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                <title>Indian Parliament News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Indian Parliament News RSS Feed</description>
                
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                <title>नारी बंधन परिसीमन बिल गिरने पर बीजेपी का विपक्ष पर देश व्यापी विरोध सोची समझी स्क्रिप्ट है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177153/bjps-nationwide-protest-against-the-opposition-on-the-failure-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को बस आरक्षण केशवराम पर धोखा देना था।वह दिया गया पहले से पास बिल को 2024मे नहीं लागू किया गया जब कि विपक्ष बार बार मांग कर रहा था लागू करो पर सरकार सरकार होती है मनमर्जी तो करेगी कर लिया लागू 2024मे नहीं किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु नारा लगाने वाले भूल गये कि देश की नारी शक्ति का पहला हक कांग्रेस के स्व प्रधान राजीव गान्धी ने ही पंचायती राज में तीनों स्तर पर यानि पंचायत से जिला परिषद तक तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिया जो आज भी लागू है। उसमें भाजपा कि किस  तरह पन्द्रह साल की सीमा नहीं लगाया था। वह एक कानुन बन गया और उसीके तर्ज पर बहुत से राज्यों में पचायतीराज  में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया है।तब कांग्रेस महिला विरोधी नहीं विपक्ष नारी विरोधी नहीं था।फिर अब कैसे होगया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस यही किया एक गलत परिसीमन बिल को पास नहीं किया।भाजपा की महिला सांसदों ने कभी भाजपा से संसद विधानसभाओं में जब आरक्षण का बिल कांग्रेस ला ई थी भाजपा ने क्यों नहीं समर्थन किया । क ई बार कांग्रेस की सरकार बिल को लोक सभा में पास करने का प्रयास किया पर हर बार भाजपा ने विरोध किया कारण तो भारत की जनता सब राजनेता जानते हैं।लेकिन भाजपा सच को छिपातीं है महिलाओं के पीछे छिपती है ।और कांग्रेस के द्वारा खींची गई हर लकीर को मिटाने और छोटा करने में विगत बारह साल से लगी हुई है।  पर लकीर मिटा नहीं  पा रही है जितना मिटाने की कोशिश होती है वह लकीर बड़ी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान सरकार जनोपयोगी क ई क ई बिलों को कांग्रेस के समय पास में जो था जनता उसका उपयोग कर रही थी। सरकार रोक लगा दिया सुचना के अधिकार मनरेगा जैसे बिलों पर कैंची चलाया ।तब भाजपा का कोई नेता संगठन सड़क पर नहीं आया जैसा कि महिला परिसीमन बिल को लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। और झूठ भ्रम जनता में फैला रहे हैं। कांग्रेस ने 2012मे महिला बिल को राज्य सभा से पारित करा लिया जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण था पंचायती राज की तरह ही। परन्तु जो नया बिल पास भाजपा ने 2023मे सभी दलों की सहमति से पास करवाया है वह बिल आज भी अस्तित्व में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर वास्तव में भाजपा नारी शक्ति का सम्मान करता है तोउसे देश में लागू कर दे।अगर लागू नहीं कर रहा है तोयह मान लें  भाजपा सरकार का नारी आरक्षण बिल  सड़क का खिलौना बनाकर जनता में तमाशा दिखाने के सिवाय सच से बहुत दूर है।यह एक चुनावी नौटंकी से आगे कुछ नहीं है।अब यहां सवाल हर दल से है । अगर महिला आरक्षण बिल संसद विधानसभाओं में नहीं लागू हो रहा है । तो हर दल क्यों नहीं पार्टी के सम्विधान में यह लिखे की पार्टी  अपने   स्तर पर तैंतीस प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जायेगा वह संसद विधानसभाओं के साथ पार्टी के संगठन में भी दिया जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2022मे यूं पी विधानसभा चुनाव में लड़की हूं लड सकती हूं का नारा प्रियंका-गांधी ने दिया और चालीस प्रतिशत विधानसभा में महिलाओं को टिकट दिया ।परन्तु गजब यूं पी की महिलाएं अपनी ही बहनों को हरा दिया जबकि वह सख्याबल में आबादी की आधीहै चाहती तो कम से कमज्ञतीस प्रतिशत कांग्रेस की महिलाएं विधायक बन गई होती पर महिलाएं भी जातिवादी धरृमवादी पारृटी वाली है तभी तो कांग्रेस की चालिस प्रतिशत महिलाएं चुनाव हार गई मात्र एक महिला जीती अराधना मिश्रा वह भी अपने पिता की सीट राम पुर खास  से।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चालिस प्रतिशत की हार से डर कर सांसद में सभी दलों ने महिलाओं को कम टिकट दिया।किसी दल के पास ताकत नहीं है कि महिलाओं के आरक्षण नियम को पहले पार्टी में बनाये लागू करें। फिर संसद विधानसभा की बात करें हर पार्टी की नियत में खोट है।अभी जो वर्तमान संसद है उसमें सबसे कम संख्या भाजपा  की महिलाएं हैं सबसे ज्यादा तृणमूल की महिला सासद है इसी संख्या से पता चलता भिजवा कितना महिलाओं का सम्मान करती है।आज तक कोई महिला भाजपा का राष्ष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन पाईहैक्या भाजपा प्रेस कान्फ्रेंस करके जनता को बतायेगी कि किस कारण से वह महिलाओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष आज तक नहीं बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक उदाहरण यह भी देख ले 2022मे राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव भाजपा जीत जाती है वह दोबारा की मुख्य मंत्री थी एक मात्र महिला थी भाजपा की फिर भी उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया।  यही नारी शक्ति है ।असली भाजपा का चाल चरित्र चेहरा अलग है।फिर बात चली वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तीन महीने तक बात हर पत्रकार करता रहा लेकिन वहां से भी वसुंधरा राजे को हटाया गया नारी थी तो सम्मान कैसे भाजपि करती बिहार चुनाव को देखकर नीतीश नवीन को जाति का वोट कायस्थ वोट साधने को मोहरा वाला अध्यक्ष बना लिया।इनके पूर्व जो अध्यक्ष थे वह भी मोहरा वाले थे वैसे हर पार्टी में यही परम्परा अध्यक्ष मोहरा वाला ही सही होता तेज होगा तो पार्टी पर कब्जा करके राजनिति की शिखर हो जायेगा फिर जिसने अध्यक्ष बनाया उसी को मारेगा हर पार्टी में मुगल शासक का कानुन न चले तभी मोहरा वाला कमजोर राम का अध्यक्ष या जाति समकरण वाला ही बनाया जाता जिससे जाति का वोट अपने पाले में कर लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल से कहीं न कहीं भाजपा की महिलाएं महिला आरक्षण बिल  का विरोध मेसडक पर है तो कांग्रेस की भी महिला संगठन सड़क पर 2023मे पास बिल को लागू करने के लिए तथा परिसीमन बिल जो गिरा उसके समर्थन में सड़क पर पतृरकार वार्ता कर ली है।18अप्रैल को चुनाव आचार संहिता का उलंघन कश्रते हुए देश के साहब ने गलत महिला संशोधन बिल पर राष्ट्राभिनंदन किया सही बात जनता को नहीं बताया बस एक लट कांग्रेस महिला विरोधी हैं महिलाओं के आरक्षण को संसद में रोक दिया भाजपा नारी सम्मान देना चाहती थी परन्तु वह नहीं हो पाया पर यह नही कहा कि जो बिल 2023मे पास है उसे लागू करने जा रहा हूं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्यों संसदों की सख्या बढ़ाकर आरक्षण देना है क्या नौकरियों में शिक्षा में ऐसा हुआ है क्या पंचायतों में दो तीनों सृतर पर आरक्षण लागू है तो सीटें बढ़ीं है।नहीं तो संसद और विधानसभाओं में क्यों पचास प्रतिशत सीट बढ़ाने के लिए गलत परिसीमन बिल लाया गया।।भाजपा जानती थी यह बिल पास नहीं होगा वह तो बस जनता का एक अहम मूद्दे इरान अमेरिका इजरायल युद्ध की बात जनता में बंगाल तमिलनाडु के चुनाव में न उठे तो जनता को वरगलाने के लिए मुख्य समस्या हटाने के लिए ही। बिल लाया गया थाजोविपक्ष की एक छूटता से विफल होगया देश को बांटने का बिल था गिर गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तव में भाजपा ईमानदार है नारी शक्ति वन्दन को महत।व दे ना चाहती है तो पहले अपनी पारृटी में हर स्तर पर तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे-दे और महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे ।पर ऐसा होंगा नहीं बस चुनाव और वोट के लिए ही नारी सम्मान की बात कही जाती है उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी। यूं पी में उन्नाव हिथरस बेटियों को सम्मान तो दिया नहीं फिर कैसे नारी शक्ति वन्दन बिल पर घड़ियाली आंसू गिरा रही है भाजपा।असल में भारत की जनता के आंखों पर गांधारी की तरह पट्टी बंधी हुई है वह सच को देख नहीं पा रही बस जो सुनती है वहीं सच मान कर पूजा कर रही है शबृद बोलने वालों का लोकतंत्र में सत्ता के लिए घबियिली आंसू ब आने वाले का।देश में इरान अमेरिका युद्ध पर राष्ट्र के नाम सम्बोधन नहीं हुआ नहीं संसद का विशेष सत्र बुलाया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 21:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>परिसीमन बिल गिरने से  देश को तो  लाभ हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176917/the-country-benefited-from-the-falling-of-the-delimitation-bill"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1399507-womens-reservation-delimitation-opposition.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से बढ़ने वाली लोकसभा और विधान सभा  सीट के    सांसदों के वेतन और भत्तों का  खर्च बच गया। नए सांसदों और विधायकों  की पेंशन की राशि का बोझ अब देश को नही उठाना पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में वर्तमान सीटों की संख्या एकमुश्त बढ़ाकर  डेढ़ गुना करने का जो प्रस्ताव इस बिल में किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लाभ कुल मिलाकर </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का होता।  लोकसभा में वर्तमान </span>545 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों के हिसाब से की महिलाओं के </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षण के हिसाब से </span>205 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें बढ़तीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सभी </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में </span>2045 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का इजाफा होता। यानी </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ महिलाओं में से मात्र </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं चुनकर विधानमंडलों में पहुंचतीं।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें राज्यसभा और विधानपरिषदों की सीटें शामिल नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उनकी संख्या बाद में तय होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> तर्क दिया जा सकता है कि इस आरक्षण को महिलाओं की संख्या की बजाए उनके राजनीतिक-सामाजिक सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लैंगिक समता और राजनीतिक नैतिकता की पवित्र मंशा के आईने में देखा जाना चाहिए। सही है। लेकिन अगर बिल पास हो जाता। सासंदों और  विधायकों के क्षेत्र और सीट बढ़  जाती तो वढ़े सासदों , विधायकों के वेतन, भत्ते, सुविधाओं और पेंशन का बोझ तो देश पर ही पड़ता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">12 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के कार्यकाल में यह पहला अवसर था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मोदी सरकार  की संसद में विधायी हार हुई। संसदीय इतिहास में </span>1990 <span lang="hi" xml:lang="hi">में पंचायत सशक्तिकरण संशोधन बिल के राज्यसभा में गिरने के बाद यह पहला बिल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकसभा में ही ढ़ह  गया। वैसे मोदी सरकार चाहती तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण बिल अपने दूसरे कार्यकाल में ला सकती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब एनडीए के अपने </span>353 <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसद थे और कोई भी संशाधन बिल आसानी से पारित हो सकता था। लेकिन उसने तब ऐसा नहीं किया।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के आवंटन को लेकर एक व्यापक बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के नाम पर पुरानी पेंशन योजनाओं और सैन्य भर्ती की पारंपरिक प्रक्रियाओं में आमूलचूल परिवर्तन कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के विस्तार के नाम पर विधायी निकायों के आकार को बढ़ाने की योजनाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन निर्णयों का भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सरकार के इन कदमों के पीछे तर्क दिया जाता है कि आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग अनिवार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब बात सांसदों और जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं की आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जनता के बीच विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन के मुद्दे पर सरकारी कर्मचारियों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्तीय बोझ को कम करने के लिए लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के स्थान पर नई पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">को प्राथमिकता दी है। हालिया वर्षों में महंगाई भत्ते (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">और महंगाई राहत (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीआर</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">में वृद्धि तो की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इसे 60 प्रतिशत तक पहुँचाया गया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फिर भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह वृद्धि कर्मचारियों की उन मांगों को शांत करने में विफल रही है। वे तो  सेवानिवृत्ति के बाद एक सुनिश्चित आय की गारंटी चाहते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का तर्क है कि पेंशन पर होने वाला खर्च भविष्य में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध बजट को कम कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए निवेश-आधारित पेंशन प्रणाली अधिक व्यावहारिक है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कर्मचारी इसे अपनी सामाजिक सुरक्षा में कटौती के रूप में देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनके भविष्य की स्थिरता पर सवालिया निशान लग जाते हैं। अर्थशास्त्री दावा करते हैं कि यदि पुरानी पेंशन दी गई तो कुछ राज्य आर्थिक रूप से दिवालिया  हो जाएगें,किंतु सासदों और विधायकों की संख्या  उनके  वेतन भत्तों और पेंशन से देश के सामने आने  वाली आर्थिक चुनौतियों की और ध्यान नही दिया जाता। यह कहीं गणना  नही होती कि इससे देश पर कितना बोझ  पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सैनिकों की भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना इसी वित्तीय पुनर्गठन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है। अग्निवीर योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी सेवा में रखा जाता है। शेष 75 प्रतिशत युवाओं को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उन्हें आजीवन पेंशन या अन्य चिकित्सा सुविधाएं नहीं दी जातीं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का उद्देश्य रक्षा बजट के एक बड़े हिस्से को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वर्तमान में वेतन और पेंशन में चला जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक हथियारों और तकनीक की खरीद में लगाना है। लेकिन इस योजना ने सुरक्षा विशेषज्ञों और युवाओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। आलोचकों का कहना है कि पेंशन के अभाव में सैनिकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है और चार साल बाद बेरोजगार होने का डर युवाओं को इस गौरवशाली पेशे से दूर कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ जहां देश की सुरक्षा और प्रशासनिक सेवा में लगे लोगों के लाभों को सीमित किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर 131वें संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 815 से 850 तक करने का प्रस्ताव है।इसी के साथ नए परीसीमन से विधायकों की भी 2045 सीट बढ़ने की व्यवस्था है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वृद्धि परिसीमन की प्रक्रिया के तहत की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है। हालांकि यह कदम लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से तर्कसंगत लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर  इसके आर्थिक निहितार्थ अत्यधिक गंभीर हैं। सांसदों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ है उनके वेतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भत्तों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और कार्यालय खर्चों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम वर्तमान वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद का वेतन और विभिन्न भत्ते मिलाकर प्रतिमाह एक बड़ी राशि बनती है। वर्ष 2025-26 के संशोधित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सांसद का मूल वेतन लगभग 1.24 लाख रुपये है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (लगभग 70,000 रुपये)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय भत्ता (लगभग 60,000 रुपये) और संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन का दैनिक भत्ता (2,500 रुपये) मिलता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि इन सबको जोड़ दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद पर सीधे तौर पर प्रतिमाह लगभग 2.7 लाख से 3 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें उनके लिए उपलब्ध मुफ्त बिजली (50,000 यूनिट)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी (4,000 किलोलीटर)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">34 मुफ्त हवाई यात्राएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेल यात्राएं और दिल्ली में मिलने वाले महंगे बंगलों का रखरखाव शामिल नहीं है। यदि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल इन सीधे खर्चों के कारण देश पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।विधायकों की सीट बढ़ने से होने वाला  आर्थिक बोझ इसमें शामिल नही किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का अनुमान लगाने के लिए यदि हम 273 नए सांसदों (816 - 543) को आधार मानें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल उनके वेतन और नियमित भत्तों पर ही प्रतिमाह लगभग 7.5 करोड़ से 8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। वार्षिक आधार पर यह आंकड़ा 90 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। लेकिन यह तो केवल हिमशैल का सिरा है। प्रत्येक नए सांसद के लिए लुटियंस दिल्ली जैसे महंगे इलाकों में आवास की व्यवस्था करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके कार्यालयों का निर्माण और उनके साथ तैनात होने वाले सुरक्षा कर्मियों व सहायक कर्मचारियों का वेतन इस खर्च को कई गुना बढ़ा देगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसदों को मिलने वाली आजीवन पेंशन का खर्च भी भविष्य के बजटों पर एक स्थायी बोझ बन जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि जब देश के सैनिकों और आम कर्मचारियों के लिए </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राजकोषीय अनुशासन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन सुधार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की बात की जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही मापदंड जनप्रतिनिधियों पर लागू क्यों नहीं होते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर योजना के माध्यम से करोड़ों रुपये बचाने की कोशिश करने वाली सरकार जब सांसदों की फौज बढ़ाने की तैयारी करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आम नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ एक जवान है जो अपनी जवानी के चार साल देश को देता है और बिना पेंशन के घर लौट आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दूसरी तरफ एक सांसद है जो केवल पांच साल के कार्यकाल के बाद आजीवन पेंशन और सुविधाओं का हकदार बन जाता है। एक बात और जहां कर्मचारी को पेंशन का हकदार बनने के लिए 20 से 25 साल की सेवा अनिवार्य  है,  वहां सांसद या विधायक के लिए ऐसा नही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> एक दिन के लिए सांसद या विधायक  बनने  पर उन्हें पूरी पेंशन मिलती है। सांसद या विधायक जितनी बार चुना जाता है,  उसकी   उ पेंशन में बढ़े कार्यकाल के हिसाब से वृद्धि मिलती है।कोई व्यक्ति  यदि चार बार सांसद  और तीन बार विधायक  बने तो उसे सांसद काल की चार और विधायक काल की तीन वृद्धि पेंशन में जुड़कर  मिलती है। वर्तमान   पंजाब सरकार ने  एक आदेश करने विधायक के लिए सिर्फ  एक पेंशन की व्यवस्था रखी है। ऐसा पूरे देश में क्यों नही हो सकता। सांसद और विधायकों के साथ भी ऐसा ही किया जाना चाहिए।    </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसे विकासशील देश में जहां शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए संसाधनों की भारी कमी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विधायी विस्तार के खर्चों को बहुत सावधानी से तौलने की आवश्यकता है। लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसे इस तरह से लागू किया जाना चाहिए कि यह आम जनता के त्याग और सैनिकों के समर्पण के साथ न्याय करे। यदि सरकार को वास्तव में राजकोषीय घाटे की चिंता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे सांसदों के वेतन-भत्तों में भी कटौती करने और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक राष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक पेंशन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि देश का पैसा सांसदों की सुख-सुविधाओं के बजाय उन लोगों पर खर्च हो जो वास्तव में देश की नींव को मजबूत करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:37:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरिवंश निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपसभापति </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176458/harivansh-elected-unopposed-as-deputy-chairman-of-rajya-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/20260330508l.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सदन की कार्यशैली और राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी है. दिलचस्प यह रहा कि इस अहम मौके पर नरेंद्र मोदी खुद सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव की अहमियत और बढ़ गई.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बिना विपक्षी उम्मीदवार के चुनाव जीतना किसी भी संसदीय प्रक्रिया में एक खास स्थिति होती है. यह या तो राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होता है या फिर सहमति की मजबूरी. इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जब विपक्ष ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया और राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव लगभग तय हो गया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद में बहस के बीच आधी रात को लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश की संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर देर रात तक जोरदार बहस हुई। इसी बीच महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को गुरुवार से लागू कर दिया गया है। इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अधिनियम लागू होने के बावजूद इसका लाभ मौजूदा लोकसभा में महिलाओं को तुरंत नहीं मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था अगली जनगणना के आधार पर होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगी। केंद्रीय कानून मंत्रालय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176456/womens-reservation-act-2023-came-into-force-at-midnight-amid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69e162c77f821-women-reservation-bill-090026691-16x9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश की संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर देर रात तक जोरदार बहस हुई। इसी बीच महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को गुरुवार से लागू कर दिया गया है। इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिनियम लागू होने के बावजूद इसका लाभ मौजूदा लोकसभा में महिलाओं को तुरंत नहीं मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था अगली जनगणना के आधार पर होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगी। केंद्रीय कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला आरक्षण कानून पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तो बिल्कुल ही अजीब है। सितंबर 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' आज से लागू हो गया है, जबकि इसमें किए जाने वाले संशोधनों पर अभी भी बहस चल रही है और उन पर मतदान होगा। मैं तो पूरी तरह से हैरान हूँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, कानून में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा। फिलहाल लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, उनका उद्देश्य इस आरक्षण को वर्ष 2029 से लागू करने का रास्ता तैयार करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:44:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हरिवंश नारायण सिंह की वापसी, राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को उच्च सदन का सदस्य नामित किया है। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था।उन्हें राज्यसभा का सदस्य उस रिक्ति को भरने के लिए नामित किया गया है, जो भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्पन्न हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175795/harivansh-narayan-singh-returns-as-president-murmu-nominates-him-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/s73sdhpw.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को उच्च सदन का सदस्य नामित किया है। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था।उन्हें राज्यसभा का सदस्य उस रिक्ति को भरने के लिए नामित किया गया है, जो भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्पन्न हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3) के अनुसार राष्ट्रपति मनोनीत सदस्यों में से एक सदस्य के सेवानिवृत्त होने से उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित करके प्रसन्न हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">हरिवंश (69) बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। उन्होंने उच्च सदन के उपसभापति के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 22:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>क्या भारतीय राजनीति में अब उम्र की सीमा तय होनी चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल को राज्यसभा के शपथ ग्रहण कक्ष में जो दृश्य दिखाई दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया। </span>85 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय शरद पवार व्हीलचेयर पर बैठकर सदन में पहुंचे। सदन में अचानक सन्नाटा छा गया। दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को अपनी रणनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता और प्रभाव से दिशा देने वाला यह बड़ा नेता उस दिन बेहद कमजोर और थका हुआ दिखाई दे रहा था। शपथ के शब्द बोलते समय उनकी आवाज कांप रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द लड़खड़ा रहे थे और चेहरा थकान से भरा हुआ था। वह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175594/should-there-be-an-age-limit-in-indian-politics-now"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/maxresdefault.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल को राज्यसभा के शपथ ग्रहण कक्ष में जो दृश्य दिखाई दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया। </span>85 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय शरद पवार व्हीलचेयर पर बैठकर सदन में पहुंचे। सदन में अचानक सन्नाटा छा गया। दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को अपनी रणनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता और प्रभाव से दिशा देने वाला यह बड़ा नेता उस दिन बेहद कमजोर और थका हुआ दिखाई दे रहा था। शपथ के शब्द बोलते समय उनकी आवाज कांप रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द लड़खड़ा रहे थे और चेहरा थकान से भरा हुआ था। वह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भारतीय राजनीति के सामने खड़ा एक कठोर और असहज प्रश्न था—क्या सत्ता का मोह इतना बड़ा हो सकता है कि शरीर जवाब दे देने के बाद भी नेता कुर्सी छोड़ने को तैयार न हों</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यही वह क्षण था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने राजनीति में सेवानिवृत्ति की आवश्यकता पर नई बहस खड़ी कर दी। जिस प्रकार सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में एक निश्चित आयु के बाद व्यक्ति को जिम्मेदारी छोड़नी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार राजनीति में भी कोई स्पष्ट सीमा क्यों नहीं होनी चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या देश और राज्यों का भविष्य अनिश्चित काल तक कुछ ही लोगों के हाथों में रहना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या लोकतंत्र का अर्थ केवल यही है कि एक ही पीढ़ी लगातार सत्ता में बनी रहे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति केवल अनुभव का क्षेत्र नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्रियता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित निर्णय और बदलते समय को समझने की क्षमता का भी क्षेत्र है। यदि व्यवस्था में समय पर परिवर्तन नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राजनीति धीरे-धीरे ठहराव का शिकार हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा सच यह है कि उम्र के साथ अनुभव बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शरीर और मन की सीमाएं भी सामने आने लगती हैं। आज की राजनीति पहले जैसी नहीं रही। अब केवल भाषण देना या चुनाव जीतना काफी नहीं। नेता को तकनीक समझनी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं की आकांक्षाएं सुननी होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बदलती अर्थव्यवस्था पर नजर रखनी होती है और तेज फैसले लेने होते हैं। ऐसे समय में यदि कोई नेता शारीरिक रूप से कमजोर हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलने-फिरने में कठिनाई हो या लंबे समय तक बोल न पाता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाएगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल पद पर बने रहना और सक्रिय नेतृत्व करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों अलग बातें हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शरद पवार के मामले में यह सवाल इसलिए गंभीर हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र और देश की राजनीति में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाई है। उनके अनुभव और राजनीतिक कौशल पर कभी संदेह नहीं रहा। लेकिन राज्यसभा में शपथ के दौरान उनकी हालत ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कांपती आवाज और थकी हुई देह देखकर हर किसी के मन में एक ही सवाल उठा—क्या इस अवस्था में वे राज्यसभा में प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वे किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योगों और विकास के मुद्दों पर पहले जैसी सक्रियता दिखा पाएंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जब शरीर जवाब देने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कुर्सी पर बने रहना ताकत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवशता लगने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि राजनीति में भी सेवानिवृत्ति की एक स्पष्ट सीमा तय हो। यदि </span>75 <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष के बाद नेता सक्रिय पद छोड़कर मार्गदर्शक बनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे राजनीति कमजोर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अधिक मजबूत होगी। उनका अनुभव और प्रभाव खत्म नहीं होगा</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे सलाहकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संरक्षक और प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगे। लेकिन नेतृत्व उन लोगों के हाथों में जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके पास ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच और बदलते समय के साथ चलने की क्षमता है। लोकतंत्र की असली ताकत इसी संतुलन में है—जहां अनुभव रास्ता दिखाए और नई पीढ़ी आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश की राजनीति की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई दल कुछ पुराने चेहरों तक सिमट गए हैं। नई सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए विचार और नए नेतृत्व के लिए जगह ही नहीं बची। हजारों युवा कार्यकर्ता वर्षों तक मेहनत करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आगे बढ़ नहीं पाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऊपर की जगह खाली नहीं होती। नतीजा यह होता है कि निराशा बढ़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन जड़ हो जाता है और जनता का भरोसा कमजोर पड़ने लगता है। जब नई पीढ़ी को मौका नहीं मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो युवाओं की समस्याएं कौन समझेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप और बदलती अर्थव्यवस्था को वही पीढ़ी बेहतर समझ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इन्हें खुद जी रही है। इसलिए अब समय है कि नई पीढ़ी के लिए रास्ता खोला जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि यदि कोई नेता स्वस्थ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे राजनीति में बने रहने का अधिकार है। यह बात कुछ हद तक सही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन केवल स्वस्थ होना काफी नहीं। राजनीति में बने रहने का फैसला केवल व्यक्ति की इच्छा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की जरूरत से तय होना चाहिए। यदि हर वरिष्ठ नेता खुद को सक्षम बताकर पद छोड़ने से इंकार करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नई पीढ़ी को अवसर कब मिलेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि कोई भी पद स्थायी नहीं होता। व्यक्ति पद से बड़ा नहीं होता। उसका सम्मान तब और बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह सही समय पर पीछे हटने का साहस दिखाए। कुर्सी छोड़ना हार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई बार सबसे बड़ी जीत होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा में </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सामने आया वह क्षण केवल शरद पवार की निजी अवस्था का दृश्य नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भारतीय राजनीति के लिए एक गहरी चेतावनी बनकर उभरा। उसने साफ संकेत दिया कि जब शरीर जवाब देने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब अंततः कुर्सी भी किसी नेता को सहारा नहीं दे सकती। सच्चा और महान नेता वही होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल सत्ता पर बने रहना नहीं जानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सही समय पर सम्मान के साथ उसे छोड़ने का साहस भी रखता है। आज शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं के सामने यह अवसर है कि वे स्वयं आगे बढ़कर राजनीति में सेवानिवृत्ति की नई परंपरा शुरू करें। यदि वे सम्मानपूर्वक पीछे हटकर नई पीढ़ी के लिए रास्ता खोलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही उनका सबसे बड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे प्रेरक और सबसे ऐतिहासिक योगदान माना जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:53:42 +0530</pubDate>
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