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                <title>Rising Temperature India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rising Temperature India RSS Feed</description>
                
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                <title>गर्मी से हर कोई परेशान, शीतल पेय की बढ़ी मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> इन दिनों गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है।  दोपहर के समय तेज धूप के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम के बदलते मिजाज से शीतल पेय पदार्थों की मांग भी बढ़ना शुरू हो गई है। चौराहों पर शीतल पेय की दुकानों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई है। सुबह से ही धूप तेज रहने लगी और दोपहर होते-होते गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगा। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही भी कम नजर आई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तेज धूप के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176903/everyone-is-troubled-by-the-heat-increased-demand-for-cold"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/collage-maker-14-jun-2023-12-54-pm-8532-1686727547.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> इन दिनों गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है।  दोपहर के समय तेज धूप के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम के बदलते मिजाज से शीतल पेय पदार्थों की मांग भी बढ़ना शुरू हो गई है। चौराहों पर शीतल पेय की दुकानों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई है। सुबह से ही धूप तेज रहने लगी और दोपहर होते-होते गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगा। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही भी कम नजर आई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तेज धूप के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। खेतों में सब्जियों को बचाने के लिए किसानों को सिंचाई के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। नलकूप और पंपसेट के सहारे किसान खेतों में पानी पहुंचाने के लिए लगातार भागदौड़ कर रहे हैं। मौसम में यदि मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 21:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भीषण प्रचंड गर्मी से बेहाल प्रदेश के सरकारी स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी भीषण गर्मी ने अपना तांडव मचा रखा है। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल के अंत तक लू और प्रचंड गर्मी का दौर जारी रहने की संभावना है। एक और राज्य सरकारें लोगों को गर्मी से बचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर उन्हीं सरकारों के आदेश से हर वर्ष अप्रैल माह में स्कूलों का संचालन जारी रहता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नर्सरी से बारहवीं तक के बच्चे तपती दोपहरी में स्कूल से घर लौटते नजर आते हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> सरकारें भले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176452/government-schools-of-the-state-are-suffering-from-severe-heat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी भीषण गर्मी ने अपना तांडव मचा रखा है। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल के अंत तक लू और प्रचंड गर्मी का दौर जारी रहने की संभावना है। एक और राज्य सरकारें लोगों को गर्मी से बचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर उन्हीं सरकारों के आदेश से हर वर्ष अप्रैल माह में स्कूलों का संचालन जारी रहता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नर्सरी से बारहवीं तक के बच्चे तपती दोपहरी में स्कूल से घर लौटते नजर आते हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> सरकारें भले ही स्कूलों का समय दोपहर </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे तक सीमित करने के निर्देश जारी करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वास्तविक समस्या इससे कहीं अधिक गंभीर है। मध्यम और निम्न वर्ग के अधिकांश बच्चे पैदल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल या ऑटो से स्कूल आते-जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई बच्चों को कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में जब स्कूलों की छुट्टी दोपहर </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे के बाद होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब बच्चों को अपने घर पहुँचने में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दिन का सबसे अधिक गर्म और खतरनाक समय होता है। इस दौरान लू और तेज धूप के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों से आने वाले विद्यार्थियों की स्थिति और भी चिंताजनक है। उन्हें भीषण गर्मी के इस प्रकोप से बचाने के लिए राज्य सरकारों को गंभीरता से मंथन करना चाहिए। यदि स्कूलों का संचालन जून माह से प्रारंभ किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बच्चों को गर्मी से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन का प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मानव द्वारा प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के कारण हर वर्ष गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि जो क्षेत्र पहले ठंडे माने जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां भी अब कूलर और एसी की आवश्यकता महसूस होने लगी है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में देशभर की राज्य सरकारों को चाहिए कि वे शैक्षणिक सत्र की शुरुआत </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल के बजाय </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून से करने पर गंभीरता से विचार करें। यह निर्णय न केवल व्यावहारिक होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक साबित होगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अतः प्रतिवर्ष बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए सरकार को नए शैक्षणिक सत्र के समय में बदलाव पर निर्णय लेना चाहिए और </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून से स्कूल खोलने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। यही विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल होगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                                                                                                                                                                 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:35:38 +0530</pubDate>
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                <title>अप्रैल की भीषण गर्मी और अनियमित वर्षा से बदलता जीवन का संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">अप्रैल का महीना इस बार अपने साथ ऐसा मौसम लेकर आया है, जिसने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। एक ओर उत्तर भारत में गर्मी का पारा तेजी से चढ़ रहा है और दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में वर्षा और तूफान का दौर जारी है। इस कारण जनजीवन पर बुरा असर देखने को मिल रहा है। सुबह से ही तेज धूप का सामना करना पड़ता है और दोपहर तक गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है ।शाम के समय भी राहत नहीं मिलती और रात में भी गर्मी बनी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175833/the-balance-of-life-changes-due-to-the-scorching-heat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas8.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">अप्रैल का महीना इस बार अपने साथ ऐसा मौसम लेकर आया है, जिसने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। एक ओर उत्तर भारत में गर्मी का पारा तेजी से चढ़ रहा है और दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में वर्षा और तूफान का दौर जारी है। इस कारण जनजीवन पर बुरा असर देखने को मिल रहा है। सुबह से ही तेज धूप का सामना करना पड़ता है और दोपहर तक गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है ।शाम के समय भी राहत नहीं मिलती और रात में भी गर्मी बनी रहती है। इससे लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर कई राज्यों में अचानक मौसम बदल जाता है और तेज हवा के साथ वर्षा शुरू हो जाती है। जिससे कामकाज रुक जाता है और लोगों को असुविधा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर भारत में इस समय गर्मी लगातार बढ़ रही है। राजस्थान उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश दिल्ली हरियाणा और पंजाब जैसे क्षेत्रों में तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है ।कई शहरों में तापमान चालीस डिग्री के आसपास पहुंच गया है और आने वाले दिनों में इसके बयालीस डिग्री तक जाने की संभावना है। इस कारण दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई देने लगा है। लोग केवल जरूरी काम के लिए ही बाहर निकलते हैं और अधिकतर समय घरों में ही रहते हैं। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है और थकान चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में गर्मी का असर और अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जयपुर कोटा उदयपुर बाड़मेर और जोधपुर जैसे शहरों में तापमान तेजी से बढ़ा है ।बाड़मेर और कोटा में पारा उनतालीस डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। दिन के साथ अब रात में भी गर्मी का असर बना रहता है। जिससे लोगों को राहत नहीं मिलती। जल स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है और कई क्षेत्रों में पानी की कमी महसूस की जा रही है। बाजारों में दिन के समय भीड़ कम हो गई है और लोग सुबह और शाम के समय ही अपने कार्य पूरे करने का प्रयास करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में लू चलने की संभावना जताई है ।तापमान में वृद्धि के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। खुले में काम करने वाले मजदूर और किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। विद्यालयों में भी बच्चों के समय में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि उन्हें इस तेज गर्मी से बचाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां एक ओर उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप है वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में वर्षा और तूफान ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अरुणाचल प्रदेश मेघालय मणिपुर नगालैंड और त्रिपुरा में आंधी और वर्षा की स्थिति बनी हुई है। कर्नाटक और केरल में भी कई स्थानों पर तेज वर्षा हुई है, जिससे सड़कों पर पानी भर गया है और यातायात प्रभावित हुआ है। अचानक मौसम बदलने से लोगों को अपने कार्यों में बार बार रुकावट का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी ठंड का असर बना हुआ है। मनाली और उसके आसपास के क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हुई है और तापमान शून्य से नीचे चला गया है। यह स्थिति मैदानी क्षेत्रों की गर्मी से बिल्कुल अलग है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की स्थिति कितनी भिन्न है।जम्मू के अखनूर क्षेत्र में बवंडर जैसी दुर्लभ घटना भी देखी गई जो कुछ समय तक चली हालांकि इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन इसने लोगों को चौंका दिया। इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि मौसम में अस्थिरता बढ़ रही है और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मौसम के इस बदलते स्वरूप का सबसे अधिक असर कृषि पर पड़ रहा है तेज गर्मी के कारण फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और उत्पादन में कमी आने की आशंका है ।वहीं अचानक वर्षा से कटाई के समय फसल खराब हो सकती है किसानों के लिए यह स्थिति अत्यंत कठिन हो गई है उनकी मेहनत पर मौसम का सीधा प्रभाव पड़ रहा है।स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह समय चुनौतीपूर्ण है गर्मी और उमस के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही है और कई प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय विशेष रूप से कठिन है। चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में अधिक पानी पीना चाहिए और धूप से बचना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में मौसम के और अधिक कठोर होने की संभावना है। उत्तर और मध्य भारत में तापमान बयालीस डिग्री तक पहुंच सकता है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में वर्षा और तूफान का दौर जारी रह सकता है। इस कारण लोगों को सावधानी बरतनी होगी और अपने कार्यों को मौसम के अनुसार ढालना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अप्रैल का यह महीना इस बार मौसम के दोहरे प्रभाव के कारण कठिन बन गया है एक ओर भीषण गर्मी लोगों को परेशान कर रही है और दूसरी ओर वर्षा और तूफान नई समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं। यह स्थिति केवल एक मौसमी बदलाव नहीं बल्कि एक चेतावनी भी है कि हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक होना होगा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के प्रयास करने होंगे तभी हम इस प्रकार की परिस्थितियों से सुरक्षित रह सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 19:00:04 +0530</pubDate>
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