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                <title>भारतीय संस्कृति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारतीय संस्कृति RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत के विकास का अर्थशास्त्रीय दृष्टिकोण, कुछ भी असंभव नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नेपोलियन का एक बड़ा सूत्र वाक्य था कुछ भी असंभव नहीं है। बिस्मार्क जर्मनी के एक ऐसे सम्राट रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है की उनके हाथों में दो गेंद तथा तीन गेंदें हवा में होती थी, यूरोप का जादूगर भी कहलाता था। पूर्व से ही समुद्रगुप्त ,कनिष्क, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, शेरशाह सूरी जैसे शासकों का अदम्य आत्मविश्वास एवं संघर्ष करने की क्षमता के फल स्वरुप ही भारत आज इस स्वरूप में विद्यमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिंदगी का कैनवास जन्म से लेकर  जिंदगी के अवसान तक समुद्र की तरह विराट और गहराई लिए हुए होता है। जीवन में वयक्तिक,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183675/economic-view-of-indias-development-nothing-is-impossible"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नेपोलियन का एक बड़ा सूत्र वाक्य था कुछ भी असंभव नहीं है। बिस्मार्क जर्मनी के एक ऐसे सम्राट रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है की उनके हाथों में दो गेंद तथा तीन गेंदें हवा में होती थी, यूरोप का जादूगर भी कहलाता था। पूर्व से ही समुद्रगुप्त ,कनिष्क, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, शेरशाह सूरी जैसे शासकों का अदम्य आत्मविश्वास एवं संघर्ष करने की क्षमता के फल स्वरुप ही भारत आज इस स्वरूप में विद्यमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिंदगी का कैनवास जन्म से लेकर  जिंदगी के अवसान तक समुद्र की तरह विराट और गहराई लिए हुए होता है। जीवन में वयक्तिक, पारिवारिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक विकास की संभावनाओं के साथ मनुष्य अपना जीवन प्रारंभ कर विकास प्रगति तथा ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है,बशर्ते उसके व्यक्तित्व में जीवन के प्रति जीजिविषा, संघर्ष करने की क्षमता, अनंत आत्म विश्वास और संयम के घटक मौजूद हो। ऐतिहासिक तौर पर भारतीय विकास सांस्कृतिक संरचना एवं संस्कार के मूलभूत तत्वों को लेकर दुनिया में अभूतपूर्व रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भी भारतवर्ष सभ्यता से लेकर संस्कृति की प्रकृति के मामले में वैभवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं। विकास और प्रगति के सोपान को कोई एक दिन वर्ष अथवा दशक में रेखांकित नहीं किया जा सकता, यह एक निरंतर, सतत एवं समय के साथ चलने वाली क्रिया की प्रतिक्रिया है। और प्रकृति सभ्यता तथा मानव जीवन में परिवर्तन एक अकाट्य सत्य और शाश्वत अभिक्रिया है। व्यक्ति के जीवन तथा समाज या देश में विकास के संदर्भ में एवं घटकों को प्रारंभ से आदमी का धन उपार्जन, गरीबी भुखमरी से लड़ाई भूतकाल की कुरीतियों की विडंबना से संघर्ष का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सब से समाज की प्रगति और विकास में राजाओं, सम्राटों की कूटनीति ,राजनीति सर्वोपरि रही है इतिहास से लेकर अब तक मनुष्य देश और विश्व के विकास में राजनैतिक नीति निर्देशक तत्व ही देश को बलवान,शक्तिहीन,भौगोलिक रूप से बड़ा या छोटा बनाते आए हैं। किसी भी राष्ट्र के राजा, सम्राट या राष्ट्र प्रमुख की अपनी क्षमता ,शक्ति, ऊर्जा और उसके विवेक से उस राष्ट्र की प्रगति विशाल या न्यूनतम होती देखी गई है। भूतकाल में कई संघर्षशील एवं उत्साह से लबरेज यात्रियों के वृतांत हमारी नजरों में आए हैं यथा कोलंबस और वास्कोडिगामा जैसे अत्यंत ऊर्जावान संघर्षशील और साहसिक यात्रियों द्वारा लगभग नामुमकिन रास्तों की खोज कर एक मिसाल कायम की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्रीय दृष्टिकोण से भी किसी भी राष्ट्र में सदैव विकास वैभव और आर्थिक तंत्र को मजबूत करने की संभावनाएं अवस्थित रहती हैं। भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए भारत में गरीबी, भुखमरी ,बाढ़ तथा अन्य विभीषिका सदैव आती जाती रहती हैं। विशाल जनसंख्या के होने के कारण भारत में ही भारत की बड़ी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है और केवल भारत के कुछ नागरिकों को ही सारी जीवन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, बाकी लोग इन सुविधाओं से वंचित भी हैं। हमारा देश स्वतंत्रता के बाद से ही आवाज की कमी भूख गरीबी भ्रष्टाचार काला धन हवाला कुपोषण बेरोजगारी की बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की विशाल जनसंख्या के बावजूद ऐतिहासिक तौर पर देश सांस्कृतिक वैचारिक और संस्कारी ग्रुप से सदैव समृद्ध रहा है और धार्मिक रूप से भी देश में ज्ञान की जड़े बहुत गहराई तक हैं। भारत को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने के लिए वेद, पुराण, उपनिषद, गीता ,रामायण ,महाभारत महा ग्रंथों की पृष्ठभूमि बड़ी ही शक्तिशाली है। देश में अनेक साधु संत ज्ञानी जिनमें मोहम्मद मूसा कबीर, रैदास, नामदेव, तुकाराम चैतन्य, तुलसीदास शंकरदेव जैसे महापुरुषों ने देश के सांस्कृतिक आध्यात्मिक विकास मैं अभूतपूर्व योगदान दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अनेक विदेशी आक्रमणों को झेल कर उन्हें आत्मसात किया है किंतु हमारी संस्कृत पाली एवं प्राकृत भाषा अन्य भाषाओं के साथ आज भी समृद्ध है। भारत में अनेक भाषा क्षेत्र एवं बोलियां हैं किंतु हिंदी, पंजाबी, गुजराती, बांग्ला, मराठी ,असमिया भाषाएं उसी तरह पल्लवित पुष्पित हो रही हैं जैसे की संस्कृत और प्राकृत पाली भाषा होती रही है। भारत में स्वाधीनता के बाद विकास के प्रगति के पथ पर वैज्ञानिक क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया और पृथ्वी से लेकर नभ तक हर क्षेत्र में मानव की अतीव उत्कंठा ,जीजिविषा के कारण हमने चांद पर भी अपने वायुयान भेजें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के नागरिकों की भौतिकवादी सुविधा के लिए भी हमने वतानुकुलित यंत्र ,वायुयान तेज चलने वाली ट्रेनें और वायुमंडल में अनेक ऐसे तथ्यों को जो आज तक छुपे हुए थे उजागर कर अपने महत्व के लिए इसका उपयोग करना शुरू किया है। यह कहावत आशाओं पर आकाश टिका हुआ है और आकाश का कोई अंत नहीं यानी मनुष्य की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है मनुष्य पर सही प्रतीत होती है।इसी तरह प्रगति और विकास का भी कोई अंत या अनंत नहीं है। भारत देश में वैश्विक स्तर पर राजनैतिक सामाजिक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर काफी प्रगति की एवं विश्व में योग अध्यात्म दर्शन का लोहा भी मनवाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मनुष्य की अभिलाषा का कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है, मनुष्य मूल रूप से अत्यंत महत्वकांक्षी,लोलुप एवं इच्छाओं का दास हुआ करता है, ऐसे में पूर्व में किए गए कार्यों को निरंतर सुधार कर उसे नए रूप में प्राप्त करना मनुष्य की अभिलाषा हो सकती है,पर इसके लिए अथक मेहनत संघर्ष आत्मविश्वास एवं संयम की आवश्यकता होगी तभी जाकर हम अपने नए-नए लक्ष्यों को विकास तथा प्रगति के पैमाने पर टटोलकर आगे बढ़ा सकते हैं। पर लक्ष्य की प्राप्ति के साधन जरूर सच्चे ,पवित्र और मानव कल्याण की ओर अग्रेषित होने चाहिए, तब ही विकास प्रगति चाहे वह आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक अथवा वैज्ञानिक ही क्यों ना हो सफल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन जीने की ऐसी शैली है जिसमें समस्त सृष्टि के प्रति आत्मीयता, करुणा, सह-अस्तित्व और समरसता का भाव निहित है। आज जब दुनिया स्वार्थ, हिंसा, युद्ध, आर्थिक असमानता और सामाजिक विघटन जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब यह भारतीय जीवन-दर्शन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मनुष्य की महानता उसके धन के परिमाण से नहीं,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182700/global-perception-and-sentiment-of-vasudhaiva-kutumbakam-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन जीने की ऐसी शैली है जिसमें समस्त सृष्टि के प्रति आत्मीयता, करुणा, सह-अस्तित्व और समरसता का भाव निहित है। आज जब दुनिया स्वार्थ, हिंसा, युद्ध, आर्थिक असमानता और सामाजिक विघटन जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब यह भारतीय जीवन-दर्शन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मनुष्य की महानता उसके धन के परिमाण से नहीं, बल्कि उसके हृदय की विशालता से आँकी जाती है। किसी धनी व्यक्ति द्वारा अपनी विपुल संपत्ति का थोड़ा-सा भाग दान करना निश्चित रूप से प्रशंसनीय है, किंतु उससे कहीं अधिक महान वह व्यक्ति है, जिसके पास सीमित संसाधन होने के बावजूद वह अपनी आवश्यकताओं में कटौती कर किसी जरूरतमंद की सहायता करता है। यही वास्तविक परोपकार है। संत कबीर ने कहा है वृक्ष कबहुँ नहीं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर, अर्थात प्रकृति का प्रत्येक तत्व दूसरों के लिए जीना सिखाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जियो और जीने दो का सिद्धांत तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना जिस समाज में सशक्त होती है, उस समाज की प्रगति को कोई रोक नहीं सकता। ऐसे समाज में विश्वास, सहयोग, नैतिकता और संवेदनशीलता का वातावरण निर्मित होता है। महात्मा गांधी का कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि स्वयं को पाने का सर्वोत्तम तरीका है कि स्वयं को दूसरों की सेवा में खो दिया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मनुष्य का जीवन उत्साह, संघर्ष और निरंतर विकास की यात्रा है। जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक है और विकास की संभावनाएँ भी परिवर्तन के साथ ही जन्म लेती हैं। जो व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज और मानवता के कल्याण के लिए जीता है, वही जीवन की वास्तविक सार्थकता को प्राप्त करता है। स्वामी विवेकानंद का यह प्रेरक संदेश प्रत्येक व्यक्ति के लिए मार्गदर्शक है— उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">शास्त्रों में पुनर्जन्म की अवधारणा का विस्तार से वर्णन मिलता है। अनेक लोग यह मानते हैं कि इस जन्म के शुभ कर्म अगले जन्म को श्रेष्ठ बनाते हैं। यह आस्था भारतीय अध्यात्म का महत्वपूर्ण पक्ष है। किंतु यदि दार्शनिक दृष्टि से विचार करें तो वर्तमान जीवन ही हमारे हाथ में उपलब्ध सबसे बड़ा सत्य है। भविष्य या अगले जन्म की कल्पनाओं में वर्तमान के कर्तव्यों की उपेक्षा करना उचित नहीं कहा जा सकता। इसलिए आवश्यक है कि हम इसी जीवन को उत्कृष्ट बनाएं, इसी जीवन में मानवता के लिए उपयोगी कार्य करें और समाज के लिए ऐसी विरासत छोड़ जाएँ, जो आने वाली पीढ़ियों का मार्ग आलोकित करे।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन के उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकते हैं। कोई आर्थिक समृद्धि चाहता है, कोई राजनीति में प्रतिष्ठा, कोई विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धि, कोई साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा या व्यवसाय में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहता है। लक्ष्य चाहे जो भी हो, उसकी प्राप्ति के लिए अपनाए गए साधनों की शुद्धता ही व्यक्ति के चरित्र का वास्तविक परिचय देती है। महात्मा गांधी का यह विचार सदैव स्मरणीय है साध्य जितना पवित्र हो, साधन भी उतने ही पवित्र होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मनुष्य को अपने जीवन में साहस, संयम, आत्मविश्वास, अनुशासन और तपस्या के साथ आगे बढ़ना चाहिए। असफलता से घबराने के स्थान पर उसे सीख के रूप में स्वीकार करना चाहिए। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे कि सपने वे नहीं होते जो सोते समय आते हैं, सपने वे होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। यही स्वप्न जब कठोर परिश्रम और सकारात्मक चिंतन से जुड़ते हैं, तब वे समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानवीय संवेदनाएँ ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ बनाती हैं। यदि जीवन केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं तक सीमित रह जाए तो उसकी सार्थकता अधूरी रह जाती है। सच्चा जीवन वही है जो अपने तन, मन और धन का कुछ अंश समाज के वंचित, पीड़ित और असहाय वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर सके। गौतम बुद्ध ने कहा था— हजारों दीपक एक दीपक से जल सकते हैं, फिर भी उस दीपक का प्रकाश कम नहीं होता। ठीक उसी प्रकार दूसरों के जीवन में आशा का प्रकाश फैलाने से हमारा जीवन और अधिक प्रकाशित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक चिंतकों ने जीवन को रंगमंच की संज्ञा दी है। हम सभी विभिन्न भूमिकाएँ निभाते हुए अपने जीवन का अभिनय करते हैं। किंतु इन भूमिकाओं की सफलता हमारे पद, प्रतिष्ठा या वैभव से नहीं, बल्कि हमारी सच्चाई, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय व्यवहार से निर्धारित होती है। यही गुण व्यक्ति को समाज में स्थायी सम्मान दिलाते हैं। सफलता और असफलता जीवन के दो अविभाज्य पक्ष हैं। जो व्यक्ति सफलता में विनम्र और असफलता में धैर्यवान रहता है, वही वास्तव में परिपक्व व्यक्तित्व का स्वामी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोभ, लालच, अहंकार और असीमित इच्छाएँ मनुष्य को भीतर से खोखला बना देती हैं, जबकि संतोष, संयम और नैतिकता उसे आत्मिक समृद्धि प्रदान करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि आर्थिक उन्नति का प्रयास छोड़ दिया जाए। आवश्यकता इस बात की है कि आध्यात्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। यही संतुलित दृष्टिकोण एक स्वस्थ समाज का निर्माण करता है। जीवन का प्रत्येक क्षण परिवर्तनशील है। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। किंतु परिवर्तन का अर्थ भाग्यवाद नहीं है। भाग्य और कर्म दोनों समानांतर चलने वाली प्रक्रियाएँ हैं। भाग्य परिस्थितियाँ दे सकता है, परंतु कर्म उन परिस्थितियों का परिणाम बदलने की क्षमता रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवद्गीता का प्रसिद्ध संदेश है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,आज भी मनुष्य को निष्काम कर्म की प्रेरणा देता है। जब व्यक्ति कर्म को अपना धर्म मान लेता है और परिणामों की अत्यधिक चिंता से मुक्त होकर कार्य करता है, तब उसके भीतर निराशा की संभावनाएँ स्वतः कम होने लगती हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर वैश्विक मानवता के हित में सोचने की आदत विकसित करे। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का कुछ अंश समाज के लिए समर्पित कर दे, तो गरीबी, भेदभाव, हिंसा और असमानता जैसी अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही "वसुधैव कुटुम्बकम्" का वास्तविक स्वरूप है— जहाँ समस्त मानवता एक परिवार है और प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी है। जीवन की सफलता केवल लंबा जीवन जीने में नहीं, बल्कि उपयोगी जीवन जीने में है। यदि हमारा जीवन किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सके, किसी निराश मन में आशा जगा सके और समाज में सद्भाव, करुणा तथा मानवता के बीज बो सके, तभी हमारा जन्म सार्थक कहलाएगा। यही भारतीय संस्कृति का संदेश है, यही मानव जीवन का परम उद्देश्य है और यही "वसुधैव कुटुम्बकम्" की सच्ची साधना है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती को 'बेस से स्पेस’ अभियान को मिले नए पंख, महिलाओं एवं बच्चों के सपनों ने बढ़ाया समाजसेवी मनीष_मिश्रा_का_उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के बेलवा डाड़ी मोहल्ले में स्थित एक मैरेज हॉल में “बस्ती को बेस से स्पेस तक” अभियान के संस्थापक एवं समाजसेवी मनीष मिश्रा के सम्मान में समूह की बहनों द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं, बच्चे और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समारोह के दौरान शिक्षा, संस्कार और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब उपस्थित बच्चों में से एक बच्चे ने मंच से अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह बड़ा होकर स्पेस इंजीनियर बनना</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181949/basti-base-to-space-campaign-gets-new-wings-dreams-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0054.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के बेलवा डाड़ी मोहल्ले में स्थित एक मैरेज हॉल में “बस्ती को बेस से स्पेस तक” अभियान के संस्थापक एवं समाजसेवी मनीष मिश्रा के सम्मान में समूह की बहनों द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं, बच्चे और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समारोह के दौरान शिक्षा, संस्कार और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब उपस्थित बच्चों में से एक बच्चे ने मंच से अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह बड़ा होकर स्पेस इंजीनियर बनना चाहता है। बच्चे की यह बात सुनकर समाजसेवी मनीष मिश्रा भावुक हो उठे और उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे ही सपने किसी समाज और क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष मिश्रा ने कहा कि आज उन्हें महसूस हो रहा है कि उनकी पहल सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “सही मायने में आज मेरा हौसला और अधिक बढ़ गया है। जब छोटे बच्चे बड़े सपने देखने लगते हैं तो यह समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत होता है। यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में बस्ती में चारों वेदों के अध्ययन और शिक्षण के लिए विशेष संस्थानों की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान की धारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इसके माध्यम से ब्राह्मण समाज के युवा ज्ञान अर्जित कर देश और विदेश में अपनी सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और प्राचीन ज्ञान दोनों का संतुलन समाज के विकास के लिए आवश्यक है। भारत की प्राचीन संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं और नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना समय की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनीष मिश्रा ने कहा कि वह देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं से भी संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के संपर्क में हैं तथा बहुत जल्द क्षेत्र में एक नॉलेज सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र के माध्यम से बच्चों और युवाओं को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष से संबंधित नई जानकारियां और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उचित मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है। यदि बच्चों को संसाधन और सही दिशा मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आगामी रक्षाबंधन पर्व पर एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन की घोषणा की। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आने वाले समय में वशिष्ठ नगर “बेस से स्पेस” तक का सफर तय करेगा और यह क्षेत्र शिक्षा, विज्ञान तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:42:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181921/rashtriya-swayamsevak-sangh-organizes-huge-yoga-program-on-world-yoga"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग पद्धति को आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वभर के लोग भारतीय सनातन संस्कृति और उसकी परंपराओं को जानने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझने और अपनाने के लिए उत्सुक हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है और योग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हो रहा है। योग से तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक इस कार्य को कुशलतापूर्वक समाज तक पहुंचा रहे हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50.jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह जिला बौद्धिक प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">त्रियुगी नाथ</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संतोष</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सह नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामू</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाग सद्भाव संयोजक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुधीर</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तथा नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम में नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ने उपस्थित सभी आगंतुकों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:20:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैहर विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हुआ भव्य आयोजन, नव निर्मित स्टेज का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>चौपारण हजारीबाग झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चौपारण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत दैहर में उत्क्रमित उच्च विद्यालय दैहर परिसर में उत्साह एवं गरिमामय माहौल के बीच आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य, शिक्षकगण, प्रबुद्ध नागरिक, समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर योग के महत्व को समझा और स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन शिक्षक उपेन्द्र वर्मा ने किया। योग दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में नव निर्मित स्टेज एवं हैंडवॉश यूनिट का उद्घाटन पंचायत के मुखिया ब्रमदेव भुइयाँ द्वारा किया गया। उद्घाटन के बाद उपस्थित लोगों ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181908/grand-event-organized-on-international-yoga-day-in-daihar-vidyalaya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>चौपारण हजारीबाग झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चौपारण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत दैहर में उत्क्रमित उच्च विद्यालय दैहर परिसर में उत्साह एवं गरिमामय माहौल के बीच आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य, शिक्षकगण, प्रबुद्ध नागरिक, समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर योग के महत्व को समझा और स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन शिक्षक उपेन्द्र वर्मा ने किया। योग दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में नव निर्मित स्टेज एवं हैंडवॉश यूनिट का उद्घाटन पंचायत के मुखिया ब्रमदेव भुइयाँ द्वारा किया गया। उद्घाटन के बाद उपस्थित लोगों ने विद्यालय में विकसित की गई नई सुविधाओं की सराहना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान योगाभ्यास कराया गया तथा योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुखिया प्रतिनिधि नागेंद्र कुमार ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी लोगों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है तथा एक जिम्मेदार और स्वस्थ नागरिक बन सकता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और राष्ट्रीय भावना का माहौल देखने को मिला।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:51:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरिजन करमा में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>चौपारण हजारीबाग झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  चौपारण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर करमा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरिजन करमा परिसर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योगाभ्यास किया तथा स्वस्थ और निरोग जीवन जीने का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य रूप से करमा पंचायत की मुखिया देवंती देवी, विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेश भुइयां तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र दास उपस्थित रहे। योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181906/international-yoga-day-celebrated-in-upgraded-middle-school-harijan-karma"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>चौपारण हजारीबाग झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> चौपारण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर करमा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरिजन करमा परिसर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योगाभ्यास किया तथा स्वस्थ और निरोग जीवन जीने का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य रूप से करमा पंचायत की मुखिया देवंती देवी, विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेश भुइयां तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र दास उपस्थित रहे। योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। इस दौरान योग के महत्व और इसके शारीरिक एवं मानसिक लाभों की जानकारी भी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव ने कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत एवं आत्मिक रूप से संतुलित रहता है। उन्होंने सभी लोगों से अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुखिया देवंती देवी ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है। वर्तमान समय में बढ़ती बीमारियों और तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच योग लोगों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। उन्होंने पंचायत के लोगों से नियमित योग करने का आग्रह किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाध्यापक सुरेंद्र दास ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। योग से एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है तथा शारीरिक क्षमता का विकास होता है। विद्यालय में समय-समय पर योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने नियमित योग करने तथा अपने परिवार एवं समाज को भी योग के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, ऊर्जा और स्वास्थ्य जागरूकता से परिपूर्ण रहा।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181906/international-yoga-day-celebrated-in-upgraded-middle-school-harijan-karma</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्वर्णिम व मंगलमयी प्रभात बेला में योग शिक्षक सुनील कुमार भगत ने कराया योगाभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">21 जून को 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के स्वर्णिम शुभ अवसर पर प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया स्थित राजकीय कृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में स्वास्थ्य, संस्कृति एवं सौम्य-दिव्य भारतीय सभ्यता के अपूर्व संगम तथा सुखमय जीवन शैली के मूलाधार योग का अभ्यास कराया गया। योग शिक्षक सुनील कुमार भगत ने उपस्थित लोगों को प्रतिदिन योगाभ्यास कर विकार रहित जीवन जीने की प्रेरणा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">इस शुभ अवसर पर सुबह ठीक 7 बजे सूर्य की सप्त किरणों के बीच सुनील ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पावन वेला में उपस्थित सभी शिक्षकवृंद, थाना प्रभारी मनोज महतो, एएसआई महादेव चौधरी, पुलिस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181891/6a38eb86403ac"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-3-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">21 जून को 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के स्वर्णिम शुभ अवसर पर प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया स्थित राजकीय कृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में स्वास्थ्य, संस्कृति एवं सौम्य-दिव्य भारतीय सभ्यता के अपूर्व संगम तथा सुखमय जीवन शैली के मूलाधार योग का अभ्यास कराया गया। योग शिक्षक सुनील कुमार भगत ने उपस्थित लोगों को प्रतिदिन योगाभ्यास कर विकार रहित जीवन जीने की प्रेरणा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">इस शुभ अवसर पर सुबह ठीक 7 बजे सूर्य की सप्त किरणों के बीच सुनील ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पावन वेला में उपस्थित सभी शिक्षकवृंद, थाना प्रभारी मनोज महतो, एएसआई महादेव चौधरी, पुलिस स्टाफ, छात्र-छात्राओं तथा बड़ी संख्या में उपस्थित सरकारी कर्मियों, युवाओं एवं ग्रामीणों को सप्रेम नमन करते हुए बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा सफल जीवन की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   योग दिवस पर सुनील जी ने ताड़ासन, वज्रासन, नौकासन, नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम), भस्त्रिका, कपालभाति सहित अन्य कई प्रकार के आसन एवं प्राणायाम का अत्यंत मनोरम अभ्यास कराया। साथ ही योग की महत्ता एवं विशिष्टता पर सरल और प्रभावशाली शैली में प्रकाश डालते हुए लोगों को प्रतिदिन स्वच्छ स्थान पर योगाभ्यास करने तथा अपने जीवन को रोगमुक्त, सुखमय, प्रफुल्लित और तनावमुक्त बनाने की प्रेरणा दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   इस अवसर पर योग शिक्षक सुनील कुमार ने ब्रह्माण्ड के मूलाधार नाद ‘ॐ’ का ध्यान एवं अट्टहास योग भी कराया। अंत में 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का शुभ समापन सभी को बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं देकर किया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:32:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर मंडरो प्रखंड परिसर में योग शिविर आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहेबगंज, झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को मंडरो प्रखंड-सह-अंचल परिसर में योग शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उपायुक्त, साहेबगंज के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसमें प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के पदाधिकारियों, कर्मियों तथा स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार उपायुक्त, साहेबगंज के आदेश के आलोक में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के सफल आयोजन को लेकर सुबह 6 बजे से 8 बजे तक योग शिविर आयोजित किया गया। शिविर में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कर योग के महत्व को समझा तथा नियमित योग करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181889/yoga-camp-organized-in-mandro-block-campus-on-international-yoga"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-2-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहेबगंज, झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को मंडरो प्रखंड-सह-अंचल परिसर में योग शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उपायुक्त, साहेबगंज के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसमें प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के पदाधिकारियों, कर्मियों तथा स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार उपायुक्त, साहेबगंज के आदेश के आलोक में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के सफल आयोजन को लेकर सुबह 6 बजे से 8 बजे तक योग शिविर आयोजित किया गया। शिविर में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कर योग के महत्व को समझा तथा नियमित योग करने का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बीपीओ अभिषेक आनंद, आवास कोऑर्डिनेटर ओम कुमार झा, कंप्यूटर ऑपरेटर आशित कुमार,सुमन कुमार , नजीर, ग्रामीण पुलिस सुधीर कुमार एवं समाजसेवी जय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीपीओ अभिषेक आनंद ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का समापन स्वस्थ जीवन और निरोगी समाज के संदेश के साथ हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:29:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया की नजरों में मुस्कुराती, भीतर पिता से ताकत लेती बेटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष बाहर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर शुरू होता है—जहाँ निर्णयों की भीड़ में आत्मविश्वास मौन हो जाता है और रिश्तों की अपेक्षाएँ मन पर दबाव बनकर धीरे-धीरे कसने लगती हैं। विवाह के बाद स्त्री-जीवन में यह भार और गहरा हो जाता है—कभी शब्दों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मौन में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी जिम्मेदारियों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी “समझदारी” की कठोर परिभाषाओं में। बाहर से सब सामान्य लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भीतर हर दिन एक नई परीक्षा जैसा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रश्नपत्र बदलता रहता है और उत्तर पहले से तय मान लिए जाते</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181465/smiling-daughter-in-the-eyes-of-the-world-taking-strength"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष बाहर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर शुरू होता है—जहाँ निर्णयों की भीड़ में आत्मविश्वास मौन हो जाता है और रिश्तों की अपेक्षाएँ मन पर दबाव बनकर धीरे-धीरे कसने लगती हैं। विवाह के बाद स्त्री-जीवन में यह भार और गहरा हो जाता है—कभी शब्दों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मौन में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी जिम्मेदारियों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी “समझदारी” की कठोर परिभाषाओं में। बाहर से सब सामान्य लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भीतर हर दिन एक नई परीक्षा जैसा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रश्नपत्र बदलता रहता है और उत्तर पहले से तय मान लिए जाते हैं। ऐसे में अपनी इच्छाओं और दूसरों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना भी एक निरंतर संघर्ष बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पिता का अदृश्य सहारा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे समय में सबसे बड़ा सहारा कोई सामने खड़ा व्यक्ति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर बसा वह अदृश्य संस्कार होता है जो पिता ने बिना औपचारिक उपदेश के अपने आचरण से दिया होता है। उनके शब्द जीवन गढ़ने वाले सूत्र थे—“धैर्य रखो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब अच्छा होगा</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">अपने मन की राह पर अडिग रहो</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म ही पहचान है</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">सहनशीलता को ताकत बनाओ</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वर पर विश्वास रखो</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ों का सम्मान और छोटों से स्नेह रखो</span>,” “<span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य और ईमानदारी थामे रहो</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">और “कठिन समय में हिम्मत मत छोड़ो।” विवाह के बाद जब जीवन जिम्मेदारियों और संघर्षों से भरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यही सूत्र भीतर से उठकर व्यक्ति को स्थिर रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही निर्णय की शक्ति देते हैं और कठिन मोड़ों पर टूटने से बचाकर आगे बढ़ने का साहस देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान का कवच</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाह के बाद स्त्री के सामने सबसे बड़ा संघर्ष केवल बदलती परिस्थितियों का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी पहचान को बनाए रखने का होता है—अनेक भूमिकाओं और अपेक्षाओं के बीच स्वयं को पीछे छूटने से बचाने का। ऐसे समय में पिता की शिक्षा एक अदृश्य कवच बनकर साथ रहती है। जब निर्णय भावनाओं में उलझता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनकी सिखाई तर्कशीलता मार्ग दिखाती है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जब रिश्ता दबाव बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनके संस्कारों से उपजा आत्मसम्मान दृढ़ करता है। यह कोई बाहरी सहारा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर का अनुशासन और चेतना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन में संतुलन की सीख</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गृहस्थ जीवन की सबसे कठिन परीक्षा संघर्ष नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संतुलन है—सपनों और जिम्मेदारियों के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौन और अभिव्यक्ति के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य और प्रतिरोध के बीच। ऐसे में पिता की सीख केवल मार्गदर्शन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर का संतुलन बन जाती है। उन्होंने सिखाया कि झुकना कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर टूटना स्वीकार्य नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौता जीवन का हिस्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर आत्मसम्मान कभी समझौते की वस्तु नहीं बन सकता। यही दृष्टि विवाह में स्त्री को केवल रिश्ते निभाने वाली नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयं को अक्षुण्ण रखने वाली शक्ति देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मौन में पिता की स्मृति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कई बार जीवन ऐसे मोड़ पर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ रिश्तों में शब्द बोझ बन जाते हैं और मौन और भारी हो जाता है। ऐसे क्षणों में पिता की स्मृति सहारे की तरह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर गूँजती शांत चेतना की तरह होती है—जो याद दिलाती है कि हर प्रतिक्रिया आवश्यक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हर निर्णय विवेकपूर्ण होना चाहिए। तब वह बेटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब पत्नी बन चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भीतर उस परिचित स्वर को फिर सुनती है—“सब कुछ बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सबसे पहले स्वयं को मत खोना।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता का जीवन-सूत्र</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सामाजिक अपेक्षाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक दायित्व और व्यक्तिगत आकांक्षाएँ एक साथ सामने खड़ी हो जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब जीवन मानो तीन दिशाओं में खिंचते हुए संघर्ष का रूप ले लेता है। ऐसे समय में पिता की शिक्षा सबसे गहरी भूमिका निभाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वह केवल भावनाओं को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विचारों को भी स्थिरता प्रदान करती है। पिता ने यह नहीं सिखाया होता कि कठिनाइयों में टूट पड़ना या हार मान लेना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह कि कठिनाइयों के बीच भी स्वयं को समझना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचानना और अपने भीतर की आवाज़ को सुनना कभी नहीं छोड़ना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षाओं की पूर्व-तैयारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय के साथ यह गहराई से समझ आने लगता है कि पिता केवल एक व्यक्ति नहीं थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे जीवन की हर अनदेखी परीक्षा के लिए की गई एक तैयारी थे। विवाह के बाद जब परिस्थितियाँ नए प्रश्न और नई चुनौतियाँ सामने रखती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनकी सीखें किसी पुस्तक के पन्नों की तरह नहीं खुलतीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर की चेतना बनकर सक्रिय हो उठती हैं। हर कठिन निर्णय के क्षण में उनका कोई वाक्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई दृष्टिकोण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई मूल्य या फिर उनका मौन ही अदृश्य शक्ति बनकर साथ खड़ा दिखाई देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुपस्थिति में उपस्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धीरे-धीरे यह बोध और गहरा होता जाता है कि पिता भले ही इस दुनिया में नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उनकी सबसे सशक्त उपस्थिति उनकी अनुपस्थिति में ही जीवित है। वे अब केवल एक आवाज़ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विवेक बन चुके हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे अब सलाह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि निर्णयों की स्पष्टता हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे अब साथ चलने वाले व्यक्ति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर का आत्मबल हैं। विवाह के संघर्षों में जब परिस्थितियाँ और लोग समझौतों की सीमाएँ बढ़ाने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब पिता की सीख भीतर एक अंतिम मर्यादा-रेखा खींच देती है—जिसके आगे आत्मसम्मान कभी मौन नहीं रहता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय के साथ यह स्पष्ट हो जाता है कि पिता केवल एक संबंध नहीं थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन की अदृश्य रीढ़ थे। उनके बिना भी जीवन आगे बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उनके संस्कार हर कठिन मोड़ पर संभाल लेते हैं और गिरने नहीं देते। चाहे संघर्ष कितने भी जटिल हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिता की सीख यही दृढ़ता देती है— टूट जाना कोई विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्वयं को खो देना किसी भी समस्या का समाधान नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही उनकी सबसे गहरी विरासत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आँसुओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साहस और आत्मबल बनकर जीवनभर साथ रहती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:59:00 +0530</pubDate>
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