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                <title>महिला आरक्षण बिल - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महिला आरक्षण बिल RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महिला शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में मानव श्रृंखला व हस्ताक्षर अभियान आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> सोमवार को हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नैनी में सोमवार को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश के निर्देशन में मिशन शक्ति फेज-5 एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में महिला शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के समर्थन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं द्वारा मानव श्रृंखला का निर्माण किया गया तथा अधिनियम के समर्थन में व्यापक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राएं, प्राध्यापक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों के प्रति जागरूकता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176060/human-chain-and-signature-campaign-organized-in-support-of-mahila"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260413-wa0261.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> सोमवार को हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नैनी में सोमवार को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश के निर्देशन में मिशन शक्ति फेज-5 एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में महिला शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के समर्थन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं द्वारा मानव श्रृंखला का निर्माण किया गया तथा अधिनियम के समर्थन में व्यापक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राएं, प्राध्यापक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना था। मानव श्रृंखला के माध्यम से छात्राओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए यह स्पष्ट किया कि आज की नारी अपने अधिकारों के प्रति सजग है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला शक्ति वंदन अधिनियम 2023 महिलाओं को राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से छात्राओं एवं शिक्षकों ने अधिनियम के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और समाज के अन्य वर्गों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया। प्राध्यापकों ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे महिलाएं अपने अधिकारों को समझकर समाज में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने महिला सम्मान और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने तथा दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ ली। पूरे आयोजन में उत्साह और जागरूकता का माहौल देखने को मिला, जो युवाओं की महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का सफल संचालन राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता द्वारा किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 21:37:22 +0530</pubDate>
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                <title>क्या महिला आरक्षण बिल 2029 में लागू होगा या पंचायत के चुनाव में ही  सिर्फ लागू रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारतीय लोकतंत्र में १६अप्रैल के बाद नया अध्याय शुरू होगा।भारत में वैसे तो पंचायती राज  संस्थाओं में ७३ वे और ७५वे सम्बिधान संशोधन से महिलाओं को पंचायती राज के तीनों स्तर पर आरक्षण दे दिया गया था । परन्तु संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की बात पुरी नहीं हो पाई थी। कारण कि पुरूष सांसदों को अपनी संख्या कम हो जाने का भय था और महिलाओं के आरक्षण में अनु, सूचित जाति जन जाति मुसलमान और पिछड़े वर्गों की मांग के कारण  महिला आरक्षण विधेयक नहीं पास हो पाया  था । उस समय गठबन्धन की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176045/will-the-womens-reservation-bill-be-implemented-in-2029-or"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/women-reservation-bill-3.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारतीय लोकतंत्र में १६अप्रैल के बाद नया अध्याय शुरू होगा।भारत में वैसे तो पंचायती राज  संस्थाओं में ७३ वे और ७५वे सम्बिधान संशोधन से महिलाओं को पंचायती राज के तीनों स्तर पर आरक्षण दे दिया गया था । परन्तु संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की बात पुरी नहीं हो पाई थी। कारण कि पुरूष सांसदों को अपनी संख्या कम हो जाने का भय था और महिलाओं के आरक्षण में अनु, सूचित जाति जन जाति मुसलमान और पिछड़े वर्गों की मांग के कारण  महिला आरक्षण विधेयक नहीं पास हो पाया  था । उस समय गठबन्धन की सरकार थी दो तिहाई बहुमत लोक सभा  में बिल पास कराने लायक नहीं था।भाजपा बिल का विरोध कर रही थी।  वह महिलाओं के आरक्षण में जातिगत आरक्षण के पक्ष में नहीं थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष जातिगत आरक्षण चाहता था।आरक्षण में आरक्षण कैसे लागू हो महिलाओं का इस पर सहमति नहीं बन पाई थी। कांग्रेस ने मनमोहन सरकार में महिलाओं के आरक्षण के लिए लोकसभा में बिल लाया पर भाजपा के विरोध तथा सत्ता में गठबन्धन साथियों के कारण बिल नहीं पास हुआ फिर ठंडे बस्ते में रख दिया गया।उस समय संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने की बात भी नहीं हो रही थी कि पुरूष सांसदों की संख्या कम नहीं होंगी।फिर भी कांग्रेस ने महिलाओं के आरक्षण बिल को दूसरी बार लोक सभा में नहीं राज्य सभा से पास करवा दिया जहां पर वह बहुमत में थी।इस आशा विश्वास से अगर २०१४मे लोक सभा में बहुत मिलेगा तो बिल पास हो जायेगा और महिलाओं के लिए आरक्षण विधानसभा से सांसद तक हो जायेगा । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु २०१४मे भाजपा की सरकार बन ग ई।  फिर भी   विपक्ष के बार बार आग्रह पर बिल नहीं पास हुआ ।भाजपा कांग्रेस के उस बिल को नहीं पास करवाना चाहती थी।फिर २०२२दोबारा भाजपा सरaकार में वापस आई तो महिला विधेयक को नये तरीक़े से बनाया गया और विधेयक का नाम नारी वन्दन विधेयक  दिया गया । लोक सभा राज्य सभा में  सार्थक रूप मेंबहस हुआ सुझाव व कुछ संशोधन भी किये गये फिर दोनों सदनों में बहुमत के साथ २०२३मे बिल पास  कर दिया गया।  जोअब एक काननी विधेयक बन गया है। परन्तु लागू करने की  समय सीमा पर सत्ता और विपक्ष में बहुत विवाद हुआ । विपक्ष चाहता था २०२४के चुनाव में लागू हो लेकिन सत्ता पक्ष ने नहीं माना और कहा जब न ई जनगणना हो जायेगी हर सीट का परसिमन होगा। तथा संसदों और विधानसभाओ की संख्या तैंतीस प्रतिशत बढ़ जायेगा  प्रदेश की आबादी के अनुसार संसद की सीटों की संख्या निर्धारित होगी। तभी नारी वन्दन आरक्षण लागू होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संसदों की सख्या ८१६ होगी जिसमे२७३महिला सांसदों की संख्या होगी । यह पहले पन्द्रह साल के लिए ही लागू होगा फिर आगे बढ़ाने पर विचार होंगा।संसद और विधानसभाओं में आबादी के अनुसार जो सीटों को बढ़ाने की बात हो रही वह भी एक जटिल समस्या बन गया है  वर्तमान सरकार का कहना है जिस राज्य में जन संख्या कम है।  जो राज्य जनसंख्या वृद्धि दर को कम किया है उस राज्य में सांसदों की संख्या कम होगी । जिस राज्य में जन संख्या ज्यादा है उस राज्य में सांसदों की संख्या बढ़ जायेगी इस निती से दक्षिण के संसद की सीटों में वर्तमान की अपेक्षा बहुत कम संसद संख्या बढ़ेगी जो उनके लिए  नुकसानदायक होगा वह अपने राज्यों में अधिक संसदों की सख्या चाहते  हैं  उनका कहना जनसंख्या वृद्धि दर रोकर कोई अपराध नहीं किया है कि हमारे प्रदेश में संसदों की सख्या उत्तर-भारत के अनुसार कम हो उसी अनुपात में दक्षिण राज्यों की संसद की संख्या बढ़े।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसे नियम से यूं भी कहें उत्तर भारत के प्रदेशों में सांसदों की सख्या दक्षिण भारत की अपेक्षा ज्यादा होगी और दक्षिण भारत का जो अभी वर्चस्व है वह कम हो जायेगा।यह भी विशेष सत्र में चर्चा में आयेगा साथ में दक्षिण भारत से कम महिलाओं का संसद में प्रतिनिधित्व होगा।२०२९मे होने वाले संसद के चुनाव में लागू करना है पर अभी संशय बना हुआ हैं अब यह स्वयं १६अप्रैल को होने वाले विशेष संसद के सत्र में ही दूर होगा कि महिला आरक्षण कब और कैसे देश में लागु होगा आरक्षण संसदीय सीटों और विधानसभा में किस तरह लागू होगा महिलाओं को पंचायती राज की तरह जाति-आधारित आरक्षण होगा याआरक्षण में आरक्षण का क्या होगा कैसे होगा। विपक्ष शुरुआत से ही महिलाओं को जातिगत आधार पर आरक्षण मांगताआ रहा है। मुसलमान सांसद  मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग से आरक्षण मांग रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी भारत में जनगणना शुरू हो रही  है।इस जनगणना में पहली बार जातियों की भी गणना होगी जो महिलाओं को जातिगत आरक्षण के लिए लाभ दायक होगा ‌यह जनगणना होने के बाद ही सही तौर पर पता चलेगा।अभी तो बस सबकी नजर संसद के विशेष सत्र पर टीका है।वैसे यह भाजपा की एक नई चाल है वह बंगाल के चुनाव को ध्यान में रख कर ही इस नारी वन्दन बिल के लिए विशेष सत्र बुलाया है।  वह बंगाल की सत्ता चाहता है।अगर वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने में ईमानदार होते तो २०२३मे  बिल पास होगया था पर २०२४मे लागू नहीं किया क्यों यह सवाल तो जनता में  है।अब क्या २०२९मे लागू होगा या उसके बाद यह अभी स्पष्ट नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सम्बिधानमे१२८वा संशोधन करके महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिया गया है आरक्षण मे ही अनुसूति जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण देने का प्रवधान है लेकिन इस आरक्षण में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए पंचायती राज की तरह आरक्षण नहीं दिया गया है।इस पर विशेष सत्र में बात उठेगी यह अभी पता नहीं है परन्तु विपक्ष पिछड़े वर्ग की महिलाओ के लिए आरक्षण बराबर माग करता आ रहा है।और मुसलमान भी मांग रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नारी वन्दन बिल से आम नारी को बहुत लाभ नहीं मिलेगा जेबा कि पंचायती राज चुनाव में बहुत कम आम महिलाएं चुनाव जीत पाती है या लगती अधिकांश आरक्षित सीटों पर पहले से राजनीति में स्थापित परिवार कि महिलाओं को ही जीत मिलती है।यह बात संसद और विधानसभाओं के चुनाव में आरक्षण लागू होने के बाद होगा। आम महिलाएं  आरक्षण के सहारे संसद विधायक बनती है या पहले से स्थापित राजनेताओं की पत्नियां बेटी बहू ही आयेगी आरक्षण में।अभी तो लोग पति प्रधान बन कर चलते बाद विधायक पति गाड़ी प्पर लिख कर चलेंगे।महिला पीछे रहेगी पति आगे से विधायक संसद रहेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
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