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                <title>Viksit Bharat 2047 - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Viksit Bharat 2047 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विकसित युवा से विकसित भारत' का संकल्प, लखनऊ में चौथे राष्ट्रीय चिंतन शिविर का समापन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित "विकसित युवा बनाएगा विकसित भारत (Viksit Yuva for Viksit Bharat)" विषयक चौथा एवं अंतिम क्षेत्रीय चिंतन शिविर शनिवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में संपन्न हुआ। इसके साथ ही देशभर में आयोजित क्षेत्रीय विचार-विमर्श श्रृंखला का समापन हुआ, जिसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन सत्र को संबोधित करते हुए युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री <strong>रक्षा निखिल खडसे</strong> ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183755/resolve-for-developed-india-from-developed-youth-fourth-national-thinking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-19-at-18.46.15.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित "विकसित युवा बनाएगा विकसित भारत (Viksit Yuva for Viksit Bharat)" विषयक चौथा एवं अंतिम क्षेत्रीय चिंतन शिविर शनिवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में संपन्न हुआ। इसके साथ ही देशभर में आयोजित क्षेत्रीय विचार-विमर्श श्रृंखला का समापन हुआ, जिसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन सत्र को संबोधित करते हुए युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री <strong>रक्षा निखिल खडसे</strong> ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में युवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से जमीनी स्तर पर युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें देश के विकास में सहभागी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि <strong>MY Bharat</strong>, <strong>Experiential Learning Programme (ELP)</strong>, <strong>Prime Minister Internship Scheme (PMIS)</strong> तथा <strong>Fit India</strong> जैसी योजनाओं पर प्रस्तुत विचार अधिकारियों की प्रतिबद्धता और स्थानीय चुनौतियों की गहरी समझ को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल अपने करियर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">युवा कार्यक्रम विभाग के संयुक्त सचिव <strong>शिव रतन</strong> ने कहा कि विभिन्न मंत्रालयों की MY Bharat के साथ बढ़ती साझेदारी इस मंच की उपयोगिता और प्रभाव को प्रमाणित करती है। उन्होंने अधिकारियों से राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय हितधारकों के साथ समन्वय बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य की चुनौतियां अलग हैं और उनके समाधान भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/whatsapp-image-2026-07-19-at-18.46.15.jpeg" alt="केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने युवा अधिकारियों से राष्ट्र निर्माण में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने का किया आह्वान, उत्तर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य का सम्मान" width="1512" height="1006"></img></p>
<p style="text-align:justify;">MY Bharat की मुख्य कार्यकारी अधिकारी <strong>डॉ. प्रियंका शुक्ला</strong> ने अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि MY Bharat युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता के सार्थक अवसर प्रदान करने का एक प्रभावी मंच बन चुका है। उन्होंने विभिन्न राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों का दस्तावेजीकरण और व्यापक स्तर पर उनके विस्तार पर भी जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">चिंतन शिविर के दूसरे दिन प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) और फिट इंडिया पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा विभिन्न कार्य समूहों ने नशा मुक्त भारत अभियान, फिट इंडिया, जेंडर सेंसिटाइजेशन, युवा नेतृत्व एवं स्वयंसेवा, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम, सामुदायिक जनसहभागिता तथा MY Bharat एवं MY Bharat NSS के संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर अपनी कार्ययोजनाएं और अनुशंसाएं प्रस्तुत कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिवसीय चिंतन शिविर में इस बात पर सहमति बनी कि MY Bharat को युवाओं के नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण के सशक्त मंच के रूप में और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए जमीनी स्तर पर व्यापक पहुंच, संस्थागत समन्वय, तकनीक आधारित कार्यक्रम क्रियान्वयन, स्थानीय भागीदारी तथा अधिकारियों की क्षमता वृद्धि पर विशेष बल दिया गया। साथ ही राज्य-विशिष्ट रणनीतियों, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और मंत्रालय एवं क्षेत्रीय अधिकारियों के बीच सतत संवाद को भी आवश्यक बताया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन समारोह में <strong>उत्तर प्रदेश</strong> को MY Bharat पंजीकरण की सर्वाधिक संख्या के आधार पर <strong>सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य</strong> के रूप में सम्मानित किया गया। वहीं <strong>दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव</strong> को अपनी युवा आबादी के अनुपात में सर्वाधिक पंजीकरण प्रतिशत हासिल करने के लिए सम्मानित किया गया। मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर से प्राप्त सुझाव भविष्य में कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करेंगे और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 19:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182800/solar-plants-can-provide-energy-to-the-education-and-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लैब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूफटॉप सोलर प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने 20वें सांख्यिकी दिवस समारोह को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, संवाददाता।</strong></p><p style="text-align:justify;"> प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सोमवार को आयोजित 20वें सांख्यिकी दिवस-2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि भारत का भविष्य डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित शासन व्यवस्था आवश्यक है।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182319/principal-secretary-to-the-prime-minister-dr-pk-mishra-addressed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-21.04.24.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, संवाददाता।</strong></p><p style="text-align:justify;"> प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सोमवार को आयोजित 20वें सांख्यिकी दिवस-2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि भारत का भविष्य डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित शासन व्यवस्था आवश्यक है।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी विजन दस्तावेज 2026-31, सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति रिपोर्ट तथा श्रम बाजार और अनौपचारिक उद्यमों से जुड़े प्रथम शहर स्तरीय अनुमानों के प्रकाशन की सराहना की। साथ ही प्रोफेसर अरूप बोस को सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बधाई भी दी।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के नए आधार वर्ष पर कार्य</strong></h3><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत की बदलती अर्थव्यवस्था को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) सहित प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों को नए आधार वर्ष के साथ अद्यतन किया जा रहा है। इससे नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण अधिक प्रभावी होगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रशासनिक आंकड़े बनेंगे राष्ट्रीय संपदा</strong></h3><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश में तेजी से हुए डिजिटल परिवर्तन के कारण प्रशासनिक आंकड़ों का विशाल भंडार तैयार हुआ है, जिसे रणनीतिक राष्ट्रीय संपदा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इन आंकड़ों का उपयोग बेहतर योजनाएं बनाने, लक्षित सेवा वितरण सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित एवं परस्पर संगत डेटा इकोसिस्टम विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि डेटा साझाकरण के दौरान गोपनीयता, सुरक्षा और निजता के उच्चतम मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सांख्यिकीय प्रणाली में व्यापक सुधार</strong></h3><p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने व्यापक सुधार अभियान चलाया है। विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर 216 सुधारों को स्वीकार कर समयबद्ध ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत नए सर्वेक्षण, कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI), जिला स्तरीय अनुमान, उच्च आवृत्ति वाले सर्वेक्षण और आंकड़ों के शीघ्र प्रकाशन जैसी कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही राष्ट्रीय मेटाडेटा संरचना 2.0, ओपन एपीआई, ई-सांख्यिकी, जीओआईस्टेट्स, पैमाना तथा ई-साक्षी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, जो डेटा की उपलब्धता, पारस्परिक संगतता और रियल टाइम गवर्नेंस को मजबूत करेंगे।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>एआई के उपयोग में जिम्मेदार शासन जरूरी</strong></h3><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सांख्यिकीय विश्लेषण और नीति निर्माण में नई संभावनाएं लेकर आई है, लेकिन इसके उपयोग के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए ही एआई का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>विश्वसनीय आंकड़ों पर आधारित होगा विकसित भारत</strong></h3><p style="text-align:justify;">अपने संबोधन के समापन में डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक की सही गणना और किसी को भी पीछे न छोड़ने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब सांख्यिकीय प्रणाली गुणवत्ता, गोपनीयता, पारदर्शिता और स्वतंत्रता के उच्च मानकों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन का भविष्य साक्ष्य आधारित निर्णय प्रक्रिया में निहित है और भारत इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:02:06 +0530</pubDate>
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                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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