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                <title>Oil Supply Route - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Oil Supply Route RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज : सुरक्षा पहले, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183610/hormuz-security-first-but-challenges-are-no-less"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को सलाह दी है कि अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती न की जाए। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की उस नीति का संकेत है जिसमें विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इस निर्णय के दूरगामी आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। भारत भी अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आयात करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण होर्मुज क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाज हमलों का शिकार हुए हैं। कुछ घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए और एक भारतीय सीफेरर की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद समुद्री प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भारतीय नाविकों की नई तैनाती रोकने की सलाह जारी की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि परिस्थितियों के सामान्य होने तक एहतियाती कदम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत दुनिया में सबसे अधिक समुद्री कर्मी उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। लाखों भारतीय विभिन्न विदेशी जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में होर्मुज मार्ग पर तैनाती रुकने से अनेक नाविकों की नई नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। जहाजरानी कंपनियों को वैकल्पिक क्रू की व्यवस्था करनी पड़ेगी। कुछ भारतीय नाविकों की आय प्रभावित हो सकती है। समुद्री रोजगार बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल यह आदेश केवल भारतीय नाविकों की तैनाती से जुड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह बाधित होता है तो भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। इससे महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। भारत पिछले कुछ वर्षों से तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे कदम भविष्य के संकटों से निपटने में मदद कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह फैसला उचित है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय दृष्टि से देखें तो यह निर्णय उचित प्रतीत होता है। किसी भी आर्थिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण नागरिकों का जीवन है। जब किसी क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति हो और व्यापारिक जहाज लगातार निशाने पर हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सरकार का पहला दायित्व अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। हालांकि दूसरी ओर यह भी सच है कि लंबे समय तक प्रतिबंध रहने पर भारतीय समुद्री उद्योग और नाविकों के रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार को सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित नाविकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे की राह- भारत को केवल अस्थायी प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं— समुद्री सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना। संकटग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नाविकों के लिए बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना। प्रभावित नाविकों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता देना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा आयात के स्रोतों में और विविधता लाना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री जोखिमों की निगरानी के लिए आधुनिक तंत्र विकसित करना। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से एक सतर्क और जिम्मेदार कदम है। यह बताता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। हालांकि इसके आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि क्षेत्रीय तनाव जल्द कम होता है तो यह प्रतिबंध अस्थायी साबित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो भारत को समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों के रोजगार के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:56:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>युद्ध के मुहाने से लौटी दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया कभी-कभी ऐसे मोड़ों पर आ खड़ी होती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक निर्णय पूरी सभ्यता के भविष्य को बदल सकता है। हाल के घटनाक्रम में यही स्थिति तब बनी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया। वातावरण इतना तनावपूर्ण था कि किसी भी क्षण युद्ध का विस्तार एक बड़े विनाश में बदल सकता था। अमेरिका की सेना और उसके रक्षा तंत्र पूरी तरह तैयार थे और संकेत का इंतजार कर रहे थे कि कब हमला शुरू किया जाए। दूसरी ओर ईरान भी अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार बैठा था। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175592/the-world-returned-from-the-edge-of-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया कभी-कभी ऐसे मोड़ों पर आ खड़ी होती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक निर्णय पूरी सभ्यता के भविष्य को बदल सकता है। हाल के घटनाक्रम में यही स्थिति तब बनी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया। वातावरण इतना तनावपूर्ण था कि किसी भी क्षण युद्ध का विस्तार एक बड़े विनाश में बदल सकता था। अमेरिका की सेना और उसके रक्षा तंत्र पूरी तरह तैयार थे और संकेत का इंतजार कर रहे थे कि कब हमला शुरू किया जाए। दूसरी ओर ईरान भी अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार बैठा था। यह केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रह गया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे क्षेत्र और विश्व व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुका था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए बड़े पैमाने पर हमले की चेतावनी दे दी थी। यदि यह हमला होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँच सकता था। इसके परिणामस्वरूप ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे मध्यपूर्व को युद्ध की आग में झोंक सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम में आम लोगों की स्थिति सबसे अधिक भयावह थी। ईरान के भीतर लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में निकलने लगे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि खाड़ी क्षेत्र के देश भी संभावित हमलों से बचने की तैयारी कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेजी से चल रहे थे। कई देशों ने इस संकट को टालने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन प्रयासों का उद्देश्य था कि किसी तरह दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहे और युद्ध टल सके। ईरान की ओर से एक प्रस्ताव सामने आया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई शर्तें रखी गई थीं। शुरू में इस प्रस्ताव को स्वीकार्य नहीं माना गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बातचीत की प्रक्रिया जारी रही। धीरे-धीरे यह स्पष्ट होने लगा कि दोनों पक्ष युद्ध से बचना चाहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही सार्वजनिक रूप से वे कठोर रुख अपनाए हुए हों।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद अनिश्चित और उलझी हुई थी। अमेरिका के भीतर भी यह स्पष्ट नहीं था कि अंतिम निर्णय क्या होगा। स्वयं उसके नेतृत्व के करीबी लोगों को भी यह अंदाजा नहीं था कि अगला कदम क्या होगा। एक ओर कठोर बयान दिए जा रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर बातचीत के रास्ते खुले रखे जा रहे थे। यह द्वंद्व इस बात को दर्शाता है कि आधुनिक राजनीति में शक्ति और कूटनीति दोनों साथ-साथ चलते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के भीतर भी निर्णय लेने की प्रक्रिया जटिल थी। वहाँ की सत्ता संरचना में अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के हाथ में होता है। इस कारण अंतिम सहमति मिलने में समय लगा। लेकिन जब अंततः समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिला</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो बातचीत ने तेजी पकड़ ली। बताया जाता है कि यह निर्णय आसान नहीं था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें सैन्य नेतृत्व और अन्य शक्तिशाली संस्थाओं को भी सहमत करना पड़ा। इसके बावजूद यह कदम उठाया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस बात का संकेत है कि युद्ध की कीमत दोनों पक्ष समझ रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः जो समझौता सामने आया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह स्थायी शांति नहीं बल्कि अस्थायी विराम था। दोनों पक्षों ने कुछ समय के लिए संघर्ष रोकने पर सहमति जताई। इस समझौते के तहत समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और आगे की बातचीत जारी रखने का रास्ता बनाया गया। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इस मार्ग से विश्व का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति पर निर्भर करता है। यदि यह बंद रहता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालाँकि यह समझौता होने के बाद भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई। कई जगहों पर संघर्ष जारी रहने की खबरें सामने आईं और इस बात को लेकर भी मतभेद रहे कि समझौते की शर्तें क्या हैं और उनका पालन कैसे किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न कि स्थायी समाधान। दोनों पक्षों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर अभी भी गहरे मतभेद हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे परमाणु कार्यक्रम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीति से भी लड़े जाते हैं। कई बार पर्दे के पीछे होने वाली बातचीत ही युद्ध को टाल देती है। इस मामले में भी अंतिम क्षणों में हुई बातचीत ने एक बड़े विनाश को रोक दिया। यदि यह बातचीत विफल हो जाती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस संकट में कई देशों ने सक्रिय भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि आज की दुनिया में कोई भी बड़ा संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव वैश्विक होता है और उसे सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होता है। इसी सहयोग ने इस बार भी युद्ध को टालने में मदद की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह शांति स्थायी होगी। इतिहास बताता है कि अस्थायी समझौते अक्सर स्थायी समाधान में बदलने में सफल नहीं होते। जब तक मूल कारणों का समाधान नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक संघर्ष की संभावना बनी रहती है। इस मामले में भी कई ऐसे मुद्दे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका समाधान अभी बाकी है। यदि इन पर सहमति नहीं बनती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में फिर से तनाव बढ़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंत में यह कहा जा सकता है कि यह घटना केवल एक राजनीतिक या सैन्य घटनाक्रम नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह मानवता के लिए एक चेतावनी भी है। यह दिखाती है कि दुनिया कितनी तेजी से विनाश के करीब पहुँच सकती है और किस तरह अंतिम क्षणों में लिया गया एक निर्णय सब कुछ बदल सकता है। यह भी स्पष्ट होता है कि शांति केवल शक्ति से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संवाद और समझ से संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी गंभीर क्यों न हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि बातचीत के रास्ते खुले रहें तो विनाश को टाला जा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष अपने मतभेदों को समझदारी से सुलझाने की इच्छा रखें। यही इस घटना का सबसे बड़ा संदेश है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:48:18 +0530</pubDate>
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