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                <title>special intensive revision - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>कांग्रेस ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग की।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। पार्टी का तर्क है कि ऐसा करने से वोटरों को दबाने और मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ मज़बूत सुरक्षा मिलेगी। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (</span>SIR) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग का "साफ़ तौर पर पक्षपाती कामकाज" - जिसके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181819/congress-demanded-that-the-right-to-vote-be-given-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas20.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। पार्टी का तर्क है कि ऐसा करने से वोटरों को दबाने और मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ मज़बूत सुरक्षा मिलेगी। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (</span>SIR) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग का "साफ़ तौर पर पक्षपाती कामकाज" - जिसके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा था - "पूरी तरह से बेनकाब" हो गया है। उन्होंने कहा कि अब वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने का समय आ गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि इसे न्यायिक समीक्षा और सुरक्षा का सर्वोच्च स्तर मिल सके।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का ज़िक्र किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दो जजों की बेंच ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया था। उन्होंने सवाल किया कि वोट देने के अधिकार को - जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए बहुत ज़रूरी बताया - वैसी ही मान्यता क्यों नहीं मिलनी चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि संविधान सभा ने सरदार पटेल की अध्यक्षता में मौलिक अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यकों और आदिवासी व बहिष्कृत क्षेत्रों पर एक सलाहकार समिति बनाई थी। </span>21-22<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल</span>, 1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को हुई बैठक के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समिति ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की थी कि क्या वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. बी.आर. अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने का ज़ोरदार समर्थन किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सरदार पटेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सी. राजगोपालाचारी और अन्य लोगों का तर्क था कि ऐसा करने से रियासतें भारतीय संघ में शामिल होने में हिचकिचा सकती हैं। उनका मानना था कि संविधान में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार (यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइजी) देना ही काफ़ी होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">सरदार पटेल का खुद यह मानना था कि सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार अपने आप में एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है। यही अनुच्छेद </span>326<span lang="hi" xml:lang="hi"> की पृष्ठभूमि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सभी वयस्कों को वोट देने के अधिकार के आधार पर चुनाव कराने का प्रावधान करता है।" उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जन प्रतिनिधित्व अधिनियम</span>, 1951' <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत एक कानूनी अधिकार है या एक स्पष्ट मौलिक अधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर बहस सात दशकों से ज़्यादा समय से चल रही है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग राय सामने आई हैं। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में जस्टिस अजय रस्तोगी ने अपनी असहमति वाली राय में कहा कि वोट देने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वोटिंग से जुड़े कई अधिकारों को पहले ही मान्यता दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उम्मीदवारों के आपराधिक बैकग्राउंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके आर्थिक हितों और राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों को जानने का मतदाताओं का अधिकार शामिल है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने तर्क दिया</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">इसने वोट की गोपनीयता की रक्षा की है और </span>NOTA <span lang="hi" xml:lang="hi">के ज़रिए सभी उम्मीदवारों को खारिज करने के अधिकार को मान्यता दी है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह और भी अजीब बात है कि वोट देने का अधिकार अभी भी सिर्फ़ एक कानूनी अधिकार बना हुआ है। इससे जुड़े सभी अधिकारों को मौलिक घोषित किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मुख्य अधिकार - जिसके बिना बाकी अधिकार मौजूद नहीं रह सकते - अभी भी कानूनी अधिकार ही बना हुआ है।"रमेश ने कहा कि वोट देने के अधिकार का दर्जा बढ़ाने से लोकतांत्रिक सुरक्षा उपाय मज़बूत होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर काम करने वाले भारत के चुनाव आयोग के खुले तौर पर पक्षपाती कामकाज के बुरी तरह बेनकाब होने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इसे न्यायिक समीक्षा और सुरक्षा का उच्चतम स्तर मिल सके।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने आगे कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह मतदाताओं को दबाने या मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ सुरक्षा उपाय लागू करने की दिशा में एक मज़बूत कदम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>SIR (<span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बहुत बड़ी संख्या में हुए हैं। इसका मतलब यह भी होगा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की ज़्यादा निगरानी रहेगी।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 19:24:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>बलरामपुर में एसआईआर ने बदली मतदाताओं की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175717/sir-changed-the-number-of-voters-in-balrampur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/0e9cec30-ebd2-11f0-a422-4ba8a094a8fa.jpg.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले 15,83,027 मतदाता थे। मतदाता सूची में कुल 17.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक मतदाता विधानसभा बलरामपुर में 87,850 और दूसरे स्थान पर विधानसभा उतरौला में 86,576 मतदाता के नाम सूची से हटे हैं। जिले में वृहद अभियान 166 दिनों तक चला है। सभी बूथों पर 1805 बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर दस्तक देकर मतदाता पुनरीक्षण का कार्य किया है। इसमें 291-तुलसीपुर विधानसभा में पहले 377387 मतदाता थे। 51999 मतदाताओं के नाम सूची से हटने पर 3,25,388 वोटर बचे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गैंसड़ी में 357518 वोटर थे, 45847 के नाम हटाने के बाद 3,11,671 मतदाता बचे हैं। उतरौला में 4,26,213 मतदाता थे, 86576 के नाम कटने के बाद 3,39,637 वोटर बचे हैं। बलरामपुर सदर में 4,21,909 मतदाता थे, 87,850 के नाम कटने से 3,34,059 मतदाता बचे हैं। चारों विधानसभा में अंतिम सूची के प्रकाशन में नए वोटरों को शामिल करने पर यह संख्या है।जिला निर्वाचन अधिकारी विपिन कुमार जैन ने कहा कि मतदाताओं के नाम कटने का मुख्य कारण डुप्लीकेशन (दोहराव) का विलोपन तथा ऐसे निवासियों के नाम हटाना है, जो अब जनपद में निवास नहीं कर रहे हैं। इससे मतदाता सूची अब पहले से अधिक शुद्ध और वास्तविक हो गई है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:21:35 +0530</pubDate>
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