<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/75235/pending-litigation-statistics" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Pending litigation stats - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/75235/rss</link>
                <description>Pending litigation stats RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176301/it-is-scary-that-more-than-795-lakh-execution-petitions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था के बारे में उन्हें जानकारी दें।कोर्ट ने आदेश दिया, "अगली सुनवाई की तारीख़, यानी 07.10.2026 तक, हर हाईकोर्ट हमें संक्षेप में बताएगा कि एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और जल्द निपटारे के लिए उन्होंने क्या व्यवस्था बनाई या अपने-अपने ज़िला न्यायालयों को किस तरह के निर्देश जारी किए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ऐसे मामलों के समय-सीमा के भीतर निपटारे के लिए दिए गए अपने निर्देशों के पालन की निगरानी कर रहा था। 16 अक्टूबर, 2025 तक पूरे देश में 8.82 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित थीं। उस समय कोर्ट ने इन आंकड़ों को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया था। हाईकोर्ट से छह महीने के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने ताज़ा आदेश में कोर्ट ने पाया कि निपटारे में प्रगति के बावजूद, लंबित मामलों की संख्या अभी भी बहुत ज़्यादा है। कोर्ट ने पाया कि मौजूदा आंकड़े दिखाते हैं कि 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं अभी भी छह महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने पाया कि 6 मार्च, 2025 से जब उसने एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के समय-सीमा के भीतर निपटारे का निर्देश दिया था, तब से 10 अप्रैल, 2026 तक कुल 7,69,731 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं का फ़ैसला किया गया और उनका निपटारा किया गया। इसमें 6 मार्च, 2025 के निर्देशों के बाद पहले चरण में निपटाए गए 3,38,685 मामले और 16 अक्टूबर, 2025 के बाद निपटाए गए 4,31,046 अन्य मामले शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने राज्य-वार आंकड़ों पर प्रकाश डाला, जो यह दिखाते हैं कि मामले अभी भी लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 26,943 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 3,057 मामलों में कार्यवाही ऊपरी अदालतों द्वारा रोक दी गई। महाराष्ट्र में, 3,95,960 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 11,966 मामलों पर रोक लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में 28,192 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 1,008 मामलों में कार्यवाही पर रोक है। मध्य प्रदेश में, 50,579 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 2,537 मामले रोक के अंतर्गत हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट  ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे उन मामलों की जांच करें, जिनमें कार्यवाही पर रोक लगी हुई और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों को जल्द-से-जल्द उठाया जाए ताकि एग्ज़ीक्यूशन की कार्यवाही में देरी न हो। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176301/it-is-scary-that-more-than-795-lakh-execution-petitions</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/176301/it-is-scary-that-more-than-795-lakh-execution-petitions</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 21:19:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/supream-court4.jpg"                         length="133092"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        