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                <title>POCSO Act India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मौज एप पर नाबालिग को जाल में फंसाकर दुषकर्म करने वाला गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कमिश्नरेट कानपुर थाना सेन पश्चिम पारा के न्यू आजाद नगर निवासी एक नाबालिग लड़की से मौज एप पर चैट कर उसे अपने जाल में फंसाकर आगरा लेजाके उसके साथ दुषकर्म कर कानपुर सेन्ट्रल पर छोड़ जाने वाले अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कमिश्नरेट पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7.07.2026 को शिकायतकर्ता निवासी न्यू आजाद नगर, कानपुर नगर के द्वारा थाना सेन पश्चिम पारा पर सूचना दी गई थी कि "उसकी पुत्री उम्र करीब 13 वर्ष कक्षा 7 में पढ़ती है। 2/7/2026 को मैंने अपनी पुत्री को मोबाइल में कृष्णा नाम के लड़के से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184136/man-who-raped-a-minor-arrested-on-mauj-app"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002134406-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> कमिश्नरेट कानपुर थाना सेन पश्चिम पारा के न्यू आजाद नगर निवासी एक नाबालिग लड़की से मौज एप पर चैट कर उसे अपने जाल में फंसाकर आगरा लेजाके उसके साथ दुषकर्म कर कानपुर सेन्ट्रल पर छोड़ जाने वाले अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कमिश्नरेट पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7.07.2026 को शिकायतकर्ता निवासी न्यू आजाद नगर, कानपुर नगर के द्वारा थाना सेन पश्चिम पारा पर सूचना दी गई थी कि "उसकी पुत्री उम्र करीब 13 वर्ष कक्षा 7 में पढ़ती है। 2/7/2026 को मैंने अपनी पुत्री को मोबाइल में कृष्णा नाम के लड़के से MOJ APP पर चैट करते हुए देखा था तो मैंने उसको डांट फटकार लगाई थी और समझाया बुझाया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस कारण 6/7/2026 को शाम को समय करीब 4.30 बजे मेरी बेटी कोचिंग करने के बहाने घर से प्रियदर्शिनी स्कूल गोपाल नगर के पास गयी थी तथा वहीं से बिना बताये कहीं चली गयी थी। शाम को जब काफी देर हो गई तो हम परिजनों ने उसे ढूंढने का काफी प्रयास किया लेकिन कोई पता नहीं चल सका। जब हम घर वापस आये तो मेरी बड़ी बेटी को एक नोट मिला जो मेरी छोटी बेटी की हैन्डराइटिंग में था मेरी नाबालिक पुत्री को MOJ APP पर चैट करने वाले लडके कृष्णा के द्वारा ही बहला फुसलाकर ले जाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त सूचना के आधार पर थाना सेन पश्चिम पारा में मुकदमा पंजीकृत किया गया था। विवेचना के क्रम में पाया गया कि अभियुक्त कृष्णा उपरोक्त जो मूल रूप से आगरा का रहने वाला है जो MOJ APP पर उक्त प्रकरण से सम्बन्धित वादिनी की पुत्री से चैट करता था और उसी दौरान ही उसे अपनी बातों में बहला फुसलाकर 6.7.2026 को घर से बाहर बुलाकर प्रियदर्शनी स्कूल के पास से अपने साथ आगरा ले गया था जहाँ पर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और दो दिन के उपरान्त कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन के पास छोड़कर भाग गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तदोपरान्त पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया व मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के उपरान्त उक्त अभियोग में पाक्सो एक्ट की बढोत्तरी की गई। चूंकि उक्त प्रकरण में वांछित अभियुक्त कृष्णा उपरोक्त MOJ APP पर CHAT करता था । चौकी प्रभारी न्यू आजाद नगर व मिशन शक्ति प्रभारी के द्वारा जाल बिछाकर MOJ APP पर ही उसको अपनी बातों में लेकर कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन पर बुलाया गया । जहाँ पर अभियुक्त कृष्णा उपरोक्त को गिरफ्तार किया गया है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:20:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पुणे का कलंक: समाज की संवेदनहीनता का सबसे काला अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता को झकझोर देने वाली यह घटना समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है। पुणे के भोर तहसील के नासरापुर गांव में </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को घटी यह घटना केवल अपराध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गहरी मानवीय त्रासदी है। लगभग चार वर्ष की मासूम बच्ची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे भोजन या बछड़ा दिखाने के लालच में पशुशाला में ले जाया गया। </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय व्यक्ति ने बेरहमी से अत्याचार कर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की और शव को गोबर के ढेर में छिपा दिया। सीसीटीवी कैमरों ने सच</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178225/the-stigma-of-pune-is-the-darkest-chapter-of-insensitivity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता को झकझोर देने वाली यह घटना समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है। पुणे के भोर तहसील के नासरापुर गांव में </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को घटी यह घटना केवल अपराध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गहरी मानवीय त्रासदी है। लगभग चार वर्ष की मासूम बच्ची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे भोजन या बछड़ा दिखाने के लालच में पशुशाला में ले जाया गया। </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय व्यक्ति ने बेरहमी से अत्याचार कर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की और शव को गोबर के ढेर में छिपा दिया। सीसीटीवी कैमरों ने सच सामने ला दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी प्रश्न है कि ऐसी घटनाएँ क्यों बढ़ रही हैं। क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना इतनी कमजोर हो चुकी है कि बच्चों की रक्षा भी सुनिश्चित नहीं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे समाज की गंभीर विफलता का प्रमाण है। आरोपी पर पहले भी यौन अपराध के मामले दर्ज थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे अपराधियों के बढ़ते हौसले और पुलिस-न्याय व्यवस्था की कमियों पर सवाल और गहरे होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हालिया आंकड़ों के अनुसार महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारियों से भी स्पष्ट होता है कि अनेक क्षेत्रों में स्थिति दिन-प्रतिदिन अधिक गंभीर और असुरक्षित होती जा रही है। जो स्थान कभी सुरक्षित माने जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे अब अपराध और असुरक्षा के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। समस्या केवल कानूनों की मौजूदगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके कमजोर क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी के अभाव में छिपी है। यदि एक मासूम बच्ची अपने ही घर के आसपास सुरक्षित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह पूरे सुरक्षा तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अपराधियों के बढ़ते हौसले का एक बड़ा कारण समाज की उदासीनता भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो समय रहते चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था में गहरे सुधार के बिना ऐसी घटनाओं पर रोक संभव नहीं। पुलिस व्यवस्था और न्याय प्रणाली में ठोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी बदलाव आवश्यक हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ है और मुख्यमंत्री ने फास्ट-ट्रैक ट्रायल व कठोर सजा की घोषणा की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये कदम केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बाल यौन अपराध संरक्षण कानून के अंतर्गत लंबित मामलों की अधिक संख्या और दोषसिद्धि की कम दर व्यवस्था की कमजोरियों को स्पष्ट करती है। प्रत्येक जिले में </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे सक्रिय बाल संरक्षण इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होनी चाहिए। गाँवों और शहरों में निगरानी कैमरों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाए तथा महिला पुलिस की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए। न्याय प्रक्रिया को तेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शी और प्रभावी बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा की वास्तविक नींव समाज की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी पर ही टिकी होती है। केवल कानून या प्रशासन के भरोसे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक समाज स्वयं सजग न हो। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंगनवाड़ियों और खेल स्थलों को पूर्ण सुरक्षा क्षेत्र घोषित कर कठोर निगरानी आवश्यक है। अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि वे संभावित खतरों को पहचान सकें। स्थानीय समुदायों में सतर्कता समूह बनाए जाने चाहिए जो संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत सूचना दें। बच्चों को आत्मरक्षा और सुरक्षित व्यवहार की शिक्षा देना भी अत्यंत आवश्यक है। जब तक समाज सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक केवल कानून व्यवस्था पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी और गहरी चुनौती आज भी हमारी जड़ जमाई हुई मानसिकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वर्षों से बदली नहीं है। कई बार पीड़ित को ही प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर दिया जाता है और पुरानी सोच से प्रभावित प्रतिक्रियाएँ दी जाती हैं। यह धारणा बदलनी होगी कि खतरा केवल अजनबियों से होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि वास्तविकता यह है कि कई बार परिचित और भरोसेमंद लोग ही अपराधी बन जाते हैं। शिक्षा प्रणाली में लिंग संवेदनशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहमति का सम्मान और नैतिक मूल्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मीडिया को भी अत्यंत जिम्मेदारी से कार्य करना होगा ताकि ऐसी घटनाओं को सनसनी के रूप में प्रस्तुत न किया जाए। दोषियों के लिए कठोरतम दंड पर गंभीर सामाजिक और कानूनी मंथन आवश्यक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बदलते समय में सुरक्षा को मजबूत करने की कुंजी आधुनिक तकनीक के प्रभावी और व्यापक उपयोग में निहित है। एआई आधारित उन्नत निगरानी प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के लिए सुरक्षित पहनने योग्य उपकरण और स्थान आधारित सुरक्षा तंत्र को बड़े स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। महिला सहायता केंद्रों को अधिक सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने योग्य बनाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों तक तकनीकी सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि गाँव और शहर के बीच सुरक्षा की खाई कम हो सके। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का उपयोग केवल सुरक्षा के उद्देश्य से हो और उसका किसी भी रूप में दुरुपयोग न हो। तकनीक तभी वास्तविक रूप से सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी सुरक्षा पहुँचा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी मासूम और कमजोर जिंदगियों की सुरक्षा से होती है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल योजना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी है। इस घटना ने स्पष्ट किया कि दोषी अक्सर परिचित होता है और बार-बार जेल से छूटने वाले अपराधी समाज के लिए बड़ा खतरा हैं। पुणे की मासूम बच्ची यह कठोर सच याद दिलाती है कि विकास तभी सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब जीवन सुरक्षित हो। यदि आने वाली पीढ़ियाँ भय में जीने को मजबूर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकास के दावे अधूरे रह जाएँगे। समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और परिवार—सभी को मिलकर सुरक्षित वातावरण बनाना होगा। नागरिकों की सतर्कता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून का कठोर पालन और न्याय व्यवस्था की सक्रियता ही समाधान दे सकती है। यह समय केवल सहानुभूति का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ठोस और निरंतर कार्रवाई का है। अगर अब भी नहीं जागे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल और कितनी मासूम चीखें दब जाएँगी</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:56:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मासूमियत पर हमला: सूरत की घटना ने झकझोरा समाज तीन साल की बच्ची के साथ दरिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177225/attack-on-innocence-surat-incident-shocked-the-society-brutality-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rape.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार समाज के लिए शर्मनाक और चिंताजनक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना का विवरण जितना दुखद है, उतना ही भयावह भी है। बच्ची अपने ही घर में सुरक्षित समझी जाने वाली जगह पर थी, लेकिन एक दरिंदे ने मौके का फायदा उठाकर उसकी मासूमियत को रौंदने की कोशिश की। यह सवाल उठता है कि आखिर एक व्यक्ति किस हद तक संवेदनहीन हो सकता है कि उसे एक छोटी बच्ची पर भी दया नहीं आती। यह केवल एक व्यक्ति की विकृत मानसिकता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक गिरावट का संकेत भी है जहां इंसान अपने नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी चर्चा को जन्म दिया है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अक्सर ऐसा होता है कि छोटे बच्चों को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है, यह सोचकर कि वे घर के अंदर सुरक्षित हैं। लेकिन यह घटना बताती है कि खतरा केवल बाहर नहीं, बल्कि आसपास भी हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा केवल दरवाजे बंद करने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी और सतर्कता आवश्यक है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस मामले में बच्ची की मां की सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी को रोका। समय पर पहुंचकर उन्होंने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया, जिससे यह साबित होता है कि जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन हर मामले में ऐसा संभव नहीं होता, इसलिए समाज को मिलकर ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस क्षेत्र में आरोपी बिना किसी किरायानामा के रह रहा था, वहां की निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर थी, यह स्पष्ट होता है। यदि किरायेदारों का सही रिकॉर्ड रखा जाता और नियमित जांच होती, तो शायद ऐसे अपराधियों पर पहले ही नजर रखी जा सकती थी। पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें पहले से ही ऐसे संभावित खतरों को पहचानने और रोकने की दिशा में काम करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में बढ़ते अपराधों के पीछे एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली और तकनीक का गलत उपयोग भी है। मोबाइल और इंटरनेट ने जहां दुनिया को जोड़ा है, वहीं यह कई बार गलत दिशा में भी ले जा रहा है। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता और उस पर नियंत्रण की कमी ने कुछ लोगों की सोच को विकृत कर दिया है। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जिनकी मानसिकता पहले से कमजोर होती है, वे इससे प्रभावित होकर गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि हम बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा और जागरूकता के बारे में सिखाएं। भले ही तीन साल की बच्ची इतनी समझदार नहीं होती कि वह खुद को बचा सके, लेकिन बड़े होते बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। इससे वे किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं और अपने माता-पिता को बता सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना के बाद समाज में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। लोगों द्वारा आरोपी की पिटाई करना उनके भीतर के आक्रोश को दर्शाता है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कानून अपने तरीके से काम करता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि यह दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सके। पॉक्सो एक्ट जैसे कानून इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं, लेकिन इनका प्रभाव तभी दिखेगा जब उनका सख्ती से पालन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने यह भी दिखाया है कि समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की कितनी आवश्यकता है। केवल पुलिस या सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हर व्यक्ति को अपने आसपास के माहौल पर नजर रखनी होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देनी होगी। पड़ोसियों के बीच आपसी संवाद और सतर्कता भी ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। क्या हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जहां बच्चे सुरक्षित नहीं हैं? क्या हमारी प्रगति केवल आर्थिक और तकनीकी तक सीमित रह गई है, जबकि नैतिक और सामाजिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब हमें खुद तलाशने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जरूरत इस बात की है कि हम इस घटना को केवल एक खबर की तरह न देखें, बल्कि इससे सीख लें और अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। अभिभावक अधिक सतर्क रहें, समाज अधिक जागरूक बने और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए। तभी हम एक ऐसा वातावरण बना पाएंगे जहां हर बच्चा सुरक्षित और निश्चिंत होकर अपना बचपन जी सके। इस तरह की घटनाएं केवल पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को घायल करती हैं। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं और एक सुरक्षित समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। तभी हम सच्चे अर्थों में मानवता को बचा पाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले दरोगा को 20साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>.चार  वर्षीय बच्ची को टॉफी देने का लालच देकर अपने कमरे में बुलाया और फिर उससे दुष्कर्म किया। घटना सामने आने पर पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया था। पीड़िता और उसके परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और आरोपी सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस महकमे ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त भी कर दिया। मामले की जांच तेजी से पूरी की गई और पॉक्सो एक्ट के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से आरोपी के खिलाफ 33 गवाह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176460/the-inspector-who-raped-a-four-year-old-girl-was-sentenced-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/672b6205ea35d-delhi-court-discharges-accused-in-rape-case--cites-contradictory-whatsapp-chats-and-delayed-fir-061215776-16x9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>.चार  वर्षीय बच्ची को टॉफी देने का लालच देकर अपने कमरे में बुलाया और फिर उससे दुष्कर्म किया। घटना सामने आने पर पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया था। पीड़िता और उसके परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और आरोपी सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस महकमे ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त भी कर दिया। मामले की जांच तेजी से पूरी की गई और पॉक्सो एक्ट के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से आरोपी के खिलाफ 33 गवाह और 46 दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध सबूतों पर गौर करते हुए सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह यादव को दोषी करार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सजा सुनाए जाने के बाद सब इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेगा । वहीं, पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक जितेंद्र कुमार सैनी ने मामले को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी द्वारा ही छोटी बच्ची के साथ इस तरह की घटना अत्यंत गंभीर है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:55:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने पाक्सो के आरोपी को किया बरी, कहा– नाबालिग अपनी मर्जी से गई थी, परिस्थितियां देखना भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175919/high-court-acquitted-pocso-accused-and-said-%E2%80%93-the-minor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/chhattisgarh-high-court-jobs_650x400_41472110383.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली जिले की एक नाबालिग लड़की स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. शिकायत में आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद विशेष POCSO कोर्ट, मुंगेली ने आरोपी दीपक वैष्णव को IPC की धारा 363 और 366 के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी माना था. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को गंभीर अपराध का दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से संपर्क था. दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी और लड़की ने खुद अपनी इच्छा से आरोपी के साथ जाने का फैसला किया. दोनों ने मुंगेली, रायपुर, हैदराबाद और विजयवाड़ा जैसे शहरों की यात्रा की और करीब एक महीने तक साथ रहे. बचाव पक्ष का कहना था कि पूरे मामले में कहीं भी जबरदस्ती, दबाव या लालच के कोई साक्ष्य नहीं हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है. आरोपी ने उसे उसके माता-पिता की देखरेख से दूर ले जाकर अपराध किया है, जो सीधे तौर पर POCSO एक्ट के तहत दंडनीय है.</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “ले जाना” और “साथ जाना” दोनों अलग-अलग बातें हैं. कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने पीड़िता को जबरदस्ती या धोखे से उसके अभिभावकों की देखरेख से दूर किया. कोर्ट के अनुसार, यदि कोई लड़की खुद अपनी मर्जी से किसी के साथ जाती है, तो केवल इसी आधार पर अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता.</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मेडिकल जांच और FSL रिपोर्ट पर भी गौर किया. रिपोर्ट्स में जबरन शारीरिक संबंध या हिंसा के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले. इस आधार पर कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करने में विफल रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 15 वर्ष 10 माह थी. वह नाबालिग जरूर थी, लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि हर मामले में केवल उम्र के आधार पर दोष तय नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब परिस्थितियां यह दिखाती हों कि पीड़िता अपनी इच्छा से गई थी और कोई जोर-जबरदस्ती नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:39:31 +0530</pubDate>
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                <title>पुरानी बस्ती थानाक्षेत्रमे 7 साल की बच्ची के साथ14साल के किशोर नें की गंदी हरकत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में नाबालिकों का यौन उत्पीड़न नहीं रूक रहा है जबकि लोगों द्वारा नाबालिक बच्चियों को निशाना बना रहे हैं जिले में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है अपराधियों पर शिकंजा नहीं कर पा रहे हैं पुलिसकर्मी कैसे बच्चियों सुरक्षित रहेंगे ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की एक गांव का है मासूम 7 साल की बच्ची के साथ 14सालकिशोर नें की गंदी हरकत कर डाला नहीं खौफ है पुलिस का ऐसे बच्चों में जिनके संस्कार में ओछी हरकत दिखाई दे रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती थाना अंतर्गत 07 वर्षीय बच्ची के साथ 14 वर्षीय बालक द्वारा गलत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175873/14-year-old-teenager-did-dirty-acts-with-a-7"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/6.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में नाबालिकों का यौन उत्पीड़न नहीं रूक रहा है जबकि लोगों द्वारा नाबालिक बच्चियों को निशाना बना रहे हैं जिले में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है अपराधियों पर शिकंजा नहीं कर पा रहे हैं पुलिसकर्मी कैसे बच्चियों सुरक्षित रहेंगे ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की एक गांव का है मासूम 7 साल की बच्ची के साथ 14सालकिशोर नें की गंदी हरकत कर डाला नहीं खौफ है पुलिस का ऐसे बच्चों में जिनके संस्कार में ओछी हरकत दिखाई दे रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती थाना अंतर्गत 07 वर्षीय बच्ची के साथ 14 वर्षीय बालक द्वारा गलत काम किये जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले मे सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर आरोपी को हिरासत मे लिया है। घटना 12 अप्रैल की है। उससे पूछताछ जारी है। क्षेत्राधिकारी सदर सतेन्द्र भूषण तिवारी ने बताया कि थाना अंतर्गत लखनौरा गांव मे 07 वर्षीय एक बच्ची के साथ पड़ोस के 14 साल के किशोर ने दुष्कर्म की वारदात का अंजाम दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> डायल 112 से सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल फोरेंसिंक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा किया। पीड़िता का मेडिकल कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही आरोपी से पूछताछ किया जा रहा है क्षेत्राधिकार सदर द्वारा मामले को गंभीरता से जांच की जा रही है जल्द ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 20:12:33 +0530</pubDate>
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