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                <title>Indian Politics News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Indian Politics News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वोट काउंटिंग के दौरान राज्य का नॉमिनी मौजूद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177974/west-bengal-election-commission-told-supreme-court-that-the-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ah2nk1so_supreme-court_625x300_26_january_25.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने नायडू की यह बात रिकॉर्ड की। कि ECI उसके सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा। इसलिए, उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ TMC की अपील पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "SLP में आगे किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। हम मिस्टर नायडू की बात रिकॉर्ड करते हैं कि ECI के सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए।मामले की आज अर्जेंट सुनवाई हुई क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को याचिका खारिज कर दी थी।हाई कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से नियुक्त करना इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय PSU कर्मचारी से काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट नियुक्त करने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं लगती।"इसने आगे कहा कि अगर TMC को लगता है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी BJP उम्मीदवारों का पक्ष ले रहे हैं, तो वह बाद में नतीजों को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकती है।इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:41:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु में थमा चुनाव प्रचार, 23 अप्रैल को मतदान, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177019/election-campaign-stopped-in-west-bengal-tamil-nadu-strong-arrangements-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद अब कोई भी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार के समर्थन में जनसभा या रैली नहीं कर सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पश्चिम बंगाल की तो यहां इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराया जाना है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन मतदाताओं में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं अपने मत का इस्तेमाल करेंगी। आरक्षण को लेकर बने माहौल के बीच इस बार पश्चिम बंगाल में महिलाओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में पहले चरण में जहां मतदान होने हैं, उनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं।इनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की 9, जलपाईगुड़ी की 7, अलीपुरद्वार की 5, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की 5, उत्तर दिनाजपुर की 9, दक्षिण दिनाजपुर की 6, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम ब‌र्द्धमान की 9, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झारग्राम की 4, पुरुलिया की 9 और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु  राज्य में सभी सीटों पर एक चरण में ही चुनाव संपन्न कराया जाना है। 23 अप्रैल को ही सभी 234 सीटों पर मतदान होना है। तमिलनाडु में इस बार 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव में कुल 5.73 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों की किस्मत लिखेंगे।इस बार चुनाव में सबकी निगाहें अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके पर टिकी हैं, क्योंकि कई सीटों पर उनको लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है, इसलिए चुनाव में उनकी भूमिका काफी अहम हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव 2026 का महायुद्ध तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सियासी संघर्ष अपने चरम पर जनादेश का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176929/assembly-elections-2026-the-great-war-political-conflict-at-its"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे ।यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है बल्कि यह क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति नेतृत्व की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल इस बार बेहद गर्म और प्रतिस्पर्धी रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग साठ प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी ,जबकि भाजपा ने करीब चालीस प्रतिशत वोट लेकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। इस बार भी यही दो दल आमने सामने हैं और दोनों ही पूरी ताकत के साथ जीत का दावा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा ने इस बार राज्य में आक्रामक प्रचार किया और भ्रष्टाचार घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया वहीं ममता बनर्जी ने क्षेत्रीय अस्मिता विकास और सामाजिक योजनाओं को अपनी ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने भाजपा को बाहरी ताकत बताते हुए बंगाल की पहचान को बचाने की अपील की इस तरह चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं बल्कि पहचान और विचारधारा का भी बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए करीब डेढ़ हजार उम्मीदवार मैदान में हैं और मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से अधिक है ।राज्य में मतदान प्रतिशत पारंपरिक रूप से काफी अधिक रहता है और इस बार भी अस्सी से पचासी प्रतिशत तक मतदान की संभावना जताई जा रही है। अधिक मतदान आमतौर पर राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है इसलिए सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर भी टिकी हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कई सख्त कदम उठाए हैं ,जिनमें मतदान से पहले रात के समय बाइक चलाने पर रोक भी शामिल है ,ताकि किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु की बात करें तो यहां का चुनावी परिदृश्य अलग होते हुए भी उतना ही रोचक और चुनौतीपूर्ण है ।राज्य में लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का प्रभाव रहा है और इस बार भी मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बीच माना जा रहा है। सत्ताधारी द्रमुक अपने शासन के दौरान किए गए विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के आधार पर जनता से समर्थन मांग रही है जबकि अन्नाद्रमुक सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगी है और इस बार उसने कई सीटों पर गंभीरता से चुनाव लड़ा है। हालांकि तमिलनाडु में भाजपा अभी मुख्य मुकाबले में पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई है, लेकिन उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है ।इस चुनाव की एक खास बात अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी का प्रवेश है। जिसने खासकर युवाओं के बीच नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया है ।कई सीटों पर यह पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है, जिससे चुनाव और अधिक दिलचस्प हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में इस बार चार हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं और पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पिछले चुनाव में यहां लगभग सत्तहत्तर प्रतिशत मतदान हुआ था और इस बार भी भारी मतदान की उम्मीद है महिलाओं और युवाओं की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है ।द्रमुक ने महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है ।वहीं युवा मतदाता रोजगार और विकास के मुद्दों को लेकर अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कांटे की टक्कर की बात करें तो पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है जहां दोनों दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत कम हो सकता है ।कई सीटों पर परिणाम बेहद करीबी रहने की संभावना है। वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में हैं लेकिन उनकी भूमिका सीमित मानी जा रही है।तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच सीधी टक्कर है ,लेकिन भाजपा और विजय की पार्टी जैसे अन्य दल भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकते हैं।जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है यही कारण है कि तमिलनाडु में इस बार परिणाम पूरी तरह से अनुमान के दायरे में नहीं हैं और किसी भी दल के लिए जीत आसान नहीं मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार के दौरान दोनों राज्यों में तीखी बयानबाजी देखने को मिली पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चरम पर रहा ।भाजपा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के आरोप लगाए जबकि ममता बनर्जी ने भाजपा पर राज्य की संस्कृति और पहचान को खतरे में डालने का आरोप लगाया तमिलनाडु में भी राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग जारी रही और नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधाअब जब चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है तो जनता के पास शांत वातावरण में निर्णय लेने का अवसर है ।चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रचार थमने के बाद किसी भी प्रकार की रैली या सार्वजनिक गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मत का उपयोग कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः चार मई को जब मतगणना होगी तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है और किस दल की रणनीति सफल रही है। यह चुनाव न केवल इन राज्यों की राजनीति को दिशा देगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि दोनों राज्य देश की राजनीतिक धुरी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं ।लोकतंत्र के इस महापर्व में अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है और वही इस सियासी महासंग्राम का असली विजेता तय करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:12:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी कर रहे राजनैतिक ड्रामा-प्रमोद तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी एवं प्रदेश कांग्रेस विधान मण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया है। सांसद प्रमोद तिवारी एवं विधायक मोना ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संविधान संशोधन का प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास देश की जनता के साथ छल व धोखा तथा राजनीतिक ड्रामा है। उन्होंने कहा कि स्पीकर और पार्टी अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में प्रधानमंत्री को चुनौती है कि वह इसका प्रमुख किसी सक्षम महिला को बनायें।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176627/pm-modi-is-doing-political-drama-on-womens-reservation-bill"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260325-wa0044(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी एवं प्रदेश कांग्रेस विधान मण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया है। सांसद प्रमोद तिवारी एवं विधायक मोना ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संविधान संशोधन का प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास देश की जनता के साथ छल व धोखा तथा राजनीतिक ड्रामा है। उन्होंने कहा कि स्पीकर और पार्टी अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में प्रधानमंत्री को चुनौती है कि वह इसका प्रमुख किसी सक्षम महिला को बनायें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस विधेयक को लेकर भाजपा की नीति और नियति कभी सही नहीं रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन पर संशोधन को लेकर आखिर संसद सत्र के पूर्व सरकार ने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलायी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस समेत सम्पूर्ण विपक्ष ने समर्थन देकर पारित करा दिया पास हुए विधेयक को तीन साल तक आखिर अमल में नहीं लाया गया।सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि संविधान को समझने वाला हर देशवासी आज विपक्ष का आभारी है कि उसने संविधान संशोधन के जरिये सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा के षड़यंत्र को विफल कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कड़वी सच्चाई यह है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव को देखकर मोदी सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर सिर्फ राजनैतिक स्टंट खड़ा करने का प्रयास किया है।वहीं प्रदेश कांग्रेस विधान मण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि विपक्ष ने एक जुट होकर संविधान की रक्षा की है।उन्होंने कहा कि उन्नाव पीड़िता को भाजपा द्वारा संरक्षण देने और हाथरस की बेटी को इंसाफ दिलाने में विफलता को लेकर पीएम मोदी को क्षमा याचना करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने पंचायत में महिलाओं को आरक्षण का कानून पेश किया तब भाजपा ने ही उस समय इस आरक्षण का विरोध किया था।सांसद प्रमोद तिवारी एवं विधायक मोना का संयुक्त बयान रविवार को मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:11:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिसीमन के पेंच में फंसा आधी आबादी का हक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आधी आबादी की आकांक्षाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित कानून को धरातल पर उतारने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु नियति और राजनीतिक मतभेदों को कुछ और ही स्वीकार्य था। यह विधेयक मात्र एक विधायी दस्तावेज नहीं था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह 2029 के आम चुनावों से पूर्व देश की राजनीतिक संरचना को पूरी तरह बदलने वाला एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा था। इस विधेयक के माध्यम से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176578/rights-of-half-the-population-stuck-in-the-dilemma-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/amit-shah-35-2026-04-d896a51ce5dd4d168211944013262839.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आधी आबादी की आकांक्षाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित कानून को धरातल पर उतारने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु नियति और राजनीतिक मतभेदों को कुछ और ही स्वीकार्य था। यह विधेयक मात्र एक विधायी दस्तावेज नहीं था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह 2029 के आम चुनावों से पूर्व देश की राजनीतिक संरचना को पूरी तरह बदलने वाला एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा था। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने लोकसभा की सीटों की संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीधे तौर पर परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसद के इस विशेष सत्र की पृष्ठभूमि अत्यंत नाटकीय रही। सरकार का तर्क था कि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीटों में वृद्धि अनिवार्य है ताकि किसी भी वर्तमान प्रतिनिधित्व को क्षति पहुँचाए बिना महिलाओं को 33 प्रतिशत स्थान सुनिश्चित किया जा सके। इस रणनीति के पीछे तर्क यह था कि जब सीटों की कुल संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आंकड़ा स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा और पुरुषों के प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में भी भारी कटौती की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> सत्ता पक्ष ने इसे एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम बताते हुए प्रचारित किया कि यह नारी शक्ति के वास्तविक वंदन का समय है। प्रधानमंत्री ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार महिलाओं को उनका उचित अधिकार दिलाने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर इस पवित्र कार्य में सहयोग की अपील की थी। प्रधानमंत्री के उस पत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि विपक्षी दल इस विधेयक का समर्थन करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो सरकार उन्हें इस सफलता का पूरा श्रेय देने के लिए एक कोरे धनादेश जैसा अधिकार देने को तैयार है। उनका आशय स्पष्ट था कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस सामाजिक सुधार को देखना चाहते थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु विपक्षी खेमे में इस विधेयक को लेकर भारी संशय और विरोध की स्थिति बनी हुई थी। कांग्रेस</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाजवादी दल और विभिन्न क्षेत्रीय दलों के गठबंधन ने सरकार की नीयत पर गंभीर प्रश्न उठाए। विपक्ष का सबसे प्रबल विरोध परिसीमन के आधार को लेकर था। सरकार ने इस संशोधन में सीटों के निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव रखा था। विपक्षी नेताओं का तर्क था कि वर्ष 2026 में 2011 की जनगणना के आधार पर भविष्य की राजनीति तय करना न केवल अतार्किक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह उन राज्यों के साथ अन्याय है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में अपने संबोधन के दौरान अत्यंत तल्ख लहजे में कहा कि सरकार की मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की कम और चुनावी लाभ लेने की अधिक प्रतीत होती है। उन्होंने इसे एक छलावा करार देते हुए मांग की कि जब तक नई जाति आधारित जनगणना नहीं हो जाती और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए इस 33 प्रतिशत के भीतर अलग से कोटा निर्धारित नहीं किया जाता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक यह विधेयक सामाजिक न्याय की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष की इस मांग ने सदन के भीतर और बाहर एक नई बहस को जन्म दे दिया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए तो आरक्षण का प्रावधान पहले से ही प्रस्तावित था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग श्रेणी की मांग ने सत्ता पक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। उत्तर भारत के प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने इस मुद्दे पर लामबंदी तेज कर दी और यह स्पष्ट कर दिया कि बिना जातिगत डेटा के परिसीमन करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के इन तर्कों को विकास की राह में रोड़ा अटकाने वाला बताया। उन्होंने सदन में जोर देकर कहा कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में किसी भी प्रकार की देरी नहीं चाहती और परिसीमन ही वह एकमात्र वैधानिक मार्ग है जिसके माध्यम से सीटों का न्यायोचित वितरण संभव है। उन्होंने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इतिहास उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा यदि उन्होंने इस अवसर को केवल राजनीतिक द्वेष के कारण गंवा दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटनाक्रम अपनी चरम सीमा पर तब पहुँचा जब 16 अप्रैल को इस विधेयक पर मतदान की घोषणा हुई। संसद के गलियारों में तनाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता था। उस दिन कुल 528 सांसद सदन में उपस्थित थे। नियम के अनुसार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था। जब मतों की गणना हुई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो परिणाम सरकार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विधेयक के पक्ष में 298 मत पड़े</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने मतदान किया। गणितीय दृष्टि से देखें तो दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को कम से कम 352 मतों की आवश्यकता थी। इस प्रकार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मात्र 54 मतों के अंतर से यह ऐतिहासिक विधेयक गिर गया। यह भारतीय संसदीय इतिहास की एक विरल घटना थी क्योंकि 1990 के दशक के बाद यह पहला अवसर था जब कोई संविधान संशोधन विधेयक सदन में आवश्यक बहुमत न मिल पाने के कारण असफल हुआ हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस असफलता ने देश की राजनीतिक दिशा को एक नया मोड़ दे दिया। मतदान के तुरंत बाद सदन के भीतर और बाहर आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने इसे अपनी नैतिक विजय बताया और कहा कि सरकार को अब यह समझ लेना चाहिए कि वे बिना आम सहमति के देश की लोकतांत्रिक संरचना के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते। दूसरी ओर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता पक्ष ने इस हार को जनता की अदालत में ले जाने का निर्णय लिया। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार के प्रवक्ताओं ने इसे महिलाओं के अधिकारों पर विपक्ष का प्रहार बताया। उन्होंने जनता के बीच यह संदेश प्रसारित करना शुरू किया कि कैसे एक प्रगतिशील कानून को केवल संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए बलि चढ़ा दिया गया। विशेष रूप से 850 सीटों वाली नई संसद की परिकल्पना पर जो ग्रहण लगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसने भविष्य के चुनावों के लिए एक नया विमर्श तैयार कर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे विवाद में परिसीमन की तकनीकी जटिलताएं सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरीं। 543 से 850 सीटों की छलांग कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं था। इसके लिए राज्यों के बीच सीटों के पुनर्वितरण की आवश्यकता थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों में असंतोष की लहर उठने की संभावना थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विपक्ष ने इसी बिंदु को अपनी ढाल बनाया और इसे क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा बना दिया। उनका तर्क था कि यदि 2011 की जनगणना को ही आधार माना गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उत्तर भारत के राज्यों की सीटें अत्यधिक बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा। इस क्षेत्रीय अस्मिता और जातिगत आरक्षण के दोहरे पेच ने महिला आरक्षण जैसे सर्वमान्य मुद्दे को भी विवादित बना दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी इसकी गूंज शांत नहीं हुई। समाज के विभिन्न वर्गों में इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। महिला संगठनों ने जहाँ इस विधेयक के गिरने पर दुख व्यक्त किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कुछ विशेषज्ञों ने इसे संवैधानिक शुचिता की जीत बताया। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका मानना था कि बिना व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी जनगणना के सीटों की संख्या में इतना बड़ा बदलाव करना भविष्य में संवैधानिक संकट उत्पन्न कर सकता था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परिणाम पर अपनी संक्षिप्त लेकिन गंभीर प्रतिक्रिया में कहा कि उनकी सरकार हार मानने वालों में से नहीं है और वे महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए भविष्य में और अधिक दृढ़ता के साथ प्रयास करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्षतः 131वें संशोधन विधेयक की यह विफलता मात्र एक विधायी प्रक्रिया का थम जाना नहीं है अपितु यह उन गहन सामाजिक और क्षेत्रीय विषमताओं का प्रतिबिंब है जो हमारी राजनीति की आधारशिला रही हैं। क्या यह वास्तव में विपक्षी दलों की एकजुटता का ठोस परिणाम था अथवा शासन के रणनीतिक आकलन में कोई बड़ी चूक रह गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इन जिज्ञासाओं के समाधान तो भविष्य की गर्त में छिपे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> परंतु वर्तमान का यथार्थ यही है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूर्ण क्रियान्वयन अब एक अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया है। यह संपूर्ण घटनाक्रम इस सत्य को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र में केवल संख्या बल ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि संविधान की मर्यादा और सामाजिक न्याय की मांगें उससे कहीं अधिक ऊँचा स्थान रखती हैं। 16 अप्रैल की उस संध्या जब सदन की कार्यवाही समाप्त हुई तो वह अपने पीछे ऐसे अनेक अनुत्तरित प्रश्न छोड़ गई जिनका उत्तर हम सभी को आने वाले समय में खोजना होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:24:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग: हरियाणा कांग्रेस के पांच विधायक निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक अनुशासन तोड़ने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच विधायकों को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि नारायणगढ़, सढौरा, रतिया, पुनहाना और हथीन से विधायक शैली चौधरी, रेणु बाला, जरनैल सिंह, मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इसराइल के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बताया गया है कि इन विधायकों ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान किया, जिसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। यह कार्रवाई प्रदेश अनुशासन समिति की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176462/five-haryana-congress-mlas-suspended-for-cross-voting-in-rajya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/unnamed.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक अनुशासन तोड़ने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच विधायकों को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि नारायणगढ़, सढौरा, रतिया, पुनहाना और हथीन से विधायक शैली चौधरी, रेणु बाला, जरनैल सिंह, मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इसराइल के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया गया है कि इन विधायकों ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान किया, जिसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। यह कार्रवाई प्रदेश अनुशासन समिति की सिफारिश पर की गई और इसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी भी प्राप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राव नरेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर इसकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक सख्त संदेश है कि पार्टी के सामूहिक निर्णयों के खिलाफ जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:58:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरिवंश निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपसभापति </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176458/harivansh-elected-unopposed-as-deputy-chairman-of-rajya-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/20260330508l.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सदन की कार्यशैली और राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी है. दिलचस्प यह रहा कि इस अहम मौके पर नरेंद्र मोदी खुद सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव की अहमियत और बढ़ गई.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बिना विपक्षी उम्मीदवार के चुनाव जीतना किसी भी संसदीय प्रक्रिया में एक खास स्थिति होती है. यह या तो राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होता है या फिर सहमति की मजबूरी. इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जब विपक्ष ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया और राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव लगभग तय हो गया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:50:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी बोले- महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी का हिस्सा चोरी करना चाहते हैं- प्रधानमंत्री मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि पीएम मोदी महिला आरक्षण के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) का हिस्सा चोरी करना चाहते हैं, जो ‘राष्ट्र विरोधी गतिविधि’ है। राहुल गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले जारी वीडियो संदेश में कहा कि अगर सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है,</p>
<p style="text-align:justify;">  तो वह वर्तमान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू कर सकती है और परिसीमन भी नयी जनगणना के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि उसमें ओबीसी की आबादी का आंकड़ा होगा।कांग्रेस</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176407/rahul-gandhi-said-wants-to-steal-obcs-share-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/154086465.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-family:mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि पीएम मोदी महिला आरक्षण के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) का हिस्सा चोरी करना चाहते हैं, जो ‘राष्ट्र विरोधी गतिविधि’ है। राहुल गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले जारी वीडियो संदेश में कहा कि अगर सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है,</p>
<p style="text-align:justify;"> तो वह वर्तमान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू कर सकती है और परिसीमन भी नयी जनगणना के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि उसमें ओबीसी की आबादी का आंकड़ा होगा।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह से समर्थन करती है, लेकिन सरकार इसके नाम पर कुछ और करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया, ‘‘अब बहुत बड़ी बेईमानी की जा रही है। प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं कि जाति जनगणना और नयी जनगणना के आधार पर यह (महिला आरक्षण) निर्णय लिया जाए। प्रधानमंत्री आपकी (ओबीसी) भागीदारी आप से छीन रहे हैं। वह चाहते हैं कि 2011 की जनगणना का इस्तेमाल किया जाए, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्गों की संख्या नहीं है। वह आपकी (ओबीसी) भागीदारी छीनना चाहते हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी के लोग घबरा गए हैं, क्योंकि जाति जनगणना के आंकड़े आना शुरू हो गए हैं। उन्हें पता लग गया है कि पिछड़ों की कितनी आबादी है। वे नहीं चाहते कि आपको (ओबीसी) आबादी के हिसाब से भागीदारी मिले। यह राष्ट्र-विरोधी गतिविधि है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने प्रस्तावित परिसीमन को ‘‘खतरनाक’’ करार दिया और कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि मोदी जी जो चाहते हैं, अगर वह हो जाए, तो उससे दक्षिण के राज्यों, पश्चिम के छोटे राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों को भयंकर नुकसान होगा। यह राष्ट्र-विरोधी गतिविधि है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा रुख है कि आप (प्रधानमंत्री) 2026 में हो रही जनगणना के आधार पर (परिसीमन) कीजिए और 2011 की जनगणना के आधार पर मत कीजिए, क्योंकि उसमें ओबीसी का आंकड़ा नहीं है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अगर आप (प्रधानमंत्री) महिला आरक्षण अधिनियम लागू करना चाहते हैं, तो आपके पास एक अधिनियम पड़ा हुआ है, उसे लागू कीजिए। हम पूरा समर्थन करेंगे। मगर हम आपको अन्य पिछड़ा वर्गों, दक्षिण भारतीय राज्यों और छोटे प्रदेशों के खिलाफ काम नहीं करने देंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी, मैं समझता हूं कि आप देश को यह संदेश देना चाहते हैं कि आप महिला समर्थक हैं। मैं जानता हूं कि आप एप्स्टीन फाइल से डरे हुए हैं।’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘आप चाहते हैं कि आपके मुताबिक सीटें बढ़ें, आपके मुताबिक परिसीमन हो और ओबीसी को कुछ नहीं मिले। हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 21:01:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कांग्रेस की दिग्गज नेता मोहिसाना किदवई के निधन पर शोक सभा आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मोहसिना किदवई के निधन पर जिला कांग्रेस कमेटी प्रतापगढ़ में शोक सभा आयोजित की गई। जिला कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित इस शोक सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने की।इस दौरान उपस्थित कांग्रेसजनों ने स्व. मोहसिना किदवई जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि मोहसिना किदवई एक अनुभवी, सरल एवं जनप्रिय नेता थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176010/condolence-meeting-organized-on-the-demise-of-veteran-congress-leader"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260413-wa0149.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मोहसिना किदवई के निधन पर जिला कांग्रेस कमेटी प्रतापगढ़ में शोक सभा आयोजित की गई। जिला कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित इस शोक सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने की।इस दौरान उपस्थित कांग्रेसजनों ने स्व. मोहसिना किदवई जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि मोहसिना किदवई एक अनुभवी, सरल एवं जनप्रिय नेता थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में समाज के सभी वर्गों के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे देश को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।कार्यक्रम में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कोषाध्यक्ष वेदांत तिवारी, मनरेगा कोऑर्डिनेटर रवि भूषण सिन्हा, अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार सरोज, कांग्रेस से बदल के जिला महासचिव भवानी शंकर दुबे, जिला सचिव केके शुक्ला,जिला प्रवक्ता सुरेश कुमार मिश्रा,जिला प्रवक्ता फतेह बहादुर सिंह,अनिल मौर्य, सदर ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद वसीम, कार्यालय सचिव रियाज सुल्तान, नगर सचिव अरबाज आलम, जिला सचिव पृथ्वीराज गौतम, अंजनी पांडे, मांधाता ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद असलम, जिला सचिव आसिफ अली, मो.फरीद,आलम उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:23:13 +0530</pubDate>
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