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                <title>US Iran Talks - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>अमेरिका-ईरान पीस डील पर हस्ताक्षर, यूएस झुका- पैसे भी देगा, होर्मुज़ खुलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते</span></p></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181546/america-iran-peace-deal-signed-us-bowed-%E2%80%93-will-also-give"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div dir="ltr">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक </span>14-<span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज समुद्री रास्ते का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस समझौते के सफल होने से न केवल तेल की वैश्विक कीमतें स्थिर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने का एक नया रास्ता खुलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समझौते को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह साइन हो चुका है। मैंने अभी-अभी इस पर हस्ताक्षर किए हैं।" दूसरी तरफ ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और अन्य अधिकारियों ने भी इसे डिजिटल रूप से साइन किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी इस पर बयान जारी कर कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पहले कदम के रूप में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान तुरंत हॉर्मुज जलडमरूमध्य </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को खोल देगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्हाइट हाउस और ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए समझौते के मुख्य प्वाइंट इस प्रकार हैं:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तत्काल युद्धविराम: अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तत्काल और स्थायी रूप से सैन्य अभियानों को समाप्त करने की घोषणा करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी या हमला नहीं करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों की समयसीमा: दोनों पक्ष अधिकतम </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते (</span>Final Deal) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर बातचीत पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सेना की वापसी: अंतिम समझौते के </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेनाएं हटा लेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: ईरान शुरुआती </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के लिए फारस की खाड़ी से ओमान के समुद्र तक वाणिज्यिक जहाजों (</span>Commercial Vessels) <span lang="hi" xml:lang="hi">के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन की व्यवस्था करेगा। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर नौसैनिक और तकनीकी बाधाओं (जैसे बारूदी सुरंगें हटाना) को दूर किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य का प्रशासन: ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान और अन्य तटीय देशों के साथ बातचीत करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब डॉलर (</span>USD $300 Billion) <span lang="hi" xml:lang="hi">की योजना विकसित करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबंधों की समाप्ति: एक तय समय सारणी के तहत अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के खिलाफ सभी एकतरफा (प्राइमरी और सेकेंडरी) प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (</span>UNSC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम संवर्धन का निपटारा: ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार का निपटारा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (</span>IAEA) <span lang="hi" xml:lang="hi">की देखरेख में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑन-साइट डाउन-ब्लेंडिंग</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">यूरेनियम की क्षमता कम करना) के जरिए किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यथास्थिति (</span>Status Quo) <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाए रखना: अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्तर पर ही रोके रखेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तेल निर्यात को छूट और फंड की बहाली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल छूट (</span>Waivers) <span lang="hi" xml:lang="hi">जारी करेगा। साथ ही विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की संपत्तियों को वापस इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निगरानी तंत्र की स्थापना: समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा। इस अंतिम समझौते को </span>UNSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के एक बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस समझौते पर अंग्रेजी और फारसी (</span>Farsi) <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों भाषाओं में हस्ताक्षर किए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अनुवाद को लेकर भविष्य में कोई मतभेद या कोई और व्याख्या न हो। ईरान ने अपनी केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर जब्त संपत्तियों को वापस पाने के तकनीकी तौर-तरीकों को भी अंतिम रूप दे दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धोखा और नाकामी का मसौदा रही इस्लामाबाद वार्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">करीब डेड़ महीने से से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। 21 घंटे की चर्चा के बावजूद ईरान और अमेरिका में आपसी सहमति नहीं बन पाई तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने लाव-लश्कर के साथ अमेरिका वापस लौट गए और जाते-जाते कह गए कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है कि कोई समझौता नहीं हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन जो ईरान 28 फरवरी को अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की शहादत से लेकर मिनाब में डेढ़ सौ बच्चियों की जान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175979/islamabad-talks-remained-a-draft-of-deception-and-failure"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/on3hke0s_america-iran_625x300_12_april_26.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">करीब डेड़ महीने से से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। 21 घंटे की चर्चा के बावजूद ईरान और अमेरिका में आपसी सहमति नहीं बन पाई तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने लाव-लश्कर के साथ अमेरिका वापस लौट गए और जाते-जाते कह गए कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है कि कोई समझौता नहीं हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन जो ईरान 28 फरवरी को अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की शहादत से लेकर मिनाब में डेढ़ सौ बच्चियों की जान जाने तक कई बुरी खबरों को झेलकर भी अपनी शर्तों पर टिका हुआ है, उसे अमेरिका भला एक वार्ता के विफल होने से क्या हिला पाएगा। असल में तो इस्लामाबाद वार्ता की असफलता अमेरिका के लिए बुरी खबर है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य की चाबी अब भी ईरान के हाथ में ही है और इससे भी बढ़कर उसके पास सिर न झुकाने का जो जज्बा है, वो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप  के पास नहीं है। ट्रंप नेतन्याहू की मर्जी से युद्ध छेड़ते हैं और समझौता भी नहीं कर पाते, क्योंकि नेतन्याहू ऐसा नहीं चाहते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें बीते दिनों न्यूयार्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बताया गया कि बेंजामिन नेतन्याहू 11 फरवरी को अमेरिका में थे, जहां उन्होंने ट्रंप के सामने एक पूरी रणनीति बताई थी कि ईरान पर हमला करना चाहिए, क्योंकि वह अभी कमजोर है। इससे ईरान में सत्ता बदली जा सकती है और उसके संसाधनों पर कब्जा भी किया जा सकता है। नेतन्याहू ऐसे ही प्रस्ताव पहले बराक ओबामा, जो बाइडेन और जार्ज बुश को भी दे चुके थे, लेकिन इन तीनों राष्ट्रपतियों ने अपने कार्यकाल में ऐसा कोई फैसला नहीं लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह खुलासा पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने हाल ही में किया है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप नेतन्याहू की बात मानने को मजबूर हो गए। क्या इसके पीछे एपस्टीन फाइल्स के खुलासे हैं, इस सवाल का जवाब अभी मिलना बाकी है। बहरहाल, यह वार्ता बेनतीजा रही, क्योंकि एक तरफ इजरायल लेबनान पर अपने हमले नहीं रोक रहा था, जबकि ईरान की 10 शर्तों में यह एक अहम शर्त थी कि लेबनान पर हमले रुकने चाहिए। दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपने रुख में इंच भर का बदलाव नहीं दिखाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान वार्ता बिना नतीजे के खत्म हो गई. लेकिन बातचीत के नाम पर असली फायदा डोनाल्ड ट्रंप ने उठाया है. अमेरिका ने होर्मुज में माइंस हटाने वाले जहाज भेज दिए हैं. वहीं पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब में जेट भेजे हैं. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बातचीत के नाम पर ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई. कहीं बातचीत में उलझाकर उसे फिर से धोखा तो नहीं दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्योंकि बातचीत के बीच ही अमेरिका ने माइंस हटाने के लिए अपने दो सैन्य जहाजों को होर्मुज के पार ईरान के पास भेज दिया है. करीब 21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को खाली हाथ लौटना पड़ा. वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन’ बता दी थी, लेकिन ईरान ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया. दूसरी तरफ ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने जरूरत से ज्यादा शर्तें थोप दीं और बातचीत को संतुलित नहीं रखा.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह भी गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच 5 अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम, युद्ध की भरपाई, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना और ईरान के खिलाफ तथा पूरे क्षेत्र में चल रहे युद्ध को पूरी तरह खत्म करने जैसे विषय शामिल रहे। लेकिन इन मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। अमेरिका न ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हुआ, न उसने होर्मुज पर अपना रुख साफ किया। दरअसल पिछले दस दिनों में ही ट्रम्प दो बिल्कुल अलग-अलग बातें कह चुके हैं। पहले उन्होंने कहा था कि होर्मज में अमेरिका की कोई खास दिलचस्पी नहीं है, अमेरिका को वहां से गुजरने वाले तेल की जरूरत नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिर कुछ ही दिनों बाद उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की मांगों का सबसे जरूरी हिस्सा है, और अगर इसे खुला नहीं रखा गया तो कोई बातचीत नहीं हो सकती। वैसे यह तय है कि होर्मुज बनारसमध्य पर अमेरिका अपना कब्जा चाहता है, क्योंकि ईरान ते इस पर न केवल नाकेबंदी की है, बल्कि अब शुल्क चिनेको एरुआत भी कर दी है और ट्रंप इससे बुरी तरह गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब नामिरिखोलूश्यनरी गाईस कॉर्पस को होर्मुज से गुजरने पाहा से शुल्क वसूलने का अधिकार मिल गया है। एक बेरल तेल पर एक डॉलर ईरान वसूलेगा, साथ ही क्रिप्टो करेंसी में भुगतान की व्यवस्था भी होगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का कोई असर न पड़े। ईरान की इस रणनीति से उसे आर्थिक मजबूती मिलेगी, अमेरिका को इस बात का अहसास हो चुका है। इसलिए अब उसने फिर से अपने पत्ते फेंटने शुरु किए हैं, ताकि युद्ध को जायज ठहरा सके। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस युद्ध ने एक तरफ ईरान और खाड़ी देशों समेत पूरी दुनिया में घोर तबाही मचाई है, वहीं एक नयी वैश्विक व्यवस्था भी तैयार की है, जिसमें ईरान निस्संदेह एक आदर्श की तरह उभरा है। ईरान ने संदेश दे दिया है कि महाशक्ति की अवधारणा और उसके हौव्वे को आत्मबल से कैसे तोड़ा जा सकता है। अब अन्य देशों को भी यह प्रेरणा मिली है कि वे अमेरिकी शर्तों के आगे झुकने से इंकार करने की हिम्मत दिखाएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट तैनात कर दिए. यह तैनाती दोनों देशों के रक्षा समझौते के तहत की गई, लेकिन इसे ईरान के लिए एक सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है. यह अमेरिका की दोहरी रणनीति थी ताकि एक तरफ बातचीत के जरिए समाधान का दिखावा किया जाए, दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाई घटनाक्रम की तुलना 28 फरवरी की उस घटना से भी की जा रही है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था. यह हमला ऐसे समय में किया गया था जब दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी. जब किसी को हमले की उम्मीद नहीं थी तब ईरान पर अटैक हुआ, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए. इस बात का खतरा पहले से था कि कहीं अमेरिका बातचीत के बीच धोखा न दे दे वही हुआ अब ईरान को और मजबूती से खड़े होने की जरूरत होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 19:25:36 +0530</pubDate>
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