में पूर्व में भी दो बैठके हो चुकी है और तीसरी बैठक 22 व 23 मई को हैदराबाद में पुनः आयोजित की गयी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वरिष्ठ श्रमिक नेता राकेश मणि पांडे ने बताया कि  कामगारों की हित में इस महत्वपूर्ण बैठक में पिछले 02 बैठको की कार्यवृत्ति पर चर्चा करने और आम सहमति के आधार पर कानूनी निर्माण के लिए एक प्रशस्त्र एक रास्ता तैयार किया जायेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अनेक श्रमिक आंदोलन के सफल अगुवाकार राकेश मणि पांडे ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ दुनिया के मजदूरों के लिए एक कार्य योजना तैयार करती है और इसके सदस्य संगठन देश इन कार्य योजनाओ को कानून बनाकर कर लागू करने का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि हैदराबाद की बैठक में सभी पंजीकृत व मान्यता प्राप्त केन्द्रीय संगठन के पदाधिकारी भांग लेंगे जिसमें एनएफआईटीयू के सदस्य भी सम्मिलित होंगे। इसमें प्लेट फार्म वर्करों की कार्यदशा, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक संरक्षण और भविष्य सुरक्षा व चिकित्सीय सुविधा के लिए नियमावली बनाये जाने पर गहन विचार विमर्श किये जायेंगे और सदस्य देशो से इसे कानून को मूर्त रूप में लाकर इनके संरक्षण के लिए प्रयास करेगी।</div><div style="text-align:justify;">राकेशमणि पाण्डेय ने बताया कि भारत सहित सभी देशों में ऑन लाईन बाजार व्यवस्था होने के कारण प्लेट फार्म वर्करों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और करोड़ों युवा इसमें जुड़ चुके हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 19:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मई विश्व मजदूर दिवस पर विशेष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मई के महीने में विश्वभर प्रतिवर्ष 1 तारीख को मेहनतकशों के त्यौहार के रूपमें मनाया जाता है। यह दिवस उन श्रमिकों, मजदूरों और कामगारों के सम्मान में समर्पित है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम से समाज और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह औपचारिक उत्सव नहीं, अपितु श्रमिकों के अधिकारों, उनके संघर्षों और उनकी उपलब्धियों को स्मरण करने का सशक्त अवसर है। साथ ही, यह हमें उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के संकल्प की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें स्मरण कराता है कि आज जो ‘आठ घंटे कार्य, आठ घंटे विश्राम और आठ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177837/may-special-on-world-labor-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260423-wa0008.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मई के महीने में विश्वभर प्रतिवर्ष 1 तारीख को मेहनतकशों के त्यौहार के रूपमें मनाया जाता है। यह दिवस उन श्रमिकों, मजदूरों और कामगारों के सम्मान में समर्पित है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम से समाज और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह औपचारिक उत्सव नहीं, अपितु श्रमिकों के अधिकारों, उनके संघर्षों और उनकी उपलब्धियों को स्मरण करने का सशक्त अवसर है। साथ ही, यह हमें उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के संकल्प की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें स्मरण कराता है कि आज जो ‘आठ घंटे कार्य, आठ घंटे विश्राम और आठ घंटे मनोरंजन’ का अधिकार हमें प्राप्त है, वह किसी की कृपा का फल नहीं है। दीर्घकालीन संघर्षों का प्रतिफल है। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में औद्योगिक क्रांति के समय श्रमिकों का शोषण चरम पर था। उनसे 12 से 16 घंटे तक कार्य कराया जाता था, जबकि उन्हें न तो उचित वेतन मिलता था और न ही सुरक्षित कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अन्याय के विरुद्ध श्रमिकों ने संगठित होकर संघर्ष प्रारंभ किया। वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो नगर में मजदूरों ने आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल की, जिसे “हेमार्केट आंदोलन” के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन श्रमिक इतिहास का एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसने पूरे विश्व में श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलायी और अंततः आठ घंटे के कार्यदिवस की अवधारणा को मान्यता दिलायी। श्रमिक आंदोलनों के इतिहास में 1871 का ‘पेरिस कम्यून’ भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस ऐतिहासिक घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि श्रमिक वर्ग अपने सामूहिक साहस और संगठन के बल पर सत्ता को अपने हाथों में लेकर एक अधिक न्यायपूर्ण और समानतापूर्ण व्यवस्था स्थापित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, 1917 की रूसी क्रांति तथा 1949 की चीनी क्रांति जैसे आंदोलनों ने भी यह स्पष्ट किया कि संगठित श्रमिक वर्ग सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावशाली माध्यम बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में भी मजदूर दिवस का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। इसका प्रथम आयोजन 1923 में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में किया गया था, जिसकी पहल श्रमिक नेता सिंगारवेलु चेट्टियार ने की थी। तब से यह दिवस भारत में श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए निरंतर मनाया जाता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी मजदूर वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। 1908 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की गिरफ्तारी के विरोध में हुई हड़ताल, 1930 का शोलापुर आंदोलन तथा 1946 का नौसैनिक विद्रोह इस तथ्य के सशक्त प्रमाण हैं कि श्रमिकों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूर समाज का वह आधारभूत वर्ग है, जो अपने श्रम और समर्पण से राष्ट्र की प्रगति को गति प्रदान करता है। निर्माण कार्य, कृषि, उद्योग, परिवहन और सेवा क्षेत्र प्रत्येक क्षेत्र में उनका योगदान है। वे न केवल आर्थिक विकास को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज की संरचना को भी स्थायित्व प्रदान करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बावजूद, यह एक कटु सत्य है कि आज भी अनेक मजदूर उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आधुनिक युग में श्रमिकों की स्थिति में कुछ सुधार अवश्य हुआ है, किंतु अनेक चुनौतियां अभी भी विद्यमान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। उन्हें स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा और पेंशन जैसी आवश्यक सुरक्षा प्राप्त नहीं हो पाती। इसके अतिरिक्त, बाल श्रम और महिला श्रमिकों के साथ होने वाला भेदभाव भी समाज के समक्ष गंभीर समस्या के रूप में उपस्थित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, तकनीकी विकास और वैश्वीकरण ने श्रम के स्वरूप को बदल दिया है। गिग इकॉनमी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अस्थायी रोजगार के नए मॉडल ने अवसरों के साथ-साथ असुरक्षाएं भी बढ़ाई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए नई और प्रभावी नीतियां बनाई जाएं, ताकि बदलते समय के साथ उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मजदूर दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में अपने श्रमिकों के साथ न्याय कर रहे हैं। यह केवल सरकार या उद्योगपतियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह श्रमिकों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का व्यवहार करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा और जागरूकता, श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रमुख साधन हैं। जब श्रमिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तब वे अपने हितों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से उनके लिए बेहतर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। मई दिवस का महत्व केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह एक सतत प्रक्रिया है, जो हमें प्रतिदिन श्रमिकों के सम्मान और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रेरित करती है। यह दिवस हमें एक ऐसे समाज की कल्पना करने के लिए प्रेरित करता है, जहां शोषण, असमानता और अन्याय के लिए कोई स्थान न हो, और जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूर दिवस श्रम, संघर्ष, एकता और परिवर्तन का प्रतीक है। यह हमें यह सिखाता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके श्रमिकों के कल्याण और सम्मान में निहित होती है। अतः हमें इस दिवस की भावना को आत्मसात करते हुए एक अधिक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण और मानवीय समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। यही मजदूर दिवस की सच्ची सार्थकता है। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं)</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:35:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने  न्यूनतम वेतन बढ़ाने के आन्दोलन किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176421/india-is-rapidly-moving-towards-becoming-a-third-economy-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/india-set-to-become-third-largest-economy-in-world.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण से मजदूर मजबूर हो गये आन्दोलन करने को ।नोएडा मजदूर आन्दोलन से पहले विश्व में श्रमिक आन्दोलन के इतिहास को भी थोड़ा मूड कर देखना होगा क्यों हर शताब्दी में मजदूर आन्दोलित हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व में जब मजदूरों की आर्थिक सामाजिक पारिवारिक स्थिति बद से बदत्तर होने लगी तब विश्व में मजदूर क्रान्ति का उदय हुआ 18वी19वी शताब्दी में जो शोषण के ख़िलाफ़ पूंजीवाद विरोधी आन्दोलन 1884कम्युनिस्ट1917रूसी क्रांति के माध्यम से सर्वहारा वर्ग का उदय हुआ था यह संघर्ष काम के घन्टें कम करके बेहतर वेतन और श्रमिक संघों को अधिकार के लिए किया गया था जो सफल रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा में भी मजदूरों ने काम के घन्टो का सही निर्धारण बेहतर वेतनमान के लिए ही संघर्ष कर रहे थे पर जैसा कि भारत में यह सर्व विदित है कि सत्ता के विरोध में शान्ति पूरृण आन्दोलन को बदनाम करने के लिए भाड़े के गूणृडो से तोड़ फोड़ करायाजाता है और आरोप आनृदोलनकरियो पर लगाकर गोली लाठी के दम पर सरकार इन।दोलन को कुचल‌देती है।यही नोएडा भी हुआ ।आनृदोलन उग्र हुआ तोड़फोड़ आगजनी सड़कों पर शुरू हुआ पर उसमें मजदूर तो नहीं रहा होगा यह मेरा मानना है।नोएडा का युवा मजदूर शायद ही विश्व के श्रमिक आंदोलन का इतिहास कभी पढ़ा सुना होगा या नहीं पर हक के लिए लडे यही बहुत बड़ी आज के सरकार में उनकी कामयाबी है की सड़क पर दो दिन ही सही अपने हकों के लिए आये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में भी रूसी क्रांति से प्रेरित होकर श्रमिक आन्दोलन 1875मे पहली बार बाम्बे में हुआ थाफिर1920मेमिल मजदूरों ने  हड़ताल कियाथा  उसी तरह नोएडा में पहली बार  मजदूरों ने किया नोएडा के मजदूर आन्दोलन में कोई संगठित मजदूर संघ नहीं था बस थे सब मिलों के मजदूर बिना संगठन का आन्दोलन था पर बदनाम तो किसी ने करने का कुकृत्य तो आगजनी तोड फोड़ कर किया ।आन्दोलन अच्छा रहा सरकार मिल मालिकोक्षने हित किया समाधान निकला पर जैसा मजदूर चाह रहा था वैसा तो नहीं निकला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सभी निजीकरण के क्षेत्रों में काम करने वालों को पहले विश्व के मजदूर नेताओं के बारे थोड़ा पढ़ना चाहिए कैसे आन्दोलन किया सफलता मिली ।उस समय इस तरह के संसाधन नहीं थे कि आपके आन्दोलन को तत्काल सरकार तक पहुंचा दिया जाये जैसा आज सोशल मिडिया प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया है।1808के दशक मे गोम्पर्स संगठित व्यापार और श्रम संघों ने संघ की स्थापना  में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई।जब 1886मे फाटलू FOTLU का पुनर्गणन अमेरिकन फेडरेशन आफ लेबर के रुप में हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में नारायण  मेधाजी लोखंडे 1884/97भारत में ट्रेंड यूनियन आनृदोलन के जनक थे।आज भी  राजनिति दलों के श्रमिक संगठन है जैसे भारतीय जनता का भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस का इंटक कम्युनिस्ट का कामरेड पर यह संगठन सब सरकिरी दलिल से इन संगठनों के लोग कभी भी मिल मजदूरों निजिकरण में काम करनेवाले अकुशल और तकनिकी रूप से क्सक्षम मजदूरों के लिए नहीं लड़ाई लगी  परिणाम स्वरूप मिलों और कार्पोरेट घरानों ने मजदूरों का हर तरह से शोषण करके अपने लिए लाभ का अफसर बनाने लग गये ।मजदूर केमेहनत का पैसा वह अपने ऐशो आराम अपने कारोबार बढ़ाने लगाना शुरू कर दिया मजदूरों को झोपडी वाला बेदम बना दिया जिसका परिणाम समय समय पर मिलो और बड़े बड़े कार्पोरेट उघोगो में आन्दोलन हुआ पर सब सर्किल और मजदूरों के दलाल नेताओं की आपसी सांठगांठ में भेंट चढ़ता गया मजदूर मजबूर होता गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा का का आन्दोलन मजदूरों के अशनतोष की सामान्य क्रिया थी बढ़ते महंगाई के दबाव के कारण बस मजदूरी बढ़ाने और कार्यस्थल पर सुविधाओ की कमी  ने उन से सड़कों पर उतार दिया इसमें श्रमिक नेता संगठन कुछ नहीं था बस सब मजदूर थे।।जैसा भारत सरकार का एक चरित्र बन गया है आन्दोलन की जड़ को बिना समझे पुलिस से लाठी चार्ज करने की एक आम सिद्धांत बना लिया कि आन्दोलन नहीं करने देंगे वैसे 2814से देश में तो यही हो रहा जो भी पार्टी किसान छात्र मजदूर आन्दोलन किया सबको लाठी के बल पर और जेल में भेजकर दबाया जा रहा अब तो सोनल मिडिया पर अगर आन्दोलन के बारे लिखा बोला तो देशद्रोह का मुकदमा तमाशा सोशल मिडिया के लोग आज भी जेल में हैं या उनका सोशल मिडिया एकाउंट बन्द करादे रही है सरकार नोएडा का आन्दोलन भी सोशल मिडिया के कारण ही हर घर हर शहर में पहुंच गया कि मजदूर बेहतर वेतन और निर्धारित घन्टो तक काम करने के लिए आन‌दोलन कर रहे हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हर आन्दोलन का चरित्र भी की आन।दोलन में भीड़ होगी नारे लगे गे पुलिस रोकेगी तो आनृदोलन अराजक हो जायेगा यही तो नोएडा के आन्दोलन में हुआ ।आऔघोगिक क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा वहां स्थिरता हो रही उघोग की पूंजी है अगर स्थिरता नहीं होगी तो उघोग बन्द हो जायेगे उघोग पति पलायन करेगा बैंकों का लोन डूबेगा और मजदूरों की नौकरी समाप्त होंगी।।किसी भी राष्ट्र की प्रगति में वहां के श्रमिक को प्राणवायु माना जाता है।हर उघोग रोजगार और आर्थिक विकास को गति देते हैं। वर्तमान में जो अस्थिरता का दौर चल रहा है इस में मजदूर और उघोग दोनों परेशान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जो विश्व में युद्ध शुरू है उससे निश्चित तौर पर हर देश पर असर हो रहि भारत में थोड़ा ज्यादा कारण हम ऊर्जा में आत्मनिर्भर नहीं है कच्चे मारो की आपूर्ति भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है ।जिससे उत्पादन लागत बढ़ रहा है।इन परिस्थितियों में सबसे ज्यदा मजदूर जो मिलों में काम कर रहा प्रभावित हो रहा रोजमर्रा की हर जीत महंगी हो रही उसको जो वेतन मिल रहा उससे गुजारा परिवार का असम्भव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के दौर में दस से पन्द्रह हजार रुपये महीने में कोई भी मजदूर अपना परिवार नहीं पाल सकता नहीं लड़के को पढ़ा सकता है दवा व अन्य खर्च की सोच नहीं सकता है इसी से परेशान होकर नोएडा के मजदूरों ने आन‌दोलन किया कोई गुनाह नहीं था सरकार आज तक जो भी न्यूनतम वेतन निर्धारित किया है वह बहुत कम है ।अब मजदूरों को वास्तव में अकुशल कामगार जो है कम से कम बीस हजार रुपये महीना तथा मिल द्वारा मुफ्त चिकित्सा शिक्षा व रहने को परिवारों कोक्षदोकमरे का मकान दे फिर बारह घन्टे काम ले सकते परन्तु यह नहीं हो रहा साथ में तरह तरह  केक्षकुशल कामगारो को कम से कम चालीस हजार वेतनमिन सरकार तय करें। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूरों के लिए कम से कम बीस लाख का जीवन बीमा दस लाख का मुफ़्त चिकित्सा कार्ड अकुशल कारीगर के लिए इसी तरह कुशलल कारीगरों के लिए भी हो तब जाकर नोएडा जैसा आन्दोलन देश में नहीं होगा। भारत में एक और बात कि हर आन्दोलन वह किसानों का हो मजदूरों का हो छात्रों का हो उसे सतृतादल पाकिस्तान प्रायोजित कह कर बदनाम करने लगती है नोएडा के आन्दोलन को भी सरकार यानि सत्ता दल का विधायक पाकिस्तान प्रायोजित कह दिया और मिडिया जिसे हम गोदी कहते हैं वह चिल्लाने लगी नोएडा मजदूर आनृदोलन को धन पाकिस्तान ने दिया जबकि यह आनृदोलन तो बिना किसी नेता के चलि और सरकार मिल मालिकों से बैठकर समझौता होगया पर क्या यूं पी राजेश की सर्किल जो विधायक भाजपा के थे आनृदोलन को पाकिस्तान प्रायोजित बताया उनके ऊपर कारवाई करेगी नहीं होगा</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैसा किसान आन।लोल जेएनयू आन‌दोलन में सतृतादल के नेता आरोप लगाते पर सरकार मौन थी सरकार ने अपने कुछ सांसदों विधायकों और नेताओं  को इसी काम में लगाया है कि हर आन‌दोलन को बदनाम करो ।यही नोएडा में भी हुआ पर सब कुछ ठीक होगया पर चिनगारी तो मजदूरों की आज कम होग ई है वह शानृत नहीं सुलग रही कब विस्फोटक आग बनेगी यह समय बचियेगा यदि अब मजदूरों को बीस हजार न्यून्तम। वेतन सामाजिक सुरक्षा के लिए बीमा और मुफ्त चिकित्सा नहीं दिया जायेगा तो रूसी क्रांति की तरह पुनः भारत में नये मजदूर क्रान्ति की जरूरत है बस मजदूर जो देश में पार्टी आधार पत्र संगठन है उसे दूर होकर स्वयं अपनी मागो के लिए अहिंसक आन्दोलन को करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब तक देश में श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों को मिले नहीं पूरा करेगी मोक्ष उघोगोक्षको मजदूर आन्दोलन से समस्या होंगी। मजदूरों का यह जो असन्तोष था वह धीरे धीरे अराजकता के वातावरण में बदल सकता है।इस परिस्थिति से बचने के लिए जरूरी है सरकार उघोगपति मजदूर आपस मे बैठकर सही मजदूरी सही काम के घन्टें और कार्यस्थल पर शिक्षा चिकित्सा तथा बेहतर जीवन के लिए बुनियादी सुविधाओं को विकसित करें।अब नीतगत प्रयास हो जिसे देश में विकास की गति बढ़े और देश विश्व में तीसरी अर्थव्यवस्था के रुप स्थापित हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मदरसन के श्रमिका के आन्दोलन के साथ पूरे नोएडा ग्रेटर नोएडा में आन्दोलन  फैल गया हर मिल का मजदूर स्वयं हडताल मे शामिल हो गया कहीं कोई सन्देश नहीं बुलाया नहीं गया बस सोशल मिडिया पर खबर और मिल के बाहर मजदूर अच्छा रहा कि किसी मजदूर के घर पुलिस जाकर घेराबंदी या नजर बन्द नहीं  किया कि आप आन्दोलन में नहीं जायेंगे ।अगर यह आन्दोलन विपक्ष करवा रहा होता तो विपक्ष का हर नेता घर में नजर बन्द हो जाता । यह भी भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक अलोकतांत्रिक तरीका सरकार ने अपनाया है हर आन्दोलन को कुचलने के लिए नेताओं को घर में बन्दी बना दो जनता डर कर आन्दोलन में नहीं भाग लेंगी सरकार कहेगी हमारी सरकार में आजतक कोई आन्दोलन नहीं हुआ । जनता मजदूर किसान छात्र सब सरकार  के साथ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष के साथ पाकिस्तान और विदेशी ताकतें हैं ‌।जब आन्दोलन हो रहा था प्रदेश के मुखिया बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं।  फिर भी आन्दोलरत मजदूर मिल मालिकों और सरकार बैठकर समाधान निकाल लिया कुछ रूपये बढ़ाये पर वह स्थाई समाधान नहीं है।  कानुन नया  बनाये जिसमें न्यूनतम वेतन अकुशल और कुशल तथा तकनीकी के लिए अलग हो तथा हर मजदूर को बीस लाख का जीवन बीमा बीमा की राशि सरकार मिल और कर्मचारी तीनों दे। चिकित्सा मुफ्त दस लाख का कार्ड यूं पी सरकार दे ।आवास मिल दे।  शिक्षा सरकार कार्य स्थल  पर दे।योगी जी ने जो भी अभी कदम उठाया है उसकी सराहना भी होनी चाहिए।उनका कहना सही है श्रमिको के अधिकारों और सम्मान से समझौता नहीं । श्रमिक ही किसी राष्ट्र के उत्थान में महत्व पूर्ण भूमिका अदा करता है। वह  अपने श्रमसे राष्ट्र  के विकास में सहयोग करता है।श्रमिक नहीं होगे  तो उघोग नहीं लगेगे। उघोग नहीं चलेंगे तो विकास नहीं होगा रोजगार नहीं मिलेगा श्रमिक और उघोग विकास के पहिये है दोनों का चलना राष्ट्र हित में सुन्दर होगा। सरकारे बस दोनों के हितों की संरक्षक होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 21:28:16 +0530</pubDate>
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