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                <title>Women Rights India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>गृहिणियों को राष्ट्र निर्माता मानकर सुप्रीम कोर्ट ने रचा सामाजिक न्याय का नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय समाज में गृहिणी का स्थान हमेशा से परिवार की धुरी के रूप में रहा है। वह घर की व्यवस्था संभालती है बच्चों का पालन-पोषण करती है बुजुर्गों की देखभाल करती है और परिवार को भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। इसके बावजूद उसके श्रम को लंबे समय तक आर्थिक मूल्यांकन से बाहर रखा गया। घर के भीतर किए जाने वाले अनगिनत कार्यों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का नाम देकर उनकी वास्तविक कीमत को नजरअंदाज किया जाता रहा। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक चेतना को नई दिशा देने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181065/supreme-court-created-a-new-chapter-of-social-justice-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय समाज में गृहिणी का स्थान हमेशा से परिवार की धुरी के रूप में रहा है। वह घर की व्यवस्था संभालती है बच्चों का पालन-पोषण करती है बुजुर्गों की देखभाल करती है और परिवार को भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। इसके बावजूद उसके श्रम को लंबे समय तक आर्थिक मूल्यांकन से बाहर रखा गया। घर के भीतर किए जाने वाले अनगिनत कार्यों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का नाम देकर उनकी वास्तविक कीमत को नजरअंदाज किया जाता रहा। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाला भी है। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों के मुआवजे को लेकर सर्वोच्च अदालत ने जो मानक निर्धारित किया है वह महिलाओं के सम्मान और न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता दोनों का प्रतीक है।</div>
<div>अदृश्य श्रम को मिली प्रतिष्ठा</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि गृहिणियों के काम का मूल्य कम से कम 30 हजार रुपए प्रतिमाह माना जाना चाहिए और इसी आधार पर मुआवजे की गणना की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि गृहिणियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। यह टिप्पणी अपने आप में ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार इतने स्पष्ट और प्रभावशाली शब्दों में गृहिणियों की भूमिका को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा गया है।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल किसी भी समाज की प्रगति का आधार मजबूत परिवार होता है और मजबूत परिवार का आधार अक्सर एक समर्पित महिला होती है। वह बिना किसी वेतन और अवकाश के चौबीसों घंटे कार्य करती है। उसकी मेहनत का कोई हिसाब नहीं रखा जाता और उसके योगदान को आर्थिक आंकड़ों में नहीं मापा जाता। सुप्रीम कोर्ट ने इस वास्तविकता को स्वीकार कर महिलाओं के अदृश्य श्रम को वह सम्मान दिया है जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी।</div>
<div> </div>
<div>पुरानी सोच को बदलने वाला निर्णय है।अब तक सड़क दुर्घटना मामलों में गृहिणियों की आय का अनुमान अक्सर कुशल मजदूर की मजदूरी के आधार पर लगाया जाता था। यह व्यवस्था न केवल अव्यावहारिक थी बल्कि महिलाओं के योगदान को कम करके आंकने वाली भी थी। अदालत ने इस सोच को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू कार्यों को सामान्य मजदूरी के पैमाने पर नहीं तौला जा सकता</div>
<div> </div>
<div>यह निर्णय इस बात की स्वीकारोक्ति है कि घर संभालना एक पूर्णकालिक और बहुआयामी जिम्मेदारी है। गृहिणी एक साथ प्रबंधक शिक्षक मार्गदर्शक परिचारिका और परिवार की भावनात्मक शक्ति के रूप में कार्य करती है। इसलिए उसके योगदान की तुलना किसी एक पेशे या मजदूरी से नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को अपनाकर न्याय की नई परिभाषा प्रस्तुत की है।</div>
<div> </div>
<div>महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम कहा जा सकता है।</div>
<div>यह फैसला केवल मुआवजे की राशि बढ़ाने का मामला नहीं है बल्कि महिलाओं के सम्मान को कानूनी मान्यता देने का प्रयास भी है। भारतीय समाज में आज भी अनेक महिलाएं अपने कार्यों के लिए सामाजिक सराहना तो पाती हैं लेकिन आर्थिक पहचान नहीं मिलती। अदालत ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।</div>
<div> </div>
<div>जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी गृहिणी को राष्ट्र निर्माता कहती है तब यह संदेश केवल न्यायालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज तक पहुंचता है। इससे महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है और यह स्वीकार किया जाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल कार्यालयों और उद्योगों में नहीं बल्कि घरों के भीतर भी होता है।</div>
<div> </div>
<div>न्याय प्रणाली का  संवेदनशील उदाहरण है और इस फैसले की सबसे बड़ी विशेषता न्यायपालिका की संवेदनशीलता है। अदालत ने कहा कि मुआवजा तय करते समय केवल महिला की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। उसकी उम्र शिक्षा कौशल पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक परिस्थितियां भी ध्यान में रखी जानी चाहिए। यह दृष्टिकोण बताता है कि न्यायालय जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए निर्णय दे रहा है</div>
<div> </div>
<div>कई बार दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु के बाद परिवार केवल एक सदस्य को नहीं खोता बल्कि पूरे परिवार की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। बच्चों का भविष्य बुजुर्गों की देखभाल और घर की स्थिरता पर गहरा असर पड़ता है। अदालत ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए भावनात्मक और पारिवारिक क्षति को भी मुआवजे का हिस्सा माना है। यह न्याय की मानवीय और व्यावहारिक व्याख्या है।</div>
<div> </div>
<div>त्वरित न्याय के प्रति प्रतिबद्धता</div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने केवल मुआवजे की गणना का नया आधार निर्धारित नहीं किया बल्कि न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि ऐसे मामलों की निगरानी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वयं करें और दावों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दुर्घटना पीड़ित परिवार अक्सर वर्षों तक मुआवजे की प्रतीक्षा करते रहते हैं। ऐसे में अदालत का यह निर्देश न्याय को समयबद्ध और पीड़ित केंद्रित बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि सर्वोच्च न्यायालय केवल सिद्धांतों की बात नहीं कर रहा बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करना चाहता है</div>
<div>न्यायपालिका की प्रगतिशील सोच</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय न्यायपालिका की प्रगतिशील और दूरदर्शी सोच का परिचायक है। अदालत ने यह समझा कि बदलते समय में महिलाओं की भूमिका को पुराने मानकों से नहीं आंका जा सकता। आज महिलाओं का योगदान केवल आर्थिक कमाई तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संरचना को मजबूत बनाने में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div> </div>
<div>इस निर्णय ने यह संदेश दिया है कि किसी व्यक्ति का मूल्य केवल उसकी वेतन पर्ची से नहीं तय किया जा सकता। समाज के लिए किए गए उसके योगदान को भी समान महत्व मिलना चाहिए। गृहिणियों के मामले में यह संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका अधिकांश श्रम घर की चारदीवारी के भीतर ही रह जाता है।</div>
<div>सामाजिक बदलाव की नई शुरुआत शुरू हो चुका है।</div>
<div> </div>
<div>यह फैसला भविष्य में व्यापक सामाजिक बदलाव का आधार बन सकता है। इससे महिलाओं के घरेलू कार्यों के आर्थिक महत्व पर नई चर्चा शुरू होगी। नीति निर्माण के स्तर पर भी घरेलू श्रम को लेकर गंभीर विचार हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे करोड़ों गृहिणियों को यह एहसास होगा कि उनके कार्यों को देश की सर्वोच्च अदालत ने सम्मान और मान्यता दी है</div>
<div> </div>
<div>समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि घर का काम स्वाभाविक जिम्मेदारी है और उसका कोई आर्थिक मूल्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस धारणा को चुनौती देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू श्रम भी उतना ही मूल्यवान है जितना किसी अन्य पेशे में किया जाने वाला कार्य। यह विचार महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सहायक होगा</div>
<div> </div>
<div>न्याय और सम्मान का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला है।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसने गृहिणियों के अदृश्य श्रम को पहचान दी है महिलाओं के सम्मान को नई ऊंचाई प्रदान की है और दुर्घटना पीड़ित परिवारों को अधिक न्यायपूर्ण राहत सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है</div>
<div> </div>
<div>यह फैसला बताता है कि न्यायपालिका केवल कानून की व्याख्या करने वाली संस्था नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी है। महिलाओं को राष्ट्र निर्माता का दर्जा देकर सर्वोच्च अदालत ने न्याय और संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। यह निर्णय आने वाले वर्षों में महिला सम्मान सामाजिक न्याय और मानवीय न्यायशास्त्र के एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा। भारत की न्याय प्रणाली ने इस फैसले के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चा न्याय वही है जो समाज के सबसे अनदेखे और उपेक्षित योगदान को भी सम्मानपूर्वक पहचान दे सके।</div>
<div>     <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:01:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला सशक्तीकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही गौर पुलिस दुष्कर्म पीड़िता को नहीं दे पा रही बस्ती पुलिस न्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के गौर पुलिस महिला सशक्तिकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है । दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए कई महीनों से गौर थाने का चक्कर काट रही है । बस्ती पुलिस सत्य घटनाओं पर मुकदमा लिखने में पीछे हट रही है अगर मोटी रकम मिल गई तो फर्जी मुकदमा तुरंत दर्ज होता हैपीड़िता ने महिला सीओ हर्रैया व पुलिस अधीक्षक बस्ती से भी लिखित शिकायत दिया  लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पुलिस महिला उत्पीड़न का केस लिखने से करनी कट रही है क्योंकि आरोपी से मोटी रकम मिलने के कारण पीड़िता को नहीं नया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176937/gaur-police-is-openly-flouting-women-empowerment-basti-police-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260421-wa0030.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के गौर पुलिस महिला सशक्तिकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है । दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए कई महीनों से गौर थाने का चक्कर काट रही है । बस्ती पुलिस सत्य घटनाओं पर मुकदमा लिखने में पीछे हट रही है अगर मोटी रकम मिल गई तो फर्जी मुकदमा तुरंत दर्ज होता हैपीड़िता ने महिला सीओ हर्रैया व पुलिस अधीक्षक बस्ती से भी लिखित शिकायत दिया  लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पुलिस महिला उत्पीड़न का केस लिखने से करनी कट रही है क्योंकि आरोपी से मोटी रकम मिलने के कारण पीड़िता को नहीं नया दे पा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बस्ती पुलिस बस्ती जिले की पुलिस इतना भ्रष्ट हो चुकी है अगर आपके पास पैसा है तो आपका केस दर्ज होगा नहीं तो आप चक्कर लगाते रहो कप्तान भी तेज तर्रार होने के बावजूद भी महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ रही है पुलिस विभाग दुष्कर पीड़िता के साथ तमाशा कर रही है न्यायाधीश पानी में अक्षम साबित हो रही है बस्ती पुलिस कैसे होगा गरीबों का न्याय भ्रष्टाचार में बस्ती पुलिस के आगे जनता को न्याय नहीं दे पा रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेशों की ताजिया उड़ा रही है बस्ती पुलिस कार्रवाई करने से करनी कट रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि गौैर थाना क्षेत्र में एक युवती के साथ दुष्कर्म, गर्भपात कराने और मंदिर में विवाह के बाद घर से निकाल दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर आरोपी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है और अपने जान माल के रक्षा की गुहार लगाई है। शिकायत पत्र में पीडिता ने लिखा है कि गौैर थाना क्षेत्र के उसी गांव के ही निवासी किशन पुत्र केशवराम ने शौच के लिए गई पीड़िता को पकड़कर जबरन जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया और दुष्कर्म का वीडियो भी बना लिया और धमकी देकर लगभग तीन चार माह से पीड़िता से सम्बन्ध बनाता रहा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> तीन चार महीनो से जबरन बीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर सम्बंध  बनाते-बनाते पीड़िता गर्भावती हो गई इस बात की जानकारी आरोपी किशन को हुई तभी आरोपी किशन ने पीड़िता रमपता को विश्वासघात कर बहलाया फुसलाया और गुमराह कर कहा कि तुम गर्भ निरोधक गोलियां खा लो गर्भ गिरने के बाद हम आपसे शादी कर लेंगे पीड़िता आरोपी किसन के जाल में फंस कर गर्भ निरोधक गोलियां खा लिया गर्भ निरोधक गोलियां खाने के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ गई और खून गिरना बंद नही हो रहा था तब पीड़िता ने मजबूर होकर सारी घटना की जानकारी अपनी माता को दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> तब पीड़िता की माता ने आरोपी किसन के खिलाफ गौर थाने में तहरीर दी थी गौर पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर आरोपी किशन व अन्य परिवार के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुट गई थी । तभी आरोपी पुलिस के दबाव में आकर बैडवा समय माता मंदिर पर पीड़िता से विवाह से किया था किन्तु अब किसन पीड़िता को अपने घर रखने के लिए तैयार नहीं है । और उसके पिता केशवराम, भाई जनकराम व भाभियां उर्मिला व गुडिया आदि ने उसे बुरी तरह से मारा पीटा था और जान से मारने की धमकी देते हुये घर से भगा दिया था पीड़िता ने दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कराकर कार्रवाई की मांग की है और अपने जान माल के रक्षा की गुहार लगाई है। पीड़िता ने घटना की जानकारी हर्रैया सीओ को दी थी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायती पत्र दी थी लेकिन अभी तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाई है । अब देखना यह है कि बस्ती पुलिस पीड़िता को न्याय दिला पाती है या लेन देन करके मामले में लीपापोती करती है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी द्वारा महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर की गई गोष्ठी </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> पुलिस सभागार गौरीगंज में जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी श सरवणन टी. द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 द्वितीय चरण के तहत महिला सुरक्षा, सुविधा और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनपद के प्रमुख चिकित्सालयों, शिक्षण संस्थानों, महिला छात्रावासों, व्यापार मंडल व अन्य प्रमुख संस्थानों के पदाधिकारियों  के साथ गोष्ठी की गई । महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई व किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न हेल्पलाइऩ नंबरों जैसे- 1090-वीमेन पॅावर लाइन, 181-महिला हेल्प लाइन, 108-एम्बुलेंस सेवा, 1076–मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176513/seminar-conducted-by-district-magistrate-amethi-and-superintendent-of-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/3-7.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> पुलिस सभागार गौरीगंज में जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी श सरवणन टी. द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 द्वितीय चरण के तहत महिला सुरक्षा, सुविधा और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनपद के प्रमुख चिकित्सालयों, शिक्षण संस्थानों, महिला छात्रावासों, व्यापार मंडल व अन्य प्रमुख संस्थानों के पदाधिकारियों  के साथ गोष्ठी की गई । महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई व किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न हेल्पलाइऩ नंबरों जैसे- 1090-वीमेन पॅावर लाइन, 181-महिला हेल्प लाइन, 108-एम्बुलेंस सेवा, 1076–मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098-चाइल्ड लाइन, 102-स्वास्थ्य सेवा, थानों पर स्थापित मिशन शक्ति केन्द्र के विषय में जानकारी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोष्ठी में महोदय द्वारा संस्थानों मे कार्यरत महिला कर्मचारियों व छात्राओं के लिये परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए तथा वर्तमान समय में प्रचलित विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध व उनसे बचने के उपाय जैसे साइबर अपराध होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नं 1930 पर संपर्क करने अथवा <a href="http://www.cybercrime.gov.in/">www.cybercrime.gov.in</a> पर रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ संबंधित थाने अथवा जनपदीय साइबर थाना पर शिकायत दर्ज कराने  हेतु जागरुक किया गया । साइबर अपराध से बचने हेतु किसी भी प्रकार के सोशल साइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे- ओटीपी, फोटो, मोबाइल नं0, आदि साझा न करें । तदोपरान्त उपस्थित पदाधिकारियों एवं उद्यमियों की समस्याओं व सुझावों को विस्तार से सुना गया । एसपी द्वारा प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। । इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक अमेठा  ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह व अन्य मौजूद रहे ।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 20:20:28 +0530</pubDate>
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                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में उतरी महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी महिलाओं ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता की और इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक सुधार बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल देश के लोकतंत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ आधी आबादी की भागीदारी को और मजबूत करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ता एवं महिला अधिकारों के लिए कार्य करने वाली सोशल एक्टिविस्ट दिशा अरोड़ा ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी को दूर करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं में क्षमता हमेशा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176494/women-came-out-in-support-of-nari-shakti-vandan-act"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001837614.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी महिलाओं ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता की और इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक सुधार बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल देश के लोकतंत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ आधी आबादी की भागीदारी को और मजबूत करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ता एवं महिला अधिकारों के लिए कार्य करने वाली सोशल एक्टिविस्ट दिशा अरोड़ा ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी को दूर करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं में क्षमता हमेशा से रही है, लेकिन अवसर और भागीदारी सीमित थे। 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ अब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मजबूती से गूंजेगी और वे नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी शिवहरे ने बताया कि यह अधिनियम महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और बदलती भूमिका का प्रतीक है। पहले महिलाएं वोट डालने की बात करती थीं, लेकिन अब वे नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से देश की आधी आबादी से जुड़े मुद्दे मजबूती से सामने आएंगे और उनका समाधान संभव होगा। 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार देगा, जिससे वे अपने मुद्दों को खुलकर रख सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में “प्रधान पति” जैसी चुनौतियाँ अभी भी हैं, लेकिन यह व्यवस्था तेजी से बदल रही है और महिलाएं अब वास्तविक नेतृत्व की ओर बढ़ रही हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 19:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>डा.अंबेडकर का महिला अधिकारों के लिए समर्पण </title>
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">संसद से लेकर समाज  तक आज महिला अधिकारों और सशक्तिकरण की चर्चा जोरों पर है। क्या हम जानते हैं कि इसकी वैचारिक और विधायी नींव स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में ही डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रख दी गई थी?। डॉ. अंबेडकर स्वतंत्र भारत के उन विरले और दूरदर्शी राजनेताओं में अग्रणी थे, जिन्होंने महिलाओं की समानता को केवल एक सामाजिक सुधार का विषय न मानकर इसे राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त के रूप में देखा। उनका सुस्पष्ट मत था कि किसी भी समुदाय की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175969/dr-bhimrao-ambedkar-creator-of-the-constitution-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संसद से लेकर समाज  तक आज महिला अधिकारों और सशक्तिकरण की चर्चा जोरों पर है। क्या हम जानते हैं कि इसकी वैचारिक और विधायी नींव स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में ही डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रख दी गई थी?। डॉ. अंबेडकर स्वतंत्र भारत के उन विरले और दूरदर्शी राजनेताओं में अग्रणी थे, जिन्होंने महिलाओं की समानता को केवल एक सामाजिक सुधार का विषय न मानकर इसे राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त के रूप में देखा। उनका सुस्पष्ट मत था कि किसी भी समुदाय की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है। इसी दृष्टि के साथ उन्होंने न केवल सैद्धांतिक विमर्श किया, बल्कि विधायी और नीतिगत धरातल पर भी महिलाओं के उत्थान के लिए निर्णायक कदम उठाए और सतत् प्रयास किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान डॉ. अंबेडकर ने यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं को पुरुष के समान नागरिक अधिकार प्राप्त हों। अनुच्छेद 14 और 15 के माध्यम से कानून के समक्ष समानता और लिंग आधारित भेदभाव के विरुद्ध सुरक्षा जैसे प्रावधान ऐतिहासिक मील के पत्थर साबित हुए। अंबेडकर का सबसे क्रांतिकारी और साहसिक प्रयास 'हिंदू कोड बिल' के रूप में सामने आया, जिसके माध्यम से उन्होंने महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, विवाह और तलाक में समानता तथा उत्तराधिकार के न्यायसंगत प्रावधान देने की पुरजोर वकालत की। उस दौर में इस विधेयक का रूढ़िवादी वर्गों द्वारा इतना तीव्र विरोध हुआ कि अंबेडकर ने अपने सिद्धांतों की रक्षा हेतु कानून मंत्री के पद से त्यागपत्र देना बेहतर समझा। हालांकि, कालांतर में इसी बिल के विभिन्न अंशों ने उन कानूनों का रूप लिया, जो आज भारतीय नारी के सम्मान और अधिकारों की आधारशिला बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​विधिक समानता के साथ-साथ डॉ. अंबेडकर ने श्रमिक महिलाओं के जीवन में भी गरिमापूर्ण परिवर्तन लाने की पहल की। उन्होंने मातृत्व लाभ, कार्य के निश्चित घंटे और खदानों व कारखानों में कार्यरत महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे प्रावधानों को श्रम कानूनों का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि आर्थिक सशक्तिकरण के बिना सामाजिक स्वतंत्रता अधूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों की केंद्र सरकार द्वारा 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना उसी लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव प्रतीत होता है, जिसकी परिकल्पना दशकों पहले अंबेडकर ने की थी। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को आगामी जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण इसकी समय-सीमा को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा अपितु इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की वास्तविक इच्छाशक्ति और सामाजिक मानसिकता में आमूल-चूल परिवर्तन भी अपरिहार्य है। डॉ. अंबेडकर का संघर्ष आज भी हमें यह स्मरण कराता है कि वास्तविक प्रगति केवल नीतियों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और समाज की व्यापक स्वीकार्यता से ही संभव होगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 19:01:22 +0530</pubDate>
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