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                <title>Indian Democracy Debate - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Indian Democracy Debate RSS Feed</description>
                
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                <title>असम-बंगाल में जनादेश की ‘चोरी’ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178299/%E2%80%98theft%E2%80%99-of-mandate-in-assam-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/pti04-18-2026-000263b-0_1776846837575_1776846860705_1776848940508.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कांग्रेस में कुछ लोग और अन्य लोग टीएमसी की हार पर खुश हो रहे हैं। उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझने की जरूरत है कि असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के अपने मिशन में भाजपा का एक बड़ा कदम है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "क्षुद्र राजनीति को किनारे रखें, यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है, यह भारत के बारे में है।"पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 100 सीटों की "लूट की है।"राहुल गांधी ने उनके दावे का समर्थन किया था और आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग की मदद से BJP ने असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव की चोरी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 23:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नारी बंधन परिसीमन बिल गिरने पर बीजेपी का विपक्ष पर देश व्यापी विरोध सोची समझी स्क्रिप्ट है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177153/bjps-nationwide-protest-against-the-opposition-on-the-failure-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को बस आरक्षण केशवराम पर धोखा देना था।वह दिया गया पहले से पास बिल को 2024मे नहीं लागू किया गया जब कि विपक्ष बार बार मांग कर रहा था लागू करो पर सरकार सरकार होती है मनमर्जी तो करेगी कर लिया लागू 2024मे नहीं किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु नारा लगाने वाले भूल गये कि देश की नारी शक्ति का पहला हक कांग्रेस के स्व प्रधान राजीव गान्धी ने ही पंचायती राज में तीनों स्तर पर यानि पंचायत से जिला परिषद तक तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिया जो आज भी लागू है। उसमें भाजपा कि किस  तरह पन्द्रह साल की सीमा नहीं लगाया था। वह एक कानुन बन गया और उसीके तर्ज पर बहुत से राज्यों में पचायतीराज  में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया है।तब कांग्रेस महिला विरोधी नहीं विपक्ष नारी विरोधी नहीं था।फिर अब कैसे होगया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस यही किया एक गलत परिसीमन बिल को पास नहीं किया।भाजपा की महिला सांसदों ने कभी भाजपा से संसद विधानसभाओं में जब आरक्षण का बिल कांग्रेस ला ई थी भाजपा ने क्यों नहीं समर्थन किया । क ई बार कांग्रेस की सरकार बिल को लोक सभा में पास करने का प्रयास किया पर हर बार भाजपा ने विरोध किया कारण तो भारत की जनता सब राजनेता जानते हैं।लेकिन भाजपा सच को छिपातीं है महिलाओं के पीछे छिपती है ।और कांग्रेस के द्वारा खींची गई हर लकीर को मिटाने और छोटा करने में विगत बारह साल से लगी हुई है।  पर लकीर मिटा नहीं  पा रही है जितना मिटाने की कोशिश होती है वह लकीर बड़ी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान सरकार जनोपयोगी क ई क ई बिलों को कांग्रेस के समय पास में जो था जनता उसका उपयोग कर रही थी। सरकार रोक लगा दिया सुचना के अधिकार मनरेगा जैसे बिलों पर कैंची चलाया ।तब भाजपा का कोई नेता संगठन सड़क पर नहीं आया जैसा कि महिला परिसीमन बिल को लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। और झूठ भ्रम जनता में फैला रहे हैं। कांग्रेस ने 2012मे महिला बिल को राज्य सभा से पारित करा लिया जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण था पंचायती राज की तरह ही। परन्तु जो नया बिल पास भाजपा ने 2023मे सभी दलों की सहमति से पास करवाया है वह बिल आज भी अस्तित्व में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर वास्तव में भाजपा नारी शक्ति का सम्मान करता है तोउसे देश में लागू कर दे।अगर लागू नहीं कर रहा है तोयह मान लें  भाजपा सरकार का नारी आरक्षण बिल  सड़क का खिलौना बनाकर जनता में तमाशा दिखाने के सिवाय सच से बहुत दूर है।यह एक चुनावी नौटंकी से आगे कुछ नहीं है।अब यहां सवाल हर दल से है । अगर महिला आरक्षण बिल संसद विधानसभाओं में नहीं लागू हो रहा है । तो हर दल क्यों नहीं पार्टी के सम्विधान में यह लिखे की पार्टी  अपने   स्तर पर तैंतीस प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जायेगा वह संसद विधानसभाओं के साथ पार्टी के संगठन में भी दिया जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2022मे यूं पी विधानसभा चुनाव में लड़की हूं लड सकती हूं का नारा प्रियंका-गांधी ने दिया और चालीस प्रतिशत विधानसभा में महिलाओं को टिकट दिया ।परन्तु गजब यूं पी की महिलाएं अपनी ही बहनों को हरा दिया जबकि वह सख्याबल में आबादी की आधीहै चाहती तो कम से कमज्ञतीस प्रतिशत कांग्रेस की महिलाएं विधायक बन गई होती पर महिलाएं भी जातिवादी धरृमवादी पारृटी वाली है तभी तो कांग्रेस की चालिस प्रतिशत महिलाएं चुनाव हार गई मात्र एक महिला जीती अराधना मिश्रा वह भी अपने पिता की सीट राम पुर खास  से।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चालिस प्रतिशत की हार से डर कर सांसद में सभी दलों ने महिलाओं को कम टिकट दिया।किसी दल के पास ताकत नहीं है कि महिलाओं के आरक्षण नियम को पहले पार्टी में बनाये लागू करें। फिर संसद विधानसभा की बात करें हर पार्टी की नियत में खोट है।अभी जो वर्तमान संसद है उसमें सबसे कम संख्या भाजपा  की महिलाएं हैं सबसे ज्यादा तृणमूल की महिला सासद है इसी संख्या से पता चलता भिजवा कितना महिलाओं का सम्मान करती है।आज तक कोई महिला भाजपा का राष्ष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन पाईहैक्या भाजपा प्रेस कान्फ्रेंस करके जनता को बतायेगी कि किस कारण से वह महिलाओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष आज तक नहीं बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक उदाहरण यह भी देख ले 2022मे राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव भाजपा जीत जाती है वह दोबारा की मुख्य मंत्री थी एक मात्र महिला थी भाजपा की फिर भी उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया।  यही नारी शक्ति है ।असली भाजपा का चाल चरित्र चेहरा अलग है।फिर बात चली वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तीन महीने तक बात हर पत्रकार करता रहा लेकिन वहां से भी वसुंधरा राजे को हटाया गया नारी थी तो सम्मान कैसे भाजपि करती बिहार चुनाव को देखकर नीतीश नवीन को जाति का वोट कायस्थ वोट साधने को मोहरा वाला अध्यक्ष बना लिया।इनके पूर्व जो अध्यक्ष थे वह भी मोहरा वाले थे वैसे हर पार्टी में यही परम्परा अध्यक्ष मोहरा वाला ही सही होता तेज होगा तो पार्टी पर कब्जा करके राजनिति की शिखर हो जायेगा फिर जिसने अध्यक्ष बनाया उसी को मारेगा हर पार्टी में मुगल शासक का कानुन न चले तभी मोहरा वाला कमजोर राम का अध्यक्ष या जाति समकरण वाला ही बनाया जाता जिससे जाति का वोट अपने पाले में कर लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल से कहीं न कहीं भाजपा की महिलाएं महिला आरक्षण बिल  का विरोध मेसडक पर है तो कांग्रेस की भी महिला संगठन सड़क पर 2023मे पास बिल को लागू करने के लिए तथा परिसीमन बिल जो गिरा उसके समर्थन में सड़क पर पतृरकार वार्ता कर ली है।18अप्रैल को चुनाव आचार संहिता का उलंघन कश्रते हुए देश के साहब ने गलत महिला संशोधन बिल पर राष्ट्राभिनंदन किया सही बात जनता को नहीं बताया बस एक लट कांग्रेस महिला विरोधी हैं महिलाओं के आरक्षण को संसद में रोक दिया भाजपा नारी सम्मान देना चाहती थी परन्तु वह नहीं हो पाया पर यह नही कहा कि जो बिल 2023मे पास है उसे लागू करने जा रहा हूं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्यों संसदों की सख्या बढ़ाकर आरक्षण देना है क्या नौकरियों में शिक्षा में ऐसा हुआ है क्या पंचायतों में दो तीनों सृतर पर आरक्षण लागू है तो सीटें बढ़ीं है।नहीं तो संसद और विधानसभाओं में क्यों पचास प्रतिशत सीट बढ़ाने के लिए गलत परिसीमन बिल लाया गया।।भाजपा जानती थी यह बिल पास नहीं होगा वह तो बस जनता का एक अहम मूद्दे इरान अमेरिका इजरायल युद्ध की बात जनता में बंगाल तमिलनाडु के चुनाव में न उठे तो जनता को वरगलाने के लिए मुख्य समस्या हटाने के लिए ही। बिल लाया गया थाजोविपक्ष की एक छूटता से विफल होगया देश को बांटने का बिल था गिर गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तव में भाजपा ईमानदार है नारी शक्ति वन्दन को महत।व दे ना चाहती है तो पहले अपनी पारृटी में हर स्तर पर तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे-दे और महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे ।पर ऐसा होंगा नहीं बस चुनाव और वोट के लिए ही नारी सम्मान की बात कही जाती है उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी। यूं पी में उन्नाव हिथरस बेटियों को सम्मान तो दिया नहीं फिर कैसे नारी शक्ति वन्दन बिल पर घड़ियाली आंसू गिरा रही है भाजपा।असल में भारत की जनता के आंखों पर गांधारी की तरह पट्टी बंधी हुई है वह सच को देख नहीं पा रही बस जो सुनती है वहीं सच मान कर पूजा कर रही है शबृद बोलने वालों का लोकतंत्र में सत्ता के लिए घबियिली आंसू ब आने वाले का।देश में इरान अमेरिका युद्ध पर राष्ट्र के नाम सम्बोधन नहीं हुआ नहीं संसद का विशेष सत्र बुलाया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 21:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या भारतीय राजनीति में अब उम्र की सीमा तय होनी चाहिए?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल को राज्यसभा के शपथ ग्रहण कक्ष में जो दृश्य दिखाई दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया। </span>85 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय शरद पवार व्हीलचेयर पर बैठकर सदन में पहुंचे। सदन में अचानक सन्नाटा छा गया। दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को अपनी रणनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता और प्रभाव से दिशा देने वाला यह बड़ा नेता उस दिन बेहद कमजोर और थका हुआ दिखाई दे रहा था। शपथ के शब्द बोलते समय उनकी आवाज कांप रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द लड़खड़ा रहे थे और चेहरा थकान से भरा हुआ था। वह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175594/should-there-be-an-age-limit-in-indian-politics-now"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/maxresdefault.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल को राज्यसभा के शपथ ग्रहण कक्ष में जो दृश्य दिखाई दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया। </span>85 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय शरद पवार व्हीलचेयर पर बैठकर सदन में पहुंचे। सदन में अचानक सन्नाटा छा गया। दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को अपनी रणनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता और प्रभाव से दिशा देने वाला यह बड़ा नेता उस दिन बेहद कमजोर और थका हुआ दिखाई दे रहा था। शपथ के शब्द बोलते समय उनकी आवाज कांप रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द लड़खड़ा रहे थे और चेहरा थकान से भरा हुआ था। वह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भारतीय राजनीति के सामने खड़ा एक कठोर और असहज प्रश्न था—क्या सत्ता का मोह इतना बड़ा हो सकता है कि शरीर जवाब दे देने के बाद भी नेता कुर्सी छोड़ने को तैयार न हों</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यही वह क्षण था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने राजनीति में सेवानिवृत्ति की आवश्यकता पर नई बहस खड़ी कर दी। जिस प्रकार सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में एक निश्चित आयु के बाद व्यक्ति को जिम्मेदारी छोड़नी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार राजनीति में भी कोई स्पष्ट सीमा क्यों नहीं होनी चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या देश और राज्यों का भविष्य अनिश्चित काल तक कुछ ही लोगों के हाथों में रहना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या लोकतंत्र का अर्थ केवल यही है कि एक ही पीढ़ी लगातार सत्ता में बनी रहे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति केवल अनुभव का क्षेत्र नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्रियता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित निर्णय और बदलते समय को समझने की क्षमता का भी क्षेत्र है। यदि व्यवस्था में समय पर परिवर्तन नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राजनीति धीरे-धीरे ठहराव का शिकार हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा सच यह है कि उम्र के साथ अनुभव बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शरीर और मन की सीमाएं भी सामने आने लगती हैं। आज की राजनीति पहले जैसी नहीं रही। अब केवल भाषण देना या चुनाव जीतना काफी नहीं। नेता को तकनीक समझनी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं की आकांक्षाएं सुननी होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बदलती अर्थव्यवस्था पर नजर रखनी होती है और तेज फैसले लेने होते हैं। ऐसे समय में यदि कोई नेता शारीरिक रूप से कमजोर हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलने-फिरने में कठिनाई हो या लंबे समय तक बोल न पाता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाएगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल पद पर बने रहना और सक्रिय नेतृत्व करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों अलग बातें हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शरद पवार के मामले में यह सवाल इसलिए गंभीर हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र और देश की राजनीति में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाई है। उनके अनुभव और राजनीतिक कौशल पर कभी संदेह नहीं रहा। लेकिन राज्यसभा में शपथ के दौरान उनकी हालत ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कांपती आवाज और थकी हुई देह देखकर हर किसी के मन में एक ही सवाल उठा—क्या इस अवस्था में वे राज्यसभा में प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वे किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योगों और विकास के मुद्दों पर पहले जैसी सक्रियता दिखा पाएंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जब शरीर जवाब देने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कुर्सी पर बने रहना ताकत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवशता लगने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि राजनीति में भी सेवानिवृत्ति की एक स्पष्ट सीमा तय हो। यदि </span>75 <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष के बाद नेता सक्रिय पद छोड़कर मार्गदर्शक बनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे राजनीति कमजोर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अधिक मजबूत होगी। उनका अनुभव और प्रभाव खत्म नहीं होगा</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे सलाहकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संरक्षक और प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगे। लेकिन नेतृत्व उन लोगों के हाथों में जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके पास ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सोच और बदलते समय के साथ चलने की क्षमता है। लोकतंत्र की असली ताकत इसी संतुलन में है—जहां अनुभव रास्ता दिखाए और नई पीढ़ी आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश की राजनीति की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई दल कुछ पुराने चेहरों तक सिमट गए हैं। नई सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए विचार और नए नेतृत्व के लिए जगह ही नहीं बची। हजारों युवा कार्यकर्ता वर्षों तक मेहनत करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आगे बढ़ नहीं पाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऊपर की जगह खाली नहीं होती। नतीजा यह होता है कि निराशा बढ़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन जड़ हो जाता है और जनता का भरोसा कमजोर पड़ने लगता है। जब नई पीढ़ी को मौका नहीं मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो युवाओं की समस्याएं कौन समझेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप और बदलती अर्थव्यवस्था को वही पीढ़ी बेहतर समझ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इन्हें खुद जी रही है। इसलिए अब समय है कि नई पीढ़ी के लिए रास्ता खोला जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि यदि कोई नेता स्वस्थ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे राजनीति में बने रहने का अधिकार है। यह बात कुछ हद तक सही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन केवल स्वस्थ होना काफी नहीं। राजनीति में बने रहने का फैसला केवल व्यक्ति की इच्छा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की जरूरत से तय होना चाहिए। यदि हर वरिष्ठ नेता खुद को सक्षम बताकर पद छोड़ने से इंकार करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नई पीढ़ी को अवसर कब मिलेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि कोई भी पद स्थायी नहीं होता। व्यक्ति पद से बड़ा नहीं होता। उसका सम्मान तब और बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह सही समय पर पीछे हटने का साहस दिखाए। कुर्सी छोड़ना हार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई बार सबसे बड़ी जीत होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा में </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सामने आया वह क्षण केवल शरद पवार की निजी अवस्था का दृश्य नहीं था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भारतीय राजनीति के लिए एक गहरी चेतावनी बनकर उभरा। उसने साफ संकेत दिया कि जब शरीर जवाब देने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब अंततः कुर्सी भी किसी नेता को सहारा नहीं दे सकती। सच्चा और महान नेता वही होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल सत्ता पर बने रहना नहीं जानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सही समय पर सम्मान के साथ उसे छोड़ने का साहस भी रखता है। आज शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं के सामने यह अवसर है कि वे स्वयं आगे बढ़कर राजनीति में सेवानिवृत्ति की नई परंपरा शुरू करें। यदि वे सम्मानपूर्वक पीछे हटकर नई पीढ़ी के लिए रास्ता खोलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही उनका सबसे बड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे प्रेरक और सबसे ऐतिहासिक योगदान माना जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:53:42 +0530</pubDate>
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