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                <title>श्रमिक अधिकार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>श्रमिक अधिकार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>*भारतीय मजदूर संघ ने विभिन्न मागों को लेकर ज्ञापन सौंपा </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई सिद्धार्थनगर द्वारा श्रमिकों, कर्मचारियों एवं विभिन्न वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर  प्रधानमंत्री  भारत सरकार, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री  तथा  केंद्रीय वित्तमंत्री  को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी  रवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव  को सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में श्रमिकों एवं कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से  संगठन ने 11 सूत्रीय मांग की कि इन मागों को केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक एवं न्यायोचित निर्णय लिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि श्रमिक एवं कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185418/bharatiya-mazdoor-sangh-submitted-memorandum-regarding-various-demands"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1786975417705.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई सिद्धार्थनगर द्वारा श्रमिकों, कर्मचारियों एवं विभिन्न वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर  प्रधानमंत्री  भारत सरकार, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री  तथा  केंद्रीय वित्तमंत्री  को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी  रवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव  को सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में श्रमिकों एवं कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से  संगठन ने 11 सूत्रीय मांग की कि इन मागों को केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक एवं न्यायोचित निर्णय लिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि श्रमिक एवं कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। उनके हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए। संगठन ने केंद्र सरकार से ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए समयबद्ध एवं सकारात्मक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ जिला इकाई सिद्धार्थनगर के जिला कोषाध्यक्ष  हरिशंकर सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष  सुरेंद्र पाल, जिला कार्यसमिति सदस्य  रतन लाल,  इंद्रजीत,  मनोज कुमार,  कुलदीप गुप्ता,  अमितेश सिंह सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 19:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मांगे पूरी होने तक एचएमकेपी जारी रखेगी मजदूर किसानों के अधिकारों की लड़ाई .राष्ट्रीय अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
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<div style="text-align:justify;">हिन्द</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178440/hmkp-will-continue-the-fight-for-the-rights-of-laborers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001889868-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस बीच श्रमिकों, मजदूरों और कर्मचारियों के हित में लगातार संघर्ष कर रहे हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने व्यक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल कलप्पा ने कहा है कि मई दिवस शुरुआत 1886 में शिकागो में श्रमिक द्वारा 08 घण्टे के कार्य दिवस की मांग को लेकर एतिहासिक संघर्ष से हुई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा के मुताबिक एकता, प्रतिरोध और श्रमिकों द्वारा बड़ी मुश्किल से हासिल किये गये अधिकारों का प्रतीक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा के माध्यम से राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने मई श्रम संघिताओं के तहत श्रमिको के विधानिक अधिकारों का हनन। बढ़ती नौकरी की असुरक्षा ठेका आधारित रोजगार व बेरोजगारी। सामुहिक सौदेबाजी और ट्रेडयूनियन आजादी पर हमला। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो का निजीकरण व विनिवेश। श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और कारपेंर्पोरेट समर्थक नीतिगत दिशाएं जैसे मुद्दों की भी चर्चा करते हुए  हिन्द मजदूर किसान पंचायत की ओर से कड़ा विरोध भी दर्ज कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के अपने संकल्प को तुरन्त दोहराये। राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा ने सभी केन्द्रीय संगठनों व लोक तात्रिक ताकतों से इस मई दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने का आवाहन इसीलिए किया था क्योंकि मई दिवस केवल एक उत्सव नहीं है बल्कि न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का दृढ संकल्प का भी दिन है। हिंद मजदूर किसान पंचायत का जिसके खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा ,जब तक मजदूर श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी सभी मांगे पूर्ण रूप से मानते हुए उन्हें अमलीजामा नहीं पहना दिया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मई विश्व मजदूर दिवस पर विशेष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मई के महीने में विश्वभर प्रतिवर्ष 1 तारीख को मेहनतकशों के त्यौहार के रूपमें मनाया जाता है। यह दिवस उन श्रमिकों, मजदूरों और कामगारों के सम्मान में समर्पित है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम से समाज और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह औपचारिक उत्सव नहीं, अपितु श्रमिकों के अधिकारों, उनके संघर्षों और उनकी उपलब्धियों को स्मरण करने का सशक्त अवसर है। साथ ही, यह हमें उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के संकल्प की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें स्मरण कराता है कि आज जो ‘आठ घंटे कार्य, आठ घंटे विश्राम और आठ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177837/may-special-on-world-labor-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260423-wa0008.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मई के महीने में विश्वभर प्रतिवर्ष 1 तारीख को मेहनतकशों के त्यौहार के रूपमें मनाया जाता है। यह दिवस उन श्रमिकों, मजदूरों और कामगारों के सम्मान में समर्पित है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम से समाज और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह औपचारिक उत्सव नहीं, अपितु श्रमिकों के अधिकारों, उनके संघर्षों और उनकी उपलब्धियों को स्मरण करने का सशक्त अवसर है। साथ ही, यह हमें उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के संकल्प की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें स्मरण कराता है कि आज जो ‘आठ घंटे कार्य, आठ घंटे विश्राम और आठ घंटे मनोरंजन’ का अधिकार हमें प्राप्त है, वह किसी की कृपा का फल नहीं है। दीर्घकालीन संघर्षों का प्रतिफल है। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में औद्योगिक क्रांति के समय श्रमिकों का शोषण चरम पर था। उनसे 12 से 16 घंटे तक कार्य कराया जाता था, जबकि उन्हें न तो उचित वेतन मिलता था और न ही सुरक्षित कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अन्याय के विरुद्ध श्रमिकों ने संगठित होकर संघर्ष प्रारंभ किया। वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो नगर में मजदूरों ने आठ घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल की, जिसे “हेमार्केट आंदोलन” के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन श्रमिक इतिहास का एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसने पूरे विश्व में श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलायी और अंततः आठ घंटे के कार्यदिवस की अवधारणा को मान्यता दिलायी। श्रमिक आंदोलनों के इतिहास में 1871 का ‘पेरिस कम्यून’ भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस ऐतिहासिक घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि श्रमिक वर्ग अपने सामूहिक साहस और संगठन के बल पर सत्ता को अपने हाथों में लेकर एक अधिक न्यायपूर्ण और समानतापूर्ण व्यवस्था स्थापित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, 1917 की रूसी क्रांति तथा 1949 की चीनी क्रांति जैसे आंदोलनों ने भी यह स्पष्ट किया कि संगठित श्रमिक वर्ग सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावशाली माध्यम बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में भी मजदूर दिवस का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। इसका प्रथम आयोजन 1923 में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में किया गया था, जिसकी पहल श्रमिक नेता सिंगारवेलु चेट्टियार ने की थी। तब से यह दिवस भारत में श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए निरंतर मनाया जाता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी मजदूर वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। 1908 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की गिरफ्तारी के विरोध में हुई हड़ताल, 1930 का शोलापुर आंदोलन तथा 1946 का नौसैनिक विद्रोह इस तथ्य के सशक्त प्रमाण हैं कि श्रमिकों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूर समाज का वह आधारभूत वर्ग है, जो अपने श्रम और समर्पण से राष्ट्र की प्रगति को गति प्रदान करता है। निर्माण कार्य, कृषि, उद्योग, परिवहन और सेवा क्षेत्र प्रत्येक क्षेत्र में उनका योगदान है। वे न केवल आर्थिक विकास को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज की संरचना को भी स्थायित्व प्रदान करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बावजूद, यह एक कटु सत्य है कि आज भी अनेक मजदूर उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आधुनिक युग में श्रमिकों की स्थिति में कुछ सुधार अवश्य हुआ है, किंतु अनेक चुनौतियां अभी भी विद्यमान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। उन्हें स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा और पेंशन जैसी आवश्यक सुरक्षा प्राप्त नहीं हो पाती। इसके अतिरिक्त, बाल श्रम और महिला श्रमिकों के साथ होने वाला भेदभाव भी समाज के समक्ष गंभीर समस्या के रूप में उपस्थित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, तकनीकी विकास और वैश्वीकरण ने श्रम के स्वरूप को बदल दिया है। गिग इकॉनमी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अस्थायी रोजगार के नए मॉडल ने अवसरों के साथ-साथ असुरक्षाएं भी बढ़ाई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए नई और प्रभावी नीतियां बनाई जाएं, ताकि बदलते समय के साथ उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मजदूर दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में अपने श्रमिकों के साथ न्याय कर रहे हैं। यह केवल सरकार या उद्योगपतियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह श्रमिकों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का व्यवहार करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा और जागरूकता, श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रमुख साधन हैं। जब श्रमिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तब वे अपने हितों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से उनके लिए बेहतर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। मई दिवस का महत्व केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह एक सतत प्रक्रिया है, जो हमें प्रतिदिन श्रमिकों के सम्मान और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रेरित करती है। यह दिवस हमें एक ऐसे समाज की कल्पना करने के लिए प्रेरित करता है, जहां शोषण, असमानता और अन्याय के लिए कोई स्थान न हो, और जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूर दिवस श्रम, संघर्ष, एकता और परिवर्तन का प्रतीक है। यह हमें यह सिखाता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके श्रमिकों के कल्याण और सम्मान में निहित होती है। अतः हमें इस दिवस की भावना को आत्मसात करते हुए एक अधिक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण और मानवीय समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। यही मजदूर दिवस की सच्ची सार्थकता है। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं)</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:35:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में मजदूरों की दशा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>डा अशोक कुमार चौबे </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सेवानिवृत्त प्रोफेसर क़ृषि पसार शिक्षा </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व  भर मे हर वर्ष एक म ई मजदूर दिवस  के रूप में मनाया जाता है।नारा आसमान में गूंजता है दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ।परन्तु नारो से विश्व के मजदूरों की दशा में बहुत कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी मजदूर मजबूर हैं।  काम के स्थल पर बहुत सी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं फिर भी वह मजदूर किसी के लिए धन अपने पसीने से बढा रहा है। परन्तु उसका परिवर आज भी  झूग्गी में ही पाल रहा है।गन्दे पानी पी रहा है बिना बिजली के साथ जीवन जी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177754/condition-of-workers-in-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas20.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>डा अशोक कुमार चौबे </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सेवानिवृत्त प्रोफेसर क़ृषि पसार शिक्षा </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व  भर मे हर वर्ष एक म ई मजदूर दिवस  के रूप में मनाया जाता है।नारा आसमान में गूंजता है दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ।परन्तु नारो से विश्व के मजदूरों की दशा में बहुत कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी मजदूर मजबूर हैं।  काम के स्थल पर बहुत सी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं फिर भी वह मजदूर किसी के लिए धन अपने पसीने से बढा रहा है। परन्तु उसका परिवर आज भी  झूग्गी में ही पाल रहा है।गन्दे पानी पी रहा है बिना बिजली के साथ जीवन जी रहा है ।जिसको बड़े शहरों में मजदूरों की बस्ती मलिन बस्ती के नाम से जाना जाता है। उन्हीं बस्तियों में रह रहा है क ई मजदूरों का परिवार सड़को के किनारे पटरियों पर तो कुछ नाले के किनारे बैठे है । सरकार गाहे बेगाहे उनके पालीथीन के घर  को उठा ले जाती है।अतिक्रमण हटाने के नाम पर ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भारतके हर शहर के उघोग  में काम करनेवाले संगठित और असंगठित मजदूरों की कहानी है।मजदूरों को समय से मजदूरी नहीं ।तो काम का समय बारह घन्टें होते हैं।  मजदूरी दस हजार तक सीमित है। न उनके लड़कों को स्कुल नहीं मुफ्त चिकित्सा है फिर भी हम ढोल पीटते है मजदूर देश के विकास में रीढ़ की हड्डी के समान है।  और हर रोज उघोग पति इसी रीढ़ की हड्डी को तोड़ता रहता है । और अपनी आय बढ़ाता रहता  है।मजदूरों को कम मजदूरी देने की होड़ लग गई  है ।विश्व के हर‌ देश के उघोग पति हर समय सस्ते मजदुर खोजते रहते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व के विकसित और अविकसित देशों में भारतके मजदूर सबसे सस्ते में काम कर रहे हैं।  वह जिस भी देश में है बस एक मजबूर मजदूर हैं।  रहने की वहां भी सुविधा बहुत अच्छी नहीं है ।यह कहनें के लिए कि लड़का विदेश में हैं काम कर रहा यही तस्ली जैसे बिहार यूपी बंगाल के मजदूर दिल्ली हरियाणा पंजाब गुजरात  में  रहते हैं। कामोवेश यही स्थिति भारतीय मजदूरो की विश्व के हर देश में है।विश्व में आज भी मजदूर एक तरह से गुलामी में ही जी रहा है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूरों ने सबसे पहले 1886 मे शिकागो में अपने काम के समय को आठ घन्टे निर्धारित करने को तथा बेहतर सुविधा के लिए आन्दोलन किया जो सफल रहा ।आज हालात फिर1886की तरह मजदूरों की हो गई वह संगठित क्षेत्रों के हो या असंगठित क्षेत्र दोनों जगह मजदूर मजबुर बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज पूंजी की दुनिया ने पूरे विश्व को बाजार में बदल दिया है।  जहां हर चीज बिकने को तैयार हैं इसकी कीमत पूजी के मालिक ही तय करते हैं।भारत के किसान खेतों में फसल तैयार करते हैं ।परन्तु बाजार में किस दाम पर बिकेगा वह महाजन ही तय करता है। आज मजदूर खेत की फसल की तरह बिक रहे हैं।शहरों में गांवों में मजदूरों के लिए हर सरकारी घोषणा दिखावा बन कर रह गया है।  गांवों में मनरेगा में क ई क ई महीने सरकार मजदुरी नहीं दे रही है।  दूसरी तरफ मनरेगा में काम कम कर दिया शहरों में मनरेगा नहीं चल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष1886शिकागो में जो मजदूरों को सफलता मिली आज 137साल बाद अपने पुराने मुकाम पर पहुंच ग ई है।अभी कुछ दिनों पहले पूरे देश ने नोएडा के मजदूरों का आन्दोलन‌ देखा है ।मजदूर अपने वेतन को बढाने और काम के घन्टें आठ घन्टें करने तथा कार्यस्थल पर बेहतर सुविधा की मांग थी।पर कुछ थोड़ा सरकार के हस्तक्षेप के बाद मिला परन्तु बीस हजार महीने का वेतन तो नहीं मिला।यह संगठित क्षेत्रों के मजदूरों का हाल है इस से बद्तर हाल असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में पुरुष मजदूरों के साथ संगठित और असंगठित दोनों जगहों पर महिला कार्यबल भी है । परन्तु मजदूरी में भेद भाव आज भी हो रहा है । कहीं कहीं महिलाएं भी बारह घन्टें काम करती है । यह नहीं की उघोगो में पुरूषों का शोषण हो रहा आज विश्व भर में महिला मजदूरों का भी शोषण हो रहा है।बस नारों में ही महिलाओं का सम्मान है विज्ञापनो में ही नारीशक्ति वन्दन है।  जमीनी हकीकत कुछ और है ।मजदूर आन्दोलन में जब महिलाएं शामिल होती है तो उन पर भी पुलिस लाठी चलाती बाल पकड़ कर महिला पुलिस घसीटती हुई ले जाती  है। तब कहीं नहीं किसी मजदूर नेता संगठन का या राजनीतिक नेताओं की आवाज उठता है कि महिलाओं को क्यों लाठी से पुलिस वाले ने पीटा क्यों बाल पकड़ कर घसिटा हर आन्दोलन की यही कहानी होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि भारत को 2047मे विकसित बनाना है फिर सत्तर फीसदी  महिलाओ को महिलाकार्य बल में प्रमुख स्तरो पर भागीदारी सुनिश्चित करना होंगा।भारत का मजदूर बहुत सी कठिनाई से दोक्षचार होता है फिर भी उघोगो पतियों को धन कमा कर देता है। विश्व के किसी देश में यह नियम नही बना है कि उघोगो के लाभ में से कितना प्रतिशत मजदूरों के बेहतर सुविधा पर खर्च होगा । परन्तु सरकारो ने यह एक नया नियम बना लिया कि उघोगपति लाभ का दो प्रतिशत सामाजिक जिम्मेदारी  के तहत और अपने आस पास के गांवों के विकास पर खर्च करेंगे।परन्तु यह नियम नही बना की हर उघोगपति मजदूर के बच्चों की अच्छी शिक्षा चिकित्सा के लिए जिले के स्कुलो और हास्पिटल के लिए अपने लाभ में से दो प्रतिशत हर वर्ष खर्च करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और साथ में उसी दो प्रतिशत के लाभ से मजदूरों को सुविधायुक्त मकान  बनाकर दे सकता है लेकिन ऐसी सुविधा मजदूरों को बहुत कम उघोगो में उपलब्ध है।जिन उघोगो में यह सुविधा थी धीरे धीरे बन्द होते गये मिल  मजदूरों के अनर्गल आन्दोलन से और मजदूर नेताओं की मिल मालिकों से मिली भगत से आज भी भारत में बहुत सी मिले बंगाल मुम्बई तमिलनाडू यूपी में सरकारी और निजी उघोओ की बन्द है । इन उघोगो को चलाने  में अब सरकार कभी रूचि नहीं लेती है नहीं इनका आधुनिक करण किया इन मिलों में काम करने वाले मजदूर आज भी अपने बकाया के लिए कोर्ट में मुकदमे लड रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1920मे मजदूरों ने बड़ी सख्या में आन्दोलन में भाग लिया था जीत गये तब आन्दोलन को भारत की स्वतंत्रता से जोड़ कर देखा गयाथा । नोएडा या अन्य शहरों में वेतन को लेकर मजदूर समय समय पर सड़क पर आते  रहते हैं।वह 1886या1920के आन्दोलन की तरह नहीं हो लड पा रहे हैं । तब मजदूरों का संगठन एक साथ आवाज एक थी आज संगठन बहुत है आवाज बहुत है पर सबक्षबटे हुए हैं तभी काटे जा रहै है।यह नारा सच है सकोगे तो कटोगे।आज वास्तव में मजदूर संगठन सत्ता का विपक्ष है तो सत्ता का संगठन आन्दोलन में नहीं है।नोएडा का आन्दोलन मात्र चार दिन चला और लाठी मुकदमे के डर से समझौता होगया हजार पांच सौ की वेतन वृद्धि से सब समस्या का हल  निकल गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार न जाने क्यों निजी क्षेत्रों के श्रमिको के लिए न्यूनतम वेतन शहरों और महानगरों के स्तर को देख कर निर्धारित नहीं कर पा रही है । नहीं कभी सुनिश्चित कर पा रही है । क्या सरकार के न्यूनतम वेतन नियम को निजी उघोग मानरहे हैं।  या मजदूरो का शोषण हो रहा है।आज बेरोजगारी के कारण भी युवा  आठ से दस  हजार पर मजदूरी करने को मजबूर हैं ।शहरों में गीगा वर्कर्स जोमैटो स्वीटी  ईकार्ट आदि आन लाईन सेवा प्रदाता कम्पनियो में अपने मोटर साईकिल से मजदूरी कर रहे है।तो कितना वेतन और सुरक्षा है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन युवाओं का अगर सड़क दूर्घटना में मृत्यु हो जाये सेवा या डिलीवर के समय तो क्या तीस चालीस लाख का जीवन बीमा कम्पनियों ने कराया है शायद जबाब नहीं।अगर विकलांग हो गये तो क्या कम्पनी सहायताराशि कितना देगी कुछ भी आज स्पष्ट नहीं है ।हर तरह मजदूर का शोषण  विकास की  न ई पहचान बन गया है।  मजदूरो के शोषण से उघोगो का विकास यही विकसित भारत का नारा बन रहा है।  आज सरकार भी शोषण के लिए एक नया नौकरी का तरीका अनुबन्धन और आउट सोर्स की नौकरी यह भी सरकारी शोषण है । पर मौन सरकार और अदालतें है । मजदूरों के शोषण पर ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहली म ई मजदूर दिवस म ई दिवस विश्वभर में मनाया जायेगा नारा भी होगा मजदूरों एक हो जाओ शोषण के विरोध में संघर्ष करो पर शोषण सरकार से शुरू होकर नीजीक्षेत्रो तक नदी की धारा की तरह बहता है।  जो रूकता नहीं है । न रूक पायेगा।सर्रकार भी अब स्थाई नौकरी सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं देना चाहती है । बस अपने सांसदों विधायोंको पंचायत के स्तर पर नेताओं को हर तरह की सुविधा  देकर देश के युवाओं को मजदूर बनाकर रखना चाह रही  है और रख भी रही है । उदाहरण सरकारी मजदूर बंगाल में वोटर नहीं है। परन्तु वह सब चुनाव में ड्यूटी में लगे हैं यही सरकारी मजदूर की मजबूरी है।मजदूरों का पेंशन चिकित्सा मकान सब बन्द  है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु सांसद विधायको को हर तरह की सुविधा मुफ्त पेंशन चिकित्सा मकान बिजली पानी यात्रा। इस वर्ष देश के मजदूरों सरकार से एक सवाल  पूछे ।हम मजदूर देश के विकास में श्रम देकर सहभागी है। परन्तु सांसद विधायक कौन सा श्रम दे रहे हैं।  देश के विकास के लिए यह नये राजा देश के विकास में बाधक है ।इनकी हर सुविधाओं को बन्द करने की मांग पहली म ई मजदूर दिवस पर हो।मजदूरों एक हो जाओ हक अपना मांगों म ई दिवस पर जब तक न मिले तब तक हर तरह से संघर्ष करो लड़ो हक के लिए मजदूर मजबूर मत बनो। मजदूर  देश व समाज  का भाग्य विधाता बनो।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:21:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाल श्रम की व्यथा और कठोर श्रम करते हाथ मूल सुविधाओं से वंचित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177665/the-pain-of-child-labor-and-hard-labor-deprived-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/international-labour-day_-_loom_solar_600x.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध है। इसके बावजूद वास्तविकता यह है कि देश के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और गांवों में लाखों बच्चे आज भी श्रम के बोझ तले दबे हुए हैं। वे कभी चाय की दुकानों पर काम करते दिखते हैं, कभी पटाखा उद्योगों में, तो कभी कचरा बीनते या भीख मांगते हुए। यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि उनके बचपन, शिक्षा और भविष्य का भी हनन है।<br />बाल श्रम की जड़ें गहरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक जागरूकता का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। कई परिवारों में आर्थिक मजबूरी इतनी तीव्र होती है कि वे स्वयं अपने बच्चों को श्रम के दलदल में धकेल देते हैं। इसके अतिरिक्त अभिभावकों की असामयिक मृत्यु, बीमारी या परिवार में अधिक सदस्यों का होना भी बच्चों को समय से पहले जिम्मेदारियों के बोझ तले ला देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल श्रमिकों का शोषण बहुआयामी होता है शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक। उन्हें वयस्क श्रमिकों की तुलना में बहुत कम पारिश्रमिक दिया जाता है, जिससे नियोजकों के लिए वे सस्ते और सुविधाजनक श्रम का स्रोत बन जाते हैं। यही कारण है कि बाल श्रम की प्रवृत्ति समाप्त होने के बजाय कई स्थानों पर बढ़ती दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कानून और योजनाएँ लागू की हैं, जैसे बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, तथा राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा पोषण, शिक्षा और बाल संरक्षण से जुड़ी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनिसेफ जैसे संगठन बाल श्रम उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के कन्वेंशन 138 और 182 विशेष रूप से बाल श्रम के उन्मूलन और खतरनाक कार्यों से बच्चों को मुक्त कराने पर केंद्रित हैं। फिर भी, समस्या का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्यवश, कई बार इन कानूनों का पालन कराने वाली एजेंसियाँ भ्रष्टाचार, लापरवाही और लालफीताशाही की शिकार हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, नियोजक आसानी से बच निकलते हैं और बच्चे शोषण की आग में झोंक दिए जाते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बाल श्रम केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक प्रश्न भी है। जब तक समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ेगी, जब तक हम बच्चों को श्रम नहीं बल्कि शिक्षा और संस्कार का अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होंगे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मजदूर वर्ग की व्यापक स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक आज भी न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षित कार्यस्थल जैसे मूल अधिकारों से वंचित हैं। प्रवासी मजदूरों की स्थिति, विशेषकर महामारी के समय, ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया कि श्रमिक वर्ग हमारे विकास का आधार होने के बावजूद सबसे अधिक उपेक्षित है। आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल श्रम और श्रमिक शोषण के विरुद्ध एक समन्वित और सख्त नीति अपनाई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए कानूनों का कठोर और पारदर्शी क्रियान्वयन,शिक्षा और पोषण योजनाओं का प्रभावी विस्तार, गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा, और समाज में जागरूकता का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। यदि हम सचमुच एक सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने बच्चों को श्रम की बेड़ियों से मुक्त कर शिक्षा और अवसरों की मुख्यधारा में लाना होगा। अन्यथा, आज का यह बाल श्रमिक कल का कमजोर नागरिक बनेगा, और एक सुदृढ़ राष्ट्र का सपना अधूरा ही रह जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:08:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मजदूर: शहरों का ढांचा बुनने वाले, फिर भी हाशिए पर खड़े सपने</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भोर की पहली किरण जब शहर की नींद पर धीरे से दस्तक देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी समय किसी निर्माण स्थल पर हथौड़े की चोटें नए कल की नींव रखने लगती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह ध्वनि केवल पत्थर नहीं तराशती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भविष्य को गढ़ती है जिसे हम विकास के नाम से पहचानते हैं। धूल से सने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छालों से भरे ये हाथ ही वे अदृश्य निर्माता हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी मेहनत से कांच जैसी ऊँची इमारतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चौड़ी सड़कों की रेखाएँ और उड़ान भरते एयरपोर्ट खड़े होते हैं। सुबह पाँच बजे चाय की भाप के बीच वे अपने बच्चों के सपनों को</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177492/the-workers-who-weave-the-framework-of-the-cities-still"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/majdur-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भोर की पहली किरण जब शहर की नींद पर धीरे से दस्तक देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी समय किसी निर्माण स्थल पर हथौड़े की चोटें नए कल की नींव रखने लगती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह ध्वनि केवल पत्थर नहीं तराशती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस भविष्य को गढ़ती है जिसे हम विकास के नाम से पहचानते हैं। धूल से सने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छालों से भरे ये हाथ ही वे अदृश्य निर्माता हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी मेहनत से कांच जैसी ऊँची इमारतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चौड़ी सड़कों की रेखाएँ और उड़ान भरते एयरपोर्ट खड़े होते हैं। सुबह पाँच बजे चाय की भाप के बीच वे अपने बच्चों के सपनों को संवारते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि स्वयं शहर की रोशनी से दूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिरपाल के साए में रातें काटते हैं। उनकी थकान ही उनकी ताकत है—जीने की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाने की और टूटे सपनों को फिर से खड़ा करने की अदम्य जिद। </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई इस सच्चाई का स्मरण कराता है कि जिनके हाथों से दुनिया बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी आवाज़ कभी दबाई नहीं जा सकती—वह हर युग में उठती है और व्यवस्था की नींव हिला देने का सामर्थ्य रखती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये मजदूर जिसे हम ‘अनस्किल्ड’ कहकर खारिज करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल सबसे जरूरी स्किल रखते हैं — वो स्किल जो मशीनें अभी सीख नहीं पाईं। ये लोग बिना तकनीक के भी प्रकृति के संकेत पहचान लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमित संसाधनों में समाधान खोज लेते हैं और छोटी-सी सजगता से बड़े जोखिम टाल देते हैं। शहरों की ऊँचाइयाँ इन्हीं के परिश्रम से आकार लेती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वे व्यवस्था के किनारों पर ही खड़े रह जाते हैं। कोई तपती सड़क पर डिलीवरी करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई आग की लपटों में वेल्डिंग कर भविष्य गढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई दूसरों के घरों में सेवा देकर जीवन को सहारा देता है। उनकी पहचान फिर भी केवल ‘मजदूर’ तक सिमटी रहती है। वास्तव में वे समाज की रीढ़ हैं—जिनके बिना आधुनिकता का ढांचा ढह सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगर ये हाथ थम जाएँ तो स्मार्ट सिटी का सपना भी बिखर जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास की ऊँचाइयों पर खड़ा आज का भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हीं श्रमिक हाथों की नींव पर टिका है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालिया आंकड़े बताते हैं कि अनौपचारिक क्षेत्र लगभग </span>12.81 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ श्रमिकों को रोजगार देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि निर्माण क्षेत्र में </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक कार्यबल असंगठित है। करीब </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ प्रवासी मजदूर अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं और अनौपचारिक क्षेत्र कुल जीडीपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का लगभग </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत योगदान करता है। ई-श्रम पोर्टल पर </span>31 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं। ये केवल आँकड़े नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन अनगिनत कहानियों की गवाही हैं जहाँ पेट भरने के लिए कोई बिहार से दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई उत्तर प्रदेश से मुंबई पहुँचता है। उनकी निःशब्द मेहनत ही देश की प्रगति का असली आधार है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब एआई का युग है। हम स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेशन और रोबोटिक्स की बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एआई भी कहीं न कहीं श्रमिकों की स्किल पर ही निर्भर है। यह डिजाइन बना सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन नियंत्रित कर सकता है और डिलीवरी मार्ग सुधार सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ईंट उठाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेल्डिंग करना या कठिन परिस्थितियों में काम पूरा करना आज भी मनुष्य के ही बस की बात है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एआई गिग वर्कर्स को बेहतर अवसरों से जोड़ रहा है और </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक एआई-आधारित गिग अर्थव्यवस्था के </span>335 <span lang="hi" xml:lang="hi">बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई थकान का अनुमान लगा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर वह वह धैर्य और जिद नहीं दे सकता जो एक मजदूर बारिश में भी काम करते हुए दिखाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एआई मजदूरों का विरोधी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सही उपयोग होने पर उनका सहयोगी बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मजदूरों का संघर्ष अब केवल वेतन या कार्य-घंटों तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य की लड़ाई बन चुका है। गिग अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों युवा तपती धूप और ठंडी रातों में सेवाएँ देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। महिलाएँ घरेलू कार्य से लेकर निर्माण स्थलों तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समान अवसर और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अभी भी गंभीर कमी है। </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं प्रश्नों—महिला सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय—पर केंद्रित है। इतिहास साक्षी है कि मजदूरों की एकजुटता ने बदलाव रचे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे </span>1886 <span lang="hi" xml:lang="hi">का शिकागो हो या आज का भारत। उनकी चुप्पी भी एक गहरा प्रश्न छोड़ती है—क्या उनकी भागीदारी के बिना प्रगति संभव है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमें ऐसे समाज की आवश्यकता है जहाँ मेहनत को किसी वर्ग या दर्जे से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके वास्तविक मूल्य और गरिमा के आधार पर देखा जाए। जहाँ कोई बच्चा अपने पिता को मजदूर कहकर शर्मिंदा न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे गर्व से उनका सम्मान करे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियाँ ऐसी हों कि एआई मजदूरों का सशक्त सहायक बने—उन्हें ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक समय सुरक्षा निगरानी और न्यायसंगत आय की सुनिश्चितता दे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण स्थलों पर एआई-सहायता प्राप्त आधुनिक उपकरण श्रम का बोझ भले हल्का करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आत्मसम्मान और गौरव को कभी कम न करें। जब तक उनकी मुस्कान विकास की मुख्यधारा का हिस्सा नहीं बनती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक हर उपलब्धि अधूरी ही रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रम की धड़कनों से गढ़ी यह दुनिया किसी एक दिन की पहचान नहीं मांगती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि निरंतर सम्मान चाहती है। इस </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को केवल अवकाश न समझें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन हाथों को महसूस करें जो ईंट-पत्थर जोड़कर हमारे सपनों के शहर बनाते हैं। उनकी जीवन-कहानियों को सुनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी आवाज़ को मंच दें और उनके परिश्रम को वह स्थान दें जो वास्तव में उनका अधिकार है। वे लोग जो शहरों की परछाइयों में रहकर भी राष्ट्र की प्रगति का भार उठाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असली निर्माता वही हैं। जब हर श्रमिक का सम्मान समाज की ऊँचाई बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी विकास का अर्थ पूर्ण और सार्थक होगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति श्रम के मौन पसीने में छिपी होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177492/the-workers-who-weave-the-framework-of-the-cities-still</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:50:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने  न्यूनतम वेतन बढ़ाने के आन्दोलन किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176421/india-is-rapidly-moving-towards-becoming-a-third-economy-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/india-set-to-become-third-largest-economy-in-world.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण से मजदूर मजबूर हो गये आन्दोलन करने को ।नोएडा मजदूर आन्दोलन से पहले विश्व में श्रमिक आन्दोलन के इतिहास को भी थोड़ा मूड कर देखना होगा क्यों हर शताब्दी में मजदूर आन्दोलित हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व में जब मजदूरों की आर्थिक सामाजिक पारिवारिक स्थिति बद से बदत्तर होने लगी तब विश्व में मजदूर क्रान्ति का उदय हुआ 18वी19वी शताब्दी में जो शोषण के ख़िलाफ़ पूंजीवाद विरोधी आन्दोलन 1884कम्युनिस्ट1917रूसी क्रांति के माध्यम से सर्वहारा वर्ग का उदय हुआ था यह संघर्ष काम के घन्टें कम करके बेहतर वेतन और श्रमिक संघों को अधिकार के लिए किया गया था जो सफल रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा में भी मजदूरों ने काम के घन्टो का सही निर्धारण बेहतर वेतनमान के लिए ही संघर्ष कर रहे थे पर जैसा कि भारत में यह सर्व विदित है कि सत्ता के विरोध में शान्ति पूरृण आन्दोलन को बदनाम करने के लिए भाड़े के गूणृडो से तोड़ फोड़ करायाजाता है और आरोप आनृदोलनकरियो पर लगाकर गोली लाठी के दम पर सरकार इन।दोलन को कुचल‌देती है।यही नोएडा भी हुआ ।आनृदोलन उग्र हुआ तोड़फोड़ आगजनी सड़कों पर शुरू हुआ पर उसमें मजदूर तो नहीं रहा होगा यह मेरा मानना है।नोएडा का युवा मजदूर शायद ही विश्व के श्रमिक आंदोलन का इतिहास कभी पढ़ा सुना होगा या नहीं पर हक के लिए लडे यही बहुत बड़ी आज के सरकार में उनकी कामयाबी है की सड़क पर दो दिन ही सही अपने हकों के लिए आये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में भी रूसी क्रांति से प्रेरित होकर श्रमिक आन्दोलन 1875मे पहली बार बाम्बे में हुआ थाफिर1920मेमिल मजदूरों ने  हड़ताल कियाथा  उसी तरह नोएडा में पहली बार  मजदूरों ने किया नोएडा के मजदूर आन्दोलन में कोई संगठित मजदूर संघ नहीं था बस थे सब मिलों के मजदूर बिना संगठन का आन्दोलन था पर बदनाम तो किसी ने करने का कुकृत्य तो आगजनी तोड फोड़ कर किया ।आन्दोलन अच्छा रहा सरकार मिल मालिकोक्षने हित किया समाधान निकला पर जैसा मजदूर चाह रहा था वैसा तो नहीं निकला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सभी निजीकरण के क्षेत्रों में काम करने वालों को पहले विश्व के मजदूर नेताओं के बारे थोड़ा पढ़ना चाहिए कैसे आन्दोलन किया सफलता मिली ।उस समय इस तरह के संसाधन नहीं थे कि आपके आन्दोलन को तत्काल सरकार तक पहुंचा दिया जाये जैसा आज सोशल मिडिया प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया है।1808के दशक मे गोम्पर्स संगठित व्यापार और श्रम संघों ने संघ की स्थापना  में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई।जब 1886मे फाटलू FOTLU का पुनर्गणन अमेरिकन फेडरेशन आफ लेबर के रुप में हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में नारायण  मेधाजी लोखंडे 1884/97भारत में ट्रेंड यूनियन आनृदोलन के जनक थे।आज भी  राजनिति दलों के श्रमिक संगठन है जैसे भारतीय जनता का भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस का इंटक कम्युनिस्ट का कामरेड पर यह संगठन सब सरकिरी दलिल से इन संगठनों के लोग कभी भी मिल मजदूरों निजिकरण में काम करनेवाले अकुशल और तकनिकी रूप से क्सक्षम मजदूरों के लिए नहीं लड़ाई लगी  परिणाम स्वरूप मिलों और कार्पोरेट घरानों ने मजदूरों का हर तरह से शोषण करके अपने लिए लाभ का अफसर बनाने लग गये ।मजदूर केमेहनत का पैसा वह अपने ऐशो आराम अपने कारोबार बढ़ाने लगाना शुरू कर दिया मजदूरों को झोपडी वाला बेदम बना दिया जिसका परिणाम समय समय पर मिलो और बड़े बड़े कार्पोरेट उघोगो में आन्दोलन हुआ पर सब सर्किल और मजदूरों के दलाल नेताओं की आपसी सांठगांठ में भेंट चढ़ता गया मजदूर मजबूर होता गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा का का आन्दोलन मजदूरों के अशनतोष की सामान्य क्रिया थी बढ़ते महंगाई के दबाव के कारण बस मजदूरी बढ़ाने और कार्यस्थल पर सुविधाओ की कमी  ने उन से सड़कों पर उतार दिया इसमें श्रमिक नेता संगठन कुछ नहीं था बस सब मजदूर थे।।जैसा भारत सरकार का एक चरित्र बन गया है आन्दोलन की जड़ को बिना समझे पुलिस से लाठी चार्ज करने की एक आम सिद्धांत बना लिया कि आन्दोलन नहीं करने देंगे वैसे 2814से देश में तो यही हो रहा जो भी पार्टी किसान छात्र मजदूर आन्दोलन किया सबको लाठी के बल पर और जेल में भेजकर दबाया जा रहा अब तो सोनल मिडिया पर अगर आन्दोलन के बारे लिखा बोला तो देशद्रोह का मुकदमा तमाशा सोशल मिडिया के लोग आज भी जेल में हैं या उनका सोशल मिडिया एकाउंट बन्द करादे रही है सरकार नोएडा का आन्दोलन भी सोशल मिडिया के कारण ही हर घर हर शहर में पहुंच गया कि मजदूर बेहतर वेतन और निर्धारित घन्टो तक काम करने के लिए आन‌दोलन कर रहे हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हर आन्दोलन का चरित्र भी की आन।दोलन में भीड़ होगी नारे लगे गे पुलिस रोकेगी तो आनृदोलन अराजक हो जायेगा यही तो नोएडा के आन्दोलन में हुआ ।आऔघोगिक क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा वहां स्थिरता हो रही उघोग की पूंजी है अगर स्थिरता नहीं होगी तो उघोग बन्द हो जायेगे उघोग पति पलायन करेगा बैंकों का लोन डूबेगा और मजदूरों की नौकरी समाप्त होंगी।।किसी भी राष्ट्र की प्रगति में वहां के श्रमिक को प्राणवायु माना जाता है।हर उघोग रोजगार और आर्थिक विकास को गति देते हैं। वर्तमान में जो अस्थिरता का दौर चल रहा है इस में मजदूर और उघोग दोनों परेशान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जो विश्व में युद्ध शुरू है उससे निश्चित तौर पर हर देश पर असर हो रहि भारत में थोड़ा ज्यादा कारण हम ऊर्जा में आत्मनिर्भर नहीं है कच्चे मारो की आपूर्ति भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है ।जिससे उत्पादन लागत बढ़ रहा है।इन परिस्थितियों में सबसे ज्यदा मजदूर जो मिलों में काम कर रहा प्रभावित हो रहा रोजमर्रा की हर जीत महंगी हो रही उसको जो वेतन मिल रहा उससे गुजारा परिवार का असम्भव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के दौर में दस से पन्द्रह हजार रुपये महीने में कोई भी मजदूर अपना परिवार नहीं पाल सकता नहीं लड़के को पढ़ा सकता है दवा व अन्य खर्च की सोच नहीं सकता है इसी से परेशान होकर नोएडा के मजदूरों ने आन‌दोलन किया कोई गुनाह नहीं था सरकार आज तक जो भी न्यूनतम वेतन निर्धारित किया है वह बहुत कम है ।अब मजदूरों को वास्तव में अकुशल कामगार जो है कम से कम बीस हजार रुपये महीना तथा मिल द्वारा मुफ्त चिकित्सा शिक्षा व रहने को परिवारों कोक्षदोकमरे का मकान दे फिर बारह घन्टे काम ले सकते परन्तु यह नहीं हो रहा साथ में तरह तरह  केक्षकुशल कामगारो को कम से कम चालीस हजार वेतनमिन सरकार तय करें। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूरों के लिए कम से कम बीस लाख का जीवन बीमा दस लाख का मुफ़्त चिकित्सा कार्ड अकुशल कारीगर के लिए इसी तरह कुशलल कारीगरों के लिए भी हो तब जाकर नोएडा जैसा आन्दोलन देश में नहीं होगा। भारत में एक और बात कि हर आन्दोलन वह किसानों का हो मजदूरों का हो छात्रों का हो उसे सतृतादल पाकिस्तान प्रायोजित कह कर बदनाम करने लगती है नोएडा के आन्दोलन को भी सरकार यानि सत्ता दल का विधायक पाकिस्तान प्रायोजित कह दिया और मिडिया जिसे हम गोदी कहते हैं वह चिल्लाने लगी नोएडा मजदूर आनृदोलन को धन पाकिस्तान ने दिया जबकि यह आनृदोलन तो बिना किसी नेता के चलि और सरकार मिल मालिकों से बैठकर समझौता होगया पर क्या यूं पी राजेश की सर्किल जो विधायक भाजपा के थे आनृदोलन को पाकिस्तान प्रायोजित बताया उनके ऊपर कारवाई करेगी नहीं होगा</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैसा किसान आन।लोल जेएनयू आन‌दोलन में सतृतादल के नेता आरोप लगाते पर सरकार मौन थी सरकार ने अपने कुछ सांसदों विधायकों और नेताओं  को इसी काम में लगाया है कि हर आन‌दोलन को बदनाम करो ।यही नोएडा में भी हुआ पर सब कुछ ठीक होगया पर चिनगारी तो मजदूरों की आज कम होग ई है वह शानृत नहीं सुलग रही कब विस्फोटक आग बनेगी यह समय बचियेगा यदि अब मजदूरों को बीस हजार न्यून्तम। वेतन सामाजिक सुरक्षा के लिए बीमा और मुफ्त चिकित्सा नहीं दिया जायेगा तो रूसी क्रांति की तरह पुनः भारत में नये मजदूर क्रान्ति की जरूरत है बस मजदूर जो देश में पार्टी आधार पत्र संगठन है उसे दूर होकर स्वयं अपनी मागो के लिए अहिंसक आन्दोलन को करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब तक देश में श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों को मिले नहीं पूरा करेगी मोक्ष उघोगोक्षको मजदूर आन्दोलन से समस्या होंगी। मजदूरों का यह जो असन्तोष था वह धीरे धीरे अराजकता के वातावरण में बदल सकता है।इस परिस्थिति से बचने के लिए जरूरी है सरकार उघोगपति मजदूर आपस मे बैठकर सही मजदूरी सही काम के घन्टें और कार्यस्थल पर शिक्षा चिकित्सा तथा बेहतर जीवन के लिए बुनियादी सुविधाओं को विकसित करें।अब नीतगत प्रयास हो जिसे देश में विकास की गति बढ़े और देश विश्व में तीसरी अर्थव्यवस्था के रुप स्थापित हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मदरसन के श्रमिका के आन्दोलन के साथ पूरे नोएडा ग्रेटर नोएडा में आन्दोलन  फैल गया हर मिल का मजदूर स्वयं हडताल मे शामिल हो गया कहीं कोई सन्देश नहीं बुलाया नहीं गया बस सोशल मिडिया पर खबर और मिल के बाहर मजदूर अच्छा रहा कि किसी मजदूर के घर पुलिस जाकर घेराबंदी या नजर बन्द नहीं  किया कि आप आन्दोलन में नहीं जायेंगे ।अगर यह आन्दोलन विपक्ष करवा रहा होता तो विपक्ष का हर नेता घर में नजर बन्द हो जाता । यह भी भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक अलोकतांत्रिक तरीका सरकार ने अपनाया है हर आन्दोलन को कुचलने के लिए नेताओं को घर में बन्दी बना दो जनता डर कर आन्दोलन में नहीं भाग लेंगी सरकार कहेगी हमारी सरकार में आजतक कोई आन्दोलन नहीं हुआ । जनता मजदूर किसान छात्र सब सरकार  के साथ है।</div>
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<div style="text-align:justify;">विपक्ष के साथ पाकिस्तान और विदेशी ताकतें हैं ‌।जब आन्दोलन हो रहा था प्रदेश के मुखिया बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं।  फिर भी आन्दोलरत मजदूर मिल मालिकों और सरकार बैठकर समाधान निकाल लिया कुछ रूपये बढ़ाये पर वह स्थाई समाधान नहीं है।  कानुन नया  बनाये जिसमें न्यूनतम वेतन अकुशल और कुशल तथा तकनीकी के लिए अलग हो तथा हर मजदूर को बीस लाख का जीवन बीमा बीमा की राशि सरकार मिल और कर्मचारी तीनों दे। चिकित्सा मुफ्त दस लाख का कार्ड यूं पी सरकार दे ।आवास मिल दे।  शिक्षा सरकार कार्य स्थल  पर दे।योगी जी ने जो भी अभी कदम उठाया है उसकी सराहना भी होनी चाहिए।उनका कहना सही है श्रमिको के अधिकारों और सम्मान से समझौता नहीं । श्रमिक ही किसी राष्ट्र के उत्थान में महत्व पूर्ण भूमिका अदा करता है। वह  अपने श्रमसे राष्ट्र  के विकास में सहयोग करता है।श्रमिक नहीं होगे  तो उघोग नहीं लगेगे। उघोग नहीं चलेंगे तो विकास नहीं होगा रोजगार नहीं मिलेगा श्रमिक और उघोग विकास के पहिये है दोनों का चलना राष्ट्र हित में सुन्दर होगा। सरकारे बस दोनों के हितों की संरक्षक होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 21:28:16 +0530</pubDate>
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