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                <title>Crop Management - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Crop Management RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सर्वर डाउन होने से नहीं मिल रही खाद, किसान </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उतरौला, संवाददाता।</strong> खरीफ सीजन के चरम पर धान की रोपाई के बीच क्षेत्र में यूरिया संकट गहरा गया है। साधन सहकारी समितियों पर सर्वर डाउन होने से ई-पीओएस मशीनों पर किसानों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उन्हें निर्धारित मात्रा में यूरिया खाद नहीं मिल रही। घंटों इंतजार के बाद किसान बैरंग लौटने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि भैरमपुर, देवरिया मैनहा, रेडवलिया, चायडीह, गैंडास बुजुर्ग, चिरकुटिया, गन्ना समिति उतरौला तथा एग्रीजंक्शन उतरौला व बेथुइया समेत कई केंद्रों पर पूरे दिन तकनीकी समस्या के चलते खाद वितरण प्रभावित रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">किसानों का कहना है कि धान</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183926/farmers-not-getting-fertilizer-due-to-server-being-down"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/0.1.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>उतरौला, संवाददाता।</strong> खरीफ सीजन के चरम पर धान की रोपाई के बीच क्षेत्र में यूरिया संकट गहरा गया है। साधन सहकारी समितियों पर सर्वर डाउन होने से ई-पीओएस मशीनों पर किसानों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उन्हें निर्धारित मात्रा में यूरिया खाद नहीं मिल रही। घंटों इंतजार के बाद किसान बैरंग लौटने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि भैरमपुर, देवरिया मैनहा, रेडवलिया, चायडीह, गैंडास बुजुर्ग, चिरकुटिया, गन्ना समिति उतरौला तथा एग्रीजंक्शन उतरौला व बेथुइया समेत कई केंद्रों पर पूरे दिन तकनीकी समस्या के चलते खाद वितरण प्रभावित रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के बाद समय पर यूरिया देना फसल की बढ़वार के लिए बेहद जरूरी है।देरी होने पर पौधों की वृद्धि और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं। सहकारी समितियों से खाद न मिलने पर किसान निजी उर्वरक दुकानों का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी सीमित स्टॉक और लंबी कतारों के कारण परेशानी बनी हुई है। जुलाई के इस दौर में किसानों को यूरिया के साथ डीएपी, एनपीके, जिंक सल्फेट, सूक्ष्म पोषक तत्व, खरपतवारनाशी व कीटनाशकों की भी आवश्यकता रहती है। किसानों ने प्रशासन से सर्वर की तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान कराने तथा सभी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि खरीफ सीजन की खेती प्रभावित न हो।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:28:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मंडरो प्रखंड में आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:-</strong> मंडरो प्रखंड परिसर में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन मंडरो प्रमुख शिला देवी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता, बीपीओ अभिषेक आनंद, जेई नेहाल आलम सहित कई प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख शिला देवी ने कहा कि क्षेत्र में आम एवं अन्य बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181513/public-representatives-and-officials-inaugurated-the-grand-event-of-mango"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:-</strong> मंडरो प्रखंड परिसर में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आम उत्सव सह बागवानी मेला का भव्य आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन मंडरो प्रमुख शिला देवी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता, बीपीओ अभिषेक आनंद, जेई नेहाल आलम सहित कई प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख शिला देवी ने कहा कि क्षेत्र में आम एवं अन्य बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजनों का विशेष महत्व है। उन्होंने किसानों से बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर गुप्ता ने कहा कि बागवानी किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। ऐसे मेले किसानों को नई जानकारी, तकनीक और बाजार से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने किसानों को सरकार की विभिन्न कृषि एवं बागवानी योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीपीओ अभिषेक आनंद एवं जेई नेहाल आलम ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बागवानी फसलों की उन्नत खेती, सिंचाई व्यवस्था, पौधों की देखभाल तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं भी सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेले में विभिन्न प्रकार के आम, एवं बागवानी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रदर्शित उत्पादों का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से खेती संबंधी जानकारी प्राप्त की। आयोजन स्थल पर किसानों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रखंड के विभिन्न विभागों के कर्मी, जनप्रतिनिधि, किसान एवं स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आम उत्सव सह बागवानी मेला किसानों के लिए ज्ञानवर्धक एवं लाभकारी साबित हुआ तथा कृषि एवं बागवानी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:49:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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