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                <title>ख़जनी में भागवत कथा# स्रोता हुए भाव विभोर# ख़जनी के सरयाँ में आयोजन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ख़जनी में भागवत कथा# स्रोता हुए भाव विभोर# ख़जनी के सरयाँ में आयोजन RSS Feed</description>
                
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                <title>श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह कथा ने सरया तिवारी में जगाया भक्ति का सागर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रिपोर्टर/रामअशीष त्रिपाठी- (खजनी तहसील)</strong></p>
<p><strong>खजनी (गोरखपुर)। </strong>तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा सरया तिवारी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य यजमान कृष्ण देव शुक्ला एवं मालती शुक्ला के आवास पर चल रही कथा में वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्री देवर्षि जी महाराज ने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर भक्ति में डूब गए।</p>
<p><strong>रुक्मिणी की अटूट भक्ति का चित्रण</strong></p>
<p>आचार्य ने बताया कि रुक्मिणी जी साक्षात मां लक्ष्मी का अवतार थीं, जिनका मन बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण में रमा हुआ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175609/shri-krishna-rukmini-marriage-story-awakened-an-ocean-of-devotion-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260409_192520.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रिपोर्टर/रामअशीष त्रिपाठी- (खजनी तहसील)</strong></p>
<p><strong>खजनी (गोरखपुर)। </strong>तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा सरया तिवारी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य यजमान कृष्ण देव शुक्ला एवं मालती शुक्ला के आवास पर चल रही कथा में वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्री देवर्षि जी महाराज ने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर भक्ति में डूब गए।</p>
<p><strong>रुक्मिणी की अटूट भक्ति का चित्रण</strong></p>
<p>आचार्य ने बताया कि रुक्मिणी जी साक्षात मां लक्ष्मी का अवतार थीं, जिनका मन बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण में रमा हुआ था। श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य और लीलाओं का स्मरण करते-करते उनका हृदय पूर्णतः कृष्णमय हो गया था।</p>
<p><strong>पत्र भेजकर  श्रीकृष्ण को बुलाया</strong></p>
<p>प्रवचन में रुक्मिणी हरण प्रसंग का जीवंत चित्रण करते हुए बताया गया कि जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय किया, तब रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के हाथ श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर विवाह से पूर्व गिरिजा मंदिर में आने का आग्रह किया और उन्हें अपने साथ ले जाने की प्रार्थना की।</p>
<p><strong>भगवान ने किया हरण, मचा हड़कंप</strong></p>
<p>आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण रथ लेकर पहुंचे और गिरिजा पूजन के बाद रुक्मिणी जी को अपने साथ ले गए। यह समाचार फैलते ही राजाओं में हड़कंप मच गया और रुक्मी ने युद्ध किया, लेकिन अंततः भगवान ने उसे क्षमा कर दिया।</p>
<p><strong>महारास और भक्ति का महत्व</strong></p>
<p>महारास लीला का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान की बांसुरी की धुन पर गोपियां आकर्षित हुईं और यह लीला जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भागवत के ‘पंच गीत’ को उन्होंने भक्ति का आधार बताया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_20260409_192537.jpg" alt="IMG_20260409_192537" width="744" height="524"></img></p>
<p>कार्यक्रम में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी और भजन-कीर्तन ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु झूम उठे। पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया।<br />इस अवसर पर धरणीधर राम त्रिपाठी, त्रिलोक राम त्रिपाठी, राम आशीष तिवारी, सोनू तिवारी, राममणि त्रिपाठी, डॉ. सोमनाथ त्रिपाठी, मंटू शुक्ला, गामा शुक्ला सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 19:27:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[शत्रुघन मणि त्रिपाठी ]]></dc:creator>
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