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                <title>child protection awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>child protection awareness RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बाल मजदूरी रोकने के तहत खन्ना में दुकानों और ढाबों की चेकिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000901108.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिस), शरद सूद (सुपरवाइजर) चाइल्ड हेल्प लाइन (1098), लुधियाना लेबर डिपार्टमेंट और पुलिस डिपार्टमेंट ने मिलकर चलाया। अवेयरनेस कैंपेन के दौरान लोगों को बताया गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बाल मजदूरी न करवाई जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि ने कहा कि यह सरप्राइज चेकिंग भविष्य में भी जारी रहेगी ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:52:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मासूमियत पर हमला: सूरत की घटना ने झकझोरा समाज तीन साल की बच्ची के साथ दरिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177225/attack-on-innocence-surat-incident-shocked-the-society-brutality-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rape.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार समाज के लिए शर्मनाक और चिंताजनक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना का विवरण जितना दुखद है, उतना ही भयावह भी है। बच्ची अपने ही घर में सुरक्षित समझी जाने वाली जगह पर थी, लेकिन एक दरिंदे ने मौके का फायदा उठाकर उसकी मासूमियत को रौंदने की कोशिश की। यह सवाल उठता है कि आखिर एक व्यक्ति किस हद तक संवेदनहीन हो सकता है कि उसे एक छोटी बच्ची पर भी दया नहीं आती। यह केवल एक व्यक्ति की विकृत मानसिकता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक गिरावट का संकेत भी है जहां इंसान अपने नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी चर्चा को जन्म दिया है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अक्सर ऐसा होता है कि छोटे बच्चों को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है, यह सोचकर कि वे घर के अंदर सुरक्षित हैं। लेकिन यह घटना बताती है कि खतरा केवल बाहर नहीं, बल्कि आसपास भी हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा केवल दरवाजे बंद करने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी और सतर्कता आवश्यक है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस मामले में बच्ची की मां की सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी को रोका। समय पर पहुंचकर उन्होंने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया, जिससे यह साबित होता है कि जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन हर मामले में ऐसा संभव नहीं होता, इसलिए समाज को मिलकर ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस क्षेत्र में आरोपी बिना किसी किरायानामा के रह रहा था, वहां की निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर थी, यह स्पष्ट होता है। यदि किरायेदारों का सही रिकॉर्ड रखा जाता और नियमित जांच होती, तो शायद ऐसे अपराधियों पर पहले ही नजर रखी जा सकती थी। पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें पहले से ही ऐसे संभावित खतरों को पहचानने और रोकने की दिशा में काम करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में बढ़ते अपराधों के पीछे एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली और तकनीक का गलत उपयोग भी है। मोबाइल और इंटरनेट ने जहां दुनिया को जोड़ा है, वहीं यह कई बार गलत दिशा में भी ले जा रहा है। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता और उस पर नियंत्रण की कमी ने कुछ लोगों की सोच को विकृत कर दिया है। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जिनकी मानसिकता पहले से कमजोर होती है, वे इससे प्रभावित होकर गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि हम बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा और जागरूकता के बारे में सिखाएं। भले ही तीन साल की बच्ची इतनी समझदार नहीं होती कि वह खुद को बचा सके, लेकिन बड़े होते बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। इससे वे किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं और अपने माता-पिता को बता सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना के बाद समाज में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। लोगों द्वारा आरोपी की पिटाई करना उनके भीतर के आक्रोश को दर्शाता है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कानून अपने तरीके से काम करता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि यह दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सके। पॉक्सो एक्ट जैसे कानून इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं, लेकिन इनका प्रभाव तभी दिखेगा जब उनका सख्ती से पालन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने यह भी दिखाया है कि समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की कितनी आवश्यकता है। केवल पुलिस या सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हर व्यक्ति को अपने आसपास के माहौल पर नजर रखनी होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देनी होगी। पड़ोसियों के बीच आपसी संवाद और सतर्कता भी ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। क्या हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जहां बच्चे सुरक्षित नहीं हैं? क्या हमारी प्रगति केवल आर्थिक और तकनीकी तक सीमित रह गई है, जबकि नैतिक और सामाजिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब हमें खुद तलाशने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जरूरत इस बात की है कि हम इस घटना को केवल एक खबर की तरह न देखें, बल्कि इससे सीख लें और अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। अभिभावक अधिक सतर्क रहें, समाज अधिक जागरूक बने और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए। तभी हम एक ऐसा वातावरण बना पाएंगे जहां हर बच्चा सुरक्षित और निश्चिंत होकर अपना बचपन जी सके। इस तरह की घटनाएं केवल पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को घायल करती हैं। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं और एक सुरक्षित समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। तभी हम सच्चे अर्थों में मानवता को बचा पाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल तस्करी पर सख्ती जरूरी न्याय और जिम्मेदारी का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है। हाल ही में सुप्रीम करतबने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यों को सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह निगरानी कर सकती है लेकिन वास्तविक कार्रवाई का दायित्व राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र पर ही है। यह टिप्पणी केवल एक कानूनी बयान नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175699/strictness-on-child-trafficking-is-necessary-time-for-justice-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/child-trafficking.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है। हाल ही में सुप्रीम करतबने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यों को सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह निगरानी कर सकती है लेकिन वास्तविक कार्रवाई का दायित्व राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र पर ही है। यह टिप्पणी केवल एक कानूनी बयान नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाल तस्करी एक जटिल और बहुआयामी अपराध है जो केवल बच्चों के अपहरण तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसमें जबरन मजदूरी यौन शोषण भीख मंगवाना और अवैध गतिविधियों में धकेलना जैसे गंभीर अपराध शामिल होते हैं। यह समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी तेजी से फैल रही है जहां जागरूकता की कमी और गरीबी के कारण बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि देशभर में संगठित गिरोह सक्रिय हैं जो बच्चों को निशाना बनाते हैं और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर शोषण करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मुद्दे की गंभीरता को समझने के लिए यह आवश्यक है कि हम इसके मूल कारणों पर भी ध्यान दें। गरीबी बेरोजगारी अशिक्षा और सामाजिक असमानता जैसे कारक बाल तस्करी को बढ़ावा देते हैं। कई बार माता पिता आर्थिक मजबूरी के चलते बच्चों को काम पर भेजने के लिए मजबूर हो जाते हैं और यही स्थिति तस्करों के लिए अवसर बन जाती है। इसके अलावा शहरीकरण और पलायन भी एक बड़ा कारण है जहां परिवारों का सामाजिक ढांचा कमजोर पड़ जाता है और बच्चों की सुरक्षा खतरे में आ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि कई मामलों में राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया धीमी और असंगठित होती है जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई बार मामलों की सही जांच नहीं हो पाती और पीड़ित बच्चों को न्याय मिलने में देरी होती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस समस्या का समाधान है और इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाल तस्करी के मामलों में त्वरित कार्रवाई इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसमें हर पल महत्वपूर्ण होता है। जितनी देर कार्रवाई में होती है उतनी ही संभावना बढ़ जाती है कि बच्चा किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाए या उसका शोषण किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संदर्भ में समाज की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल सरकार और अदालत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। स्कूलों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और अभिभावकों को इस खतरे के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इससे न केवल अपराधों की रोकथाम होगी बल्कि पीड़ितों को समय पर सहायता भी मिल सकेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तकनीक का उपयोग भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और डाटाबेस के माध्यम से लापता बच्चों की जानकारी को तेजी से साझा किया जा सकता है जिससे उन्हें खोजने में सहायता मिलती है। हालांकि इसके लिए डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा का भी ध्यान रखना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करती हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार का प्रश्न है। हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि बाल तस्करी के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक संघर्ष भी है। इसके लिए सरकार अदालत और समाज सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। जब तक हम इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक रूप से आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक इसका समाधान संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी को एक अवसर के रूप में देखते हुए हमें ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:34:13 +0530</pubDate>
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