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                <title>Agricultural Innovation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Agricultural Innovation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नैनो उर्वरकों के उपयोग आधारित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दानेदार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183869/a-one-day-farmer-training-program-based-on-the-use-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260720-wa0173.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको के नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने ग्राम  सेफ खानपुर वि.खं. बहरिया के कृषकों  हेतु दिनांक 20 जुलाई 2026 को आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने संबोधित करते हुए बताया कि  इफको के नैनो उर्वरक जो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक क्रांतिकारी  परिवर्तन ला रहे हैं को जरूर प्रयोग करें।  प्रधानाचार्य ने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको के क्रियाकलाप से परिचित कराया तथा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो उर्वरकों के प्रयोग से कृषि लागत में कमी आएगी साथ ही यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक प्रयोग से जल, मृदा एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी अवगत कराया तथा फसलों में  नैनो डीएपी से बीज/जड़/कंद/सेट शोधित कर बुवाई/रोपाई करने की सलाह दी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दानेदार डीएपी की मात्रा आधी प्रयोग करें नैनो डीएपी 500 मिलीलीटर की बोतल से 100 किलोग्राम बीज को शोधित कर सकते हैं एवं मात्र ₹600 की है जो कि दानेदार डीएपी से काफी सस्ता है नैनो डीएपी के प्रयोग से लागत में कमी आएगी साथ ही उत्पादन एवं उत्पाद की गुणवत्ता भी बढ़ती है तथा नैनो यूरिया फसल की पत्तियों पर @4 ml प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर स्प्रे करें। </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में संस्थान की वरिष्ठ अधिकारी  सविता शुक्ला ने फल संरक्षण एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के अचार मुरब्बा और जूस बनाकर के हम  अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं । </div>
<div style="text-align:justify;">समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने खेती में जैव उर्वरकों एवं जैव अप घटकों के प्रयोग की जानकारी दी।  प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं स्वस्थ व टिकाऊ खेती के लिए मृदा परीक्षण के महत्व को  बताया।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों  को कारडेट की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम में  चंद्रकाली देवी , मीना कुमारी, शकुंतला, मालती , लाखन सिंह, जय सिंह , हरिश्चंद्र, अभय प्रताप सहित कॉर्डेट फूलपुर  के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 21:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कानपुर के खेतों, तालाबों में खिल रहे हैं मोती </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183735/now-pearls-are-blooming-in-the-fields-and-ponds-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002109825.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने वाले मोती करीब 50 लाख रुपये में बिकने का अनुमान है, जबकि मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी श्रीमती रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर गहरा खेत तालाब निर्मित कराया गया है। योजना के तहत उन्हें खेत तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹52,500) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग एवं मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में इस परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं तथा करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परियोजना की विशेषता यह है कि चयनित सीपियों में विशेष साँचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर सीपी प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ाती है। इसी प्रक्रिया से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार किए जा रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में ऐसे डिजाइनर पर्ल आभूषण एवं सजावटी बाजार में अधिक मांग वाले उत्पाद माने जाते हैं, जिससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। वहीं सामान्य सीपियों में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन किया जा रहा है और अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है। इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती की खेती तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:37:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको  कोरडेट भारतीय कृषि में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं: बाल्मीकि त्रिपाठी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कोरडेट की 92वीं प्रबंध समिति बैठक कोरडेट फूलपुर में संपन्न हुई। सभा की अध्यक्षता करते हुए वाल्मीकि त्रिपाठी ने कहा कि कोरडेट निरंतर अपनी गतिविधियों को क्षेत्र में संचालित कर रहा है और निरंतर प्रगति कर रहा है। इफको और कोरडेट भारतीय कृषि में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं और निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जागरुक भी कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के संयोजक डा० विवेक दीक्षित  नवनियुक्त प्रधानाचार्य, ने कॉर्डेट प्रबंध समिति के सदस्य गणों का स्वागत किया ,  कॉर्डेट फूलपुर के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. डी.के .सिंह ने कॉर्डेट फूलपुर की प्रगति</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181375/iffco-cordet-is-making-invaluable-contribution-to-indian-agriculture-balmiki"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0089-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोरडेट की 92वीं प्रबंध समिति बैठक कोरडेट फूलपुर में संपन्न हुई। सभा की अध्यक्षता करते हुए वाल्मीकि त्रिपाठी ने कहा कि कोरडेट निरंतर अपनी गतिविधियों को क्षेत्र में संचालित कर रहा है और निरंतर प्रगति कर रहा है। इफको और कोरडेट भारतीय कृषि में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं और निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जागरुक भी कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के संयोजक डा० विवेक दीक्षित  नवनियुक्त प्रधानाचार्य, ने कॉर्डेट प्रबंध समिति के सदस्य गणों का स्वागत किया ,  कॉर्डेट फूलपुर के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. डी.के .सिंह ने कॉर्डेट फूलपुर की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा सदस्य  कुलमनी माझी (प्रधानाचार्य, कोरडेट पारादीप)  एवं डॉक्टर अरविंद ढाका प्रधानाचार्य, कोरडेट आंवला) ने अपने-अपने केंद्रों की वार्षिक प्रगति आख्या, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कृषि विस्तार गतिविधियों का विवरण समिति के समक्ष प्रस्तुत की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संयुक्त कृषि निदेशक प्रयागराज   अनिल सागर एवं अन्य वरिष्ठ सदस्यों  भरत त्रिपाठी,  अभय चौधरी,  आर. पी. सिंह बघेल,  राजदत्त पाण्डेय, पद्मश्री  राम सरन वर्मा, सचिव कोरडेट एवं राज्य वितरण प्रबंधक इफको लखनऊ  यतेंद्र तेवतिया और इफको फूलपुर के इकाई प्रमुख  पी० के० सिंह ने रिपोर्ट की सराहना की और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के अंत में संयोजक डा० विवेक दीक्षित द्वारा अध्यक्ष  और सभी सम्मानित सदस्यों को बैठक में उपस्थित होने और बहुमूल्य मार्गदर्शन देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में कॉर्डेट फूलपुर के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. डी.के. सिंह के उनके पदोन्नति उपरांत प्रयागराज क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक बनाए जाने पर विदाई समारोह का भी आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रबंध समिति के सदस्यों कॉर्डेट के समस्त अधिकारी कर्मचारियों ने डॉ. सिंह को माल्यार्पण करके सम्मान किया। और साथ ही नव नियुक्त प्रधानाचार्य डॉ. विवेक दीक्षित के कोरडेट फूलपुर के प्रधानाचार्य के रूप में कार्यभार ग्रहण की बधाई भी समिति सदस्यों एवं  कर्मचारियों ने  दी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:01:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवप्रवर्तन सृजनात्मकता की नई धारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जीवन ही चलने का नाम है,गति ही जीवन है। सभी समाज एवं राष्ट्र की संस्कृतियों ने यह माना है कि मनुष्य और जानवरों के बीच विभेद करने वाला प्रमुख कारक मस्तिष्क है, और मस्तिष्क ही मनुष्य को सृजनात्मक शक्ति प्रदान करता है। मनुष्य के रचनात्मक विचार नयापन लाते हैं उसे पूर्व काल से पृथक करते हुए प्रगति के पथ प्रदर्शक बनते हैं। इसे ही नवप्रवर्तन माना जाता है, नवप्रवर्तन और कुछ नहीं बल्कि समाज की परंपरागत और प्रगतिशील मानसिकता के बीच एक बड़ी लाइन खींचना है। इसीलिए यह माना जाता है कि नवप्रवर्तन समाज मैं 3% नवाचार का निर्धारित है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176803/new-stream-of-innovation-creativity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260420_212802.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवन ही चलने का नाम है,गति ही जीवन है। सभी समाज एवं राष्ट्र की संस्कृतियों ने यह माना है कि मनुष्य और जानवरों के बीच विभेद करने वाला प्रमुख कारक मस्तिष्क है, और मस्तिष्क ही मनुष्य को सृजनात्मक शक्ति प्रदान करता है। मनुष्य के रचनात्मक विचार नयापन लाते हैं उसे पूर्व काल से पृथक करते हुए प्रगति के पथ प्रदर्शक बनते हैं। इसे ही नवप्रवर्तन माना जाता है, नवप्रवर्तन और कुछ नहीं बल्कि समाज की परंपरागत और प्रगतिशील मानसिकता के बीच एक बड़ी लाइन खींचना है। इसीलिए यह माना जाता है कि नवप्रवर्तन समाज मैं 3% नवाचार का निर्धारित है, शेष 97 प्रतिशत परंपरावादी विचारों के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुराने समय से ही आर्थिक समृद्धि में नवप्रवर्तन की भूमिका को स्वीकार किया गया है चाहे वह मनुष्य के खाद्य संग्राहक से खाद्य उत्पादक में परिवर्तन हो या फिर 18वीं सदी में यूरोप की वाणिज्य क्रांति का औद्योगिक क्रांति में बदलना इन सभी में नवप्रवर्तन ने प्रेरक का काम किया है। हम चौथी क्रांति की तरफ बढ़ रहे हैं, इसलिए कहा जाता है कि विचारों को कभी सुसुप्त होने या मरने ना दिया जाए। हो सकता है आपके विचार करोड़ों डॉलर के हो । वर्तमान अर्थव्यवस्था में समृद्धि के इंजन माने जाने वाले सनराइज उद्योग, सॉफ्टवेयर, खाद्य संस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक के विकास के पीछे भी नवप्रवर्तन का हाथ है। इसी के आधार पर नगरों को स्मार्ट नगरों में बदला जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नवप्रवर्तन या नवाचार से मैं सिर्फ मानव जीवन की परेशानियों को न्यूनतम किया है, बल्कि मानव जीवन को आसान और सुखमय भी बनाया जा रहा है। नवप्रवर्तन और मस्तिष्क की खोज के कारण ही जापान में 6.5 रेक्टर का भूकंप सामान्य माना जाता है,जबकि भारत में यह तबाही ला सकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पेनिसिलिन जैसी प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) के अविष्कार ने रोगों की संभावना को कम कर दिया एवं स्वास्थ्य प्रणाली के भावी विकास को एक गति प्रदान की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेनेरिक औषधि, रोबोटिक सर्जरी, जीन एडिटिंग जैसी प्रक्रिया स्वास्थ्य सुधार हेतु एक मजबूत आधार मानी जाती है। सामाजिक विकास आर्थिक समन्वयक और न्याय प्रणाली में पारदर्शिता लाने का प्रयास नवप्रवर्तन के योगदान से ही आया है। सोशल मीडिया जैसे नवीन प्लेटफार्म ने व्यक्ति की अभिव्यक्ति के अधिकार को स्वतंत्र किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रामीण से आधुनिक रूपांतरण में कृषी क्षेत्र से भारी उद्योगों पर बल देने में किसानों के देश को सॉफ्टवेयर उद्योग का सिरमौर बनाने में नवप्रवर्तन का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कृषि में भी आधुनिकीकरण और पाश्चात्य उपकरण का प्रादुर्भाव भी नवीन नवाचार के कारण संभव हुआ है। भारतीय राज्य को लोक कल्याणकारी राज्य से लोगों के सशक्तिकरण करने वाले राज्य में बदलने की नवप्रवर्तन की भूमिका अत्यंत सराहनीय है। इसके कारण भार मानी जाने वाली महिलाएं अब भार ढोने वाली की भूमिका में आ चुकी हैं। इसी तरह न्यायिक क्षेत्र में जनहित याचिका की अवधारणा ने न्याय की अवधारणा को सर्वांगीण बनाने में सहायता प्रदान की है। यह अलग बात है कि केवल नवप्रवर्तन को ही एकमात्र निर्धारक कारक के रूप में नहीं माना जा सकता क्योंकि नवीन विचारों को स्वीकार करना और आगे बढ़ना बहुत हद तक समाज पर निर्भर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिमी देशों में नवीन विचारों को जगह देने के कारण वहां पुनर्जागरण आया है। हमें समाज को नव परिवर्तन की तरफ जागरूक करने की आवश्यकता होगी और नवप्रवर्तन में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद देकर उस और और ज्यादा विचार-विमर्श कर नीति बनाने की आवश्यकता होगी। इस तरह हमें महात्मा बुद्ध के कथन अनुसार अपने या दूसरों के विचारों नवप्रवर्तनों को तर्क बुद्धि पर देखे जाने की जरूरत है, और फिर आगे बढ़ने का प्रयास किया जाना चाहिए।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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