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                <title>High Court Bail Order - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>High Court Bail Order RSS Feed</description>
                
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                <title>'फॉर्च्युनर के लिए महिला की जान ले ली और  आरोपी पति को जमानत दे दी'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दहेज के लिए पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पति को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने तथ्यों को पर गौर नहीं किया और सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई.</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले कुछ सालों में दहेज की वजह से शादीशुदा महिलाओं के साथ क्रूरता, हत्या और आत्महत्या जैसे मामलों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178549/woman-killed-for-fortuner-and-accused-husband-granted-bail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images245.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दहेज के लिए पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पति को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने तथ्यों को पर गौर नहीं किया और सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई.</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले कुछ सालों में दहेज की वजह से शादीशुदा महिलाओं के साथ क्रूरता, हत्या और आत्महत्या जैसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि खासतौर पर ऐसे मामले उत्तर प्रदेश में देखे गए हैं. कोर्ट ने कहा कि 2023 के डेटा के अनुसार दुनियाभर में 6,156 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 2,122 उत्तर प्रदेश और 1,143 बिहार के हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 'हमें यह देखकर अत्यंत दुख हुआ कि हाईकोर्ट ने दहेज हत्या जैसे संगीन अपराध में आरोपी को जमानत देते वक्त तथ्यों पर गौर नहीं किया. हमारा मानना है कि कोर्ट ने अभियुक्तों के पक्ष में अपने विवेक का प्रयोग करने में घोर त्रुटि की है.' कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के साथ दहेज को लेकर बढ़ती क्रूरता को दर्शाता है.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला साल 2024 का है, जब दहेज के लिए गाजियाबाद में एक महिला की हत्या कर दी गई थी. महिला की शादी फरवरी, 2019 में प्रिंस चौधरी नाम के शख्स से हुई थी. महिला के पिता ने एफआईआर में बताया कि उन्होंने शादी में 30 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें एक आई20 कार और 10 लाख रुपये कैश शामिल हैं. कार एक एक्सीडेंट में डैमेज हो गई थी, जिसके बाद महिला का पति और ससुराल वाले एक फॉर्च्युनर कार और 10 लाख रुपये की डिमांड करने लगे.</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार जब ये मांग पूरी नहीं हुईं तो ससुरालवालों ने महिला का मारना शुरू कर दिया, उसको मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. बाद में महिला के पिता ने 10 लाख रुपये की डिमांड पूरी कर दी. उन्होंने पति के रिश्तेदार के अकाउंट में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए और अलग-अलग मौकों पर 5 लाख रुपये कैश भी दिया. फिर भी ससुराल वाले महिला के साथ मारपीट करते रहे.</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार 11 जुलाई, 2024 को सुबह 7 बजे महिला ने रोते हुए पिता को फोन किया और बताया कि ससुराल में उसके साथ बहुत मारपीट हुई और उसको गला घोंटकर या फांसी लगाकर मारने की धमकी दी जा रही है. कुछ घंटे बाद महिला के घरवालों को एक रिश्तेदार ने फोन करके बताया कि उसको गला घोंटकर फांसी लगा दी गई है. जब महिला के पिता ससुराल पहुंचे तो वह वहां नहीं थी, उसको हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां पता चला कि वह मर चुकी है.</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे के अगले ही दिन शिकायत दर्ज कर दी गई, जिसमें प्रिंस सहित 8 घरवालों को आरोपी बनाया गया. जांच के बाद प्रिंस और उसके माता पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनयम के तहत चार्जशीट दाखिल हुई.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:12:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>देशद्रोह मामले में रामपाल को राहत: हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की स्वीकार, 2014 में दर्ज हुआ था केस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>हिसार के बरवाला स्थित कराैंथा आश्रम में 2014 में हुई उपद्रव और हिंसा के मामले में आश्रम संचालक रामपाल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस जीएस गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह समेत अन्य गंभीर धाराओं वाले मामले में नियमित जमानत याचिका को शर्तों के साथ स्वीकार कर लिया है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।</p><p style="text-align:justify;">18 नवंबर 2014 को थाना बरवाला (हिसार) में एफआईआर नंबर 428 दर्ज हुई थी। उस समय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में भारी बवाल हुआ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175580/relief-to-rampal-in-treason-case-high-court-accepts-bail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/sant-rampal-1775638842502.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>हिसार के बरवाला स्थित कराैंथा आश्रम में 2014 में हुई उपद्रव और हिंसा के मामले में आश्रम संचालक रामपाल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस जीएस गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह समेत अन्य गंभीर धाराओं वाले मामले में नियमित जमानत याचिका को शर्तों के साथ स्वीकार कर लिया है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।</p><p style="text-align:justify;">18 नवंबर 2014 को थाना बरवाला (हिसार) में एफआईआर नंबर 428 दर्ज हुई थी। उस समय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में भारी बवाल हुआ था। इस घटना में आश्रम के छह अनुयायियों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे।</p><p style="text-align:justify;">आरोप है कि आश्रम में मौजूद अनुयायियों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था और पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली गई थी। इस पूरे प्रकरण में रामपाल के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, गैरकानूनी रूप से लोगों को बंधक बनाना और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।</p><p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मामले में अब तक करीब 450 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में लंबी न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए नियमित जमानत दी जानी चाहिए।</p><p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए रामपाल को नियमित जमानत देने का फैसला सुनाया। हालांकि अदालत ने जमानत कुछ शर्तों के साथ मंजूर की है, जिनका विवरण विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:13:54 +0530</pubDate>
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