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                <title>Foreign Policy India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Foreign Policy India RSS Feed</description>
                
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                <title>सम्मान नहीं, रणनीतिक विश्वास की मुहर है 'बिंतांग आदिपूर्णा'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीति की असली ताकत हाथ मिलाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औपचारिक स्वागत या साझा तस्वीरों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस विश्वास में दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कोई राष्ट्र अपने सर्वोच्च सम्मान के जरिए सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से सम्मानित किया जाना ऐसा ही ऐतिहासिक क्षण था। फाइटर जेट्स की सलामी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के आत्मीय स्वागत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल साझा सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182975/6a4e60873e464"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीति की असली ताकत हाथ मिलाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औपचारिक स्वागत या साझा तस्वीरों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस विश्वास में दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कोई राष्ट्र अपने सर्वोच्च सम्मान के जरिए सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से सम्मानित किया जाना ऐसा ही ऐतिहासिक क्षण था। फाइटर जेट्स की सलामी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के आत्मीय स्वागत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल साझा सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साझा भविष्य और क्षेत्रीय जिम्मेदारियों की नई साझेदारी का प्रतीक है। सदियों पुरानी मित्रता अब रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे नए आधारों पर कहीं अधिक सशक्त होकर उभर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वीकार करते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों के नाम कर दिया। यही उस सम्मान का सबसे बड़ा अर्थ भी था। स्वतंत्र भारत में जवाहरलाल नेहरू (</span>1995 <span lang="hi" xml:lang="hi">में मरणोपरांत</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद वे दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। वर्ष </span>1959 <span lang="hi" xml:lang="hi">में स्थापित यह अलंकरण उन व्यक्तित्वों को दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इंडोनेशिया की एकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता और समृद्धि में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। किसी विदेशी नेता का इससे सम्मानित होना भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वसनीय नेतृत्व और दोनों देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक विश्वास का प्रमाण है। गणतंत्र दिवस </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के बाद हुआ यह जवाबी दौरा भी स्पष्ट करता है कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब केवल औपचारिक कूटनीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परिणाम देने वाली रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा सहयोग रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक ऊंचाई दी। दोनों देशों के बीच हुए </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौतों में रक्षा क्षेत्र सबसे अहम रहा। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियों की खरीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े समझौते और संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं ने साबित कर दिया कि भारत अब केवल हथियार आयातक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वसनीय रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदार बन चुका है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में एस्ट्रा मिसाइल के युद्ध-प्रमाणित प्रदर्शन ने इंडोनेशिया का भरोसा और मजबूत किया। फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया का ब्रह्मोस से जुड़ना भारत के रक्षा निर्यात के लिए एक और बड़ी उपलब्धि होगी। ये समझौते केवल हथियारों के सौदे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंद-प्रशांत की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक संतुलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और मजबूत बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक दृष्टि से साबांग पोर्ट का संयुक्त विकास इस यात्रा की सबसे दूरगामी उपलब्धियों में है। मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार का अहम केंद्र है और ग्रेट निकोबार परियोजना से इसकी निकटता भारत के लिए इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इससे समुद्री सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपदा प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नौवहन और व्यापारिक लॉजिस्टिक्स में दोनों देशों की क्षमता मजबूत होगी। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश पर सहमति भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक कदम है। दुनिया के सबसे बड़े निकल उत्पादक इंडोनेशिया और ईवी व नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते भारत की यह साझेदारी चीन-निर्भर आपूर्ति श्रृंखला का प्रभावी विकल्प बन सकती है। यही सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की मजबूत बुनियाद भी रखेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल सहयोग ने इस यात्रा को भविष्य की शासन व्यवस्था से जोड़ दिया। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता इस दौरे में भी साफ दिखाई दी। यूपीआई के विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडोनेशिया के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और आईआईएम बेंगलुरु के साथ प्रबंधन व प्रशासनिक क्षमता निर्माण पर हुए समझौते आधुनिक सुशासन की नई दिशा दिखाते हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसरो-बीआरआईएन के बीच अंतरिक्ष सहयोग तथा कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े समझौते बताते हैं कि भारत-इंडोनेशिया संबंध अब पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान और मानव संसाधन विकास पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका लाभ आने वाले वर्षों में दोनों देशों को मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हिंद-प्रशांत आज रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रमुख केंद्र है। ऐसे दौर में स्वतंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत के प्रति भारत और इंडोनेशिया का साझा संकल्प पूरे क्षेत्र को स्थिरता का सकारात्मक संदेश देता है। रक्षा सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े समझौते इस दृष्टि को ठोस आधार देते हैं। लगभग </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित और व्यापक बनाने की दिशा में भी यह यात्रा महत्वपूर्ण साबित होगी। आर्थिक सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने वाले समझौते दोनों देशों के लिए नए अवसरों के साथ एशिया में संतुलित और टिकाऊ विकास की संभावनाओं को भी सुदृढ़ करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह यात्रा केवल एक सफल राजनयिक दौरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्ट ईस्ट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">महासागर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">दृष्टि को नई दिशा देने वाला निर्णायक पड़ाव है। रामायण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रंबनन मंदिर और साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक रिश्ते अब रक्षा प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अवसंरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग और आर्थिक लचीलेपन की आधुनिक साझेदारी में बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने साबित किया कि दूरदर्शी कूटनीति केवल वर्तमान की चुनौतियों का समाधान नहीं करती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य की संभावनाओं की भी मजबूत नींव रखती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिंतांग आदिपूर्णा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">महज़ एक सम्मान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस अटूट विश्वास का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले दशकों की नई साझेदारी गढ़ रहे हैं। यह रिश्ता अब केवल भावनात्मक निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साझा हितों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक भरोसे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त क्षमताओं और क्षेत्रीय उत्तरदायित्व पर आधारित है। यही साझेदारी दोनों देशों को एशिया ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक मंच पर भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:17:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>क्या पुतिन ने एक वाक्य में बदलती दुनिया का सच कह दिया?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/_113223674_gettyimages-1223723529.jpg.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए भारत पर पश्चिमी दबाव को “निष्फल और प्रतिकूल” बताया। यह केवल मित्रता की प्रशंसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व की स्वीकारोक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शब्द अक्सर परिस्थितियों का आईना होते हैं। पुतिन की भारत-प्रशंसा को भी इसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पश्चिमी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भारत उन विरले देशों में रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस से संबंध बनाए रखे। न उसने किसी दबाव के आगे झुकना स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अपनी विदेश नीति का मार्ग बदला। पुतिन भलीभांति समझते हैं कि भारत जैसा मित्र केवल आर्थिक सहयोगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीतिक संबल भी है। इसलिए उनका यह बयान प्रशंसा से अधिक उस विश्वास की अभिव्यक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर रूस भविष्य की अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार देखता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन के बयान का एक संभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संकेत चीन की ओर भी है। रूस और चीन भले ही अटूट साझेदारी का दावा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके संबंधों में रणनीतिक सतर्कता बनी रहती है। चीन की बढ़ती आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी और सैन्य शक्ति ने एशिया का शक्ति-संतुलन बदल दिया है। मॉस्को समझता है कि बीजिंग पर अत्यधिक निर्भरता उसकी स्वतंत्र भूमिका को सीमित कर सकती है। ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंध उसे संतुलन देते हैं। यही कारण है कि पुतिन ने ब्रह्मोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी साझेदारी का विशेष उल्लेख किया। इसे मुख्य रूप से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन के विरुद्ध संदेश न मानकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एशिया में शक्ति-संतुलन साधने की रूस की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान उसकी स्वतंत्रता है। यही कारण है कि रूस के राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्लादिमीर पुतिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत पर पड़ रहे अमेरिकी दबाव के बीच उसकी नीति की सराहना की। अमेरिका लंबे समय से रूस से जुड़े ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर भारत को अपने अधिक निकट लाने का प्रयास करता रहा है। इसके बावजूद नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों से संचालित होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी बाहरी दबाव से नहीं। पुतिन ने इसी आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत जैसे उभरते राष्ट्र पर दबाव डालना उलटा पड़ सकता है। उनका संदेश केवल वाशिंगटन के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के लिए था कि भारत अब अपनी राह स्वयं तय करने वाली शक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक शक्ति उसका संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण है। भारत एक ओर रूस से ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उपकरण और सामरिक सहयोग प्राप्त कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यापारिक संबंध भी बने हुए हैं। यही संतुलन भारत को वैश्विक राजनीति में अलग पहचान देता है। पुतिन ने मोदी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों और तेज विकास दर की सराहना करते हुए संकेत दिया कि भारत अब किसी शक्ति-गुट का अनुसरण करने वाला देश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्व राजनीति का एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति केंद्र बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत-रूस संबंध अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी नई मजबूती हासिल कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष </span>2024-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दोनों देशों का व्यापार लगभग </span>68.7 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें रूसी तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और कोयले की प्रमुख भूमिका रही। पुतिन द्वारा </span>100 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य का उल्लेख इस बात का संकेत है कि रूस भारत को केवल मित्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार मानता है। ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उत्पादन और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को अपने विकास का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रता जितनी गहरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी चुनौतियां भी उतनी ही वास्तविक होती हैं। भारत-रूस संबंधों के सामने भी व्यापार असंतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुगतान व्यवस्था की बाधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा खरीद में भारत की नई प्राथमिकताएं और रूस-चीन की बढ़ती निकटता जैसे प्रश्न मौजूद हैं। इसलिए पुतिन ने भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों का स्वागत किया। यह केवल एक टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूस का यह संदेश था कि वह एशिया में स्थिरता और संतुलन का पक्षधर है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह यह भरोसा भी दिलाना चाहता है कि चीन से उसके संबंध भारत के हितों की कीमत पर नहीं हैं। भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसकी विदेश नीति का आधार केवल राष्ट्रीय हित हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व राजनीति में कुछ वक्तव्य तत्कालीन घटनाओं से आगे जाकर भविष्य की दिशा भी बताते हैं। पुतिन का भारत को “भरोसेमंद साझेदार” कहना ऐसा ही संकेत है। यह केवल भारत-रूस संबंधों की निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आकार ले रही नई वैश्विक व्यवस्था की झलक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एकध्रुवीय प्रभुत्व का दौर पीछे छूट रहा है और नई शक्तियां उभर रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिक्स का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक दक्षिण का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका इसी परिवर्तन के संकेत हैं। रूस का यह सार्वजनिक विश्वास एक स्पष्ट संदेश देता है—भारत अब किसी समीकरण का हिस्सा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयं एक निर्णायक समीकरण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>शंकराचार्य के अपमान से बुद्धिजीवी लोग भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं - अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि पूजनीय शंकराचार्य जी का जबसे अपमान हुआ है, बहुत सारे बुद्धिजीवी लोग भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं, उस दिशा में कोई भी हमारा साथ देगा तो हम लोग उसका साथ देंगे। अखिलेश यादव आज कानपुर के नौबस्ता गल्ला मंडी में स्व. रंजन सिंह यादव उर्फ लाला पहलवान के यहां श्रद्धांजलि एवं शोक संवेदना प्रकट करने आए थे।</p>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने पत्रकारों से कहा कि जैसे बीबीसी संस्था चलती है वैसे पत्रकारों की संस्था बनाने का काम करेंगे जिले जिले में, जिससे आप किसी पर निर्भर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175528/intellectuals-want-to-teach-a-lesson-to-bjp-by-insulting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001810442.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि पूजनीय शंकराचार्य जी का जबसे अपमान हुआ है, बहुत सारे बुद्धिजीवी लोग भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं, उस दिशा में कोई भी हमारा साथ देगा तो हम लोग उसका साथ देंगे। अखिलेश यादव आज कानपुर के नौबस्ता गल्ला मंडी में स्व. रंजन सिंह यादव उर्फ लाला पहलवान के यहां श्रद्धांजलि एवं शोक संवेदना प्रकट करने आए थे।</p>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने पत्रकारों से कहा कि जैसे बीबीसी संस्था चलती है वैसे पत्रकारों की संस्था बनाने का काम करेंगे जिले जिले में, जिससे आप किसी पर निर्भर न हो, आप स्वतंत्र रहो। उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री जी अपने ही संसद का मजाक उड़ा रहे हैं। अभी तक तो पता था कि वनस्पति से स्ट्रेस हटाते हैं लेकिन अब पता चला उनके सांसद ही उनका स्ट्रेस दूर करते हैं।"</div>
<div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन रहित होगा तो न्याय होगा। इलेक्शन कमिशन भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है। कानपुर के किडनी कांड पर चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि"अभी कुछ दिन पहले कोडीन भाई आए थे कालीन भाई के बाद, अब सुनने में आया है किडनी भाई। कहीं ऐसा न हो ओटीटी पर गांजा गंज भी बन जाए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमारी विदेश नीति चौपट कर दी है। एक बार को लग रहा था भारत विश्व गुरु होगा लेकिन इधर पाकिस्तान अपनी फॉरेन पॉलिसी को मजबूत कर रहा है।"जो जोश और उत्साह दिखाई दे रहा है यह बता रहा है कि जनता बदलाव चाहती है। बदलाव के साथ-साथ बुरे दिन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि"गरीब को न ही इलाज मिल रहा है न समय पर इलाज मिल रहा है, उसका परिणाम है कि उन्हें दर दर भटकना पड़ रहा है। समाजवादी सरकार आएगी तो उनका फ्री इलाज होगा।"PDA से घबराकर बीजेपी वालों को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">PDA के लोग एकजुट हो गए हैं, अधिकार और सम्मान मांग रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि बाबा साहब की प्रतिमाओं को सबसे ज्यादा किसी ने तोड़ा तो बीजेपी ने।"PDA प्रहरी ने एक व्यक्ति पकड़ा जिसका वोट बीजेपी के लोग कटवा रहे थे। बीजेपी के लोगों ने दस्तखत न करने वाले से नकली दस्तखत करवाए, लेकिन इलेक्शन कमीशन ने कोई भी कार्रवाई नहीं करी।"शिक्षामित्रों को कोई भी न्याय दिला सकता है तो समाजवादी लोग हैं।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में जो फिल्म बनी थी एक वो रिलीज होने से पहले ही फ्लॉप हो गई। अब एक नए किरदार आए हैं धुआं-धर, हर दिन उत्तर प्रदेश में गांजा पकड़ा जा रहा है। सड़कों पर गड्ढों पर चर्चा करते हुए अखिलेश ने कहा कि"जब मुख्यमंत्री जी खुद ही इंजीनियर बन जाएंगे, जब सरकार ही कमीशन लेगी तो सड़क की गुणवत्ता कैसे रहेगी।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 19:15:54 +0530</pubDate>
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