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                <title>Kharif Season - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Kharif Season RSS Feed</description>
                
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                <title>राजकीय नलकूप बेपानी,कैसे हो किसानी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> इस समय धान की रोपाई अपने चरम सीमा पर है। क्षेत्र में लगाए गए तिरसठ राजकीय नलकूप बेपानी हो गए हैं। कुछ  नलकूपों को छोड़ दिया जाए।तो सब के सब किन्हीं न किन्हीं कारणों से बेकार पड़े हैं। जबकि जिम्मेदार लोगों को उक्त नलकूपों की दशा ठीक कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई दे रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थनगर जनपद का पूर्वी छोर जो महराजगंज की सीमा से सटा है।  दोआबा  क्षेत्र के पिछड़े पन को दूर करने के लिए  तिरसठ राजकीय नलकूप लगवाए गए थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिससे किसानों को खेती, किसानी में पानी की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182969/government-tube-well-without-water-how-should-farmers-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1783519412710.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> इस समय धान की रोपाई अपने चरम सीमा पर है। क्षेत्र में लगाए गए तिरसठ राजकीय नलकूप बेपानी हो गए हैं। कुछ  नलकूपों को छोड़ दिया जाए।तो सब के सब किन्हीं न किन्हीं कारणों से बेकार पड़े हैं। जबकि जिम्मेदार लोगों को उक्त नलकूपों की दशा ठीक कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई दे रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थनगर जनपद का पूर्वी छोर जो महराजगंज की सीमा से सटा है।  दोआबा  क्षेत्र के पिछड़े पन को दूर करने के लिए  तिरसठ राजकीय नलकूप लगवाए गए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिससे किसानों को खेती, किसानी में पानी की किल्लत न हो। लेकिन वर्तमान समय में उक्त नलकूपों से कोई लाभ आम किसानों को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है।जिस समय नलकूप लगाए जा रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उस समय किसानों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोगों को लगा कि अब तो हर खेत को पानी मिलता रहेगा।इसके साथ ही क्षेत्र के तमाम लोगों को ट्यूबवेल आपरेटर के रूप में नौकरी भी मिल गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिससे उनके परिवार में अत्यधिक खुशी बनी रही। लोगों की मानें तो लगभग एक दशक तक किसानों को पानी मिलता रहा।इसके बाद धीरे-धीरे नलकूपों की दशा खराब होती गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1997 में  प्रदेश सरकार ने सभी  ट्यूबल आपरेटरों को विकास विभाग में जोड़ दिया। लिहाजा ट्यूबवेल की दशा अब और खराब होने लगी। हालांकि एक पंचवर्षीय के बाद पुनः सभी आपरेटर्स को उनके मूल तैनाती वाले ट्यूबवेल पर लगा दिया गया।तब,तक बहुत देर हो चुकी थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रखरखाव के अभाव में पाइप लाइनों में रिसाव,टूटे,फूटे आवलेट, बिजली तार,पोल एंव ट्रांसफार्मर कुछ को छोड़ सब बेकार हो गए थे।किसी पानी के लिए परेशान होकर निजी पम्प सेट पर आश्रित होने लगे। जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी भी कई बार क्षेत्रीय लोगों ने दिया। लेकिन आज तक उसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब,जब खरीफ एवं रबी सीजन में खेती,किसानी करनी होती है।तो किसानों को अपने निजी पम्प सेट का ही सहारा है।जोकि इस भीषण मंहगाई में किसानों के लिए समस्या बनी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रीय रामचरन मौर्य, गोपाल वर्मा, धनीराम, कृष्ण कुमार, रामरेखा,पियारे,ठग्गंन, सिपाही, रामप्रसाद,कोमल, द्वारिका,मेढ़ई,कदम, जाकिर आदि लोगों ने जिम्मेदार लोगों से क्षेत्र में लगे राजकीय नलकूप की दशा ठीक कराने की मांग की है। जिससे किसानों को खेती, किसानी में पानी का अभाव न हो।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 19:45:16 +0530</pubDate>
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                <title>खरीफ मौसम में उर्वरक की कालाबाजारी एवं अन्य उत्पादों की टैगिंग पर होगी कड़ी कार्यवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया है कि जनपद में आगामी खरीफ मौसम में किसान किसी भी प्रकार की कमी की आशंका से घबराकर अभी से यूरिया, डीएपी, पोटाश आदि उर्वरक का पूर्व-संचय या स्टाक न करें। प्रशासन द्वारा समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना शासन एवं कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सभी उर्वरक विक्रेता सुनिश्चित करेंगे कि कृषकों को उनकी खतौनी के अनुरूप ही उर्वरक का वितरण किया जाए। बिना खतौनी अथवा कम दस्तावेज पर अधिक उर्वरक देना प्रतिबंधित रहेगा। उर्वरकों का विक्रय निर्धारित दरों पर ही किया जाए तथा किसी भी दशा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175526/strict-action-will-be-taken-against-black-marketing-of-fertilizers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/47.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया है कि जनपद में आगामी खरीफ मौसम में किसान किसी भी प्रकार की कमी की आशंका से घबराकर अभी से यूरिया, डीएपी, पोटाश आदि उर्वरक का पूर्व-संचय या स्टाक न करें। प्रशासन द्वारा समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना शासन एवं कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सभी उर्वरक विक्रेता सुनिश्चित करेंगे कि कृषकों को उनकी खतौनी के अनुरूप ही उर्वरक का वितरण किया जाए। बिना खतौनी अथवा कम दस्तावेज पर अधिक उर्वरक देना प्रतिबंधित रहेगा। उर्वरकों का विक्रय निर्धारित दरों पर ही किया जाए तथा किसी भी दशा में उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग न की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने जनपद के सभी उर्वरक विक्रेताओ को निर्देशित किया है कि प्रत्येक विक्रेता को अपने दुकान पर स्पष्ट रूप से रेट बोर्ड तथा स्टॉक बोर्ड अवश्य लगाना होगा। आने वाले उर्वरकों की मात्रा तथा उसका विवरण स्टॉक रजिस्टर में लगातार एवं नियमित रूप से दर्ज करना अनिवार्य होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उर्वरकों की विक्री वितरण के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग, ओवर रेटिंग कालाबाजारी तथा तस्करी करते हुए जो भी विक्रेता पाया जाएगा के विस्द्ध उर्वरक अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्नित नियंन्त्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में निहित प्रविधानों के अन्तर्गत कठोर कार्यवाही की जाएगा। उर्वरकों की विक्री निर्धारित दर से अधिक दर पर करने अथवा यूरिया व अन्य उर्वरकों के साथ जबरन अन्य उत्पादों की टैगिंग दुकानदार द्वारा की जाने की स्थिति में इसकी लिखित सूचना जिला कृषि अधिकारी कार्यालय अथवा दूरभाष नं-7839882339 एवं 9793096573 पर दर्ज करा सकते है,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिससे संबन्धित विक्रेता के विस्द दंडात्मक विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।उन्होने किसानों से अपील किया है कि वे खरीफ सीजन की फसलों की आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरक खरीदें। खरीदते समय बिल अवश्य लें। यदि आपको किसी उर्वरक की गुणवत्ता पर संदेह है, तो तुरंत नजदीकी कृषि कर्मचारी या जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में इसकी सूचना दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 19:11:49 +0530</pubDate>
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