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                <title>आत्मनिर्भर भारत - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आत्मनिर्भर भारत RSS Feed</description>
                
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                <title>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन : आत्मनिर्भर युवा, विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला </title>
                                    <description><![CDATA[ युवा शक्ति का कौशल से स्वावलंबन की ओर बढ़ता कदम ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184560/uttar-pradesh-skill-development-mission-under-the-leadership-of-chief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-19.15.33.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong> -आदर अदीब पावेल बन्धु</strong><br /><strong>           (जिला सूचना अधिकारी)</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">युवा केवल किसी राष्ट्र की जनसंख्या का एक वर्ग नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की सबसे अमूल्य पूंजी होते हैं। जब उनके हाथों में कौशल, मन में आत्मविश्वास और सामने अवसरों का विस्तृत आकाश होता है, तब विकास का नया इतिहास रचा जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इसी विचार को आधार बनाकर कौशल विकास को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। आज उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन लाखों युवाओं के सपनों को साकार करने वाला ऐसा सशक्त सेतु बन चुका है, जो उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मानजनक आजीविका और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लिए कौशल विकास केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है। आज मिशन लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ते हुए प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का गठन उत्तर प्रदेश कौशल विकास नीति-2013 के अंतर्गत व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधीन किया गया। मिशन का उद्देश्य 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। मिशन के अंतर्गत राज्य स्किल डेवलपमेंट फंड (SSDF), दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रोजेक्ट प्रवीण जैसी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से विद्यालयों के विद्यार्थियों को नियमित पाठ्यक्रम के साथ निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक दक्षता भी विकसित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन ने अभूतपूर्व उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। मिशन की स्थापना से अब तक 18 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जबकि 7 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रदेश सरकार कौशल विकास को सीधे रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने में सफल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है। अब तक 1,194 बृहद रोजगार मेलों के माध्यम से 4,52,976 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इनमें 8 जनपदों में आयोजित 8 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से 75,575 युवाओं को रोजगार मिला। इसके अतिरिक्त विश्व युवा कौशल दिवस (15 जुलाई) के अवसर पर प्रदेश के 75 जनपदों में आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से 10,283 युवाओं का सेवायोजन किया गया। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रदेश सरकार ने कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया है। प्रशिक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए 'कौशल दर्पण', 'कौशल दिशा', 'कौशल साथी' तथा 'कौशल दोस्त' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, प्रशिक्षण, निगरानी, मूल्यांकन तथा रोजगार संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही प्रशिक्षण केंद्रों और प्रशिक्षणार्थियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग से पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया है। नई तकनीकों, डिजिटल स्किल, ग्रीन एनर्जी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 82 नए प्राइवेट ट्रेनिंग पार्टनर (PTPs) को मिशन से संबद्ध किया गया है। इससे युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्य सरकार ने उद्योग और कौशल विकास के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया है। प्रदेश की 53 बड़ी औद्योगिक कंपनियों के साथ मिशन के समझौते किए गए हैं, जिससे प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। यह पहल 'स्किल टू एम्प्लॉयमेंट' मॉडल को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए मिशन ने प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी साझेदारी की है। उच्च तकनीकी प्रशिक्षण हेतु IIT कानपुर, MNNIT प्रयागराज, IIT BHU, NIESBUD तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसे संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित किया गया है। वहीं सॉफ्ट स्किल, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता विकास के लिए 7 संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं। इससे युवाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यक्तित्व विकास और उद्यमिता का प्रशिक्षण भी प्राप्त हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0 के माध्यम से 1,182 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार निराश्रित महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीकों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर विशेष बल दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ड्रोन टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, आतिथ्य, परिधान निर्माण और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। इससे प्रदेश के युवा भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बन रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> नवभारत के निर्माण की नई दिशा </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता-2026 के लिए प्रदेश से 1,09,249 युवाओं का पंजीकरण हुआ, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश के युवाओं में तकनीकी दक्षता और नवाचार की क्षमता निरंतर बढ़ रही है। आगामी वर्षों के लिए भी प्रदेश सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2026-27 में 4 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 1 जुलाई 2026 तक 2 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। साथ ही 1M1B जैसी संस्थाओं के सहयोग से विभिन्न तकनीकी एवं फ्यूचरिस्टिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है। अंत्योदय परिवारों, दिव्यांगजनों तथा वंचित वर्गों के युवाओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। निजी आईटीआई एवं अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी भी लगातार बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि कौशल ही आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है। लाखों युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर मिशन ने प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की है। आधुनिक तकनीक, उद्योगों के साथ साझेदारी, डिजिटल नवाचार और रोजगारपरक प्रशिक्षण की बदौलत उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी कौशल विकास राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि युवा शक्ति के उज्ज्वल भविष्य का उद्घोष है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह मिशन लाखों युवाओं के सपनों को नई दिशा, नई गति और नई पहचान प्रदान कर रहा है। कौशल से समृद्ध युवा, आत्मनिर्भर परिवार, सशक्त समाज और विकसित प्रदेश—इन्हीं चार स्तंभों पर विकसित उत्तर प्रदेश का भव्य भविष्य निर्मित हो रहा है। यह यात्रा केवल रोजगार प्राप्त करने की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान, स्वाभिमान और समृद्धि की यात्रा है।</p>
<p style="text-align:justify;">          <br />          </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 22:58:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारतीय अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की ऊंची उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi">  जुलाई का दिन एक ऐसे स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है जो देश की वैज्ञानिक और तकनीकी यात्रा की दिशा को हमेशा के लिए बदल देगा। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस का स्वदेशी रूप से विकसित विक्रम-1 रॉकेट अपनी पहली कक्षीय उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह केवल एक रॉकेट का प्रक्षेपण नहीं है बल्कि यह उस नए और आत्मनिर्भर भारत का उद्घोष है जहाँ निजी क्षेत्र अब अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों को नापने</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दशकों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183624/private-sector-soars-in-indian-space"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/orbital_rocket_vikram-1_1784221432961_1784221483615_23e71079-ec01-4002-ab5e-9b5fcd249915.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> जुलाई का दिन एक ऐसे स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है जो देश की वैज्ञानिक और तकनीकी यात्रा की दिशा को हमेशा के लिए बदल देगा। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस का स्वदेशी रूप से विकसित विक्रम-1 रॉकेट अपनी पहली कक्षीय उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह केवल एक रॉकेट का प्रक्षेपण नहीं है बल्कि यह उस नए और आत्मनिर्भर भारत का उद्घोष है जहाँ निजी क्षेत्र अब अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों को नापने के लिए पूरी तरह से सक्षम हो चुका है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दशकों तक भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम पूर्ण रूप से सरकारी नियंत्रण और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के कुशल मार्गदर्शन में पलता और बढ़ता रहा है। इसरो ने सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और मंगल ग्रह से लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक तिरंगा फहराया है। लेकिन अब समय बदल रहा है और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी अनिवार्य हो गई है। इसी आवश्यकता को समझते हुए भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया था यह प्रक्षेपण उसी नीतिगत बदलाव का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम स्काईरूट एयरोस्पेस और उसके महत्वाकांक्षी रॉकेट विक्रम-1 की बात करते हैं तो हमें इसके पीछे के तकनीकी चमत्कार और वर्षों की अथक मेहनत को समझना होगा। इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है जो अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रतीकात्मक संदेश है। विक्रम-1 कोई साधारण लॉन्च वाहन नहीं है बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीकों का एक अद्भुत संगम है। इस रॉकेट की सबसे बड़ी विशेषता इसके निर्माण में थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का व्यापक उपयोग है। इसके कई महत्वपूर्ण पुर्जे और विशेष रूप से इसका क्रायोजेनिक इंजन जिसे धवन नाम दिया गया है पूरी तरह से थ्रीडी प्रिंटेड है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> पारंपरिक निर्माण विधियों की तुलना में थ्रीडी प्रिंटिंग से रॉकेट के पुर्जे बनाने में लगने वाला समय और लागत दोनों काफी कम हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त रॉकेट का बाहरी ढांचा कार्बन फाइबर कंपोजिट से बनाया गया है जो इसे बेहद हल्का लेकिन इस्पात से भी अधिक मजबूत बनाता है। एक हल्के ढांचे का सीधा अर्थ यह है कि रॉकेट अपने साथ अधिक पेलोड यानी अधिक वजन के उपग्रह ले जाने में सक्षम होगा। यह एक बहु चरण वाला रॉकेट है जिसे विशेष रूप से छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उप कक्षीय और कक्षीय उड़ानों के बीच एक बहुत बड़ा तकनीकी अंतर होता है जिसे समझना यहां बेहद प्रासंगिक है। नवंबर </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में स्काईरूट एयरोस्पेस ने ही अपना पहला रॉकेट विक्रम एस लॉन्च किया था जो एक उप कक्षीय उड़ान थी। उप कक्षीय उड़ान का अर्थ होता है कि रॉकेट अंतरिक्ष की सीमा को तो छूता है लेकिन वह पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए आवश्यक गति प्राप्त नहीं कर पाता और गुरुत्वाकर्षण के कारण वापस लौट आता है। इसके विपरीत अठारह जुलाई को होने वाला विक्रम-1 का प्रक्षेपण एक कक्षीय मिशन है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका मतलब है कि यह रॉकेट न केवल अंतरिक्ष में जाएगा बल्कि यह इतनी तेज गति प्राप्त करेगा कि यह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो सके और अपने साथ ले जाए गए उपग्रहों को सटीक रूप से उनकी निर्धारित जगह पर छोड़ सके। कक्षीय उड़ान तकनीकी रूप से बहुत अधिक जटिल चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरी होती है। इसमें रॉकेट के इंजनों को कई बार चालू और बंद करना पड़ता है और इसकी नेविगेशन प्रणाली को बिल्कुल अचूक होना पड़ता है। अगर स्काईरूट की टीम इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लेती है तो यह भारतीय निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का विश्व स्तर पर सबसे बड़ा प्रमाण होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस प्रक्षेपण के मायने बहुत गहरे और दूरगामी हैं। आज पूरी दुनिया में संचार मौसम पूर्वानुमान कृषि निगरानी और नेविगेशन के लिए छोटे उपग्रहों की मांग में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। पारंपरिक रूप से बड़े रॉकेटों के जरिए इन उपग्रहों को लॉन्च करने में बहुत समय लगता है क्योंकि सरकारी एजेंसियों के पास अपने स्वयं के बड़े मिशन होते हैं और छोटे उपग्रहों को उन बड़े मिशनों के साथ सह यात्री के रूप में भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार निजी कंपनियों और विश्वविद्यालयों को अपने उपग्रह लॉन्च करने के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। स्काईरूट जैसी कंपनियां इसी समस्या का समाधान लेकर आई हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विक्रम-1 जैसे रॉकेट ऑन डिमांड लॉन्च की सुविधा प्रदान करते हैं। इसका मतलब है कि जब भी किसी ग्राहक को अपना उपग्रह लॉन्च करना हो यह रॉकेट कुछ ही हफ्तों की तैयारी के साथ उड़ान भरने के लिए तैयार हो सकता है। यह लचीलापन और कम लागत भारतीय अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक कमर्शियल मार्केट में एक बहुत बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करेगा। वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है लेकिन विक्रम-1 की सफलता इस हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगी और एलन मस्क की स्पेसएक्स जैसी दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सीधे चुनौती देने की नींव रखेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निजीकरण और तकनीकी विकास का एक और महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन और प्रतिभा पलायन को रोकना है। भारत में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डीप टेक और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन अतीत में उचित अवसर और निजी क्षेत्र में निवेश न होने के कारण हमारी कई बेहतरीन प्रतिभाएं विदेशों का रुख कर लेती थीं। स्काईरूट एयरोस्पेस जैसी स्वदेशी कंपनियों का उदय इन युवा इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को अपने ही देश में विश्व स्तरीय परियोजनाओं पर काम करने का अवसर दे रहा है। इससे न केवल देश में एक मजबूत अंतरिक्ष इकोसिस्टम तैयार हो रहा है बल्कि सहायक उद्योगों को भी भारी बढ़ावा मिल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> रॉकेट निर्माण के लिए आवश्यक कल पुर्जे सॉफ्टवेयर विकास परीक्षण सुविधाएं और ग्राउंड स्टेशन ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार पैदा हो रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को सही मायनों में साकार कर रही है। सरकार द्वारा स्थापित नोडल एजेंसी इन स्पेस का समर्थन और इसरो द्वारा प्रदान की जा रही तकनीकी और बुनियादी ढांचागत सहायता यह दर्शाती है कि भारत में अब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक बनकर काम कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विक्रम-1 की उड़ान केवल एक कंपनी की व्यावसायिक सफलता तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे देश की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। यह उड़ान उन तमाम छोटे और मझोले स्टार्टअप्स के लिए एक प्रेरणा है जो नवाचार के क्षेत्र में कुछ नया करने का सपना देखते हैं। जब एक निजी भारतीय कंपनी अपने दम पर एक कक्षीय रॉकेट बनाकर उसे अंतरिक्ष में भेज सकती है तो यह साबित होता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही नीतिगत समर्थन के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में हम अंतरिक्ष पर्यटन क्षुद्रग्रह खनन और गहरे अंतरिक्ष मिशनों में भी भारतीय निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी देखेंगे। विक्रम-1 उस लंबी यात्रा का केवल पहला कदम है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अठारह जुलाई को जब विक्रम-1 के इंजन आग उगलते हुए आसमान का सीना चीरेंगे तो वह केवल एक मशीन की उड़ान नहीं होगी बल्कि वह एक नए भारत के आत्मविश्वास की उड़ान होगी। एक ऐसा भारत जो अब केवल दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने में विश्वास नहीं रखता बल्कि अंतरिक्ष के अनंत विस्तार में अपना खुद का रास्ता बनाने का साहस रखता है। यह प्रक्षेपण आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि जब सपने बड़े होते हैं और हौसले बुलंद होते हैं तो आसमान की कोई सीमा नहीं होती और सितारे भी हमारी पहुंच में होते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:56:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत ईपीएफओ द्वारा इफको फूलपुर में आयोजित हुआ समानांतर कार्यक्रम।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत देशभर के लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं हितधारकों को संबोधित करते हुए लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने के अवसर पर इसके समानांतर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन ईफको फूलपुर इकाई में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल थे।  इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श सुमित कुमार, डीएलसी प्रयागराज,  पी.के. सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, ईफको फूलपुर,  विनिता सिंह, एडीएम (फाइनेंस), तथा  राहुल वर्मा, कमिश्नर, ईपीएफओ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181674/a-parallel-program-organized-by-epfo-at-iffco-phulpur-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001835773.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत देशभर के लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं हितधारकों को संबोधित करते हुए लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने के अवसर पर इसके समानांतर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन ईफको फूलपुर इकाई में किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल थे।  इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श सुमित कुमार, डीएलसी प्रयागराज,  पी.के. सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, ईफको फूलपुर,  विनिता सिंह, एडीएम (फाइनेंस), तथा  राहुल वर्मा, कमिश्नर, ईपीएफओ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 250 लाभार्थियों, नियोक्ताओं तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सभी प्रतिभागी प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम से लाइव जुड़े और योजना के उद्देश्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सांसद  प्रवीण पटेल जी   विभिन्न नियोक्ताओं  द्वारा नव नियुक्त 32  कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए । नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवा कर्मियों ने अपने रोजगार अवसरों के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संगठन एवं सरकार के प्रति आभार प्रकट किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  ने अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से देश में अब तक लगभग 70 लाख नए रोजगार सृजित किए जा चुके हैं तथा लाखों युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा, कौशल और क्षमता को विकसित भारत के निर्माण का आधार बताते हुए सरकार की रोजगार सृजन एवं कौशल विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का समापन  राहुल वर्मा(क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181459/self-reliance-is-a-symbol-of-a-self-respecting-nation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके साथ ही भारत में खुशहाली की स्वाभाविक तौर पर वृद्धि हुई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि "एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं",पाकिस्तान की स्थिति बिल्कुल ऐसी ही है वह अभी तक स्वतंत्रता के बाद से 75 वर्ष के बाद भी संपूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है, वह कर्जे से डूब गया है और अपने देश में खर्चा चलाने के लिए पूरी दुनिया से उधार मांगते हुए घूम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं होने का एवं उधार की जिंदगी जीने का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जबकि भारत देश विज्ञान, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और कृषि सेवा, खनिज,स्पेस रिसर्च में पूर्णता आत्मनिर्भर होकर विकसित देशों के बराबर खड़ा हुआ है। यह देशवासियों और देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन किसी भी देश की प्रगति विकास तथा और उसके नागरिकों की जिंदगी की जिजीविषा है जिससे वह संघर्ष कर आगे बढ़ता है। इतिहास गवाह है कि किसी भी महान लेखक को महान बनने तक निरंतर मेहनत कर किताबें लिखने का का श्रम करना पड़ा एवं आत्मनिर्भरता की स्थिति में विचार कर अपने विचारों को लिपिबद्ध करना पड़ा तब जाकर वह महानता की श्रेणी को प्राप्त कर सका। इसी तरह कोई छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे स्वयं परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा एवं परीक्षा में मनोवांछित सफलता प्राप्त कर उसे स्वयं अध्ययन करना होगा। इसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में भी मनुष्य को आत्मनिर्भर होकर मेहनत कर दीक्षित सफलता प्राप्त करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा देश भारत भी आजादी के बाद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रेषित हुआ आज स्थिति यह है कि वह विश्व में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है। तमाम महापुरुषों के जीवन से भी हमें आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की शिक्षा मिलती रहती है।महात्मा गांधी अपना कार्य स्वयं किया करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी "दैव दैव आलसी" पुकारा है, तब जाकर उनकी जिंदगी पटरी पर आई और हमें परिश्रम कर आत्म निर्भर होने की शिक्षा प्रदान की थी। दूसरों पर निर्भरता हमें दूसरों का अनुसरण करने के लिए मजबूर करती है। दूसरों पर निर्भर होने से हमें के अनुरूप ही जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है। पराधीनता हमारा आत्मविश्वास सृजनशीलता सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है। गुलामी एक अभिशाप होती है, आत्मनिर्भरता की कमी हमें किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरों की कृपा पर जीने वाला व्यक्ति जीवन के अक्षय आनंद से वंचित रहता है। खुद के परिश्रम श्रम से आगे बढ़ने वाला देश या व्यक्ति या समाज सदैव प्रफुल्लित आत्म विश्वासी तथा विकास की ओर सदैव अग्रसर रहता है। हमें सदैव अपने अंदर के आत्मविश्वास, छिपी हुई क्षमताओं मनोबल का सहारा लेकर आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य को मनुष्य होने का अधिकार प्राप्त होता है। पराधीन देश सामान्य व्यक्ति सदैव पशु तुल्य होते हैं। जिनका अपना कोई विचार या व्यक्तित्व नहीं हो सकता है। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता - राम सहायक उनके होते, जो होते हैं, आप सहायक, हम सबको स्वयं पर भरोसा रखना आत्मबल बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा देती रहती हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्लोवाकिया से फ्रांस तक भारत की कूटनीतिक शक्ति का विस्तार और वैश्विक मंच पर बढ़ता प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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<div>स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। यह वहां</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181204/indias-diplomatic-power-expanding-from-slovakia-to-france-and-growing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/42.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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<div>स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। यह वहां सम्मान आतिथ्य और मित्रता का प्रतीक माना जाता है। राजधानी ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ उनकी मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की। प्रधानमंत्री मोदी ने फिको को भारत आने का निमंत्रण दिया और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं तथा दोनों देश नई संभावनाओं की तलाश में हैं।</div>
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<div>स्लोवाकिया मध्य यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन पर आधारित है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उसकी पहचान पूरे यूरोप में है। वोक्सवैगन किआ जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसी कंपनियों की उत्पादन इकाइयां वहां स्थित हैं। भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत से मोबाइल फोन वस्त्र ऑटोमोबाइल पुर्जे और अन्य तकनीकी उत्पादों का निर्यात किया जाता है जबकि भारत स्लोवाकिया से मशीनरी वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात करता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच लगभग सत्रह हजार करोड़ रुपये का व्यापार इस बढ़ते आर्थिक सहयोग का प्रमाण है।</div>
<div> </div>
<div>स्लोवाकिया में नौ हजार से अधिक भारतीयों की उपस्थिति भी दोनों देशों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय पेशेवर वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। श्रमशक्ति की कमी से जूझ रहे स्लोवाकिया के लिए भारतीय कुशल मानव संसाधन एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी संबंध मजबूत हो रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई वार्ता ने भारत फ्रांस संबंधों को और अधिक व्यापक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में रक्षा व्यापार प्रौद्योगिकी शिक्षा अंतरिक्ष और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों के बीच तेरह प्रमुख समझौते हुए जो आने वाले वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।</div>
<div> </div>
<div>भारत और फ्रांस के संबंध लंबे समय से विश्वास और सहयोग पर आधारित रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने अक्सर भारत का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन से लेकर न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप में भारत के प्रवेश तक फ्रांस लगातार भारत के पक्ष में खड़ा रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div>रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है। राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौते इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं। अब दोनों देशों ने सैन्य उपकरणों के सह डिजाइन सह विकास और सह उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इससे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को भी मजबूती मिलेगी।</div>
<div> </div>
<div>तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। नीस में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के स्टार्टअप उद्यमियों निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि साझा दृष्टिकोण और साझा भविष्य पर आधारित है। उन्होंने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय युवा नवाचार के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारत की नवाचार क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज दुनिया भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में खुले और सहयोगात्मक मॉडल का समर्थन किया तथा भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत केवल एक बाजार नहीं बल्कि तकनीकी विकास का वैश्विक भागीदार बनने जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्वांटम कंप्यूटिंग जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। एआई गवर्नेंस के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन और डिजिटल विज्ञान केंद्र की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे भारत और फ्रांस वैश्विक तकनीकी परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।</div>
<div>शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर खुल रहे हैं। फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने का निमंत्रण दिया गया है जबकि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए फ्रांस में नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच ज्ञान और कौशल का आदान प्रदान बढ़ेगा।</div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस यूक्रेन युद्ध मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी नई चुनौतियां विश्व व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में भारत एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत की विदेश नीति का उद्देश्य संवाद सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है और यही संदेश इस यात्रा के माध्यम से भी सामने आया है।</div>
<div> </div>
<div>फ्रांस में आयोजित होने वाली जी सेवन शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भी विशेष महत्व रखती है। यद्यपि भारत जी सेवन का सदस्य नहीं है फिर भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। जी सेवन देशों के साथ भारत का संवाद यह दर्शाता है कि विश्व समुदाय आज भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक सुरक्षा आर्थिक सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा इस बात का प्रमाण है कि भारत आज केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन चुका है। यूरोप के साथ मजबूत होते संबंध भारत को नई आर्थिक तकनीकी और सामरिक संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं। वहीं भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण निर्णयों में उसकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली होगी। यह दौरा भारत की उसी उभरती वैश्विक पहचान का सशक्त प्रतीक है।</div>
<div>        <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:15:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान और देश का विकास ही इफको का संकल्प।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए  इफको के उत्पादों को सुलभ रूप से देश के हर कोने में किसानों के पास पहुंचने में इफको ई- बाजार का बहुत योगदान है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें श्री एन.के.भाटिया, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर इफको ई बाजार लिमिटेड नई दिल्ली विपणन ने बतौर विशिष्ट अतिथि,  इफको ई बाजार पूर्वी उत्तर प्रदेश के 36 बिक्री अधिकारियों की प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान और देश का विकास ही इफको का संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  श्री पी.के.</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179180/iffcos-resolve-is-to-develop-farmers-and-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260512-wa0132.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए  इफको के उत्पादों को सुलभ रूप से देश के हर कोने में किसानों के पास पहुंचने में इफको ई- बाजार का बहुत योगदान है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें श्री एन.के.भाटिया, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर इफको ई बाजार लिमिटेड नई दिल्ली विपणन ने बतौर विशिष्ट अतिथि,  इफको ई बाजार पूर्वी उत्तर प्रदेश के 36 बिक्री अधिकारियों की प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान और देश का विकास ही इफको का संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  श्री पी.के. सिंह , इकाई प्रमुख इफको फूलपुर इकाई ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया एवं प्रोत्साहित करते हुए कहा की इफको गुणवत्तापूर्ण उर्वरक को बनाने में जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है ।  इफको जैसा विश्वास सभी के एक साथ प्रयास से ही बनता है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में कॉर्डेट फूलपुर के प्रधानाचार्य डॉ डी.के. सिंह ने तकनीकी सत्र में  इफको के स्मार्ट उर्वरकों नैनो यूरिया प्लस, नैनों  डीएपी , नैनो कापर, नैनो जिंक एवं विभिन्न जल विलय उर्वरकों  के प्रयोग की तकनीकी जानकारी दी। वर्तमान कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य के की बात कहते हुए कहा की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ाने के लिए कार्य करना होगा। इसके लिए किसान भाइयों को कार्बनिक खादों, हरी खाद,जैव उर्वरकों एवं जैव अपघटकों के प्रयोग को जिम्मेदारी पूर्वक बताना होगा । किसान भाइयों को प्रेरित करना होगा कि वे अपनी मिट्टी की जांच कर के मृदा कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग सुनिश्चित करें  ताकि आत्मनिर्भर कृषि से आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाया जा सके। कृषि में जैव उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि मिट्टी में मित्र जीवों की संख्या मे वृद्धि हो और सस्ती एवं टिकाऊ खेती का रास्ता बने।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर  इफको ई बाजार लिमिटेड के श्री अमरदीप तिवारी, आलोक कुमार यादव , कार्डेट फूलपुर के श्री राजेश कुमार सिंह, मुकेश तिवारी , अमित कुमार सहित कॉरडेट टीम उपस्थित रही। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को कोरडेट की गतिविधियों से परिचित कराया गया एवं विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया  साथ ही इफको नैनो यूरिया संयंत्र एवं  यूरिया संयंत्र का भ्रमण कराया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 20:26:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पात्रों को शासन की योजनाओं का मिले लाभः जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता विकास खण्ड बर्डपुऱ के अन्तर्गत ग्राम पंचायत दुल्हा सुमाली  में ग्राम चौपाल-गांव की समस्या गांव में समाधान कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।  चौपाल कार्यक्रम में जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा ग्राम चौपाल-गांव की समस्या गांव में समाधान कार्यक्रम के अन्तर्गत ग्रामीणों से विभिन्न योजनाओ के बारे में जानकारी प्राप्त की गयी तथा समीक्षा की गयी। जिलाधिकारी ने कहा कि वाइब्रेंट  विलेज सशक्त सीमाएं भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना है।इसके अन्तर्गत योजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। बार्डर के गांवों में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सड़के, व अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178804/eligible-persons-should-get-benefits-of-government-schemes-district-magistrate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1778249453522.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता विकास खण्ड बर्डपुऱ के अन्तर्गत ग्राम पंचायत दुल्हा सुमाली  में ग्राम चौपाल-गांव की समस्या गांव में समाधान कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।  चौपाल कार्यक्रम में जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा ग्राम चौपाल-गांव की समस्या गांव में समाधान कार्यक्रम के अन्तर्गत ग्रामीणों से विभिन्न योजनाओ के बारे में जानकारी प्राप्त की गयी तथा समीक्षा की गयी। जिलाधिकारी ने कहा कि वाइब्रेंट  विलेज सशक्त सीमाएं भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना है।इसके अन्तर्गत योजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। बार्डर के गांवों में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सड़के, व अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत - नेपाल सीमा पर खुला बार्डर क्षेत्र है। बार्डर के गांवों के ग्रामवासियों को जागरूक रहने की आवश्यकता है जिससे तस्करी को रोका जा सके। जिलाधिकारी ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों को सभी योजनाओ का लाभ मिलना चाहिए। जिलाधिकारी ने किया कि ग्राम चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। शासन से निर्देश मिले हैं कि पहले से चल रही योजनाओं को और अधिक सुधार कर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों से उन्होंने कहा कि यदि किसी को पेंशन से जुड़ी समस्या है, जैसे वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन या दिव्यांग पेंशन नहीं मिल रही है, तो वे तुरंत जानकारी दें। ब्लॉक स्तर के कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा जिलाधिकारी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि महिलाओं को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। जिलाधिकारी ने ग्रामवासियो से पूछा कि गांव की कोई और समस्या हो तो बताए। जिलाधिकारी ने समस्त अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि भारत सरकार/प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुॅचाये। इसमें किसी भी प्रकार की हीलाहवाली करने पर संबधित के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी। ग्राम चौपाल में सम्बन्धित विभाग द्वारा स्टाल लगाकर लोगों को योजनाओं के बारे जानकारी दिया गया। ग्राम चौपाल के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कार्यक्रम विधिवत रूप से सम्पन्न कराया गया। जिलाधिकारी द्वारा वृक्षरोपण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपजिलाधिकारी नौगढ कल्याण सिंह मौर्य, क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान, जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा, डीसीमनरेगा सन्दीप सिंह, डीसीएनआरएलएम देवनन्दन दूबे, उपकृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह, खण्ड विकास अधिकारी बर्डपुर ओमप्रकाश यादव, ग्राम प्रधान नीतू पाण्डेय व अन्य ब्लाक स्तरीय अधिकारी एवं ग्रामवासी आदि उपस्थित थे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 21:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वरोजगार अपनाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी : शिक्षक विधायक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शिक्षित होकर बेरोजगार रहने से बेहतर स्वरोजगार अपनाना है। स्वरोजगार अपनाने वाले की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है,वहीं अच्छी सुविधा के लिए क्षेत्र के लोगों को इधर उधर भटकना नही पड़ता है।उपरोक्त बातें रविवार को शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उसका बाजार स्टेट बैंक शाखा के निकट श्री राधे फार्मा एंड सर्जिकल प्रतिष्ठान के उद्घाटन अवसर पर कही।उन्होंने  कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सभी युवाओं को नौकरी नही मिल सकती है, सम्मानित जीवन स्तर के लिए स्वरोजगार सबसे अच्छा विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह क्षेत्र के विकास और पलायन रोकने में भी काफी सहायक है। जो युवा बाहर जाकर अपने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178055/adopting-self-employment-will-strengthen-the-economic-situation-teacher-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777819804807.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शिक्षित होकर बेरोजगार रहने से बेहतर स्वरोजगार अपनाना है। स्वरोजगार अपनाने वाले की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है,वहीं अच्छी सुविधा के लिए क्षेत्र के लोगों को इधर उधर भटकना नही पड़ता है।उपरोक्त बातें रविवार को शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उसका बाजार स्टेट बैंक शाखा के निकट श्री राधे फार्मा एंड सर्जिकल प्रतिष्ठान के उद्घाटन अवसर पर कही।उन्होंने  कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सभी युवाओं को नौकरी नही मिल सकती है, सम्मानित जीवन स्तर के लिए स्वरोजगार सबसे अच्छा विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह क्षेत्र के विकास और पलायन रोकने में भी काफी सहायक है। जो युवा बाहर जाकर अपने जीवकोपार्जन के लिए नौकरी खोजते हैं वह अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार कर अन्य लोगों की भी मदद कर सकते हैं। चेयरमैन प्रतिनिधि हेमन्त कुमार जायसवाल ने कहा की स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है। सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। इसका लाभ सभी लोग उठाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर चंद्रभान त्रिपाठी, मयंक पाण्डेय, रामेश्वर पाण्डेय, पवन जायसवाल, शतीश तुलस्यान, डा कलीम, रोशन अली, राकेश आर्या, सच्चिदानंद चौबे, संतोष मिश्र , शिव जायसवाल, अयोध्या शाहू, मजीबुल्लाह, डा कपिल, सोमनाथ मिश्र, सत्य प्रकाश मिश्र, हबीबुल्लाह, मोबिन, डा बृजेश , सत्य प्रकाश वर्मा, अमित मिश्रा, अरुण मिश्र आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:25:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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