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                <title>भारत की अर्थव्यवस्था - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारत की अर्थव्यवस्था RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने  न्यूनतम वेतन बढ़ाने के आन्दोलन किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176421/india-is-rapidly-moving-towards-becoming-a-third-economy-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/india-set-to-become-third-largest-economy-in-world.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> नोएडा औघोगिक क्षेत्र में १२अप्रैल से जो मजदूर आन्दोलन शुरू हुआ उस पर कुछ कहने लिखने से पहले यह भी समझने की जरूरत है कि भारत जब विश्व का चौथी अर्थव्यवस्था का देश बन गया है औरविज्ञापनो में सरकार यह दिखा रही है  कि भारत तेजी से तीसरी अर्थव्यवस्था का देश बनने को अग्रसर है तब क्यों नोएडा में मजदूरो ने आन्दोलन किया यह सवाल उठ रहा है परन्तु ज़बाब सही नहीं मिल रहा है कि हम तीसरी अर्थव्यवस्था की और बढ़ रहे या और नीचे अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर जा रहे हैं जिस कारण से मजदूर मजबूर हो गये आन्दोलन करने को ।नोएडा मजदूर आन्दोलन से पहले विश्व में श्रमिक आन्दोलन के इतिहास को भी थोड़ा मूड कर देखना होगा क्यों हर शताब्दी में मजदूर आन्दोलित हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व में जब मजदूरों की आर्थिक सामाजिक पारिवारिक स्थिति बद से बदत्तर होने लगी तब विश्व में मजदूर क्रान्ति का उदय हुआ 18वी19वी शताब्दी में जो शोषण के ख़िलाफ़ पूंजीवाद विरोधी आन्दोलन 1884कम्युनिस्ट1917रूसी क्रांति के माध्यम से सर्वहारा वर्ग का उदय हुआ था यह संघर्ष काम के घन्टें कम करके बेहतर वेतन और श्रमिक संघों को अधिकार के लिए किया गया था जो सफल रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा में भी मजदूरों ने काम के घन्टो का सही निर्धारण बेहतर वेतनमान के लिए ही संघर्ष कर रहे थे पर जैसा कि भारत में यह सर्व विदित है कि सत्ता के विरोध में शान्ति पूरृण आन्दोलन को बदनाम करने के लिए भाड़े के गूणृडो से तोड़ फोड़ करायाजाता है और आरोप आनृदोलनकरियो पर लगाकर गोली लाठी के दम पर सरकार इन।दोलन को कुचल‌देती है।यही नोएडा भी हुआ ।आनृदोलन उग्र हुआ तोड़फोड़ आगजनी सड़कों पर शुरू हुआ पर उसमें मजदूर तो नहीं रहा होगा यह मेरा मानना है।नोएडा का युवा मजदूर शायद ही विश्व के श्रमिक आंदोलन का इतिहास कभी पढ़ा सुना होगा या नहीं पर हक के लिए लडे यही बहुत बड़ी आज के सरकार में उनकी कामयाबी है की सड़क पर दो दिन ही सही अपने हकों के लिए आये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में भी रूसी क्रांति से प्रेरित होकर श्रमिक आन्दोलन 1875मे पहली बार बाम्बे में हुआ थाफिर1920मेमिल मजदूरों ने  हड़ताल कियाथा  उसी तरह नोएडा में पहली बार  मजदूरों ने किया नोएडा के मजदूर आन्दोलन में कोई संगठित मजदूर संघ नहीं था बस थे सब मिलों के मजदूर बिना संगठन का आन्दोलन था पर बदनाम तो किसी ने करने का कुकृत्य तो आगजनी तोड फोड़ कर किया ।आन्दोलन अच्छा रहा सरकार मिल मालिकोक्षने हित किया समाधान निकला पर जैसा मजदूर चाह रहा था वैसा तो नहीं निकला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सभी निजीकरण के क्षेत्रों में काम करने वालों को पहले विश्व के मजदूर नेताओं के बारे थोड़ा पढ़ना चाहिए कैसे आन्दोलन किया सफलता मिली ।उस समय इस तरह के संसाधन नहीं थे कि आपके आन्दोलन को तत्काल सरकार तक पहुंचा दिया जाये जैसा आज सोशल मिडिया प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया है।1808के दशक मे गोम्पर्स संगठित व्यापार और श्रम संघों ने संघ की स्थापना  में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई।जब 1886मे फाटलू FOTLU का पुनर्गणन अमेरिकन फेडरेशन आफ लेबर के रुप में हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में नारायण  मेधाजी लोखंडे 1884/97भारत में ट्रेंड यूनियन आनृदोलन के जनक थे।आज भी  राजनिति दलों के श्रमिक संगठन है जैसे भारतीय जनता का भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस का इंटक कम्युनिस्ट का कामरेड पर यह संगठन सब सरकिरी दलिल से इन संगठनों के लोग कभी भी मिल मजदूरों निजिकरण में काम करनेवाले अकुशल और तकनिकी रूप से क्सक्षम मजदूरों के लिए नहीं लड़ाई लगी  परिणाम स्वरूप मिलों और कार्पोरेट घरानों ने मजदूरों का हर तरह से शोषण करके अपने लिए लाभ का अफसर बनाने लग गये ।मजदूर केमेहनत का पैसा वह अपने ऐशो आराम अपने कारोबार बढ़ाने लगाना शुरू कर दिया मजदूरों को झोपडी वाला बेदम बना दिया जिसका परिणाम समय समय पर मिलो और बड़े बड़े कार्पोरेट उघोगो में आन्दोलन हुआ पर सब सर्किल और मजदूरों के दलाल नेताओं की आपसी सांठगांठ में भेंट चढ़ता गया मजदूर मजबूर होता गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा का का आन्दोलन मजदूरों के अशनतोष की सामान्य क्रिया थी बढ़ते महंगाई के दबाव के कारण बस मजदूरी बढ़ाने और कार्यस्थल पर सुविधाओ की कमी  ने उन से सड़कों पर उतार दिया इसमें श्रमिक नेता संगठन कुछ नहीं था बस सब मजदूर थे।।जैसा भारत सरकार का एक चरित्र बन गया है आन्दोलन की जड़ को बिना समझे पुलिस से लाठी चार्ज करने की एक आम सिद्धांत बना लिया कि आन्दोलन नहीं करने देंगे वैसे 2814से देश में तो यही हो रहा जो भी पार्टी किसान छात्र मजदूर आन्दोलन किया सबको लाठी के बल पर और जेल में भेजकर दबाया जा रहा अब तो सोनल मिडिया पर अगर आन्दोलन के बारे लिखा बोला तो देशद्रोह का मुकदमा तमाशा सोशल मिडिया के लोग आज भी जेल में हैं या उनका सोशल मिडिया एकाउंट बन्द करादे रही है सरकार नोएडा का आन्दोलन भी सोशल मिडिया के कारण ही हर घर हर शहर में पहुंच गया कि मजदूर बेहतर वेतन और निर्धारित घन्टो तक काम करने के लिए आन‌दोलन कर रहे हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हर आन्दोलन का चरित्र भी की आन।दोलन में भीड़ होगी नारे लगे गे पुलिस रोकेगी तो आनृदोलन अराजक हो जायेगा यही तो नोएडा के आन्दोलन में हुआ ।आऔघोगिक क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा वहां स्थिरता हो रही उघोग की पूंजी है अगर स्थिरता नहीं होगी तो उघोग बन्द हो जायेगे उघोग पति पलायन करेगा बैंकों का लोन डूबेगा और मजदूरों की नौकरी समाप्त होंगी।।किसी भी राष्ट्र की प्रगति में वहां के श्रमिक को प्राणवायु माना जाता है।हर उघोग रोजगार और आर्थिक विकास को गति देते हैं। वर्तमान में जो अस्थिरता का दौर चल रहा है इस में मजदूर और उघोग दोनों परेशान हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जो विश्व में युद्ध शुरू है उससे निश्चित तौर पर हर देश पर असर हो रहि भारत में थोड़ा ज्यादा कारण हम ऊर्जा में आत्मनिर्भर नहीं है कच्चे मारो की आपूर्ति भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है ।जिससे उत्पादन लागत बढ़ रहा है।इन परिस्थितियों में सबसे ज्यदा मजदूर जो मिलों में काम कर रहा प्रभावित हो रहा रोजमर्रा की हर जीत महंगी हो रही उसको जो वेतन मिल रहा उससे गुजारा परिवार का असम्भव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के दौर में दस से पन्द्रह हजार रुपये महीने में कोई भी मजदूर अपना परिवार नहीं पाल सकता नहीं लड़के को पढ़ा सकता है दवा व अन्य खर्च की सोच नहीं सकता है इसी से परेशान होकर नोएडा के मजदूरों ने आन‌दोलन किया कोई गुनाह नहीं था सरकार आज तक जो भी न्यूनतम वेतन निर्धारित किया है वह बहुत कम है ।अब मजदूरों को वास्तव में अकुशल कामगार जो है कम से कम बीस हजार रुपये महीना तथा मिल द्वारा मुफ्त चिकित्सा शिक्षा व रहने को परिवारों कोक्षदोकमरे का मकान दे फिर बारह घन्टे काम ले सकते परन्तु यह नहीं हो रहा साथ में तरह तरह  केक्षकुशल कामगारो को कम से कम चालीस हजार वेतनमिन सरकार तय करें। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजदूरों के लिए कम से कम बीस लाख का जीवन बीमा दस लाख का मुफ़्त चिकित्सा कार्ड अकुशल कारीगर के लिए इसी तरह कुशलल कारीगरों के लिए भी हो तब जाकर नोएडा जैसा आन्दोलन देश में नहीं होगा। भारत में एक और बात कि हर आन्दोलन वह किसानों का हो मजदूरों का हो छात्रों का हो उसे सतृतादल पाकिस्तान प्रायोजित कह कर बदनाम करने लगती है नोएडा के आन्दोलन को भी सरकार यानि सत्ता दल का विधायक पाकिस्तान प्रायोजित कह दिया और मिडिया जिसे हम गोदी कहते हैं वह चिल्लाने लगी नोएडा मजदूर आनृदोलन को धन पाकिस्तान ने दिया जबकि यह आनृदोलन तो बिना किसी नेता के चलि और सरकार मिल मालिकों से बैठकर समझौता होगया पर क्या यूं पी राजेश की सर्किल जो विधायक भाजपा के थे आनृदोलन को पाकिस्तान प्रायोजित बताया उनके ऊपर कारवाई करेगी नहीं होगा</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैसा किसान आन।लोल जेएनयू आन‌दोलन में सतृतादल के नेता आरोप लगाते पर सरकार मौन थी सरकार ने अपने कुछ सांसदों विधायकों और नेताओं  को इसी काम में लगाया है कि हर आन‌दोलन को बदनाम करो ।यही नोएडा में भी हुआ पर सब कुछ ठीक होगया पर चिनगारी तो मजदूरों की आज कम होग ई है वह शानृत नहीं सुलग रही कब विस्फोटक आग बनेगी यह समय बचियेगा यदि अब मजदूरों को बीस हजार न्यून्तम। वेतन सामाजिक सुरक्षा के लिए बीमा और मुफ्त चिकित्सा नहीं दिया जायेगा तो रूसी क्रांति की तरह पुनः भारत में नये मजदूर क्रान्ति की जरूरत है बस मजदूर जो देश में पार्टी आधार पत्र संगठन है उसे दूर होकर स्वयं अपनी मागो के लिए अहिंसक आन्दोलन को करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब तक देश में श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों को मिले नहीं पूरा करेगी मोक्ष उघोगोक्षको मजदूर आन्दोलन से समस्या होंगी। मजदूरों का यह जो असन्तोष था वह धीरे धीरे अराजकता के वातावरण में बदल सकता है।इस परिस्थिति से बचने के लिए जरूरी है सरकार उघोगपति मजदूर आपस मे बैठकर सही मजदूरी सही काम के घन्टें और कार्यस्थल पर शिक्षा चिकित्सा तथा बेहतर जीवन के लिए बुनियादी सुविधाओं को विकसित करें।अब नीतगत प्रयास हो जिसे देश में विकास की गति बढ़े और देश विश्व में तीसरी अर्थव्यवस्था के रुप स्थापित हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मदरसन के श्रमिका के आन्दोलन के साथ पूरे नोएडा ग्रेटर नोएडा में आन्दोलन  फैल गया हर मिल का मजदूर स्वयं हडताल मे शामिल हो गया कहीं कोई सन्देश नहीं बुलाया नहीं गया बस सोशल मिडिया पर खबर और मिल के बाहर मजदूर अच्छा रहा कि किसी मजदूर के घर पुलिस जाकर घेराबंदी या नजर बन्द नहीं  किया कि आप आन्दोलन में नहीं जायेंगे ।अगर यह आन्दोलन विपक्ष करवा रहा होता तो विपक्ष का हर नेता घर में नजर बन्द हो जाता । यह भी भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक अलोकतांत्रिक तरीका सरकार ने अपनाया है हर आन्दोलन को कुचलने के लिए नेताओं को घर में बन्दी बना दो जनता डर कर आन्दोलन में नहीं भाग लेंगी सरकार कहेगी हमारी सरकार में आजतक कोई आन्दोलन नहीं हुआ । जनता मजदूर किसान छात्र सब सरकार  के साथ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष के साथ पाकिस्तान और विदेशी ताकतें हैं ‌।जब आन्दोलन हो रहा था प्रदेश के मुखिया बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं।  फिर भी आन्दोलरत मजदूर मिल मालिकों और सरकार बैठकर समाधान निकाल लिया कुछ रूपये बढ़ाये पर वह स्थाई समाधान नहीं है।  कानुन नया  बनाये जिसमें न्यूनतम वेतन अकुशल और कुशल तथा तकनीकी के लिए अलग हो तथा हर मजदूर को बीस लाख का जीवन बीमा बीमा की राशि सरकार मिल और कर्मचारी तीनों दे। चिकित्सा मुफ्त दस लाख का कार्ड यूं पी सरकार दे ।आवास मिल दे।  शिक्षा सरकार कार्य स्थल  पर दे।योगी जी ने जो भी अभी कदम उठाया है उसकी सराहना भी होनी चाहिए।उनका कहना सही है श्रमिको के अधिकारों और सम्मान से समझौता नहीं । श्रमिक ही किसी राष्ट्र के उत्थान में महत्व पूर्ण भूमिका अदा करता है। वह  अपने श्रमसे राष्ट्र  के विकास में सहयोग करता है।श्रमिक नहीं होगे  तो उघोग नहीं लगेगे। उघोग नहीं चलेंगे तो विकास नहीं होगा रोजगार नहीं मिलेगा श्रमिक और उघोग विकास के पहिये है दोनों का चलना राष्ट्र हित में सुन्दर होगा। सरकारे बस दोनों के हितों की संरक्षक होती है।</div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 21:28:16 +0530</pubDate>
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