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                <title>आध्यात्मिक यात्रा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आध्यात्मिक यात्रा RSS Feed</description>
                
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                <title>मनुष्य का पहला धर्म — स्वयं के प्रति ईमानदार होना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</strong></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिन का कोलाहल सत्य को दबा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर रात का सन्नाटा उसे जगा देता है। जब सारी आवाज़ें थम जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब मनुष्य अपनी ही अंतरात्मा के न्यायालय में खड़ा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ न बहाने चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न मुखौटे टिकते हैं। दिनभर तर्क और धर्म की ओट लेने वाला मन अंततः एक ही प्रश्न से घिरता है—आज तुमने सच में कितना जिया और कितना खो दिया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि इसी आत्म-पड़ताल से बचने के लिए हम कहते हैं—"भगवान सब देख रहा है।" यदि इस पर सच्चा विश्वास होता</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183900/mans-first-religion-%E2%80%93-to-be-honest-with-himself"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</strong></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिन का कोलाहल सत्य को दबा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर रात का सन्नाटा उसे जगा देता है। जब सारी आवाज़ें थम जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब मनुष्य अपनी ही अंतरात्मा के न्यायालय में खड़ा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ न बहाने चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न मुखौटे टिकते हैं। दिनभर तर्क और धर्म की ओट लेने वाला मन अंततः एक ही प्रश्न से घिरता है—आज तुमने सच में कितना जिया और कितना खो दिया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि इसी आत्म-पड़ताल से बचने के लिए हम कहते हैं—"भगवान सब देख रहा है।" यदि इस पर सच्चा विश्वास होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म और व्यवहार की छोटी-छोटी बेईमानियाँ स्वयं समाप्त हो जातीं। क्योंकि सबसे बड़ी चोरी किसी और की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने ही जीवन की होती है। हम अपने वर्तमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी सच्चाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मुस्कान और अपने अस्तित्व को ही धीरे-धीरे लूटते रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी स्वयं को निर्दोष मानते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वर का नाम अक्सर वहीं सबसे अधिक लिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विश्वास कम और भय अधिक होता है। जब कोई कहता है—"भगवान सब देख रहा है</span>," <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके शब्दों से अधिक उसका डर बोलता है। हमने परमात्मा को प्रेम का स्रोत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराध पकड़ने वाला प्रहरी बना दिया है। जबकि प्रेम पहरा नहीं देता और करुणा भय नहीं जगाती। भय अभिनय सिखाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्र नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए बाहर धर्म दिखता है और भीतर छल पलता है। सच तो यह है कि परमात्मा कोई दंडाधिकारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हृदय का मौन साक्षी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ दंड नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल करुणा है। हम उसकी पुकार सुनने के बजाय भय जगाने वाले धार्मिक वाक्यों में उलझे रहते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन की सबसे बड़ी बेईमानियाँ अक्सर इतनी साधारण होती हैं कि हम उन्हें अपराध ही नहीं मानते। हर सुबह हम अपना वर्तमान भविष्य की चिंताओं और बीते कल की परछाइयों में गिरवी रख देते हैं। किसी का मन दुखाकर उसे मज़ाक कह देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वचन भूल जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवर्तन टालते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय से अपनी प्रतिभा दबा देते हैं और संबंधों में अधूरे रह जाते हैं। दिन तो बीत जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर रात की निस्तब्धता में भीतर की चेतना एक ही प्रश्न करती है—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">तुमने दूसरों के साथ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने ही जीवन के साथ क्या किया</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">यही वह प्रश्न है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके सामने हर तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहाना और मुखौटा ढह जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक प्राचीन प्रसंग है। वन में भटका एक बालक अँधेरा घिरते ही भयभीत हो गया। उसने एक फकीर से पूछा—"क्या भगवान मुझे देख रहे हैं</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">फकीर ने उसका हाथ उसके हृदय पर रखकर कहा—"सबसे निकट की दृष्टि यहीं जाग रही है।" उसी क्षण उसका भय शांत हो गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसे समझ आ गया कि संरक्षण बाहर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर है। हम भी जीवनभर मंदिरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमों और बाहरी सहारों में सुरक्षा खोजते रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि परमात्मा का सबसे पवित्र देवालय हमारे अंतर्मन में ही प्रकाशित है। जिस दिन मनुष्य भीतर के उस मौन साक्षी से परिचित हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन उसकी बेईमानियाँ स्वतः मिटने लगती हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि तब उसे डराने वाला कोई बाहरी देवता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जगाने वाला अपना विवेक होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह अपना ही जीवन खोकर भी स्वयं को धर्ममार्गी मानता रहता है। वह वर्तमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माता-पिता का समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों का बचपन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रों का विश्वास और संबंधों की आत्मीयता गँवा देता है। भय से अपनी प्रतिभा पर ताला लगाकर फिर निश्चिंत हो कहता है—"भगवान सब देख रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह क्षमा कर देगा।" किंतु परमात्मा क्षमा से अधिक जागृति चाहता है। जहाँ चेतना जागती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ भूलें स्वयं मिटने लगती हैं। जिस क्षण मनुष्य अपने हर विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द और कर्म में भीतर के मौन साक्षी का अनुभव कर लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी क्षण जीवन बदल जाता है—कर्म पूजा बन जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाणी प्रार्थना और मौन आत्मबोध।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं से जीवन की वास्तविक यात्रा आरंभ होती है। भय प्रेम में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंधन स्वतंत्रता में और स्वार्थ उत्तरदायित्व में बदल जाता है। तब मनुष्य दूसरों पर अधिकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संबंधों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेतना और जीवन का सजग संरक्षक बनता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान सब देख रहा है"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब डराने वाला वाक्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वयं को जगाने वाला मंत्र बन जाता है। जो लोग इस सत्य को जी लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके शब्द भय या अपराधबोध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वास और आत्मबोध जगाते हैं। क्योंकि तब अनुभव होता है कि देखने वाला और देखा जाने वाला अलग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ही चेतना के दो प्रतिबिंब हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी सुनें—</span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान सब देख रहा है</span>," <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे दूसरों के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने लिए सुनिए। एक क्षण ठहरकर स्वयं से पूछिए—क्या मैं अपने समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने संबंधों और अपने वर्तमान के साथ न्याय कर रहा हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या स्वयं को ही छल रहा हूँ</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इन प्रश्नों से मत बचिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि परिवर्तन का द्वार यहीं खुलता है। जो अपनी भीतरी चोरियों को पहचान लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे उन्हें छोड़ने में देर नहीं लगती। तब जीवन का भार हल्का हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर कर्म साधना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर संबंध उपहार और हर साँस कृतज्ञता की प्रार्थना बन जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संपूर्ण आध्यात्मिक यात्रा अंततः एक ही सत्य पर आकर ठहरती है—परमात्मा की दृष्टि दंड की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करुणा की होती है। वह हमारी भूलों का हिसाब रखने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर सोई चेतना को जगाने आती है। इसलिए प्रश्न यह नहीं कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान हमें देख रहा है या नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न यह है कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या हम स्वयं को देख पा रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस दिन यह अंतर्दृष्टि जाग जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन छल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाखंड और दिखावा स्वतः समाप्त होने लगते हैं। तब भय समर्पण में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशांति शांति में और भ्रम सत्य में विलीन हो जाता है। उसी क्षण मनुष्य पहली बार अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित होता है—निर्मल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखंड और पूर्णतः मुक्त।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 21:55:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुवाहाटी में कामाख्या के दर्शन कर हाइलाकांडी के विधायक मिलन दास सहित मंडल अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं ने लिया आशीर्वाद।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम। </strong>गुवाहाटी स्थित पवित्र नीलाचल पर्वत पर अवस्थित कामाख्या मंदिर में शनिवार, 9 मई को हाइलाकांदी  विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी मंडल अध्यक्षों एवं जिले के विभिन्न स्तर के दलीय कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लोकप्रिय विधायक मिलन दास भी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पुण्य अवसर पर उपस्थित विधायक और सभी कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के चरणों में समस्त हाइलाकांडी जिले की शांति, सुख, समृद्धि एवं सर्वांगीण विकास की कामना की। साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि मां की कृपा से जिले के प्रत्येक क्षेत्र एवं आमजन के जीवन में सुख-शांति</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178850/hailakandi-mla-milan-das-and-mandal-presidents-and-workers-took"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001478252.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम। </strong>गुवाहाटी स्थित पवित्र नीलाचल पर्वत पर अवस्थित कामाख्या मंदिर में शनिवार, 9 मई को हाइलाकांदी  विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी मंडल अध्यक्षों एवं जिले के विभिन्न स्तर के दलीय कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लोकप्रिय विधायक मिलन दास भी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पुण्य अवसर पर उपस्थित विधायक और सभी कार्यकर्ताओं ने मां कामाख्या के चरणों में समस्त हाइलाकांडी जिले की शांति, सुख, समृद्धि एवं सर्वांगीण विकास की कामना की। साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि मां की कृपा से जिले के प्रत्येक क्षेत्र एवं आमजन के जीवन में सुख-शांति एवं उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि मां कामाख्या की दिव्य कृपा से समाज में एकता, सौहार्द और विकास की भावना और अधिक मजबूत होगी तथा जनता के जीवन में नई आशा और ऊर्जा का संचार होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा कार्यकर्ताओं के बीच विशेष उत्साह और आस्था का केंद्र बनी रही।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:10:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गायत्री साधना से जुड़कर मानव कल्याण का संदेश दे रही कलश यात्रा - अशोक शर्मा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार अमेठी। </strong>क्षेत्र में भक्ति, संस्कार और जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला शांतिकुंज हरिद्वार से निकली ज्योति शक्ति कलश यात्रा यहां पहुंचकर जन-जन में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर किया। गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सद्गुणों के विकास और दुर्गुणों के उन्मूलन का प्रेरक अभियान बन चुकी है। मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण की प्रक्रिया को लेकर गांव गांव गायत्री उपासना साधना से जोड़ने का काम और वर्तमान में चल रहे विनाशकारी प्रकृति की नाराज़गी को रोकते हुए मानव मात्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176030/kalash-yatra-is-giving-the-message-of-human-welfare-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1-6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार अमेठी। </strong>क्षेत्र में भक्ति, संस्कार और जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला शांतिकुंज हरिद्वार से निकली ज्योति शक्ति कलश यात्रा यहां पहुंचकर जन-जन में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर किया। गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सद्गुणों के विकास और दुर्गुणों के उन्मूलन का प्रेरक अभियान बन चुकी है। मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण की प्रक्रिया को लेकर गांव गांव गायत्री उपासना साधना से जोड़ने का काम और वर्तमान में चल रहे विनाशकारी प्रकृति की नाराज़गी को रोकते हुए मानव मात्र के कल्याण को लेकर ज्योति शक्ति कलश यात्रा पूरे उत्तर प्रदेश में चल रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार को जैसे ही कलश यात्रा शुकुल बाजार पहुंची, पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल छा गया। गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। कलश के आगमन पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया और भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर, दीप प्रज्वलित कर और भक्ति भाव से नतमस्तक होकर कलश का अभिनंदन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर शांतिकुंज से कलश यात्रा लेकर आए हुए टोली नायक समर बहादुर,धर्मेश्वर किरार, सत्य नारायण पांडेय ने कहा कि यह ज्योति कलश मानव जीवन में आत्मशुद्धि, सदाचार और सेवा भाव का प्रतीक है। यह यात्रा हमें अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर सत्य, प्रेम, करुणा और संयम जैसे सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती है। समाज में बढ़ती विकृतियों को दूर करने के लिए ऐसे आध्यात्मिक अभियानों की आज अत्यंत आवश्यकता है।कार्यक्रम में शुकुल बाजार ब्लॉक समन्वयक अशोक शर्मा, ब्लॉक मीडिया प्रभारी दीपक पाठक , गुड्डू तिवारी,  दुर्गेश सहित गायत्री परिवार एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभी ने एक स्वर में समाज को नैतिक मूल्यों पर आधारित बनाने और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।ज्योति कलश यात्रा ने क्षेत्र के विभिन्न गांवों और स्थानों का भ्रमण कर लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत किया। यह यात्रा सत्थिन में राजकुमार कौशल के आवास से प्रारंभ होकर पूरे बख्तावर, आसाराम पांडे के यहां, जैनबगंज, अनंतराम, हरखूमऊ स्थित गायत्री मंदिर, जगपाल बाबा, इन्दरिया में राजेंद्र प्रताप सिंह के यहां पहुंची।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा पूरे रामदीन गांव में अवधेश मिश्रा, शुकुल बाजार में ध्रुव केश शर्मा व राजकुमार कौशल धर्मशाला, पांडेयगंज में मनोज तिवारी, भोजा तिवारी गांव, अंदीपुर के गायत्री मंदिर, हनुमान मंदिर में रमेश शुक्ला, पाली में सुनील साहू, तेंदुआ में रवि गिरी व जीत तिवारी में दिलीप तिवारी तथा पूरे रग्घू सुधीर शुक्ला के यहां श्रद्धापूर्वक कलश का स्वागत किया गया।अंत में दीप यज्ञ, भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान बना रहा। श्रद्धालुओं को नैतिक जीवन, संयमित आचरण और सेवा भाव अपनाने का संदेश दिया गया। रात्रि प्रवास, भोजन-प्रसाद वितरण और सामूहिक साधना के साथ यह कार्यक्रम अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, और सुबह टोली को विदाई दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:52:04 +0530</pubDate>
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