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                <title>Atmanirbhar Bharat - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास — कितना उचित?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span>  (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना में अंकित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्ण डी-एस्केलेशन अभी बाकी है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और दोनों देशों के बीच विश्वास अब भी अधूरा है। फिर भी आर्थिक आवश्यकताओं ने संवाद के द्वार फिर खटखटाए हैं। प्रश्न केवल चीनी कंपनियों की वापसी का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या भारत इसे अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप नियंत्रित कर पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या आर्थिक आवश्यकता धीरे-धीरे रणनीतिक निर्भरता में बदल जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बड़े राष्ट्रीय निर्णय के पीछे आर्थिक यथार्थ की कठोर परत होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। भारत ऊर्जा संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च गति रेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं के निर्णायक दौर में है। इनके लिए भारी निवेश के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीव्र निष्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धी लागत आवश्यक है। वैश्विक स्तर पर कई चीनी कंपनियाँ कम समय और लागत में विशाल परियोजनाएँ पूरी करने में सक्षम हैं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी कंपनियाँ अपेक्षाकृत महँगी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारतीय उद्योग अभी सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर नहीं हैं। ऐसे में सस्ता और सक्षम विकल्प आकर्षित करता है। किंतु इतिहास चेतावनी देता है कि आज का आर्थिक लाभ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि दूरदृष्टि न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल रणनीतिक स्वतंत्रता पर बोझ बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं आर्थिक आवश्यकता और राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे कठिन टकराव सामने आता है। सुरक्षा एजेंसियों की आशंकाएँ पूर्वाग्रह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक अनुभवों पर आधारित हैं। अनेक चीनी कंपनियों और उनकी सरकार के निकट संबंधों को लेकर कई देश चिंता जता चुके हैं। यदि ऐसी कंपनियों की पहुँच बिजली ग्रिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना जैसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डेटा संग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभावित बैकडोर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लॉजिस्टिक नियंत्रण के जोखिम बढ़ जाते हैं। आज युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल नेटवर्क और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं पर भी लड़े जाते हैं। ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या औपचारिक सुरक्षा जाँच और कागजी मंजूरियाँ इन अदृश्य खतरों से देश की रक्षा कर पाएँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यही ढील भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे महँगी कीमत बन जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि जब विश्व आर्थिक संतुलन की नई दिशा तय कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत एक अलग द्वंद्व से गुजर रहा है। आज विश्व </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चीन प्लस वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीति के तहत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में चीन पर निर्भरता घटाकर भारत जैसे देशों की ओर आशा से देख रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु इसी समय भारत चीनी कंपनियों के लिए नए आर्थिक द्वार खोल रहा है। यह हमारी दोहरी वास्तविकता को उजागर करता है। एक ओर आत्मनिर्भर भारत का संकल्प है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर वैश्विक उत्पादन व्यवस्था की जटिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पूर्ण आर्थिक पृथक्करण व्यवहारिक नहीं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित स्पष्ट शर्तों के बिना यह खुलापन तकनीकी निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी नियंत्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक दबाव और ऋण-जाल जैसी चुनौतियाँ बढ़ा सकता है। इसलिए निवेश का स्वागत तभी उचित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह भारत को सशक्त बनाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भर नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट है कि इस चुनौती का उत्तर न अतिवादी विरोध में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न बिना शर्त स्वीकार्यता में। भारत को विवेकपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियंत्रित और राष्ट्रीय सुरक्षा-आधारित सहयोग की नीति अपनानी होगी। चीनी कंपनियों की भागीदारी केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहे। प्रत्येक परियोजना में डेटा लोकलाइजेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी हस्तांतरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय सामग्री और भारतीय साझेदारी सुनिश्चित हो तथा हर चरण में कठोर साइबर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही घरेलू उद्योगों को अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय सहयोग और तकनीकी प्रोत्साहन मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दीर्घकाल में भारत बाहरी तकनीकी निर्भरता से मुक्त हो सके। यदि सस्ती परियोजनाओं के आकर्षण में इन सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आज का आर्थिक लाभ कल की रणनीतिक कमजोरी बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय की कूटनीतिक गूँज भी इसके आर्थिक प्रभावों जितनी दूरगामी है। लद्दाख में सैन्य और राजनयिक वार्ताएँ जारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अब भी अधूरी है। ऐसे समय में चीनी कंपनियों की वापसी का संदेश केवल बीजिंग ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरा विश्व देख रहा है। इसे एक ओर संतुलित और नियंत्रित सहयोग की नीति माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह आशंका भी है कि भारत अनजाने में अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी को आर्थिक अवसर दे रहा है। परिपक्व कूटनीति का अर्थ स्थायी शत्रुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संतुलित संवाद है। किंतु यह तभी सार्थक होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी नींव समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और पारस्परिक उत्तरदायित्व पर टिकी हो। आर्थिक संबंध किसी भी स्थिति में ऐसी निर्भरता में न बदलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में भारत की निर्णय-स्वतंत्रता को प्रभावित करे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक कसौटी चीनी कंपनियों की वापसी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि और नीति-परिपक्वता है। न भावनात्मक चीन-विरोध आर्थिक उन्नति का आधार बन सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की उपेक्षा की जा सकती है। भारत को ऐसा संतुलन स्थापित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें। विवेकपूर्ण संतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अटूट सुरक्षा-सतर्कता और स्वदेशी क्षमता निर्माण ही सशक्त भारत की नींव हैं। यदि भारत यह संतुलन साध लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सीमित छूट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल आर्थिक आवश्यकता का प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस परिपक्व राष्ट्र की पहचान बनेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक अवसरों का स्वागत करते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा भी करता है। अंततः इतिहास सम्मान उन्हीं राष्ट्रों को देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो क्षणिक लाभ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दूरदृष्टि से अपना भविष्य गढ़ते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:53:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा जागरूकता शिविर में स्वरोजगार योजनाओं की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> उ०प्र० खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की विपणन विकास सहायता योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से तहसील सदर के नगर पंचायत पृथ्वीगंज के पृथ्वीगंज भगेसरा में एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यालय प्रभारी रहेन्द्र कुमार शुक्ला ने की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में उपस्थित लोगों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी देते हुए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, ऋण सुविधा एवं सरकारी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया गया। साथ ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182731/khadi-and-village-industries-board-gave-information-about-self-employment-schemes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260704-wa0055.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> उ०प्र० खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की विपणन विकास सहायता योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से तहसील सदर के नगर पंचायत पृथ्वीगंज के पृथ्वीगंज भगेसरा में एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यालय प्रभारी रहेन्द्र कुमार शुक्ला ने की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में उपस्थित लोगों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी देते हुए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, ऋण सुविधा एवं सरकारी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया गया। साथ ही युवाओं, कारीगरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमोद शर्मा मण्डल महामंत्री (सभासद वार्ड संख्या-14 बकुलाही नगर पंचायत पृथ्वीगंज), विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा नगर अध्यक्ष आलोक गर्ग तथा अतिविशिष्ट अतिथि समाजसेवी पंकज मिश्रा उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उ०प्र० ग्रामीण बैंक, पृथ्वीगंज (प्रतापगढ़) की शाखा प्रबंधक उत्प्रेक्षा चतुर्वेदी ने बैंकिंग सुविधाओं एवं स्वरोजगार से संबंधित ऋण योजनाओं की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन राम अजीत पटेल ने किया। शिविर में श्याम बहादुर यादव, सिद्धान्त मौर्य, हर्षित पाण्डेय, अमरनाथ, हरिराम पटेल सहित क्षेत्रीय नागरिक एवं लाभार्थी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 22:53:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वदेशी अपनाने और स्वावलंबन का दिया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)। </strong> नगर स्थित स्वावलंबन केंद्र में सोमवार को स्वदेशी जागरण मंच की ओर से बैठक आयोजित की गई।इसमें युवाओं और महिलाओं को स्वदेशी अपनाने तथा स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रांत संयोजक अमित सिंह वत्स ने की। बैठक में अमित सिंह वत्स ने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्हें ऐसा उद्यम शुरू करना चाहिए जिससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम है। इसके लिए स्वावलंबन केंद्र से जुड़कर प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी प्राप्त की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182320/message-given-for-indigenous-adoption-and-self-reliance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260629-wa0327.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)। </strong> नगर स्थित स्वावलंबन केंद्र में सोमवार को स्वदेशी जागरण मंच की ओर से बैठक आयोजित की गई।इसमें युवाओं और महिलाओं को स्वदेशी अपनाने तथा स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रांत संयोजक अमित सिंह वत्स ने की। बैठक में अमित सिंह वत्स ने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्हें ऐसा उद्यम शुरू करना चाहिए जिससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम है। इसके लिए स्वावलंबन केंद्र से जुड़कर प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक मजबूती में स्वदेशी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि लोग स्वदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करें तो स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने सभी से दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में मौजूद लोगों ने स्वदेशी के महत्व पर चर्चा की और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष मनोज अवस्थी, राजू सिंह एडवोकेट, पंकज पांडेय, विवेक सिंह, बाबू तिवारी, सत्यम सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, प्रभात, त्रिलोक चंदी, सुलोचना देवी, सुशीला, रंगोली सहित अनेक लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182320/message-given-for-indigenous-adoption-and-self-reliance</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत ईपीएफओ द्वारा इफको फूलपुर में आयोजित हुआ समानांतर कार्यक्रम।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत देशभर के लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं हितधारकों को संबोधित करते हुए लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने के अवसर पर इसके समानांतर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन ईफको फूलपुर इकाई में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल थे।  इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श सुमित कुमार, डीएलसी प्रयागराज,  पी.के. सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, ईफको फूलपुर,  विनिता सिंह, एडीएम (फाइनेंस), तथा  राहुल वर्मा, कमिश्नर, ईपीएफओ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181674/a-parallel-program-organized-by-epfo-at-iffco-phulpur-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001835773.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत देशभर के लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं हितधारकों को संबोधित करते हुए लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने के अवसर पर इसके समानांतर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन ईफको फूलपुर इकाई में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल थे।  इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श सुमित कुमार, डीएलसी प्रयागराज,  पी.के. सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, ईफको फूलपुर,  विनिता सिंह, एडीएम (फाइनेंस), तथा  राहुल वर्मा, कमिश्नर, ईपीएफओ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 250 लाभार्थियों, नियोक्ताओं तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सभी प्रतिभागी प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम से लाइव जुड़े और योजना के उद्देश्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल जी   विभिन्न नियोक्ताओं  द्वारा नव नियुक्त 32  कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए । नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवा कर्मियों ने अपने रोजगार अवसरों के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संगठन एवं सरकार के प्रति आभार प्रकट किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  ने अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से देश में अब तक लगभग 70 लाख नए रोजगार सृजित किए जा चुके हैं तथा लाखों युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा, कौशल और क्षमता को विकसित भारत के निर्माण का आधार बताते हुए सरकार की रोजगार सृजन एवं कौशल विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का समापन  राहुल वर्मा(क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181674/a-parallel-program-organized-by-epfo-at-iffco-phulpur-under</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181459/self-reliance-is-a-symbol-of-a-self-respecting-nation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके साथ ही भारत में खुशहाली की स्वाभाविक तौर पर वृद्धि हुई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि "एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं",पाकिस्तान की स्थिति बिल्कुल ऐसी ही है वह अभी तक स्वतंत्रता के बाद से 75 वर्ष के बाद भी संपूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है, वह कर्जे से डूब गया है और अपने देश में खर्चा चलाने के लिए पूरी दुनिया से उधार मांगते हुए घूम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं होने का एवं उधार की जिंदगी जीने का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जबकि भारत देश विज्ञान, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और कृषि सेवा, खनिज,स्पेस रिसर्च में पूर्णता आत्मनिर्भर होकर विकसित देशों के बराबर खड़ा हुआ है। यह देशवासियों और देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन किसी भी देश की प्रगति विकास तथा और उसके नागरिकों की जिंदगी की जिजीविषा है जिससे वह संघर्ष कर आगे बढ़ता है। इतिहास गवाह है कि किसी भी महान लेखक को महान बनने तक निरंतर मेहनत कर किताबें लिखने का का श्रम करना पड़ा एवं आत्मनिर्भरता की स्थिति में विचार कर अपने विचारों को लिपिबद्ध करना पड़ा तब जाकर वह महानता की श्रेणी को प्राप्त कर सका। इसी तरह कोई छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे स्वयं परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा एवं परीक्षा में मनोवांछित सफलता प्राप्त कर उसे स्वयं अध्ययन करना होगा। इसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में भी मनुष्य को आत्मनिर्भर होकर मेहनत कर दीक्षित सफलता प्राप्त करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा देश भारत भी आजादी के बाद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रेषित हुआ आज स्थिति यह है कि वह विश्व में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है। तमाम महापुरुषों के जीवन से भी हमें आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की शिक्षा मिलती रहती है।महात्मा गांधी अपना कार्य स्वयं किया करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी "दैव दैव आलसी" पुकारा है, तब जाकर उनकी जिंदगी पटरी पर आई और हमें परिश्रम कर आत्म निर्भर होने की शिक्षा प्रदान की थी। दूसरों पर निर्भरता हमें दूसरों का अनुसरण करने के लिए मजबूर करती है। दूसरों पर निर्भर होने से हमें के अनुरूप ही जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है। पराधीनता हमारा आत्मविश्वास सृजनशीलता सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है। गुलामी एक अभिशाप होती है, आत्मनिर्भरता की कमी हमें किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरों की कृपा पर जीने वाला व्यक्ति जीवन के अक्षय आनंद से वंचित रहता है। खुद के परिश्रम श्रम से आगे बढ़ने वाला देश या व्यक्ति या समाज सदैव प्रफुल्लित आत्म विश्वासी तथा विकास की ओर सदैव अग्रसर रहता है। हमें सदैव अपने अंदर के आत्मविश्वास, छिपी हुई क्षमताओं मनोबल का सहारा लेकर आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य को मनुष्य होने का अधिकार प्राप्त होता है। पराधीन देश सामान्य व्यक्ति सदैव पशु तुल्य होते हैं। जिनका अपना कोई विचार या व्यक्तित्व नहीं हो सकता है। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता - राम सहायक उनके होते, जो होते हैं, आप सहायक, हम सबको स्वयं पर भरोसा रखना आत्मबल बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा देती रहती हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में स्वरोजगार योजनाओं की दी गई जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> केंद्र सरकार के गौरवशाली 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के अंतर्गत मंगलवार को विकासखंड सभागार भदोही में उद्योग विभाग की ओर से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ला रहे। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों, महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की।</div>
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<div style="text-align:justify;">मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181333/information-about-self-employment-schemes-given-in-the-developed-india-resolution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0014.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> केंद्र सरकार के गौरवशाली 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के अंतर्गत मंगलवार को विकासखंड सभागार भदोही में उद्योग विभाग की ओर से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ला रहे। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों, महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की।</div>
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<div style="text-align:justify;">मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने लोगों से योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपायुक्त उद्योग ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) वित्त पोषण योजना, एक उत्पाद एक व्यंजन योजना सहित अन्य स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी दी। वहीं खंड विकास अधिकारी ने ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग की विभिन्न योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के चयनित लाभार्थियों को सिलाई मशीन सहित विभिन्न टूलकिट वितरित किए गए। साथ ही मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत तीन लाभार्थियों को क्रमशः 25 लाख, 20 लाख और 5 लाख रुपये के डेमो चेक प्रदान किए गए। लाभार्थियों ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया तथा नियमित योग को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शैलेष कुमार के निर्देशन में जनपद में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न विभागों द्वारा विकसित भारत संकल्प सम्मेलन एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी, लाभार्थी एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कहा कि मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश की प्रगति तथा विकास के हर क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक एवं सराहनीय कार्यों द्वारा आम जनमानस का जीवन स्तर ऊंचा उठाने हेतु सतत् प्रयास किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरन्तर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण हो चुके है। इसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181135/media-interaction-program-organized-by-minister-in-charge-surya-pratap-shahi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0097.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सर्किट हाउस में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कहा कि मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश की प्रगति तथा विकास के हर क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक एवं सराहनीय कार्यों द्वारा आम जनमानस का जीवन स्तर ऊंचा उठाने हेतु सतत् प्रयास किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरन्तर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण हो चुके है। इसी के उपलक्ष्य में विश्वास, विकास के जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों को संतृप्त किया जा रहा है। मा0 मंत्री ने प्रेस-वार्ता के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री के इस स्वर्णिम कार्यकाल में अबतक किए गये जनहित कार्यो से भारत की तस्वीर व तकदीर दोनो बदली है। उन्होने कहा कि वर्ष 2014 में यह सरकार बनी है तब से सरकार ने सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास के आधार पर जनहितकारी कार्य किया है, बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है। सुशासन के लिए जनसुझावों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने 10 करोड़ करीब परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन देकर उनके जीवन में खुशहाली लाने का प्रयास किया है। मा0 मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं व शिशुओं की सुरक्षा, नियमित टीकाकरण, सुरक्षित प्रसव एवं समुचित चिकित्सा हेतु तत्परतापूर्वक कार्य किया है। पी.एम. कुशुम, पी.एम. सूर्यघर, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सड़को एवं सम्पर्क मार्गो का विस्तारीकरण, रेलवे, बिजली उत्पादन एवं आपूर्ति, एयरपोर्ट, रक्षा एवं अनुसंधान, एक्सप्रेस-वे, आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक एआई जैसे अभिनव प्रयोग कर आम जनमानस को सामाजिक, आर्थिक रूप से विकसित करने का सतत् कार्य किया गया है। देश में भ्रष्टाचार एवं आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अभियान चलाकर कार्य किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> मा0 मंत्री ने कहा कि जनपद में किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण व शहरी), प्रधानमंत्री मातृ वंदन, प्रधानमंत्री जनधन, पी.एम. स्वनिधि,, प्रधानमंत्री जन आरोगय, जलजीवन मिशन ग्रामीण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन, व्यक्तिगत व सामूहिक शौचलयों का निर्माण, वृद्धा, निराश्रित महिला व दिव्यांग पेंशन, कन्या सुमंगला योजनाओं सहित अन्य संचालित योजनाओं द्वारा पात्र लाभार्थियों को आच्छादित किया गया है।  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि विगत 12 वर्षों में देश को नई दिशा, नई ऊर्जा और नई पहचान मिली है। भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है तथा हम वैश्विक मंच पर मजबूत नेतृत्व के रूप में उभरे हैं। मा0 प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमेशा गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों तथा सभी वर्गों के लिए कार्य किया गया है। आज हम खाद्यान्न, रक्षा, चिकित्सा, आयुध उपकरणों के निर्माण में पहले से अधिक आत्मनिर्भर हैं, आज देश में शांति एवं कानून व्यवस्था का राज स्थापित है, हम सभी निडर होकर पहले से अधिक सम्मान से राष्ट्र के निर्माण में प्रगति कर रहे है।  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाध्यक्ष भाजपा विवेकानन्द मिश्रा, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, रवि सोनकर, चन्द्र प्रकाश शुक्ला, संजय प्रताप जायसवाल, अपना दल के विवेक चौधरी, गोपेश्वर त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एसडीएम सदर हिमांशु कुमार, डीएसटीओ मनोज कुमार श्रीवास्तव, डीपीओ राजेश कुमार, उप निदेशक कृषि, अशोक कुमार, उप निदेशक कृषि एवं रक्षा रामबचन राम तथा जिला कृषि अधिकारी डा. बी.आर. मौर्य सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रेस प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:07:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की सैन्य शक्ति हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में विकसित हुई, इसकी झलक ऑपरेशन सिंदूर में  मिली- रक्षा राज्य मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा है कि “भारत की सैन्य शक्ति हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में विकसित की गई है।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय रक्षा बलों के अद्वितीय साहस और दृढ़ संकल्प को दिया। जिसे स्वदेशी रूप से विकसित प्रभावशाली अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों ने और भी मजबूत बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उन्होंने 5 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और स्टार्टअप्स को देश का ब्रांड एंबेसडर बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178291/indias-military-power-developed-in-the-factories-of-our-defense"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001766566-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा है कि “भारत की सैन्य शक्ति हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में विकसित की गई है।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय रक्षा बलों के अद्वितीय साहस और दृढ़ संकल्प को दिया। जिसे स्वदेशी रूप से विकसित प्रभावशाली अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों ने और भी मजबूत बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने 5 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और स्टार्टअप्स को देश का ब्रांड एंबेसडर बताया। उन्होंने कहा कि “हमारे स्टार्टअप्स और एमएसएमई भविष्य में होने वाले विकास की प्रेरक शक्ति हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के  निर्माण के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे हमारे युग के विश्वकर्मा हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा राज्य मंत्री  ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों के छिपने के अड्डों को नष्ट करके भारत के शत्रुओं की कुटिल योजनाओं को नाकाम करने के लिए रक्षा बलों की सराहना की । उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित उपकरणों का प्रभावशाली उपयोग पूरे देश में सरकार, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र विशेष रूप से नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की ओर से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के संकल्प का प्रमाण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा राज्य मंत्री  ने इस बात पर बल दिया कि रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और रक्षा संबधी निर्यात के आंकड़े उस नए भारत के उदय का प्रमाण हैं जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करने में विश्वास रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि "यह नया भारत किसी पर बुरी नजर नहीं रखता और न ही किसी के द्वारा अपनी संप्रभुता को खतरा पहुंचाने का प्रयास करने पर आंखें फेर लेता है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा राज्य मंत्री सेठ ने इस बात पर बल दिया कि आज उपयोग में लाई जा रही तकनीक कल बेकार हो सकती है और इसके संबंध में उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उद्योग जगत से लीक से हटकर सोचते हुए तकनीकी प्रगति में अग्रणी बने रहने का आग्रह किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने इस अवसर पर उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उभरते क्षेत्रों में परिचालन संबंधी वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने और भारतीय सेना को भविष्य के लिए तैयार बल बनाने में योगदान देने के लिए रक्षा बलों के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता, तकनीकी संप्रभुता और परिचालन के अनुकूल क्षमता प्राप्त होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1001766567-(1).jpg" alt="भारत की सैन्य शक्ति हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में विकसित हुई, इसकी झलक ऑपरेशन सिंदूर में  मिली- रक्षा राज्य मंत्री" width="576" height="384"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान आयोजित सत्र में उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, प्रथम कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के अध्यक्ष श्री अरुण टी रामचंदानी, उद्योग जगत के दिग्गजों, नवप्रवर्तकों, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 22:52:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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